Pasandida Aurat Season 2 – 81
Pasandida Aurat Season 2 – 81

शादी के बाद अवनि और पृथ्वी की ये पहली होली थी जिस पर पहले दोनों एक दूसरे से दूर थेऔर फिर एकदम से पास आ गए। अवनि को सबसे पहले रंग पृथ्वी लगाना चाहता था और महादेव ने उसकी सुन ली। अवनि को सबसे पहले रंग पृथ्वी ने लगाया और अवनि के रंग लगाने का अंदाज तो उस से भी निराला था। उसने सबसे पहले पृथ्वी के दोनों पैरो पर रंग लगाया। पृथ्वी ने जब ये देखा तो एकदम से भावुक हो गया। उसकी आँखों में आँसू भर आये और जैसे ही अवनि ने उसके पैरों पर रंग लगाया उसकी आँख से निकला आँसू सीधा अवनि की माँग के सिंदूर में जा गिरा।
पृथ्वी जानता था कि पैरों पर रंग लगाना समर्पण और सम्मान का भाव होता है और आज तो अवनि ने उसे अपनी नजरो में और ऊँचा उठा दिया था। शादी के बाद हमेशा पृथ्वी को “तुम” कहकर पुकारने वाली अवनि ने आज पहली बार उसे “आप” कहकर जो पुकारा था। पृथ्वी नम आँखों से अवनि को देखता रहा तो अवनि उठी और अपने हाथो में थोड़ा रंग लेकर पृथ्वी के हाथो के पिछले हिस्से पर लगाकर कहा,”आप सोच रहे होंगे मैंने आपके पैरों पर रंग क्यों लगाया ?
पृथ्वी आपको लेकर मेरे मन में जो सम्मान है वो शायद मैं कभी शब्दों में बया ना कर पाऊ इसलिए मैंने ये किया,,,,,,,,,हाँ पृथ्वी ! आप उस सम्मान के हक़दार है”
पृथ्वी ने सुना तो कुछ बोल नहीं पाया बस अवनि को देखता रहा। अवनि ने थोड़ा सा रंग और लिया और पृथ्वी के गालों पर लगाते हुए कहा,”अब तक आप एक अच्छे बेटे , अच्छे भाई और अच्छे दोस्त थे लेकिन आज आपने ये साबित कर दिया कि आप एक अच्छे पति भी है”
पृथ्वी ने सुना तो अपने होंठो को दबाया और दूसरी तरफ देखने लगा। ऐसा उसने इसलिए किया क्योकि वह रोना नहीं चाहता था। अवनि के मुँह से ये सब सुनने के लिए वह जैसे तरस सा गया था। अवनि ने देखा ये सुनकर पृथ्वी उस से नजरे चुरा रहा है तो वह धीरे से मुस्कुराई और थोड़ा सा रंग लेकर अपनी दाँयी हथेली पर लगाया और अपने हाथ की छाप पृथ्वी के सीने पर लगाकर कहा,”और मैं हमेशा यहाँ रहना पसंद करुँगी मिस्टर उपाध्याय आपकी अवनि बनकर”
पृथ्वी ने सुना तो अवनि की तरफ देखा और फिर अपने सीने पर छपे हाथ को , सफ़ेद शर्ट पर वो लाल रंग बहुत खिल रहा था। ऐसा था जैसे वो सफेद शर्ट ना होकर पृथ्वी का पाक साफ़ मन हो और वो लाल रंग अवनि का प्रेम हो। पृथ्वी कुछ नहीं बोला वह तो बस खुद को ये यकीन दिलाने की कोशिश कर रहा था कि ये जो कुछ हो रहा है वो सच है या वह फिर कोई सपना देख रहा है।
पृथ्वी को खामोश देखकर अवनि थोड़ा सा उसके करीब आयी अपनी ऐड़ियो को उठाया क्योकि पृथ्वी कद में उस से बड़ा था। उसने अपने होंठो से पृथ्वी के गाल के छुआ और कहा,”पहली होली मुबारक हो मिस्टर उपध्याय”
अवनि शरमा कर वहा से चली गयी लेकिन पृथ्वी बुत बना वही खड़ा रहा। पहली बार अवनि ने पृथ्वी के गाल पर किस किया था और पृथ्वी तो आज जैसे हवा में था। उसका दिल ख़ुशी से झूम रहा था , धड़कने सामान्य से तेज और चेहरा शर्म से लाल हुआ जा रहा था।
आँखों से मोहब्बत टपक रही थी और होंठो पर प्यारी सी मुस्कान थी। उसने अपने हाथ को अपने गाल से लगा लिया और मुस्कुराने लगा।
“सिर्फ चुम्मा दिया है उसने प्यार का इजहार नहीं किया जो इतना शरमा रहे हो”,एक जानी पहचानी आवाज आयी और पृथ्वी ने अपनी दाँयी तरफ देखा तो पाया नारियल पानी में स्ट्रॉ लगाकर पीता दिमाग उसे ही देख रहा है
“अरे शरमाये क्यों नहीं ? आज अवनि ने इसे पहली बार “आप” जो कहा और सोने पर सुहागा एक चुम्मा देकर ये भी जाता दिया कि वो भी प्यार करती है”,पृथ्वी के बाँयी तरफ से आवाज आयी तो पृथ्वी ने गर्दन घुमाकर देखा उसके बाँयी तरफ हवा में उड़ता दिल अपने हाथो में पकड़ी रंगो की थाली से होली के गुलाल उडाता हुआ चहक रहा है
“सोने पर सुहागा हो या चाँदी पर चमाटा सीधी बात ये है कि तुम्हे अब मुझसे काम लेना है। अवनि के एक आप कहने से पिघल नहीं जाना है। याद है न उसने तुम्हे कितना सताया है ,खुद से दूर रखा है और तो और तुम्हे बाहर सोफे पर सुलाया,,,,,,,,,,इसलिए पिघलना नहीं है”,दिमाग ने नारियल पानी पीना छोड़कर पृथ्वी से कड़क स्वर में कहा और अपनी बात खत्म कर वापस नारियल पानी पीने लगा
“ओह्ह्ह्हह ऐसा क्या ? तुम तो अपना दिमाग चलाओ ही मत ,नारियल पानी पी पी कर सड़ गया है। अवनि ने तुम्हे आप कहा , इतना सम्मान दिया ,यहाँ तक कि तुम्हे चुम्मा देकर ये भी जता दिया कि उसे भी तुम से प्यार है तो फिर तुम किसका इंतजार कर रहे हो ? जाओ और जाकर आज का दिन यादगार बनाओ उसके साथ,,,,,,,,,,,,,,!!!”,दिल ने अपने हाथ पर रंग लिया और फूंक मारकर हवा में उड़ाते हुए कहा
दिमाग ने सुना तो नारियल में से स्ट्रॉ निकालकर फेंकी और कहा,”ए पृथ्वी तुम अपने इस ठरकी दिल की बातो में तो बिल्कुल मत आना , अरे आप बोला चुम्मा दिया तो इसका मतलब ये है कि जाकर टूट पड़ो”
“छी छी कैसी बाते कर रहे हो तुम ?”,पृथ्वी ने एकदम से कहा
“ऐसी ही बातें करता है ये तभी तो इसकी और मेरी बनती नहीं है,,,,,,,,,,,खुद ऐसी फिजूल बातें करता है और मुझे ठरकी कहता है ,, अरे वो प्यार है मेरा लेकिन कम्प्यूटर की दुकान में काम करने वाले क्या जाने प्यार क्या होता है ?”,दिल ने रंगो की प्लेट को फेंककर गुस्से से कहा
“बकवास बंद करो ! मेरे बिना तुम्हारा ये पृथ्वी बेकार है”,दिमाग ने घमंड भरे स्वर में कहा
“हाह ! तुम नहीं भी होते तब भी अवनि इस प्यार कर ही लेती”,दिल ने भी हाथो को कमर पर रखकर कहा
बेचारा पृथ्वी आज इतना अच्छा दिन था और यहाँ भी उसके दिल और दिमाग ने उसे परेशान करके रख दिया। वह कभी दाँये तो कभी बाँये देखता।
“अपनी बकवास बंद करो”,दिमाग ने कहा
“तुम अपनी बकवास बंद करो और पृथ्वी को अवनि से अपने प्यार का इजहार करने दो”,दिल ने कहा
“हाँ एक ही लड़की से अपने प्यार का कितनी बार इजहार करेगा ये ?”,दिमाग ने हताश होकर कहा
“जिंदगीभर,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी के मुँह से एकदम से निकला और ये सुनकर दिल ने अपने नाखुनो पर फूंक मारकर मुस्कुराते हुए दिमाग को लुक दिया और दिमाग गुस्से से लाल होकर वही फट गया और उसके साथ दिल भी गायब हो गया।
पृथ्वी खोया हुआ सा वही खड़ा रहा। अवनि किचन में किसी काम से गयी थी वापस आयी तो देखा पृथ्वी वही खड़ा है तो उसने पृथ्वी को छेड़ने के लिए थोड़ा ऊँचे स्वर में कहा,”मैंने तो सुना था कि लोगो को होली खेलने का बड़ा शौक है लेकिन यहाँ तो लोगो ने एक चुटकी रंग में ही हार मान ली”
अवनि के शब्द पृथ्वी के कानों में पड़े तो पृथ्वी पलटा और कहा,”अभी तुमने यहाँ की होली देखी नहीं है , ऐसा रंग लगेगा हफ्तों तक छुड़ा नहीं पाओगी”
“रंग तो तब छुड़ाओगे न पृथ्वी जब मुझे रंग लगा पाओगे”,अवनि ने शरारत भरे स्वर में कहा तो पृथ्वी ने टेबल पर रखी प्लेट से दो मुट्ठी रंग उठाया और कहा,”ठीक है फिर बचा लीजिये खुद को,,,,,,,,,!!!”
अवनि ने अपने दुपट्टे को कंधे के एक साइड पर रखा और बाकि दोनों सिरों को कमर के दूसरी तरफ बांधकर भागने की तैयारी में थी। पृथ्वी जैसे ही अवनि की तरफ आया अवनि उस से बचते हुए आगे आगे भागने लगी। पुरे घर में दोनों भाग रहे थे। भागते हुए पृथ्वी ने जैसे ही अवनि को रंग लगाने के लिए हाथ बढ़ाया अवनि साइड से निकल गयी और पृथ्वी सोफे में उलझकर गिरते गिरते बचा।
ये देखकर अवनि अपना हाथ मुँह से लगाकर हसने लगी और पृथ्वी को ठेंगा दिखा दिया। अब पृथ्वी को कोई चेलेंज अरे और पृथ्वी हार मान ले ऐसा थोड़े हो सकता था वह उठा और फिर अवनि के पीछे , इस बार हाथ बढ़ाया तो बालकनी के परदे में उलझ गया और इस बार भी अवनि उस पर खूब हंसी। पृथ्वी ने खुद को पर्दे से दूर किया तो अवनि ने अपने हाथो को आपस में झाड़कर कहा,”रहने दो पृथ्वी ये आपके बस की बात नहीं है,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने ललाट पर बिखरे बालों को फूंक मारकर साइड किया और अवनि की तरफ आया
इस बार पृथ्वी का इरादा मजबूत था जैसे ही अवनि भागने लगी पृथ्वी ने उसकी कलाई पकड़कर उसे रोक लिया और अपनी तरफ खींचा। पृथ्वी अवनि के पीछे खड़ा था उसका एक हाथ अवनि के पेट से होकर कमर को घेरे था। पृथ्वी के इतना करीब होना अवनि अवनि की धड़कने बढ़ा गया लेकिन उसने अपनी बेचैनी और घबराहट को अपने चेहरे पर आने नहीं दिया और ख़ामोशी से खड़ी रही।
पृथ्वी ने दूसरे हाथ की मुट्ठी को खोला और उसमे भरे रंग को अवनि के ललाट से लेकर बाँये गाल से होते हुए गर्दन पर लगा दिया और वही दूसरे हाथ जो पेट से होकर कमर तक था उस से रंग लगाते हुए अवनि की कमर नाप दी। अवनि जो कुछ देर पहले तक पृथ्वी को चिढ़ा रही थी अब घबराई ,संकुचाई सी उसकी बाँहो में थी। अवनि के पीछे खड़े पृथ्वी को ना आज कोई डर था ही कोई झिझक और ही शर्म लेकिन अवनि को अब शर्म आने लगी थी।
वह वहा से जाने के लिए जैसे ही आगे बढ़ी पृथ्वी ने फिर उसका हाथ पकड़कर उसे रोक लिया और अपनी तरफ खींचकर अवनि की पीठ एंट्री गेट की दिवार से लगा दी। अब अवनि पृथ्वी के बिल्कुल सामने थी। अब वह ना वहा से जा सकती थी ना ही पृथ्वी से नजरे चुरा सकती थी। पृथ्वी को चैलेंज उसी ने किया था और अब उसे ही पृथ्वी से नजरे मिलाने में शर्म आ रही थी। पृथ्वी के हाथो में अभी भी कुछ रंग बचा था इसलिए वह अवनि के थोड़ा पास आया और अवनि के दाँये गाल पर भी रंग लगा दिया।
एक तो होली का रंग उस पर शर्म का रंग दोनों मिलकर अवनि को और खूबसूरत बना रहे थे। उसके गुंथे हुए बालों से छनती कुछ लटें उसके गालों पर झूलने लगी। ये देखकर पृथ्वी ने बड़े प्यार से उन्हें अपनी ऊँगली से साइड किया और कहा,”वैसे तो तुम मेरे प्यार के रंग में पूरा रंग चुकी हो बस एक जगह रंग लगाना बाकि है”
अवनि ने सुना तो धीरे से अपनी गर्दन उचकाई पृथ्वी ने अवनि की ठुड्डी को थोड़ा ऊपर किया और अपने होंठो को जैसे ही अवनि के होंठो की तरफ बढ़ाया अवनि ने अवनि आँखे बंद कर ली।
उसका दिल जोरो से धड़क रहा था। पृथ्वी के होंठो अवनि के होंठो को छू पाते इस से पहले ही डोरबेल बजी और पृथ्वी रुक गया। अवनि ने अपनी आँखे खोली और देखा पृथ्वी और उसके होंठो के बीच बहुत कम फ़ासला है जिस से वह उसकी गर्म साँसो को महसूस कर रही थी।
डोरबेल फिर बजी और पृथ्वी को अवनि से दूर हटना पड़ा। अवनि ने राहत की साँस ली और अपनी आँखे बंद कर सर पीछे दिवार से लगा लिया।
डोरबेल दो बार बजी और फिर बजती ही चली गयी। पृथ्वी का स्पेशल मोमेंट इस डोरबेल ने पहले ही खराब कर दिया था। पृथ्वी ने आकर दरवाजा खोला तो देखा सामने नकुल , रिया , लक्षित और मोहित खड़ा है और सब के चेहरो और कपड़ो पर रंग लगा है।
“तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो ? जाओ मेरा आज होली खेलने का मूड नहीं है”,पृथ्वी ने कहा
“अरे तुम्हारे साथ खेलना भी कौन चाहता है ,हम लोग तो भाभी को रंग लगाने आये है”,कहते हुए नकुल ने पृथ्वी को अंदर धकियाकर साइड किया और सबके साथ अंदर चला आया। अवनि उन लोगो के पास चली आयी लेकिन अवनि को रंग लगा देखकर नकुल ने कहा,”अरे ये क्या भाभी ! आपको किसने रंग लगा दिया ? आज तो आपको सब से पहले हम लोग रंग लगाने वाले थे”
“मेरे होते ?”,पृथ्वी ने अकड़कर कहा
“ओह्ह्ह्ह तो दादा ने लगाया है,,,,,,,,,,,कोई बात नहीं हम लोग अब लगा देते है ,लगा सकते है न ?”,लक्षित ने पूछा
अवनि ने मुस्कुराकर लक्षित को देखा और हामी में गर्दन हिला दी। लक्षित ने पहले अवनि के दोनों हाथो पर रंग लगाया और फिर थोड़ा सा रंग गालों पर लगाकर पीछे हट गया। अब लक्षित अवनि से छोटा था रिश्ते में भी और उम्र में भी तो उसने उसे खूब सारा रंग लगाया। नकुल ने भी अवनि पृथ्वी की तरफ देखकर अवनि को रंग लगाया और फिर उसे इशारो इशारो में छेड़ा।
पृथ्वी जो कि अवनि को लेकर थोड़ा पजेसिव भी था उसने नकुल को अवनि से दूर किया और कहा,”अरे भाई लग गया ना,,,,,,,,,,इतना बहुत है ,सेंसेटिव स्किन है उसकी रेशेज हो जायेंगे”
नकुल ने पृथ्वी के पेट में कोहनी मारी और कहा,”हाँ हाँ मेरे लगाने से रेशेज हो जायेंगे और तुमने जो लगाया वो , वैसे रंग ही लगाया या कुछ और भी,,,,,,,,,,,,,हम्म्म हम्म”
आखिर कुछ शब्द नकुल ने शरारत से दबे स्वर में कहे तो पृथ्वी ने अपनी गर्दन खुजाते हुए दबे स्वर में कहा,”कुछ और तुम लोगो ने करने कहा दिया,,,,,,,,,,,!!!”
नकुल ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी की तरफ देखा और पृथ्वी ने बहाना बनाकर कहा,”अह्ह्ह्ह तुम सब बैठो मैं तुम्हारे लिए कुछ पीने को लेकर आया”
“आप बैठिये मैं लेकर आती हूँ”,अवनि ने कहा कोई अब तक सब उसे रंग लगा चुके थे। रिया अवनि की मदद करने उसके साथ चली गयी बचे नकुल , मोहित और लक्षित तो वो तीनो पृथ्वी को छेड़ने लगे और नकुल ने कहा,”क्या बात है “आप” हम्म्म्म पृथ्वी बाबू”
“अरे वहिनी का प्यार तो मैंने कल ही देख लिया था नकुल भैया , भाभी ने अपने हाथ से इनके लिए टिफिन जो भेजा था”,मोहित ने कहा
“हाँ और साथ में लेटर भी,,,,,,,,,,,!!!”,लक्षित ने कहा
“अरे क्या है यार छोडो मुझे”,पृथ्वी कहता रहा लेकिन तीनो उसे ऐसी बाते करके तंग करते रहे और पृथ्वी का चेहरा शर्म से लाल होता रहा।
हिमांशु का घर , पनवेल
नीलम भुआ को छोड़कर सभी घरवाले उदास और खामोश हॉल में बैठे थे। नीलम भुआ ने अवनि के साथ जो बर्ताव किया वो जानकर सबको अवनि के लिए बुरा लग रहा था। बड़े पापा और चाचा ने तो अवनि को कबका अपना लिया था और रात होते होते बाकि सब भी अवनि की सादगी और अपनेपन से मान चुके थे। पृथ्वी का आना और अवनि को अपने साथ ले जाना सभी को बुरा लग रहा था। उन्होंने अवनि के साथ साथ पृथ्वी का भी दिल दुखाया था जिसका उन्हें अब मलाल था।
सभी बैठे थे तभी बड़े पापा ने कहा,”अभी पृथ्वी गुस्से में है एक बार उसका गुस्सा ठंडा हो जाये इसके बाद मैं खुद उस से बात करूंगा और नीलम से भी बस आप में से कोई भी रवि और लता के सामने ये सब का जिक्र मत करना”
“किस बात का जिक्र दादा ?”,रवि जी ने लता के साथ अंदर आते हुए कहा
रवि जी और लता को देखकर सबके चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये लेकिन अगले ही पल बड़ी मम्मी ने बात सम्हाल ली और कहा,”अरे तुम दोनों खाली हाथ चले आये रंग कहा है ?”
“रंग ? मुझे लगा प्रोग्राम आपके यहाँ है तो रंग यहाँ मिलेगा लेकिन यहाँ तो सन्नाटा है। कुछ हुआ है क्या ?”,रवि जी ने सबको उदास देखकर पूछा
“अरे नहीं नहीं रवि होना क्या है सब में बहस चल रही है कि इस होली कोई भांग नहीं पियेगा बस उसी का जिक्र हो रहा था”,बड़े पापा ने कहा
रवि जी उनके बगल में आ बैठे और कहा,”दादा हर साल की तरह होली भी खेली जाएगी और भांग भी बटेगी ,अरे भांग के बिना कैसी होली ? वैसे हमारी बहू,,,,,,,,,,,,!!”
कहते हुए रवि ने लता को देखा और अगली ही पल अपने शब्द बदल दिए और कहा,”अवनि कही नजर नहीं आ रही,,,,,,,,,अंदर है क्या ?”
रवि जी के मुँह से अवनि का नाम सुनकर सब एक दूसरे को देखने लगे क्योकि पृथ्वी का गुस्सा तो सब पहले ही देख चुके थे अब अगर रवि जी को पता चलेगा तो उनका गुस्सा कैसा होगा ये कोई नहीं जानता था।
( क्या अवनि कर चुकी है बिना कहे पृथ्वी से अपने प्यार का इजहार ? क्या इस होली के बाद और गहरा हो जायेंगा अवनि और पृथ्वी के बीच रिश्ता ? क्या घरवाले बताएँगे रवि जी को अवनि के चले जाने की असल वजह ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Prithvi ke mummy papa ko bhi sari sacchai pata honi chahiye kyuki bua ne bohot jyada galat kiya hai avni ke sath
Pyar ka izhar to Avni zarur karengi Prithvi se…abhi to iqrar kiya usne…lakin Avni ka yeh iqrar bhi bahut achcha tha…jisme pyar tha, saamaan tha aur tha haq…jo Avni ne Prithvi ko diya tha ..pyar jatane ka… bechara Prithvi Avni ko kiss krne wala tha, aa gaye kabaab m haddi🤭 koi nhi yeh bhi inn dono ka special moment hai…jo khass moke pe hoga…abhi to Prithvi ki jalan achchi lag rhi hai… idhar Ravi ji abhi to kuchh nhi kar rhe hai… Avni k sath behave ki baat pta chalegi to unko bhi dukh hoga.