Manmarjiyan Season 4 – 24
Manmarjiyan Season 4 – 24

मिश्रा जी घर में शगुन के घरवालों के स्वागत की तैयारी में लगे हुए थे उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि लवली जेल में है। वही गुड्डू सोनू भैया के ऑफिस के फंक्शन के अरेंजमेंट के लिए दुकान चला आया। उसने देखा गोलू आज भी नहीं आया है तो उसने रवि को आवाज दी।
“हाँ गुड्डू भैया”,रवि ने आकर कहा
“अरे जे गोलू कहा है ? और हम तुमको आज की पार्टी के अरेजमेंट का लिस्ट भेजे थे उह्ह सब सामान साइड किया तुमने ?”,गुड्डू ने अपना फोन निकालकर डायल करते हुए पूछा
“हाँ भैया कल शाम मा ही सब सामान पैक करके रख दिए है और पिकअप मा लोड भी करवा दिए है , जुगनू भी बस 10 मिनिट मा पहुंचने ही वाला है”,रवि ने कहा तो गुड्डू ने हामी में सर हिलाकर सहमति जताई और फोन कान से लगा लिया
“आपके द्वारा डॉयल किया गया नंबर अभी बंद है कृपया थोड़ी देर बाद डॉयल करे ,,,,,,,,,धन्यवाद”,गुड्डू को सुनाई दिया उसने कॉल कट किया और खुद में भी भुनभुना कर कहा,”जे गोलू भी ना , बख्त पर कबो फोन नाही उठाएगा,,,,,,कल ही समझाए रहे कि सुबह हमको दुकान पर मिलना सोनू भैया के ऑफिस पार्टी का अरेंजमेंट करना है लेकिन नाही धाक के तीन पात,,,,,,,!!!”
“गुड्डू भैया ! बुरा ना माने तो एक ठो बात कहे ?”,रवि ने डरते डरते कहा
“हाँ कहो,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने रवि की तरफ देखकर कहा
“हम का कह रहे है , सामान तो सारो पैक है और पिकअप भी रेडी है क्यों ना आप ही जुगनू के साथ लोकेशन चले जाये और वहा जाकर गोलू साहब को सीधा वही बुला लें इसे से कल की तरह ना कोनो गड़बड़ होगी ना ही समय की बर्बादी और आपका काम भी शांति से हो जाएगा,,,,,,!!”,रवि ने कहा
गुड्डू ने रवि का कंधा थपथपाया और कहा,”बात मा दम तो है तुम्हायी”
अरे भैया बस आपके साथ रह के आप से ही सीखे रहे थोड़ा बहुत,,,,,,,,,,!!”,रवि ने झेंपकर कहा
लेकिन अगले ही पल रवि की कही बात गुड्डू को खटकी और उसने जाते जाते रवि के सर पर धीरे से चपत लगाकर कहा,”और उह्ह्ह गोलुआ को साहब बोलना बंद करो तुम समझे,,,,,,,,,,,!!!”
“जी जी भैया”,रवि ने कहा और वहा से चला गया
गुड्डू अंदर आया कुछ जरुरी काम निपटाए तब तक जुगनू भी आ चुका था। गुड्डू ने अपनी बाइक वही दुकान के बाहर साइड में लगा दी और जुगनू के साथ पिकअप में बैठकर निकल गया। आज गुड्डू खुद पूरा काम अपनी देख रेख में कर रहा था इसलिए गड़बड़ होने के चांस ना के बराबर थे और वैसे भी असली गड़बड़ तो अभी तक अपने घर में था।
मंगल के कहने पर शनि भैया के आदमियों ने यादव जी की धुलाई कर दी , कुर्ता जगह जगह से फाड् दिया , बाल बिखरे हुए , एक आँख घुसा मारने से काली हो चुकी थी और दाहिना गाल घुसा खाकर लाल हो चुका था। शनि भैया ने देखा यादव जी को अच्छी खासी मार पड़ चुकी है तो उसने अपने लड़को से रुकने का इशारा किया और चारो लड़के साइड में हो गए। यादव जी जैसे तैसे करके उठे और लड़खड़ाते हुए शनि के पास आकर कहा,”ए भैया ! ए हमको बस इतना बताय दयो हमको काहे तोड़ा ?”
शनि ने सुना तो दोनों हाथो से यादव की कोलर पकड़ी और उन्हें हवा में उठाकर अपने सामने करके कहा,”तुमहू हमायी बहिन का दिल तोड़ो और हमहू तुमको ना तोड़े ऐसा कैसे हो सकता है जीजा ?”
“जी,,,,,,,,,,,,,,जा , अरे हमायी मेहरारू का दूर दूर तक कोनो भाई बहिन नाही है तुमहू कहा से आ गए बे ? साला मारने के लिए हमसे रिश्ता बनाय रहे हो”,यादव जी ने दर्द से कराहते हुए कहा
शनि जो की बहुत गुस्सेवाला था उसने यादव को उठाकर फेंका गुप्ता जी और गोलू की तरफ , यादव जी उन दोनों पर आकर गिरे और दोनों उनके वजन से दबकर चिल्लाये। गोलू ने उन्हें साइड में पटका और गुप्ता जी से आँखों ही आँखों में इशारा किया वहा से चुपचाप चलने का,,,,,,,,,,,गुप्ता जी और गोलू बैठे बैठे ही साथ साथ जाने के लिए पलटे लेकिन आगे नहीं बढ़ पाए। गोलू ने कोशिश की फिर गुप्ता जी ने कोशिश की लेकिन दोनों वही के वही थे क्योकि शनि ने एक हाथ में गोलू की कोलर और दूसरे में गुप्ता जी कोलर जो पकड़ी थी।
उसने दोनों को अपनी तरफ घुमाया और कहा,”का बे तुम दोनों कौन हो और हिया का कर रहे हो ?”
“पिताजी लगता है इह हमारे बारे में कुछो नाही जानता,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने दबे स्वर में गुप्ता जी से कहा
“हाँ तभी तो यादव को गुप्ता समझकर प्रसादी दे दी , अब उह्ह परसादी का भौंरा हमे भी मिले जे सी पहिले भाग लेते है हिया से”,गुप्ता जी ने भी दबे स्वर में कहा
शनि भैया ने देखा दोनों आपस में खुसर फुसर कर रहे है तो उन्होंने गुप्ता जी और गोलू के सर आपस में टकराये और कहा,”जे दोनों आपस मा का खुसर फुसर कर रहे हो , हो कौन जे बताओ ?”
गोलू ने घबराकर साइड में देखा नीचे बैठे मंगल फूफा बेहोश पड़े यादव को देखकर खुश हो रहे थे। गोलू ने खींचकर एक लात मंगल फूफा को मारी और कहा,”अबे दिन में सपने देखना बंद करो फूफा , हमको इह चांडाल से बचाओ पहिले”
मंगल फूफा होश में आये और शनि भैया के सामने आकर कहा,”अरे शनि भैया ! जे लोग हमाये आदमी है,,,,,,,,जे का छोड़ दयो”
शनि ने ध्यान से गुप्ता जी और गोलू को देखा और फिर मंगल की तरफ देखकर कहा,”जे कैसे आदमी रखे हो बे मंगल ? लड़को की कमी थी तो हमको कहते हम भेज देते पर जे नमूने अरे एक तुम्हरे बेटे की उमर का है तो दूसरा तुम्हरे बाप की उमर का जे का डाकूगिरि करेंगे बे,,,,,,,!!!”
“अरे भैया ! उह्ह्ह का है ना जंगल छोड़ दिए है पिछले कुछ दिन से अब शहर मा ही अपना नाम बनाने की सोच रहे थे , अब शहर मा तो हर तरह के लोग होते है ना तो 25 से नीचे वालों को जे गोलू देखेगा,,,,,,,,,,,और 50 से ऊपर वाले बुड्ढ़ो को जे गुप,,,,,,,,,,,,,,!!”,मंगल की जबान फिसली लेकिन उसने खुद को रोक लिया लेकिन शनि ने शक की नजर से मंगल को देखा और कहा,”गुप्,,,,,,,,,आगे ?”
“गुप् , गुप् , अरे इनको गुप्त रोग है न तो हम इनका नाम नाही ले सकते,,,,,,,,!!”,मंगल ने जल्दबाजी में जो मुँह में आया बोल दिया
गुप्ता जी ने जैसे ही सुना पैर से चप्पल निकालकर मंगल के मुँह पर मारकर कहा,”तुम्हाये बाप दादा देकर गए थे हमको गुप्त रोग , साले कुछ भी उलटा सीधा बोले ना तो मुँह खोंच लेंगे तुम्हरा समझे,,,,,,,,!!!”
शनि भैया ने देखा की मंगल का आदमी उसे चप्पल फेंक के मार रहा है तो उसने गोलू की कोलर छोड़ी और मंगल के सर पर चपत लगाकर कहा,”का बे मंगलवा , डाकू जात का नाम डुबो दिए हो बे,,,,,,,,जे ससुरा तुम्हरा आदमी तुमको चप्पल फेंक के मार रहा है और तुम खा रहे हो , कुछो बोल काहे नाही रहे ?”
“अरे का बोले हम,,,,,,,,,,का बोले ?”,मंगल फूफा रोआँसा होकर चिल्लाये क्योकि मुँह पर गरमा गर्म चप्पल चप्पल और सर पर शनि का हाथ खाये थे
मंगल फूफा को रोआँसा देखकर शनि भैया उसे देखने लगे तो मंगल ने गुप्ता जी की तरफ इशारा करके कहा,”अरे हमाये बाप की उमर के है , बड़े है हमाये से मार दिए चप्पल गु गु गुल्लू चाचा है हमाये,,,,,,,,,,,!!!”
गुप्ता जी ने सुना तो हैरानी से मंगल को देखने लगे लेकिन कुछ बोलकर वे माहौल खराब करना नहीं चाहते थे।
शनि ने सुना तो उसने गुप्ता जी को भी छोड़ दिया वह कुछ समझ पाता इस से पहले ही गुप्ताइन बाहर आयी और जब उन्होंने देखा कि उनके शनि भैया सामने ही खड़े है तो दनदनाते हुए आयी और मंगल को साइड में फेंककर कहा,”का रे शनि ! अब आय रहे हो तुम ? अपने रंगबाज जीजा से मिले के नाही ?”
“अरे दिदिया ! मिले भी और आते ही परसादी भी दे दिए है जीजा को , अब उह्ह जियादा चू चपड़ ना करे है,,,,,,,,,,!!”,शनि ने कहा
गुप्ताइन ने देखा गुप्ता जी तो सही सलामत उनके पास खड़े थे ये देखकर उन्होंने शनि से कहा,”ए शनि भैया तुमको कोनो गलतफहमी हुई है रे , गोलुआ के पिताजी तो जे रहे तुमहू किसको परसादी दे दिए ?”
शनि ने सुना तो हैरानी से पहले गुप्ता जी को देखा और फिर कुछ ही दूर नीचे बेहोश पड़े यादव को और कहा,”वो ही तो है जीजा ?”
गुप्ताइन ने देखा आँगन में यादव जी बेहोश पड़े है तो उन्होंने अपना सर पीट लिया और शनि से नीचे झुकने का इशारा किया। शनि ख़ुशी ख़ुशी नीचे झुका तो गुप्ताइन ने अपना सारा गुस्सा एक थप्पड़ में जमा किया और चिपका दिया शनि भैया के गाल पर,,,,,,,,,,,शनि को जैसे ही थप्पड़ पड़ा गोलू जोर से हंसा , गुप्ताइन ने अगला थप्पड़ गोलू को जड़ दिया तो गोलू चिल्लाया,”अब हमने का किया , हमे थप्पड़ काहे मारी ?”
“सब के सब बैल है,,,,,,और तुम शनि भैया इत्तो बड़ो शरीर लेकर आये रहय हिया तो थोड़ा दिमाग भी ले आते,,,,,,,,!!!”,गुप्ताइन ने कहा और अंदर चली गयी।
मंगल फूफा एक बार फिर सबकी तरफ चला आया तो शनि ने अपना हाथ अपने गाल से लगाए कहा,”अगर उह्ह्ह गुप्ता नहीं है तो फिर साला जे गुप्ता है कौन ?”
“हम बताते है ना”,मंगल ने फिर सीना ठोककर आगे आते हुए कहा तो गोलू और गुप्ता जी एक साथ चिल्लाये,”अबे चुअअअअअअप”
मंगल ने कुछ नहीं बोला तो शनि झल्ला गया और जैसे ही अपने आदमियों से कुछ कहने के लिए पलटा गोलू उछलकर उसकी गोद में चढ़ गया। गुप्ता जी ने भी मौका देखकर डंडा उठा लिया अब मंगल ने गुप्ता जी का नमक खाया था इसलिए उसे भी गुप्ता जी की तरफ से लड़ना पड़ा। चार शनि के लड़के एक खुद शनि , गुप्ता जी , मंगल फूफा और गोलू आपस में गुथम गुत्था हो गए। साफ सुथरा आँगन जंग का मैदान बन चुका था। गुप्ता जी ने शनि के लड़को को दौड़ा दौड़ा कर जो डंडे मारे है बेचारे गुप्ता जी से बचते नजर आये।
वही मंगल किसी से लड़ नहीं रहा था वह तो बस लड़ने का नाटक कर रहा था और बचा गोलू तो वह शनि भैया की गर्दन दबोचकर उनकी पीठ से ऐसे चिपका जैसे फेविकोल का जोड़ हो। गोलू ने जब देखा की वह शनि भैया को हरा नहीं सकता तो आसमान की तरफ देखकर कहा,”जय बजरंगबली”
इतना कहकर गोलू ने बहुत जोर से शनि की गर्दन पर काट लिया और बेचारा शनि मारे दर्द के नीचे जा गिरा।
गोलू नीचे आ गिरा वह उठा और उछलकर शनि भैया की छाती पर कूदा , फिर नीचे फिर उसके पेट पर , गोलू को आने लगा मजा उसने समझ लिया शनि भैया को स्लीपवेल का गद्दा कभी जमीन पर तो कभी शनि भैया पर , कभी जमीन पर तो कभी शनि भैया पर,,,,,,,,,,,,,,,,!!!
अभी ये सब तमाशा चल ही रहा था कि तभी पुलिस की जीप गुप्ता जी के घर के सामने आकर रुकी। कुछ पुलिसवाले और इंस्पेक्टर गुप्ता जी के घर में चले आये।
“पकड़ो इन सबको और गिरफ्तार कर लो”,कहते हुए इंस्पेक्टर शनि भैया की तरफ आये और उनके हाथ में हथकड़ी पहनाकर कहा,”और तुम शनि शुक्ला , बहुते समय से हम तुमको ढूंढ रहे थे आज जाकर हाथ लगे हो तुम हमाये,,,,,,,,,,ए लेकर चलो रे इन सबको”
शनि के लड़को ने देखा कि पुलिसवालों ने गुप्ता जी और गोलू को नहीं पकड़ा है तो उनमे से एक चिल्लाया,”अरे उनको काहे छोड़ दिया , उह्ह्ह भी हमरा आदमी है,,,ओह्ह का भी पकड़ो”
गुप्ता जी एक तो पहले ही इस ड्रामे से किलसे पड़े थे ऊपर से लड़के की बात सुनकर भड़क गए और उसकी तरफ आकर कहा,”तो तुम का हो हमायी औरत ? अबे अमावस की कौनसी रात मा हम तुम्हायी मांग भरे रहे और गले मा मंगलसूत्र डाले रहे जो हम तुम्हरे आदमी है,,,,,,,!!!!”
इंस्पेक्टर ने सुना तो कॉन्सटेबल से कहा,”इन तीनो को भी गाड़ी में डालो और पुलिस स्टेशन लेकर चलो”
बस फिर क्या था शनि भैया और उनके लड़को के साथ गुप्ता जी , मंगल फूफा और गोलू भी धरे गए और पुलिसवाले सबको लेकर चले गए।
अब तक आँगन में बेहोश पड़े यादव ने कोई हलचल नहीं की थी लेकिन जैसे ही पुलिस की गाड़ी वहा से गयी वे उठे और कहा,”तुमको का लगा गुप्ता जी हमहू तुमको ऐसे ही छोड़ देंगे,,,,,,,,हमने भी कच्ची गोलियाँ नाही खेली है”
गुड्डू पिकअप लेकर पहुंचा लोकेशन पर उसने फिर गोलू को फोन लगाया लेकिन गोलू का फोन अब भी बंद आ रहा था। गुड्डू ने गोलू के बिना ही सब काम करने का सोचा और फिर दुकान से दो लड़को को और बुलाकर उनकी मदद से पार्टी का डेकोरेशन करने लगा। सब इंतजाम करने के बाद गुड्डू ने पानी की बोतल उठायी और पीते हुए साइड में आकर अपना किया काम देखने लगा।
गुड्डू मुस्कुराया और कहा,”साला जे गोलू के बिना हमरा काम कित्ता शांति से हुआ पता ही नाही चला , अभी उह्ह्ह हिया होता न तो कुछो न कुछो काण्ड तो जरूर होता,,,,,,,,,,,,पर साला ओह्ह्ह के बिना मन भी नाही लग रहा है , उह्ह होता है तो मजा आता है काम करने में , हिया सब फाइनल करके सीधा जाते है ओह्ह्ह के घर और पता करते है कि आखिर उह्ह्ह है कहा ?”
गुड्डू अभी खुद में बड़बड़ा ही रहा था कि तभी उसका फोन बजा। गुड्डू ने फोन जेब से निकाला , फोन की स्क्रीन पर अनजान नंबर देखकर गुड्डू ने फोन उठाकर कान से लगाया तो दूसरी तरफ से आवाज आयी,”हेलो ! गुड्डू मिश्रा बात कर रहे है ?”
“जी हाँ हम गुड्डू मिश्रा ही बात कर रहे है। आप कौन बोल रहे है ?”,गुड्डू ने पूछा
“हम कानपूर थाने से बोल रहे है , हमने एक ठो आतंकवादी को पकड़ा है जोन अपना नाम गोलू गुप्ता बता रहा है और कह रहा है कि आप ओह्ह्ह के दोस्त है”,दूसरी तरफ से आवाज आयी
गुड्डू ने जैसे ही सुना गिरते गिरते बचा और अपने सीने पर हाथ रखकर कहा,”का ! गोलू आतंकवादी बन गवा लेकिन कब और कैसे ? कल तक तो उह्ह्ह हमाये साथ था”
“वो सब हमे नहीं पता , तुमहू हिया कानपूर थाने पहुंचो,,,,,,,,,!!!”,दूसरी तरफ से आवाज आयी और फोन कट गया
गुड्डू अपना सर पकड़कर नीचे ही बैठ गया। जुगनू ने देखा तो गुड्डू के पास आया और कहा,”का हुआ गुड्डू भैया ?”
“आज के बाद हमहू कोनो टेंट नाही लगाएंगे,,,,,,,,तुम जे हमरा आखरी टेंट समझो बे जुगनू”,गुड्डू बड़बड़ाया लेकिन जुगनू को कुछ समझ नहीं आया
वह बेचारा तो परेशान सा गुड्डू को देखने लगा तो गुड्डू ने कहा,”हमको चक्कर आ रहा है जुगनू , उह्ह्ह साला गोलू हमको मारकर छोड़ेगा,,,,,,,,,,ए भैया हमको पुलिस स्टेशन ले चलो”
“पुलिस स्टेशन ! लेकिन काहे ?”,जुगनू ने गुड्डू को उठाते हुए कहा
“जे तो हुआ जाकर ही पता चलेगा कि गोलू गुप्ता अब का नवा कांड किये है ?”,गुड्डू ने हताश होकर कहा और जुगनू को साथ लेकर वहा से चला गया
( क्या गोलू आएगा आज की लोकेशन पर या गुड्डू करता रह जायेगा उसका इंतजार ? क्या गुप्ता जी के घर में आने के बाद मंगल फूफा की तरह हो जाएगी शनि भैया की गुंडई भी ख़त्म ? क्या सच में गुड्डू ने मान ली है हार और बंद करने वाला है वह अपना वेडिंग प्लानर का बिजनेस ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


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