बदलते अहसास – 3

Badalte Ahasas – 3

Badalte Ahasas
Badalte Ahasas

(कहानी भले ही ऋषभ सूना रहा हो पर इसे दिखाने का काम मैं करुँगी इसलिए इसमें ऋषभ और माही दोनों की फीलिंग्स लिखी जाएगी , कहानी के बिच बिच में वर्तमान की कुछ लाईने जरूर आएगी जो ऋषभ कहानी सुनाते हुए सुजैन से कहता है ! आपके जहन में चल रहे सभी सवालों का जवाब आपको धीरे धीरे मिल जाएगा)

आई मेक्स अपार्टमेंट !
ऋषभ के फ्लेट के बाहर खड़ी माही ने पानी पिने के बाद बोतल का ढक्कन बंद करते हुए कहा,”अजीब आदमी है !” वह बेल बजाने के लिए वापस आगे बढ़ी लेकिन रुक गयी और खुद से कहा,”फॉरगेट इट माही , आई थिंक ही इज डिफरेंट !” माही ने अपना बैग सम्हाला और ऋषभ के सामने वाले फ्लेट का दरवाजा खोलकर अंदर चली आयी ! उसने लाइट ऑन की और बैग साइड में रखा ! माही दिल्ली से थी अपने माँ बाप की इकलौती बेटी , ऊटी वह अपने फैशन डिजायनिंग का कोर्स करने आई थी ! माही के पापा चाहते थे वो किसी और जगह या फॉरेन से अपना कोर्स करे पर माही ने कहा वह ऊटी ही आना चाहती है !! या शायद उसकी किस्मत उसे यहाँ खिंच लायी थी ! माही के पापा ने अपने दोस्त से कहकर ये फ्लेट बुक करवा दिया और सभी सुख सुविधाएं भी कर दी जिस से उनकी बेटी को कोई परेशानी ना हो ! माही घूमकर फ्लेट का जायजा लेने लगी ! हॉल जिसमे आलिशान सोफे लगे थे , हॉल से लगकर ही एक ऑपन किचन था ! किचन के पास उसका बेडरूम था ! माही अंदर आई उसे रूम बहुत पसंद आया खिड़की के सामने आकर उसने खिड़की खोली तो सर्द हवा का झोका आया और उसे छूकर गुजर गया ! नवम्बर का महीना था और ऐसे में ठंड लगना लाजमी था एक सिहरन माही के बदन में दौड़ गयी उसने खिड़की बंद कर दी ! लेकिन शीशे से बाहर फैली वादियों को देखने लगी ! शाम के समय भी शहर धुंध की हल्की सफ़ेद चादर ओढ़े हुए था ! माही को ये सब काफी रोमांचक लगा ! वह बाहर आ गयी हॉल से लगकर एक बालकनी थी माही ने बाहर जाने से पहले अपना स्कार्फ अपने चारो और लपेट लिया और बालकनी में आकर खड़ी हो गयी ! यहाँ खड़े होकर वह बाहर का नजारा देख सकती थी ! सामने अपर्टमेंट के बाहर की सड़क उसके आगे खूबसूरत पेड़ो की कतारे !
माही एकटक वो सब देखते रही ! फोन की रिंग से उसकी तंद्रा टूटी वह अंदर चली आयी ! फोन उसके डेड का था उसने उठाया और कहा,”हाय डेड !”
“हेलो माय प्रिंसेज , फ्लेट पसंद आया ?”,दूसरी तरफ से माही के पिता इंद्राज माहेश्वरी ने कहा !
“इट्स सो कूल डेड , आई लाईक इट ! थैंक्यू सो मच “,माही ने चहकते हुए कहा !
“किसी भी चीज की जरूरत हो तो फोन करना और हा अपना ख्याल रखना !”,इंद्राज जी ने प्यार से कहा
“स्योर डेड मैं कोई बच्ची नहीं हु आई ऍम 22 इयर्स ओल्ड !”,माही ने कहा
“आई नो माय प्रिंसेज , लेकिन मेरे लिए हमेशा बच्ची ही रहोगी !”,इंद्राज जी ने कहा
“ओहहके आई विल टेक केयर ऑफ़ माय सेल्फ , वेयर इज मॉम आई वाना टॉक टू हर”,माही ने कहा तो इंद्रराज जी ने फोन माही की मॉम को पकड़ा दिया
“हेलो माही ! कैसी हो बेटा ? तुम ठीक से पहुँच तो गयी ना ? और देखो अपना ख्याल रखना ? बैग में गर्म कपडे रखे है मैंने सूना है वहा ठण्ड ज्यादा है ! और बाहर का कुछ मत खाना मैंने अंकल से कहा है वो किसी खाना बनाने वाली को बोल देंगे ! फोन करती रहना और किसी पर ज्यादा भरोसा नहीं करना ! अजनबी शहर है ना , तू सुन रही है ना मैं क्या कह रही हु ?”,माही की मम्मी अमिता ने कहा !
“मॉम वेट वेट वेट , फोन हाथ में लेते ही आपने लेक्चर्स की लाइन लगा दी ! जस्ट चिल मॉम आई ऍम मेच्योर नाओ !”,माही ने कहा
“हां हां जानती हु कितना मेच्योर है तू ! तेरा बचपना और बेपरवाह अंदाज जानती हु मैं ,, “,अमिता ने कहा
“रिलेक्स मॉम एवरीथिंग इज फाइन आप बेकार में चिंता कर रही है ! यू नो व्हाट अपना कोर्स कम्प्लीट होने के बाद आई ऍम द बेस्ट फैशन डिजायनर इन डेल्ही !”,माही ने कहा
“आई नो बेटा एंड बेस्ट ऑफ़ लक ! मिस यु !”,कहते हुए अमिता की आवाज कुछ धीरे हो गयी
“ओह्ह ममा आई मिस यू टू एंड आल्सो डेड ! आई विल कम सून , लव यू अभी मैं रखती हु , बाय !”,माही ने कहा और फोन काट दिया
फोन सोफे पर डालकर माही किचन की और चल दी ! पर किचन में तो कुछ था ही नहीं माही ने इधर उधर देखा सारा सामान था पर कच्चा और माही को मेग्गी के अलावा कुछ पकाना नहीं आता था उसने पैकेड सामान में से मेग्गी के दो पैकेट निकाले और कहा,”चलो आज आज इसी से काम चला लेते है !”
माही ने गैस ऑन किया और पतीले में पानी डालकर उसे उबलने के लिए रख दिया ! बाहर हल्का अँधेरा होने लगा था इसलिए माही ने लाईटे जला दी ! पानी खोलने के बाद उसने उसमे मेग्गी डाली और किचन से बाहर आ गयी ! “आह कितना साइलेंट है यहाँ सब , म्यूजिक ऑन करती हु”,कहते हुए माही हॉल में लगे टीवी के सामने आई और टीवी ऑन करके कोई इंग्लिश चैनल लगा दिया जिस पर अंग्रेजी गाना चल रहा था ! माही ने आवाज तेज कर दी और थिरकते हुए वापस किचन में आ गयी ! गाने की आवाज आवाज इतनी तेज थी इतनी की के आवाज फ्लेट के बाहर तक जा रही थी ! ऋषभ हॉल में बैठा किसी किताब को पढने में बिजी था l पढ़ते हुए अचानक उसके कानो में अंग्रेजी गाने की आवाज पड़ी जो कि बाहर से आ रही थी l ऋषभ ने उस आवाज को नजरअंदाज किया और अपना ध्यान वापस किताब में लगाने की कोशिश की लेकिन म्यूजिक की वह तेज आवाज बार बार उसे परेशान कर रही थी l ऋषभ शांति पसन्द इंसान था उसे शोर शराबा बिल्कुल पसंद नही था l उसने किताब बन्द की ओर उठकर अपने फ्लैट से बाहर आया उसने इधर उधर देखा आवाज सामने वाले फ्लैट से आ रही थी l ऋषभ उस फ्लेट के दरवाजे के सामने आया उसकी नजर नेम प्लेट पर गयी जिस पर लिखा था “महिमा माहेश्वरी”
ऋषभ को इस वक्त किसी के फ्लैट की बेल बजाना सही नही लगा पर क्या करता वो कान फाड़ म्यूजिक अब उस से बर्दास्त भी तो नही हो रहा था l ऋषभ ने बेल बजायी ओर इंतजार करने लगा पर किसी ने दरवाजा नही खोला l ऋषभ ने एक बार फिर बेल बजायी लेकिन इस बार भी कोई जवाब नही दिया ऋषभ को बड़ा गुस्सा आया वह बेल बजाता रहा l
म्यूजिक के शोर में जब बेल की आवाज माही के कानो में पड़ी तो वह किचन से ही चिल्लाई,”जस्ट कमिंग “
माही दरवाजे पर आई और दरवाजा खोला सामने ऋषभ को देखकर वह एक पल को ठिठकी ओर फिर कहा,”हे तुम यहाँ ?”
ऋषभ को उसका इस तरह से तुम कहना अच्छा नही लगा l उसने खुद को संयत करके कहा,”टीवी की आवाज बहुत ज्यादा है , मुझे डिस्टर्ब हो रहा है l क्या तुम इसे कम करोगी ?”
“ऊप्स ! आई एम सो सोररी , अभी करती हूं”,माही ने कहा और आवाज कम करके वापस दरवाजे के पास आई पर तब तक ऋषभ वहां से जा चुका था l माही को ऋषभ का एटीट्यूड कुछ अजीब लगा उसकी खामोशी , उसका कम बोलना ओर खासकर उसकी आंखें , उसकी आंखें माही को आकर्षक लगी l दरवाजे पर खड़े उसने ऋषभ के फ्लैट की ओर देखा जिसका दरवाजा बंद था l वह कुछ देर वहा खड़ी रही और फिर दरवाजा बंद करके अंदर आ गयी लेकिन मन और दिमाग अभी भी ऋषभ में ही उलझा था l माही उसे एक बार फिर देखना चाहती थी पर कैसे ?
उसके दिमाग मे एक आइडिया आया और उसने एक बार फिर जान बूझकर टीवी की आवाज को तेज कर दिया l
हॉल में आकर ऋषभ सोफे पर बैठा ओर एक बार फिर उस अधूरी कहानी को पढ़ने लगा l अभी दो लाइन ही पढ़ी थी कि म्यूजिक की आवाज फिर से उसके कानों में पड़ी l ऋषभ ने किताब बन्द की ओर आकर माही के फ्लैट की बेल बजायी l इस बार माही ने पहली बार मे ही दरवाजा खोल दिया जैसे उसे पता था कि ऋषभ आएगा l
“ये क्या बदतमीजी है , मैंने कहा ना मुझे डिस्टर्ब हो रहा है”,ऋषभ ने थोड़ा गुस्से से कहा l
“न जाने क्यों पर तुम्हे देखने का मन किया इसलिए वापस वॉल्यूम बढा दी”,माही ने शरारत से कहा l
ऋषभ को बड़ा अजीब लगा भला उसे देखने के लिए कोई ऐसी हरकत क्यों करेगा ? उसने माही से कहा,”व्हाट इज दिस , प्लीज़ आई रिक्वेस्ट टू यू स्टॉप म्यूजिक प्लीज़ ! इट्स टू डिस्टर्बिंग”
ऋषभ ने जब कहा तो माही उसके चेहरे की और देखने लगी ! सांवला रंग , गहरी आँखे , सुर्ख पर गहरे भूरे होंठ , चेहरे पर सलीके से बनी दाढ़ी , टीशर्ट और पजामे में वह किसी 24 साल के नौजवान को टक्कर दे दे ! माही बस एक टक उन्हें देखे जा रही थी ! ऋषभ उसके जवाब के इंतजार में था पर माही एक मूडी लड़की थी वह हमेशा वही करती जो उसे सही लगता भले सामने वाले को वो ठीक लगे या न लगे ! माही ने कहा,”इट्स माय फ्लेट सो मेरी मर्जी है मैं यहाँ जो चाहे वो करू !”
“या फाइन”,ऋषभ ने कठोर शब्दों में कहा और जैसे ही जाने लगा माही ने कहा,”आपको बुरा लगा ?”
“नहीं !!”,ऋषभ ने रूककर कहा
“आई नो आपको बुरा लगा”,माही ने सर्द आवाज में कहा l ऋषभ उसकी और पलटा और कहा,”जरुरी नहीं हर व्यक्ति हमारी हर बात सुने ! ये सबकी अपनी अपनी समझ होती है की वो किसी बात को किस आधार पर लेते है”
“आधार ?”,माही ने सवाल किया
“वे , जरुरी नहीं है हमारी कही हर बात सामने वाले के लिए सही हो”,ऋषभ ने कहा
“ओह्ह थेंक्स !”,माही ने कहा
ऋषभ जाने लगा तो माही ने कहा,”आई ऍम सॉरी !”
“इट्स ओके !!”,ऋषभ ने कहा और वहा से चला गया ! माही एक बार फिर उस बंद दरवाजे को देखती रही ! जिसके साइड में लगी नेम प्लेट पर लिखा था “मिस्टर ऋषभ बहल” ! माही ने दरवाजा बंद किया और अंदर आ गयी सबसे पहले उसने म्यूजिक की आवाज बिल्कुल धीरे कर दी ! ऋषभ का चेहरा बार बार उसकी आँखों के सामने आ रहा था ! उसने प्लेट में अपने लिए मेग्गी निकाली और आकर टीवी के सामने सोफे पर बैठ गयी ! उसने मूवी लगायी और मेग्गी खाने लगी लेकिन जैसे ही उसने निवाला अपनी और बढ़ाया ऋषभ की बात उसके कानो में गूंजने लगी ,”जरुरी नहीं हमारी कही हर बात सामने वाले के लिए सही हो !” माही चम्मच को प्लेट में घुमाते हुए ऋषभ के बारे में सोचने लगी उसके बात करने का अंदाज उसे काफी आकर्षक लगा ! ऋषभ की आवाज उसके कानो में गूंज रही थी ! सोचते हुए माहि के होंठो पर एक प्यारी सी मुस्कान तेर गयी ! उसने मेग्गी खाई और वही सोफे पर लेटकर टीवी देखने लगी ! ऋषभ वापस फ्लेट में आया तब तक म्यूजिक बंद हो चुका था ! ऋषभ ने एक बार फिर किताब उठा ली और पढ़ने लगा कुछ लाइन्स पढ़ने के बाद ही ऋषभ को माही की कही बात याद आ गयी,”इट्स माय फ्लेट सो मेरी मर्जी है मैं यहाँ जो चाहे वो करू !” ऋषभ ने आवाज को नजर अंदाज किया और किताब का पन्ना पलटा लेकिन पढ़ पाता इस से पहले ही माही की कही बात फिर उसे याद आ गयी,”न जाने क्यों पर तुम्हे देखने का मन किया इसलिए वॉल्यूम बढ़ा दी”
ऋषभ ने किताब बंद कर दी और साइड में रखकर उठ खड़ा हुआ ! पहली बार ऐसा हुआ था की वो एक अजीब सी बेचैनी से घिरा हुआ था ! किताबे पढ़ने के अलावा ऋषभ को एक शौक और था पेंटिंग बनाने का वह अपने कमरे में आया और एक खाली कैनवास के सामने जाकर खड़ा हो गया ! उसने रंगो की प्लेट और ब्रश उठायी और कैनवास पर चलाने लगा ! ऋषभ पोर्ट्रेट बनाने में इतना माहिर था की उसकी पेंटिंग्स को जो भी देखता बस देखता ही रह जाता ! हां ये बात और थी की वो ये सब बस अपने लिए बनाया करता था ! ऋषभ कैनवास पर एक आधे चेहरे की तस्वीर बनानी शुरू की थी कुछ ही हिस्सा बना था की माही की कही बाते एक बार फिर उसके कानो को छूकर चली गयी
“आपको बुरा लगा !
“आई नो आपको बुरा लगा !
“थेंक्स !!
ऋषभ उसके बाद ब्रश को कैनवास पर नहीं चला पाया ! माही की वो सर्द आवाज उसके कानो को बार बार उसके आस पास होने दिलाती जा रही थी ! ऋषभ ने उस पेंटिंग को अधूरा ही छोड़ दिया और खिड़की के सामने आकर सिगरेट जला ली ! एक दो कश लगाने के बाद उसे राहत महसूस हुयी ! घडी में देखा जो की रात के 9.45 बजा रही थी ! ऋषभ किचन में आया उसने अपने लिए खाना बनाया और प्लेट में निकालकर खाने लगा ! खाना खाकर वह सोने चला गया ! अगली सुबह वह अपने रोजाना वाले समय पर ही उठा और अपार्टमेंट की छत पर आकर एक्सरसाइज करने लगा ! जिमिंग सूट में उसकी बॉडी उभर कर आ रही थी उसके मसल्स और उसके एबस भी साफ दिखाई दे रहे थे ! पसीने की बुँदे उसके चेहरे से होकर सीने से गुजर रही थी ! ऋषभ अपनी एक्सरसाइज करने में बिजी था ! सुबह 5-6 एक घंटा वह यही बीताता था सुबह सुबह धुंध के कारण ऊटी का नजारा और भी खूबसूरत दिखाई पड़ता था ! 6 बज रहे थे पर आज मौसम काफी सुहावना था नवम्बर के महीने में भी आकाश में काले बादल छाये हुए थे ! पसीने से तर बतर ऋषभ ने पुश अप्स मारना शुरू किया ! माही की आँख खुली जैसे ही उसकी नजर खिड़की के बाहर पड़ी उसकी आँखे खुली की खुली रह गयी ! मौसम को देखकर उसकी आँखों को कितना सुकून मिल रहा था ! वह बच्चो की तरह भागकर बालकनी में आई ! सारा शहर कोहरे की सफ़ेद चादर से ढका हुआ दिखाई दे रहा था ! ऐसा लग रहा था जैसे सारे शहर ने सफ़ेद चादर ओढ़ ली है ! माही के चेहरे पर ख़ुशी झिलमिलाने लगी ! ऊटी की इस खूबसूरती को वह करीब से देखना चाहती थी वह दौड़कर अपने फ्लेट से बाहर आयी और नंगे पांव ही सीढ़ियों से भागते हुए ऊपर छत पर आ गयी ! 5 मंजिला उस बिल्डिंग की छत से ऊटी शहर बेइन्ताहा खूबसूरत नजर आ रहा था ! सर्दी होने के बावजूद भी माही को इस बात का कोई अहसास नहीं था की उसने सिर्फ शॉर्ट्स और उस पर एक सफेद शर्ट पहना हुआ है जिसके ऊपर के दो बटन खुले होने के कारण वह खिसक कर कंधे से निचे आया हुआ है ! वह तो बस वहा खड़ी उन खूबसूरत नजारो को देखने में गुम थी ! मौसम को महसूस करने के लिए उसने अपने दोनों हाथो को फैला दिया और आँखे बंद करके ऊपर आसमान की और देखने लगी ! एक ठंडी हवा का झोंका उसे छूकर गुजरा तो वह ख़ुशी से उछल पड़ी और जैसे ही पलटी उसकी नजर सामने पुश अप्स करते हुए ऋषभ पर गयी और नजरे बस उस पर टिक गयी ! ऋषभ की बॉडी स्ट्रेक्चर और उसकी पर्सनालिटी देखकर माही का मुंह खुला का खुला रह गया ! माही ऋषभ के पुश अप्स गिनने लगी वन,,,,,,,,,,,,,,,,,,टू ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,थ्री ,,,,,,,,,,,,,,,,इलेवन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,ट्वेंटी फाइव ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,फिफ्टी सिक्स,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,नाईन्टी नाइन ,,,,,,,,,,,,,,,,,हंड्रेड !! कहते हुए माही बिल्कुल ऋषभ के सामने खड़ी थी ! ऋषभ ने देखा तो जल्दी से उठ खड़ा हुआ उसने पास पड़ा जैकेट उठाया और पहन कर माही से कहा,”तुम यहाँ ?
“फॉरगेट इट , यू डन हंड्रेड पुश अप्स !”,माही ने रोमांचित होकर कहा
“हां तो इसमें कोनसी नयी बात है ये मैं रोज करता हु !”,ऋषभ ने बिना किसी भाव के कहा
“कितने सालो से ! ?”, माही ने रूचि लेते हुए पूछा
“यही कोई 5 सालो से !”,ऋषभ ने कहा
“यु मीन टू से वन लेक एट्टी थाउजेंड टाइम्स !”,माही ने अपनी बड़ी बड़ी आँखों को और बड़ा करते हुए कहा
“हम्म्म ! सो व्हाट ?”,ऋषभ ने कहा
“स्टुपिड इट्स ग्रेट , आई मीन नो वन केन रेगुलरली डज डीज थिंग्स ! यू आर सो हार्ड”,माही ने ऋषभ की तारीफ में कहा
“इसमें ग्रेट जैसा क्या है ? मुझे ये सब करना पसंद है और मैं करता हु !”,ऋषभ ने कहा
माही ऋषभ के थोड़ा करीब आयी और उसकी आँखों में देखते हुए कहा,”तुम बहुत अजीब हो , और उस से भी ज्यादा अजीब है तुम्हारी बाते !”
ऋषभ माही की आँखों में देखता रहा पहली बार कोई लड़की उसके इतना करीब आकर बात कर रही थी ! वह खामोश था पर उसकी बढ़ती धड़कने जैसे बहुत कुछ कहना चाहती थी ! ऋषभ को खामोश देखकर माही पीछे हटी और अपना दाहिना हाथ उसकी और बढाकर कहा,”हाय आई ऍम म,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
“महिमा माहेश्वरी”,ऋषभ ने माही के आगे बोलने से पहले ही उस से हाथ मिलाते हुए कहा
“कॉल मी माही , मेरे दोस्त मुझे इसी नाम से बुलाते है”,माही ने ऋषभ को लगभग घूरते हुए कहा और फिर बोली,”एंड योर नेम ?”
“ऋषभ , ऋषभ बहल और मेरे दोस्त मुझे इसी नाम से बुलाते है”,ऋषभ ने सहज भाव से कहा ! माही उसकी आँखों में देखते रही !
माही के हाथो की गर्माहट वह अपनी हथेलियों पर महसूस कर सकता था पर ये गर्माहाट उसे पिघला ना दे सोचकर ऋषभ ने उसका हाथ छोड़ा और कहा,”यहाँ ठण्ड बहुत है तुम्हे जाना चाहिए ! वरना तुम बीमार हो सकती हो”
माही ऋषभ के सामने से हटी और रेलिंग के पास जाकर अपने दोनों हाथो को फैलाकर कहा,”मैं बीमार होने के डर से इतना खूबसूरत नजारा देखना नहीं छोड़ सकती” माही की इस बात पर ऋषभ खामोश हो गया माही की बेपरवाही और उसकी उलझी हुयी बाते ऋषभ को सोचने पर मजबूर कर रही थी की आखिर कैसे कोई अपनी जिंदगी को लेकर इतना बेपरवाह हो सकता है ! माही पलटी और अपनी सर्द आवाज में कहा,”डू यू लाइक ऊटी ?”
“या आई लाइक !”,ऋषभ ने खोये हुए स्वर में कहा माही ने कुछ पल ऋषभ को देखा और फिर वापस दूसरी और देखते हुए कहने लगी,”जानते हो मुझे भी ये शहर बहुत पसंद है , ये वादियाँ , ये सर्द हवाएं , ये मौसम , ये चाय के बागानों के गलियारे और यहाँ के पहाड़ ! आई लव ऊटी माय मॉम एंड डेड मीट फस्ट टाइम इन ऊटी एंड थे बोथ फॉलिंग इन लव !”
ऋषभ उस सर्द आवाज को सुनता रहा आज से पहले किसी भी आवाज ने उसके दिल को इतना नहीं छुआ था जितना माही की आवाज ! उसकी आवाज में एक आकर्षण था एक ठहराव था जो ऋषभ को अपनी और खिंच रहा था ! माही रेलिंग से हटकर ऋषभ के पास आयी और कहा,”क्या सच में ये शहर एक प्यार का शहर है ? माही से इस सवाल की उम्मीद ऋषभ को नहीं थी उसने झिझकते हुए कहा,”आई डोंट नो !” इतना कहकर वह वहा से चला गया !
माही वही खड़ी जाते हुए ऋषभ को देखते रही !! और फिर ऋषभ के पीछे पीछे चल पड़ी ऋषभ कुछ सोचते हुए धीरे धीरे चल रहा था और माही भागते हुए उसके आगे निकल गयी ! जैसे ही चलते हुए दोनों 4th फ्लोर पर आये माही ने देखा ऊपर छोटे पाइप से पानी गिरते हुए निचे फर्श को भीगा रहा है ! माही ने इधर उधर देखा 401 के सामने रखा एक गमला जो लगभग सुख चुका था उसने उसे उठाया और उस पाइप के बिलकुल निचे लाकर रख दिया ! गमला उठाने से उसके हाथो पर मिटटी लग गयी जिसे उसने अपनी पहनी हुई सफ़ेद सफ़ेद पर पोछ लिया !
“ये क्या कर रही हो तुम ? तुम्हारे कपडे ?”,ऋषभ ने कहा
“अहह टेक इट ईजी !”,कहकर माही वहा से अपने फ्लेट की और बढ़ गयी ! ऋषभ वही खड़ा उसे जाते देखता रहा और सोचने लगा,”कुछ देर पहले उसने एक समझदारी वाला काम किया और अगले ही पल अपने बचपने का सबूत दे दिया !” ऋषभ ने गमले की और देखा और मुस्कुरा कर अपने फ्लेट में चला गया !

वर्तमान –
ऋषभ सुजैन को इतनी कहानी सुनाता है और एक विराम के बाद कहने लगता है,”पहली बार उसे देखकर जो विचार मेरे मन में आये थे वो इतनी जल्दी गलत साबित होंगे मैंने सोचा नहीं था ! वो इतनी बुरी भी नहीं थी जितना मैंने समझा था ! हां थोड़ा बचपना था उसमें , थोड़ी समझ कम थी ! अपनी जिंदगी को लेकर किसी इंसान को इतना बेपरवाह मैंने पहली बार देखा था !! उसकी आवाज में एक आकर्षण था एक खिंचाव था जो मुझे अपनी और खींचता चला जा रहा था ! उसके कहे शब्द बार बार मेरे कानो से गुजरते हुए मुझे उसके होने का अहसास दिला रहे थे ! पहली बार खुद में बदलाव महसूस कर रहा था और ये सब क्यों हो रहा था मैं नहीं जानता ! वो मुझसे उम्र में बहुत छोटी थी लेकिन ना जाने क्यों उसके सामने आकर मुझे लगा जैसे मैं अपनी उम्र से बहुत पीछे जा चुका हु ! उसका तुम कहना मुझमें खीज उत्पन्न भी कर रहा था तो एक अपने पन का अहसास भी दिला रहा था ! उस सुबह के बाद मैं पहली बार बेवजह मुस्कुराया था ये मुस्कराहट आगे चलकर मेरे आंसुओ की वजह बन जाएगी मैंने कभी सोचा नहीं था !” !!!

Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3 Badalte Ahasas – 3

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संजना किरोड़ीवाल

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