Pasandida Aurat Season 3 – 59

Pasandida Aurat Season 3 – 59

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी ऑफिस से आया था और जब उसने देखा अवनि ने शाम के समय बाल धोये है तो वह खुद अपने हाथो से उसके बाल सुखाने लगा। शीशे के सामने बैठी अवनि दोनों हाथो से उसकी बलाये ले रही थी। पृथ्वी ने अवनि के बाल सुखाये और ड्रायर बंद करके साइड में रखकर कहा,”लो हो गया”
अवनि उठी और पृथ्वी की तरफ पलटकर कहा,”थैंक्यू,,,,,,!!!”

पृथ्वी ने अवनि की कमर को अपने दोनों हाथो से पकड़ा और उसे अपने करीब करके कहा,”इसमें थैंक्यू कैसा ?”
“आप अभी अभी ऑफिस से आये है , थके होंगे फिर भी आपने मेरे बाल सुखाये इसलिए थैंक्यू”,अवनि ने मुस्कुराकर प्यार से कहा
पृथ्वी ने सुना तो कुछ देर अवनि की आँखों में देखता था और फिर अवनि के चेहरे पर आये बालो को प्यार से पीछे करके कहा,”अवनि ! इस दुनिया में कुछ काम ऐसे है जो मुझे तुम्हारे लिए करना पसंद है और वो मैं जिंदगीभर करूंगा,,,,,,, बिना थके बिना परेशान हुए”

पृथ्वी की बात सुनकर अवनि ने अपनी बाँहो को पृथ्वी के गले में डाला और कहा,”लेकिन मैं तो आपको जिंदगीभर परेशान करने वाली हूँ”
“मैं तैयार हूँ”,पृथ्वी ने कहा और जैसे ही अपने होंठो को अवनि के होंठो की तरफ बढ़ाया तो अवनि ने उसे पीछे करके कहा,”आप फ्रेश हो जाईये , मैं खाना लगाती हूँ”
पृथ्वी के साथ हमेशा ऐसा ही होता था , उसने मुँह बनाया और कपडे लेकर नहाने चला गया।

पृथ्वी नहाकर आया तब तक अवनि ने उसके लिए खाना लगा दिया था। वह बाहर आया तो देखा आज खाना अवनि ने डायनिंग टेबल पर लगाया है। पृथ्वी थोड़ा हैरान हुआ और डायनिंग की तरफ आते हुए कहा,”आज तुमने खाना यहाँ लगाया , कुछ स्पेशल है क्या ?”
अवनि ने खुद पृथ्वी के लिए कुर्सी खिसकाई और उसे बैठने का इशारा करके कहा,”जी हाँ ! बहुत स्पेशल है , आज मुझे आपको दो अच्छी बाते बताती है इसलिए मैंने सब आपकी पसंद का खाना बनाया है”

पृथ्वी कुर्सी पर आ बैठा , वह मुस्कुरा रहा था। जो चीजे वह अवनि के लिए किया करता था आज अवनि उसके लिए कर रही थी जैसे कुर्सी खिसकाना , उसके लिए प्लेट में खाना सर्व करना।
अवनि ने पृथ्वी के लिए खाना परोसा और खुद ठीक उसके सामने खाली पड़ी कुर्सी पर जा बैठी। अवनि ने अपने लिए भी खाना परोसा और पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने कहा,”अच्छा अब बताओ आज की वो दो अच्छी बाते क्या है ?”

अवनि मुस्कुराई और कहा,”आज सुरभि और सिद्धार्थ की रिंग सेरेमनी थी , घरवाले उनकी शादी के लिए मान गए”
पृथ्वी ने सुना तो हैरानी से मुस्कुराया , उसने देखा ये बात बताते हुए अवनि बहुत ही सहज और खुश थी। पृथ्वी ने अवनि के हाथ पर अपना हाथ रखा और कहा,”तुम खुश हो ना ?”
“मैं बहुत खुश हूँ और मैंने सुरभि से प्रॉमिस किया है कि हम उसकी शादी में जायेंगे,,,,,,,जायेंगे ना ?”,अवनि ने खुश होकर कहा और फिर एकदम से शांत होकर पूछा

अवनि का हाथ पृथ्वी के हाथ में ही था उसने अवनि के हाथ को हलके से दबाया और कहा,”जरूर जायेंगे”
अवनि ख़ुशी से मुस्कुरा उठी तो पृथ्वी ने कहा,”और दूसरी बात ?”
अवनि फिर मुस्कुराई और कहा,”मुंबई से एक बड़े डायरेक्टर के ऑफिस से मुझे मेल आया है , उन्हें अपने नए सीरियल के लिए एक राइटर की जरूरत है,,,,,,,,,दो दिन बाद इंटरव्यू है”

दूसरी खुशखबरी सुनकर पृथ्वी ज्यादा खुश हुआ , उसे याद आया कि शादी और अपने ऑफिस के चलते वह अवनि के इस सपने को तो भूल ही गया था। पृथ्वी ने अवनि का हाथ छोड़ा और अपनी कुर्सी से उठकर अवनि के पीछे आकर उसके गले में अपनी बाँहे डाली और झुककर उसके गाल को चूमकर कहा,”मैं साथ चलूँगा”
अवनि ने देखा पृथ्वी खाना खाते खाते ही उठकर उसकी तरफ चला आया है तो उसने एक निवाला तोड़ा और पलटकर पृथ्वी को खिला दिया और कहा,”आपका ऑफिस रहेगा , मैं खुद से चली जाउंगी”

“नहीं नहीं मैं साथ जाऊंगा,,,,,,,,,,,मैं अपनी बीवी को अकेले नहीं भेज सकता”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने पृथ्वी का हाथ पकड़कर उसे अपने बगल वाली कुर्सी पर बैठाया और उसे एक निवाला और खिलाकर , उसके होंठ को साफ़ करते हुए कहा,”पृथ्वी ! आप पर पहले ही बहुत जिम्मेदारियां है , मैं आपको परेशान करना नहीं चाहती। मैं खुद से चली जाउंगी वैसे भी ये शहर अब मेरे लिए अनजान नहीं है,,,,,,,,,मुझे अपनी चीजे खुद करने की डालनी होगी , मुझे खुद पर इतना भी डिपेंडेंड मत बनाओ”

पृथ्वी ने सुना तो अपने बाँये हाथ से अवनि के गाल से लगाकर कहा,”अवनि मैं तुम्हे खुद पर डिपेंडेड नहीं बना रहा , बस लास्ट टाइम विक्रम कपूर के ऑफिस में जो कुछ हुआ उसके बाद से तुम्हे अकेले कही भेजने से बस थोड़ा डर लगता है”
अवनि ने सुना तो अपना हाथ उठाया और अपनी दुबली पतली बायसेप्स दिखाकर कहा,”आप फालतू में डर रहे हो , देखो मैं कितनी स्ट्रांग हूँ”

पृथ्वी ने अवनि की बायसेप्स देखी और फिर अपनी  बायसेप्स दिखाई तो अवनि ने धीरे से अपनी बाजू नीचे कर ली , ये देखकर पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”अच्छा ठीक है तुम चली जाना मैं तुम्हे फ़ोर्स नहीं करूंगा लेकिन,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“लेकिन ?”,अवनि ने पूछा

“अगर तुम्हे कोई भी परेशानी हुई या तुम्हे मेरी जरूरत पड़ी तो तुम मुझे फोन करोगी ?”,पृथ्वी ने कहा
“हम्म्म ठीक है , थैंक्यू”,अवनि ने मुस्कुराकर कहा
“अब ये थैंक्यू किसलिए ?”,पृथ्वी ने सामने रखी अपनी खाने की प्लेट को अपनी तरफ खिसकाकर पूछा
“मुझे इतना सपोर्ट करने के लिए,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा

पृथ्वी अवनि की तरफ पलटा और कहा,”अवनि ! मैं तुम से तुम्हारी कहानियो की वजह से मिला हूँ , सच कहू तो मैं आज भी तुम्हारा फैन हूँ और चाहता हूँ कि  बड़ी रायटर बनो , और जब तुम्हारी कहानी बड़ी स्क्रीन पर आयेगी और उसके लिए एक बड़े स्टेज पर जब तुम्हारा नाम पुकारा जाएगा तब देखना सामने खड़ी भीड़ में मैं तुम्हे सबसे आगे खड़ा नजर आऊंगा और तुम्हारे लिए सबसे ज्यादा तालियाँ बजाऊंगा”

“सच ?”,अवनि ने आँखो में चमक भरकर पूछा
“अरे हाँ ! मेरे लिए वो सबसे प्राउड मोमेंट में से एक होगा”,पृथ्वी ने कहा
अवनि मुस्कुरा दी और कहा,”मैं बहुत मेहनत करुँगी”
जवाब में पृथ्वी ने हामी में गर्दन हिलाई और मुस्कुरा दिया।  

देसाई मेंशन्स , मुंबई
दोपहर में घर आयी प्राची दिनभर अपने कमरे में कैद रही। उसकी आँखों के सामने बार बार वो सब गलतिया आ रही थी जो उसने अनजाने में की , उसे लगा विक्रम की मदद से वह पृथ्वी और अवनि के बीच दरार पैदा कर देगी और पृथ्वी अवनि से दूर होकर उसके पास चला आएगा , उसे लगा भरत की मदद से वह पृथ्वी को उसकी नौकरी से दूर कर देगी और पृथ्वी फिर उसके पास चला आएगा ,

उसने कितनी ही बार मिस्टर देसाई का दिल दुखाया , उन्हें हर्ट किया और तो और कई बार सबके सामने उन्हें शर्मिन्दा भी किया , नीलेश जो कि हमेशा प्राची के लिए हाजिर रहता था उसे भी प्राची ने जाने दिया। प्राची को आज अपनी गलतियो का अहसास हो रहा था जबकि विक्रम और भरत का असली चेहरा देखने के बाद उसे अब खुद से ही नफरत होने लगी थी।

दोपहर से शाम हुई और शाम से रात हो गयी लेकिन प्राची अपने कमरे से बाहर नहीं आयी , वह पेट के बल बिस्तर पर गिरी इन्ही सब बातो के बारे में सोचती रही। देर रात मिस्टर देसाई ऑफिस से घर आये तो नौकर ने आकर कहा,”सर ! प्राची मेडम दोपहर से अपने कमरे में है , उन्होंने खाना भी नहीं खाया”
मिस्टर देसाई ने सुना तो उन्हें हैरानी हुई साथ ही प्राची को लेकर चिंता भी होने लगी , उन्होंने नौकर से जाने को कहा और खुद अपना बैग कुर्सी पर रखकर प्राची के कमरे के सामने चले आये।

मिस्टर देसाई ने दरवाजा खटखटाया और फिर हेंडल घुमाकर देखा तो पाया कि दरवाजा खुला है। उन्होंने दरवाजा खोला और कमरे के अंदर चले आये। देखा प्राची उदास सी किसी सोच में डूबी बिस्तर पर उलटी लेटी है।
प्राची को सही सलामत देखकर मिस्टर देसाई ने चैन की साँस ली और गले में पड़ी टाई को ढीली करके प्राची के बगल में आ बैठे।

उन्होंने प्यार से प्राची के सर पर हाथ फेरा और कहा,”प्राची ! क्या तुम ठीक हो बेटा ? तुमने खाना भी नहीं खाया , आज ऑफिस में भी तुम काफी बुझी बुझी नजर आ रही थी। तुम्हारी तबियत तो ठीक है ना ?”
अपने पिता के हाथ का स्पर्श पाकर और अपने लिए उनकी परवाह देखकर सहसा ही प्राची की आँखों में आँसू भर आये। उसने अपना ललाट मिस्टर देसाई के जांघ से लगा लिया और उदासी भरे स्वर में कहा,”डेड ! क्या आप मुझे माफ़ कर सकते है ?”

“माफ़ ? किस चीज के लिए ?”,मिस्टर देसाई ने हैरानी से कहा
“मैंने आपको बहुत शर्मिन्दा किया है डेड , बहुत बदतमीजी की है , आपको बहुत दुःख दिया है मैंने , मैं एक अच्छी बेटी नहीं बन पायी डेड,,,,,,,,,,,,मुझे खुद पर शर्म आ रही है कि अपनी एक जिद के चलते मैंने आपके साथ धोखा किया”,प्राची ने कहा और फफक कर रो पड़ी।

प्राची की बाते सुनकर मिस्टर देसाई ने एकदम से कोई प्रतिक्रया नहीं दी ना ही उन्होंने प्राची से कोई सवाल किया। उन्होंने खामोश रहकर प्राची को रोने दिया ताकि वह अपने अंदर भरी इस तकलीफ को आँसुओ के जरिये बहा दे। प्राची काफी देर तक रोती रही और जब उसका रोना सिसकियों में बदल गया तो मिस्टर देसाई ने उसके सर पर हाथ फेरा और बड़े प्यार से कहा,”चलो उठो”

प्राची उठकर बैठ गयी , रोने से उसके चेहरे की रंगत हलकी लाल हो चुकी थी , आँखे रोने की वजह से सूज चुकी थी जिन्हे देखकर समझ आ रहा था कि प्राची इस से पहले भी कई बार रो चुकी है। मिस्टर देसाई ने पास ही टेबल पर रखा पानी का गिलास उठाया और प्राची की तरफ बढ़ा दिया तो प्राची ने गिलास लिया और पानी पीकर वापस मिस्टर देसाई की तरफ बढ़ा दिया। उन्होंने गिलास वापस टेबल पर रखा और प्राची से कहा,”अगर मैं गलत नहीं हूँ तो क्या ये रियलाइजेशन पृथ्वी को लेकर है ?”

प्राची ने हामी में धीरे से गर्दन हिलायी और कहा,”मैं जान चुकी हूँ डेड कि मेरी जिद बहुत ही बेकार और बेफिजूल थी , पृथ्वी एक बहुत अच्छा लड़का है वो अवनि के लिए ही बना है। मुझे उन दोनों के बीच नहीं आना चाहिए,,,,,,,,,,मैं अब तक जो कुछ भी किया उसके लिए मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ डेड,,,,,,प्यार का मतलब किसी को हासिल करना बिल्कुल नहीं होता ये बात मुझे समझ आ चुकी है,,,,,,,,,,और पृथ्वी से प्यार मुझे कभी था ही नहीं वो तो बस मेरी एक जिद थी जिसकी वजह से मैंने आप सबका दिल दुखाया , सबको परेशान किया , आई ऍम सॉरी डेड , आई ऍम रियली सॉरी”

प्राची को अपने किये पर पछतावा था ये देखकर मिस्टर देसाई को थोड़ी राहत मिली और साथ ही ख़ुशी भी कि अब प्राची को समझ आ गयी है। प्राची को उदास देखकर उन्हें अच्छा नहीं लग रहा था , उन्होंने प्राची के हाथ को अपने हाथो में लिया और बहुत ही शांत स्वर में कहा,”प्राची ! तुमने जो किया वो गलत था लेकिन उस से भी ज्यादा गलत तब होता जब तुम्हे अपनी गलतियों का अहसास नहीं होता , आज तुम्हे अपने किये का पछतावा है , तुम्हे ये अहसास है कि तुमने गलत किया , जो हो चुका उसे भूल जाओ और खुद को एक नया मौका दो,,,,,,,,,,,जिंदगी बहुत छोटी है बेटा इसे खूबसूरत बनाओ”

“आप मुझसे नाराज नहीं है डेड ?”,प्राची ने आँखों में आँसू भरकर कहा
मिस्टर देसाई एकटक प्राची को देखते रहे और फिर उसी शांत स्वर में कहा,”बच्चे कितनी भी गलतिया करे माँ बाप उनसे मुँह नहीं मोड़ सकते बेटा,,,,,,,,,,तुम्हे तुम्हारी गलती का अहसास है मैंने तुम्हे माफ़ किया”
प्राची ने सुना तो आगे बढ़कर मिस्टर देसाई के सीने से लगी और रोते हुए कहा,”आई ऍम सॉरी , आई ऍम सॉरी डेड,,,,,,,,,,!!!”

मिस्टर देसाई के पास प्राची को कहने के लिए इस वक्त शब्द नहीं थे , वे खुद भी भावुक थे और मन ही मन एक ख्याल उन्हें भी सता रहा कि जो कुछ भी हुआ उसमे कही ना कही गलती उनकी भी थी , शायद वे प्राची की परवरिश ठीक से नहीं कर पाए थे।

कपूर मेंशन्स , मुंबई
“आराम से , सम्हलकर , ड्राइवर सामान अंदर रख दो”,मिस्टर कपूर ने सहारा देकर विक्रम को गाडी से नीचे उतारते हुए कहा
विक्रम के पैर में फ्रेक्चर हुआ था और सर पर चार टाँके आये थे , चेहरे पर चोट के निशान थे और हाथ पर भी खरोंचे थी। मिस्टर कपूर विक्रम को सहारा देकर अंदर ले आये। मिसेज कपूर परेशान सी हॉल में खड़ी थी। विक्रम को देखते ही वह उसके पास आयी और अपने पति की मदद करते हुए विक्रम को सोफे पर बैठा दिया।

“ये सब कैसे हुआ ?”,मिसेज कपूर ने पूछा
“पूछो अपने साहबजादे से ? इसने मेरी इज्जत को मिटटी में मिलाने की कसम खा ली है , क्या जरूरत थी इसे उस लड़की को फार्म हाउस बुलाने की ?”,मिस्टर कपूर ने चिल्लाकर कहा
“मैंने उसे नहीं बुलाया वो खुद वहा आयी थी , मुझसे माफ़ी मांगने”,विक्रम से अपना सर पीछे सोफे के हत्थे से लगाकर शांत स्वर में कहा

“वो खुद आयी थी इसका मतलब ये नहीं कि तुम उसकी इज्जत,,,,,,,,,मुझे यकीन नहीं होता तुम मेरे छोटे भाई हो”,मिस्टर कपूर ने विक्रम की तरफ देखकर गुस्से से कहा
मिसेज कपूर ने जैसे ही सुना वे समझ गयी कि जरूर विक्रम ने प्राची के साथ कुछ बदतमीजी की है। वह ख़ामोशी से विक्रम को देखती रही , कुछ पूछने या कहने की हिम्मत उसमे नहीं थी क्योकि मिस्टर कपूर इस वक्त बहुत गुस्से में थे।

“मैंने उसके साथ कुछ गलत नहीं किया है भैया ! वो बस नशे में,,,,,,,,,,लेकिन उसने मेरे साथ जो किया उसके लिए मैं उसे छोडूंगा नहीं , उसने अपने बॉयफ्रेंड को बुलाकर मेरी ये हालत करवाई”,विक्रम ने नफरत भरे स्वर में कहा , प्राची के साथ उसने जो किया उसका उसे जरा भी अफ़सोस नहीं था , ना ही कोई शर्मिंदगी

मिस्टर कपूर ने सुना तो गुस्से से कहा,”तुम ये डिजर्व करते हो विक्रम , किसी लड़की के साथ जबरदस्ती करने का तुम्हे कोई हक़ नहीं है। शुक्र मनाओ कि उसने अभी तक ये सब मिस्टर देसाई को नहीं बताया , अगर उन्हें पता चला तो सब बर्बाद हो जाएगा , मेरी सालो की मेहनत बर्बाद हो जाएगी ,, इस शहर में मेरी जो इज्जत है वो मिटटी में मिल जाएगी,,,,,,,,,,,तुमने ये सही नहीं किया विक्रम इसका अंजाम बहुत बुरा होने वाला है”
मिस्टर कपूर ने कहा और पैर पटकते हुए वहा से चले गए।

( क्या अकेले जाकर फिर से किसी मुसीबत में पड़ने वाली है अवनि ? क्या प्राची बताएगी मिस्टर देसाई को भरत की असलियत या करेगी कल का इन्तजार ? क्या मिस्टर कपूर की बातो का पडेगा विक्रम पर कोई असर ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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