Manmarjiyan Season 5 – 5

Manmarjiyan Season 5 – 5

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

पिकअप गुप्ता जी के घर के सामने आकर रुकी और जैसे ही लवली ने ब्रेक मारा सब एक बार फिर एक दूसरे में आ गिरे। मिश्रा जी सम्हले और पिकअप से नीचे उतरकर दबी आवाज में गुप्ता जी को उठाने लगे क्योकि घर उनका था तो घर का दरवाजा तो वही खुलवाएंगे ना। गुप्ता जी घोड़े बेच के सो रहे थे। मिश्रा जी ने देखा तो गुप्ता जी को झंझोड़कर दबे स्वर में कहा,”अबे गुप्ता ! अबे उठो ! पहले का तबेले मा सोते थे ? उठो बे”

गुप्ता जी हड़बड़ाकर उठे और नीचे चले आये। तबेले का नाम सुनकर यादव जी अंगड़ाई लेकर उठे और उबासी लेकर कहा,”हमाये तबेले की तरफ नजर नाही डालना गुप्ता”
“अबे तुम और तुमहाओ तबेला गवा दूध लेने,,,,,,,,,नीचे उतरो और भाग जाओ हिया से”,मिश्रा जी ने गुस्से से लेकिन दबे स्वर में कहा

यादव जी आँखे मसलते हुए गुप्ता जी के घर की तरफ जाने लगे तो गुप्ता जी ने उनकी गुद्दी पकड़कर दूसरी तरफ करके कहा,”इधर नाही उधर मरो”
यादव जी अपने घर की तरफ चले गए मिश्रा जी ने राहत की साँस ली आखिर एक मुसीबत तो सही सलामत अपने घर पहुंची।
“ए गुप्ता ! अंदर फोन करके दरवाजा खोलने को कहो”,मिश्रा जी ने कहा

“हमहू फोन किये ना तो गोलुआ की अम्मा के साथ साथ पुरे मोहल्ले को पता चल जाएगा आपका लौंडा लड़की भगाकर लाया है और उह्ह्ह हाल्फ टिकट रूपा को,,,,,,,,,,हम तो कहते है”,गुप्ता जी ने आखिर शब्द बहुत ही सस्पेंस से कहे
“का कहते हो ?”,मिश्रा जी ने हैरानी से पूछा क्योकि गुप्ता जी की बातें उनके सर के ऊपर से जा रही थी।

गोलुआ को दिवार फांदकर अंदर जाने को कहते है और चुपचाप बिना गुप्ताइन को पता चले दरवाजा खोलने को कहते है,,,,,,,,,,,,,कहो कैसो है हमाओ आइडिआ ?”,गुप्ता जी ने खुश होकर कहा
“तुमहाओ जे आईडिया काम करेगो ?”,मिश्रा जी ने शंका जताई
“अरे बिल्कुल काम करे है रुको हमहू दिखाते है,,,,,,,,,,,,,गोलू , ए गोलू”,गुप्ता जी ने मिश्रा जी से कहा और गोलू की तरफ पलटकर बोले।

गोलू गुड्डू के कंधे पर सर टिकाये मुँह फाड़े आराम से सो रहा था। गुप्ता जी की आवाज उसके कानों तक पहुंची भी नहीं। गुप्ता जी ने दो चार बार फिर बोला लेकिन गोलू टस से मस ना हुआ ये देखकर मिश्रा जी ने झुककर अपने पैर से सेंडिल निकाली और गुप्ता जी को साइड करके कहा,”जे दोनों ऐसे ना उठे है”
गुप्ता जी कुछ समझते इस से पहले मिश्रा जी खींचकर सेंडिल दे मारा। मिश्रा जी का निशाना इतना पक्का कि एक ही सेंडिल से गुड्डू और गोलू दोनों को मार पड़ी और दोनों हड़बड़ाकर उठे !

मिश्रा जी को सामने खड़े देखकर गुड्डू ने खुद से चिपके गोलू को धक्का देकर साइड में फेंक दिया। गोलू का सर पिकअप की दिवार से जा टकराया , वह अपना सर सहलाते हुए नीचे आया और मिश्रा जी को घूरने लगा तो मिश्रा जी ने कहा,”का ! घूर का रहे हो ?”
“किसी सोये हुए भले आदमी को नींद से उठाने का जे कौनसा तरीका है ?”,गोलू ने कहा

“ए बेटा ! जे सब सवाल अंदर चलकर पूछ लेना पहिले हमायी बात ध्यान से सुनो। दिवार पर चढ़कर अंदर कूदो और दरवाजा खोलो”,गुप्ता जी ने गोलू के कंधो पर बाँह रखकर उसे दिवार की तरफ लाकर कहा
“मतलब अपने ही घर मा चोरो की तरह जाए हमहू ?”,गोलू ने कहा
“तो का तुम्हायी अम्मा से दरवाजा खुलवाए ? अबे अंदर जाओ और दरवाजा खोलो , साला सबको फ़ोकट का ज्ञान बाटना है बस”,गुप्ता जी ने गोलू को दिवार के सामने धकियाकर कहा

गोलू उछलकर दिवार पर चढ़ा और अंदर कूद गया। कुछ देर बाद घर का दरवाजा खुला और गोलू ने बाहर झाँककर कहा,”पिताजी ! आज जाईये”
“चलिए मिश्रा जी ! ए लबली , पिकअप को डायरेक्ट अंदर ही लेइ ल्यो”,गुप्ता जी ने कहा और मिश्रा जी के साथ अंदर की तरफ चले गए। पिकअप अंदर आकर रुकी। सुबह हो चुकी थी लेकिन सूरज अभी निकला नहीं था इसलिए हर तरफ बस अँधेरा ही अँधेरा था।

लवली पिकअप से नीचे उतरा साथ ही बिंदिया और रूपा को भी नीचे उतारा। पीछे बैठे मंगल फूफा , गुड्डू , मनोज , शर्मा जी और आदर्श फूफा भी नीचे उतर आये और अंगड़ाई लेकर मिश्रा जी से कहा,”अपने घर जाने के बजाय आप सबको हिया काहे ले आये ?”

“ज़रा हालत देखो अपनी , जे हालत मा तुम सब घर जा पाओगे ?”,मिश्रा जी ने कहा और उनकी नजर पड़ी बगल में खड़े गुड्डू पर जो शादी के लहंगे को अपने दोनों हाथो में पकड़कर दाँये बाँये घूम रहा था। ये नजारा देखकर मिश्रा जी चिढ गए और कहा,”बेटा ! ए बेटा ! जे लहंगा पहिन कर खुद को गोलुआ की दुल्हिन तो नाही समझ लिए हो तुम , अबे हिलना बंद करो”

मिश्रा जी की बात सुनकर गुड्डू ने जल्दी से लहंगा छोड़ा और गोलू के पास आकर कहा,”ए गोलू ! हमको पहिनने के लिए कुछो कपड़ा दो ना,,,,,,,,,जे कपड़ो मा बहुते अजीब लग रहा है हमे”
गोलू ने इधर उधर देखा बाथरूम के बाहर तार पर सूखता गुप्ता जी का कुर्ता और साथ में लूंगी दिखी तो गोलू गुड्डू को लेकर उस तरफ चला गया।

लवली किसी से बात करने की हालत में नहीं था इसलिए बिंदिया को लेकर सीढ़ियों पर आ बैठा। रूपा भी आकर उनके बगल में बैठ गयी। मंगल फूफा मार खाकर ठीक से चलने फिरने की हालत में नहीं थे लेकिन रूपा के बगल में बैठने का लालच नहीं छोड़ पाए और उसकी बगल में आ बैठे। आदर्श फूफा को कोई पुरानी बात याद आयी और वे मुँह फुलाकर यहाँ से वहा घूमने लगे।

मिश्रा जी और गुप्ता जी साथ खड़े उन्हें देख रहे थे और शर्मा जी प्यास के मारे पानी ढूंढते हुए बाथरूम की तरफ चले आये। वे बंद आँखों से दिवार को टटोलते हुए आगे बढ़ रहे थे।

गोलू के कहने पर गुड्डू ने गुप्ता जी का कुरता पहना जो कि बहुत ही लंबा और ढीला था लेकिन लहंगे से तो ठीक ही था। कुर्ते के नीचे गुड्डू ने लूंगी पहनी और गोलू से कहा,”यार गोलू ! जे हमाये पिताजी घर जाने के बजाय हिया तुम्हाये घर काहे चले आये ?”
“गुड्डू भैया ! का पता मिश्रा जी को हमे साबासी देनी हो ?”,गोलू ने खुश होकर कहा और गुड्डू को साथ लेकर बाकि सबकी तरफ चल पड़ा

“साबासी ! लेकिन साबासी किस बात की गोलू ? अभी थोड़ी देर पहिले तो चप्पल मारकर स्वागत किये रहय उह्ह्ह हमारा , तुमको लगता है उह्ह्ह साबासी देंगे ?”,गुड्डू ने मुँह बनाकर कहा क्योकि सुबह सुबह मिश्रा जी की चप्पल खाने को जो मिल चुकी थी।

“अरे गुड्डू भैया ! उह्ह्ह तो चचा का पियार है हम दोनों के लिए , जब तक एक आध थप्पड़ एक आध चप्पल मार ना दे ओह्ह्ह का दिन कहा पूरा होता है,,,,,,,,,,,,जाय दयो हमायी बात सुनो,,,,,,,,,,,,,,हमको तो लगता है चकिया मा जो समझदारी हम और आप दिखाए ओह्ह्ह के लिए मिश्रा जी आपको और हमको साबासी जरूर देंगे,,,,,,,,,,,,हमको थोड़ी जियादा ही देंगे”,गोलू ने कहा
“तुमको जियादा काहे देंगे बे ?”,गुड्डू ने कहा

“का है कि लल्लन के घर जाकर ऋतिक की जगह दूल्हा बनने का रिस्क हमने लिया न”,गोलू ने कहा
“हाँ तो हम भी तो बिंदिया भाभी की जगह दुल्हन बनने का रिस्क लिए थे फिर हमे भी तो तुम्हाये जितनी साबासी मिलनी चाहिए”,गुड्डू ने कहा
दोनों बातें करते करते मिश्रा जी और गुप्ता जी के पास चले आये। गुड्डू के शब्द उनके कानो में पड़े तो मिश्रा जी ने कहा,”गोलू जितनी काहे गोलू से थोड़ी जियादा ही मिलेगी बिटवा बस एक बार सुबह हो जान दयो ओह्ह्ह के बाद पूरी तबियत से साबासी देंगे तुम्हे”

गुड्डू ने सुना तो खुश होकर दबे स्वर में गोलू से कहा,”देखा ! हमे भी अब जियादा साबासी मिलेगी”
“हुंह ! मिश्रा जी आपके पिताजी है इहलीये आपको ही जियादा देंगे लेकिन हमने भी कम बहादुरी नाही दिखाई गुड्डू भैया”,गोलू ने मुँह बनाकर धीमे स्वर में कहा और सीढ़ी पर जा बैठा। गुड्डू भी गोलू की तरफ चला आया और उस से एक सीढ़ी छोड़कर आ बैठा।

आदर्श फूफा चक्कर पर चक्कर लगा रहे थे ये देखकर मिश्रा जी को चक्कर आने लगा तो उन्होंने आदर्श फूफा को रोककर कहा,”अब रुक भी जाईये ! का एक ही बार माँ पूरी धरती चपटी कर देंगे ?”
“आप हमसे बात नाही कीजिये मिश्रा जी , हमहू आपसे बहुते नाराज है”,आदर्श फूफा ने मुँह फुलाकर कहा
मिश्रा जी ने गुप्ता जी तरफ देखा और कहा,”जे मा कौनसी नयी बात है ? देश के आधे से ज्यादा फूफा बिना बात के नाराज ही रहते है”

“पर जे तो सबके बाप है , पूछिए पूछिए काहे नाराज है ? साला पता चले सुबह होते होते फिर कोनो नवा कांड हुई गवा”,गुप्ता जी ने दाँत से अपना नाख़ून तोड़ते हुए कहा
मिश्रा जी आदर्श फूफा की तरफ पलटे और अपना दिल मजबूत करके खुद को बहुत ही शांत करके कहा,”काहे नाराज है आप ?”

मिश्रा जी ने दिल इसलिए मजबूत किया क्योकि अब तक वे इस ड्रामे और भसड़ से बुरी तरह से थक चुके थे और किसी से बहस करने की सहनशक्ति अब उनके अंदर नहीं बची थी फिर भी आदर्श फूफा के सामने खुद को शांत रखने की एक कोशिश की
आदर्श फूफा को जैसे मिश्रा जी के इसी सवाल का इन्तजार था उन्होंने भड़क कर कहा,”ढाबे के बाहर मंगल को लेने जे गुप्ता को ही काहे भेजा ! का हम हुआ नाही थे ?”

मिश्रा जी ने सुना तो अपना हाथ अपने सर पर दे मारा और अपनी चार उंगलिया आदर्श फूफा को दिखाकर कहा,”हमको एक ठो बात बताईये मंगल आपका रिश्तेदार है या गुप्ता का ? और आप कब से मंगल पर इत्ता प्रेम दिखाने लगे,,,,,,,,,,,,मुँह फुलाने के लिए और कोनो ढंग का कारण नाही मिला आपको , चुपचाप चलकर हुआ बैठ जाईये वरना पैदल घर चले जाईये”

मिश्रा जी की बात सुनकर आदर्श फूफा आदर्श फूफा चुपचाप गुड्डू के बगल में आकर बैठ गए तभी पीछे बैठे गोलू ने कहा,”का फूफा ! मिल गयी परसादी ?”
आदर्श फूफा ने घूरकर गोलू को देखा तो गोलू चिल्लाया,”ए चचा ! जे फूफा को मुँह फिर फूल गओ”
मिश्रा जी ने गोलू को तो कोई जवाब नहीं दिया लेकिन गुप्ता जी की तरफ पलटकर मायूसी भरे स्वर में कहा,”यार गुप्ता ! पैदा करने के लिए तुमको ससुरा जे ही एक नमूना मिला था ?”

“का बताये मिश्रा जी ? इह ससुरा जब गुप्ताइन के पेट मा था तब गुप्ताइन हर हफ्ते सिनेमा देखने जात रही , जे सारा असर उसी का है,,,,,,,,,,,,,,जान दयौ ओह्ह्ह चलो चलकर बैठ जाओ , सुबह होने मा अभी बख्त है”, गुप्ता जी ने भी मायूसी से कहा और मिश्रा जी को साथ लेकर बाकी सबसे थोड़ी दूर जा बैठे।
सब शांत थे और नींद के मारे ऊंघ रहे थे अँधेरे में किसी ने ध्यान ही नहीं दिया कि शर्मा जी सबके बीच नहीं है होते भी कैसे ? पानी की तलाश में बाथरूम की तरफ गए थे और लड़खड़ा कर मुँह के बल गटर में गिर पड़े। चिल्लाये भी होंगे तो कहा किसी को सुना होगा।

सुबह हुई तो गुप्ताइन अपने कमरे से निकलकर बाहर आयी। अंगड़ाई ली और पिंकी के कमरे का बंद दरवाजा देखकर ये अंदाजा लगा लिया कि पिंकी अभी तक सो रही होगी ! गुप्ताइन ने चौके की तरफ आयी मुँह धोया और एक लोटा पानी भरकर घर के दरवाजे की तरफ चली आयी। चलते चलते एक घूंठ पानी मुंह में भरा और गरारा करते हुए दरवाजा खोल दिया। बिना सामने देखे ही उन्होंगे मुँह का पानी बाहर थूका , दरवाजे के ठीक सामने बैठा था गोलू पानी आकर उस  पर गिरा तो वह हड़बड़ा कर उठा और दरवाजे की तरफ आते हुए चिल्लाया,”अरे यार अम्मा,,,,,,,,,दिखा,,,,,,,,,,,,!!!”

गोलू इतना ही बोल पाया कि नीचे गिरे पानी पर उसका पैर फिसला और वह मुँह के बल सीधा जा गिरा गुप्ताइन के पैरो में
पैरो में गिरते ही गोलू के मुँह से निकला,”पाय लागू अम्मा”
गुप्ताइन की नजर सामने सीढ़ियों पर बैठे बाकी सब लोगो पर पड़ी जिनके हाल बेहाल थे और घबराकर चिल्लाई तो हाथ में पकड़ा लोटा आकर गोलू के सर पर गिरा , गोलू के सर पर चिड़िया मंडराई और गोलू मुँह फाड़े वही गिर गया। गुड्डू ने देखा तो गोलू के दोनों पैर पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचा।

गुप्ता जी और मिश्रा जी साइड में बैठे थे लेकिन आदर्श फूफा वही थे तो वे उठे और गुप्ताइन की तरफ आते हुए कहा,”अरे बहिन जी आप चिल्ला काहे रही है ? हम सब तो हिया,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
आदर्श फूफा अपनी बात पूरी कर पाते इस से पहले से उनका पैर भी पानी में फिसला और वे गिरने के बजाय सीधा गुप्ताइन के गले जा लगे। गुप्ताइन ने खींचकर एक थप्पड़ मारा आदर्श फूफा और बाहर धक्का मारकर कहा,”बहिन होगी तुम्हायी अम्मा ! हमाये गले काहे पड़ रहे हो ?”

आदर्श फूफा एक धक्के में लड़खड़ा कर रूपा और मंगल फूफा के बीच आ गिरे और दोनों को अलग कर दिया। आदर्श फूफा को देखते ही रूपा भड़क गयी और कहा,”मंगल जी ! जे आदमी ने कल से हमाओ जीनो हराम कर रखो है , हमे अलग करने की पूरी पिलानिंग है जे का सिस्टम हमहू ठीक करते है”
आदर्श फूफा ने सुना तो उन्हें रूपा से खाये थप्पड़ याद आ गए और वे उठकर भागे लेकिन सामने से आते गुप्ता जी से ऐसा टकराये कि उन्हें साथ लेकर धड़ाम से नीचे आ गिरे।

गुप्ता जी की तो कमर ही सीधी हो गयी वे उठ ही नहीं पाए। आदर्श फूफा ने पलटकर देखा रूपा उन्हें ही घूर रही है तो वे उठे और गुप्ता जी की छाती पर पैर रखकर भागे और रूपा ने भी उनके पीछे दौड़ लगा दी। लवली ने देखा तो बिंदिया का हाथ थामकर उसे साइड में ले आया। बिंदिया बेचारी कल से यही सब तमाशा देख रही थी अब थककर लवली से पूछ ही बैठी,”लवली इह सब का हो रहा है ?”

लवली ने मायूस होकर सबको देखा और कहा,”का बताये बिंदिया ? जे सब बंदर है और पिताजी है मदारी”
बिंदिया ने सुना तो हैरानी से लवली को देखने लगी और फिर लवली बिंदिया को अपने साथ लेकर वहा से चुपचाप चला गया

( क्या मिश्रा मण्डली को आएगा गटर में गिरे शर्मा जी का ख्याल ? गुप्ताइन के लोटे की मार से क्या गोलू उठ पायेगा ? क्या आपको भी नजर आती है लवली की बात में सच्चाई ? जानने के लिए पढ़ते रहे “मनमर्जियां सीजन 5” मेरे साथ )

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Next Part Manmarjiyan Season 5 – 6

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संजना किरोड़ीवाल

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Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal
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का बताये मिश्रा जी ? इह ससुरा जब गुप्ताइन के पेट मा था तब गुप्ताइन हर हफ्ते सिनेमा देखने जात रही , जे सारा असर उसी का है,,,,,,,,,,,,,,जान दयौ ओह्ह्ह चलो चलकर बैठ जाओ , सुबह होने मा अभी बख्त है”, गुप्ता जी ने भी मायूसी से कहा और मिश्रा जी को साथ लेकर बाकी सबसे थोड़ी दूर जा बैठे।
सब शांत थे और नींद के मारे ऊंघ रहे थे अँधेरे में किसी ने ध्यान ही नहीं दिया कि शर्मा जी सबके बीच नहीं है होते भी कैसे ? पानी की तलाश में बाथरूम की तरफ गए थे और लड़खड़ा कर मुँह के बल गटर में गिर पड़े। चिल्लाये भी होंगे तो कहा किसी को सुना होगा।

का बताये मिश्रा जी ? इह ससुरा जब गुप्ताइन के पेट मा था तब गुप्ताइन हर हफ्ते सिनेमा देखने जात रही , जे सारा असर उसी का है,,,,,,,,,,,,,,जान दयौ ओह्ह्ह चलो चलकर बैठ जाओ , सुबह होने मा अभी बख्त है”, गुप्ता जी ने भी मायूसी से कहा और मिश्रा जी को साथ लेकर बाकी सबसे थोड़ी दूर जा बैठे।
सब शांत थे और नींद के मारे ऊंघ रहे थे अँधेरे में किसी ने ध्यान ही नहीं दिया कि शर्मा जी सबके बीच नहीं है होते भी कैसे ? पानी की तलाश में बाथरूम की तरफ गए थे और लड़खड़ा कर मुँह के बल गटर में गिर पड़े। चिल्लाये भी होंगे तो कहा किसी को सुना होगा।

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सब शांत थे और नींद के मारे ऊंघ रहे थे अँधेरे में किसी ने ध्यान ही नहीं दिया कि शर्मा जी सबके बीच नहीं है होते भी कैसे ? पानी की तलाश में बाथरूम की तरफ गए थे और लड़खड़ा कर मुँह के बल गटर में गिर पड़े। चिल्लाये भी होंगे तो कहा किसी को सुना होगा।

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