Pasandida Aurat Season 2 – 86

Pasandida Aurat Season 2 – 86

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

जयदीप ने पृथ्वी के सामने देसाई ग्रुप को लेकर चिंता जताई लेकिन पृथ्वी इस बात में कोई दिलचस्पी ना दिखाकर वहा से चला गया। जयदीप अपनी कुर्सी पर आ बैठा। नीलेश का देसाई ग्रुप एंड कम्पनी से अचानक रिजाइन दे देना जयदीप को समझ नहीं आ रहा था। उन्होंने अपना लेपटॉप खोला और आज की टू डू लिस्ट चेक करने लगे।
जयदीप को आज की मीटिंग्स की फाइल देकर पृथ्वी अपने केबिन में चला आया।

जयदीप से तो उसने कह दिया कि उसे देसाई ग्रुप एंड कम्पनी में कोई दिलचस्पी नहीं है लेकिन नीलेश का नौकरी छोड़कर जाना उसे भी कही न कही खल रहा था। पृथ्वी ने कुर्सी खिसकाई और अपनी टेबल के सामने आ बैठा। उसने जेब से चाबी निकाली और अपना ड्रॉवर खोलकर अवनि की लिखी चिट और लेटर को सहेजकर रख दिया। पृथ्वी ने ड्रॉवर वापस लॉक किया और अंकित की तरफ पलटकर कहा,”देसाई ग्रुप एंड कम्पनी के साथ जो लास्ट मीटिंग थी उसका तुम्हारे पास कोई अपडेट आया ?”

“नहीं अभी तक तो नहीं , मुझे लगता है इस बार मिस्टर देसाई मौर्या ग्रुप के साथ डील साईन नहीं करने वाले”,अंकित ने बिना पृथ्वी की तरफ देखे लेपटॉप पर अपनी उंगलिया चलाते हुए कहा
“ऐसा नहीं होना चाहिए क्योकि मिस्टर देसाई ने खुद मुझसे इस मीटिंग को लेकर बातचीत की थी और उनकी लीगल टीम ने कहा था कि वे सभी डाक्यूमेंट्स चेक करके फाइल यहाँ भिजवा देंगे फिर अचानक उन्होंने इसे होल्ड क्यों किया ?”,पृथ्वी ने परेशानी भरे स्वर में कहा

अंकित पृथ्वी की तरफ पलटा और कहा,”पृथ्वी ! क्यों ना तुम जाकर एक बार मिस्टर देसाई से डायरेक्ट मिलो और उनसे इस बारे में बात कर लो ! जिस प्रोजेक्ट पर हमे उनकी डील चाहिए वो सारे प्रोजेक्ट मीटिंग उनकी बेटी प्राची अटेंड करती है और ये सब उसी के अंडर में है ,, तुम्हारे और प्राची के टर्म्स अच्छे नहीं है सो हो सकता है उसने जान बूझकर इन्हे होल्ड रखा हो,,,,,,,,,,,!!!”
अंकित की बात सुनकर पृथ्वी की आँखों के सामने एकदम से प्राची का चेहरा आ गया। जितना पृथ्वी प्राची को जानता था वह एक सरफिरी लड़की थी जो कब क्या कर बैठे कोई नहीं जानता था।

पृथ्वी सोच में पड़ गया ये देखकर अंकित ने कहा,”पृथ्वी ! हमारे पास ज्यादा वक्त नहीं है अगर ये डील कन्फर्म नहीं होती है तो फिर हमे बहुत नुकसान उठाना पड़ेगा और जयदीप सर को ये बात बिल्कुल पसंद नहीं आएगी,,,,,,,,,,,,आई थिंक तुम्हे प्राची देसाई से भी बात करनी चाहिए और उसे समझाना चाहिए कि पर्सनल और प्रोफेशनल चीजों को अलग रखे”

पृथ्वी ने सुना तो ख़ामोशी से अंकित को देखने लगा और फिर धीरे से हामी में गर्दन हिला दी। पृथ्वी जितना प्राची को खुद से दूर रखने की कोशिश कर रहा था किस्मत उसे बार बार उसके सामने ला रही थी। पृथ्वी सीनियर मैनेजर था और उसकी जिम्मेदारी बनती थी कि ऐसी किसी भी सिटुअशन को वह फेस करे। पृथ्वी ने अपने कुछ जरुरी काम निपटाए और फिर ऑफिस से निकल गया।

देसाई ग्रुप एंड कम्पनी ,वाशी
पृथ्वी देसाई के ऑफिस पंहुचा और रिसेप्शन पर मिस्टर देसाई के बारे में पूछा। मिस्टर देसाई अभी ऑफिस आये नहीं थे ये सुनकर पृथ्वी थोड़ा निराश हुआ वह वापस जाने के लिए पलट गया लेकिन अगले ही पल उसे कुछ याद आया और उसने वापस आकर लड़की से कहा,”अह्ह्ह क्या मिस प्राची देसाई ऑफिस में है ?”
“हाँ सर ! प्राची मेडम अपने केबिन में है”,रिसेप्शन पर बैठी लड़की ने कहा
“थैंक्यू”,पृथ्वी ने कहा और वहा से चला गया

प्राची के केबिन के सामने आकर पृथ्वी रुक गया और एक गहरी साँस लेकर दरवाजा खटखटा दिया। प्राची अंदर थी उसने कहा,”यस कम इन”
पृथ्वी ने दरवाजा खोला और अंदर आया। प्राची ने जब पृथ्वी को देखा तो हैरान रह गयी और मन ही मन ख़ुशी से भर उठी लेकिन उसने दोनों ही भाव अपने चेहरे पर आने नहीं दिए और अपनी टेबल पर पड़ा सामान एक बॉक्स में रखते हुए कहा,”तुम यहाँ ?”

“मिस प्राची मैं यहाँ मौर्या कम्पनी के सीनियर मैनेजर के तौर पर आया हूँ,,,,,,,,मुझे आपसे एक डील को लेकर जरुरी बात करनी है”,पृथ्वी ने सधे हुए स्वर में कहा
 प्राची तब तक टेबल पर रखा जरुरी सामान बॉक्स में डाल चुकी थी उसने बॉक्स को उठाया और दूसरी टेबल की तरफ जाते हुए कहा,”तुमने आने में देर कर दी पृथ्वी,,,,,,,,,,,मैं अब इस कम्पनी में प्रेसिडेंट नहीं रही , मैंने अपनी पोस्ट रिजाइन कर दी है”

पृथ्वी ने सुना तो उसने एक हल्का धक्का सा लगा। अब तक इस कम्पनी में मिस्टर देसाई के बाद प्राची ही कई बड़े फैसले ले रही थी और इसमें कोई शक नहीं था कि वह एक बेहतरीन प्रेजेंटेटर थी जिसकी तारीफ पृथ्वी ने खुद भी की थी। पृथ्वी ने हैरानी से प्राची को देखा और कहा,”मिस प्राची ! क्या आप ये सब इसलिए कर रही है कि आपको मिस्टर देसाई को परेशान करना है ?”

प्राची मुस्कुराई और पृथ्वी की तरफ आते हुए कहा,”पृथ्वी ! मैं भला उन्हें क्या परेशान करुँगी ? डेड ने खुद मुझसे इस कम्पनी के सारे एक्सेस छीन लिए है क्योकि उन्हें लगता है मैं तुम्हारे प्यार में पागल हो गयी हूँ और ऐसा ही चलता रहा तो मैं उनकी कम्पनी को बर्बाद कर दूंगी,,,,,,,,,,,,,अगर मुझे इस कम्पनी में रहना है तो मुझे तुम्हे भूलना होगा और ये मुमकिन नहीं है”

पृथ्वी ने देखा प्राची के सर से अभी तक प्यार का भूत उतरा नहीं है। प्राची को कुछ भी समझाना उसे अपना वक्त बर्बाद करना लगा इसलिए उसने कहा,”क्या आप मुझे बता सकती है इस कम्पनी का नया पप्रेसिडेंट कौन है ?”
“खुद जाकर देख लो वैसे भी अब इस कम्पनी पर मेरा कोई हक़ नहीं है,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,प्राची ने सधे हुए स्वर में कहा और साइड में चली गयी। पृथ्वी ने एक नजर प्राची को देखा और केबिन से बाहर निकल गया।

प्राची के केबिन से निकलकर पृथ्वी प्रेसिडेंट के केबिन की तरफ चला आया। पृथ्वी ने दरवाजा नॉक किया तो अंदर से आवाज आयी,”यस कम इन”
पृथ्वी अंदर चला आया। नया प्रेसिडेंट पृथ्वी की तरफ पीठ घुमाये कुर्सी पर बैठा था उसका चेहरा दिवार की तरफ था।

पृथ्वी उसकी शक्ल नहीं देख पाया लेकिन फिर भी उसने सहजता से कहा,”हेलो सर ! मैं पृथ्वी उपाधयाय , मौर्या ग्रुप एंड कम्पनी से सीनियर मैनेजर,,,,,,,,सर अभी कुछ दिन पहले ही देसाई ग्रुप के साथ एक डील फिक्स हुई थी और आपकी लीगल टीम ने कहा कि डाक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन के बाद कम्पनी ये डील कन्फर्म कर देंगी और फाइल मौर्या ग्रुप में भिजवा देंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ उलटा मेरी टीम को ये मेसेज मिला है कि आपकी कम्पनी ने इस डील को होल्ड कर दिया है। मिस प्राची ने खुद इसे अप्रूव किया था सर फिर इसे होल्ड करने की वजह क्या है ?”

पृथ्वी की बात सुनकर प्रेसिडेंट ने अपनी कुर्सी घुमाई और पृथ्वी को देखकर कठोर स्वर में कहा,”क्योकि इस डील को होल्ड मैंने किया है”
पृथ्वी ने जब प्रेसिडेंट की कुर्सी पर मिस्टर देसाई के मैनेजर भरत को देखा तो हैरान रह गया। पृथ्वी भरत को बहुत अच्छे से जानता था इसलिए उसे प्रेसिडेंट की कुर्सी पर बैठा देखकर पृथ्वी को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ। वह ख़ामोशी से मिस्टर भरत को देखता रहा।

पृथ्वी को खामोश देखकर भरत ने कहा,”मिस्टर उपाध्याय ! मिस प्राची प्रेसिडेंट थी लेकिन अब इस कम्पनी का प्रेसिडेंट मैं हूँ और मुझे आपकी डील को होल्ड करना चाहिए या नहीं ये पूछना मैं आपसे जरुरी नहीं समझता”
पृथ्वी की तन्द्रा टूटी और उसने कहा,”लेकिन आप उसकी वजह तो मुझे बता सकते है ना मिस्टर भरत”
“वजह साफ़ है पृथ्वी ! मैं मोर्या एंड ग्रुप कम्पनी जैसी छोटी कम्पनी को मुँह लगाना अपना वक्त बर्बाद करना समझता हूँ”,भरत ने घमंड भरे स्वर में कहा

पृथ्वी ने सुना तो उसकी मुट्ठी भिंच गयी लेकिन वह जहा खड़ा था वहा उसे होश से काम लेना था इसलिए उसने अपने गुस्से को निगलते हुए सहज भाव से कहा,”लेकिन आज से पहले तो ऐसा कुछ नहीं था,,,,,,,,,,मिस्टर देसाई ने कितने ही प्रोजेक्ट इसी कम्पनी के साथ साइन किये है जिसे आप छोटी कह रहे है”

“मिस्टर देसाई बेवकूफ है उन्हें पता ही नहीं बिजनेस कैसे और किसके साथ किया जाता है ? मिस्टर उपाध्याय देसाई ग्रुप मौर्या ग्रुप के साथ अपनी सारी रिसेंट डील केंसल करता है और इसके लिए मुझे ना देसाई की परमिशन की जरूरत है ना आपकी,,,,,,,,,,,,,सो नाउ यू गेट आउट”,कहकर भरत ने सिगरेट होंठो के बीच रखी और जला ली।
भरत का ये बदला रूप देखकर पृथ्वी हैरान था उसे डील केंसल होने की चिंता नहीं थी बल्कि भरत आखिर क्या करना चाहता था सोचकर पृथ्वी परेशान था।

उसने भरत को एक नजर देखा और कहा,”मिस्टर भरत ! जिस ऊंचाई पर अभी आप है वहा से आपको जमीन पर चलते लोग दिखाई नहीं देंगे लेकिन मैं वादा करता हूँ बहुत जल्द आपको सब दिखेगा और बहुत अच्छे से दिखेगा”
पृथ्वी की बातो में एक चेतावनी थी जिसे भरत नहीं समझ पाया और हँसते हुए कहा,”हाहाहा तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते पृथ्वी , आज मैं जिस पोजीशन पर हूँ वहा तक पहुंचने में तुम्हे सालों लग जायेंगे,,,,,,,,,

हाह ! बिजनेस की दुनिया में सिर्फ एक ही नाम चलेगा और वो होगा “भरत देशमुख” बहुत जल्द ये सब मेरा होगा और हाँ वैसे तुम चाहो तो मैं तुम्हे अपनी कम्पनी में गार्ड की जॉब दे सकता हूँ,,,,,,,,,,,वो करने से तुम्हारी सेल्फ रिस्पेक्ट तो कम नहीं होगी ना पृथ्वी,,,,,,,,!!!”

पृथ्वी ने देखा मिस्टर भरत इस वक्त प्रेसिडेंट बनने के घमंड में थे इसलिए पृथ्वी ने उनसे कुछ नहीं कहा और चुपचाप उनके केबिन से बाहर निकल गया। केबिन से निकलकर जाते हुए पृथ्वी के जहन में जयदीप की कही बात कौंधी “,”तुम्हे नहीं लगता देसाई ग्रुप एंड कम्पनी खतरे में है ,, कम्पनी के सबसे मजबूत और होनहार कैंडिडेट्स का रिजाइन करके जाना , तुम्हे नहीं लगता वहा कुछ गड़बड़ है ?”
पृथ्वी को धीरे धीरे समझ आ रहा था सुबह जयदीप परेशान क्यों था ? इन्ही सब बातो में उलझा पृथ्वी आगे बढ़ा जा रहा था कि अपने केबिन से निकलकर जाती प्राची से टकरा गया।

प्राची के हाथ में पकड़ा बॉक्स नीचे जा गिरा और उसमे भरा सामान बिखर गया। पृथ्वी ने देखा तो नीचे बैठा और सामान उठाकर बॉक्स में भरने लगा। ये देखकर प्राची भी उसकी मदद करने लगी। सामान उठाते हुए पृथ्वी के हाथ में एक फ्रेम लगा जिसमे उसकी तस्वीर थी। प्राची ने पृथ्वी के हाथ से वो फ्रेम छीना और बॉक्स में रखकर बॉक्स को उठाया और वहा से चली गयी। पृथ्वी ख़ामोशी से उसे जाते देखता रहा और फिर खुद भी वहा से चला गया।

देसाई ग्रुप से बाहर आकर पृथ्वी ने एक गहरी साँस ली और बड़बड़ाया,”ये भरत तो मेरी सोच से भी ज्यादा कमीना निकला , मिस्टर देसाई ने इसे प्रेसिडेंट बनाया और ये उन्हें ही बर्बाद करना चाहता है,,,,,,,,,,,,,मुझे मिस्टर देसाई को ये सब बताना होगा , एक मिनिट पृथ्वी मिस्टर देसाई तुम्हारी बात का  यकिन क्यों करेंगे ? तुम पहले ही उनका प्रपोजल ठुकरा चुके हो और तो और उनके सामने तुमने प्राची थप्पड़ भी मारा है,,,,,,अह्ह्ह्हह ! बहुत उलझन है”
पृथ्वी कुछ देर बाहर रुका और फिर ऑफिस के लिए निकल गया।

पृथ्वी के घरवाले पृथ्वी को माफ़ कर अवनि को अपनाने के लिए तैयार थे और सब आई यानि पृथ्वी की दादी के आने का इंतजार कर रहे थे ताकि सब मिलकर पृथ्वी और अवनि को घर ला सके। अवनि के साथ हुए बर्ताव से पृथ्वी सभी घरवालों से बहुत नाराज था उसका गुस्सा शांत होने तक सबने कुछ ना करना बेहतर समझा और सभी अपने अपने घर और कामो में व्यस्त रहे। अवनि दिनभर घर के काम और अपनी किताबो में व्यस्त रही।

शाम में उसने पृथ्वी के लिए स्पेशल राजस्थान की गट्टे की सब्जी और कढ़ी बनायीं। किचन का काम खत्म कर अवनि अपने कमरे में आयी और फ्रेश होकर तैयार होने लगी। आज से पहले वह कभी ऐसे तैयार नहीं हुई लेकिन अब उसे पृथ्वी के लिए सजना सवरना अच्छा लग रहा था। उसने चेहरे पर हल्का सा क्रीम पाउडर लगाया , आँखों में गहरा काजल , होंठो पर हलकी लिपस्टिक क्योकि पृथ्वी को गहरे रंग पसंद नहीं थे ,

उसने अपने बालों को से आगे के थोड़े बाल लिये और उन्हें सलीके से घुमाकर पीछे कलेचर में खोंस लिया , कानो में छोटे बुँदे पहने थे ,ललाट पर बिंदी और मांग में सिंदूर लगाकर अवनि ने एक नजर खुद को शीशे में देखा। आज उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। ये चमक श्रृंगार की नहीं बल्कि पृथ्वी के प्यार की थी जो अब अवनि भी महसूस करने लगी।

अवनि ने दुपट्टा उठाया अपने गले में डाला और कमरे से बाहर चली आयी। दिवार पर लगी घडी में समय देखा , पृथ्वी के आने का वक्त हो चुका था और अगले ही पल बेल बजी। बेल के बजने के साथ ही अवनि का दिल धड़का। अब उसे पृथ्वी से पहले से ज्यादा शर्म आने लगी थी , अब उसे ये डर था कि कही पृथ्वी उसकी आँखों में अपने लिए वो प्यार ना देख ले जो अवनि पिछले कुछ वक्त से महसूस कर रही थी।

अवनि ने आकर दरवाजा खोला सामने पृथ्वी खड़ा था। अवनि को देखकर पृथ्वी वही बाहर ही खड़ा रह गया। आज ऑफिस में बहुत काम था उस पर भरत से हुई मुलाकात ने दिनभर पृथ्वी को परेशान रखा लेकिन घर आकर जब उसने अवनि का चेहरा देखा तो वह अपनी उन सारी परेशानियों और थकान को भूल गया। अवनि ने देखा पृथ्वी बाहर ही खड़ा है तो उसने कहा,”पृथ्वी ! क्या हुआ , आप अंदर क्यों नहीं आ रहे ?”
“हहहह ! हा”,पृथ्वी की तंद्रा टूटी और उसने कहा

अवनि ने पृथ्वी के हाथ से टिफिन और बैग लिया और अंदर चली आयी। पृथ्वी भी अंदर आया , उसने अपनी शर्ट का ऊपरी एक बटन खोला और हाथो की स्लीवस को फोल्ड करते हुए वाशबेसिन की तरफ चला आया।

अवनि ने पृथ्वी का बैग कमरे में रखा और टिफिन किचन में रखकर पृथ्वी के लिए पानी ले आयी।  अवनि ने पानी लाकर टेबल पर रखा और तौलिया लेकर पृथ्वी के सामने आयी तो पृथ्वी ने जानबूझकर तौलिया नहीं लिया। वह झुका और अवनि का दुपट्टा लेकर उस से मुँह पोछने लगा। ऐसा करते हुए उसे कितना अच्छा लग रहा था ये तो बस वही जानता था वही पृथ्वी को ऐसे हक़ जताते देखकर अवनि को भी अच्छा लग रहा था। पृथ्वी ने मुँह पोछा और सोफे की  तरफ चला आया।

उसने पानी का गिलास उठाया और पीकर अवनि की तरफ देखा तो अवनि ने कहा,”आपको कुछ कहना है ?”
पृथ्वी ने ना में गर्दन हिला दी तो अवनि मुस्कुराई और कहा,”ठीक है आप फ्रेश हो जाईये तब तक मैं पूजा कर लेती हूँ,,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी कुछ कहता इस से पहले उसका फोन बजा वह अपने फ़ोन में आया मेल देखने लगा और अवनि हाथ धोकर मंदिर की तरफ बढ़ गयी।

अवनि ने अपनी पूजा की और देखा पृथ्वी ने कपडे नहीं बदले है बल्कि वह उसके बगल में खड़ा उसे पूजा करते देख रहा है तो अवनि ने आरती की प्लेट लेकर पृथ्वी की तरफ पलटी और आरती लेने का इशारा किया। पृथ्वी ने अवनि को देखते हुए दोनों हाथो से आरती ली और उन्हें अवनि के सर पर रख दिया। अवनि ने हैरानी से पृथ्वी को देखा तो पृथ्वी ने आगे बढ़कर अपने होंठो से अवनि के ललाट को छुआ और कहा,”मुझसे ज्यादा तुम्हे इसकी जरूरत है अवनि , अब डर लगता है कही मेरा अजीज प्यार तुम्हे किसी मुसीबत में ना डाल दे,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

अवनि ने सुना तो खामोश आँखों से पृथ्वी को देखने लगी। वह नहीं समझ पायी पृथ्वी ने उस से ये क्यों कहा बस वह एकटक उसे देखते रही और पृथ्वी उदास होकर वहा से चला गया।

( क्या प्राची ने हमेशा के लिए छोड़ दी है मिस्टर देसाई की कम्पनी या फिर ये है उसका और विक्रम का कोई प्लान ? प्रेजिडेंट बनने के बाद आखिर क्यों बदल गया भरत का रवैया ? अवनि को लेकर क्यों लगने लगा है पृथ्वी को डर ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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