Manmarjiyan Season 4 – 34

Manmarjiyan Season 4 – 34

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

प्रीति की आँखों में आँसू देखकर गुड्डू को अच्छा नहीं लगा। प्रीति में थोड़ा बचपना था और बस इसीलिए गुड्डू ने कभी उसकी किसी भी बात का बुरा नहीं माना लेकिन आज लवली की बात सुनकर गुड्डू को भी दुःख हुआ। वह सीधा अपने कमरे में चला आया जिसमे अब लवली रहता था। गुस्से और मायूसी की भावना में उलझा लवली कमरे में यहाँ से वहा चक्कर काट रहा था कि गुड्डू को अपने सामने देखकर रुक गया।

लवली गुड्डू से कुछ कहता या पूछता इस से पहले गुड्डू ने कहा,”लवली भैया ! प्रीति से कुछो गलती हुई का ? आप ओह्ह पर चिल्लाय दिए , अरे उह्ह्ह जे घर मा मेहमान है , शगुन की बहिन है। ओह्ह्ह से कोनो गलती हुई भी तो प्यार से समझा देते या हमसे कहते पर आपने तो,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“तो तुम का हिया ओह्ह्ह की सिफारिश लेकर आये हो गुड्डू ? तुम जानते भी हो कितना बचपना है ओह्ह्ह लड़की मा , मेहमान है तो मेहमान की तरह रहे। ओह्ह्ह का मस्ती मजाक करना और बार बार हमे गुड्डू समझ कर हमाये करीब आना हमे नाही पसंद,,,,,,!!”.लवली ने गुस्से से कहा

गुड्डू ने सुना तो फीका सा मुस्कुराया और कहा,”लवली भैया ! आप प्रीति को गलत समझ रहे है ,, माना कि ओह्ह मा बचपना है , उह्ह्ह थोड़ी चंचल है पर दिल की बुरी नाही है और समझदार , समझदार तो शगुन से भी ज्यादा है। आपसे मस्ती मजाक भी उह्ह्ह हमे समझ के की होगी वरना उह्ह्ह ऐसा कबो नाही करती , इतनी सी बात के लिए आपको ओह्ह्ह पर चिल्लाना नाही चाहिए था। आज से पहिले हमहू ओह्ह की आँख मा ऐसे आँसू कबो नाही देखे है,,,,,,,!”

“देखो गुड्डू ! उह्ह्ह तुम्हायी साली है तो तुम ओह्ह्ह के नखरे उठाओ समझे,,,,,,,,,!!!’,लवली ने एक बार फिर गुस्से से कहा
“हम तो उठा लेंगे लवली भैया बस आपको उनकी माँ के बारे में कुछो नाही कहना चाहिए था”,गुड्डू ने हताश होकर कहा
“का गलत कहे हम ? अगर ओह्ह्ह की अम्मा उन्हें सही गलत सिखाये रहती तो उह्ह्ह इतनी चंचल नाही होती”,लवली ने चिढ़कर कहा

गुड्डू ने एक नजर लवली को देखा और उदासी भरे स्वर में कहा,”अम्मा नाही है ओह्ह की , बचपन मा ही गुजर गयी जब शगुन 5 साल की थी , तब से बस शगुन के पापा ने ही उन दोनों को पाला है,,,,,,,,,,!!!”
लवली ने सुना तो उसके चेहरे से गुस्से के भाव एकदम से गायब हो गए और उसकी आँखों के सामने प्रीति का उदास चेहरा आ गया जब लवली के मुँह से माँ के बारे में सुनकर उसकी आँखों में आँसू भर आये थे।
लवली को अपनी कही बात का पछतावा होने लगा साथ ही प्रीति के बारे में सोचकर बुरा भी लगने लगा।

वह गुड्डू से कुछ कहता इस से पहले गुड्डू वहा से चला गया और लवली उदास होकर बिस्तर पर आ बैठा। एक तरफ उसे बिंदिया की चिंता थी तो दूसरी तरफ वह मिश्रा जी के घर में लोगो से सामंजस्य नहीं बैठा पा रहा था। उसका फोन बंद हो चुका था और मनोज से भी उसकी बात नहीं हो पायी। अब तो उसके पास गुड्डू के रूप में बस एक ही आखरी उम्मीद बची थी।

लवली से बात करके गुड्डू नीचे चला आया और प्रीति को ढूंढने लगा। ढूंढते ढूंढते वह कमरे में चला आया जहा प्रीति और शगुन मौजूद थे।
“आज के बाद मैं यहाँ नहीं आउंगी दीदी”,प्रीति ने सुबकते हुए कहा
“जाने दो ना प्रीति , लवली भैया इन दिनों बहुत परेशान है उन्होंने गुस्से में आकर तुम्हे ये सब कह दिया होगा बाकि दिल के बुरे नहीं है वो”,शगुन ने कहा

“उनकी सब बात ठीक है दीदी लेकिन उन्हें हमारी माँ को बीच में नहीं लाना चाहिए था , होंगे वो गुड्डू जीजू के बड़े भाई लेकिन मैं अपनी माँ के बारे में एक शब्द नहीं सुन सकती”,प्रीति ने गुस्से से कहा
“और तुम्हे सुनना भी नहीं चाहिए”,गुड्डू ने कमरे में आते हुए कहा
गुड्डू को वहा देखकर प्रीति पलटी और शगुन के चेहरे पर भी परेशानी के भाव उभर आये। गुड्डू उन दोनों के पास आया और फिर प्रीति से कहा,”प्रीति ! लवली भैया की तरफ से हम तुमसे माफ़ी मांगते है , उन्हें नहीं पता था तुम्हारी अम्मा के बारे इहलीये उह्ह्ह जे सब कह दिए,,,,,,,,,उनका माफ कर दयो,,,,,,,,!!!”

गुड्डू की मासूमियत देखकर प्रीति का दिल पिघल गया और उसने कहा,”ठीक है ! आप कह रहे है सिर्फ इसलिए लेकिन आज के बाद में उनसे कभी बात नहीं करुँगी,,,,,,,,,,,,,!!”
“हाँ तो मत करो , तुम्हाये जीजा हम है हमसे बात करो तुम”,गुड्डू ने कहा
प्रीति ने गुड्डू को साइड से गले लगाया और गुड्डू ने अपनी बाँह प्रीति के कंधो पर रखकर कहा,”तुम हमाये लिये हमायी वेदिया की तरह ही हो इसलिए दोबारा जे ना कहना कि हिया नाही आओगी , तुम्हारा जब मन करे तब आना जे घर भी तुमहाओ अपनों है”

वेदी और रोहन भी उसी कमरे में चले आये। रोहन ने जब देखा गुड्डू अपनी साली साहिबा पर कुछ ज्यादा ही प्यार लुटा रहा है तो उसने कहा,”क्या अर्पित जी ? सारा प्यार अपनी साली साहिबा पर ही लुटा देंगे , थोड़ा ध्यान हम पर भी दीजिये”
गुड्डू ने प्रीति के कंधो से हाथ हटाया और रोहन की तरफ आकर उसके कंधो पर बाँह रखकर दबे स्वर में कहा,”बताओ का खातिरदारी करे आपकी , कुछो ठंडा मँगवाय दे,,,,,,,,,!!!”

“ये जो कानाफूसी हो रही है सब समझ आ रही है मुझे”,शगुन ने गुड्डू की तरफ देखकर कहा
गुड्डू रोहन से हटा और शगुन की तरफ आकर उसके कंधो पर अपनी बाँह रखकर कहा,”का यार शगुन ! कबो तो अपने जे मास्टरनी वाले कैरेक्टर से बाहिर निकलो,,,,,,,,,!!”
गुड्डू की बात सुनकर सब ठहाका लगाकर हंस पड़े कमरे का माहौल काफी खुशनुमा हो चला था। कमरे में शगुन , गुड्डू , प्रीति , रोहन और वेदी मौजूद थे और घूमते घामते अमन भी वहा आ पहुंचा।

मिश्राइन चाची के साथ अपने कमरे में थी और मिश्रा जी शगुन के पापा और विनोद चाचा के साथ अपने शोरूम निकल गए। सभी गुड्डू में कमरे में अपनी अपनी जगह बनाकर बैठ गए और बातें करने लगे। बातें कम और हंसी ठिठोली ज्यादा थी।
कमरे में सब मौजूद थे बस लवली नहीं था और ना ही आज यहाँ गोलू मौजूद था।

“अरे जीजू ! सब यहाँ है लेकिन आपके जिगरी दोस्त गोलू जी कही नजर नहीं आ रहे , सुबह बस एक झलक देखी थी उनकी तब से बस गायब है वो ,, पहले तो आपकी पूछ पकड़कर रहते थे और अब दूर दूर तक कही नजर नही आते”,प्रीति ने गोलू को याद करके कहा
“उह्ह्ह साला गोलुआ कही नजर ना ही आये तो अच्छा है”,गुड्डू धीरे से बड़बड़ाया
“क्या , क्या कहा आपने ?”,गुड्डू के बगल में बैठी प्रीति ने कहा

“नहीं कुछ नहीं , उह्ह्ह शायद घर पर है”,गुड्डू ने कहा
“घर पर क्या कर रहे है ? अरे बुलाइये उन्हें भी यहाँ उनके बिना महफ़िल अधूरी है”,रोहन ने कहा
“हाँ भैया और गोलू भैया से कहना पिंकी को भी अपने साथ ले आये , वो भी प्रीति और बाकि सब से मिल लेंगी”,इस बार वेदी ने कहा

“जे साला गोलू के बिना मन तो हमाओ भी नाही लग रहो , एक ठो काम करते है बुला ही लेते है,,,,,,,,,,,पता चले बाहिर रह के फिर से कोनो नवा कांड कर रहे हो”,गुड्डू ने मन ही मन कहा और उठकर सबसे बोला,”ठीक है हम उसको फोन करके आते है”
गुड्डू साइड में चला आया और बाकि सब एक बार फिर बातों में लग गए।

गुड्डू ने गोलू का नंबर डॉयल किया और दो चार रिंग के बाद गोलू ने फोन उठाकर कहा,”हाँ गुड्डू भैया”
“गोलू कहा हो ? हिया सब तुमको याद कर रहे है , सब बैठे है साथ मा आ जाओ तुम्हायी कमी है और हाँ पिंकिया को भी साथ लेते आना”,गुड्डू ने एक साँस में सब कह दिया
“गुड्डू भैया हम नहीं आ सकते”,गोलू ने गंभीर स्वर में कहा

“काहे ? काहे नाही आ सकते , चुपचाप अपना स्कूटर उठाओ और घर आओ,,,,,,,,बड़े आये हमे ना बोलने वाले”,गुड्डू ने गोलू को फटकार लगाइ
“गुड्डू भैया बात को समझिये , हम नाही आ सकते”,गोलू ने मायूसी भरे स्वर में कहा  
“ए गोलू ! का हुआ भाई , सुबह वाली बात का कुछो जियादा ही बुरा लग गवा का ? अरे हमहू तो बस मजाक मा कहे थे , कसम से”,गुड्डू ने नरम स्वर में कहा

“गुड्डू भैया हमहू अस्पताल मा है , पिंकिया की तबियत अचानक से बिगड़ गयी तो उसी को लेकर आये है”,गोलू ने कहा
गुड्डू ने जैसे ही सुना उसके चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये , वह गोलू से कुछ कहता इस से पहले ही उसका फोन कट गया और गोलू से आगे बात नहीं हो पायी।

सिटी हॉस्पिटल , कानपूर
“देखा गोलू ! मुसीबत के समय मा कोई किसी के काम नाही आता है , गुड्डू ने भी फोन काटकर जे दिखा दिया ना कि उह्ह्ह बस नाम का दोस्त है , तुम्ही दिनभर बस गुड्डू भैया गुड्डू भैया कहते उसके पीछे घूमते रहते हो। अब हिया तुम अपनी मेहरारू के लिए परेशान हो और हुआ तुम्हरे गुड्डू भैया अपने ससुराल वालो के साथ मौज उड़ा रहे है “,गोलू के साथ खड़े मंगल फूफा ने गोलू को ताना मारकर कहा

गोलू ने सुना तो उसने गुस्से से फूफा को देखा और कहा,”एक ठो बात बताओ फूफा तुमहू हिया हमायी मदद करने आये हो या हमाये जख्मो पर नमक छिड़कने , नहीं मतलब आज खुलकर बताय ही दयो,,,,,,,,,,तुमहाओ सिर्फ सरनेम फूफा है , फूफा वाले लक्षण नाही दिखाओ तुम समझे,,,,,,,,,,,,और हमाये गुड्डू भैया के लिए कुछो नाही कहना , उह्ह्ह हिया आकर भी का कर लेंगे डॉक्टर बनकर चेकअप तो करने से रहे पिंकिया का,,,,,,,,,,,

और मुसीबत मा हमहू तुमको साथ लेकर तो आये है,,,,,,,,,,,,पर साला हम भूल गए न कि तुमहू ही तो हो हमायी सबसे बड़ी मुसीबत,,,,,,,,ना तुमहूँ चाय माँगते ना पिंकिया रसोई मा जाती , ना ओह्ह्ह का चक्कर आता और ना हम हिया होते इहलीये अपना मुँह ना बंद ही रखो,,,,,,,,,,,,,साला फुलवारी का पीछा छोड़े तो राहू बनकर हमसे चिपक गए”

मंगल फूफा मुँह फाड़े हैरानी से गोलू की बाते सुनते रहे और फिर धीरे से कहा,”बस करो गोलू अब का एक ही दिन में सारा जलील जार दोगे,,,,,,,,,,!!!”
“पिंकी गुप्ता के साथ में कौन है ?”,नर्स ने आकर आवाज लगायी तो गोलू उसकी तरफ आया और कहा,”जी कहिये ! हम है ओह्ह के साथ,,,,,,,,,,!!”
“बाहर मेडिकल से ये एक ठो इंजेक्शन ले आओ ज़रा”,नर्स ने पर्ची गोलू की तरफ बढाकर कहा
“बाहिर से काहे ! हिया अस्पताल मा नाही है का ?”,गोलू ने पर्ची लेकर कहा
“स्टॉक में नहीं है”,नर्स ने कहा

“स्टॉक मा नाहीं है तो जे इत्तो बड़ो अस्पताल खोलकर काहे बैठी हो ? हमे लूटने के लिए,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने कहा तो नर्स मुँह बनाकर वहा से चली गयी
गोलू भी पर्ची हाथ में थामे बाहर जाने लगा तो मंगल फूफा ने कहा,”अरे गोलू हम भी साथ चलते है”
मंगल फूफा गोलू के साथ साथ हॉस्पिटल के कॉरिडोर में चलने लगे तो गोलू ने कहा,”देख रहे हो फूफा प्राइवेट अस्पतालों की दुर्दशा , साला इंजेक्शन भी बाहिर से मंगवा रहे है ,, अरे कबो कुछो इमरजेंसी हो तो तुम्हारा पेशेंट तो गया काम से और उह्ह्ह बाहिर का इंजेक्शन रह जाएगा धरा का धरा,,,,,,,!!!”

“हाँ गोलू ! एक ठो बार हमाये फूफा ने मारे दर्द के सीना पकड़ लिया , हम थे तब 12 साल के फिर भी हिम्मत दिखाई हमने और अपनी साइकिल पर लादकर अस्पताल ले गए उनको,,,,,,,,,,,,!!!”मंगल फूफा ने बहुत ही सस्पेंस के साथ कहा
गोलू जिसे ऐसी चटपटी कहानिया सुनने का बड़ा शौक था उसने फूफा की तरफ देखकर कहा,”फिर फिर फिर का हुआ ?”

“होना का है ? डॉक्टरवा ओह्ह्ह का एमर्जेन्सी में ले गए और हमसे कहे इंजेक्शन लाने को,,,,,,,,,हमहू इंजेक्शन लेकर लौटे तो देखा डॉक्टर और नर्स अपना सर पकडे एमरजेंसी के बाहिर बैठे थे”,मंगल फूफा ने हैरानी से कहा
“मतलब तुम्हाये फूफा निपट गए,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने एकदम से कहा  
“अरे नाही ! निपटे ओह्ह के दुश्मन , भगवान् की कृपा से 7-7 बच्चे है ओह्ह्ह के,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने अपने हाथ से अपने कानो को हाथ लगाकर कहा

“तो फिर डाक्टरवा काहे सर पकड़कर बैठे थे ?”,गोलू ने झुंझलाकर कहा
“अरे फूफा को बस गैस का पिरोब्लम हुआ था , डाक्टर ने जैसे ही दवा दी फूफा ठीक होकर अस्पताल से भाग गए और जाते जाते डॉक्टरवा का पर्स , नर्स की सोने की चैन और खून की चार बोतल भी साथ ले गए”,मंगल फूफा ने अफ़सोस भरे स्वर में कहा
“जे सब काहे ले गए ?”,गोलू ने हैरानी से कहा
“पेशे से चोर थे ना उह्ह्ह इहलीये”,मंगल फूफा ने मासूमियत से कहा

गोलू ने जैसे ही सुना गिरते गिरते बचा और मंगल फूफा की तरफ देखकर उन्हें घूरकर कहा,”तुम्हाये खानदान मा किसी ने कोनो ढंग का काम भी किया है ?”
मंगल फूफा ने सुना तो सहमकर पीछे हट गए और गोलू ने कहा,”जे अम्मा ने भी ना कैसे गुण्डिया खानदान के साथ रिश्ता रखा है , तुम्हरी बातें सुनकर तो साला गुप्ता जी के लिए हमाये मन में इज्जत और बढ़ गयी है”
“कौन गुप्ता जी”,मंगल फूफा ने कहा

गोलू ने चलते चलते अपनी बाँह से मंगल फूफा की गार्डन दबोची और कहा,”साले जिस थाली मा खाये ओह्ह्ह को ही भूल गए,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
बेचारा मंगल कानपूर में आने के बाद गुंडई भूल चुका था और बन चुका था ढोल जिसे इन दिनों हर कोई बजाने लगा था।

चकिया , चंदौली
बिंदिया को जब पता चला कि उसके बापू और घरवालों ने मनोज को बुरी तरह से मारा है तो वह फूट फूट कर रोने लगी। बिंदिया को रोते देखकर उसकी अम्मा उसके पास आयी और कहा,”चुप हो जा बिंदिया , मत रो”
“हमने ऐसा कौनसा पाप किया है अम्मा जो पिताजी हमे इत्ती बड़ी सजा दे रहे है ? अरे हम का जे घर की बिटिया नाही है , का ओह्ह्ह ही औलाद नाही है , उह्ह्ह हमरा ब्याह जबरदस्ती किसी और से कैसे कर सकते है अम्मा ?”,बिंदिया ने रोते हुए कहा

बिंदिया की अम्मा ने उसे अपने सीने से लगाया और कहा,”पाप तो हमसे हुआ है बिटिया जो हम तुमको जे दुनिया मा लेकर आये ,, हमने तुम्हाये बापू को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन उह्ह्ह तो कुछो सुनने को तैयार ही नाही है,,,,,,,,सबकी भलाई इसी मा है बिटिया कि तुमहू ख़ुशी ख़ुशी जे ब्याह कर ल्यो”

बिंदिया ने सुना तो आँसुओ से भरी आँखों से अपनी अम्मा को देखा और कहा,”अम्मा ! तुमहू तो सच जानती हो ना फिर तुमहू काहे जे सब कह रही हो , अरे जब से हमने होश सम्हाला है हमने सिर्फ लवली को अपना घरवाला माना है , ओह्ह्ह के साथ सादी के घर बसाने के सपने देखे है और तुम कहती हो हमहू ख़ुशी ख़ुशी किसी और से सादी कर ले,,,,,,,,,,,हमसे जे ना हो पायेगा अम्मा , ना हो पायेगा”

कहते हुए बिंदिया फिर जोर जोर से रोने लगी। बिंदिया की अम्मा को उसे इस हाल में देखकर तकलीफ तो हो रही थी लेकिन फिर भी उन्होंने अपना दिल मजबूत करके कहा,”जे सब बातों का अब कोनो मतलब नाही है बिटिया , तुम्हाये बापू जिद्दी है और उह्ह्ह लबली से बहुते नफरत करते है उह्ह ओह्ह्ह का स्वीकार कबो ना करे है,,,,,,,,,हमायी बात मान ल्यो बिटिया हम तुम्हरे आगे हाथ जोड़ते है जे सादी कर ल्यो”
बिंदिया ने सुना तो मायूसी से अपनी अम्मा को देखने लगी और आँखों में भरे आँसू गालों पर लुढ़क आये।

क्या लवली मांगेगा प्रीति से अपनी गलती के लिए माफ़ी ? क्या सच में गुड्डू और गोलू के बीच आने वाली है दरार ? क्या अपनी अम्मा की बात मानकर बिंदिया करेगी ये शादी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियां सीजन 4” मेरे साथ

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संजना किरोड़ीवाल 

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal
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