Pasandida Aurat Season 3 – 14
Pasandida Aurat Season 3 – 14

प्राची ने सुना तो गुस्से से अपना हाथ साइड में किया और सामने रखे गिलास को एक झटके में नीचे गिराकर गुस्से से चिल्लाकर कहा,”वो क्या मुझे हराएगी ?”
विक्रम ने सुना तो बस मुस्कुराते हुए दुसरा घूंठ भरा और प्राची को देखने लगा। विक्रम को मुस्कुराते देखकर प्राची का चेहरा गुस्से से और लाल हो गया। गिलास नीचे गिरकर टूट गया और उसमे भरा जूस नीचे बिखर गया। आस पास बैठे लोग हैरानी से प्राची को देखने लगे ये देखकर प्राची ने गुस्से से कहा,”क्या देख रहे हो सब , तमाशा हो रहा है यहाँ ?”
प्राची को गुस्से में देखकर सबने गर्दन घुमा ली और विक्रम ने सामने रखा पानी का गिलास प्राची की तरफ बढाकर कहा,”रिलेक्स प्राची ! व्हाई आर यू सो हायपर ? तुम तो ऐसे रिएक्ट कर रही हो जैसे पृथ्वी तुम से प्यार करता था और शादी अवनि से कर ली,,,,,,,!!!”
विक्रम की बात सुनकर प्राची को अहसास हुआ कि उसने कुछ ज्यादा ही रिएक्ट कर दिया। उसने पानी का गिलास लिया और एक घूंठ पीकर गिलास को साइड में रख दिया।
परेशानी और गुस्से के भाव अभी भी उसके चेहरे पर झिलमिला रहे थे। विक्रम ने देखा तो अपना हाथ प्राची के हाथ पर रखा और उसके हाथ को धीरे से दबाकर कहा,”प्राची डोंट वरी ! मैं हूँ ना बेब”
प्राची ने जलती नजरो से अपने हाथ पर रखे विक्रम के हाथ को देखा और साइड में झटककर कहा,”तुमने यहाँ होकर भी क्या उखाड़ लिया ? तुम्हारी आँखों के सामने वो पृथ्वी को ले गयी और तुम हाथ पर हाथ धरे देखते रहे या फिर तुम मेरे आने का इंतजार कर रहे थे ?”
प्राची की बात सुनकर विक्रम ख़ामोशी से उसे देखने लगा तो प्राची ने आगे कहा,”लिस्टर विक्रम ! मैंने तुम्हारी तरफ दोस्ती का हाथ इसलिए बढ़ाया ताकि तुम उस दो कौड़ी की अवनि को पृथ्वी से दूर सको लेकिन तुम तो यहाँ बैठकर मुझे उनके हनीमून के बारे में बता रहे हो।”
“प्राची ! तुम भी जानती हो कि वो अवनि पृथ्वी की वाइफ है और पृथ्वी उस से बहुत प्यार भी करता है जो कि मैं तुमसे पहले देख चुका हूँ ! तुम लगता है उन दोनों को अलग करना इतना आसान होगा ? मैं बस सही मौके का इन्तजार कर रहा हूँ और वो मौका मेरे हाथ में है”,विक्रम ने सधे हुए स्वर में कहा
विक्रम की बात सुनकर प्राची की आँखे चमक उठी और उसने बेचैनी भरे स्वर में कहा,”कौनसा मौका ?”
“मुंबई में एक बड़े प्रोडक्शन हॉउस को नए राइटर्स की जरूरत है। दो हफ्ते बाद उसके इंटरव्यूज मरीन लाइव होटल में है और मुझे पूरा यकीन है कि अवनि वहा जरूर आएगी और जानती हो वो इंटरव्यू कौन लेने वाला है ?”,विक्रम ने सस्पेंस से भरे स्वर में कहा
“क्या ये इंटरव्यू तुम लेने वाले हो ?”,प्राची ने हैरानी से अपनी आँखे बड़ी करके पूछा
विक्रम ने कोई जवाब नहीं दिया बस हामी में गर्दन हिला दी ये देखकर प्राची ख़ुशी से उछल पड़ी और कहा,”ओह्ह्ह विक्रम यू आर जीनियस,,,,,,,,इस इंटरव्यू के बाद तुम अवनि को अपने प्यार का जाल में फसा लेना और इसके बाद वो खुद ही पृथ्वी से दूर हो जाएगी”
“अह्ह्ह्ह नहीं ! मेरा प्लान कुछ और हैं। मुझे अवनि में कोई इंट्रेस्ट नहीं है , ना ही मुझे उसके साथ प्यार का खेल खेलना है। उसे खुद पर बहुत घमंड है मुझे बस उसके घमंड को तोड़ना है,,,,,,,,,,,!!!”,विक्रम ने कहा
“तुम्हे जो करना है तुम करो बस मुझे पृथ्वी चाहिए और इसके बदले में डेड की कम्पनी हमेशा के लिए कपूर ग्रुप्स के साथ बिजेनस रिलेशन जारी रखेगी”,प्राची ने अपना पर्स उठाकर उठते हुए कहा
“सिर्फ बिजनेस रिलेशन क्यों , पर्सनल रिलेशन क्यों नहीं ?”,अपनी कुर्सी पर बैठे विक्रम ने प्राची की तरफ देखकर कहा
प्राची मुस्कुराई और विक्रम के गाल पर अपनी ऊँगली घुमाकर कहा,”बिकॉज यू आर नॉट माय टाइप,,,,,,,,,,मैं चलती हूँ बाय”
विक्रम कुछ कहता इस से पहले प्राची वहा से चली गयी और जाते जाते वह मिस्टर भरत का दिया बुके वही टेबल पर छोड़ गयी। विक्रम ने उस बुके को उठाया और फूलो को सूंघकर एक गहरी साँस ली और बड़बड़ाया,”एक दिन मैं इस बिजनेस रिलेशन को पर्सनल रिलेशन में बदलकर रहूंगा प्राची,,,,,,,,,,,!!!”
विक्रम ने वह बुके उठाया , बिल भरा और वहा से निकल गया।
देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
“ये सब क्या है भरत ? एक हफ्ते में कपनी से लाखो का माल एक्सपोर्ट हुआ है और पेमेंट 10 परसेंट भी नहीं,,,,,,,,,,ये सब बिल्स ड्यू क्यों है ? और ये मिस्टर चौधरी का बिल इस फाइल में क्या कर रहा है ? इसे तो मैंने पिछले महीने ही माल देने से मना कर दिया था,,,,,,,,भरत आखिर ये हो क्या रहा है तुम मुझे बताओगे ?”,देसाई सर ने फाइल में रखे बिल्स को चेक करके कहा
भरत का गला सूख गया क्योकि ये सब परमिशन उसी ने दी थी लेकिन मिस्टर देसाई के सामने वह भला अपनी गलती कैसे मान लेता इसलिए सर झुकाकर बहुत ही गंभीर स्वर में कहा,”माफ़ कीजियेगा सर लेकिन जबसे प्राची मैडम ने ये कम्पनी छोड़ी है तब से इस कम्पनी का कोई भी एम्प्लॉय मुझसे ठीक से पेश तक नहीं
आ रहा है
सबको लगता है मैंने इस कम्पनी में प्राची मैडम की जगह ले ली है बस इसलिए सब मुझसे नाराज है। लीगल टीम से लेकर अकाउंट्स टीम तक कोई भी सीधे मुँह मुझसे बात तक नहीं कर रहा सर ! सब अपनी मर्जी से काम कर रहे है और जब मैंने रोकने की कोशिश की तो सब धमकी देने लगे कि हम ये कम्पनी छोड़कर चले जायेंगे,,,,,,,,,,
सर मैं नहीं चाहता मेरी वजह से आपको और आपकी कम्पनी को कोई नुक्सान हो इसलिए मैं इस पोस्ट से रिजाइन देना चाहता हूँ ! मैं पहले की तरह आपका मैनेजर बनकर ही इस कम्पनी में रहने के लिए तैयार हूँ सर”
भरत की बाते सुनकर देसाई सर ने हैरानी से अपने हाथ में पकड़ी फाइल को साइड में रखा और कहा,”ये तुम कैसी बातें कर रहे हो भरत ? इतना सब हो गया और तुमने मुझे बताया क्यों नहीं ?”
“सर प्राची मैडम की वजह से आप पहले ही परेशान थे और इसलिए ऑफिस से छुट्टी लेकर बाहर गए थे ऐसे में आपको फोन करके ये सब बताकर मैं आपको और परेशान करना नहीं चाहता था सर,,,,,,,,,मैं अगर अपनी MD की पोस्ट से रिजाइन दे दूंगा तो सब ठीक हो जाएगा”,भरत ने कहा
मिस्टर देसाई उठे और भरत के सामने आकर कहा,”तुम्हे रिजाइन देने की जरूरत नहीं है भरत , तुम मेरे सबसे वफादार एम्प्लॉय हो किसी की बेफिजूल बातो की वजह से तुम खुद को जिम्मेदार मत समझो ! मैं कल सुबह ऑफिस आकर सबसे बात करता हूँ , तुम इस ऑफिस से नहीं जाओगे बल्कि जिसे तुम से परेशानी है वो चाहे तो ख़ुशी ख़ुशी यहाँ से जा सकते है,,,,,,,,,,,,,!!!!”
मिस्टर देसाई भरत की चिकनी चुपड़ी बातो में आ चुके थे। भरत ने जब ये सुना तो मन ही मन बहुत खुश हुआ लेकिन अपनी ख़ुशी अपने चेहरे पर जाहिर नहीं होने दी और आँखों में आँसू लाकर कहा,”सर ! आप मेरे लिए ये सब क्यों कर रहे है सर ?”
“क्योकि मुझे तुम पर पूरा भरोसा है भरत,,,,,,,,,,,मैं कल सुबह ऑफिस आकर तुम से मिलता हूँ”, मिस्टर देसाई ने जाते जाते भरत के कंधे पर हाथ रखकर कहा
मिस्टर देसाई के जाने के बाद भरत ने अपनी आँख के किनारे को अपनी ऊँगली से पोछा और आँसू को छिटककर कहा,”मुझे भी खुद पर पूरा भरोसा है देसाई क्योकि कल तक बाजी पलट चुकी होगी”
भरत मुस्कुराया और केबिन से बाहर निकल गया
केबिन से बाहर आकर भरत की नजर सामने से आते अपने चमचे चेतन पर पड़ी जिसके हाथ में बैग था। भरत के चेहरे के भाव तुरंत कठोर हो गए और उसने चेतन के पास आकर कहा,”तुम यहाँ क्यों चले आये ? मैंने कहा था ना पैसे मिलने के बाद मुझे फोन करना,,,,,,,,,,,,,,,,देसाई ने इस बैग के साथ अंदर आते तुम्हे देखा तो नहीं ?”
“नहीं सर वो तो पहले ही निकल गए थे और मैंने आपको फोन किया था लेकिन आपका फोन बंद आ रहा है सर”,चेतन ने कहा
भरत ने जेब से फोन निकालकर देखा तो पाया कि बैटरी कम होने की वजह से फोन बंद हो गया था। उसने फोन वापस जेब में रख लिया तो चेतन ने कहा,”सर इस बैग का क्या करना है ?”
भरत ने उसे अपने पीछे अपने केबिन में आने का इशारा किया और फिर अपनी टेबल का ड्रॉवर खोलकर उसमे से चाबी निकाली और चेतन को देकर कहा,”ये प्रवीण के केबिन की चाबी है , ये बैग उसके केबिन में छुपा दो,,,,,,,,,!!!”
“लेकिन सर वहा क्यों ?”,चेतन ने सवाल किया
भरत ने चेतन से बैग लिया उसे खोला और उसमे से नोटों की एक गड्डी निकालकर चेतन की तरफ बढाकर बैग बंद कर दिया और वापस उसे थमाकर कहा,”तुम्हे पैसे काम करने के मिलते है , सवाल करने के लिए नहीं समझे ?”
“समझ गया सर”,चेतन ने मुस्कुराते हुए नोटों की गड्डी को अपने जेब में रखा और बैग लेकर चला गया। कुछ देर बाद चेतन वापस आया और चाबी भरत को देकर वहा से चला गया।
भरत ने भी अपना बैग और कोट उठाया और ऑफिस से बाहर निकल गया। जाते जाते उसने गार्ड को 500 का नोट थमाया और ऑफिस बंद करने का इशारा करके आगे बढ़ गया। इसमें कोई संदेह नहीं था कि इस ऑफिस में हर कोई भरत के इशारो पर चल रहा था और ये भरत ने बहुत पहले से करना शुरू कर दिया था।
सिद्धार्थ का घर , सिरोही
“बस बस भैया यही रोक दीजिये”,सुरभि ने ऑटोवाले से कहा
ऑटोवाले ने ऑटो साइड में रोका तो सुरभि नीचे उतरी , अपने बैग से पैसे निकाले और ऑटोवाले को किराया देकर सिद्धार्थ के घर की तरफ बढ़ गयी। सुरभि का दिल धड़क रहा था और वह पहली बार थोड़ा डर भी रही थी।
खुद को शांत करने के लिए उसने मन ही मन खुद से कहा,”ओह्ह्ह सुरभि ! तुम्हे ऐसे बिना बताये सीधा उसके घर नहीं आना चाहिए , कही उसके मम्मी पापा ने फिर गलत समझ लिया तो ?”
सुरभि ने खुद से सवाल किया और फिर खुद ही खुद को जवाब देते हुए बोली,”हाह ! गलत समझते है तो समझे मैंने उस चिलगोजे को कितने फोन किये मैसेज किये लेकिन उसने तो मेरा फोन तक नहीं उठाया , पूछेगा मैं बिना बताये क्यों आयी तो कह दूंगी अपना फोन देखो पहले,,,,,,,,,,,,,हुंह”
कहते हुए सुरभि ने ललाट पर आयी लटों को फूंक मारकर कहा और आगे बढ़ गयी लेकिन जैसे ही सिद्धार्थ के घर के सामने आयी दरवाजे के बाहर लगा बड़ा सा ताला देखकर हैरान रह गयी और खुद में ही बड़बड़ायी,”यहाँ तो ताला लगा है , ये लोग कहा गए होंगे ?”
सुरभि ने इधर उधर देखा आस पास भी कोई दिखाई नहीं दिया। हैरान परेशान सी सुरभि जाने के लिए वापस पलटी तो नजर बगल वाले घर के दरवाजे पर चली गयी जहा सिद्धार्थ की वही पड़ोसन थी जिसने सुरभि को यहाँ देखकर गलत समझ लिया था। सुरभि ने उसे देखा और फिर अपने नाख़ून चबाते हुए खुद में ही बड़बड़ायी,”इस से पुछु या नहीं ? नहीं नहीं इस से पूछा तो ये उस दिन की तरह फिर मुझे गलत समझ लेगी। एक काम करती हूँ यहाँ से निकल ही जाती हूँ”
सुरभि जैसे ही जाने लगी पड़ोसन ने आवाज दी,”ए सुनो ! यहाँ आओ”
सुरभि का मुँह बन गया उसने अपना पैर पटका खुद को शांत किया और पलटकर पड़ोसन की तरफ आकर कहा,”जी कहिये”
“तुम वही हो ना जो उस रात सिद्धू के साथ घर आयी थी ?”,पड़ोसन ने पूछा
“जी,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने अपने दांत पीसकर कहा क्योकि वह मन ही मन ठान चुकी थी इसके बाद अगर पड़ोसन ने कुछ भी उलटा सीधा कहा तो वह उसे नहीं छोड़ेगी
“देखा मुझे याद है ! वैसे तुम यहाँ क्यों आयी हो ? ये तो लोग तो यहाँ नहीं है सगाई में गए है”,पड़ोसन ने कहा
“सगाई में ? किसकी सगाई ?”,सुरभि ने धड़कते दिल के साथ कहा
“अरे माथुर साहब के लड़के की सगाई और किसकी ? लगता है तुम्हे नहीं बुलाया,,,,,,,,,,,,हुंह ! हम तो पडोसी है लेकिन हमे भी कहा बुलाया है”,कहकर पड़ोसन ने मुँह बनाया और अंदर चली गयी
सुरभि ने सुना तो उसकी आँखों के सामने एक पल के लिए जैसे अँधेरा छा गया। माथुर साहब के लड़के की सगाई यानी सिद्धार्थ माथुर , सुरभि का सर चकराया , वह लड़खड़ाई और सम्हल गयी। उसने अपने सर से हाथ लगाया और वहा से आगे बढ़ गयी। अचानक से उसकी जिंदगी में ये क्या हुआ वह खुद नहीं समझ पायी। सुरभि चलकर एक दिवार के पास आयी , दिवार को हाथ लगाकर रुकी , अपने बैग से पानी की बोतल निकाली और एक साँस में सारा पानी पी गयी। उसे गले में कुछ चुभता हुआ महूसस हुआ ! उ
से समझ ही नहीं आया एकदम से ये क्या हुआ ? जिस सिद्धार्थ ने उसे जिंदगीभर इंतजार करने की बात कही वो आज सगाई कर रहा था वो भी बिना सुरभि को बताये। सुरभि को चुभन का अहसास हुआ उस ने खुद को सम्हाला , दो चार लम्बी गहरी सांसे ली लेकिन ऐसा करते हुए उसकी आँखों में आँसू भर आये। आखिर सिद्धार्थ ने उसके साथ ऐसा क्यों किया ?
सुरभि वहा से चलकर सड़क किनारे आयी और ऑटो रुकवाकर उसमे आ बैठी। ऑटोवाले ने पलटकर सुरभि को देखा और कहा,”कहा चलना है मैडम ?”
“चलिए भैया”,सुरभि ने खोये हुए स्वर में कहा
“ठीक है मैडम ! लेकिन जाना कहा है ?”,ऑटोवाले ने पूछा
“कही भी चलिए भैया बस यहाँ से दूर चलिए”,सुरभि ने रोआँसा होकर कहा और ये कहते हुए उसकी आँखों में फिर आँसू भर आये
Fiesta Beach Resort , गोवा
पृथ्वी और अवनि अपने अपने सामान के साथ रिसोर्ट पहुंचे। जयदीप ने पहले ही एक हफ्ते के लिए पृथ्वी और अवनि के नाम से पहले ही बुक करवा दिया था। रिसोर्ट का मालिक जयदीप का अच्छा दोस्त है इसलिए उसने अवनि और पृथ्वी को लेने के लिए एयरपोर्ट अपनी गाड़ी भी भेजी जिस से उन दोनों को आने में कोई परेशानी ना हो। रिसोर्ट पहुँचते पहुँचते सूरज ढल चुका था और रात हो चुकी थी।
गाडी रिसोर्ट के अंदर आकर रुकी। पृथ्वी और अवनि गाड़ी से नीचे उतरे और अंदर चले आये। सामने जयदीप का दोस्त एंथनी खड़ा था उसने आगे बढ़कर पृथ्वी से हाथ मिलाया और अवनि को नमस्ते किया।
“हेलो मिस्टर पृथ्वी ! आने में कोई तकलीफ तो नहीं हुई ?”,एंथनी ने गर्मजोशी से कहा
“नहीं मिस्टर एंथनी,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“जय ने मुझे बताया था कि आप लोग अपने हनीमून के लिए यहाँ आने वाले है सो मैंने अपने रिसोर्ट का सबसे बेस्ट रूम आपके लिए बुक किया है। प्लीज कम”,एंथनी ने कहा
पृथ्वी ने पलटकर गाडी की तरफ देखा जिसमे से ड्राइवर पृथ्वी और अवनि का सामान निकाल रहा था एंथनी ने देखा तो पृथ्वी से कहा,”आपका सामान आपके रूम में पहुंच जाएगा , आप लोग आईये”
पृथ्वी ने अवनि की तरफ अपना हाथ बढ़ाया और थामकर एंथनी के पीछे चल पड़ा। एंट्री गेट से होकर 200 मीटर का एक खूबसूरत सा रास्ता रिसोर्ट की तरफ जा रहा था , एंथनी उन दोनों के साथ उसी रस्ते से आगे बढ़ रहा था। एंथनी पृथ्वी को गोआ और यहाँ की नाईट लाइफ के बारे में बता रहा था वही पृथ्वी के साथ चलती अवनि आस पास की खूबसूरती और चमचमाती लाइट्स को देख रही थी।
एंथनी उन्हें लेकर एक बड़े से सुन्दर कमरे के सामने पहुंचा और दरवाजा खोलकर पृथ्वी और अवनि से कहा,”ये आपका कमरा है बी कम्फर्टेबल एंड एन्जॉय”
“थैंक्यू,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
ड्राइवर अवनि और पृथ्वी का सामान लेकर आ चुका था उसने सामान अंदर रखा और बाहर आया तो पृथ्वी ने उसे कुछ टिप दिया और ड्राइवर वहा से चला गया। अवनि वहा की खूबसूरती को निहार रही थी ये देखकर एंथनी ने कहा,”आपको हमारा ये रिसोर्ट पसंद आया मेम ?”
अवनि ने सुना तो एंथनी की तरफ देखा और कहा,”जी ! अच्छा है”
“ये तो कुछ भी नहीं है गोआ की असली खूबसूरती तो इसके बाहर है,,,,,,,,,,,!!”,अवनि से कहकर एंथनी पृथ्वी की तरफ पलटा और कहा,”ओह्ह्ह मिस्टर पृथ्वी याद आया ! यहा से कुछ ही दूर बागा बीच है एंड आज हमारे रिसोर्ट की तरफ से एक पार्टी ऑर्गनाइज हुई है। आप दोनों वहा जरूर आईये प्लीज”
“नाईट पार्टी ?”,पृथ्वी ने कहा क्योकि उसे तो पता था ये किस तरह की पार्टी है लेकिन अवनि के मन की बात जाने बिना वह एंथनी को हाँ कैसे कह देता ? पृथ्वी को सोच में डूबा देखकर एंथनी ने कहा,”ओह्ह्ह कम ऑन पृथ्वी ! यहाँ आकर इतना सोच रहे हो,,,,,,,,मैं दो घंटे बाद आप लोगो से वही मिलूंगा,,,,,,,,,,,!!!”
एंथनी ने कहा और वहा से चला गया। पृथ्वी अवनि की तरफ पलटा और मुस्कुराकर अपने दोनों हाथो से अवनि को अंदर चलने का इशारा किया।
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( अवनि और पृथ्वी के खिलाफ कौनसी चाल चलने वाला है विक्रम कपूर ? क्या मिस्टर देसाई समझ पाएंगे भरत की चाल ? क्या अवनि की तरह सुरभि भी बन गयी सिद्धार्थ के धोखे का शिकार ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 3” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Mujhe to laga tha ki Mr. Desai Bharat ko pakad lange lakin yaha to Bharat be pura khel he badal diya ..ab Mr. Desai k sare vafadar office chod kar chale jayenge aur bachega sirf Bharat aur fir yeh company uski…so bad… Prachi tum Avni se badla lane aur Prithvi ko pane k khavab dekho aur idhar tumhri company gai tumhre hath se…aur yeh Siddarth ne surbhi ko dhoka diya ya khud uske sath dhoka ho gaya…ho kich bhi but Surbhi ka to Dil tood diya aur galatfahmi ko diwar aa jaye dono k bech m…