Pasandida Aurat Season 3 – 7

Pasandida Aurat Season 3 – 7

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

प्रिय पृथ्वी !
हर हर महादेव ! रात के 12:10 बज रहे है और मैं तुम्हे ये खत लिख रही हूँ……………..हाँ मुझे बहुत अच्छे से याद है कि तुमने कहा था कि “अब हम कभी बात नहीं कर पाएंगे” और ये जानते हुए भी मैं तुम्हे ये खत लिख रही हूँ। पिछले 30 दिन से मैं इस दिन का रोज इंतजार कर रही थी। आज तुम्हारी जिंदगी का सबसे ख़ास दिन है , आज तुम्हारा जन्मदिन है।

आज से 2 महीना 25 दिन पहले मेरे जन्मदिन पर तुम मेरे साथ थे जिसकी मैं ताउम्र शुक्रगुजार रहूंगी क्योकि जब कोई नहीं था तब तुम थे और इसलिए मैंने तुम्हे ये खत लिखा है।जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाये पृथ्वी ! महादेव तुम्हे हर ख़ुशी दे , तुम खूब तरक्की करो और जिंदगी में तुम्हे वो सब मिले जो तुम्हारा दिल चाहता है। आज महादेव का दिन है और तुम्हारा जन्मदिन भी। अगर हम पहले की तरह बात कर रहे होते तो मैं तुम्हारे लिए किसी मंदिर जाती और तुम्हे हर मंदिर के दर्शन करवाती जैसे मेरे जन्मदिन पर किया था।

मैं तुम्हे कोई तोहफा नहीं दे सकती पर हाँ आज तुम्हारे लिए मंदिर जाकर प्रार्थना जरूर करुँगी। इस ख़ास मौके पर तुम्हारे लिए खत लिखूंगी और उसे बहुत सम्हालकर रखूंगी इस उम्मीद में कि किसी दिन वो तुम्हारे हाथो में होगा। इस ख़ास दिन तुम्हारे आस पास बहुत लोग होंगे तो तुम अपने इस दिन को अच्छे से इंजॉय करना। अपने पसंदीदा रंग का शर्ट पहनना और हाँ ! चिकन नूडल्स खाना मत भूलना,,,,,,,,,,,,!!

मैं नहीं जानती ये खत कभी तुम तक पहुंचेगा भी या नहीं , न ही मुझे तुमसे इस खत के जवाब की उम्मीद है। मैं अब ऐसी कोई झूठी उम्मीद नहीं रखना चाहती ना ही खुद को कोई झूठी तसल्ली देना चाहती हूँ। मुझे यकींन है मैं धीरे धीरे तुम्हे भूल जाउंगी और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाउंगी,,,,,,,,,,तुम बस खुश रहना और अपने सपनो के लिए मेहनत करते रहना। मेरी प्रार्थनाये हमेशा तुम्हारे साथ है,,,,,,,,,,,,,बस इतना ही , इस से ज्यादा कुछ लिखा तो शायद मैं रो दूंगी !
Wish you a very happy birthday prathvi upadhyay,,,,,,,,,,,,!!!”

खत पढ़कर पृथ्वी को वो सुबह याद आ गयी जब उसे पुरे एक महीने बाद अवनि का मेल मिला था। खत के आख़री में आँसू की एक बूँद गिरकर सूख चुकी थी। पृथ्वी ने भारी मन के साथ उस खत को समेटा और अवनि की तरफ देखकर कहा,”मेरी वजह से तुम्हे कितने आँसू बहाने पड़े अवनि”
“आपकी वजह से नहीं आपके लिए”,अवनि ने प्यार से कहा और “30 जून” को लिखा गया दूसरा खत पढ़ने का इशारा किया

पृथ्वी ने मुस्कुराते हुए दूसरा खत उठाया और खोला तो थोड़ा सरप्राइज हुआ क्योकि इस बार अवनि के शब्द कोरे कागज पर नहीं बल्कि सफ़ेद कागज पर छपी अपनी ब्लेक इन वाइट तस्वीर पर लिखे गए थे। पृथ्वी खत पढ़ने लगा  

“प्रिय पृथ्वी !
हर हर महादेव ! एक बार फिर जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाये। आज का दिन तुम्हारा बहुत अच्छा गुजरे और तुम्हे ढेर सारी खुशिया मिले
समझ नहीं आ रहा तुम्हे क्या कहू ? तुम पर गुस्सा करू ,
तुमसे नाराज रहू ,  तुम्हे डाँटू , अपनी किस्मत पर दुःखी रहू या फिर तुमने जो किया उस पर अफ़सोस जताऊ ?

मुझे भी नहीं पता हमारे नसीब में क्या लिखा है पर इतना यकीन है जो लिखा है अच्छा लिखा है , बेहतर लिखा है क्योकि मुझे अपने महादेव पर विश्वास है।
मैं पिछले एक महीने से सब सही है , मैं खुश हूँ , मुझे कुछ नहीं चाहिए , मैं तुम्हे भूल जाउंगी और अब मैं अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुकी हूँ का दिखावा करते करते आज भी वही खड़ी हूँ जहा तुमने एकदम से सब खत्म कर दिया था।

मज़बूरी बोलकर तुमने कह दिया कि अब हमारी कभी बात नहीं होगी और सच में उसके बाद कभी बात हुई ही नहीं। तुम्हे जाना था तो तुम जा सकते थे पर तुम चाहते तो ये सब बेहतर तरीके से खत्म कर सकते थे पर सबकी तरह तुमने भी मुझे वही लाकर छोड़ दिया जहा से ये सब शुरू हुआ था।

उस दिन के बाद से मैं समझ ही नहीं पा रही हूँ कि मैं तुम्हे भूल जाऊ या फिर तुम्हारा इंतजार करू ? और ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब ना तुम्हारे पास है न मेरे पास ,, आज बहुत खास दिन है मुझे तुम से इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए पर हाँ एक नाराजगी है मेरे दिल में तुम्हे लेकर और हमेशा रहेगी। तुम वाहियात हो और उस से भी ज्यादा वाहियात थे तुम्हारे फैसले,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!

इस ख़त के पहले भाग में तुम्हारे लिए गुस्सा दिखाकर भी मैं तुम्हारे लिए प्रार्थना करने मंदिर चली गयी और ईश्वर से कहा कि वे तुम्हे वो सब अता करे जो तुम्हारा दिल चाहता है साथ ही महादेव से ये भी कहा कि मैं तुम्हे भूल जाऊ लेकिन उसी वक्त सहसा ही मेरे कानो में एक नाम पड़ा “पृथ्वी”
एक छोटा लड़का मेरे पास खड़े होकर महादेव को जल अर्पित करना चाहता था लेकिन उसका हाथ वहा तक नहीं पहुंच पा रहा था।

मैंने उसे अपने पास बुलाया और फिर हम दोनों ने साथ साथ महादेव को जल अर्पित किया। जानते हो उसका नाम क्या था ? उसका भी ना पृथ्वी था। इस खास दिन पर तुम मेरे साथ ना होकर मेरे साथ थे पृथ्वी,,,,,,,,,,,,,,महादेव क्या चाहते थे मैं नहीं जानती बस इतना जानती थी कि दिनभर की तकलीफदेह यादों के बाद उस पल सुकून था !
 इस खत के साथ ही मैंने तुम्हारे लिए एक छोटा सा तोहफा भी खरीदा है।

जानती हूँ तुम महादेव से बहुत नाराज हो इसलिए ये तोहफा भी उन्ही से जुड़ा है। काले धागे में पिरोया हुआ चाँदी का “ॐ” , इसे खरीदने के पीछे दो वजह है पहली ये कि तुम्हे गुस्सा बहुत आता है ये तुम्हारी कलाई पर रहेगा तो तुम्हे शांत रखेगा और दूसरी वजह ये ताकि महादेव पर तुम्हारा विश्वास फिर से बन जाए,,,,,,,,,,,मुझे यकीन है तुम इसे जरूर पहनोगे। इस से ज्यादा मैं तुम्हे कुछ नहीं दे सकती पृथ्वी,,,,,,,,,,,,,!!”

पृथ्वी ने खत पढ़ा और मुस्कुराकर अपनी कलाई पर बंधे उस ॐ को देखा और अपने होंठो से छू लिया। पृथ्वी अब पहले से काफी शांत भी हो चुका था और उसका महादेव में विश्वास में विश्वास भी बढ़ चुका था। उसने अवनि की तरफ देखकर कहा,”मैं इसे हमेशा पहनूंगा अवनि , थैंक्यू”
अवनि ने सुना तो मुस्कुरा दी पृथ्वी अब तक 8 खत पढ़ चुका था और उसके पास 5 खत अभी भी बचे थे। घडी में रात के 2 बज रहे थे लेकिन पृथ्वी को इस का अहसास नहीं था न अवनि को नींद आ रही थी। पृथ्वी ने एक और लिफाफा उठाया और खोलकर उसमे रखा खत निकाला।

“प्रिय पृथ्वी !
हर हर महादेव ! आज फिर तुम्हे खत लिख रही हूँ ये जानते हुए भी कि ये खत कभी तुम तक नहीं पहुंचेंगे ! आज मन बहुत उदास है , ना जाने क्यों ना चाहते हुए भी बार बार अतीत का सामने आ जाना मुझे फिर उसी तकलीफ में धकेल देता है जिस से बाहर निकलने में इतना वक्त लग गया। मैंने अब खुद को रोकना छोड़ दिया है। अब अगर तुम्हारी याद आती है आने देती हूँ खुद को तकलीफ नहीं देती ! मैं नहीं समझ पा रही पृथ्वी मेरे साथ ये सब क्यों हो रहा है ? क्यों मैं हर रोज अपने महादेव के सामने तुम्हारे लिए दुआए मांगती हूँ ,

क्यों मैं चाहकर भी तुम्हे अपने दिल और दिमाग से निकाल नहीं पा रही , मैं इन अहसासों को कोई नाम नहीं दे पा रही पृथ्वी बस इतना जानती हूँ कि ये सिर्फ तुम्हारे लिए है। पहले से बहुत बदल गयी हूँ मैं , ना किसी से बात करना अच्छा लगता है ना किसी से मिलना जुलना। जानती हूँ पृथ्वी तुम्हारे मन में मुझे लेकर बहुत कुछ है लेकिन मैं तुम्हारी जिंदगी का हिस्सा नहीं बन सकती , अगर तुम्हारी जिंदगी में शामिल हो भी गयी तो कभी , कभी तुम मोहब्बत नहीं कर पाऊँगी।

मैं सब कर सकती हूँ पृथ्वी लेकिन अपना घर बसाने के लिए तुम्हारे आई बाबा का दिल नहीं ,  अपनी ख़ुशी के लिए उनकी आँखों में आँसू नहीं दे सकती ! मुझे अपनाकर तुम्हे सिर्फ ताने और जिल्लत ही मिलेगा और मैं ऐसा कभी नहीं चाहूंगी।  कविताये लिखना छोड़ दिया था पर ना जाने क्यों आज बहुत दिनों बाद लिखने का मन किया। ये कुछ लाईने तुम्हारे लिए

“मैं समाज के तानों से छलनी , मन लिए घूमती हूँ
वो बातों में अपनी , उन जख्मों की दवा रखता है
वो धीरे धीरे जोड़ता है टुटा मन मेरा
हर टूटे हिस्से के लिए दुआ पढता है
बिखरे मन के साथ इक रोज मुझे भी समेट ले वो
ना जाने ये कैसी हसरत में हूँ मैं  
इन दिनों एक शख्स की आदत लगी है बहुत

महादेव से प्रार्थना करुँगी पृथ्वी कि इस जिंदगी में हम कभी ना मिले,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,बस तुम्हे अलविदा कहने की हिम्मत नहीं है।

खत के आखिर में लिखी कविता पढ़कर पृथ्वी के चेहरे के भाव बदल गए। उसने खत को साइड में रखा उठा और जल्दी से कबर्ड के सामने चला आया। अवनि को समझ नहीं आया कि पृथ्वी को अचानक ये क्या हुआ ? वह बस ख़ामोशी से पृथ्वी को देखने लगी। पृथ्वी ने कबर्ड खोला और उसमे कुछ ढूंढने लगा। कुछ देर बाद उसे एक किताब मिली जो कि अवनि की लिखी किताब थी। पृथ्वी का दिल धड़क रहा था और चेहरे पर बेचैनी के भाव थे। उसने किताब को खोला और उसके बीच रखे कागज को निकाला।

ये वही कागज था जिस पर पृथ्वी ने एक रोज कुछ लाईने लिखी थी जब वह अवनि से दूर था और फिर अपने फ्लेट की बालकनी में खड़े होकर उन्हें गुनगुनाया भी था।
पृथ्वी उस कागज को लेकर अवनि के सामने आया और उसे अवनि की तरफ बढ़ा दिया। पृथ्वी का हाथ कांप रहा था , अवनि ने उसके हाथ से कागज लिया और पढ़ने लगी
“इन दिनों एक शख्स की आदत लगी है बहुत”

पहली लाइन पढ़ते ही अवनि का दिल धड़क उठा। जो लाइन उसने अपने खत में लिखी इस कागज पर भी वही लाइन लिखी थी। अवनि ने हैरानी से पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने उसे आगे पढ़ने का इशारा किया और इस बार अवनि पढ़कर पृथ्वी को सुनाने लगी

“इन दिनों एक शख्स की आदत लगी है बहुत
इन दिनों उसकी मोहब्बत में हूँ मैं
इन दिनों उसकी बड़ी जरूरत है मुझे
इन दिनों उसकी जरूरत हूँ मैं
इन दिनों मुझे नींद कम आती है
मेरे जहन में एक ख्याल चलता है
वो ठहरेगा जिंदगी में या सबकी तरह छोड़ जायेगा
ना जाने क्यों ये सवाल रहता है ?
पास रहे तो आदत उसकी दूर रहे तो कमी लगे
ये कैसी जद्दोजहद में हूँ मैं ?

इन दिनों एक शख्स की आदत लगी है बहुत
इन दिनों उसकी मोहब्बत में हु मैं
पहले प्यार में दुनिया जहा की खबर नहीं रहती
आखरी इश्क़ भी शायद ऐसा ही होता है
दुनिया के सामने कठोर बनने वाला
मेरे सीने में सर छुपाकर बच्चो सा रोता है
उसकी आँखे बताती है उसे मेरी जरूरत है
मेरा दिल कहता है उसकी हसरत में हूँ मैं
इन दिनों एक शख्स की आदत लगी है बहुत
इन दिनों उसकी मोहब्बत में हु मैं

अवनि खामोश हो गयी और गर्दन उठाकर पृथ्वी की तरफ देखा तो पाया कि पृथ्वी की आँखों में नमी थी। अवनि का दिल धड़क रहा था और चेहरे पर दर्द के भाव थे। पृथ्वी से दूर होने के बाद जो शब्द अवनि ने लिखे थे वही शब्द पृथ्वी ने इस कागज पर लिखे थे। अवनि ने कागज पृथ्वी को दिखाकर कहा,”ये कैसे हो सकता है पृथ्वी , हम दोनों एक जैसी कविता कैसे लिख सकते है ?”

पृथ्वी बिस्तर पर आ बैठा और खुले हुए खत को उठाकर देखते हुए कहा,”इस खत के आखिर में तुमने लिखा कि “महादेव से प्रार्थना करुँगी पृथ्वी कि इस जिंदगी में हम कभी ना मिले” अवनि तुम शायद भूल गयी कि हमारी कहानी खुद महादेव लिख रहे थे। इन शब्दों का मिलना कोई इत्तेफाक नहीं है अवनि ये वो अहसास है जो हमारे दिलों को आपस में जोड़ता है इसलिए तो तुम से 1000 किलोमीटर दूर बैठकर भी मैं तुम्हारे लिए ये कविता लिख रहा था। एक दूसरे से दूर होकर भी हम हमेशा एक दूसरे के पास थे अवनि , मैं इन खतों के जरिये तुम्हारे साथ था और तुम अपनी कहानियो के जरिये मेरे साथ थी।

हमारा मिलना तय था अवनि , महादेव पहले ही हमे एक दूसरे की किस्मत में लिख चुके थे वरना सोचो क्यों हम एक दूसरे के लिए ये सब लिखते वो भी उस वक्त जब हमारे मिलने की उम्मीद भी नहीं थी।
अवनि ने सुना तो उस कागज में अपना मुँह छुपा लिया और रोने लगी।

ये देखकर पृथ्वी उसके पास आया और उसके चेहरे को अपने हाथो में लेकर कहा,”अवनि ! समझ सकता हूँ इस वक्त तुम पर क्या गुजर रही है और उस वक्त भी समझ रहा था कि तुम पर क्या गुजर रही होगी,,,,,,,,,,,,पर देखो इतनी मुश्किलों के बाद भी आज हम साथ है,,,,,,,,,,,,एक दूसरे के जीवनसाथी बनकर,,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि सुबकने लगी और सुबकते हुए कहा,”यहाँ तक आने के लिए मैंने कितनी बार अपने मन को मारा है पृथ्वी , कितनी बार खुद से ये झूठ कहा कि मुझे तुम्हारी जरूरत नहीं है ,

कितनी बार खुद को इस भरम में रखा कि मैं तुम्हे भूलकर अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाउंगी। जरूरत थी पृथ्वी , जिंदगी के हर मोड़ पर मुझे तुम्हारी जरूरत थी,,,,,,,,,,,,,,,जब पहली बार शादी के मंडप से उठी तब मुझे तुम्हारी जरूरत थी , जब पापा की आँखों में अपने लिए गुस्सा और नफरत देखा तब मुझे तुम्हारी जरूरत थी,,,,,,,,,,,,,अनजान शहर में अनजान लोगो के बीच मुझे तुम्हारी जरूरत थी,,,,,,,,,,,,,,,,,,जब दिल टुटा तब मुझे तुम्हारी जरूरत थी और जब तुम तुम मुझसे दूर हुए उस वक्त भी मुझे तुम्हारी ही जरूरत थी पृथ्वी,,,,,,,,,,,,,,

मैं तुम्हारे सामने ये कभी स्वीकार ही नहीं कर पायी कि मुझे तुम्हारी जरूरत है,,,,,,,,,,!!!”
अवनि को दुखी देखकर पृथ्वी ने तड़पकर उसे अपने सीने से लगाया और उसका सर सहलाते हुए कहा,”श्श्श्श बस ! अब कुछ मत कहना , मैं हूँ ना , मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं छोडूंगा अवनि,,,,,,,,,,हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा,,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि किसी मासूम बच्ची सी पृथ्वी के सीने से लगी रही और पृथ्वी की शर्ट अवनि के आँसुओ से भीगने लगी

 ( आगे के चार खतों में क्या खुलेंगे और भी राज ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल

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