Pasandida Aurat Season 3 – 57

Pasandida Aurat Season 3 – 57

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

अवनि से बात करके सुरभि की सारी ग़लतफ़हमी दूर हो गयी और साथ ही उसके मन से एक बोझ भी उतर गया। उसने पहले अवनि से अपने और सिद्धार्थ के रिश्ते की बात छुपाई लेकिन आज सिद्धार्थ ने खुद अवनि से बात करके सुरभि के मन की उलझन को दूर कर दिया और अब सुरभि खुश थी। अवनि ने उसे बधाई दी और फोन काट दिया। सुरभि फोन कान से लगाए खामोश खड़ी सिद्धार्थ को देखती रही , सिद्धार्थ नहीं जानता था सुरभि और अवनि के बीच क्या बात हुई ये सिद्धार्थ को नहीं पता थी।

सिद्धार्थ सुरभि के सामने आया और धीरे से कहा,”क्या हुआ ?”
सुरभि ने फोन कान से हटाया और खुश होकर कहा,”अवनि ने कहा वो हमारे रिश्ते से खुश है , उसे मुझसे कोई शिकायत नहीं”
सिद्धार्थ ने सुना तो उसके मन का बोझ भी उतर गया उसने सुरभि के चेहरे को हाथो में थामा और उसकी आँखों में देखते हुए कहा,”मैं जानता था वो ऐसा ही कहेगी , उसका दिल बहुत बड़ा है सुरभि,,,,,,,,,!!!

कहते हुए सिद्धार्थ ने सुरभि के ललाट को अपने होंठो से छू लिया और कहा,”अब तो तुम मुझसे शादी करोगी ना ?”
“करुँगी लेकिन तुमने तो अभी तक मुझे आई लव यू भी नहीं बोला”,सुरभि ने बच्चो की तरह मुँह बनाकर कहा

सुरभि का चेहरा अभी भी सिद्धार्थ के हाथ में ही था इसलिए उसने अपनी गर्दन को हल्का सा दूसरी तरफ झुकाया और जैसे ही अपने होंठो को सुरभि के होंठो की तरफ बढ़ाया ही था कि तभी दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई और किसी ने दरवाजा खटखटाया। सिद्धार्थ के होंठ सुरभि के होंठो को छू भी नहीं पाए और वह पीछे हट गया।

सुरभि ने सिद्धार्थ की तरफ देखा तो सिद्धार्थ ने सुरभि से दरवाजा खोलने का इशारा किया। सुरभि ने जाकर दरवाजा खोला सामने सुरभि की मम्मी और उसकी मामी खड़ी थी। उन्होंने देखा सिद्धार्थ अंदर है तो सुरभि का हाथ पकड़कर उसे ही कमरे से बाहर बुला लिया और दबे स्वर में कहा,”के बात होगी सुरभि , तू पावणा जी न अठे किया लियायी ?”

सुरभि मुस्कुराई और कहा,”कुछ ना मम्मी ! मन बस कुछ जरुरी बात पूछणी ही सो मैं पूछ ली , अब नीचे चाला ?”
“तू सगाई करन न तैयार तो है न ?”,सुरभि की मम्मी ने धड़कते दिल के साथ पूछा
“अरे मम्मी तैयार हूँ , बहुत ज्यादा तैयार हूँ , अब चालो मुहूर्त निकल जासी”,सुरभि ने कहा तो सुरभि की मम्मी को तसल्ली मिली क्योकि जैसी सुरभि की हरकते थी वह कब कौनसा बम फोड़ थे कोई नहीं जानता था। सुरभि की मम्मी ने मामी से सुरभि को नीचे लेकर चलने को कहा और खुद सिद्धार्थ के बुलाने कमरे में चली गयी !

कुछ देर बाद सिद्धार्थ और सुरभि सभी घरवालों के बीच हाथ में अँगूठिया लिए खड़े। पंडित जी ने दोनों को एक दूसरे को अंगूठी पहनाने को कहा। दोनों ने एक दूसरे को अंगूठी पहनाई और एक खूबसूरत रिश्ता हमेशा के लिए पक्का हो गया। सिद्धार्थ खुश था और सुरभि भी बहुत खुश थी।

आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
सुरभि से बात करने के बाद अवनि को काफी हल्का महसूस हो रहा था। अवनि के दिल के करीब दो लोगो ने उस से बात छुपाई लेकिन सच जानने के बाद अवनि को महसूस हुआ उनका ये सब छुपाना क्यों जरुरी था ? पृथ्वी ने अवनि को प्यार से अपनी मज़बूरी समझाई और सुरभि ने अपनी और अवनि ने दोनों को माफ़ कर उनकी ख़ुशी में अपनी ख़ुशी जताई,,,,,,,,,!!!”

घर का सब काम खत्म होने के बाद अवनि अपना लेपटॉप लेकर हॉल में चली आयी। कितने दिनों से उसने अपने मेल और बाकि चीजे चेक ही नहीं थी। अवनि सोफे पर आ बैठी और लेपटॉप गोद में रखकर उसे चालू किया !

अवनि ने एक एक करके अपने काम की चीजे चेक की और फिर अपना मेल बॉक्स खोला जिसमे ढेरो मेल्स आये हुए थे। अवनि ने एक एक करके उन्हें देखना  शुरू किया तभी एक मेल पर उसकी नजर पड़ी जो आज सुबह सुबह उसे आया था। अवनि ने मेल खोलकर देखा , उस मेल में अवनि को एक नए फॅमिली सीरियल की स्क्रिप्ट के लिए इन्वाइट किया गया था। अवनि ने कम्पनी और डायरेक्टर का नाम देखा तो ख़ुशी से उसकी आँखे चमक उठी। ये तो इस शहर के टॉप डायरेक्टरों में से एक थे।

अवनि ने मेल को दो तीन बार अच्छे से पढ़ा , सभी जानकारी पढ़ी और फिर आखिर में अपनी जानकारी और अपना एक पोर्टफोलियो भेज दिया। अवनि बहुत खुश थी , उसकी शादीशुदा जिंदगी अब सही मोड़ पर थी , घरवालों और पृथ्वी के घरवालों का प्यार भी मिलने लगा था

सुरभि को लेकर भी चीजे क्लियर थी और पृथ्वी , पृथ्वी तो अब उस से और ज्यादा प्यार करने लगा था लेकिन इन सबके साथ ही अवनि का सपना भी अब उसके साथ था और वो था एक बेहतरीन राइटर बनना,,,,,,,,,,,,,,,,!!!
अवनि ख़ुशी ख़ुशी वही सोफे पर बैठकर अपना काम करने लगी।

देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी

भरत की असलियत जानने के बाद प्राची को एक गहरा सदमा लगा उसने कभी सोचा नहीं था कि भरत इतना कमीना निकलेगा। वह थके कदमो से भरत के केबिन से बाहर निकली और बदहवास सी धीरे धीरे चलते हुए मिस्टर देसाई के केबिन की तरफ बढ़ गयी। प्राची ने दरवाजा नॉक किया और अंदर चली आयी। अंदर पृथ्वी मिस्टर देसाई के साथ बैठा उनके लिए कुछ डॉक्युमेंट्स टाइप कर रहा था।

उसकी नजर प्राची पर पड़ी , प्राची की हालत देखकर पृथ्वी समझ गया कि उसके साथ कुछ तो गलत हुआ है लेकिन इस वक्त वह मिस्टर देसाई के सामने प्राची से कुछ पूछ नहीं सकता था इसलिए चुपचाप अपना काम करता रहा।
मायूस चेहरा लिए प्राची सोफे पर आ बैठी , मिस्टर देसाई अपने काम में बिजी थे इसलिए प्राची पर ध्यान नहीं दिया लेकिन पृथ्वी की नजरे बार बार प्राची पर चली जाती।

प्राची कुछ देर वही सोफे पर बैठी रही और फिर उठकर मिस्टर देसाई से कहा,”डेड ! मैं घर जा रही हूँ”
“हम साथ में लंच करने वाले थे प्राची ! तुम इतनी जल्दी घर क्यों जा रही हो ?”,मिस्टर देसाई ने कहा
“अह्ह्ह आप अकेले कर लेना डेड , मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही मैं घर जाकर थोड़ी देर रेस्ट करना चाहती हूँ”,प्राची ने बुझे स्वर में कहा

“ठीक है मैं ड्राइवर को बोल देता हूँ वो तुम्हे घर छोड़ देगा”,मिस्टर देसाई ने कहा और अपने ड्राइवर का नंबर डॉयल करने लगे। ड्राइवर फोन नहीं उठाया तो मिस्टर देसाई बड़बड़ाये,”ये ड्राइवर फोन क्यों नहीं उठा रहा ?”
पृथ्वी के पास प्राची से बात करने का ये अच्छा मौका था इसलिए उसने कहा,”सर ! इफ यू डोंट माइंड ? मैडम को घर मैं छोड़ देता हूँ , एक्चुली मुझे नवी मुंबई में मिस्टर शर्मा से भी मिलना है”

“आर यू स्योर ?”,मिस्टर देसाई ने हैरानी भरे स्वर में कहा क्योकि वो पृथ्वी जो प्राची के नाम से भी चिढ़ता था वो खुद प्राची को घर छोड़ने की बात कह रहा था। प्राची ने भी सुना तो उसे भी हैरानी हुई लेकिन इस वक्त उसका घर जाना ज्यादा जरुरी थी।
“यस सर,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
“ठीक है तुम मेरी गाडी ले जाओ,,,,,,,,,,,!!!”,मिस्टर देसाई ने कहा और अपनी गाडी की चाबी पृथ्वी की तरफ बढ़ा दी। पृथ्वी ने चाबी ली और प्राची के साथ केबिन से बाहर निकल गया।  

ऑफिस से बाहर आकर पृथ्वी ने प्राची से रुकने को कहा और खुद गाड़ी निकालने पार्किंग में चला गया। कुछ देर बाद मिस्टर देसाई की गाडी आकर प्राची के सामने रुकी , प्राची ने पृथ्वी के बगल में ना बैठकर गाडी की पिछली सीट का दरवाजा खोला और अंदर बैठ गयी।

पृथ्वी हल्का सा मुस्कुराया , अब उसे पूरा यकीन हो चुका था कि प्राची पूरी तरह से बदल चुकी है वरना पुरानी प्राची होती तो वह पृथ्वी के साथ बैठने का मौका कभी ना गवाती,,,,,,,,,,,पृथ्वी ने गाडी आगे बढ़ा दी और वहा से निकल गया। अपने केबिन की खिड़की के पास खड़ा भरत पृथ्वी और प्राची को साथ जाते देख रहा था , उसके चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये क्योकि इसकी उम्मीद तो खुद भरत ने भी नहीं की थी।

विक्रम का फार्म हॉउस , मुंबई
घायल विक्रम दिवार से पीठ लगाये बैठा था और उसके ठीक सामने जमीन पर नीलेश बैठा उसे घूर रहा था। बीती रात विक्रम को मारने के बाद भी नीलेश को तसल्ली नहीं मिली थी इसलिए वह उसे सबक सिखाने फिर उसी जगह चला आया लेकिन विक्रम की हालत इतनी बुरी थी कि उसे देखकर नीलेश ने उसे नहीं मारा और वही बैठकर उसके होश में आने का इंतजार करने लगा। नीलेश नहीं चाहता था ये बात बाहर आये और प्राची की इमेज ख़राब हो इसलिए उसने फार्म हॉउस आकर नीलेश को समझाना बेहतर समझा।

विक्रम को होश में आया देखकर नीलेश ने पास ही जमीन पर पड़ा पानी का गिलास उठाया और उसका पानी विक्रम के मुँह पर फेंक दिया जिस से विक्रम पूरी तरह होश में आ गया ! जैसे ही विक्रम की नजर नीलेश पर पड़ी गुस्से से उसकी आँखे जल उठी लेकिन वह इस हालत में नहीं था कि नीलेश को मार सके , उसने कहा,”तुम यहाँ क्या कर रहे हो ?”

नीलेश ने सुना तो एक नजर विक्रम को देखा और कहा,”आया तो तुम्हे मारने हूँ लेकिन तुम्हारी हालत देखकर मुझे तुम पर तरस आ रहा है इसलिए प्लान चेंज , मैं यहाँ तुम्हे पहली और आखरी बार समझाने आया हूँ। कल जो हरकत तुमने प्राची के साथ की है वो बहुत गलत थी , मैं मानता हूँ प्राची एक बहुत ही जिद्दी , घमंडी और खुदगर्ज लड़की है लेकिन वो कैरेक्टरलेस नहीं है। तुमने ये सोच भी कैसे लिया कि तुम उसके साथ ऐसी घटिया हर कर सकते हो ?

उसने तुमसे दोस्ती की , तुम्हारे साथ वक्त बिताया , थोडी सी तुम्हारे साथ फ्रेंक क्या हुई तुमने ये कैसे मान लिया कि तुम्हे उसे छूने का लायसेंस मिल गया ? उसे हाथ लगाने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ? तुम जानते भी हो तुमने कितनी बड़ी गलती है,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”

“हाह ! कैसा लायसेंस ? उसके साथ ये सब करने के लिए मुझे उसकी परमिशन की क्या जरूरत ? ऐसी लड़कियों के साथ ऐसा ही होता है,,,,,,,,,,,उस पृथ्वी के साथ भी तो यही सब करने वाली थी वो,,,,,,,उसके लिए तो वह कुछ भी करने को तैयार थी”,विक्रम ने नफरत भरे स्वर में कहा

नीलेश ने प्राची के लिए जैसे ही गलत सुना एक घुसा विक्रम के मुँह पर मारकर कहा,”ऐसी लड़की से क्या मतलब है तुम्हारा ? वो बुरी लड़की नहीं है , पृथ्वी को हासिल करने की अपनी जिद और ईगो के चलते उसने सबकी नजरो में खुद को बुरा बना लिया था।  

लेकिन तुम्हे उसके साथ ये सब करने का हक़ तुम्हे किसने दिया ? चाहू तो अभी तुझे जेल में डाल सकता हूँ लेकिन ये करके मैं प्राची को ठेस पहुँचाना नहीं चाहता , उसे और तकलीफ नहीं देना चाहता लेकिन आइंदा अगर मैंने तुझे उसके आस पास भी देखा या तुमने उसे कोई नुकसान पहुंचाने का सोचा भी तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा”
नीलेश की बातो में प्राची के लिए झलकते प्यार को देखकर और उसका गुस्सा देखकर विक्रम चुप हो गया उसे अहसास हुआ कि शराब के नशे में उस से गलती तो हुई है ,

उसने नीलेश से कुछ नहीं कहा ना ही वह इस हालत में था कि नीलेश का सामना कर पाए , विक्रम वही निढाल होकर गिर पड़ा और नीलेश उसे उसी हाल में छोड़कर चला गया। फार्म हॉउस से बाहर आकर नीलेश ने मिस्टर कपूर के ऑफिस में फोन करके विक्रम की खबर दे दी और वहा से चला गया !

 ड्राइवर सीट पर बैठा पृथ्वी ख़ामोशी से गाडी चला रहा था और पीछे बैठी प्राची के जहन में एक साथ सेंकडो ख्याल चल रहे थे और फिर उसने एकदम से पृथ्वी से कहा,”डेड ने फार्म हॉउस जाने के लिए तुम्हे कहा था फिर तुमने नीलेश को वहा क्यों भेजा ?”

प्राची का सवाल सुनकर पृथ्वी ने एकदम से ब्रेक मारा क्योकि प्राची के इस सवाल पर वह थोड़ा हैरान था , उसने तो प्राची को नहीं बताया था कि उसे लेने फार्म हॉउस वह आने वाला था। पृथ्वी को खामोश देखकर प्राची ने थोड़ा तकलीफ भरे स्वर में कहा,”क्या तुम पहले से विक्रम की गन्दी नियत के बारे में जानते थे ?”
प्राची का दूसरा सवाल सुनकर भी पृथ्वी खामोश रहा ये देखकर प्राची की आँखों में आँसू भर आये वह गाडी का दरवाजा खोलकर नीचे उतर गयी और साइड में चली आयी।

वह अंदर से भरी हुई थी , उसे समझ नहीं आ रहा था अपने अंदर भरी इन भावनाओ को वह कैसे बाहर निकाले ?
पृथ्वी ने गाडी साइड में लगाईं और उतरकर प्राची के पास चला आया। वह प्राची से कुछ दूरी बनाकर खड़ा हो गया और सामने देखते हुए कहा,”क्या तुम रोना चाहती हो ?”

ऑफिस में मैडम और आप लेकिन ऑफिस के बाहर पृथ्वी के मुँह से अपने लिए तुम सुनकर प्राची थोड़ा हैरान थी , वह पृथ्वी को समझ नहीं पा रही थी , उसने नम आँखों से पृथ्वी की तरफ देखा !

उसकी आँखों में भरे आँसू किसी भी वक्त बाहर आने को बेताब थे। पृथ्वी अभी खामोशी से सामने देख रहा था उसने फिर अपनी बात दोहराई,”तुम रो सकती हो मैं तुम्हे जज नहीं करूंगा , वैसे भी यहाँ हम दोनों के अलावा तीसरा कोई नहीं है”
पृथ्वी का इतना कहना था कि प्राची फूट फूट कर रोने लगी। उसके अंदर भरी तकलीफ और अपने ही पिता के खिलाफ जाने का भाव आँसुओ के रूप में बहने लगा। पृथ्वी को प्राची के रोने से कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ा वह चुपचाप शांत खड़ा था।

कुछ देर बाद उसने अपनी जेब से रुमाल निकाला और सामने देखते हुए प्राची की तरफ बढ़ा दिया। प्राची ने रुमाल लिया अपनी आँखे और अपना चेहरा पोछा। रुमाल उसके हाथ में ही था उसने वापस पृथ्वी को नहीं दिया। पृथ्वी ने प्राची को वही छोड़ा और खुद गाडी की तरफ चला आया , उसने गाड़ी में रखी पानी की बोतल उठायी और आकर प्राची की तरफ बढ़ा दी।

प्राची ने पानी पीया , अब जाकर उसे थोड़ा अच्छा लग रहा था , उसकी घुटन कुछ कुछ कम हो चुकी थी हालाँकि दो दिनों में उसके साथ जो घटा वह अभी भी उसके जहन में चल रहा था। प्राची ख़ामोश खड़ी सामने खाली पड़ी सड़क को देखती रही।  

इतनी देर खामोश रहने के बाद आख़िरकार पृथ्वी ने अपनी चुप्पी तोड़ी और सामने देखते हुए कहा,”मैं जानता था विक्रम एक निहायती घटिया और गिरा हुआ इंसान है लेकिन ये बात अगर मैं तुम से कहता तो शायद तुम मेरा यकीन नहीं करती और वो इसलिए कि मुझे रास्ते पर लाने के लिए तुमने खुद उसका साथ चुना”
प्राची ने जैसे ही सुना हैरानी से पृथ्वी की तरफ देखा , वह सोचा में पड़ गयी पृथ्वी ये सच कैसे जानता है ? 

( क्या सुरभि और सिद्धार्थ की शादी में आएगी कोई दिक्कत या सब सम्हाल लेंगे दोनों ? क्या विक्रम लेगा नीलेश से अपनी इस मार का बदला या हो जायेगा प्राची से दूर ? क्या पृथ्वी पहले से जानता था प्राची की सच्चाई ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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