Manmarjiyan Season 5 – 33

Manmarjiyan Season 5 – 33

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

मिश्रा जी के साथ साथ सारे घरवाले नवरतन और उसके साथ आये बेंड बाजे वालो को देखकर हैरान थे। मंगल फूफा तो गुस्से से लाल पीले नीले हो चुके थे लेकिन बेचारे मिश्रा जी की वजह से चुप थे ! बेंड बाजे वालो ने नवरतन के इशारे पर बजाना बंद किया और उसके साथ अंदर आये। अंदर आकर नवरतन ने फिर से बजाने का इशारा किया और धुन बजने लगी
“बहारो फूल बरसाओ , मेरा महबूब आया है”
मंगल फूफा अब खुद को रोक नहीं पाए और नवरतन के सामने आकर गुस्से से कहा,”बंद करो इह सब”

मंगल फूफा को गुस्से में देखकर नवरतन ने हाथ से बेंड वालो को इशारा किया और उन्होंने बंद कर दिया। नवरतन ने मुस्कुरा कर मंगल को देखा तो मंगल फूफा ने कहा,”इह सब का है ? तुम्हायी बाप का बियाह है हिया जो बेंड बाजा लेकर आये हो ?”
“हमाये बाप ने ब्याह किया तबही ना हमहू पैदा हुए , तुम्हाये जैसो नसीब नाही है हमाओ,,,,,,,,,,,,!!”,नवरतन ने नहले पर दहला मारकर कहा    

मंगल फूफा ने सुना तो गुस्से से भर गए और ये देखकर नवरतन ने कहा,”और जे बेंड वाले ना बहुते समझदार है , सिचुएशन के हिसाब से गाना बजावत है। अब मान ल्यो आज रूपा ने हमे चुन लिया तो जे हमाये लिए सादी का गाना बजायेंगे और बचे तुम तो डेमो दिखाए तुमको”
इतना कहकर नवरतन ने हाथ से इशारा किया और बेंड वालो ने बजाना शुरू कर दिया जैसे नवरतन ने पहले से उनके साथ कोई सेटिंग करके आया हो।

बेंड वालो ने बजाया “फूलों का तारो का सबका कहना है , एक हजारो में मेरी बहना है,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!!”
मंगल फूफा ने सुना तो गुस्से से भर गए और बेंड वालो के सामने जाकर चिल्लाये,”साले बंद करो इह सब वरना फाड़कर रख देंगे”
“अरे का फूफा ?”,कुछ ही दूर खड़ा गोलू चिल्लाया

“अबे ढोल यार गोलू ढोल,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने रोआँसा होकर कहा
“हाँ फिर ठीक है हमको लगा,,,,,,,,,,,,,!!!”,कहते हुए गोलू ने सामने बैठे मिश्रा जी को देखा तो पाया मिश्रा जी गुस्से से उसे ही घूर रहे है तो उसे बीती शाम हुई धुलाई याद आ गयी और वह चुपचाप गुड्डू के साइड में खड़ा हो गया

मिश्रा जी ने देखा सुबह सुबह इन लोगो ने फिर से चरस बोनी शुरू कर दी है तो गुस्से से कहा,”ए नवरतन , मंगलू चुपचाप आकर हिया खड़े हो जाओ,,,,,,,,,,हमको सुबह सुबह अपने घर मा इह महाभारत नाही चाहिए”
मिश्रा जी कुछ कहे और कोई ना सुने ऐसा भला कैसे हो सकता है ! मंगल फूफा और नवरतन चुपचाप आकर रूपा के ठीक सामने और मिश्रा जी से कुछ दूर खड़े हो गए।

बेंड बाजे वाले अपनी ही कोई धुन बजाये जा रहे थे ये देखकर मिश्रा जी ने उनकी तरफ देखा और अपनी चप्पल फेंककर गुस्से से कहा,”अबे बंद करो यह भोंपू और निकलो हिया से”
बेंड बाजे वाले मायूस होकर जाने लगे तो नवरतन ने कहा,”अरे का कर रहे है मिश्रा जी ? हमने इनको दुइ घंटे बजाने के लिए पुरे 1600 रूपये दिए है,,,,,,,,,,,अभी तो आधा घंटा भी नाही गुजरा है,,,,,,,,,,,!!!”

“हाँ तो फिर इनको बोलो हिया ना बजाये,,,,,,,,,,,और तुमहू हमको एक ठो बात बताओ जे बारात काहे लेकर आये हो हिया ?”,मिश्रा जी ने नवरतन को घूरकर पूछा
नवरतन रूपा को देखकर मुस्कुराया और मिश्रा जी की तरफ देखकर शर्माते हुए कहा,”उह्ह का है ना ! आज रूपा हमसे सादी के लिए हाँ कह देगी तो सोचा जे ही ख़ुशी मा हमहू रूपा जी को बेंड बाजे के साथ अपने घर लेकर जाए,,,,,,,,,,!!!”

“और अगर रूपा तुमको नाही चुनी फिर ?”,मिश्रा जी ने पूछा
नवरतन कुछ कहता इस से पहले मंगल फूफा बोल पड़े,”तो जे ही बाजा इह अपनी मय्यत मा बजवा लेंगे,,,,,,,,,,,,आखिर 1600 रूपये जो दिए”
मंगल फूफा को डायलॉग मारते देखकर कोई खुश हो न हो गोलू बड़ा खुश हुआ और गुड्डू से चिपककर कहा,”कुछ भी कहो गुड्डू भैया ! हमाये साथ रहके मंगल फूफा स्मार्ट हो गए है , का भिगो भिगो के मार रहे है नवरतनवा को”

“जे तुमहू बात बात पर हम से चिपक काहे जाते हो ? दूर हटो”,गुड्डू ने गोलू को खुद से दूर करके कहा। वह तो नवरतन और मंगल फूफा को लेकर परेशान था कि अगर आज रूपा ने दोनों में से किसी एक को चुन लिया तो दूसरे वाला कही मर ही ना जाये,,,,,,,,,,,!!

मंगल फूफा की बात सुनकर नवरतन ने गुस्से से उन्हें देखा और कहा,”हमरा पता नाही पर तुम्हायी मय्यत मा हमहू जरूर बजवा देंगे , उह्ह्ह भी अपने पैसो से”
मंगल फूफा ने सुना तो मुँह बनाकर दुसरी तरफ देखने लगी और नवरतन एक बार फिर रूपा को देखकर मुस्कुराने लगा।

मिश्रा जी आज किसी तरह का तमाशा नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने एक नजर मंगल-नवरतन को देखा और फिर रूपा की तरफ पलटकर बोले,”रूपा ! तुमहू चकिया से हिया मंगल के साथ आयी और हिया आकर नवरतन से मिली , इह दोनों ही तुमको पसंद करते है लेकिन तुमरे मन मा का है इह बात तो तुमहि जानती हो !
इन दोनों में से तुमहू जिसको चुनोगी वही तुम्हरा घरवाला बने है और दूसरा चुपचाप बिना कोनो नाटक किये दूर हो जाही है।

देखो बिटिया जे सब का हाल तो तुमहू देख ही चुकी हो और हम भी जे सब तमाशे से थक गए है इहलीये अपना फैसला सुनाओ और अपना जीवनसाथी चुनकर इह मसला हल करो,,,,,,,,,,,,,,!!!”
मिश्रा जी की बात सुनकर रूपा ने सामने खड़े नवरतन और मंगल फूफा को देखा
शेरवानी पहने , हाथो में फूलों की माला लिए , होंठो पर बड़ी सी मुस्कान और आँखों में शादी के सपने सजाये नवरतन सीना तानकर खड़ा था।

वही बगल में खड़े मंगल फूफा पर रूपा की नजर पड़ी तो मंगल फूफा ने अपनी दोनों हथेलियों पर थू थू किया और दोनों हाथो की हथेलियों को कनपटी से लगाकर पीछे किया और जेब में रखा चश्मा आँखों पर लगा लिया। मंगल फूफा के शर्ट के तीन बटन टूट चुके थे लेकिन दो लॉयल बटनों पर उनका शर्ट और इज्जत दोनों टिके हुए थे। उन्होंने साँस ली और पेट को अंदर खींच लिया ताकि उनके और रूपा के फैसले के बीच आज उनका पेट ना आये।
रूपा दोनों को देखकर मुस्कुराई और फिर मिश्रा जी की तरफ देखकर कहा,”चचा ! हमहू अपना जीवनसाथी चुन लिए है”

रूपा ने जैसे ही कहा मंगल फुफा और नवरतन की धड़कने बढ़ गयी ! गुड्डू के चेहरे पर चिंता के भाव उभर आये। लवली को इस से कोई मतलब नहीं था वह खामोश बैठा इस ड्रामे के खत्म होने का इन्तजार कर रहा था तो वही गोलू अपने दोनों हाथो की उंगलियों को क्रॉस करके मन ही मन भगवान् से प्रार्थना कर रहा था कि आज रूपा बस कैसे भी करके मंगल फूफा का नाम ले दे।

रूपा के इतनी जल्दी फैसला करने से मिश्रा जी को ख़ुशी और राहत एक साथ हुई और उन्होंने कहा,”कौन है उह्ह”
रूपा ने सामने देखा , नवरतन और मंगल फूफा बेसब्री से अपना नाम सुनने का इंतजार कर रहे थे।  रूपा मुस्कुराई और ऊँचे स्वर में कहा,”जानूउउउउउउउउ”
रूपा के मुँह से जानू सुनकर हर कोई हैरान था। मिश्रा जी भी हैरानी से रूपा को देखने लगे। मंगल फूफा और नवरतन ने एक दूसरे की तरफ देखा क्योकि दोनों रूपा ने दोनों को ही जानू कहकर नहीं पुकारा था।

गुड्डू ने सुना तो अपनी आँखे मीच ली जैसे वह पहले से जानता हो कि रूपा नवरतन और मंगल फूफा में से किसी को नहीं चुनेगी। गोलू तो रूपा के मुँह से जानू सुनकर गिरते गिरते बचा और गुड्डू से दबे स्वर में कहा,”गुड्डू भैया ! जे रूपा इन दोनों में से जानू कहकर किसको बुलाय रही है ?”
गुड्डू ने पहले गोलू की तरफ देखा , फिर मंगल फूफा और नवरतन की तरफ देखकर कहा,”जे दलिद्रों को देखकर तुमको लगता है रूपा इन्हे जानू कहेगी ?”
गोलू ने नवरतन और मंगल फूफा को देखा

नवरतन फिर भी थोड़ा ठीक ठाक लग रहा था लेकिन मंगल फूफा , वो तो किसी भी एंगल से रूपा के जानू नहीं लग रहे थे। उन्हें फटेहाल देखकर गोलू का मुँह बन गया और उसने गुड्डू से कहा,”तो फिर रूपा के जानू कहने का , का मतलब ?”
“मतलब इह की तुम्हरे मंगल फूफा का फिर से कट गवा है”,गुड्डू ने सामने देखते हुए दबे स्वर में कहा
“फिर से कट गवा है , पहले कब कटा ?”,गोलू ने हैरानी भरे स्वर में कहा

“फुलवारी के टाइम कटा था उह्ह्ह भूल गए , कितने दिनों तक तुम्हाये जे फूफा देवदास बने घूमत रहे,,,,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने भी दबे स्वर में कहा
“अरे उह्ह्ह इत्ता सीरियस कहा था ?”,गोलू ने कहा
“हाँ तो हिया कौनसा तुम्हाये मंगल फूफा की शादी के कार्ड छप गए ? और तुमहू साले हमसे सवाल करने के बजाय जाकर उह्ह्ह रूपा महारानी से काहे नाही पूछते कि इह जानू कौन है ?”,गुड्डू ने चिढ़कर कहा

“पूछना का है अभी खुदही बता देगी”,गोलू ने कहा
रूपा ने सामने घर के दरवाजे की तरफ देखा और ऊँचे स्वर में फिर कहा,”जानूउउउउउउउ प्लीज कम”
घर का दरवाजा खुला तो सबकी गर्दन दरवाजे की तरफ घूम गयी।

रूपा की ही तरह दिखने वाला हट्टा कट्टा आदमी अंदर आया। जिनसे ढीली ढाली जींस पहनी थी , ऊपर टीशर्ट और फिर उस पर शर्ट , दाढ़ी नहीं थी लेकिन बड़ी बड़ी मुछे जरूर थी और बाल बीच की माँग निकालकर बनाये गए थे जो कि तेरे नाम फिल्म के राधे जैसे तो बिल्कुल नहीं लग रहे थे बस ये आदमी दिखने में नवरतन और मंगल फूफा से थोड़ा सा ही अच्छा था।
मिश्रा जी ने आदमी को देखा और रूपा की तरफ पलटकर हैरानी से कहा,”तो इह है तुम्हरा जानू ?”

“हम्म्म , जानकीनाथ , पियार से हमहू जानू बुलाते है”,रूपा ने शर्माकर कहा और दाँतो से अपना नाख़ून कुतरने लगी
मिश्रा जी ने अफ़सोस में अपना सर हिलाया , जिस रूपा के लिए कल से मंगल फूफा और नवरतन जान के दुश्मन बने हुए थे उस रूपा ने उन दोनों को ही पागल बना दिया।
नवरतन और मंगल फूफा का मुँह खुला का खुला रह गया दोनों को अपनी आँखों और अपने कानो पर विश्वास ही नहीं हुआ कि रूपा ने जिसे चुना है वह ये है।

जानकीनाथ उर्फ़ जानू , नवरतन और मंगल फूफा के बीच से निकलकर रूपा की तरफ बढ़ा और उन दोनों को साइड करके रूपा से कहा,”रूपा,,,,,,,!!
“जानू,,,,,,,,,!!!!”,रूपा ने कहा और दो कदम जानकीनाथ की तरफ बढ़ाये
“रूपा,,,,,,,,!!!”,दो कदम जानकीनाथ ने बढ़ाये
“जानू,,,,,,,,,,,,!!!”,रूपा भी आहे भरते हुए जानकीनाथ की तरफ बढ़ी

ये देखकर मंगल फूफा और नवरतन ने एक दूसरे की तरफ देखा और फिर दोनों गुस्से से रूपा और जानकीनाथ की तरफ आये। नवरतन ने रूपा का हाथ पकड़कर उसे जानकीनाथ से दूर किया और मंगल ने हीरो बनने के चक्कर में , जानकीनाथ के सामने आकर कहा,”का रूपा जानू रूपा जानू रूपा जानू,,,,,,,,,,,,,,,इह सब मैं ना मानू,,,,,,,,,,रूपा जी हमायी है”
कहते हुए मंगल फूफा ने अपनी छाती थपथपाई तो पास ही रूपा का हाथ पकडे नवरतन ने कहा,”ए मंगलू हमायी भी,,,,,,,,,,,!!”

“हाँ जे की थोड़ी हमायी जियादा”,मंगल फूफा ने कहा
जानकीनाथ दिखने में जितना खतरनाक था उस से भी ज्यादा खतरनाक था उसका गुस्सा उसने झुककर मंगल फूफा को अपने दोनों हाथो में उठाया और अपने सामने करके कहा,”रूपा का मेला मा मिलने वाली फोफिया मिठाई है जो थोड़ी थोड़ी आपस मा बाँट रहे हो तुम लोग,,,,,,,,,,!!!!”

मंगल फूफा कुछ कहते या जानकीनाथ को समझाते उस से पहले जानकी ने उसे जमीन पर पटक दिया और गुस्से से नवरतन की तरफ देखा तो नवरतन ने घबराकर रूपा का हाथ छोड़ दिया और पीछे खिसका तो गुड्डू से जा टकराया ! गुड्डू भी कम हरामी नहीं था उसने नवरतन को जानकीनाथ के सामने धक्का देकर कहा,”हमाये पास का रहे हो जाकर लड़ो ना ओह्ह से,,,,,,,,,,,,,,,!

गुड्डू के धक्के से नवरतन जानकीनाथ से टकराया तो जानकीनाथ ने उसे भी उठाया और बेंड् बाजे वालो की तरफ फेंक दिया ! नीचे गिरे नवरतन ने मदद के लिए हाथ उठाया तो बाजे वालो को लगा वह गाना बजाने को बोल रहा है उन्होंने धुन छेड़ दी
“साजन जी घर आये साजन जी घर आये , दुल्हन क्यों शर्माए साजन जी घर आये”
नवरतन ने सुना तो गुस्से से दोनों हाथ उठा दिए ये देखकर बाजे वालो को लगा नवरतन गाना बदलने को कह रहा है तो उन्होंने दूसरी धुन छेड़ दी

“कभी तो किसी की दुल्हनिया बनोगी , मुझसे शादी करोगी ? मुझसे शादी करोगी ?”
नवरतन जैसे तैसे करके उठा और बाजे वालो को मारने लगा , दूसरी तरफ जानकीनाथ ने धुन सुनी तो रूपा को देखकर गाने लगा,”मुझसे सादी करोगी , मुझसे सादी करोगी,,,,,,,,,,!!!!
रूपा हसंते हुए जानकीनाथ के पास आयी और उसका हाथ पकड़कर गाने लगी,”तुझसे सादी करुँगी , तुझसे सादी करुँगी”

रूपा का ये रूप देखकर सब हैरान , बिंदिया तो बेचारी शर्म से सर झुकाये खड़ी थी क्योकि उसे अब तक लग रहा था रूपा चकिया से मंगल फूफा के साथ इसलिए आयी थी कि वह मंगल फूफा को चाहती है लेकिन ऐसा नहीं था। लवली ने भी जब रूपा का असली रूप देखा तो उसे रूपा पर बहुत गुस्सा आया। रूपा एक नहीं बल्कि अपने मतलब के लिए दो दो लोगो के दिलो और जज्बातो से खेला था लेकिन इस वक्त रूपा से कुछ भी कहकर माहौल खराब करना नहीं चाहता था।

मिश्राइन ये सब तमाशा देखकर शगुन को अपने साथ लेकर वहा से चली गयी। वेदी राजकुमारी भुआ के पास खड़ी थी और दोनों ही नफरत भरी निगाहो से रूपा को देख रही थी क्योकि दोनों को ही रूपा पसंद नहीं थी।
गोलू ने गुड्डू के कंधे पर हाथ रखा और अफ़सोस भरे स्वर में कहा,”यार गुड्डू भैया ! जे रूपा तो बहुते बड़ी धोखेबाज निकली,,,,,,,,,,,,साला गज्जू गुप्ता जे के बारे मा सही कहे थे कि इह मंगल फूफा का बहुते बुरा काटकर जाही है,,,,,,,,,,,,,,!!!!”

“तो साले तुम्हे अपने बाप की बात काहे नाही सुने ? सुनते तो आज बेचारा मंगल इह सब ना देखता”,गुड्डू ने खीजकर कहा  
“अरे हमको लगा पिताजी मंगल फूफा से जलते है इहलीये ऐसा कह रहे है”,गोलू ने कहा

“उह्ह्ह काहे जलेंगे मंगलू से ? तुमहू ना अपनी बुद्धि जरा कम लगाया करो गोलू,,,,,,,,,,,,जे रूपा के चक्कर मा एक हुआ धरती पर पड़ा है और दूसरा हुआ बेंड वालो से लड़ रहा है। जे रूपा तो चलती फिरती माचिस है ,जहा देखो वहा बस आग लगाय रही है”,गुड्डू ने गोलू को ही डांट दिया
गुड्डू से डांट खाकर गोलू साइड में चला आया।

रूपा ने जानकीनाथ का हाथ पकड़ा और मिश्रा जी के सामने आकर कहा,”चचा ! इह है जानकीनाथ , हमने इनको चुना है और हमे इनसे ही ब्याह करनो है”
आदर्श फूफा जो सुबह से गायब थे एकदम से सबके बीच आये और मिश्रा जी की तरफ आते हुए कहा,”देखा देखा देखा हमहू कहे थे ना , जे रूपा मा कोनो गड़बड़ है,,,,,,,,,,,,,,लेकिन किसी ने हमायी बात नाही सुनी”

मिश्रा जी की तरफ जाते हुए आदर्श फूफा जैसे ही रूपा के सामने से गुजरे रूपा ने अपना पैर बीच में किया और आदर्श फूफा मुँह के बल मिश्रा जी के पैरों में,,,,,,,,,,,,,,!!
रूपा ने जानकीनाथ को देखा और धीरे से मुस्कुरा दी।

( तो क्या चकिया से कानपूर आने के लिए रूपा ने मंगल फूफा को बनाया बलि का बकरा ? क्या मंगल फूफा और नवरतन सह पाएंगे ये सदमा और जाने देंगे रूपा को जानकीनाथ के साथ ? रूपा के लिए क्या फैसला करेंगे मिश्रा जी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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