Pasandida Aurat Season 2 – 79
Pasandida Aurat Season 2 – 79

नीलम भुआ ने साक्षी से अवनि को लेकर झूठ कहा और वहा से भेज दिया। वही अवनि बेचारी पीछे गैलरी में अकेली बर्तन धोती रही उसे तो पता भी नहीं था उसकी पीठ पीछे क्या हो रहा है ? नीलम भुआ ने सारा खाना पैक किया और किचन से हटा दिया और वहा से चली गयी। बर्तन धोते धोते अवनि को रात के 11 बज चुके थे। वह सब काम निपटा कर अंदर आयी तो देखा हॉल में कोई नहीं है बल्कि सब सोने जा चुके है। सब कमरों के दरवाजे बंद थे ये देखकर अवनि को थोड़ा दुःख भी हुआ और हैरानी भी हुई।
उसे प्यास लगी थी इसलिए वह किचन में चली आयी और फ्रीज से पानी की बोतल निकालकर पानी पीने लगी। अवनि ने महसूस किया कि उसे बहुत तेज प्यास लगी थी। प्यास के साथ ही अवनि को भूख का भी अहसास हुआ वह अपने लिए खाना लेने लगी तो देखा सारे बर्तन खाली है। मायूस होकर अवनि ने खाली प्लेट वापस प्लेटफॉर्म पर रख दिया और जैसे ही जाने के लिए पलटी अपने सामने खड़ी नीलम भुआ को देखकर ठिठकी और कहा,”सब लोग कहा गए भुआजी ?”
“सब खाना खाकर सोने चले गए ,अब बैठकर तुम्हारा इंतजार थोड़े करेंगे। तुम भी खाना खा लो और सो जाओ”,नीलम भुआ ने उखड़े स्वर में कहा और पानी आ बोतल लेने फ्रीज की तरफ बढ़ गयी
“शायद खाना खत्म हो गया है”,अवनि ने धीरे से कहा
“खत्म हो गया ? अरे तुम्हे क्या अंदाजा नहीं है 10-15 लोगो के लिए कितना खाना बनता है , ऐसे तो कैसे घर सम्हाल पाओगी तुम,,,,,,,,,,खैर वहा हॉटपॉट रखा है उसमे देख लो शायद तुम्हारे खाने के लिए कुछ बचा हो”,नीलम भुआ ने कहा
अवनि ने हॉटपॉट खोलकर देखा उसमे दोपहर की बची दो रोटियां रखी थी जो कि लगभग ठंडी और हलकी कड़क हो चुकी थी। अवनि ख़ामोशी से उन्हें देखती रही तो नीलम भुआ ने कहा,”अब खाना तो है नहीं तो क्यों न तुम्हे इन्हे खाकर ही अपना पेट भर लो ,वरना घर जाकर पृथ्वी से कहोगी कि यहाँ तुम्हे खाने को नहीं मिला”
अवनि इस वक्त बहुत थकी हुई और मायूस थी इसलिए उसने नीलम भुआ को कोई जवाब नहीं दिया और चुपचाप एक रोटी प्लेट में रख ली। ये देखकर नीलम भुआ मुस्कुराई और प्लेटफॉर्म पर रहे अचार के डिब्बे को उठाकर उसमे से थोड़ा अचार निकालकर प्लेट में रखते हुए कहा,”अब रूखी रोटी तो भला क्या ही खाओगी। चलो फटाफट खाओ इसे फिर तुम्हे तुम्हारे सोने की जगह बता देती हूँ,,,,,,,,,,,,,,,,,ह्ह्हह्ह्ह्ह वैसे भी मुझे बहुत नींद आ रही है”
अवनि ने सुना तो प्लेट लेकर साइड में आ बैठी और खाने लगी। अवनि ने पहला निवाला जैसे ही मुँह में रखा उसकी आँखों में आँसू भर आये लेकिन अवनि ने उन्हें अपनी आँखो में ही रोक लिया और खाने लगी। जैसे तैसे अवनि ने उसे खाया और फिर प्लेट धोकर रख दी।
नीलम भुआ उसे अपने साथ लेकर हॉल से लगकर बनी बालकनी में आयी और कहा,”बाकि सब तो अपने अपने कमरों में सोये है और यहाँ कोई एक्स्ट्रा कमरा भी नहीं है तो आज रात तुम्हे यही सोना पड़ेगा,,,,,,,,,यहाँ सोने से तुम्हारे इज्जत घट तो नहीं जाएगी ना अवनि ? अह्ह्ह्ह मेरा मतलब अर्श से सीधा फर्श पर जो आ गयी हो तुम,,,,,,,,!!”
“मैं सो जाउंगी”,अवनि ने बिना किसी भाव के सामने देखकर कहा जहा बालकनी में बस एक चटाई बिछी थी और उस पर एक तकिया रखा था।
नीलम भुआ को लगा यहाँ आकर अवनि हार मान लेगी लेकिन अवनि ने यहाँ भी उन्हें गलत साबित कर दिया। नीलम भुआ ने मुँह बनाया और कहा,”वैसे तुम्हारी औकात के हिसाब से ये बिस्तर सही है,,,,,,,,,,,,गुड नाईट अवनि सुबह मिलते है”
अवनि ने सुना तो उसकी मुट्ठी भिंच गयी लेकिन इस वक्त वह नीलम भुआ से कुछ कहकर तमाशा करना नहीं चाहती थी। नीलम भुआ वहा से चली गयी। अवनि बालकनी में आयी तकिया उठाकर साइड में रखा और वहा आ बैठी। बाहर से आती ठंडी हवा से उसे थोड़ी राहत मिली। वह बालकनी से पीठ लगाकर बैठी थी ,उसने घुटनो को मोड़कर उन्हें अपनी बाँहो में समेट रखा था। अवनि का मन भारी होने लगा , उसने गाल घुटनो पर टिका लिया और आँखों में भरे आँसू बहने लगे। आज से पहले वह इतना अपमानित कभी नहीं हुई थी।
अवनि पृथ्वी और उसके परिवार वालो के बीच की दूरिया कम करना चाहती थी लेकिन बदले में उसे इतना जलील होना पड़ेगा उसने कभी सोचा नहीं था। अवनि फैसला नहीं कर पा रही थी कि क्या सही है और क्या गलत ? वह किस पर यकीन करे और किस पर नहीं , नीलम भुआ तो जैसे हाथ धोकर उसके पीछे पड़ गयी थी और बात बात पर उसे जलील कर रही थी और अवनि बस इसलिए चुप थी क्योकि ये पृथ्वी के अपने थे।
अवनि ये सब सोच ही रही थी कि तभी उसका फोन बजा। अवनि ने अपने फोन की तरफ देखा स्क्रीन पर “मेरा पृथ्वी” नाम देखकर अवनि की आँखों से आँसू और ज्यादा बहने लगे और चेहरे पर एक दर्द उभर आया। फोन बजता देखकर अवनि ने जल्दी से अपने आँसू पोछे और एक गहरी साँस लेकर फोन उठाया और कहा,”हेलो,,,,,,,,,,,!!!”
“अवनि ! मैंने तुम्हे फोन करके डिस्टर्ब तो नहीं किया न ?”,पृथ्वी ने पूछा
“नहीं”,अवनि ने कहा
“आज तो तुम सबके साथ बहुत बिजी रही होगी न,,,,,,,,,,,,सबने तुमसे अच्छे से बात की न अवनि , किसी ने कुछ ऐसा तो नहीं कहा ना जिस से तुम्हारा दिल दुखे ?”,पृथ्वी ने प्यार से पूछा
“नहीं ! यहाँ सब बहुत अच्छे है पृथ्वी , सबने मुझसे बहुत बातें की , सब बहुत अच्छे से पेश आये ,, मुझे कुछ काम करने ही नहीं दे रहे थे सब ,, अभी थोड़ी देर पहले ही सब सोने गए है”,अवनि ने अपना दिल मजबूत करके पृथ्वी से झूठ बोला
“चलो शुक्र है ! सबने तुमसे बात तो की,,,,,,,,,,,कम से कम मुझसे जो नाराजगी है वो सबने तुम से नहीं जताई,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“तुमसे भी कोई नाराज नहीं है पृथ्वी,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
“अच्छा ये बताओ तुमने खाना खाया न ?”,पृथ्वी ने एकदम से पूछा क्योकि ना जाने क्यों उसे अवनि ठीक नहीं लग रही थी
खाने के नाम से अवनि की आँखों में फिर नमी उभर आयी लेकिन एक बार फिर उसने अपना दिल मजबूत करके कहा,’हाँ खाया न ! सबके साथ ही खाया था ,,आलू पूरी था , खीर , हलवा , कितनी सारी मिठाईया,,,,,,,,,,मैंने तो इतना सब खा लिया कि अब ठीक से साँस तक नहीं आ रहा”
अवनि की बात सुनकर पृथ्वी को चुभन का अहसास हुआ। वह कुछ देर खामोश रहा और कहा,”अवनि ! तुम्हे तो ठीक से झूठ तक बोलना नहीं आता”
अवनि ने सुना तो तड़पकर अपनी आँखे बंद कर ली और आँखों में भरे आँसू गालों पर बह गए। उसे से दूर होकर भी पृथ्वी को उसकी तकलीफ का अहसास था ये जानकर अवनि का दिल किया अभी पृथ्वी उसके सामने हो और वह उसके सीने से लगकर रो दे।
अवनि को खामोश पाकर पृथ्वी ने कहा,”कल सुबह मैं तुम्हे लेने आ रहा हूँ , मैं अभी आ जाता लेकिन मैं उन सबको परेशान करना नहीं चाहता”
अवनि ने सुना तो अपने आँसू पोछे और कहा,”नहीं पृथ्वी ! तुम गलत समझ रहे हो ,मैं यहाँ ठीक हूँ और बस सिर्फ एक दिन की बात है,,,,,,तुम यहाँ मत आओ”
“बेटा ! मैं पूछ नहीं रहा बता रहा हूँ , कल सुबह मैं तुम्हे लेने आ रहा हूँ , एक दिन तो क्या कल सुबह के बाद मैं तुम्हे एक मिनिट वहा नहीं छोड़ने वाला,,,,,,,,,अभी तुम आराम करो मैं कल आता हूँ”,पृथ्वी ने थोड़ा कठोरता से कहा
अवनि ने कुछ नहीं कहा और दूसरी तरफ से पृथ्वी ने फोन काट दिया। अवनि ने फोन साइड में रखा और अपनेआप में सिमटकर चटाई पर लेट गयी। थकान की वजह से नींद उसकी आँखों में थी लेकिन जमीन पर बिछी चटाई पर सोने में उसे बहुत दिक्कत हो रही थी उस पर बालकनी में बाहर से आते मच्छर काट रहे थे। जैसे तैसे अवनि की आँख लगी और वह सो गयी।
आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
अवनि से बात करने के बाद पृथ्वी का मन बैचैन हो गया। उसने फोन साइड में रखा और कमरे से बाहर चला आया। उसने किचन से ठंडे पानी का बोतल लिया और बालकनी में चला आया। आसमान पूरा साफ था और आधा चाँद उस पर चमक रहा था। आस पास कुछ सितारे भी चमक रहे थे। पृथ्वी ने बोतल का ढक्कन खोलकर पानी पीया और चाँद को देखने लगा। अवनि से बात करने के बाद पृथ्वी को ना जाने क्यों लगने लगा जैसे वहा कुछ ठीक नहीं है।
उसे अवनि के पास जाना था लेकिन इतनी रात में वहा जाकर सबको परेशान करना नहीं चाहता था इसलिए सुबह का इंतजार करने लगा। ये अवनि के लिए पृथ्वी का प्यार ही था जो रह रह कर उसे अहसास दिला रहा था कि अवनि उदास है।
देसाई मेंशनस , मुंबई
मिस्टर देसाई ने प्राची को समझाने की कोशिश की लेकिन इस वक्त उनकी हर कोशिश बेकार थी। प्राची एक ऐसी जिद कर बैठी थी जिसमे ना जाने कितने ही लोगो की जिंदगी बर्बाद होने वाली थी। थककर मिस्टर देसाई अपने कमरे में चले गए। प्राची भी हॉल में रखे सोफे पर आ बैठी। इस झगडे और बहस के बाद ना मिस्टर देसाई ने कुछ खाया ना ही प्राची ने खाना खाया। घर के नौकर ने जब प्राची से खाने का पूछा तो प्राची उस पर भी चिल्ला उठी और वह वहा से चला गया।
सोफे पर पीछे सर झुकाये प्राची खुली आँखों से हॉल में लगे झूमर को घूरने लगी। उसके जहन में इस वक्त बहुत कुछ चल रहा था जिसका अंजाम क्या होगा ये कोई नहीं जानता था खुद प्राची भी नहीं,,,,,,,,,,,,,,,,!!”
देर रात प्राची उठी , उसने की होल्डर से गाडी की चाबी ली और घर से निकल गयी। घडी इस वक्त रात के 11 बजा रही थी लेकिन प्राची को वक्त की कोई फ़िक्र नहीं थी। वह तेज रफ़्तार से गाडी चलाती रही। ना उसे कोई डर था ना ही गाड़ी की स्पीड की परवाह , रात के वक्त मुंबई की सड़को पर ज्यादा भीड़ नहीं थी।
गाड़ी आकर एक बार के सामने रुकी और प्राची नीचे उतर गयी। उसने गार्ड को चाबी देकर पार्किंग में लगाने का इशारा किया और अंदर चली आयी।
बार काउंटर पर आकर प्राची ने अपने लिए एक हार्ड ड्रिंक देने को कहा और काउंटर पर सर झुकाकर बैठ गयी।
बार टेंडर ने ड्रिंक बनाकर प्राची के सामने रखा। प्राची उसे उठा पाती इस से पहले ही उसके बगल में बैठे आदमी ने उसे उठाकर साइड रखा और अपने हाथ में पकड़ा गिलास उसके सामने रखकर कहा,”तुम्हे इस उसकी नहीं इसकी जरूरत है”
प्राची ने गर्दन घुमाकर अपने बगल में बैठे आदमी को देखा तो पाया वो कोई और नहीं बल्कि विक्रम कपूर था जो अक्सर इस बार में आता जाता रहता है।
प्राची इतनी ज्यादा दुखी थी कि आज विक्रम पर गुस्सा करने के बजाय उसने उसके हाथ से ड्रिंक लिया और एक साँस में पीकर खाली गिलास काउंटर पर रख दिया। विक्रम ने देखा तो कहा,”अरे आराम से ! लगता है कुछ ज्यादा ही तकलीफ में हो,,,,,,,,,ए सुनो ! दो ड्रिंक”
प्राची से कहकर विक्रम ने बार टेंडर से कहा और वह वापस ड्रिंक बनाने लगा। विक्रम ने प्राची को देखा , वह पहले भी दो बार प्राची से मिल चुका था और उन दोनों ही मुलाकातों में प्राची ने उसे कोई भाव नहीं दिया।
बार टेंडर ने विक्रम और प्राची के सामने उनकी ड्रिंक रखी और अपने काम में लग गया। विक्रम ने गिलास उठाया और प्राची की तरफ करके कहा,”चियर्स”
अपने हाथ में ड्रिंक उठाये उठाये प्राची ख़ामोशी से विक्रम को देखती रही तो विक्रम हल्का सा मुस्कुराया और कहा,”दोस्त ना सही अजनबी समझकर ही चियर्स कर सकती हो”
प्राची ने अपना गिलास धीरे से विक्रम के गिलास से टच किया और कहा,”चियर्स”
विक्रम मुस्कुराया और धीरे धीरे अपनी ड्रिंक पीने लगा और प्राची ने भी इस बार एक साथ ना पीकर घूंठ घूंठ पीना जारी रखा।
प्राची को थोड़ा शांत देखकर विक्रम ने कहा,”सो ! आज यहाँ किस दुःख में ?”
प्राची ने सवालिया नजरो से विक्रम को देखा तो विक्रम ने कहा,”अक्सर हम जैसे नौजवान इन बार में अपना गम भुलाने और अपनी फ्रस्ट्रेशन को कम करने आते है। तुम्हे देखकर लगता तो नहीं कि तुम फ्रस्ट्रेट हो तो इसका मतलब तुम अपसेट हो,,,,,,,,!!!”
विक्रम की बात सुनकर प्राची एकटक उसे देखने लगी। विक्रम ने बची हुई ड्रिंक खत्म की और गिलास साइड में रखकर कहा,”सो ! बिजनेस में कोई लॉस हुआ ?”
“आई ऍम द बेस्ट एम्प्लॉय इन माय ऑफिस और मुझे हर बिजनेस लॉस को प्रॉफिट में बदलना बहुत अच्छे से आता है”,प्राची ने ड्रिंक का एक घूंठ भरकर सधे हुए स्वर में कहा।
“नाइस,,,,!!!”,विक्रम ने प्राची के जवाब से इम्प्रेस होकर कहा
“तो फिर घरवालों से झगड़ा हुआ ?”,विक्रम ने प्राची के दिल की बात जानने के लिए एक कोशिश और की
प्राची मुस्कुराई और कहा,”मेरे घर में सिर्फ दो लोग है मैं और मेरे डेड,,,,,,,,,,,,,,और ना वो कभी मेरी बात से एग्री होते है और ना मैं उनकी”,प्राची ने कहा
विक्रम ने सुना और कहा,”तो फिर पक्का किसी ने तुम्हारा दिल तोड़ा है”
विक्रम का इतना कहना था कि प्राची की आँखों के सामने पृथ्वी का चेहरा आ गया साथ ही याद आया उसे पृथ्वी का थप्पड़ मारना और वह अंदर ही अंदर गुस्से की आग में जल उठी। उसने हाथ में पकडे कांच के गिलास को भींचकर हाथ में तोड़ दिया। बची हुई ड्रिंक कांच के टुकड़ो के साथ काउंटर पर गिर गयी और उसका हाथ भी जख्मी हो गया ये देखकर विक्रम ने उसका हाथ अपनी तरफ करके कहा,”हे ! ये तुमने क्या किया ? ,, तुम सच में पागल हो”
विक्रम ने प्राची की कलाई थामे रखी और उसे वहा से उठाया। दूसरे हाथ से उसने अपना क्रेडिट कार्ड निकाला और बार टेंडर की तरफ बढ़ा दिया जिस से ड्रिंक का बिल पे कर सके। प्राची गुस्से और दर्द से काँप रही थी। विक्रम ने अपना कार्ड वापस लिया और जेब से एक नोट निकालकर लड़के की तरफ बढाकर काउंटर साफ करने का इशारा किया और प्राची को लेकर वहा से चला गया।
बार से बाहर आकर प्राची ने विक्रम के हाथ से अपना हाथ झटका और गुस्से से लेकिन धीमे स्वर में कहा,”मेरा हाथ छोडो,,,,,,,,,,!!!”
“तुम्हारे हाथ में चोट लगी है और खून भी बह रहा है”,विक्रम ने कहा
“सो व्हाट ? तुम्हे उस से क्या तुम जाओ यहाँ से ?”,प्राची ने इस बार चिल्लाकर कहा
विक्रम कुछ देर शांत रहा और फिर प्राची की आँखों में देखकर कहा,”ये गुस्सा उस पृथ्वी की वजह से है ना ?”
विक्रम के मुँह से पृथ्वी का नाम सुनकर प्राची हैरानी से उसे देखने लगी। विक्रम प्राची के थोड़ा करीब आया और उसकी आँखों में देखते हुए कहा,”तुम पृथ्वी को पसंद करती हो और उसने तुम्हारा परपॉजल ठुकरा दिया , तुम ये भी जानती हो कि वो शादीशुदा है और तुम्हे कभी नहीं मिलेगा बस इसी बात का गुस्सा है ना तुम्हे,,,,,,,,,,,,,,,कि कोई लड़का तुम्हे “ना” कैसे बोल सकता है ?”
विक्रम की बातो सच्चाई देखकर प्राची खामोश हो गयी और कुछ देर बाद धीरे से कहा,”कौन हो तुम ?”
“दोस्त,,,,,,,,,,,तुम चाहो तो मुझे अपना दोस्त कह सकती हो”,विक्रम ने प्राची की आँखों में झांककर कहा
“दोस्त ?”,प्राची ने हैरानी से कहा
विक्रम प्राची से पीछे हटा और कहा,”हाँ दोस्त ! अब एक इंसान के दो दुश्मन हो तो वो आपस में दोस्त ही हुए ना”
“मैं कुछ समझी नहीं,,,,,,,,,!!!”,प्राची ने कहा
“जिस पृथ्वी की वजह से तुम आज यहाँ हो उस पृथ्वी से मुझे भी अपना पुराना हिसाब चुकता करना है”,विक्रम ने कहा
प्राची ने सुना तो एक नजर विक्रम को देखा और फिर सहसा ही मुस्कुरा उठी। उसने अपना हाथ विक्रम की तरफ बढ़ा दिया और कहा,”प्राची देसाई”
विक्रम ने मजबूती से प्राची से हाथ मिलाया और कहा,”विक्रम कपूर”
“आज से हम दोनों की मंजिल एक ही होगी “पृथ्वी उपाध्याय”,प्राची ने कहा और विक्रम की आँखों में देखने लगी।
( क्या अवनि बताएगी पृथ्वी को घरवालों के बर्ताव के बारे में ? क्या पृथ्वी हिमांशु के घर में अवनि को लेकर करने वाला है कोई बड़ा तमाशा ? विक्रम और प्राची का एक हो जाना क्या बढ़ाने वाला है पृथ्वी के लिए मुश्किलें ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 2” मेरे साथ )
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Continue With Pasandida Aurat Season 2 – 80
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संजना किरोड़ीवाल


Are yaar yeh nai hona chahiye tha
Maine to phele hee bola tha ki yeh Prachi Desai aur Vikram Kapoor sath mil jayenge…aur Prithvi se badla lenge…par unhone abhi tak Prithvi ko jana nhi hai…khar Avni ki aawaz sunkar Prithvi ne pta laga liya ki Avni dukhi hai…next day to ab pakka Neelam bua ki jabardast wali band bajni chahiye… Holi pe unka muh kale rang se sarabor ho…bas itna hee chahati hon