“सोलमेट्स” aren’t just lovers – 2

Soulmates aren’t just lovers – 2

Soulmates
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रवि और चाँदनी दोनों पिछले एक साल से एक ही कम्पनी में काम करते थे। चाँदनी के मॉर्डन ख़्यालात और उसकी खूबसूरती रवि को भा गयी वही चाँदनी को भी रवि जैसा साथी चाहिए था जो उसके इशारो पर नाचें और उसके बड़े बड़े शौक पुरे करे। ऑफिस में उनके इस रिश्ते की भनक किसी को नहीं थी उलटा ऑफिस में दोनों खुद को एक दूसरे का प्रतिद्वंदी दिखाते थे। रवि और चाँदनी शादीशुदा होते हुए भी पिछले 6 महीनो से एक दूसरे के साथ एक ऐसे रिश्ते में थे जिसे समाज कभी स्वीकार नहीं करता लेकिन उन्हें किसी की परवाह नहीं थी। दोनो ही अपने अपने जीवनसाथी को धोखा दे रहे थे जबकि साँझ और दीपक को इसकी खबर तक ना थी।
अगली सुबह होटल रूम के दरवाजे की बेल बजी। चाँदनी गहरी नींद में थी और बिस्तर पर उलटी लेटी हुई थी। उसके बदन पर बस कुछ ही कपडे थे। रवि उसकी बगल में लेटा था। उसने चाँदनी के कंधे को अपने होंठो से छूआ और धीमी आवाज में कहा,”गुड मॉर्निंग बेबी”
रवि ने चाँदनी को कंबल से अच्छे से ढका और दरवाजे की तरफ बढ़ गया। उसने दरवाजा खोला सामने होटल का स्टाफ सुबह की चाय लेकर खड़ा था।
“गुड़ मॉर्निंग सर”,लड़के ने कहा
“गुड़ मॉर्निंग , सुनो मुझे कुछ चाहिए होगा तो मैं खुद फोन कर दूंगा अभी ये सब लेकर जाओ,,,,,,,,और दोबारा डिस्टर्ब मत करना”,रवि ने उखड़े स्वर में कहा
“ओके सर,,,,,,,सॉरी सर,,,,,,,,,,,हेव अ गुड डे”,कहकर लड़का वहा से चला गया।
रवि दरवाजा बंद कर वापस बिस्तर की तरफ चला आया। वह चाँदनी के बगल में बिस्तर पर आ बैठा और फोन पर किसी से बात करने लगा। उसकी बातों से चाँदनी की नींद खुल गयी और उसने अपनी आँखे खोली। आज उसके चेहरे पर रोजाना से ज्यादा चमक थी उसने रवि की तरफ देखा और कहा,”सुबह सुबह किसका फोन है ? क्या फोन पर फिर से तुम्हारी बीवी है ?”
“नहीं स्वीटहार्ट तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है बस उसी की तैयारी कर रहा हूँ”,रवि ने मुस्कुराते हुए कहा
चाँदनी उठकर बैठ गयी और खुद को कम्बल से ढक अपना सर रवि के कंधे पर रखते हुए कहा,”तुम पुरे दो दिन मेरे साथ हो इस से ज्यादा मुझे क्या चाहिए ?”
“पर बहुत कुछ है जो मैं तुम्हे देना चाहता हूँ”,रवि ने प्यारभरी नजरो से चाँदनी को देखते हुए कहा
“ओह्ह्ह रवि तुम बहुत अच्छे हो और एक वो दीपक है जो कभी मेरे लिए एक गिफ्ट तक नहीं लेकर आता”,चाँदनी ने कुढ़ते हुए कहा
“सुबह सुबह अपना मूड खराब मत करो जाओ जाकर रेडी हो जाओ फिर हम बाहर चलते है”,रवि ने कहा
चाँदनी उठी और बाथरूम की ओर बढ़ गयी कुछ देर बाद दोनों तैयार होकर होटल से बाहर निकल गए। चाँदनी ने घुटनो से ऊपर तक लाल रंग का एक शार्ट ड्रेस पहना था आँखों पर स्टाइलिश चश्मा भी लगाया हुआ था। होटल के बाहर कैब खड़ी थी दोनों उसमे आ बैठे और वहा से निकल गए। कुछ घंटे बाद ही रवि चाँदनी को लेकर एक जगह पहुंचा जो पहले से तय थी। कैब से उतरने से पहले ही उसने चाँदनी की आँखों पर काले रंग की पट्टी बांध दी और उसके साथ नीचे उतर गया।
“रवि हम कहा जा रहे है ?”,चाँदनी को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था उसने रवि के साथ चलते हुए पूछा
“बस एक मिनिट तुम चलती रहो”,रवि ने उसे साथ लेकर आगे बढ़ते हुए कहा
रवि उसे लेकर एक जहाज पर आया जहा उसने अपने और चाँदनी के लिए एक टेबल बुक किया था और यही सरप्राइज देने के लिए वो चाँदनी को यहाँ लेकर आया था। टेबल के पास आकर रवि ने चाँदनी की आँखों से पट्टी हटाते हुए कहा,”सरप्राइज,,,,,,,,,,,,,,,,,!!”
चाँदनी ने देखा की वो समदंर में तैरते जहाज है पर तो वह ख़ुशी से फूली नहीं समायी और रवि के गले लगते हुए कहा,”थेंक्यू सो मच,,,,,,,ओह्ह माय गॉड ये कितना ब्यूटीफुल है”
“तुमसे कम आओ बैठो,,,,,,,,,,,,!”,रवि ने उसके लिए कुर्सी खिसकाते हुए कहा तो चाँदनी उस पर आ बैठी इस वक्त उसे बहुत अच्छा लग रहा था। उसने रवि की तरफ देखा और कहा,”आई लव यू”
“आई लव यू टू”,रवि ने उसके कंधो पर अपने दोनों हाथ रखते हुए कहा और फिर आकर बिल्कुल उसके सामने बैठ गया। जहाज चल पड़ा दोनों सुबह का नाश्ता करते हुए समंदर के नजारो का मजा लेने लगे। रवि ने आज भारी रकम खर्च करके पुरे दिन के लिए इसे बुक किया था वो भी सिर्फ चाँदनी के लिए ताकि वह उसके ज्यादा से ज्यादा वक्त बिता सके।
कम्पनी की मीटिंग सिर्फ बहाना था दोनों बाहर वक्त बिताने के लिए आये थे और काफी अच्छा वक्त बिता भी रहे थे। दिनभर में रवि को याद ही नहीं आया की उसे साँझ को फोन भी करना। साँझ दिनभर अपना फोन चेक करती रही , रवि को काम में डिस्टर्ब ना हो सोचकर उसने खुद से भी उसे फोन नहीं किया बस एक दो बार मैसेज जरूर किये जिन्हे रवि ने देखा भी नहीं था। वही दीपक दिनभर अपने ऑफिस में बिजी रहा उसने चाँदनी को मैसेज किया तो बदले में चाँदनी ने उसे एक मैसेज भेजा जिसमे लिखा था “डिस्टर्ब मत करो फ्री होते ही फोन करती हूँ”
शाम में दीपक घर चला आया इस उम्मीद के साथ की चाँदनी का फोन आएगा। देर रात चाँदनी का फोन आया दीपक ने खुश होकर फोन उठाया और कहा,”हेलो चाँदनी कैसी हो ?”
“मैं ठीक हूँ”,चाँदनी ने थके हुए स्वर में कहा
“क्या हुआ तुम काफी अपसेट लग रही हो ? वहा काम ज्यादा है क्या ?”,दीपक ने चाँदनी की परवाह करते हुए कहा
चाँदनी कुछ कहती इस से पहले ही रवि ने पीछे से आकर उसे अपनी बाँहो में भर लिया चाँदनी ने रवि के आलिंगन में कसमकसाते हुए कहा,”हाँ दीपक वो आज दिनभर में 4 मीटिंग थी ना इसलिए थोड़ा थक गयी हूँ ,, मैं बाद में फोन करू क्या ?”
“हाँ कोई बात नहीं , मुझे बस ये जानना था की तुम वापस कब आ रही हो ?”,दीपक ने पूछा
“कल सुबह की फ्लाइट से , अच्छा मैं रखती हूँ बाय”,चाँदनी ने कहा और फोन काट दिया क्योकि रवि उसे काफी परेशान कर रहा था
“मैं तुम्हे लेने एयरपोर्ट आजाऊंगा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,काट दिया,,,,,,,,,,,,,,,,,कोई बात नहीं , कल चाँदनी वापस आ जाये उसके बाद मैं उस से अपनी सारी फीलिंग्स शेयर करूंगा और चाहूंगा की वो मुझे अपना ले,,,,,,,,,,अपने सोलमेट के रूप में”,कहते हुए दीपक ने फोन डायनिंग टेबल पर रख दिया और ख़ुशी ख़ुशी खाना खाने लगा। उसे कल सुबह का बेसब्री से इंतजार था।
अगली सुबह दीपक जल्दी उठा उसने पुरे घर को अच्छे से जमाया और नहाने चला गया। आज उसने ऑफिस से भी आधे दिन की छुट्टी ले ली ताकि एयरपोर्ट जाकर चाँदनी को लेकर आ सके। तैयार होकर वह एयरपोर्ट के लिए निकल गया। एयरपोर्ट के बाहर एक बुके शॉप थी दीपक ने चाँदनी की पसंद के गुलाबी फूलों का बुके लिया और एयरपोर्ट टिकट लेकर अंदर चला आया। फ्लाइट आने में अभी 20 मिनिट बाकि थे लेकिन दीपक पहले ही चला आया और लॉबी में बाकि लोगो के साथ खड़े होकर अपनी पत्नी का इंतजार करने लगा। आज वह बहुत खुश था दो दिन चाँदनी से दूर रहकर उसे ये अहसास हुआ की वह उस से कितना प्यार करता है।
साँझ सुबह जल्दी उठ गयी आज रवि वापस आने वाला था इसी ख़ुशी में उसने रवि की पसंद का नाश्ता बनाया। घर को भी साफ सुथरा और व्यवस्तिथ कर दिया। उसने सूट पहना , हल्का मेकअप कर लिया और रवि की राह देखने लगी।

मुंबई एयरपोर्ट पर अपने अपने सूटकेस के साथ खड़े रवि और चाँदनी उदास नजरो से एक दूसरे को देख रहे थे। पिछले दो दिन से दोनों ने साथ में काफी अच्छा वक्त बिताया था और अब दोनों को एक दूसरे को छोड़कर जाना पड़ रहा था अपनी उसी पुरानी दुनिया में। चाँदनी ने भारी मन से रवि को बाय कहा और अपना सूटकेस सम्हाले वहा से चली गयी।
रवि वही खड़े होकर जाती हुई चाँदनी को देखता रहा। चाँदनी कुछ कदम चली और फिर पलटकर वापस रवि के पास चली आयी और कहा,”लेटस गेट मैरिड”
रवि ने सूना तो मुस्कुरा उठा उसने आगे बढ़कर चाँदनी के होंठो को छू लिया और कहा,”मैं भी यही कहना चाहता था , वी मेड फॉर इच अदरस”
चाँदनी ने सूटकेस छोड़ा और रवि को अपनी बांहो में भर लिया। आते जाते लोगो ने उन्हें देखा और आगे बढ़ गए। दोनों लोगो से बेखबर एक दूसरे में खोये रहे और कुछ देर बाद रवि ने दूर होकर कहा,”मैं जानता था तुम भी मेरे बिना अब एक पल नहीं रह पाओगी”
“हाँ रवि इन दो दिनों में जितना प्यार मुझे तुमसे मिला है उतना आज तक कभी नहीं मिला,,,,,,,,,,,आई लव यू , आई लव यू सो मच”,चाँदनी ने कहा
“तो फिर चले ?”,रवि ने चाँदनी की आँखों में देखते हुए पूछा
चाँदनी ने रवि की बाँह थामी और अपना सूटकेस सम्हाले रवि के साथ एयरपोर्ट से बाहर चली आयी। दोनों घर जाने के बजाय वापस होटल चले आये। कमरे में आकर चाँदनी ने जैसे ही अपना सूटकेस रखा रवि ने उसे अपनी बाँहो में भर लिया। वह आगे बढ़ पाता इस से पहले ही चाँदनी का फोन बजा। चाँदनी ने अपने जींस के पॉकेट से फोन निकाला और देखा स्क्रीन पर दीपक का नंबर था। उसने फोन काट दिया और स्विच ऑफ करके साइड टेबल पर रख दिया। रवि उसके बालों से खेलने लगा और कुछ देर बाद रवि का फोन बजा , फोन साँझ का था रवि ने जैसे ही फोन उठाना चाहा चाँदनी ने उसके हाथ से फोन लेते हुए कहा,”आहा जब मैंने अपने हस्बेंड को इग्नोर कर दिया तो क्या तुम मेरे लिए अपनी वाइफ को इग्नोर नहीं कर सकते ?”
“तुम्हारे लिए तो मैं पूरी दुनिया को इग्नोर कर सकता हूँ स्वीटहार्ट,,,,,,,,,,,!”,कहते हुए रवि ने चाँदनी के हाथ से अपना फोन लिया और पास ही पड़े डस्टबिन में फेंक दिया। फोन कुछ देर बजता रहा और बाद में बैटरी ना होने की वजह से बंद हो गया। रवि और चाँदनी एक बार फिर एक दूसरे में डूब गए।

एयरपोर्ट पर खड़ा दीपक चाँदनी के आने की राह देख रहा था। जैसे ही मुंबई के फ्लाइट आने की घोषणा हुई उसका चेहरा ख़ुशी से खिल उठा। सभी लोग आ चुके थे लेकिन चाँदनी कही दिखाई नहीं दी। दीपक ने चाँदनी को फोन लगाया लेकिन एक रिंग के बाद ही फोन कट गया और उसके बाद बंद आने लगा। दीपक परेशान हो गया , चाँदनी शायद अगली फ्लाइट से आ रही होगी सोचकर दीपक वही बैठकर उसका इंतजार करने लगा। सुबह से दोपहर , दोपहर से शाम हो गयी लेकिन चाँदनी का कोई अता पता नहीं था , ना ही उसका फोन लगा। दीपक एयरपोर्ट से बाहर चला आया , उसने चाँदनी के सब दोस्तों को फोन लगाया लेकिन किसी को भी उसके बारे में नहीं पता था,,,,,,,,,,,,,,,,अब तो दीपक को चिंता होने लगी थी। आज से पहले चाँदनी ने ऐसा कुछ नहीं किया था अगर ऑफिस से आने में देर भी होती थी तो वह दीपक को बता दिया करती थी। किसी अनहोनी के डर से दीपक का मन घबराने लगा। वह घर के बरामदे में खड़ा चाँदनी के आने का इंतजार कर रहा था। मिसेज माथुर ने देखा तो उसके परेशान होने की वजह पूछी। दीपक ने उन्हें चाँदनी के बारे में बताया तो उन्होंने दीपक को पुलिस स्टेशन जाकर चाँदनी के लापता होने की कंप्लेंट लिखवाने को कहा।
थक हारकर दीपक पुलिस स्टेशन जाने के लिए निकल गया।
साँझ रवि का इंतजार कर रही थी। दो दिन से उसने रवि से ठीक से बात तक नहीं की थी , ना ही उसे देखा था। इंतजार करते करते सुबह से दोपहर हो गयी लेकिन रवि नहीं आया। साँझ ने रवि को फोन किया तो उसने कोई जवाब नहीं दिया। रवि ने ऐसा पहले कभी नहीं किया था ये पहली बार था जब उसने साँझ का फोन ना उठाया हो। साँझ को चिंता होने लगी। दिनभर वह रवि के आने का इंतजार करती रही। दोपहर से शाम हो गयी लेकिन ना तो दीपक आया ना ही उसका कोई फोन आया। साँझ का मन घबराने लगा , कही दीपक को कुछ हो ना गया हो सोचकर ही उसका दिल बैठा जा रहा था। वह दीपक के मिसिंग की कंप्लेंट लिखवाने पुलिस स्टेशन चली आयी।

रात 8 बजे पुलिस स्टेशन में बैठा इंस्पेक्टर नींद से अपने कुर्सी पर बैठा ऊंघ रहा था। साँझ ने आकर उस से कहा,”एक्सक्यूज मी सर मुझे अपने हस्बेंड के मिसिंग होने की कंप्लेंट लिखवानी है। दो दिन पहले वो ऑफिस की मीटिंग के सिलसिले में शहर से बाहर गए थे , कल रात ही मेरी उनसे बात हुई थी और उन्होंने कहा की वो आज सुबह आ जायेंगे लेकिन वो नहीं आये उनका फोन भी नहीं लग रहा है”
“ओह्ह्ह्हह आह्ह्ह्ह , ए कॉन्स्टेबल एक चाय बोलना”,इसंपेक्टर ने उबासी लेते हुए कहा। उसने अधखुली आँखों से अपने सामने खड़ी साँझ को देखा और कहा,”मैडम रात भर इंतजार करके देख लीजिये हो सकता है आपके पति अपने किसी दोस्त के घर रूक गए हो,,,,,,,,,,,क्या पता सुबह तक लौट आये”
“सर मैंने उनके सब दोस्तों से पूछ लिया है वो किसी के साथ नहीं है , एक मीटिंग के सिलसिले में बाहर गए थे लेकिन अब,,,,,,,,,,अब उनका फोन भी बंद आ रहा है।”,साँझ ने घबराहट भरे स्वर में कहा
“हम्म्म्म , ठीक है आप सुबह आ जाईये मैं आपकी कंप्लेंट लिखता हूँ”,इंस्पेक्टर ने फिर नींद से ऊँघते हुए कहा
“सर मेरे पति आज सुबह से घर नहीं पहुंचे है , मैं नहीं जानती वो इस वक्त किस हाल में है और आप कह रहे है सुबह आईये,,,,,,,,,,,,,आप अभी उनकी मिसिंग रिपोर्ट लिखिए जरूर वो किसी मुसीबत में होंगे”,साँझ ने थोड़ा गुस्से से कहा
“ये पुलिस स्टेशन है यहाँ काम रूल्स के हिसाब से होता है किसी के मिसिंग होने की रिपोर्ट 24 घंटे बाद लिखी जाती है , अभी आप घर जाईये और सुबह तक उनके आने का इंतजार कीजिये अगर वो नहीं आते है तो मैं खुद उनकी मिसिंग रिपोर्ट लिखूंगा”,इंस्पेक्टर ने साँझ के सामने अपने गुस्से को काबू करते हुए कहा , क्योकि इस वक्त साँझ सिर्फ और सिर्फ उसकी नींद में खलल डाल रही थी।
“सर आपकी चाय,,,,,,,,,,!!”,कॉन्स्टेबल ने चाय का ग्लास लाकर टेबल पर रखा और चला गया। साँझ परेशान सी अभी भी उसके सामने खड़ी थी उस बेचारी को कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या करे ? अनजान शहर अनजान लोग मदद भी ले तो किस की ?
इंस्पेक्टर ने अभी एक घूंठ भरा ही था की दीपक ने आकर कहा,”सर मुझे अपनी वाइफ की मिसिंग रिपोर्ट लिखवानी है , आज सुबह ही वो घर आने वाली थी लेकिन अभी तक घर नहीं पहुंची है और उसका फोन भी बंद आ रहा है”
इंस्पेक्टर ने जैसे ही सूना उसके मुँह से चाय बाहर आ गिरी , क्योकि बिल्कुल यही कहानी कुछ देर पहले सांझ ने उसे सुनाई थी। इंस्पेक्टर ने अपने सामने खड़े दीपक को देखा और फिर उसके बगल में खड़ी साँझ को देखा। दोनों एक ही रिपोर्ट लिखवाने आये थे लेकिन अलग अलग लोगो के लिए। इंस्पेक्टर अपना सर खुजाने लगा और साँझ की तरफ मुखातिब होकर कहा,”कही तुम्हारा पति और इनकी पत्नी साथ साथ तो नहीं भाग गए ?”
साँझ और दीपक ने सूना तो पहले हैरानी से इंस्पेक्टर को देखा और फिर एक दूसरे की तरफ देखकर और हैरान हो गए।

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क्रमश – “सोलमेट्स” aren’t just lovers – 3

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संजना किरोड़ीवाल

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