Manmarjiyan Season 4 – 59

Manmarjiyan Season 4 – 59

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

बिंदिया को समझा बुझाकर गुड्डू खिड़की से वापस चला गया। बिंदिया के घर के पीछे गुड्डू के ही लड़के टेंट लगा रहे थे कि एक लड़के की नजर गुड्डू पर पड़ी और वह भागकर गुड्डू के पास आया और कहा,”अरे गुड्डू भैया आप हिया का कर रहे है ?”
“अबे बंटी तुमहू हिया का कर रहे हो बे ?”,गुड्डू ने लड़के को देखकर हैरानी से पूछा
“अरे भैया हम तो शादी का टेंट लगाने आये है , गोलू भैया ने जो आर्डर लिया था वो यही तो है,,,,,,,,,,,,,,गोलू भैया तो अभी तक पहुंचे नाही अच्छा हुआ आप आ गए ,जरा चलकर उह्ह मंडप का टेंट देख लीजिये ना”,बंटी ने कहा

गुड्डू ने सुना तो उसका दिमाग घूम गया अब उसे समझ आया कि गोलू जिस कचिया की बात कर रहा था वह दरअसल में चकिया था। गुड्डू का मन घबराने लगा और वह खुद में ही बड़बड़ाया,”जे साला गोलुआ भी कांड पे कांड करता रहता है , अबे गोलू अबे टेंट का आर्डर लिए भी तो किसके ब्याह का ? साला उह्ह बृजेशवा को पता चला आना तो साला अपने ही टेंट का बम्बू घुसा देंगे,,,,,,,,,,,अबे तुमको और कोनो गांव नाही मिला था बे गोलू”

गुड्डू को खुद में बड़बड़ाते देखकर लड़के ने कहा,”गुड्डू भैया का सोचने लगे ? चलिए ना हमाये साथ चलकर मंडप देख लीजिए”
“अबे हमको तो समसान नजर आ रहा है बे , और का हमाये साथ चलिए चलिए लगा रखा है ,दिखाई नहीं न देता है कोन सिचुएशन मा खड़े है ?”,गुड्डू ने भड़ककर कहा
गुड्डू की बात सुनकर ने गुड्डू को ध्यान से देखा तो उसकी नजर गुड्डू के कपड़ो पर पड़ी और उसने कहा,”अरे गुड्डू भैया लेकिन आपने जे कपडे काहे पहिने है ? जे घाघरा , जे चोली , जे दुपट्टा”

गुड्डू बिंदिया को लेकर पहले ही परेशान था , ऊपर से गोलू आ नया कांड उसके सामने आ चुका था और अब बंटी उसके पीछे पड़ा था। गुड्डू ने उसे देखा और चिढ़कर कहा,”हमायी मर्जी हम जो चाहे पहिने,,,,,,,,,हमाओ मन है लहंगा चोली पहनने को तो हमहू पहनी है तुम जाकर अपना टेंट लगाओ न हमायी छाती पर काहे चढ़े जा रहे हो ?”
गुड्डू को झुंझलाता देखकर लड़के ने कहा,”अरे भैया बस वो मंडप,,,,,,,,,,,,,,,!!”
लड़के ने इतना ही कहा कि गुड्डू ने उसकी गुद्दी पकड़ी और उसे मंडप की तरफ ले जाते हुए कहा,”ल्यो दिखाओ कहा है तुमहाओ मंडप ? एक काम करते हमहि फेरे ले लेते है जे मंडप मा तुम्हाये साथ,,,,,,,,,!!”

गुड्डू मंडप देखने आया ही था कि तभी सामने से मंगेश अपने किसी रिश्तेदार के साथ आता दिखाई दिया और गुड्डू लड़के को छोड़कर उलटे पाँव भागा
“अरे भैया मंडप तो देख जाते”,लड़का चिल्लाया लेकिन तब तक गुड्डू गायब
“ओह्ह्ह्ह बेटा ! मंडप हमहू देख लेंगे जे बताओ और कित्ता बख्त लगी है जे ताम झाम मा ? साला कल से इंतजार कर रहे है तो सुबह पहुंचे हो और ओह्ह मा भी काम इत्ता धीरे , अबे आज आज मा लग जाएगा कि शादी अगले दिन रखे ?”,मंगेश ने गुस्से से कहा

“बस बस चचा हुई गवा ,सारा बंदोबस्त हो चुका बस हमाये मालिक लोग एक ठो बार देखकर डन कर दे”,लड़के ने कहा
“हाँ जो करवाना है जल्दी करवाओ का है कि शाम 4 बजे बारात आ जाही है हिया”,मंगेश ने कहा और आगे बढ़ गया

गुड्डू जो एक बार भागा तो सीधा उसी घर के पीछे आकर रुका जहा उसने लल्लन को भेजा था। लल्लन भी इतना उतावला था कि बिना सोचे समझे पांचवे घर की खिड़की से अंदर कूद गया और जब घर से बाहर निकला तो बेचारे का नाक लाल , आँखे काली , मुँह टेढ़ा , फ़टे कपडे और शरीर पर चोट के निशान क्योकि लल्लन बिजली के चक्कर में जिस कमरे में कूदा था उसमे सो रही थी गाँव के पहलवान की बीवी , लल्लन को देखकर जैसे ही वह चिल्लाई पहलवान को लगा लल्लन ने उसकी घरवाली को छेड़ा है उसने पटक पटक के लल्लन को जो मारा है बेचारा लल्लन लंगड़ाते हुए घर से बाहर आया।

मंगल फूफा ने एक बार जो स्पीड में गाडी भगाई तो वह गाड़ी सीधा चकिया पहुंच गयी लेकिन गोलू को नहीं पता कि गाड़ी चकिया आयी है वह तो पीछे बैठा राम का नाम लेकर आँखे बंद किये था। अब गाडी पहुंचने को तो पहुंच गयी लेकिन रुके कैसे मंगल फूफा के तो पैर ही ब्रेक तक नहीं जाए। उन्होंने रवि की तरफ देखा और कहा,”लोकेशन तो जे ही है लेकिन जे गाडी को रोके कैसे ?”
“अबे इह गाडी चलाने से पहिले नाही सोचे थे पर नहीं तब तो यमराज बनकर आगे बैठ गए अब रोकोगे कैसे ?”,पीछे बैठा गोलू चिल्लाया

“ए रवि ! ए भैया कुछो करो जे गाडी को रोको”,मंगल फूफा ने दोनों हाथ उठाकर कहा
“अरे आप का सत्संग मा आये है , हाथ काहे उठाए दिए ? स्टेयरिंग सम्हालिए हमहू करते है कुछो”,रवि ने मंगल फूफा के उठे हुए हाथो को गाड़ी के स्टेयरिंग पर रखकर कहा
“सत्संग नाही रविवा हमायी तुम्हायी तेहरवी पर भजन होइ है कानपूर मा,,,,,,,,,,,,,चिट्टी ना कोई सन्देश जाने वो कौनसा देश,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने अफ़सोस भरे स्वर में कहा और एकदम से गाना गाने लगा

रवि एक तो गाड़ी रोकने के लिए पहले ही परेशान था ऊपर से गोलू की ये अजीबोगरीब बातें उसने डेशबोर्ड पर पड़ी पानी की खाली बोतल गोलू पर फेंककर कहा,”अरे चुप करो ना यार गोलू ! मरे नाही है अभी ज़िंदा है”
बोतल सीधा आकर गोलू के मुँह पर लगी और वह अपनी नाक मसलते हुए कहा,”गोलू भैया से सीधा गोलू,,,,,,,,,,,!!”
रवि ने सुना तो पीछे पलटा और झुंझलाकर कहा,”तो का जीजाजी जीजाजी कहे आपको ?”

“तुमने कबो बताया नाही पिंकिया तुम्हायी बहिन लगती है और ओह्ह्ह का तो कोनो भाई वाई भी नाही है। कही तुमहू ओह्ह के दूर के भाई वाई तो नाही हो ?”,गोलू ने अपना दिमाग लगाकर कहा
बेचारा रवि उसमे इतनी सहनशक्ति नहीं थी कि वह गोलू को झेल सके इसलिए गुस्से में आकर अपना सर डेशबोर्ड पर पटका तो गोलू ने कहा,”अमा यार ! पिंकिया तुम्हायी बहिन है इत्ती सी बात मा सर पटकने की का जरूरत है , हाँ मानते है पहिले थोड़ी चंचल थी पर शादी के बाद तो बहुते सांत हो गयी है,,,,,,,,,,,,ए मंगल फूफा ब्रेक लगाओगे कि सीधा लंका लगाओगे हमायी ?”

मंगल फूफा ने गोलू की तरफ देखा और कहा,”गोलू ! तुमको हनुमान चालीसा आती है ?”
“हाँ कंठस्थ याद किये है हमहू”,गोलू ने कहा
“हाँ तो फिर गाना शुरू कर दो का है कि इह गाड़ी अब हम ना रोक पाहि है”,कहकर मंगल फूफा ने स्टेयरिंग छोड़ दिया और हाथ जोड़कर अपनी आंखे बंद कर ली  

रवि ने देखा सामने एक दिवार है और दिवार के आगे सड़के और सड़क के उस पार लाइन से कुछ घर बने है। जैसे ही गाड़ी दिवार के पास पहुंची रवि ने गाड़ी का दरवाजा खोला और भगवान् का नाम लेकर कूद गया। कूदने से फिर भी रवि को हलकी फुलकी चोट लगी लेकिन अगर वह मंगल फूफा और गोलू के साथ रहता तो शायद घर जाने लायक भी नहीं बचता इसलिए रवि गाड़ी से कूदकर खुश था।

गाडी दिवार तोड़कर सड़क पर आयी और सड़क से आगे घर की तरफ बढ़ी और घर के सामने बने चबूतरे से टकराकर रुक गयी। टक्कर इतनी जोर की थी कि आगे का बोनट हवा में और गोलू सामने से उछलकर गाडी से बाहर , अब बेचारे की किस्मत इतनी ख़राब की गाड़ी से उछलकर गिरा सामने से जाते लल्लन की गोद में , हालाँकि लल्लन खुद टुटा फूटा था लेकिन गोलू को उसने गोद में सम्हाल लिया और गोलू ने भी अपनी बाँहे उसके कंधो के इर्द गिर्द डाल दी। लल्लन ने गोलू की तरफ देखा और गोलू ने जैसे ही लल्लन को देखा तो मारे ख़ुशी के चिल्लाकर कहा,”अबे बब्बन तुम,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

लल्लन ने गोलू को नीचे पटका और हताश होकर कहा,”अबे हमाओ नाम लल्लन है बब्बन नाही,,,,,,,,,,,,,,!!!”
लल्लन इतना कहकर आगे बढ़ गया क्योकि इस वक्त वह गोलू से बहस करने की हालत में नहीं था। नीचे गिरा गोलू अपनी कमर से हाथ लगाकर उठा। मंगल फूफा भी गाड़ी का दरवाजा खोलकर बाहर आये और गाड़ी की हालत देखकर कहा,”बच गए गोलू गाडी भी सही सलामत है और हम भी बस जरा सा बोनट टुटा है ओह्ह का भी कानपूर जाकर सही करवा लेंगे”

गोलू ने जैसे ही सुना गाड़ी का बोनट टूट गया है वह जल्दी से गाडी के आगे गया और देखा जरा सा नहीं बल्कि पूरा बोनट ही उखड़ गया है। गोलू गुस्से से मंगल फूफा के पास आया और उनकी पीठ पर एक मुक्का मारकर कहा,”इह जरा सा है , अरे गुड्डू भैया को पता चला ना तो खाल मा भूसा भर देंगे हमायी,,,,,,,,,,,,,!!”
“गुड्डू को कौन बताने जा रहा है ? उह्ह्ह चकिया है हम लोग कचिया मा है कैसे पता चलेगा ओह्ह्ह का ?”,फूफा ने भड़ककर कहा

गोलू ने अपना सर खुजाया और कहा,”वैसे तुम्हायी बात मा पॉइंट तो है मंगल फूफा ,एक काम करते है फटाफट आज की सादी निपटाते है और फिर जे कबाड़ को भेज देते है कानपूर और हुआ से बिंदिया भाभी के लिए नयी गाड़ी मंगवा लेंगे ,कैसो है हमाओ पिलान ?”

“हमाये साथ रहके बुद्धि तेज हो गयी है तुम्हायी गोलू,,,,,,,,,,बहुते सही पिलान है , वो देखो टेंट लगता है सादी उह्ह घर मा ही है”,मंगल फूफा ने मंगेश के घर की तरफ इशारा करके कहा
“अपने सब लड़के उधर ही चलो चलकर फटाफट काम सम्हालते है”,गोलू ने कहा और मंगल फूफा के साथ मंगेश के घर की तरफ बढ़ गया

 गोलू के साथ चलते हुए मंगल फूफा ने कहा,”अभी कुछ देर पहिले तुम्हे जिस से बतिया रहे थे उह्ह्ह कौन था ? तुम्हायी पहिचान का है का ?”
गोलू को एकदम से याद आया कि अभी कुछ देर पहले लल्लन उसके सामने था। वह रुका और  मंगल फूफा की तरफ पलटकर हैरानी से बोला,”अबे फूफा उह्ह तो कल्लन था उह्ह्ह मंगेश्वा का दोस्त , जो उह्ह दिन रामनगर की पहाड़ी पर तमाशा किये रहा , पर इह ससुरा जेल से बाहिर कब आया ?”

अब मंगल फूफा जानते थे लल्लन को गोलू नाम बता रहा था कल्लन तो उनको  थोड़ा कन्फ्यूजन हुआ और उन्होंने कहा,”अरे यार गोलू कल्लन नाही ओह्ह्ह का नाम तो कुछो और था , अभी हमको याद नाही आ रहा पर उह्ह्ह हिया कैसे आएगा उह्ह्ह तो जेल मा है,,,,,,,,,,,,,,,,ए गोलू हमको लगता है तुमको गाड़ी चढ़ गयी है,,,,,,,,,,,तुमहू चलो हमाये साथ”

मंगल फूफा गोलू को लेकर आगे बढ़ गए और दोनों बिना सोचे समझे मंगेश के घर में घुस गए। गनीमत था कि मंगेश की नजर उन पर नहीं पड़ी और ना ही गोलू ने मंगेश को देखा वरना शादी का पता नहीं गोलू और मंगल फूफा का अंतिम संस्कार जरूर हो जाता।

अब गोलू था वेडिंग प्लानर तो सीधा पहुंचा पीछे टेंट वाली जगह , गोलू ने टेंट देखकर मुँह बनाया और सब लड़को को बुलाया। सभी गोलू के पास खड़े हुए तो गोलू ने सबको फटकार लगाकर कहा,”जे का टेंट बांधे हो बे ? मिश्रा बेडिंग प्लानर का नाम डुबोने की कसम खा लिए हो का ? नहीं जे का है जे नारंगी ,जे लाल , जे नीला ,जे पीला अबे टेंट लगाए हो कि इंद्रधनुष बनाये हो,,,,,,,,,,,,और उह्ह मंडप कौन ससुरा बांधा रे हाँ ? तुम्हायी अम्मा लेंगी तीन खम्बो के बीच फेरा,,,,,,,,,,,,,,अबे का करे हम तुम सबका,,,,,,,,,,,,,साला एक काम ढंग से नाही करना होता तुम लोगन को”

सभी चुपचाप गोलू की डांट सुनते रहे। गोलू ने मंगल फूफा को देखा और कहा,”ए फूफा ! तुमहू ऊपर चढ़ो हम बताते है कैसे बांधा जाता है टेंट”
मंगल फूफा ठहरे गोलू के वफादार इसलिए कहते ही तुरंत चढ़ गए पाइप पर जो की जमीन से 10 फूट ऊपर थी। गोलू ने टेंट का कपड़ा उठाया और उसकी रस्सी मंगल फूफा को पकड़ाकर कहा,”ल्यो पकड़ो और बांधो समझ ल्यो यादववा की भैंस का खूंटा बाँध रहे हो”

गोलू ने बाकि लड़को से भी टेंट सही लगाने को कहा और खुद मंगल फूफा के साथ मिलकर गलतिया सही करने लगा। मंगल फूफा ऊपर ही लटके थे कि तभी किसी ने आकर गोलू का कंधा थपथपाया और गोलू ने चिढ़कर कहा,”का है बे ?”
गोलू कन्धा थपथपाने वाले की तरफ पलटा और अगले ही पल वापस पलट गया और भागने के लिए इधर उधर देखने लगा क्योकि कंधा थपथपाने वाला कोई और नहीं बल्कि मंगेश था।

( क्या होगा जब गुड्डू देखेगा अपनी भाड़े की गाड़ी की ये हालत ? क्या लल्लन बताएगा मंगेश को अपनी आपबीती ? क्या मंगेश पकड़ पायेगा गोलू को या गोलू भाग जाएगा उसकी आँखों में धूल झोंककर ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal
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गाडी दिवार तोड़कर सड़क पर आयी और सड़क से आगे घर की तरफ बढ़ी और घर के सामने बने चबूतरे से टकराकर रुक गयी। टक्कर इतनी जोर की थी कि आगे का बोनट हवा में और गोलू सामने से उछलकर गाडी से बाहर , अब बेचारे की किस्मत इतनी ख़राब की गाड़ी से उछलकर गिरा सामने से जाते लल्लन की गोद में , हालाँकि लल्लन खुद टुटा फूटा था लेकिन गोलू को उसने गोद में सम्हाल लिया और गोलू ने भी अपनी बाँहे उसके कंधो के इर्द गिर्द डाल दी। लल्लन ने गोलू की तरफ देखा और गोलू ने जैसे ही लल्लन को देखा तो मारे ख़ुशी के चिल्लाकर कहा,”अबे बब्बन तुम,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

गाडी दिवार तोड़कर सड़क पर आयी और सड़क से आगे घर की तरफ बढ़ी और घर के सामने बने चबूतरे से टकराकर रुक गयी। टक्कर इतनी जोर की थी कि आगे का बोनट हवा में और गोलू सामने से उछलकर गाडी से बाहर , अब बेचारे की किस्मत इतनी ख़राब की गाड़ी से उछलकर गिरा सामने से जाते लल्लन की गोद में , हालाँकि लल्लन खुद टुटा फूटा था लेकिन गोलू को उसने गोद में सम्हाल लिया और गोलू ने भी अपनी बाँहे उसके कंधो के इर्द गिर्द डाल दी। लल्लन ने गोलू की तरफ देखा और गोलू ने जैसे ही लल्लन को देखा तो मारे ख़ुशी के चिल्लाकर कहा,”अबे बब्बन तुम,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

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