रांझणा – 44

Ranjhana – 44

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Ranjhana

Ranjhana By Sanjana Kirodiwal

Ranjhana – 44

अनु के जाने के बाद मुरारी दनदनाते हुए शिवम् के पास आया और उसका हाथ पकड़कर उसे अपनी और घुमाकर कहा,”इह का हो गया है तुमको ? सारिका जी के नाम से इतना गुस्सा , अब का किया उन्होंने ?”
“हम वापस बनारस जा रहे है”,शिवम् ने बिना किसी भाव के मुरारी की और देखकर कहा


“का ? , वापस जा रहे हो पर काहे ?”,मुरारी ने चौंककर कहा
“बस जा रहे है , तुम भी अपना सामान पैक कर लो”,कहकर जैसे ही शिवम् जाने के लिए मुडा मुरारी उसके सामने आ गया और कहा,”काहे कर ले ? हम कही नहीं जा रहे और तुम भी कही नहीं जा रहे हो , का समझे ?”


“हमारे पास तुमसे बहस करने के लिए बख्त नहीं है l जो कुछ कहना सुनना है , बनारस जाकर कह सुन लेना”,शिवम् ने कहा
“हमने कहा ना हम नहीं जा रहे है बनारस और तुमको भी नहीं जाने देंगे , साला भौकाल मचाय रखे हो ! आये काहे थे हिया सारिका जी के लिए , उनको अपने दिल की बात नाही बताये , उन्हें अपनी असलियत नाही बताये , इह नाही बताये की तुम्हे ही उनके रांझणा हो ! तो का ऐसे ही चले जाओगे ?”,मुरारी ने गुस्से से चिल्लाकर कहा
“हाँ चले जायेंगे ! उनके लिए रांझणा जरुरी नहीं है”,शिवम् ने भी गुस्से से कहा


“अच्छा तो कौन जरुरी है ? बताओ हमको”,मुरारी ने कहा
“का बताये ? देखो मुरारी सारिका की सगाई होने वाली है”,शिवम् ने थोड़ा गंभीर होकर कहा
“तो ? सगाई होने वाली है हुई तो नहीं ना , और इसका बनारस वापस जाने से का सम्बन्ध है ? तुम तो हिया उनको लेने आये हो”,मुरारी ने कहा
“हम सारिका के पापा से मिले थे”,शिवम् ने धीरे से कहा


“का वो बुद्धा , अकड़ू , खुसठ ! उसने कछु कहा ? अरे ऐसी की तेसी उसकी , उसके नाक के निचे से सारिका को निकालकर ले जायेंगे वो मोटा कुछ नहीं कर पायेगा”,मुरारी ने कहा
“मुरारी का कुछ भी बके जा रहे हो ? पहले हमरी बात तो सुन लो”,शिवम् ने झुंझलाकर कहा


“अच्छा कहो”,मुरारी ने कहा
शिवम् ने एक गहरी साँस ली और कहने लगा,”कुछ दिन पहले ऑफिस में किसी बात को लेकर सारिका जी से हमारी बहस हो गयी थी l हमने उनका ऑफिस और वो नौकरी छोड़ दी थी l

ऐसे माहौल में काम हमसे नहीं हो पाता इसलिए सब छोड़ आये l शाम को समंदर किनारे बैठे थे वही उनके पापा मिल गए और बातो ही बातो में उन्होंने बताया की वो सारिका से कितना प्यार करते है ! अमित और सारिका की सगाई को लेकर वो बहुत खुश है पर जब हमने बनारस का नाम लिया तो एक नफरत हमे उनकी आँखों में देखने को मिली , वो आज भी बनारस से बहुत नफरत करते है मुरारी और उस से भी ज्यादा नफरत करते है उस लड़के से जिसे ढूंढने सारिका बनारस गयी थी l

अब तुम ही बताओ कैसे बताते सारिका को हम ही वो है जिसे ढूंढने वो बनारस गयी थी”,शिवम् ने उदास होकर कहा
“अरे साफ साफ बोल दो ना सारिका को की तुम उनसे प्यार करते हो , उसके बाद सब अपने आप पता चल ही जाना है”,मुरारी ने परेशानी से भरकर कहा
“अगर हमने उनको बताया तो वो अपने पापा से दूर हो जाएगी”,शिवम् ने कहा
“और अगर नहीं बताया तो तुमसे दूर हो जाएगी , तुम समझते काहे नहीं ?”,मुरारी ने कहा


“यही तो परेशानी है मुरारी की उन्हें खुद से ज्यादा समझने लगे है , हम और सारिका नदी के उह दो किनारे है जो जिंदगीभर एक दूसरे के सामने तो रह सकते है पर कभी एक नहीं हो सकते है ! दोनों में से किसी एक का दिल तो टूटना ही है है , तो हमारा सही पर सारिका जी से उनके हिस्से की खुशिया नहीं छीन सकते है ! हम भले ही उन्हें ना मिले पर हम खुश है उन्हें उनके पापा वापस मिल गए”,शिवम् ने कहा


“इह का कह रहे हो भैया हमे कुछ समझ नही आ रहा है ? हम अभी जाकर सारिका जी को सब सच बताय रहे है”,मुरारी जाने के लिए मुड़ा तो शिवम् ने बांह पकड़कर रोक लिया और कहा,”नहीं मुरारी तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे !”


“काहे नहीं करेंगे ? जरूर करेंगे l हम जा रहे है और सब बता देंगे उनको इह रोज रोज का नाटक हमसे नहीं देखा जाता”,मुरारी ने कहा
“हमने कहा ना तुम कही नहीं जाओगे”,शिवम् ने गुस्से से कहा
“हम जाएंगे , जायेंगे , जायेंगे ,, कोई रोक के दिखाए साला हमको”,मुरारी ने भी तेश में आकर कहा l


“हमने कहा ना तुम नहीं जाओगे”,कहते हुए शिवम् ने मुरारी के गाल पर एक जोरदार तमांचा जड़ दिया पर आज मुरारी को गुस्सा आ गया और उसने शिवम् को धक्का देकर कहा,”हमको थप्पड़ मारा तुम्हारी तो………………..!!”
मुरारी ने भी शिवम् को एक घुसा दे मारा l

इसके बाद दोनों एक दूसरे पर झपट पड़े कभी शिवम् मारता कभी मुरारी दोनों बुरी तरह उलझ चुके थे l दोनों ही अपनी अपनी जगह सही थे पर किसी एक को तो झुकना ही था अंत में शिवम् ने एक घुसा मारा तो मुरारी निचे जा गिरा दांत से होठ हल्का सा कट गया तो खून आने लगा l शिवम् ने देखा तो सब भूलकर मुरारी के पास आया और कहा,”दिखाओ कितना लगा है ?”
“हटो परे !”,मुरारी ने शिवम् का हाथ झटककर कहा और बालकनी की तरफ आ गया शिवम् को बहुत बुरा लगा l वह अंदर ही एंड खुद जिस आग में जल रहा था मुरारी को भी उसी आग में जला रहा था..!

शिवम् ने टेबल से पानी का ग्लास उठाया और लेकर बालकनी की और बढ़ गया उसने पानी का ग्लास मुरारी की और बढ़ाया तो मुरारी ने बिना किसी ना नुकर के पानी का ग्लास लिया और पीकर वापस शिवम् की और बढा दिया ! शिवम् ने ग्लास साइड में रखा और मुरारी के साथ खड़ा सामने दूर तक फैले समंदर को देखने लगा ! मुरारी को भी अंदर ही अंदर बहुत बुरा लग रहा था पर आज गुस्सा प्यार पर भारी था !

शिवम् ने एक ठंडी साँस ली और सामने देखते हुए कहने लगा,”हम चाहकर भी सारिका को सच नहीं बता सकते मुरारी ! हम मे से और अपने पापा में से वो किसी एक को चुन सकती है और हम चाहते है की वो अपने पापा को ही चुने !”
“दोनों को काहे नहीं चुन सकती ?”,मुरारी ने गुस्से से कहा
“दोनों को एक साथ चुना तो उनकी जिदंगी में वो दर्द फिर से लौट आएगा मुरारी , और हम उन्हें दर्द में नहीं देख सकते”,शिवम् की आँखों में नमी उतर आई


“और हम तुम्हे दर्द में नहीं देख सकते , क्योकि तुम हमरे दोस्त हो”,नमी मुरारी की आँखों मे भी उतर आई
“तो वहा खड़ा क्या कर रहा है इधर आ”,कहकर शिवम् ने मुरारी को गले लगा लिया और कहा,”प्यार इतना आसान नहीं होता है रे मुरारी जिंदगी लग जाती है इस अहसास को जिन्दा रखते रखते”
मुरारी शिवम् से अलग हुआ और कहा,”पर तूम एक्को बार कोशिश करो तो ये आसान हो सकता है ! तुमरे लिए हम सारिका के बाप के पैर पकड़ लेंगे , भीख मांग लेंगे तुम दोनों के प्यार की पर तुम सारिका को छोड़कर मत जाओ भैया !!”


“मुरारी तू नहीं समझेगा ! सारिका की ख़ुशी ही हमारी ख़ुशी है , उसे खुश देखकर समझेंगे हमारा प्यार मुक्कमल हो गया”,शिवम् ने आँखों में आंसू और होंठो पर मुस्कान लाते हुए कहा
“और आगे का क्या ?”,मुरारी ने बेचैनी से पूछा !


“आगे की जिंदगी उनकी यादो के सहारे काट लेंगे , वैसे ही जैसे अब तक काटते आये थे ! इस से पहले कोई चेहरा नहीं था अब चेहरा भी है सेंकडो खूबसूरत यादें भी l बस जाने से पहले कुछ वक्त और चाहते है उनका फिर पता नहीं देखना नसीब हो न हो”,शिवम् कहते कहते रुक गया !

दर्द और पीड़ा से गला रुंध गया आगे बोल नहीं पाया तो मुरारी ने कहा,”ये दर्द लेकर जी पाओगे ? आई बाबा को क्या जवाब दोगे ? महादेव से का कहोगे ? की छोड़ आये अपनी मोहबत को , कर दिया उन्हें किसी और के हवाले , मान ली हार”


“मुरारी कभी कभी हारना जितने से बेहतर होता है , कभी कभी खोना पाने से ज्यादा जरुरी हो जाता है ! अगर राधा जी कृष्ण भगवान को मिल जाती तो वो प्रेम कभी अमर नहीं होता !”,शिवम् ने कहा
“हां हां इह सही है , कछु समझाओ तो उपदेश देना शुरु कर देते हो l

एक्को काम करो बनारस जाकर ना सन्यास ले लो और फिर दिनभर देते रहना लोगो को उपदेश”,मुरारी ने चिढ़कर कहा तो शिवम् मुस्कुराने लगा और बात बदलते हुए कहा,”अच्छा इह बताओ इतनी सुबह सुबह अनु काहे आयी थी
अनु का नाम सुनते ही मुरारी का सारा गुस्सा छू मंतर हो गया l उसने कहा,”हमरा कछु सामान लौटाने आयी थी”
“सामान ? तुमरा वो कछु सामान उनके पास कैसे पहुंचा ? चल क्या रहा है मुरारी ?”,शिवम् ने मुरारी को घूरते हुए कहा


“चक्कर चल रहा है , एक दो दिन में शुभ मुहूर्त देखकर दोनों भागने वाले है l चल क्या रहा है ? का चलेगा ? कछु होना भी तो चाहिए ना चलाने के लिए …………………………… का चल रहा है ? का चल रहा है ? …………………….. हमरा भेजा छोड़ कर सब कुछ चल रहा है और का चल रहा है”,मुरारी ने झुंझलाकर कहा


“अरे अरे अरे इतना बिलबिला काहे रहे हो ? हम तो बस ऐसे ही पूछे रहे ?”,शिवम् ने कहा
“अरे यार तुम गलत नाही पूछे हम ही थोडा……………………..अच्छा बताते है l हम नहीं जानते ये कब हुआ पर पसंद करने लगे है उनको”,मुरारी ने धीरे से कहा


“का पसंद ? और कितने दिन तक चलेगी तुमरी इह पसंद ?”,शिवम् ने छेड़ते हुए कहा !
“अरे का कब तक रहेंगी ? सच्चा वाला प्यार हो गया है l उठते , बैठते , सोते , जागते , खाते , पीते उह ही नजर आती है ! सोचा नहीं था कभी ऐसा होगा पर हो गया”,मुरारी ने मासूम सा चेहरा बनाकर कहा !
“का बात है मुरारी मतलब तुमको सम्हालने वाली मिल ही गयी”,शिवम् ने खुश होकर कहा
“अरे का बताये भैया ? उह हमको सम्हाले ना सम्हाले कभी कभी उनको सम्हालना मुश्किल हो जाता है l

प्रॉब्लम नाम सुने हो उसका और अनु का पुराना रिश्ता है l वो एक परेशानी से निकले तो उसका पांव दूसरी परेशानी में रहता है पर कुछ भी कहो है बहुते प्यारी ! अरे बनारस वाले देखेंगे ना तो बवाल आ जाएगा बताय रहे है”,मुरारी ने खुश होकर कहा
“हां हमको भी कुछ अजीब लगती है उह”,शिवम् ने कहा
“अजीब नहीं बहुते अजीब , कभी कभी उसकी बातो और हरकतों से लगता है इह दुनिया की है ही नहीं उह”,मुरारी ने कहा


“हां तो कभी कभी तुमरी बातो से भी यही लगता है की तुम भी इह दुनिया के ना हो , खूब जमेगी तुम दोनों की”,शिवम् ने मुरारी का कान खींचते हुए कहा
“का भैया तुम भी पहले तुम्हरा और सारिका जी का मामला सेट होगा उसके बाद हमारा”,मुरारी ने कहा


“तुम्हारी घड़ी के कांटे फिर वही आकर अटक गए”,शिवम् ने गंभीर होकर कहा
“तो और का करे ?”,मुरारी ने कहा
“कछु नहीं करना सामान पैक करो और चलो बनारस वापस”,शिवम् ने कहा


“और हमारी अनु ? उसको ऐसे ही छोड़कर चले जाये ?”,मुरारी ने कहा
“मुरारी मस्ती मजाक तक ठीक है लेकिन हमे नही लगता अनु के पापा मानेंगे”,शिवम् ने शंका जताई
“काहे नहीं मानेंगे ? और नहीं भी माने ना तो कट्टा निकाल के सामने रख देंगे”,मुरारी ने रौब झाड़ते हुए कहा
“हां तो इह गुंडागिरी करोगे तो कोनसा बाप लड़की देगा तुमको”,शिवम् ने फटकार लगाई
“का गुंडा ? अरे हम 80% सुधर चुके है”,मुरारी ने कहा


“अच्छा तो बाकि का बीस कौन सुधरेगा ? देखो मुरारी हम ये नहीं कहते की प्यार करना गलत है बस कोई भी फैसला सोच समझ कर लेना”,शिवम् ने कहा
“अरे चिंता ना करो भैया हमारा सब सेट है और महादेव ने साथ दिया ना तो हमार वाली के साथ साथ तुम्हार वाली को भी साथ ले आएंगे”,मुरारी ने आँखों में विश्वास भरके कहा !


शिवम् उठा और जाने लगा तो मुरारी ने कहा,”अब तुम कहा चले ?
“जाने से पहले एक बार समंदर देख ले”,कहकर शिवम् वहा से निकल गया l


“बिना सारिका के तो तुमको यहां से हम जाने नहीं देंगे , इतनी दूर आये है उन्हें बिना लिए गए तो साला बनारस के लोग हसेंगे हम पर और इह हम होने नहीं देंगे”,कहकर मुरारी शिवम् और सारिका को मिलाने का प्लान सोचने लगा !
शाम तक शिवम् मड आयलैंड में बैठा समंदर की लहरों को देखता रहा l सारिका के साथ बिताया एक एक पल वह अपनी आँखों में कैद कर रहा था l सुबह से शाम हो गयी सूरज ढलने लगा था शिवम् भी उठा और जाने लगा तो एक फकीर बाबा ने कहा,”फ़क़ीर की झोली में कुछ डाल दे बेटा , तेरी सभी मंशा पूरी होगी”


शिवम् ने जेब से एक नोट निकालकर फकीर की झोली में डाल दिया l फ़क़ीर ने शिवम् के सर पर हाथ रखा और उसकी उदास आँखे देखकर कहा,”जा तेरी हर ख्वाहिश पूरी हो !”
शिवम् मुस्कुरा उठा लेकिन उसकी मुस्कराहट में भी दर्द शामिल था उसने कहा,”अब कोई ख्वाहिश नहीं है बाबा”
“ऊपर वाला सुन लेता है कभी कभी दिल की आवाज को , तू एक बार कोशिश कर के तो देख !!”,फकीर ने कहा और मुस्कुराता हुआ वहा चला गया


शिवम् उसे जाते हुए देखता रहा l फकीर के शब्दों ने उसके दिल में एक उम्मीद किरण पैदा की …………………..
“दी जल्दी करो , 7 बज चुके है !! वी आर गेटिंग लेट “,अनु ने रूम के बाहर से चिल्लाते हुए कहा
कुछ देर बाद सारिका आई अनु ने देखा तो बस देखती रह गयी !! ब्लेक रंग की साड़ी , खुले बाल जिन्हे खूबसूरत तरीके से सहेजा हुआ था , कानो में बड़े बड़े झुमके , होंठो पर लिपस्टिक , आँखों में गहरा काजल और हल्का मेकअप l सारिका बहुत खूबसूरत लग रही थी अनु ने अपनी पलके झपकाते हुए कहा,”दी यू आर लुकिंग सो हॉट !”


“अनु ये ठीक तो लग रहा है , आई मीन हमने ये सब पहले कभी नहीं पहना है”,सारिका ने अपनी झीनी साड़ी को सम्हालते हुए कहा
“दी आज जो भी आपको देखेगा न उसका तो हार्ट फैल होना पक्का है , पर हमे तो उस एक का ही हार्ट फेल करना है”,अनु ने कहा
“किसका ?”,सारिका ने हैरानी से कहा
“किसी का भी नहीं , चलो ना देर हो रही है l आप भी ना कितने सवाल जवाब करती है”,अनु ने कहा


“अच्छा बाबा ठीक है , पर हम जा कहा रहे है”,सारिका ने पूछा !
“वो सब आपके लिए सरप्राइज है , अब चलो भी”,अनु ने लगभग सारिका को खींचते हुए कहा !
अनु सारिका के साथ आकर गाड़ी में बैठ गयी उसने काका से चलने को कहा l रास्तेभर अनु किसी को मेसेज करती रही 1 घंटे बाद गाड़ी एक जगह आकर रुकी l अनु और सारिका गाड़ी से निचे उतरी सारिका ने देखा वहा काफी अँधेरा था उसने अनु से कहा,”अनु ये तू मुझे कहा ले आई ?


“रिलेक्स दी , कम”,कहकर अनु ने सारिका का हाथ पकड़ा और उसके साथ आगे बढ़ गयी l सारिका अंदर ही अंदर घबरा रही थी अनु किस वक्त क्या कर दे कोई कह नहीं सकता ! चलते चलते अनु ने सारिका का हाथ छोड़ दिया और अँधेरे में कही गुम हो गयी l सारिका को कुछ साफ दिखाई भी नहीं दे रहा था ! उसने घबराई हुई आवाज में कहा,”अनु , अनु देखो हमे डर लग रहा है ! अनु जवाब दो , तुम जानती हो ना हमे ये सब मजाक पसंद नहीं है , अनु !”
तभी सेकड़ो लाईटे एक साथ जल उठी और एक भीड़ गाते हुए सारिका की तरफ बढ़ी


“हैप्पी बर्थडे टू यू ! हैप्पी बर्थडे टू यू ! हैप्पी बर्थडे डियर सारिका , हैप्पी बर्थडे टू यू !!”,सब एक साथ गाने लगे !
सारिका की आँखे ख़ुशी से चमक उठी तभी अनु ने आगे आकर सारिका को गले लगाते हुए कहा,”हैप्पी बर्थडे माय , लविंग दी l और वहा सामने आपका गिफ्ट बेसब्री से आपका इंतजार कर रहा है”,


सारिका उस तरफ बढ़ी जैसे ही उसकी नजर भीड़ में छुपे उस सख्स पर पड़ी हैरानी और बेचैनी के मिले जुले भाव उसके चेहरे पर आ गए l सामने अमित खड़ा था वह मुस्कुराते हुए सारिका के पास आया और गले लगते हुए कहा,”हैप्पी बर्थडे सारिका , कैसा लगा सरप्राइज ?


“आप यहाँ ?”,सारिका ने हैरानी से कहा
“हम्म्म्म सिर्फ तुम्हारे लिए आया , इन दिनों कितने फोन और मेसेज किये पर तुम पता नहीं कहा बिजी थी ? फिर मैंने और अनु ने मिलकर ये प्लान बनाया l 4 दिन बाद हमारी सगाई भी है इसलिए डेड ने बुला लिया ,, पर क्या करता तुमसे मिलने का इतना मन था ना की घर ना जाकर सीधा यहाँ आ गया l सुबह जल्दी निकलना पड़ेगा …………………. छोड़ ये सब मैं भी न क्या पूछने लगा ? ये बताओ कैसी हो ?”,अमित ने अपनी बात ख़त्म करके कहा
“हम ठीक है आप ?”,सारिका ने कहा


“पहले बहुत परेशान था अब तुम्हे देखकर ठीक हु”,अमित ने सारिका को प्यार से देखते हुए कहा हां ये बात और थी सारिका को अमित का इस तरह देखना अच्छा नहीं लगता था ! सारिका को खामोश देखकर अमित ने कहा,”ये साड़ी बहुत अच्छी लग रही है तुम पर !!”
“थैंक्यू वो अनु ने जिद की इसलिए…!!”,सारिका ने कहा
“ह्म्म्मम्म वो इसलिए क्योकि ब्लैक मेरा फेवरेट कलर है ! “,अमित ने कहा
अनु ने केक टेबल पर रखा और सबको बुलाया l

अमित और सारिका भी वहा आ पहुंचे सारिका ने केक काटा सबसे पहले उसने अनु को खिलाया और फिर अमित को l अमित ने भी अपने हाथो से सारिका को खिलाया और फिर सभी पार्टी को एन्जॉय करने लगे ! अनु ने म्यूजिक ऑन किया और फिर सभी सभी गानो की धुन पर थिरकने लगे l अमित ने भी सारिका के साथ डांस किया इस से वह सारिका के करीब भी आया लेकिन सारिका ने इतना ध्यान नही दिया l डांस के बाद सबने खाना खाया l खाने के बाद म्यूजिक एक बार फिर शुरू हुआ पर इस बार म्यूजिक के साथ साथ ड्रिंक भी थी l सारिका नहीं पीती थी इसलिए उसने ना कह दिया l

अमित ने अनु के साथ पैग शेयर किया l सारिका का इस शोर शराबे में दम घुटने लगा तो वह वहा से निकलकर बाहर आ गयी l पार्टी समंदर किनारे रखी थी इसलिए सारिका टहलते हुए अकेले ही वहा आकर खड़ी हो गयी और समंदर की लहरों को देखने लगी ! अनु ने सारिका को अकेले खड़े देखा तो अमित को जाने का इशारा किया l

अनु चाहती थी सारिका और अमित की शादी जल्द से जल्द हो ताकि वह अपने पापा को अपने बारे में बता सके l अमित सारिका के पास आकर खड़ा हो गया कुछ कुछ बाते होने लगी l अमित बोलता जा रहा था और सारिका बस हां ना में जवाब दे रही थी उसके जहन में सिर्फ शिवम् का ख्याल चल रहा था l

उसे लगा आज की पार्टी में शिवम् भी आएगा लेकिन वो नहीं था ना ही मुरारी l शायद वो लोग बिना बताये बनारस वापस लौट गए सोचकर सारिका का मन और उदास हो गया l अमित उसे न्यूयॉर्क के बारे में बता रहा था , अपने फ्यूचर प्लान्स और मैरिड लाइफ के बारे में डिस्कस कर रहा था पर सारिका को समंदर की उन लहरों के अलावा कुछ सुनाई नहीं दे रहा था !! कुछ देर बाद अमित की नजर जब सारिका के चेहरे पर गयी तो बस देखता ही रह गया सारिका के बाल उड़कर उसके गालो को छू रहे थे l

अमित ने अपने हाथ से उसके बालों को साइड कर दिया l अमित की छुअन से सारिका अमित की और पलट गई और उसकी आँखों में देखने लगी अमित सारिका के थोड़ा करीब आया तो बैचैनी से सारिका का दिल धड़क उठा l अमित की आँखों में मदहोशी छाई हुयी थी उसने सारिका के चेहरे को अपने हाथो में थामा और जैसे ही अपने होंठो को सारिका के होंठो के पास लाया सारिका ने अमित को खुद से दूर करते हुए कहा,”सॉरी अमित , आई कांट कम्फर्टेबल विथ यू ! आई ऍम सॉरी !”


सारिका की आवाज में घबराहट थी अमित ने सारिका से कहा,”नो , इट्स ओके !”
इतने में अनु ने उन दोनों के बिच आकर कहा,”लव बर्ड्स , पार्टी इज ऑवर ! मैंने तुम दोनों को डिसट्रब तो नहीं किया ना ?”
“नहीं अनु , बल्कि थैंक्स अ लॉट मेरे बिना ही तुमने इतना सब अरेंज किया”,अमित ने मुस्कुरा कर कहां !


“थैंक्यू जीजू , इसी बात पर एक लॉन्ग ड्राइव हो जाये”,अनु ने अमित से कहा
“स्योर व्हाई नॉट ?”,अमित ने ख़ुशी से कहा l अनु की तरह अमित को भी घुमना बहुत पसदं था l

दोनों ने सारिका की और देखा तो सारिका ने कहा,”माफ़ कीजिये हम नही जा सकते , हमारा मन नही है”
“अगर तुम नही जा रही तो हम लोग भी नही जा रहे है”,अमित ने कहा
“हां दी प्लीज़ चलो ना”,अनु ने कहा
“अमित जी हमारा सच में मन नही है , हमारी वजह से आप और अनु अपना प्लान केंसल मत कीजिये आप दोनों जाईये”,सारिका ने कहा l


“सोच लो दी साली आधी घरवाली होती है , कही अमित मुझसे इम्प्रेस होकर शादी से इंकार ना कर दे”,अनु ने कहा
“बदमाश , कुछ भी बोलती है”,सारिका ने अनु के सर पर हलकी सी चपत लगाते हुए कहा
“अनु नो चांस सारिका के अलावा कोई नहीं , तुम भी नही l इसलिए मुझसे फ्लर्ट करने की सोचना भी मत”,अमित ने अनु को छेड़ते हुए कहा
“अनु अमित आप दोनों जाईये हमें आप दोनों पर भरोसा है”,सारिका ने सहजता से कहा
“ये हुई ना बात अब मैं पक्का स्योर हु की सारिका को अपनी वाइफ चुन के मैंने कोई गलती नही की”,अमित ने गर्व से कहा


“आखिर दी किसकी है , मेरी द ग्रेट अनु की”,अनु ने भी कहा
“सारिका आर यू स्योर हम जाये , तुम आना चाहो तो आ सकती हो”,अमित ने कहा
“हम जरूर आते पर सच में हमारा बिल्कुल मन नहीं है l आप दोनों जायेंगे तब भी हमे अच्छा लगेगा”,सारिका ने कहा
“ओके पर तुम घर कैसे जाओगी ? पहले मैं तुम्हे घर छोड़ देता हूं”,अमित ने कहा
“काका है ना हम अपनी गाड़ी से चले जायेंगे l आप दोनों जाईये और जरा ध्यान से “,सारिका ने कहा


अनु और अमित ने सारिका को हग किया और चले गए सारिका ने काका के पास आई और घर चलने को कहा l उसका मन बहुत बैचैन था l अपने दिल के हाथों मजबूर होकर आखिर सारिका ने शिवम् को फोन लगाया लेकिन उसकी किस्मत शिवम् का फोन बंद था l l
सारिका को घर छोड़कर काका चले गए l सारिका थके कदमो से चलकर आई बेल बजायी लेकिन ये देखकर हैरान थी की दरवाजा पहले से खुला था सारिका ने दरवाजा खोला और अंदर आई तो हैरान रह गयी l पुरे घर में कैंडल्स की सजावट थी जिनकी खुशबु से पूरा घर महक रहा था l एक कोने में सफेद फूलो से बने ढेरो बुके थे l

सारिका वही रुककर सब देखने लगी उसे सब बहुत रोमांचक लग रहा था पर ये सब किया किसने सोचकर सारिका ने मीना को आवाज लगाई l लेकिन कोई जवाब नहीं आया उसने जब दोबारा आवाज लगाई तो डायनिंग टेबल के पास खड़े किसी शख्स ने कहा,”आपकी इजाजत के बिना ही हमने मीना को छुट्टी दे दी l “
सारिका को आवाज जानी पहचानी लगी उसका दिल धड़क उठा l तभी कैंडल जलाते हुए माचिस की रौशनी में सारिका को उस सख्स का चेहरा दिखा l

उसकी धड़कने जैसे थम सी गयी सामने खड़ा वह सख्स कोई और नही शिवम् था l सारिका के चेहरे पर सुकून के भाव थे , ना कोई बैचैनी ना कोई घबराहट लगा जैसे किसी अपने के पास आ गयी है शिवम् ने सारिका की तरफ देखे बिना ही बोलना शुरू किया,”500 रूपये की रिश्वत दी तब जाकर मीना ने बताया को आपको खाने में पनीर , पुलाव , रसमलाई और सिम्पल दाल पसन्द है l सब हमने अपने हाथ से बनाया है बस रोटिया थोड़ी टेढ़ी मेढ़ी बनी है l एडजस्ट कर लेना !! वैसे मीठे में कुछ ओर भी है हमारे पास – आपकी मनपसन्द बनारस की जलेबिया l

जानते है वो भी बहुत पसन्द है आपको !! आप इतनी खूबसूरत है कि तोहफा देने की सोचे तो सुबह से शाम हो जाये लेकिन दो घंटे बाद आखिर हमे कुछ पसन्द आ ही गया ये झुमके !! इतने महंगे नही है पर हमने दिल से खरीदा है , जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाये मैडम जी आपको हमारी उम्र भी लग जाये
अब इसके बाद भी आपको कोई शिकायत हो तो आप कह सकती है आज हम आप पर बिल्कुल गुस्सा नहीं करेंगे”

सारिका की आँखों में आंसू भर आये उसने कुछ नही कहां और दौड़कर शिवम् के गले जा लगी l वो शिवम् से ऐसे चिपकी रही जैसे कोई छोटा बच्चा डरकर अपनी हिफाजत के लिए छिपता है ! पर शिवम् ने उन्हें नही छुआ उसकी हिम्मत ही नही होती थी ऐसा करने की l सारिका ने शिवम् के गले लगे हुए कहा,”हमे लगा आप वापस बनारस चले गए है”
शिवम् ने सारिका का चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके आंसू पोछकर कहा,”हम आपको छोड़कर कहा जा सकते है मैडम जी !”

सारिका आंसुओ में भी मुस्कुरा उठी आज शिवम् ने उसे इतना खूबसूरत तोहफा जो दिया था )

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संजना किरोड़ीवाल

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