मनमर्जियाँ – 75

Manmarjiyan – 75 मनमर्जियाँ – 75 शगुन वेदी को समझा बुझाकर घर ले आयी लेकिन मन ही मन बहुत परेशान भी थी रमेश की वजह से , उसे समझ नहीं आ रहा था की वह गुड्डू को इन सब बातो के...

मनमर्जियाँ – 74

Manmarjiyan – 74 मनमर्जियाँ – 74 गुड्डू शगुन को लेकर मार्किट पहुंचा। थोड़े सूखे और थोड़े भीगे हुए गुड्डू शगुन दुकान के अंदर आये। शगुन ने देखा ये एक आर्टिफिशियल ज्वैलरी शॉप था। दुकान का मालिक गुड्डू को जानता था इसलिए...

मनमर्जियाँ – 73

Manmarjiyan – 73 मनमर्जियाँ – 73 शुक्ला जी ने जो व्यवहार गुड्डू के साथ किया वो कही ना कही मिश्रा जी को पसंद नहीं आया और उन्होंने शुक्ला जी को अकेले में बुलाकर खूब लताड़ा। उनकी बातो से साफ़ दिखाई दे...

“तेरे शहर में”

Tere shahar me आख़िरकार हाथ जोड़कर पैर पड़कर मैंने घरवालों से अपनी दोस्त के शहर जाकर उस से मिलने की परमिशन ले ही ली ! ‘कोमल गुप्ता’ मेरी दोस्त जो की दूसरे शहर नहीं बल्कि दूसरे राज्य से है – कानपूर...

मनमर्जियाँ – 72

Manmarjiyan – 72 मनमर्जियाँ – 72 गोलू ने पिंकी को अच्छा सबक सिखाया और वहा से भगा दिया , लेकिन पिंकी ने गोलू के होंठ को काट खाया जिसका मीठा मीठा दर्द गोलू को हो रहा था। आज से पहले किसी...
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