कितनी मोहब्बत है – 8

Kitni mohabbat hai – 8

“कितनी मोहब्बत है”

By Sanjana Kirodiwal

मीरा कॉफी का मग टेबल पर रखकर चली गयी ! अक्षत अधखुली आँखों से सब देख रहा था वह उठकर बैठ गया ! उसकी नजरे सामने पड़ी जूठी कॉफी पर थी तभी अर्जुन वहा आया और बैठते हुए कहा,”वाओ कॉफी !” अक्षत उसे कुछ कहता या रोकता इस से पहले ही अर्जुन ने वो कॉफी हाथ ने उठाकर होंठो से लगा ली और पीकर कहा,”नाइस कॉफी ! तूने क्यों नहीं पी ?”
“आपने पिने कहा दी ! वैसे आज आप इतनी जल्दी , पापा ने ऑफिस से निकाल दिया क्या ?”,कहकर अक्षत खुद ही अपनी बात पर हसने लगा !
“बेड जोक , मीटिंग्स ख़त्म हो चुकी थी तो सोचा क्यों ना थोड़ा फॅमिली के साथ टाइम स्पेंड किया जाये !”,अर्जुन ने कॉफी पीते हुए कहा !
“आपको नहीं लगता आजकल आप फॅमिली को कुछ ज्यादा ही टाइम देने लगे है !”,अक्षत ने शरारत से कहा
“वो सब छोड़ ये बता आगे का क्या सोचा है ?”,अर्जुन ने कहा
“ग्रेजुएशन तो हो चुका सोच रहा हु एल.एल.बी. कर लू !! आपका क्या ख्याल है ?”,अक्षत ने कहा
“अच्छा आईडिया है ! कबसे शुरू कर रहा है ?”,अर्जुन ने कहा
“बस दो महीने बाद ही कॉलेज में क्लासेज शुरू हो जाएगी !”,अक्षत ने कहा
“तब तक क्या करेगा ?”,अर्जुन ने सवाल किया !
“तब तक आराम करूंगा , फॅमिली को टाइम दूंगा आपकी तरह !”,कहते हुए अक्षत एक बार फिर शरारत से मुस्कुराया !
“तू इन दो महीनो में ऑफिस क्यों नहीं ज्वाइन कर लेता ! तुझे पापा के काम की नॉलेज भी हो जाएगी !”,अर्जुन ने कहा !
“नो वे , मुझे कोई शौक नहीं है रोज सुबह ऑफिस जाने का , आपकी ये बोरिंग जॉब आपको ही मुबारक !”,अक्षत ने मुंह बनाकर कहा !
“तुम्हारी मर्जी !”,कहते हुए अर्जुन उठा और अपने कमरे में चला गया ! थोड़ी देर में टीशर्ट और ट्राउजर पहने वापस आया और बिना अक्षत की और देखे निचे चला गया ! अक्षत टेबल पर रखे खाली ग्लास को देखता रहा और फिर वापस सो गया ! इस बार उसे सच में नींद आ गयी ! घूमते घामते मीरा वापस ऊपर आयी तो अक्षत को सोये हुए पाया ! ठण्ड की वजह से अक्षत सिमटा हुआ था तो मीरा अपने कमरे में गयी और वहा से कम्बल उठा लायी उसने कम्बल अक्षत को ओढ़ा दी ! अक्षत के लिए उसके मन में ये भाव क्यों थे वो खुद नहीं जानती थी पर उसे ये सब करना अच्छा लगने लगा था !! मीरा जूठा कप उठाकर निचे चली आयी ! रात के खाने के वक्त सभी मौजूद थे सिवाय अक्षत के !!
“अक्षत कहा है ?”,विजय ने सवाल किया !
“अंकल वो ऊपर है सो रहे है !”,जवाब मीरा ने दिया !
“इस वक्त , ये कोई सोने का टाइम है ,, राधा जाकर उठाओ उसे और निचे आने को कहो ! उसकी मनमर्जिया दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है !”,विजय ने कठोर स्वर में कहा !
“नींद में उठाउंगी तो वो गुस्सा होगा , आप सब खाइये वो बाद में खा लेगा !”,राधा ने शांत लहजे में कहा !
“बात खाने की नहीं है , आपके लाडले की गलत आदतों की है ! खाने के टाइम सोना , सोने के टाइम बाहर घूमना क्या है ये सब राधा ? आपके ही लाड प्यार ने उसे सर चढ़ा रखा है !”,विजय ने कहा !
“ऐसी बात नहीं है , वो अपनी आदते बदल तो रहा है !”,राधा ने अक्षत के बचाव में कहा !
विजय बहस करता उस से पहले ही मीरा ने कहा,”अंकल वो उनके सर में दर्द था इसलिए वो दवा खाकर सोये है ,, हमने ही दी थी !”
मीरा ने पहली बार झूठ बोला था शायद जैसे ही नजर राधा से मिली तो मीरा निचे देखने लगी ! विजय का गुस्सा छू हो गया और उन्होंने कहा,”ऐसी बात है तो पहले क्यों नहीं बताया ? राधा उसे बाद में उठने पर खाना खिला देना और ज्यादा परेशानी हो तो कहना डॉक्टर से मिल ले !”
“हम्म्म्म !”,राधा ने कहा और सबको खाना परोसने लगी ! सबने खाना शुरू किया खाते हुए अर्जुन ने कहा,”पापा मैं सोच रहा था , क्यों ना इस संडे फॅमिली पिकनिक पर जाया जायेबहुत दिन हो गए हम सब घूमने नहीं गए !”
“आईडिया तो अच्छा है , क्यों राधा तुम्हारा क्या कहना है ?”,विजय ने कहा !
“जैसा आप सबको ठीक लगे !”,राधा ने कहा !
“येअहह , पिकनिक पर कहा जायेगे भैया ?”,निधि ने एक्साइटेड होकर कहा !
“कल सुबह तक बता दूंगा , अब खाना खाओ आराम से !”,अर्जुन ने कहा तो निधि ख़ुशी ख़ुशी खाना खाने लगी !! सभी खाना खाकर अपने अपने कमरों की और चले गए ! मीरा राधा की मदद करने किचन में आ गयी और सभी धोये हुए बर्तन रॉ में ज़माने लगी ! मीरा को काम करते देखकर राधा ने कहा,”तुमने बाहर झूठ क्यों बोला ?”
मीरा पलटी और कहा,”आप क्या जादू जानती है ?”
“नहीं !”,राधा ने हैरानी से कहा
“फिर आप हर बात कैसे जान लेती है ?”,मीरा ने मासूमियत से कहा !
राधा हसने लगी और कहा,”क्योकि तुम जब झूठ बोलती हो तो तुम्हारी आँखे घूमने लगती है बिल्कुल तुम्हारी माँ की तरह !”
“आप हमारी माँ को कैसे जानती है ?”,मीरा ने हैरान होकर कहा जबकि उसने तो कभी किसी के सामने अपनी माँ का जिक्र नहीं किया था ! मीरा की बात सुनकर राधा एक पल के लिए सकपकाई और फिर कहा,”मेरा मतलब इतनी खूबसूरत आँखे तुम्हे अपनी माँ से ही मिली होगी ! बेटिया माँ पर ही तो जाती है इसलिए अंदाजा लगाया !”
“ओह्ह ! हां मेरी माँ बहुत खूबसूरत थी हमसे भी ज्यादा , और उनकी काली आँखे बहुत गहरी थी !”,मीरा ने सोचते हुए कहा !
“वो तो तुम्हे देखकर ही लग रहा है की वो कितनी खूबसूरत रही होंगी ! अब ये बताओ बाहर सबके सामने झूठ क्यों कहा तुमने ?”,राधा ने बात बदलते हुए कहा !
“वो अंकल इस तरह नाराज हो रहे थे इसलिए , वैसे भी अगर किसी के भले के लिए झूठ बोला जाये तो वो झूठ झूठ नहीं होता है !”,मीरा ने मुस्कुराते हुए कहा !
“हम्म्म आजकल बड़ी सयानी हो गयी हो !”,राधा ने कहा और फिर काम में लग गयी !! मीरा ने सभी बर्तन रॉ में जमा दिए ! जाने लगी तो राधा ने रोकते हुए कहा,”मीरा , ये खाना अक्षत के लिए ले जाओगी प्लीज !”
“जी !”,मीरा ने कहा और खाने की प्लेट लेकर ऊपर चली आयी ! अक्षत अभी तक सो ही रहा था मीरा ने खाने की प्लेट टेबल पर रखी और अक्षत को उठाने के बारे में सोचने लगी ! निधि अपने कमरे में कपड़ो को फैला के बैठी थी दो दिन बाद ही संडे जो था ! निधि को घूमना फिरना बहुत पसंद था बस इसलिए वो अपने लिए कपडे देख रही थी ! उधर अर्जुन अपने कमरे में बैठा पिकनिक के लिए कोई अच्छी लोकेशन ढूंढ रहा था ! और बेचारी मीरा उस सोये हुए शेर को जगाने का सोच रही थी ! मीरा ने धीरे से अक्षत की कम्बल को उठाया तो अक्षत ने कसमकसाकर कम्बल वापस खिंच ली ! उसे उठाना मीरा के लिए और मुश्किल हो गया ! उसने मरी हुई सी आवाज में कहा,”अक्षत जी ! अक्षत जी खाना”
लेकिन अक्षत तो जैसे घोड़े बेचकर सोया हुआ था ! उसने ना मीरा की आवाज सुनी ना ही उसकी मौजूदगी महसूस की !
“अब इन्हे कैसे उठाये ?”,मीरा ने मन ही मन कहा और फिर कुछ सोचकर अपना हाथ अक्षत के कंधे की और बढ़ाया ! अक्षत को छूते हुए मीरा के हाथ काँप रहे थे ! उसने धीरे से अक्षत के कंधे को छुआ और थपथपाते हुए उसे जगाने की कोशिश की इस बार अक्षत जाग गया ! उसने देखा मीरा खड़ी है तो उठकर तुरंत बैठ गया और कहा,”तुम यहाँ ?”
“वो आंटी ने आपके लिए खाना भिजवाया है , आप निचे नहीं आये थे ना इसलिए !”,मीरा ने धीरे से कहा !
“हम्म्म !”,कहकर अक्षत उठा और वाशबेसिन की और बढ़ गया ! मुंह धोया हाथ धोये और वापस आकर बैठ गया ! मीरा ने प्लेट उसके सामने रख दी और जैसे ही जाने लगी अक्षत ने कहा,”तुमने खा लिया ?”
“जी !”,मीरा ने पलटकर धीरे से कहा !
“तुम क्या हमेशा ऐसे ही बात करती हो ? जी , जी हां , हम वगैरह वगैरह ! बोर नहीं हो जाती ऐसे बात करते करते”,अक्षत ने कहा
“ये हमारे घर की तहजीब है , हम बचपन से ऐसे ही बात करते है !”,मीरा ने धीरे से कहा !
“अजीब तेजिब है”,अक्षत ने निवाला तोड़ते हुए कहा !
“तेजिब ने तहजीब मतलब शिष्टाचार !”,मीरा ने कहा
“मैंने पूछा तुमसे ?”,अक्षत ने घुरकर देखते हुए कहा
“सडु !”,मीरा ने बड़बड़ाते हुए कहा और वहा से चली गयी ! अक्षत खाना खाने लगा ! खाना खाकर वह अपने कमरे में चला गया और बिस्तर पर गिर गया ! नींद से आँखे फिर मूंदने लगी थी !
सुबह नाश्ते के लिए अक्षत सभी के साथ मौजूद था ! आज की चाय दादाजी के कहने पर मीरा ने ही बनाई थी ! मीरा ने अक्षत को छोड़कर सबको चाय दी जैसे ही वह वापस जाने लगी अक्षत ने थोड़ा ऊँची आवाज में कहा,”माँ मुझे एक कप चाय चाहिए !”
अक्षत के मुंह से चाय का नाम सुनकर मीरा पलटी और बाकि सब हैरानी से उसे देखने लगे ! अर्जुन ने तो पूछ भी लिया,”चाय और तुम , कबसे ?”
“किसी ने कहा था ‘अदरक वाली चाय कॉफी से बेहतर होती है’ बस इसीलिए ट्राय करके देख रहा हु !”,अक्षत ने मीरा की और देखते हुए कहा ! मीरा ने अक्षत को देखकर मन ही मन कहा,”ओह्ह तो इन्होने हमारी सारी बाते सुन ली थी !”
“मीरा जी , एक कप चाय !”,अक्षत ने उसे खोया हुआ देखकर कहा ! मीरा किचन में चली गयी ! उसके जाते ही निधि ने अक्षत से कहा,”भाई सच कहा है उस कहने वाले ने चाय इज बेटर देन कॉफी , मीरा को भी चाय बहुत पसंद है और वो चाय बनाती भी बहुत अच्छी है !”
अक्षत ने निधि की बात का कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया बल्कि उसकी नजरे तो किचन के दरवाजे की और थी ! मीरा ने अक्षत के लिए चाय बनाई उसे अक्षत का व्यवहार अब भी कुछ समझ नहीं आ रहा था ! उसने चाय उबाली और कप में छानकर बाहर ले आयी ! उसने कप अक्षत की और बढ़ा दिया और शक भरी नजरो से उसे देखने लगी की आखिर इसके दिमाग में अब क्या खिचड़ी पक रही है ! अक्षत ने एक घूंठ पीया और मुस्कुराने लगा ! अर्जुन और निधि उसे ही देख रहे थे और उसके रिऎक्शन के इंतजार में थे जब काफी देर तक वह कुछ नहीं बोला तो निधि ने कहा,”भाई बताओ ना कैसी लगी ?”
अक्षत ने मीरा को देखते हुए कहा,”बहुत अच्छी है !”
“येअहह लाओ 1000 रूपये !”,निधि ने अर्जुन से कहा ! अर्जुन ने जेब से हजार रूपये निकाले और मायूसी से निधि की और बढ़ा दिए ! निधि ने अर्जुन से शर्त लगायी थी की अक्षत को मीरा की बनाई चाय पसंद आएगी और वह ये शर्त जीत गयी ! मीरा नाश्ता करने के लिए आकर बिल्कुल अक्षत के सामने ही बैठ गयी ! अक्षत की नजरे बस उसके मासूम से चेहरे पर जम गयी हो जैसे , वह एकटक मीरा को देखता रहा और मीरा उस से बेखबर गर्दन झुकाकर अपना नाश्ता करती रही ! जब तक अक्षत ने चाय ख़त्म की तब तक उसकी नजरे बस मीरा पर ही थी और इस बिच उसने एक बार भी पलके नहीं झपकाई ! सभी नाश्ता करने में लगे हुए थे लेकिन सामने बैठी राधा ने जब अक्षत को देखा तो मन ही मन कुछ सोचकर मुस्कुरा उठी !! नाश्ता करने के बाद मीरा ओर निधि उठकर अपना अपना बैग लाने ऊपर चली गयी ! अर्जुन भी उठा और ऑफिस जाने की तैयारी करने लगा ! मीरा और निधि जैसे ही निचे आयी अक्षत ने मीरा को रोकते हुए कहा,”मीरा जी !”
“कितना अजीब है ये लड़का कभी इतना बद्तमीज और कभी इतना इज्जत से ! उफ़ !”,मीरा बड़बड़ाते हुए अक्षत की और पलटी और कहा,”जी कहिये !”
“चाय अच्छी बना लेती है आप , अगर चीनी डालेंगी तो और भी अच्छी बनेगी !”,अक्षत ने बिना किसी भाव के मीरा को देखते हुए कहा !
मीरा ने अपना सर पिट लिया इसे याद आया अक्षत की चाय में चीनी डालना तो वह भूल ही गयी थी ! उसने अक्षत की और देखा और कहा,”वो हम चीनी डालना,,,,,,,,,,,!!” अक्षत बिना उसकी बात पूरी सुने वहा से चला गया ! मीरा एक बार फिर झुंझला उठी और बड़बड़ाते हुए जाने लगी,”आखिर क्या समझते है खुद को ? इतना ऐटिटूड भी अच्छा नहीं है की किसी की पूरी बात ही ना सुने ,, बड़े आये ! मान लिया चीनी डालना भूल गए तो क्या पीना जरुरी था ? कह भी तो सकते थे पर नहीं इनको तो अपना ऐटिटूड दिखाना है ! अगर चीनी भूले भी है तो इनकी वजह से ही भूले होंगे वक्त बेवक्त हमारे दिमाग में जो सवार रहते है !”
मीरा अभी बड़बड़ाते हुए चल ही रही थी की तभी सामने से आते लड़के से टकरा गयी ! मीरा ने झुंझलाकर कहा,”क्या है ? घर में भी देखकर नहीं चल सकते आप ? आज का तो दिन ही ख़राब है हम बता रहे है , पहले उनसे चार बाते सुनो फिर ऐसे ही किसी ऐरे गेरे से टकरा जाओ !” फिर बड़बड़ाने लगी थी मीरा !
सामने खड़ा लड़का जिसकी हाइट मीरा से कुछ कम ही थी , भूरे घुँघरालु बाल , भूरी भूरी आँखे जिन पर नजर का चस्मा लगा था ! वह भोचक्का सा मीरा को देख रहा था उसने अपना सर झटका और कहा,”लेकिन तुम ही देख कर नहीं चल रही थी !”
“अच्छा जी , हम देखकर नहीं चल रहे थे ! और आप जो सामने देखे बिना घुसे चले आ रहे है उसका क्या ? अब हमारा मुंह क्या देख रहे है जाईये ना”,मीरा ने कहा
“अजीब लड़की है खुद ही गलती कर के खुद ही गुस्सा हो रही है !”,लड़का बड़बड़ाते हुए आगे बढ़ गया ! मीरा भी चली गयी जब बाहर आयी तो ने कहा,”अरे क्या हुआ ? पारा क्यों चढ़ा हुआ है तेरा ?”
“ऐसे अजीब लोग घर में होंगे तो पारा तो चढ़ेगा ना !”,मीरा ने निधि के साथ चलते हुए कहा !
“कौन ? अक्षत भैया ?”,निधि ने कहा
“जी हां आपके अक्षत भैया , समझते क्या है वो अपने आप को ? इतना एटीट्यूड की अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझते है ! ऊपर से वो एक अँधा चलते चलते टकरा रहा है !”,मीरा ने गुस्से से कहा !
“कौन शुभ भैया ?”,निधि ने कहा
“कौन शुभ ? हमे नहीं पता कौन था वो नूडल्स जैसे बाल रखे है , बिल्ली जैसी आँखे उन पर भी चश्मा लगा है !”,मीरा ने कहा
निधि हसने लगी और कहा,”अरे वो शुभ भैया ही है ! अक्षत भैया के दोस्त ,, छोडो उन दोनों को वो ऐसे ही सबको परेशान करते है ! अब चलो कॉलेज वरना देर हो जाएगी !”,निधि ने उसे खींचते हुए कहा !
शुभ जो अक्षत का दोस्त था अक्षत के पास आया और कहा,”यार कौन है वो लड़की ? पूरा मूड ख़राब कर दिया !”
“कौन लड़की ?”,अक्षत ने बालकनी से पीठ लगाकर कहा
“मुझे क्या पता कौन लड़की ? निचे मिली थी बहुत गुस्से में थी !”,शुभ भी उसके सामने आकर बैठ गया !
“अच्छा वो ! निधि की दोस्त है !”,अक्षत ने कहा
“तो यहाँ क्या कर रही है ?”,शुभ ने कहा
“यहाँ रहती है निधि के साथ !”,अक्षत ने कहा
“यहाँ क्यों ? उसका खुद का घर नहीं है क्या ?”,शुभ ने फिर सवाल किया
“अबे मुझे क्या पता पापा ने रहने की परमिशन दी है उसे यहाँ , और मैं क्या सबके बायोडाटा लेकर बैठा हु यहाँ जो तू ये सब पूछ रहा है !”,अक्षत ने चिढ़ते हुए कहा !
“गुस्सा क्यों हो रहा है पूछा ही तो है ! वैसे कुछ भी बोल यार है बड़ी खूबसूरत ! गुस्से में तो और भी कमाल लगती है !”,शुभ ने मीरा को याद करते हुए कहा
“तुझे तो एवरेज लड़की भी कमाल लगती है , अब ये बता यहाँ क्यों आया था ?”,अक्षत ने थोड़ा चिढ़कर कहा !
“सिगरेट पीला फिर बताता हु !”,शुभ ने कहा !
अक्षत अंदर गया और सिगरेट का पैकेट और लाइटर उठा लाया ! शुभ ने सिगरेट जलाई और एक कश भरके अक्षत की और बढ़ा दी ! “मैं नहीं पीता”
“ओह्ह्ह बेटा जी कबसे ?”,शुभ को बहुत हैरानी हुई दिन के एक एक पैकेट सिगरेट फुकने वाला अक्षत आज सिगरेट के लिए मना कर रहा था !
“तुम भी मत पीओ इस से तुम्हे भी नुकसान होगा और तुम्हारे आस पास मौजूद लोगो को भी !”,अक्षत ने उसके मुंह से सिगरेट निकालकर फेंकते हुए कहा
“तू चल मेरे साथ !”,शुभ ने अक्षत का हाथ पकड़ा और उठते हुए कहा !
“कहा ?”,अक्षत ने कहा
“हॉस्पिटल , चेक अप करवाने ! अक्षत व्यास ने सिगरेट पीना छोड़ दिया है यकीन नहीं हो रहा ! तू चल”,शुभ ने कहा
“स्टॉप इट यार !”,अक्षत ने झुंझलाकर कहा !
“तो बता मेरे बाबू किसके कहने पर तुमने सिगरेट छोड़ी है !”,शुभ ने कहा
“अक्षत किसी के कहने से क्यों चलेगा भला ! मेरा मन नहीं इसलिए नहीं पि रहा देट्स इट !! अब बता तू यहाँ किसलिए आया है !?”, अक्षत ने शुभ से नजरे बचाकर कहा
“अरे हां वो मैं ये बताने आया था वो जो एडवोकेट सिन्हा है ना मेरी उनसे बात हो गयी ! वो हम दोनों को गाइड करने के लिए तैयार है ! बोलो कबसे स्टार्ट करना है !”,शुभ ने वापस बैठते हुए कहा !
“संडे के बाद !”,अक्षत ने कुछ सोचते हुए कहा !
“संडे को तू कही जा रहा है क्या ?”,शुभ को कुछ शक हुआ तो उसने पूछ लिया !
“हम्म मोना के घर पार्टी है उसका बर्थ डे है !”,अक्षत के चेहरे के भाव एकदम से बदल गए !
“यार अक्षत डोंट माइंड लेकिन ये मोनालिसा मुझे तेरे साथ बिल्कुल अच्छी नहीं लगती !”,शुभ ने डरते डरते कहा लेकिन अक्षत का मूड अच्छा था इसलिए उसने पास बैठते हुए कहा,”अच्छा तो फिर कैसी लड़की अच्छी लगेगी मेरे साथ ?”
शुभ उठा और घूमते हुए कहने लगा,”तेरी पर्सनालिटी के हिसाब से ऐसी लड़की तेरे साथ जमेगी जो सीधी साधी हो , खूबसूरत इतनी हो की मेकअप की कभी जरूरत ही ना पड़े ! जब बोले तो उसे सुनते जाने का मन करे जब चुप हो तो उसकी आँखे भी बात करे ! जो बिल्कुल तेरी तरह हो शांत और जब गुस्सा आये तो तूफान !! जो सबको खुश रखना जानती हो और जो तेरे गुस्से को भी मुस्कुरा कर झेल जाये ! ऐसी लड़की सूट करेगी तुझे !!”
शुभ की बाते सुनते हुए अक्षत की आँखों के आगे एक ही चेहरा आ रहा था ! हां हां वही जो अभी आपकी आँखों के आगे आ रहा है – मीरा !
अक्षत मुस्कुराया और कहा,”मुश्किल है , दुनिया में ऐसी लड़की नहीं बनी जो मुझे समझ सके ! सी अब तो मैंने मेरे नाम के आगे भी लगा दिया कॉम्प्लिकेटेड !”
“अरे बाबू हर किसी के लिए कोई ना कोई बना है ! बस तेरे लिए जो बनी है वो मोना तो बिल्कुल नहीं !”,शुभ ने चिढ़कर कहा !
“अच्छा सुन , तू चल ना मेरे साथ पार्टी में ! वहा अकेले बोर हो जाऊंगा यार !”,अक्षत ने कहा !
“चलूँगा लेकिन एक शर्त पर !”,शुभ ने कहा !
“वो क्या ?”,अक्षत ने कहा !
“उसके लिए गिफ्ट लेकर नहीं जाऊंगा !”,शुभ ने बच्चो जैसा मुंह बनाकर कहा !
“ठीक है ! तो संडे इवनिंग डन , चल निचे कॉफी पिलाता हु तुझे !”,कहकर अक्षत शुभ के साथ निचे चला आया !!
देखते ही देखते दो दिन निकल गए ! संडे की सुबह सभी एक्साइटेड थे दादा दादी तैयार होकर खड़े थे ! विजय और राधा भी तैयार होकर आ चुके थे ! अर्जुन मीरा के साथ जाना चाहता था ताकि उसे थोड़ा करीब से जानने का मौका मिले लेकिन विजय ने पहले ही उसके अरमानो पर पानी फेरते हुए कहा,”अर्जुन मैं पापा माँ और राधा एक गाड़ी में चलेंगे लेकिन इतनी दूर गाड़ी ड्राइव नहीं कर पाउँगा ! तुम साथ चलो !”
“वो पापा !”,अर्जुन ने हिचकिचाते हुए कहा !
“कोई परेशानी है !”,विजय ने पूछा !
“नहीं पापा कोई परेशानी नहीं है !”,अर्जुन ने बेबसी से कहा !
“हाँ तो फिर चलो देर हो जाएगी ! निधि और मीरा अक्षत के साथ आ जाएगी !”,कहते हुए विजय गाड़ी की और बढ़ गए ! अर्जुन भी आया और गाड़ी वहा से निकल गयी ! एक गाड़ी और बची थी निधि जींस टॉप पहने सर पर बड़ी टोपी लगाए आयी लेकिन सब जा चुके थे ! उसने पापा को फोन किया तो उन्होंने अक्षत के साथ आने को कहा ! अक्षत भी तैयार होकर निचे चला आया लेकिन मीरा को वहा नहीं देखकर उसे शरारत सूझी और उसने निधि से कहा,”यार निधि सर्दी बहुत है वो माँ के कमरे में मेरा जैकेट रखा है ले आएगी प्लीज़ !”
“ठीक है !!”,निधि जैसे ही जाने लगी तो अक्षत ने रोकते हुए कहा,”मेन डोर मैंने लॉक कर दिया तू पीछे वाले रास्ते से जा ना !”
“लेकिन मीरा ?”,निधि ने कहा
“वो तो माँ पापा के साथ निकल गयी ना !”,अक्षत ने कहा
“अजीब लड़की है मैंने कहा था मेरे साथ चलना अकेले चली गयी !”,निधि ने सोचते हुए कहा !
“अब तू क्यों देर कर रही है , जैकेट लेके आ मेरा !”,अक्षत ने कहा
निधि चली गई ! निधि के जाते ही मीरा आयी ! उसने सफ़ेद रंग का कुर्ता उस पर हलके गुलाबी रंग की स्वेटर और निचे हरे रंग की सलवार पहन रखी थी ! बालो की छोटी बनाई हुई थी और कानो में छोटे छोटे झुमके पहने थे ! सादगी में कोई इतना सुंदर भी लग सकता है ये अक्षत ने पहली बार देखा था ! मीरा जाना नहीं चाहती थी लेकिन सबके फ़ोर्स करने के बाद वह जाने के लिए तैयार हो गयी ! मीरा को देखते ही अक्षत ने आँखों पर चश्मा लगा लिया और अपनी पीठ गाड़ी से लगाकर खड़ा हो गया ! मीरा उसके पास आयी और कहा,”बाकि सब कहा है ?”
अक्षत ने चश्मा उतारा और मीरा को देखते हुए कहा,”वो तो चले गए !”
“सब चले गए , लेकिन हम तो यही है !”,मीरा ने उदास होकर कहा !
“तुम्हे मेरे लिए छोड़कर गए है !”,अक्षत ने मदहोशी वाले भाव लाकर कहा !
“मतलब ?”,मीरा ने कहा !
“मतलब घर पर सिर्फ तुम और मैं , मैं और तुम !”,अक्षत ने कहा ! मीरा का दिल तेजी से धड़क रहा था उसे अक्षत के अलावा वहा कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था ! मीरा को खामोश देखकर अक्षत गुनगुनाने लगा,”हम तुम इक कमरे में बंद हो , और चाबी खो जाये !”
मीरा ने सूना तो उसे अक्षत की नियत पर शक होने लगा ! उसने अपने कदम पीछे बढ़ा लिए ! लेकिन अक्षत आज शरारत के मूड में था इसलिए वह मीरा की और बढ़ा तो मीरा ने मन ही मन कहा,”ये मैं कहा फंस गयी !”
चलते हुए मीरा की पीठ पीछे दिवार से जा लगी अब अक्षत उसके सामने था ! उस से कुछ ही दूर मीरा का घबराना लाजमी था ! आज से पहले किसी ने उसके साथ ऐसी हरकत नहीं की थी ! वह मन ही मन बहुत घबरा रही थी अक्षत ने जैसे ही मीरा की और हाथ बढ़ाया उसने अपनी आँखे मूंद ली ! अक्षत ने उसके बालो में लगा कागज का टुकड़ा हटाया और कहा,”डोंट वरी सिर्फ ये हटा रहा था !”
अक्षत की आवाज सुनकर मीरा ने अपनी आँखे खोली ! तभी निधि वहा आ गयी निधि को वहा देखकर मीरा ने अक्षत को पीछे धक्का दिया और गाड़ी के पास आ गयी ! निधि अक्षत के पास आयी और चिढ़ते हुए कहा,”वहां तो कोई जैकेट नहीं है !”
“डफ्फर ये मैंने पहना तो है ! सिल्ली गर्ल !”,अक्षत ने जैकेट की और इशारा करते हुए कहा जो की उसने पहना हुआ था !
“स्टुपिड ! मेरा टाइम वेस्ट क्यों किया ?”,निधि उसे मारने के लिए दौड़ी भागते हुए अक्षत गिर पड़ा ! जैसे ही वह गिरा मीरा हसने लगी ! कुछ देर पहले मीरा डरी हुयी थी और अब हंस रही थी ! अक्षत ने देखा तो उठा और निधि को सॉरी बोलकर गाड़ी में बैठने को कहा ! खुद आया और मीरा से कहा,”हंसती हुई अच्छी लगती हो” सुनकर मीरा जैसे ही मुस्कुराई अक्षत ने आगे कहा,”तुम्हे लगता है मैं ऐसा कहूंगा , मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है कोई मुझ पर हसे ! कहकर वह दूसरी तरफ जाकर गाड़ी में बैठ गया ! मीरा झुंझला उठी आखिर ये लड़का चाहता क्या था ?

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