Pasandida Aurat Season 3 – 61

Pasandida Aurat Season 3 – 61

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी जो अब तक खामोश बैठा था उसने शांत स्वर में कहा,”मैंने मौर्या ग्रुप से रिजाइन नहीं दिया है , मैं आज भी जयदीप मौर्या के लिए ही काम कर रहा हूँ”

पृथ्वी की बात सुनकर सब हैरानी से उसे देखने लगे। पृथ्वी अपनी कुर्सी से उठा और नीलेश से बैठने का इशारा किया। वह अपनी जगह से हटकर सामने दिवार पर लगी स्क्रीन के पास चला आया। उसने लेपटॉप ऑन किया और अपने जेब से एक पेन ड्राइव निकालकर  लेपटॉप में लगा दी और उसे स्क्रीन से कनेक्ट किया। पृथ्वी ने कुर्सी खिसकाई और भरत से उस पर बैठने का इशारा किया। धड़कते दिल के साथ भरत कुर्सी पर आ बैठा ,, उसका सर दर्द से फटा जा रहा था ,

उसे एक के बाद एक झटके जो मिल रहे थे और रही सही कसर अब पृथ्वी पूरी करने वाला था।
पृथ्वी ने स्क्रीन पर एक के बाद एक फाइल खोलकर भरत की सभी गड़बड़ मिस्टर देसाई और बाकी सबके सामने रखी। भरत के माथे पर पसीने की बुँदे उभर आयी , उसका गला सूखने लगा , वह बुरी तरह फंस चुका था। मिस्टर देसाई ने देखा कि जितना वे भरत के बारे में जानते थे भरत तो उस से भी ज्यादा कमीना निकला। गुस्से से उनका चेहरा लाल हो गया और आँखों में भरत के लिए नफरत के भाव तैरने लगे।

भरत का सच सबके सामने आ चुका था , वह चाहकर भी खुद के लिए कोई सफाई नहीं दे सकता था लेकिन एक मोहरा अभी भी उसके पास था और उसके बारे में सोचकर उसमे थोड़ी हिम्मत आयी। वह जैसे ही अपनी कुर्सी से उठने को हुआ पृथ्वी ने उसके कंधे पर हाथ रखा और एक पेपर उसके सामने करके कहा,”कही तुम इसे लेने ही तो बाहर नहीं जाने वाले ?”

पृथ्वी के हाथ में लीगल पेपर देखकर भरत की आँखे फ़टी की फ़टी रह गयी , ये पृथ्वी के हाथ कैसे लगा ? जबकि प्राची पर गुस्सा करते वक्त भरत ने ये ध्यान ही नहीं दिया था कि प्राची ने चुपके से वो पेपर निकाल लिया है , तभी तो प्राची ने भरत से सॉरी कहा था वो भी एक नहीं बल्कि दो बार,,,,,,,,,,,भरत को एकदम से वो पल याद आया और उसने गुस्से से पृथ्वी की तरफ देखा।

“ये तुम्हारे हाथ में क्या है पृथ्वी ?”,मिस्टर देसाई ने पूछा क्योकि इस लीगल पेपर का सच तो वे भी नहीं जानते थे
पृथ्वी ने उस लीगल पेपर के टुकड़े टुकड़े किये और वही मीटिंग रूम में पड़े डस्टबिन में डालते हुए कहा,”सर ! मिस्टर भरत बहुत ही होशियार और समझदार इम्प्लॉय है लेकिन थोड़े से बेवकूफ भी है,,,,,,,,,,मुझे मौर्या ग्रुप से निकालने के लिए इन्होने प्राची के साथ एक डील की क्योकि ये जानते थे इस कम्पनी के 60% शेयर्स प्राची के नाम है और उन शेयर्स के साथ आपकी कम्पनी को हासिल करना इनके लिए आसान हो जाएगा।

इन्होने एक खाली लीगल पेपर पर प्राची साईन ले लिए ताकि बाद में उसे ब्लैकमेल कर सके , प्राची ने भी बिना सोचे समझे साईन करके पेपर इन्हे दे दिया और ये इनके जाल में फंस गयी। भरत की नियत मैं पहले दिन से जानता था इसलिए मैंने इन्ही के लॉयर को पैसे देखकर उस पेपर पर आगे डेट डलवा दी और मिस्टर भरत ने ख़ुशी ख़ुशी में उस पेपर पर छपी तारीख को देखा ही नहीं।

मैं जानता था आप भरत पर बहुत भरोसा करते है इसलिए अगर मैं सीधा आकर आपसे सच कहता तो शायद आप यकीन नहीं करते और मौर्या ग्रुप में रहकर मैं इसकी सच्चाई सामने नहीं ला पाता इसलिए मैंने खुद अपना रिजाइन देने का नाटक किया और आपकी कम्पनी ज्वाइन की।

मुझे यहाँ देखकर मिस्टर भरत का आधा कॉन्फिडेंस तो पहले ही टूट गया। आपकी कम्पनी ज्वाइन करने से पहले मैंने आपके सामने एक शर्ट रखी कि आपको प्राची देसाई के 60% शेयरस उस से लेकर उन्हें किसी और के नाम करना होगा और आपने वो किया भी , अगर आप ऐसा नहीं करते तो आज ये कम्पनी मिस्टर भरत की होती और आप अपनी ही कम्पनी में बस एक एम्प्लॉय बनकर रह जाते।

मिस्टर शर्मा की जिस डील के लिए भरत आपके साइन चाहता था उसी फाइल में कम्पनी के लीगल डॉक्युमेंट्स भी थे लेकिन आपने मेरे कहने पर उन पर साइन नहीं किया और उन्हें मुझे देखने को कहा। मैं चाहता तो उसी दिन भरत का भांडा फोड़ सकता था लेकिन और भी लोग थे जिनकी आँखों पर बंधी विश्वास की पट्टी का उतरना जरुरी था”

कहकर पृथ्वी ने प्राची की तरफ देखा तो प्राची ने शर्मिन्दा होकर अपनी नजरे झुका ली और बगल में बैठे मिस्टर देसाई से कहा,”आई ऍम सॉरी डेड , मुझे माफ़ कर दीजिये”
मिस्टर देसाई इस वक्त कुछ बोलने की हालत में नहीं थे , उनके सबसे भरोसेमंद एम्प्लॉय ने उनके साथ धोखा किया और खुद उनकी अपनी बेटी ने भी इसमें उसका साथ दिया। मिस्टर देसाई ख़ामोशी से टेबल को घूरते रहे।

पृथ्वी उनकी भावनाये समझ रहा था इसलिए थोड़ा शांत स्वर में कहा,”इस वक्त आप पर जो गुजर रही है वो मैं समझ सकता हूँ सर , जब अपना ही कोई धोखा दे तो सिर्फ दिल ही नहीं टूटता खुद इंसान भी टूटकर बिखर जाता है। मेरा किसी से कोई दुश्मनी नहीं है सर , बस मैं आपके साथ गलत होते नहीं देख सकता था इसलिए मुझे आपसे ये सब छुपाना पड़ा। अब फैसला आपको करना है सर मेरा काम खत्म हुआ,,,,,,,,,,,,,!!!”

पृथ्वी की बात सुनकर मिस्टर देसाई अपनी जगह से उठे और उसके सामने चले आये। उन्होंने नम आँखों से पृथ्वी को देखा और कहा,”तुमने जो किया वो कोई अपना भी नहीं करता पृथ्वी ! तुम शायद पिछले जन्म में मेरे बेटे रहे होंगे जो आज मेरे मुश्किल वक्त में मेरे साथ खड़े हो,,,,,,,,,,,,,,मुझे तुम से कोई शिकायत नहीं है , तुम एक बहुत अच्छे इंसान हो”

पृथ्वी मुस्कुरा दिया , मिस्टर देसाई भरत की तरफ बढ़ गए और पृथ्वी ने प्राची की तरफ देखा , प्राची उसे ही देख रही थी और मन ही मन परेशान भी थी कि उसने अपने खिलाफ जो सबूत पृथ्वी को दिए थे पृथ्वी ने उन्हें मिस्टर देसाई के सामने उजागर क्यों नहीं किया ? प्राची को एकटक अपनी ओर देखते पाकर पृथ्वी ने धीरे से अपनी पलकें झपकाकर उसे ये अहसास दिलाया कि सब ठीक है !

मिस्टर देसाई भरत के सामने चले आये , सच सामने आने के बाद भरत बहुत शर्मिन्दा था और नजरे झुकाये खड़ा था। उसे रह रह कर नीलेश की कही बाते याद आ रही थी जिन पर भरत ने कभी ध्यान नहीं दिया और हमेशा गलत रस्ते पर चलते रहे। भरत ने मिस्टर देसाई की तरफ देखा लेकिन वह अब उनसे ठीक से नजरे भी नहीं मिला पा रहा था। उसने हिम्मत करके कहा,”मुझे माफ़ कर दीजिये , मैंने,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”

भरत ने इतना ही कहा कि मिस्टर देसाई ने खींचकर एक थप्पड़ भरत को मारा और दोनों हाथो से उसकी कोलर पकड़कर गुस्से से कहा,”माफ़ कर दू ? वो भी तुम्हे , तुम जानते भी हो भरत तुमने क्या किया है ? अपने स्वार्थ के लिए तुमने कितने लोगो की जिंदगी खराब की है इसका अहसास भी है तुम्हे ?”

भरत के चेहरे पर तकलीफ के भाव उभर आये , मिस्टर देसाई ने उसे पीछे धकेला और गुस्से से कहने लगे,”कितना भरोसा करता था मैं तुम पर , कभी तुम्हे किसी चीज की कमी नहीं होने दी , तुम्हारे मांगने से पहले तुम्हे वो सब दिया जो तुम्हे चाहिए था। जब भी तुमने कहा आँख बंद करके तुम्हारे हर पेपर पर बिना सोचे समझे साईन कर दिया। अरे मैं तो तुम्हारे साथ रिश्ता जोड़ना चाहता था लेकिन तुमने तो हर रिश्ते को तार तार कर दिया। तुम मुझे इस कदर धोखा दोगे मैंने ये कभी सपने में भी नहीं सोचा था।

प्राची तुम्हारी बेटी जैसी है फिर भी उसे समझाने के बजाय तुमने उसकी गलतियों में उसका साथ दिया , अपने ही बेटे को अपने धोखे में शामिल किया और जब उसने तुम्हारी बात नहीं मानी तो उसे दर दर की ठोकरे खाने के लिए मजबूर कर दिया , प्रवीण ने तुम्हारा साथ नहीं दिया तो इस पर झूठा इल्जाम लगाकर इसे कम्पनी से बाहर निकलवा दिया और पृथ्वी , इसने तो कभी तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ा था ये अपनी जिंदगी में खुश था , तुमने इसे भी नहीं छोड़ा,,,,,,,,,,आखिर क्यों किया तुमने ऐसा ?”
आखिर में मिस्टर देसाई चिल्ला उठे

सब सुनकर आख़िरकार भरत का गुस्सा फूट पड़ा और उसने गुस्से से कहा,”क्योकि ये सब मेरे रास्ते की रुकावट बन चुके थे , कितने सालों से मैं आपके लिए
नौकरो की तरह काम कर रहा था आप क्या चाहते है पूरी जिंदगी मैं आपके पीछे घूमता रहू ,, हाँ चाहता था ये सब मेरा हो जाए लेकिन इन सबने मिलकर मेरे सपनो को मिटटी में मिला दिया। मेरी औलाद होकर मेरा अपना बेटा मुझसे ही बगावत करने पर उतर आया इसलिए निकाल दिया मैंने इसे अपनी जिंदगी से अपने घर से ,

ये प्रवीण इसने मुझे धमकी दी , हाह एक मामूली सा अकाउंटेंट होकर ये मुझे धमकी देता है कि आपको सब बता देगा तो फसा दिया मैंने इसे झूठे इल्जाम में और निकलवा दिया कम्पनी से बाहर , आपकी बेटी प्राची देसाई , अरे जब ये लड़की खुद अपने बाप की नहीं हुई तो मेरी क्या होगी ? एक शादीशुदा मर्द के पीछे पागल होकर कितनी ही बार आपको नीचा दिखा चुकी है ये , मेरी मदद लेने के लिए इसने तो आपकी कम्पनी तक दाव पर लगा दी,,,,,,,,,,,!!!”

कहते कहते भरत हाफने लगा और फिर पृथ्वी के सामने आकर गुस्से से कहा,”और ये पृथ्वी ! इसने मेरा बना बनाया सारा प्लान चौपट कर दिया ,, अगर ये बीच में नहीं आता तो आज ये सब मेरा होता और मैं धक्के मारकर तुम सबको यहाँ से निकाल देता,,,,,,,!!!”
आखिर में भरत ने अपने ही मुँह से अपना सब सच उगल दिया। प्राची की आँखो से आँसू टपकने लगे उसने अपना सर झुका लिया। नीलेश उठकर वहा से चला गया क्योकि वह अपनी आँखों के सामने अपने ही बाप को इस रूप में नहीं देख पा रहा था।  

नीलेश के जाने के बाद भरत बोखला उठा उसने पृथ्वी की कॉलर पकड़ ली और गुस्से से कहा,”ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है , तुमने किया है ये सब , तुमने मुझसे सब छीन लिया पृथ्वी,,,,,,,,,,मैं नफरत करता हूँ तुमसे , तुम सबसे नफरत करता हूँ मैं”

मिस्टर देसाई बस इस खेल के खत्म होने का इंतजार ही कर रहे थे उन्होंने बेल बजायी और मीटिंग रूम के बाहर खड़े पुलिसवाले अंदर चले आये। मिस्टर देसाई के कहने पर इंस्पेक्टर ने भरत को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें वहा से लेकर चली गयी ! मिस्टर देसाई पृथ्वी के पास आये और कहा,”थैंक्यू पृथ्वी”
“नहीं सर ! थैंक्यू अगर कहना ही है तो नीलेश से कहिये , भरत का सच सामने लाने में सबसे ज्यादा उसने ही है,,,,,,,,,,He is such a good man”,पृथ्वी ने कहा तो मिस्टर देसाई ने हामी में गर्दन हिला दी।

मिस्टर देसाई ने चेतन , प्रवीण और मिस्टर राव से जाकर अपना अपना काम सम्हालने को कहा और खुद प्राची और पृथ्वी को साथ लेकर मीटिंग रूम से बाहर निकल गए। शर्मिंदगी से प्राची की नजरे झुकी थी साथ ही मन ही मन चल रहा था एक सवाल जो उसे पृथ्वी से पूछना था। मिस्टर देसाई दोनों के साथ अपने केबिन में चले आये तो देखा नीलेश सर झुकाये सोफे पर बैठा है। किसी के अंदर आने की आहट सुनकर नीलेश ने अपना सर उठाया और मिस्टर देसाई को देखकर उनके पास चला आया।

मिस्टर देसाई कुछ पूछते इस से पहले नीलेश ने कहा,”आई ऍम सॉरी सर ! सब जानते हुए भी मुझे आपसे ये सब छुपाना पड़ा। डेड आपके गुनहगार है तो मैं भी कही ना कही दोषी हूँ,,,,,,,,,,,मैंने आपका नमक खाया है मैं उनकी तरह आपको धोखा नहीं दे सकता था इसलिए मुझे पृथ्वी की मदद लेनी पड़ी और सच आपके सामने है। आप मुझे जो सजा देंगे मुझे मंजूर है”

“मैं जो सजा दू तुम्हे मंजूर होगी ?”,मिस्टर देसाई ने गंभीर स्वर में पूछा
“हाँ सर”,नीलेश ने बुझे स्वर में कहा
मिस्टर देसाई मुस्कुराये और नीलेश के कंधे पर हाथ रखकर कहा,”तो फिर आज से इस कम्पनी की MD की पोजीशन तुम सम्हालोगे और मुझे कोई बहाना नहीं चाहिए,,,,,,,,,,,,!!!”

नीलेश ने सुना तो हैरानी से मिस्टर देसाई को देखा और फिर पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने धीरे से उसका कंधा थपथपाया और कहा,”यू डिजर्व इट”
“मेरे साथ आओ मुझे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी है”,मिस्टर देसाई ने नीलेश के कंधो पर अपनी बाँह रखकर उसे अपनी टेबल की तरफ ले जाते हुए कहा

प्राची और पृथ्वी एक दूसरे के आमने सामने खड़े थे। प्राची के मन में चल रहा सवाल उसके होंठो पर आया और उसने पृथ्वी से कहा,”तुमने डेड के सामने मेरे खिलाफ सबूत क्यों नहीं रखे ?”
“मुझे नहीं लगता आज वहा उनकी जरूरत थी। तुम्हारे डेड तुम्हारे वजह से पहले ही बहुत शर्मिन्दा हो चुके है , चार लोगो के सामने तुम्हारी गलतिया गिनाकर मैं उन्हें और शर्मिन्दा करना नहीं चाहता था। तुम्हे तुम्हारी गलतियों का अहसास है तुम्हारे लिए यही काफी है,,,,,,,,,,,,!!

जो हुआ उसे भूल जाओ और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ो। तुम एक बहुत ही ब्रिलियंट बिजनेस वुमन हो , अपने टेलेंट को बर्बाद मत करो। तुम चाहो तो इस कम्पनी को और भी ऊपर लेकर जा सकती हो और मुझे यकीन है तुम ये कर लोगी”,पृथ्वी ने सधे हुए स्वर में कहा

आज पहली बार प्राची पृथ्वी के मुँह से अपने लिए कुछ अच्छा सुन रही थी , साथ ही उसने देखा कि पृथ्वी ने उसे मिस्टर देसाई के सामने और ज्यादा शर्मिन्दा होने से बचा लिया तो उसका दिल भर आया। उसे पृथ्वी के साथ किया बुरा बर्ताव याद आया और साथ ही याद आया कि कितनी बार उसने पृथ्वी को परेशान भी किया है। प्राची की आँखों में नमी उभर आयी और उसने धीरे से कहा,”थैंक्यू पृथ्वी ! तुम बहुत अच्छे हो”

पृथ्वी धीरे से मुस्कुराया और कहा,”अच्छा तो मैं हूँ , मेरी बीवी भी यही कहती है”
प्राची ने सुना तो मुस्कुरा उठी क्योकि पृथ्वी अपनी बातो में कभी भी अवनि का जिक्र करना नहीं भूलता था। इतना प्यार करने वाला मर्द किस्मत वाली औरत को ही मिलता है ये जानकर प्राची खुश थी। उसने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”पृथ्वी ! क्या मैं एक बार हग कर सकती हूँ ?”

पृथ्वी ने सुना तो प्राची की तरफ देखा और बहुत ही शांत स्वर में कहा,”सॉरी ! मैं शादीशुदा हूँ,,,,,,,,,,चलता हूँ , बाय”
पृथ्वी वहा से चला गया और प्राची उसे जाते देखकर बड़बड़ायी,”That’s why i like you,,,,,,,,,,तुम अपनी हदें किसी के लिए नहीं भूलते और यही तुम्हे सबसे अलग बनाता है पृथ्वी,,,,,,,,,,,,,,,तुम और अवनि हमेशा खुश रहो”
“प्राची ! ज़रा यहाँ आना”,मिस्टर देसाई की आवाज से प्राची की तन्द्रा टूटी और वह उनकी तरफ चली गयी , पृथ्वी को लेकर उसके दिल में अब कोई भावना नहीं थी , उसने पृथ्वी को अपनी जिंदगी से ख़ुशी ख़ुशी जाने दिया !

( नीलेश को कम्पनी में फिर से शामिल करके क्या मिस्टर देसाई ने किया सही फैसला ? क्या प्राची भूल जाएगी पृथ्वी को और बढ़ जाएगी अपनी जिंदगी में आगे ? क्या पृथ्वी फिर से ज्वाइन करने वाला है मौर्या ग्रुप ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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