Manmarjiyan Season 5 – 37
Manmarjiyan Season 5 – 37

शगुन ने गुड्डू को अपने होने वाले बच्चे की कसम खाकर कहने को कहा कि वह अब कोई ऐसा कांड नहीं करेगा जिस से घरवाले परेशान हो। अब गुड्डू तो गुड्डू है , वह अच्छे से जानता था कि वह साँस लिए बिना रह सकता है लेकिन उसके जीवन में कोई कांड ना हो ऐसा हो ही नहीं सकता था। गुड्डू ने शगुन के पेट से अपना हाथ पीछे खींचा और कहा,”का पगला गयी हो का शगुन ? अरे जे बात के लिए इह मासूम की कसम खाने की का जरूरत है ? अरे इह बेचारा तो अभी जे दुनिया मा आया भी नाही”
“मतलब आप नहीं सुधरेंगे ?”,शगुन ने गुड्डू को घूरकर पूछा
“अरे सुधर जायेंगे मालिक थोड़ा बख्त तो दयो हमे और वैसे भी हमहू पता लगाय लिये है,,,,,,,,,,,इह साले सारे कांड ना उह्ह्ह गोलुआ की वजह से होते है। उह्ह्ह हमे उलटे सीधे आइडिआ देता है और हमहू फंस जाते है,,,,,,,,,हम ना कुछ दिन उस से मिलेंगे ही नाही”,गुड्डू ने कहा
“मिलना तो पडेगा ना गुड्डू जी ! आप और गोलू जी ने साथ साथ बिजनेस जो शुरू किया है”,शगुन ने ऐसे कहा जैसे गुड्डू को कोई ताना मार रही हो
“हाँ तो ठीक है ना , बिजनेस पार्टनर की तरह मिल लेंगे पहिले की तरह एक दूसरे के फट्टे मा टाँग नाही अड़ाएंगे”,गुड्डू ने चिढ़कर कहा जबकि गोलू से दूर जाना उसे भी अच्छा नहीं लग रहा था।
“अच्छा और कितने दिन चलेगा ये ड्रामा ?”,शगुन ने कहा
“यार शगुन ! तुमहू तो बड़ा भिगो भिगो कर मार रही हो हमे , अच्छा छोडो इह सब हमाये कपडे निकाल दयो हमको नहाने जाना है ओह्ह्ह के बाद पिताजी हमे बुलाये है बात करने को,,,,,,,,,,,पतो नाही अब हमरा और गोलुआ का कौनसा कच्चा चिट्टा ओह्ह के हाथ लगो है,,,,,,,,,तुमहू कपड़ा रख देओ हमहू नहाकर आते है”,गुड्डू ने कहा और तौलिया उठाकर नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया।
गुप्ता जी का घर , कानपूर
गोलू जो पूड़ी सब्जी नाश्ते में लाया था गुप्ता जी ने वह अकेले ही निपटा दी , गोलू और मंगल फूफा को तो देखने तक को नहीं मिली। खा पीकर गुप्ता जी ने जोर से डकार मारी और वही झूले पर पसर कर सो गए। सीढ़ियों पर बैठे गोलू ने देखा तो मंगल फूफा से कहा,”देख रहे हो फूफा , इह आदमी 16 पूड़ी और दुइ दोना सब्जी अकेले खा गवा उह्ह्ह भी चार इमरती के साथ पर इह नाही कि दुइ ठो पूड़ी अपनी औलाद को भी देइ दे,,,,,,,,,,,,,उह्ह्ह कहावत है ना कि बुढ़ापे मा बचुआ लोग अपने बाप का जमीन जायदाद खाय गए ,
हमाये में जे कहावत उलटी रहय हिया जमीन जायदाद भी बाप ही खाये और हमाये हिस्से की पूड़ी सब्जी भी,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“हिया हमाई रूपा हमे छोड़कर चली गयी और तुमको पूड़ी सब्जी की पड़ी है,,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने सुबकते हुए कहा
“अरे अब चली गयी तो चली गयी , अब का ओहके खातिर हिया बैठकर मातम मनाओगे ? और जे ही हाल रहो ना फूफा तो उह्ह्ह दिन भी दूर नाही जब तुम्हायी तेहरवी की पूड़ी खाय रहे होंगे हम,,,,,,,,,,,,!!!!”,गोलू ने मुँह बनाकर कहा
एक तो मंगल फूफा का दिल टूटा था ऊपर से गोलू उनकी तेहरवी की पूड़ी खाने की बात कर रहा था। मंगल फूफा ने इधर उधर देखा पास ही पड़ा जुत्ता उनके हाथ लगा और वे गोलू को मारने उठे , गोलू ने देखा तो भाग खड़ा हुआ लेकिन मंगल फूफा जूता उठाकर गोलू के पीछे , भागते भागते गोलू झूले के सामने आ रुका और हाँफते हुए कहा,”अबे ! उह्ह्ह रूपा का बदला तुमहू हमसे काहे ले रहे हो बे ? ए फूफा ना करो लग जाएगी , वैसे भी कल से मार खाकर हमाओ पेट पहिले से भर रहो है,,,,,,,,,,,,,!!!”
मंगल फूफा कहा गोलू की सुनने वाले थे उन्होंने खींचकर फेंका जूता गोलू पर , गोलू नीचे बैठ गया और जूता जाकर लगा सीधा गुप्ता जी के मुँह पर और गुप्ता जी हड़बड़ाकर उठे। गुप्ता जी ने गुस्से से गोलू को देखा और कहा,”इह जूता कौन फेंका हम पर ?”
“उह्ह्ह मंगल फूफा मारे पिताजी”,गोलू ने मंगल फूफा की तरफ इशारा करके कहा तो मंगल फूफा घबराकर गुप्ता जी के सामने आया और कहा,”नहीं नहीं नहीं हम नाही मारे इह झूठ बोल रहा है,,,,,,,,,,!!!”
गोलू ने सुना तो मंगल फूफा की तरफ देखकर गुस्से से कहा,”अबे हम काहे मारेंगे अपने पिताजी को ? साले तुम्ही तो हमे मारने के लिए पीछे भाग रहे थे अब झूठ काहे बोल रहे हो ?”
मंगल फूफा फंस गए कहे तो कहे क्या करे तो करे क्या ? सामने बैठे गुप्ता जी गुस्से से एकटक मंगल फूफा को ही देख रहे थे और फिर दाँत पीसकर कहा,”साम से पहिले अपना बोरिया बिस्तरा उठाकर जे घर , मोहल्ला नाही बल्कि जे शहर से ही बाहिर निकल जाओ,,,,,,,,,,,,,बहुत देख ली तुम्हायी छोटी टाँगो की भागदौड़ अब जाकर इन्ही टाँगो से अपना बीहड़ नापो समझे,,,,,,,,,,,,,,!!!”
मंगल फूफा ने खा जाने वाली नजरो से गोलू को देखा क्योकि गोलू की वजह से ही तो गुप्ता जी उस पर भड़के है और इतना बड़ा फैसला सुना दिया। मंगल फूफा मासूम सी शक्ल बनाकर गुप्ता जी को देखने लगे तो गुप्ता जी ने कहा,”इह मासूम सकल का जादू हम पर नाय चली है ,
अपना पेटी बांधो और निकलो हिया से , एक इह नमूना कम था हमायी जिंदगी मा चरस बोने के लिए जो अब तुमहू भी हिया डेरा जमाय लिए,,,,,,,,,,बहुते बर्दास्त कर लिए हम तुमको अब और नाही , साला कर तुम्हरे चक्कर मा मिश्रा से भी चप्पल खाये है हम,,,,,,,,,अब का नंगा करके छोड़ोगे हमे ? अरे बोलते काहे नाही मुँह मा जबान नाही है का ?”
गुप्ता जी की फटकार सुनकर मंगल फूफा का चेहरा उतर गया। रूपा तो पहले ही उनका दिल तोड़कर जा चुकी थी और अब गुप्ता जी ने भी उन से छत का सहारा छीन लिया। कानपूर आने के बाद मंगल फूफा की डाकूगिरि पहले ही खत्म हो चुकी थी अब भला अपना टुटा दिल लेकर वो कहा जायेंगे ? मंगल फूफा को खामोश देखकर गुप्ता ने कहा,”अबे का हुआ ! हमायी बात सुन के सदमा लग गवा ?”
“आपकी बाते सुन के तो अच्छा भला आदमी स्वर्ग सिधार जाए सदमा का चीज है ?”,गोलू ने अपने नाख़ून चबाते हुए धीमे स्वर में कहा लेकिन पास ही खड़े गुप्ता जी ने सुन लिया क्योकि उनके कान बहुत तेज थे। उन्होंने गोलू को एक थप्पड़ मारा तो गोलू ने अपना हाथ उनके सामने किया और भड़ककर कहा,”बस,,,,,,,,,,,हमाओ भी टेंट को बिजनेस है , हमायी भी कोनो इज्जत है कानपूर मा”
गुप्ता ठहरे गोलू के बाप , गोलू को थप्पड़ मारने के लिए भला उन्हें किसी की परमिशन थोड़ी लेनी पड़ती है , उन्होंने खींचकर दुसरा थप्पड़ मारा और कहा,”तो का नाचे ? साला गली-मोहल्ला मा दुइ चार टेंट लगाने के अलावा का ही उखाड़ लिए हो तुम और उह्ह्ह गुडडुआ ?”
गुड्डू का नाम सुनकर गोलू और ज्यादा भड़क गया और कहा,”ए पिताजी ! हमको जो कहना है कहिये गुड्डू भैया के बारे मा एक ठो बात नाही सुनेंगे समझे”
“काहे उह्ह तुम्हायी मेहरारू लगती है ? जियादा गुड्डू प्रेम जाग रहा है ना तो जाओ जाकर अपने गुड्डू भैया के साथ ही रहो,,,,,,,,,!!”,गुप्ता जी ने गोलू का कान मरोड़कर कहा और फिर उसे फिर उसे मंगल फूफा की तरफ धकियाकर वहा से चले गए।
गोलू मंगल फूफा की बाँहो में जा गिरा तो उन्होंने गोलू को अपनी बाँहो में सम्हलाकर कहा,”देखा ! हम नाही सम्हालते तो अभी धरती पर गिरे होते तुम”
गोलू ने सुना तो बुरा सा मुँह बनाया और कहा,”हुंह ! रूपा तो तुमसे सम्हाली नहीं गयी फूफा और हमे सम्हालोगे ?”
रूपा का नाम सुनकर मंगल फूफा का दिल फिर टूट गया लेकिन गोलु भूल गया था कि वह मंगल फूफा की बांहो में है और अब तक उसके साथ रहते रहते मंगल फूफा को भी गोलू की हवा लग चुकी थी इसलिए उन्होंने गुस्से से गोलू को छोड़कर कहा,”हमाये जले पर नमक छिड़कना बंद करो तुम”
गोलू नीचे गिरा तो बेचारे के पुर्जे पुर्जे में दर्द हो उठा , वह उठा और गुस्से में आकर मंगल फूफा को ही पीट दिया क्योकि गोलू के हिसाब से उसकी जिंदगी में जो फिलहाल चल रहा था उसकी वजह से मंगल फूफा ही थे।
गोलू से मार खाकर मंगल फूफा वही जमीन पर पैर पसारे बैठ गए , बाल मुँह हाथ पैर सब आँगन की मिटटी से भरे और मुँह सुजा हुआ , एक आँख घुसे से काली तो दूसरी मार की वजह से लाल , शर्ट के सारे बटन टूट चुके थे और खुले शर्ट से उनका मटके जैसा पेट और छाती के घने बाल साफ़ नजर आ रहे थे।
आँखों से मोटे मोटे आँसू बह रहे थे और मंगल फूफा ने रोते हुए कहा,”आओ मारो हमको , हमको ज़िंदा कहे छोड़ दिए ? पहिले उह्ह्ह रूपा हमाओ दिल तोड़ के चली गयी अब तुमहू भी हमाओ हौसलों तोड़ देओ , अरे आओ ना”
मारा मारी और उठा पटक में चोट गोलू को भी लगी थी इसलिए उसने मुँह बनाया और सीढ़ियों पर आ बैठा।
मंगल फूफा पर गुस्सा तो बहुत आ रहा था उसे लेकिन दिल टूटने वाली बात सुनकर फिर से उसे मंगल फूफा पर दया आने लगी और उसने ऊँचे स्वर में कहा,”अरे ए फूफा ! इह रोना बंद करो शाम मा लेकर चलेंगे तुमको अच्छी जगह , जहा रूपा तो का ओह्ह्ह की परछाई तक भूल जाहि हो तुमहू,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू की बात सुनकर मंगल फूफा चुप हो गए और गोलू की तरफ देखा और अगले ही पल जोर से फिर रोने लगे।
गोलू उठकर आया और मंगल फूफा का मुँह बंद करके कहा,”अरे चुप हो जाओ चुप हो जाओ , रोते हुए और ज्यादा बुरे लगते हो तुमहू,,,,,,,,अरे चुप हो जाओ”
मंगल फूफा चुप हो गए तभी सामने से गुप्ताइन दरवाजा खोला और इधर उधर देखा गुप्ता जी कही नजर नहीं आये तो गोलू से कहा,”ए गोलुआ ! तुम्हाये पिताजी कहा गए ?”
गोलू गुप्ता जी और मंगल फूफा से अच्छा खासा चिढ़ा हुआ था इसलिए गुप्ताइन के पास आया और तुनककर कहा,”उह्ह्ह आपके पति है हमाये नाही जो हम उनके पीछे पीछे घूमेंगे”
गुप्ता जी से दो कदम आगे गुप्ताइन थी क्योकि उन्होंने गोलू महाराज को जन्म दिया था और अब गोलू उनसे बदतमीजी से बात करे ये भला उनको कहा बर्दास्त होता तो उन्होंने खींचकर गोलू को एक चाँटा मारा और कहा,”लाज शरम भूल गए हो , अपनी अम्मा से अब ऐसे बात करोगे ?”
गोलू जैसे ही कुछ कहने को हुआ गुप्ताइन ने दूसरे गाल पर भी चाँटा मारा और कहा,”अपने बाप से बकैती करनी है करो , हमसे किये ना तो पिछवाड़े पर इतना सोट मारेंगे कि हफ्तों तक बैंठने के लिए तरस जाओगे,,,,,,,,,,,,,,,,,,बुड़बक कही के”
गोलू गुस्से से उबल पड़ा और कहा,”अरे हम का जे घर की डोरबेल है जो आप और पिताजी जब देखो तब वक्त बेवक्त हमे बजाते रहते हो ? ए अम्मा ! सुनो हमायी बात , अब हम हो गए है बड़े अब हमको भी चाहिए जे घर मा फुल इज्जत , का समझी ?”
गुप्ताइन कुछ समझे न समझे लेकिन गोलू थप्पड़ की भाषा ही समझता था इसलिए गुप्ताइन ने एक और थप्पड़ उसके गाल पर रसीद करके कहा,”बाहिर जाकिर ल्यो जो लेना है”
गोलू कुछ समझ पाता इस से पहले गुप्ताइन ने घर का दरवाजा फिर से बंद किया और अंदर चली गयी। गर्मागर्म थप्पड़ खाकर गोलू मुँह लटकाये मंगल फूफा के पास चला आया जो अभी तक जमीन पर पैर पसारे बैठे थे।
गोलू भी उनके बगल में आ बैठा और अपने पैर पसार कर मंगल फूफा की तरफ देखा तो फूफा ने जले पर नमक छिड़क कर कहा,”मिल गयी फुल इज्जत ?”
गोलू ने जैसे ही सुना सामने बंद दरवाजे की तरफ देखा और मुँह फाड़कर रोने लगा , मंगल फूफा हैरानी से उसे देखने लगे तो गोलू रुका मंगल फूफा की तरफ देखा और फिर दोनों ने बंद दरवाजे को देखकर एक साथ राग अलापा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
मिश्रा जी का घर , कानपूर
गुड्डू नहाकर आया , बिस्तर पर रखे कपडे उठाये और पहनकर शीशे के सामने चला आया। गुड्डू ने अपने चेहरे को चमकाया , बालों में जेल लगाकर उन्हें जमाया , भर भर कर सेंट लगाया , कलाई में घडी पहनी और दूसरे हाथ में शगुन का पहनाया कड़ा था ही,,,,,,,,,,,,,आज कितने दिनों बाद गुड्डू इतने अच्छे से तैयार हुआ था। एक वक्त था जब गुड्डू तैयार होने के बाद खुद को इत्मीनान से निहारा करता था , दिन में चार जोड़ी कपडे बदलता था , नए नए परफ्यूम की खुशबु से महकता रहता था लेकिन अब तो बेचारे के नहाने के भी लाले पड़े थे।
ऐसी ऐसी चीजों में फंसता कि दो दो दिन तक एक जोड़ी कपडे में घूमता रहता , खाने का शौकीन गुड्डू सुकून से खाना तक नहीं खा पाता था और चैन की नींद तो जैसे भूल ही चुका था क्योकि अब तो नींद में भी उसे अपने और गोलू के कांड वाले सपने आते थे। गुड्डू शीशे के सामने हटा तो शगुन उसके लिए चाय ले आयी और टेबल पर रखते हुए कहा,”गुड्डू जी ! आपकी चाय”
“जे चाय तुम बनायीं हो ?”,गुड्डू ने हैरानी से पूछा
“हाँ,,,,,,,,,,,!!!”,शगुन ने छोटा सा जवाब दिया
गुड्डू शगुन की तरफ आया और चाय का कप उठाकर मुस्कुराते हुए कहा,”इह का मतलब तुमने हमे माफ़ किया,,,,,,,,,तुमहू ना सच में बहुते अच्छी हो शगुन बताओ का चाहिए तुम्हे , हम तुम्हाये लिए लेकर आएंगे”
शगुन ने गुड्डू की तरफ देखा और कहा,”पक्का मांग ले ?”
“अरे हाँ ! दिल बहुते बड़ो है हमाओ , तुमहू माँगो का चाहिए ?”,ख़ुशी ख़ुशी में गुड्डू ने कुछ ज्यादा ही बोल दिया
शगुन गुड्डू के पास आयी और उसकी आँखों में देखकर कहा,”मुझे आपका वक्त चाहिए गुड्डू जी,,,,,,,,मुझे वही पुराना गुड्डू चाहिए जो मुझे तंग करता था , परेशान करता था , अपनी बातो से हसाता था , मुझे वही गुड्डू चाहिए जो मेरा हाथ थामकर अपने मन की सारी बात बताया करता था ,
मुझे वही गुड्डू चाहिए जो हीरो बनकर अपनी बुलेट पर मुझे घुमाया करता था और अपने हाथ से पाव-भाजी खिलाया करता था , मुझे वही गुड्डू चाहिए जिन्हे देखकर पापा जी और माजी खुश होते थे,,,,,,,,,,,,,क्या आप मुझे ये दे पाएंगे ?”
गुड्डू ने सुना तो खामोश हो गया , उसने महसूस किया कि वह पहले से कितना बदल गया है। पहले उसके पास सबके लिए वक्त होता था लेकिन अब तो उसके पास खुद के लिए भी वक्त नहीं था। शगुन पेट से है ऐसे में उसे सबसे ज्यादा जरूरत गुड्डू के प्यार और परवाह की है लेकिन गुड्डू के पास तो शगुन के लिए भी वक्त नहीं था।
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( क्या गुप्ता जी निकाल देंगे मंगल फूफा की हरकतों से तंग आकर उन्हें अपने घर से या गोलू लगा लेगा फिर कोई जुगाड़ ? क्या सुधर पाएगी गोलू की जुबान या ऐसे ही खाता रहेगा वह सबसे मार ? क्या सच में बदल गया है गुड्डू ?जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )
Continue With Manmarjiyan Season 5 – 38
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संजना किरोड़ीवाल

