Pasandida Aurat Season 3 – 63

Pasandida Aurat Season 3 – 63

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal

विक्रम के दिमाग में अवनि और पृथ्वी को लेकर कुछ तो गलत चल रहा था। उसने मिस्टर कुलकर्णी को कि शहर के बड़े प्रोडूसर में से एक थे को अगली सुबह पार्क एवेन्यू होटल में अवनि से मिलने को कहा। मिस्टर कुलकर्णी विक्रम की मंशा नहीं जानते थे इसलिए उन्होंने हामी भर दी। विक्रम ने भी फोन साइड रखा और बिस्तर पर लेट गया। खुली आँखों से वह कमरे की छत को तकने लगा। उसकी आँखों के सामने अवनि से हुई पहली मुलाकात चलने लगी और उसके बाद प्राची से हुई मुलाकाते जिनमे विक्रम प्राची को चाहने लगा था

लेकिन शादी के लिए किये गए इंकार ने विक्रम के ईगो को हर्ट कर दिया और उसने नशे में प्राची के साथ बदतमीजी की जिसका खामियाजा भुगतना बाकि था। अवनि और प्राची के बारे में सोचते हुए सहसा ही विक्रम की आँखों के सामने पृथ्वी का चेहरा आया , अवनि के लिए पृथ्वी ने विक्रम को मारा था और पृथ्वी के लिए प्राची ने विक्रम को ठुकराया था।

पृथ्वी को याद करके विक्रम का गुस्सा और बढ़ गया वह बिस्तर से उठा और खिड़की के पास चला आया। खिड़की से बाहर देखते हुए वह अवनि , प्राची और पृथ्वी के बारे में सोचने लगा।

आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
पृथ्वी ऑफिस से सीधा घर के लिए निकल गया। आज वह काफी हल्का महसूस कर रहा था क्योकि प्राची को अपनी गलती का अहसास हो चुका था , भरत का असली चेहरा सबके सामने आ चुका था , नीलेश को उसकी नौकरी वपास मिल चुकी थी और पृथ्वी ने मौर्या ग्रुप फिर से ज्वाइन कर लिया था। ये सब करने के लिए पृथ्वी को कितने सब्र से काम लेना पड़ा ये तो बस वही जानता था लेकिन अब सब ठीक था। स्टेशन से बाहर आकर वह पैदल ही अपार्टमेंट की तरफ चल पड़ा तभी उसकी नजर फूलो की एक दुकान पर पड़ी।

पृथ्वी मुस्कुराते हुए दुकान की तरफ बढ़ गया। उसने अवनि की पसंद के कुछ फूल चुने और उन्हें एक बुके में रखकर देने को कहा। दुकानवाले ने फूलो को बहुत ही सुन्दर तरीके से जमाया और पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया। पृथ्वी ने पैसे चुकाए और अपार्टमेंट की तरफ बढ़ गया। वह बड़ी शान से बुके हाथो में उठाये अपार्टमेंट की तरफ बढ़ रहा था , चेहरा चमक रहा था और होंठो पर प्यारी सी मुस्कान थी। अगल बगल से गुजरते लोग पृथ्वी को देखते और मुस्कुरा कर आगे बढ़ जाते।

बुके हाथो में थामे पृथ्वी लिफ्ट की तरफ बढ़ा तो गार्ड ने कहा,”हे खूप सुंदर फूल आहे ( बहुत सुन्दर फूल है )”
पृथ्वी ने एक नजर बुके को देखा और फिर गार्ड की तरफ देखकर कहा,”काका माझ्या बायकोसाठी आहेत ( मेरी पत्नी के लिए है काका )”
“खूप छान, जा, लवकर जा ( बहुत बढ़िया , जाओ जाओ जल्दी जाओ )”,गार्ड ने मुस्कुराते हुए कहा और वहा से चला गया

पृथ्वी लिफ्ट के अंदर चला आया और अपने फ्लेट के सामने आकर बेल बजा दी ! अवनि पृथ्वी की पत्नी है लेकिन फिर भी ये छोटे छोटे पलों में पृथ्वी का दिल धड़कना चलता रहता था। उसके बेल बजाने के बाद अवनि ने दरवाजा नहीं खोला तो पृथ्वी ने फिर से बेल बजायी और इस बीच वह 5-7 बार अपने बालों को सही कर चुका था और फूलों को सहला चुका था। दरवाजा खुला और इसी के साथ पृथ्वी का दिल भी धड़का लेकिन उस पल उसका दिल ठहर सा गया जब उसने दरवाजे के पास खड़ी अवनि को साड़ी में देखा।

पृथ्वी का मुँह खुला का खुला रह गया , हरे गुलाबी बड़े बड़े फूलो वाली ऑफ वाइट साड़ी स्लीवलेस ब्लाउज खुले बाल कोई मेकअप नहीं बस ललाट पर छोटी बिंदी और होंठो पर हलकी लिपस्टिक मांग में सिंदूर और गले में मंगल सूत्र , अवनि इस साड़ी  इतनी प्यारी लग रही थी कि उसे देखने के बाद पृथ्वी अपनी पलकें झपकाना ही भूल गया। वह अंदर आया अवनि ने मुस्कुराते हुए दरवाजा बंद कर दिया और पृथ्वी को देखकर कहा,”कैसी लग रही हूँ ?”

पृथ्वी के पास कहने को जैसे शब्द ही नहीं थे उसने अपना ऑफिस बैग निकालकर साइड रखा , हाथ में पकड़ा बुके भी बैग के साथ रख दिया , वह अवनि के सामने आया दोनों हाथो से उसकी बलाये ली और अपनी पाँचो उंगलियों को अपने होंठो से लगाकर हवा में अवनि की तरफ कर दिया तो अवनि मुस्कुरा उठी लेकिन पृथ्वी यहाँ नहीं रुकने वाला था उसने अपना हाथ अवनि की तरफ बढ़ाया और अपनी ऊँगली से उसकी आँख के किनारे लगा काजल लिया और अवनि के कान के पीछे लगाकर कहा,”तुम इतनी सुन्दर लग रही हो कही तुम्हे मेरी ही नजर ना लग जाए,.,,,,,,!!”

“हाह ! कुछ भी , वैसे क्या वो फूल मेरे लिए है ?”,अवनि ने बैग के पास रखे बुके को देखकर कहा
पृथ्वी पलटा , बुके उठाया और अवनि की तरफ बढाकर कहा,”हाँ लेकिन तुम्हारे सामने अब ये मुझे फीके नजर आ रहे है,,,,,,,,,,this is for you “
अवनि ने पृथ्वी के हाथो से वह बुके लिया और ख़ुशी से उसके गले लगते हुए कहा,”मुझे फूल बहुत पसंद है”
“हाँ जानता हूँ,,,,,,,,,मेरा बस चले तो मैं दुनिया के सारे फूल लाकर तुम्हारे कदमो में रख दू,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा

अवनि पृथ्वी के सीने से लगी रही और हाथ में पकडे फूलो को देखकर कहा,”और मैं चाहती हूँ ये फूल हमेशा ऐसे ही खिलते रहे , मेरे जाने के बाद भी,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि की बात सुनकर पृथ्वी के दिल में एक चुभन का अहसास हुआ उसने पृथ्वी के कंधो को पकड़कर उसे अपने सामने किया और कहा,”तुम कही नहीं जाओगी , मैं तुम्हे कही जाने ही नहीं दूंगा,,,,,,,,और खबरदार जो तुमने दोबारा ऐसी बात कही,,,,,,,,,!!!”

“सॉरी,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी को परेशान देखकर अवनि ने कहा
“ठीक से बोलो”,पृथ्वी ने झूठमूठ की नाराजगी दिखाकर कहा
अवनि ने अपनी ऐड़िया उठायी और अपने होंठो से पृथ्वी के गाल को छूकर कहा,”सॉरी”
अवनि की एक छुअन से ही पृथ्वी मक्खन की तरह पिघल जाया करता था उसने धीरे से कहा,”अब ऐसे सॉरी बोलोगी तो कोई भी माफ़ कर देगा”

अवनि मुस्कुराई पृथ्वी से दूर हटी और कहा,”आप हाथ मुँह धोकर फ्रेश हो जाओ मैं खाना बनाती हूँ”
अवनि इतना कहकर जैसे ही किचन की तरफ जाने लगी पृथ्वी ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक लिया और अपनी तरफ करके कहा,”ऐसे साड़ी पहनकर तुम किचन में जाओगी ?”
“खाना भी तो बनाना है”,अवनि ने आँखों में चमक भरकर हैरानी से कहा

“आज खाना मैं बनाऊंगा , तुम बताओ तुम्हे क्या खाने का मन है ?”,पृथ्वी ने अपनी बाँहो को अवनि की कमर के चारों ओर लपेटकर कहा
“आप ऑफिस से आये है थके हुए है , आप आराम कीजिये मैं आपके लिए कुछ अच्छा सा बनाती हूँ”,अवनि ने प्यार से कहा

“बिल्कुल नहीं ! आज मैं बहुत खुश हूँ और आज मेरी बायको इतनी सुंदर लग रही है कि मैं उसे किचन में काम करने तो बिल्कुल नहीं दे सकता,,,,,,,,,,आज खाना मैं बनाऊंगा”,कहते हुए पृथ्वी ने अवनि को गोद में उठाया और किचन की तरफ बढ़ गया।

पृथ्वी अवनि को गोद में उठाये किचन में आया और उसे किचन प्लेटफॉर्म पर बैठाकर कहा,”चुपचाप यहाँ बैठो,,,,,,,!!
अवनि को बैठाकर पृथ्वी फ्रीज में रखी कुछ सब्जिया उठा लाया और प्लेटफॉर्म पर रखकर कहा,”मुंबई आने के बाद मैंने तुम्हे अपने हाथो से बनी पावभाजी नहीं खिलाई , आज मैं तुम्हारे लिए वही बनाऊंगा”

“मैं हेल्प कर देती हूँ”,अवनि ने कहा और जैसे ही प्लेटफोर्ट से उतरने को हुई पृथ्वी ने उसकी तरफ देखकर कहा,”कोई जरूरत नहीं है , चुपचाप यहाँ बैठो और मुझसे बाते करो,,,,,,,,,,कितनो दिनों से हमने ठीक से बात तक नहीं की है”
अवनि ने सुना तो प्यार से पृथ्वी को देखने लगी , उसके सामने खड़ा मर्द दिनभर मेहनत करता है , थके होने के बाद भी उसकी छोटी छोटी जरूरतों का ख्याल रखता है और सबसे खूबसूरत बात ये कि वह कभी अपने रिश्ते को वक्त देना नहीं भूलता।

पृथ्वी ने अपने शर्ट की बाजू फोल्ड की और अवनि के बगल में खड़े होकर सब्जिया काटने लगा। उसका ध्यान सब्जिया काटने पर था और अवनि का पृथ्वी पर , वह प्यार भरी नजरो से उसे देख रही थी और फिर मन ही मन खुद से कहा

“कौन कहता है मर्द खूबसूरत नहीं होते ! ये बिखरे बाल , ये हलकी दाढ़ी , ये हाथो पर चढ़ी तुम्हारी आस्तीन और मुझसे बात करते हुए आँखों की ये चमक , मेरा दिल धड़काने के लिए काफी है। लिखने वालो ने मर्द की खूबसूरती पर कभी लिखा ही नहीं गर वो लिखते तो जानते कि काम से थककर आने के बाद भी तुम्हारे लिए वक्त निकालता मर्द कितना खूबसूरत लगता है , रसोईघर में पत्नी का हाथ बटाता मर्द कितना नरमदिल लगता है ,

बिखरे बालों को समेटता समेटता , किसी बात पर शर्माकर गर्दन सहलाता मर्द , आपको असहज ना लगे सोचकर नजरे झुकाता मर्द , किसी बात पर खिलखिलाकर हँसता मुस्कुराता कितना हसीन लगता है , इतना हसीन , इतना खूबसूरत जिसे देखकर  फिर से मोहब्बत हो जाये,,,,,,,,,,,,,,!!!!”

अवनि को खोया देखकर पृथ्वी ने उसके सामने चुटकी बजायी और कहा,”क्या हुआ ! कहा खो गयी ?”
अवनि की तंद्रा टूटी उसने मुस्कुराते हुए कहा,”थैंक्यू !”
“अरे ! अचानक से अब ये थैंक्यू किसलिए ?”,पृथ्वी ने चौंककर कहा
“बस थैंक्यू”,अवनि ने कहा।

पृथ्वी मुस्कुरा उठा और अवनि के गाल को धीरे से थपथपाकर कहा,”पागल लड़की,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी अवनि से बाते करते हुए उसके लिए पावभाजी बनाने लगा और अवनि मुस्कुराते हुए उसकी बाते सुनते हुए अपने जहन में पृथ्वी के लिए सपने बुनती रही जिन्हे उसे पृथ्वी के साथ पूरा करना था।

अगली सुबह , पृथ्वी का फ्लेट
“अवनि मेरा शर्ट कहा है ? आज ऑफिस में मीटिंग है और मुझे फॉर्मल पहनकर जाना है”,शीशे के सामने सिर्फ पेंट पहने खड़े पृथ्वी ने कहा
अवनि किचन में पृथ्वी के लिए नाश्ता लगा रही थी , उसने हाथ धोये और अपने दुपट्टे से पोछते हुए कमरे में आयी और बिस्तर पर रखा शर्ट उठाकर पृथ्वी की तरफ बढ़ाया लेकिन अगले ही पल पलट गयी और कहा,”आप ऐसे क्यों खड़े है ?”

पृथ्वी ने अवनि के हाथ से शर्ट लिया और पहनते हुए कहा,”अवनि ! तुम तो ऐसे शरमा रही हो जैसे तुमने मुझे पहले कभी ऐसे देखा ही ना हो,,,,,,!!!”
“वो अलग बात है”,अवनि ने कहा वह अभी भी दूसरी तरफ मुँह घुमाये खड़ी थी। पृथ्वी ने उसे अपनी तरफ किया और कहा,”अलग क्या है ? हम पति पत्नी है , मैं  तुम्हारे सामने ऐसे बिना शर्ट के घूम सकता हूँ,,,,,अपनी बीवी से कैसी शरम ?”

अवनि ने पृथ्वी के शर्ट का कोलर सही करते हुए कहा,”मैंने आपका टिफिन पैक कर दिया है , लंच टाइम में याद से खाना खा लेना। मीटिंग और काम के चक्कर में भूल मत जाना,,,,,,,,मुझे भी आज इंटरव्यू के लिए प्रोडक्शन हॉउस के मैनेजर से मिलना है , पहले ही दिन लेट होना नहीं चाहती”
“अरे हाँ ! आज तो तुम्हे बाहर जाना था ना,,,,,,,,,,क्या मैं तुम्हे वहा तक छोड़ दू ?”,पृथ्वी ने पूछा

अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा और प्यार से कहा,”पृथ्वी ! आपका ऑफिस है और मैं नहीं चाहती आप अपना काम छोड़कर मेरे लिए परेशान हो ! मैं अब इस शहर को जानने लगी हूँ मैं अकेले चली जाउंगी वैसे भी आपका ऑफिस और मेरी लोकेशन दोनों ऑपोसिट है,,,,,,,,,,,हाँ आप चाहे तो स्टेशन तक मेरे साथ चल सकते है”

“स्टेशन क्यों ? मैं तुम्हारे लिए कैब बुक कर देता हूँ,,,,,,,,,ट्रेन में तुम परेशान हो जाओगी”,पृथ्वी ने चिंतित स्वर में कहा
“पृथ्वी ! जब आप ट्रेन से जा सकते हो तो मैं क्यों नहीं ? चिंता मत करो मैं अपना ख्याल रखूंगी,,,,,,,,,अब चलकर नाश्ता करो वरना देर हो जाएगी”,अवनि ने कहा और कमरे से बाहर चली गयी

कमरे में खड़ा पृथ्वी अवनि को जाते देखता रहा और मन ही मन खुद से कहा,”तुम नहीं समझोगी अवनि ! मैं नहीं चाहता मेरे होते तुम्हे कभी कोई तकलीफ हो,,,,,,,,मैं और मेहनत करूंगा ताकि आज के बाद तुम्हे छोटी छोटी चीजों के लिए इतना सोचना ना पड़े”

देसाई मेंशन्स , मुंबई
प्राची सुबह ऑफिस जाने के लिए तैयार थी ! आज की सुबह बाकी सुबह के बजाय ज्यादा अच्छी थी क्योकि आज प्राची कॉन्फिडेंस से भरी हुई थी और वह बिल्कुल एक बॉस की तरह लग रही थी। फॉर्मल पेंट शर्ट उस पर कोट , बालों को बांधकर पोनी टेल बनायीं थी , कलाई पर महंगी घडी , हाथ में ऑफिस का बैग पकडे वह सीढ़ियों से उतरकर नीचे चली आ रही थी। मिस्टर देसाई डायनिंग टेबल पर नाश्ते का इंतजार कर रहे थे।

उनकी नजर प्राची पर पड़ी तो वे मुस्कुराये , आज प्राची की चाल में अलग ही कॉन्फिडेंस था और चेहरे पर एक चमक थी। प्राची डायनिंग टेबल की तरफ चली आयी ! नौकर तब तक नाश्ता लगा चुका था। प्राची ने अपना बैग रखा और कुर्सी खिसकाकर उस पर बैठते हुए कहा,”गुड मॉर्निंग डेड”
“गुड मॉर्निंग बेटा ! तुम आज जल्दी उठ गयी , कही जाने का प्लान है क्या ?”,मिस्टर देसाई ने प्राची की प्लेट में पराठा रखते हुए पूछा

“आज मिस्टर शर्मा के साथ मीटिंग है डेड , नए प्रोजेक्ट्स को लेकर उन्हें कुछ डॉट्स है वही क्लियर करने है,,,,,,,,,,!!!”,प्राची ने कहा
प्राची ऑफिस आ रही है ये जानकर मिस्टर देसाई थोड़ा हैरान हुए और कहा,”तुम ऑफिस जा रही हो ?”
प्राची ने मिस्टर देसाई की तरफ देखा और उदासी भरे स्वर में कहा,”डेड ! मैं जानती हूँ मैंने आपको बहुत परेशान किया है और मेरी वजह से आज आपकी कम्पनी लॉस में जाते जाते बची है , पर डेड मैं चाहती हूँ आप मुझे एक मौका दे ताकि मैं सब सही कर सकू ,,

मैं बहुत मेहनत करुँगी डेड और आपकी कम्पनी को फिर से नंबर वन पर लेकर आउंगी बस एक बार मुझ पर भरोसा कीजिये”
प्राची की बातो में आज मिस्टर देसाई को सच्चाई नजर आ रही थी इसलिए उन्होंने कहा,”मुझे तुम पर पूरा भरोसा है,,,,,,,,,,!!!”

प्राची ने सुना तो उसके दिल को तसल्ली मिली और उसने कहा,”डेड ! क्या आज की मीटिंग में मैं अपने नीलेश को लेकर जा सकती हूँ ?”
प्राची के मुँह से नीलेश का नाम सुनकर मिस्टर देसाई के दिल को एक ख़ुशी महसूस हुई और उन्होंने कहा,”हाँ बिलकुल , मैं नीलेश से कह देता हूँ वह तुम्हे पिक कर लेगा उसके बाद तुम सीधा मिस्टर शर्मा के ऑफिस ही निकल जाना”

“हम्म्म ठीक है डेड,,,,,,,,,,,,,आप इतना कम क्यों खा रहे है ? ये लीजिये न”,कहते हुए प्राची ने प्लेट में रखा ऑमलेट मिस्टर देसाई की प्लेट में रख दिया और मिस्टर देसाई मुस्कुराते हुए अपना नाश्ता करने लगे ,. आज कितने दिनों बाद वे काफी हल्का महसूस कर रहे थे।

पृथ्वी अवनि के साथ स्टेशन चला आया। उसने अवनि और अपने लिए टिकट्स ली जो कि अलग अलग ट्रेन की थी और दोनों ही ट्रेन विपरीत दिशा में जाने के लिए खड़ी थी। अवनि की ट्रेन ने हॉर्न दे दिया , भीड़ बहुत थी लेकिन अवनि जैसे तैसे करके चढ़ गयी और पृथ्वी को देखकर हाथ हिला दिया। पृथ्वी ने भी भागकर जल्दी जल्दी अपनी ट्रेन पकड़ी क्योकि वह भी निकलने वाली थी और दोनों ट्रेने विपरीत दिशा में आगे बढ़ गयी ! अपनी ट्रेन में चढ़े पृथ्वी के चेहरे पर परेशानी के भाव थे क्योकि उसे अवनि की परवाह थी तो वही दूसरी ट्रेन में खड़ी अवनि के चेहरे पर आत्मविश्वास था।

एक घंटे के सफर के बाद अवनि ट्रेन से उतरकर स्टेशन से बाहर आयी और लोकेशन देखा जो कि अभी दूर था , उसने सामने से गुजरते ऑटो को रोका और उसमे आ बैठी। अवनि ने ऑटोवाले को पता बताया और ख़ामोशी से बाहर के नज़ारे देखने लगी। कितनी भीड़ थी इस शहर में और उस से भी ज्यादा हैरानी की बात ये कि इस शहर के लोगो के पास वक्त नहीं था। सब बस भाग रहे थे , हर किसी को जल्दी थी , हर कोई हैरान परेशान , अपनी ही उलझनों में उलझा था पर अवनि इस भीड़ का हिस्सा बनना नहीं चाहती थी।

वह अपनी जिंदगी में ठहराव चाहती थी , सुकून चाहती थी और एक शांत कोना जहा बैठकर वह अपनी कहानिया लिख सके। अपने ही खयालो में खोयी अवनि को पता ही नहीं चला कि वह कब होटल के सामने पहुंच गयी !
ऑटोवाले की आवाज से अवनि की तन्द्रा टूटी , उसने किराया दिया और ऑटो से बाहर चली आयी ! अवनि ने सर उठाकर सामने बनी बड़ी सी इमारत को देखा और उसके।

प्रोडक्शन हॉउस का मैनेजर उस से यही मिलने वहा था , अवनि लिफ्ट से 13वे माले पर चली आयी। लॉबी से होकर वह आगे बढ़ी और मीटिंग रूम का दरवाजा खोलने के लिए जैसे ही हाथ बढ़ाया किसी ने आकर उसकी बाँह पकड़ी और उसे साइड में खींच लिया। अवनि कुछ समझ पाती इस से पहले उसके कानों में कुछ लोगो के कदमो की तेज तेज आवाजे पड़ी जो कि लिफ्ट की तरफ से चले आ रहे थे।

( क्या विक्रम हो पायेगा अपने मंसूबो में कामयाब और कर पायेगा पृथ्वी और अवनि को दूर ? क्या नीलेश को लेकर बदलने लगी है प्राची की भावनाये ? क्या अवनि के साथ होने वाला है कुछ बहुत बुरा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Pasandida Aurat Season 3
Pasandida Aurat Season 3 by Sanjana Kirodiwal
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