Manmarjiyan Season 2 – 35

Manmarjiyan Season 2 – 35

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

मंगल फूफा से लड़ते झगड़ते गोलू पिंकी के लिए इंजेक्शन ले आया। उसने इंजेक्शन नर्स को दिया और वेटिंग एरिया में पड़े बेंच पर आ बैठा। गोलू शांत था और उसके दिमाग में बस पिंकी चल रही थी। बीते कुछ दिनों से गोलू ने पिंकी को बहुत कम वक्त दिया था और अभी पिंकी की इस हालत के लिए खुद को जिम्मेदार मान रहा था। गोलू को शांत देखकर मंगल फूफा उसके और अपने लिए दो कप चाय ले आये। उन्होंने एक कप गोलू की तरफ बढाकर कहा,”ल्यो गोलू ! चाय पी ल्यो और जियादा टेंशन नाही ल्यो ठीक हो जाएगी बहू,,,,,,,,,ल्यो कप पकड़ो”

गोलू ने मंगल फूफा को परवाह करते देखा तो मंगल को लेकर उसका गुस्सा एकदम से गायब हो गया और उसने चाय का कप लेकर कहा,”तुमहू इत्ते बुरे भी नाही हो मंगल फूफा”
“अरे का गोलू तुम भी , चाय पीओ”,मंगल फूफा ने कहा और खुद भी अपनी चाय पीने लगे

गोलू चाय पीकर उठा और कप डस्टबिन में डालने साइड में आया तभी सामने से गुड्डू भागकर गोलू के पास आया और उसकी पीठ पर एक मुक्का जड़ते हुए कहा,”साले ! अस्पताल मा हो जे बताया लेकिन कौन से अस्पताल मा हो जे काहे नहीं बताया ? पता है शहर के 4 अस्पतालों में धक्के खाकर आये है तब जाकर तुमहू हिया मिले हो”
गुड्डू को हाँफते देखकर गोलू समझ गया कि गुड्डू सच कह रहा है लेकिन अगले ही पल चिढ़कर कहा,”कहा से बताते हमायी पूरी बात सुनने से पहिले ही आपने हमाओ फोन काट देओ”

“बैटरी खत्म हो गयी थी हमाये फोन की,,,,,,,,,और तुम तुम साले इत्ता लंबा चौड़ा बतियाये सीधा बोलते कि गुड्डू भैया जे अस्पताल मा है तुरंत आओ तो का नहीं आते हम ?”,गुड्डू ने गुस्से से कहा
गोलू कुछ देर खामोश रहा और फिर धीरे से कहा,”सॉरी”
“का करे तुम्हाये सॉरी का , बत्ती बनाय ले या धागे मा पिरो के गले मा पहिन ले ?”,गुड्डू अब भी गुस्से में था

ये देखकर गोलू ने शांत रहना ही ठीक समझा लेकिन गुड्डू को भी शांत करना जरुरी था इसलिए कहा,”उह्ह्ह एकदम से पिंकिया बेहोश हो गयी ना तो हमहू घबरा गए थे , पिताजी घर में थे नहीं अम्मा ने रोना पीटना चालू कर दिया तो ओह्ह्ह का साथ नाही लाये , हम और मंगल फूफा पिंकिया को हिया लेकर आये”
गुड्डू ने सुना तो उसका गुस्सा थोड़ा शांत हुआ और उसने कहा,”जे तुम्हायी अम्मा की आँख की टंकी का हमेशा चालू ही रहती है ? खैर छोडो जे सब इह बताओ पिंकी कैसी है , कोनो घबराने वाली बात तो नहीं है ना ?”

गोलू कुछ जवाब देता इस से पहले नर्स आयी और कहा,”उनको होश आ गया है , जच्चा और बच्चा दोनों ठीक है। अभी डॉक्टर राउंड पर है उसके बाद आप उनसे मिल सकते है”
गुड्डू गोलू ने सुना तो उनकी जान में जान आयी और कुछ ही दूर खड़े मंगल फूफा ने भी हाथ जोड़ आसमान की तरफ देखते हुए भगवान का शुक्रिया अदा किया और गुड्डू गोलू की तरफ चला आया।

“नर्स मैडम ! वैसे ओह्ह्ह का हुआ का था उह्ह्ह अचानक बेहोश काहे हो गयी ?”,गोलू ने पूछा
“कमजोरी की वजह से उन्हें चक्कर आ गया था उनके खाने पीने का थोड़ा ख्याल रखिये”,नर्स ने कहा और वहा से चली गयी।
“सुना तुमने ! तुम ना गोलू पिंकी का ठीक से ख्याल नहीं रख रहे हो , दिनभर तुम्हरा दिमाग उलटे सीधे कामो में लगता है पिंकी को वक्त देते भी हो या नहीं ?”,गुड्डू ने गोलू को फटकार लगायी

“अरे कहा गुड्डू भैया ? दिनभर तो आपके साथ रहते है पिंकी को बख्त कहा से दे पाएंगे ?”,गोलू ने मायूसी से कहा
“ये जो चंदौली वाला आर्डर लिए हो दुइ दिन मा जे निपटाय ल्यो ओह्ह के बाद दुई हफ्ता कोनो काम नाही है , कुछो छोटा मोटा होगा सो हम देख लेंगे और तुम दुइ हफ्ता सिर्फ पिंकी और ओह्ह के होने वाले बच्चे का ख्याल रखोगे समझे”,गुड्डू ने सख्त स्वर में कहा

आज ऐसे बात करते हुए गुड्डू गोलू का दोस्त कम और उसका बड़ा भाई ज्यादा लग रहा था। गोलू चुपचाप सर झुकाकर गुड्डू की बात सुन रहा था ये देखकर मंगल फूफा को अपने कहे शब्दों का अफ़सोस होने लगा जो उन्होंने गुड्डू को लेकर गोलू से कहे थे।

मिश्रा जी का घर , कानपूर
“ये गुड्डू जी अभी तक आये क्यों नहीं , गोलू जी को फोन करने गए है या उन्हें लेने ?”,शगुन ने कहा
“भाभी लगता है गुड्डू भैया सीधा गोलू भैया के घर ही पहुंच गए है,,,,,,,,,!!!”,वेदी ने हँसते हुए कहा
“दी ये गुड्डू जीजू और गोलू जी साथ में कुछ ज्यादा ही वक्त नहीं बिताते , कभी कभी तो लगता है जैसे गुड्डू जीजू ने आपसे नहीं बल्कि गोलू जी शादी की है”,प्रीति ने कहा तो सब हंस पड़े और शगुन मुस्कुरा दी लेकिन उसकी मुस्कराहट के पीछे उलझन और परेशानी के भाव थे जो किसी ने नहीं देखे।

“कही गोलू जी ने फिर से कुछ गड़बड़ तो नहीं कर दी और इसलिए गुड्डू जी बिना किसी को बताये चले गए ? ये गोलू जी भी ना ! पता नहीं आजकल क्या हो गया है इन्हे , हर रोज ये कुछ न कुछ गड़बड़ करते है , खुद भी परेशान होते है और अपने आस पास वालो को भी करते है। अब मैं कैसे पता करू कि क्या हुआ है ? हे महादेव ! बस गुड्डू जी और गोलू जी किसी मुसीबत में ना हो,,,,,,,,,,!!!”,शगुन ने मन ही मन खुद से कहा

“दी , शगुन दी,,,,,,,,,,,,!!!”,प्रीति ने कहा तो शगुन की तंद्रा टूटी और उसने प्रीति की तरफ देखा
“क्या हुआ ! कहा खो गयी आप ?”,प्रीति ने पूछा
“अह्ह्ह कही नहीं , तुम सब बाते करो मैं सबके लिए चाय लेकर आती हूँ”,शगुन ने उठते हुए कहा ताकि कमरे से बाहर जाकर वह गुड्डू को फोन कर सके और पता लगा सके कि वह बिना बताये कहा चला गया ?

“अरे भाभी ! आप बैठिये ना सुबह से तो काम कर रही है , सबके लिए चाय मैं ले आती हूँ”,वेदी ने उठते हुए कहा
“अरे नहीं नहीं वेदी , तुम बैठो ! आज तुम्हारी सगाई हुई है और तुम ही काम करोगी , तुम बैठो मैं ले आती हूँ वैसे भी सुबह से मैं बस आराम ही कर रही हूँ”,शगुन ने कहा तो अमन ने शगुन का हाथ पकड़कर उसे वापस बैठा दिया और वेदी की तरफ देखकर कहा,”दी आप बैठिये और इन्हे चाय बनाने दीजिये , पता तो चले इन्हे अच्छी चाय बनानी आती भी है या नहीं”

अमन की बात सुनकर शगुन , रोहन और प्रीति मुस्कुराने लगे और वेदी ने अमन को घूरकर कहा,”अच्छा जी ! चाय क्या हम बहुत कुछ बना लेते है , हमारी भाभी ने हमे सब सिखाया है,,,,,,,,,,क्यों भाभी ?”
शगुन ने सुना तो वेदी का गाल छूकर कहा,”हाँ और वेदी से अच्छी चाय तो आज तक मैं और माजी भी नहीं बना पाए”

“इसी बात पर फिर वेदी के हाथ की चाय हो जाये”,रोहन ने कहा जिसका चाय पीने का बहुत मन कर रहा था।
“हाँ हाँ क्यों नहीं हम अभी गए और अभी आये”,कहकर वेदी वहा से चली गयी और कुछ देर बाद शगुन भी उसकी मदद करने उसके पीछे चली गयी। कमरे में बस अमन , प्रीति और रोहन थे और तीनो शाम की ट्रेन को लेकर चर्चा करने लगे जो कि रात 12 बजे थी।  

शगुन ने किचन में आकर वेदी की मदद की उसे चाय लेकर चलने को कहा। वेदी के जाने के बाद शगुन ने चाची और मिश्राइन के लिए चाय ली और उन्हें देने उनके कमरे में चली आयी। उन्हें चाय देकर शगुन हॉल में आयी और अपने फोन से गुड्डू का नंबर डॉयल किया। गुड्डू का फोन बंद आ रहा था ये जानकर शगुन को और चिंता होने लगी। वह वापस कमरे की तरफ जाने लगी तो सहसा ही उसे याद आया कि लवली ऊपर अपने कमरे में है साथ ही उसे लवली का प्रीति के साथ किया बर्ताव याद आया तो वह किचन में चली आयी।

उसने एक कप चाय ली और लेकर सीढ़ियों की तरफ बढ़ गयी। शगुन चाय लेकर ऊपर आयी। लवली रिश्ते में उस से बड़ा था लेकिन मिश्रा जी ने इस घर में किसी तरह का बंधन नहीं रखा था और फिर लवली की तो शुरू से शगुन से बोलचाल थी इसलिए शगुन बेझिझक अपने कमरे के सामने आयी जिसका दरवाजा खुला था और लवली अंदर उदास सा बिस्तर पर बैठा था। शगुन ने दरवाजा खटखटाया और कहा,”लवली भैया ! क्या मैं अंदर आ जाऊ ?”
शगुन की आवाज से लवली की तंद्रा टूटी वह उठा और कहा,”हाँ ! हाँ आओ ना शगुन”

शगुन अंदर आयी और चाय लवली की तरफ बढ़ाकर कहा,”नीचे सबके लिए चाय बनी थी तो सोचा आपके लिए भी ले आये , लीजिये”
लवली ने चाय का कप लिया लेकिन उदासी अभी भी उसके चेहरे से साफ झलक रही थी ये देखकर शगुन ने कहा,”क्या बता है आप कुछ परेशान नजर आ रहे है ?”

शगुन की बात सुनकर लवली ने उसकी तरफ देखा और कहा,”शगुन ! हमे नहीं पता था तुम्हारी माँ नहीं है और अनजाने में हमने तुम्हारी बहन से गलत कह दिया। हमे उस से ऐसे नहीं कहना चाहिए था , हमे अपनी बात का बहुत अफ़सोस है और इसलिए अब हम तुमसे माफ़ी मांगते है,,,,,,,हमारा ऐसा कोई इरादा नहीं था”

शगुन ने सुना तो लवली की तरफ देखा और सहजता से कहा,”लवली भैया जैसे प्रीति आपके लिए अनजान है वैसे ही आप भी उसके लिए अजनबी ही है। उसने आपको परेशान सिर्फ इसलिए किया क्योकि वह आपको गुड्डू जी समझ रही थी और आपने भी अनजाने में उसे वो कह दिया जो नहीं कहना चाहिए था। गलती यहाँ दोनों की ही नहीं है वो इसलिए क्योकि आप दोनों का ठीक से परिचय हुआ ही नहीं फिर आपको उसके बारे में और उसे आपके स्वाभाव के बारे में कैसे पता होगा ? आप माफ़ी मत मांगिये प्रीति को मैंने समझा दिया है”

शगुन की बात सुनकर लवली ने अपनी नजरे झुकाई और कहा,”गुड्डू बहुत किस्मत वाला है शगुन जिसके जीवन में अर्धांगिनी बनकर तुम आयी , हमेशा उसके ऐसी ही रहना कभी उसका साथ मत छोड़ना और रही प्रीति की बात तो हमने गलती की है शगुन बस हमे समझ नहीं आ रहा हम कैसे माफ़ी माँगे ?”
शगुन ने सुना तो मुस्कुराई और कहा,”उसे चॉकलेट्स बहुत पसंद है लवली भैया , अगर आप उसे वो देंगे तो वो तुरंत अपना गुस्सा भूल जाएगी और आपको माफ़ भी कर देगी,,,,,,,,,!!”

“ठीक है फिर कल हम उसके लिए ढेर सारी चॉकलेट्स ले आएंगे”,लवली ने कहा
“कल ? लेकिन मेरे घरवाले तो आज रात की ट्रैन से वापस बनारस जा रहे है”,शगुन ने कहा
“ओह्ह्ह ! तो फिर एक काम करते है हम उन्हें छोड़ने स्टेशन चले जायेंगे,,,,,,,,,गुड्डू को कल सुबह जल्दी निकलना है तो उसकी जगह हम चले जायेंगे हमे वैसे भी कोई काम नहीं है,,,,,,,,,!!!”,लवली ने कहा

“ठीक है,,,,,,,आप चाय पी लीजिये ठंडी हो जाएगी”,शगुन ने कहा और वहा से चली गयी। शगुन से बात करके लवली के मन का बोझ कुछ कम हो गया। वह बिस्तर पर आ बैठा और अपनी चाय पीने लगा

सिटी हॉस्पिटल , कानपूर
गुड्डू गोलू और मंगल फूफा बेंच पर बैठे थे। कुछ देर पहले तक गोलू पिंकी को लेकर परेशान था लेकिन अब उसके चेहरे पर सुकून के भाव थे। गुड्डू भी ख़ामोशी से बैठा था और मंगल फूफा बैठे बैठे बोर हो रहे थे। वैसे भी उन्हें एक जगह ज्यादा देर तक बैठने की आदत जो नहीं थी।  मंगल फूफा उठे और घूमते हुए रिसेप्शन की तरफ चले आये जहा एक भारी भरकम महिला नर्स बैठकर अपनी फाइल बना रही थी।

मंगल फूफा ने अपने सर पर बचे चार बालों को जमाया और महिला नर्स के पास आकर कहा,”इसकूज मी”
महिला नर्स ने ध्यान नहीं दिया और अपना काम करना जारी रखा। फूफा ने एक बार फिर कहा,”इसकूज मी , हम आपसे बात कर रहे है”
“जी भैया कहिये”,महिला नर्स ने मंगल फूफा की तरफ देखकर कहा

मंगल फूफा ने जैसे ही नर्स के मुँह से भैया सुना उनका मुँह बन गया और उन्होंने अपना हाथ अपने सीने पर रखकर कहा,”भैया,,,,,,,,,,,,,,हम तुमको भैया नजर आते है,,,,,,,,,अरे अपनी आँखो से जे बड़ा बड़ा चश्मा हटाकर देखो तुमसे दुइ साल छोटे नजर आएंगे,,,,,,,,,,,भैया”
“तो का वरमाला पहिना दे जे आपको ?”,एक जानी पहचानी आवाज मंगल फूफा के कानों में पड़ी जो कि किसी और की नहीं बल्कि गुप्ता जी की थी जो कि गुप्ताइन के साथ अस्पताल आये थे

इनको भी अभी आना था”,मंगल फूफा ने मुँह बनाते हुए मन ही मन खुद से कहा और फिर मासूम सी शक्ल बनाकर गुप्ता जी की तरफ पलटकर कहा,”अरे वरमाला काहे ? अभी आपने सुना ना इन्होने भैया कहा हमे,,,,,,,,,,,,और एक भाई का फर्ज,,,,,,,,,,,!!!”
“अपना जे भाई पुराण बाद मा सुनाना हमको , जे बताओ गोलू कहा है ?”,गुप्ता जी ने पूछा
“गोलू वहा गुड्डू के साथ बेंच पर बैठा है”,मंगल फूफा ने कहा

गुप्ता जी ने सुना तो हैरानी से गुप्ताइन को देखा और कहा,”गुप्ताइन तुमहू तो कह रही थी बहू की तबियत खराब है तो फिर गोलुआ हिया गुड्डू के साथ का कर रहा है ?”
 “अरे गुप्ता जी ! तबियत पिंकी की ही खराब थी और उह्ह्ह अंदर वार्ड मा है। गुड्डू तो हिया मदद के लिए आया है”,मंगल फूफा ने कहा

“हाँ तो पूरी बात काहे नाही बताते ? चलो गुप्ताइन”,कहकर गुप्ता जी आगे बढ़ गए और गुप्ताइन भी उनके पीछे चली गयी। उनके जाने के बाद मंगल फूफा एक बार फिर रंग में आये और अपने बालों को सेट करते हुए पलटे और कहा,”इसकूज मी,,,,,,,,,,!!!”
लेकिन जैसे ही मंगल फूफा की नजर सामने पड़ी उनके चेहरे से ख़ुशी और होंठो से हंसी गायब हो गयी। नर्स की जगह वहा कुर्सी पर हट्टा कट्टा आदमी बैठा था मंगल फूफा को ही घूर रहा था। मंगल फूफा ने वहा से जाने में ही अपनी भलाई समझी और चुपचाप चले गए।

मंगल फूफा से लड़ते झगड़ते गोलू पिंकी के लिए इंजेक्शन ले आया। उसने इंजेक्शन नर्स को दिया और वेटिंग एरिया में पड़े बेंच पर आ बैठा। गोलू शांत था और उसके दिमाग में बस पिंकी चल रही थी। बीते कुछ दिनों से गोलू ने पिंकी को बहुत कम वक्त दिया था और अभी पिंकी की इस हालत के लिए खुद को जिम्मेदार मान रहा था। गोलू को शांत देखकर मंगल फूफा उसके और अपने लिए दो कप चाय ले आये। उन्होंने एक कप गोलू की तरफ बढाकर कहा,”ल्यो गोलू ! चाय पी ल्यो और जियादा टेंशन नाही ल्यो ठीक हो जाएगी बहू,,,,,,,,,ल्यो कप पकड़ो”

मंगल फूफा से लड़ते झगड़ते गोलू पिंकी के लिए इंजेक्शन ले आया। उसने इंजेक्शन नर्स को दिया और वेटिंग एरिया में पड़े बेंच पर आ बैठा। गोलू शांत था और उसके दिमाग में बस पिंकी चल रही थी। बीते कुछ दिनों से गोलू ने पिंकी को बहुत कम वक्त दिया था और अभी पिंकी की इस हालत के लिए खुद को जिम्मेदार मान रहा था। गोलू को शांत देखकर मंगल फूफा उसके और अपने लिए दो कप चाय ले आये। उन्होंने एक कप गोलू की तरफ बढाकर कहा,”ल्यो गोलू ! चाय पी ल्यो और जियादा टेंशन नाही ल्यो ठीक हो जाएगी बहू,,,,,,,,,ल्यो कप पकड़ो”

मंगल फूफा से लड़ते झगड़ते गोलू पिंकी के लिए इंजेक्शन ले आया। उसने इंजेक्शन नर्स को दिया और वेटिंग एरिया में पड़े बेंच पर आ बैठा। गोलू शांत था और उसके दिमाग में बस पिंकी चल रही थी। बीते कुछ दिनों से गोलू ने पिंकी को बहुत कम वक्त दिया था और अभी पिंकी की इस हालत के लिए खुद को जिम्मेदार मान रहा था। गोलू को शांत देखकर मंगल फूफा उसके और अपने लिए दो कप चाय ले आये। उन्होंने एक कप गोलू की तरफ बढाकर कहा,”ल्यो गोलू ! चाय पी ल्यो और जियादा टेंशन नाही ल्यो ठीक हो जाएगी बहू,,,,,,,,,ल्यो कप पकड़ो”

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संजना किरोड़ीवाल 

Manmarjiyan Season 4
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