Pasandida Aurat Season 2 – 75

Pasandida Aurat Season 2 – 75

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

नीलेश के मुँह से रिजाइन की बात सुनकर जहा भरत के चेहरे का रंग उड़ गया वही मिस्टर देसाई हैरान थे। नीलेश इस कम्पनी में सबसे होनहार और मेहनती एम्प्लॉय था लेकिन एकदम से उसका रिजाइन करना सबको उलझन में डाल गया।
“नीलेश ! ये क्या कह रहे हो तुम ? तुम प्राची के मैनेजर हो और इस ऑफिस में एक अच्छी पोजीशन पर हो फिर तुम ये नौकरी क्यों छोड़ रहे हो ?”,मिस्टर देसाई ने कहा

“सर ! प्राची मैडम को मुझ जैसे कई मैनेजर और मिल जायेंगे लेकिन उनके साथ काम करके मैं अब अपनी नजरो में और नहीं गिर सकता ,, आई ऍम सॉरी सर लेकिन मैं अब ये जॉब कन्टीन्यूए नहीं कर सकता बेहतर होगा आप प्राची मैडम के लिए कोई दूसरा मैनेजर देख ले,,,,,,,,,!!!”,नीलेश ने अपनी सफाई में कहा
देसाई सर ने सुना तो अफ़सोस में अपना सर हिलाया इन दिनों उन्हें प्राची की वजह से हर जगह शर्मिंदा होना पड़ रहा था।

वे कुछ नहीं बोले खामोश रहे लेकिन भरत ने सुना तो नीलेश की बाँह पकड़ी और अपने करीब कर गुस्से से धीमे स्वर में कहा,”ये क्या बकवास कर रहे हो तुम ? भूल गए मैंने तुमसे क्या कहा था ? चुपचाप मिस्टर देसाई के हाथ से वो रिजाइन लेटर वापस लो और माफ़ी मांगों”

“क्या आप चाहते है मैं सबके सामने आपकी पोल खुल दू ? अगर नहीं तो फिर मेरे रास्ते से हट जाईये”,नीलेश ने भरत को घूरकर गुस्से से कहा
भरत ने सुना तो अंदर ही अंदर गुस्से से भर गया लेकिन बाहर से झेंपते हुए नीलेश से दूर हो गया। नीलेश ने एक नजर मिस्टर देसाई को देखा और वहा से चला गया।

“मिस्टर भरत ! मेरे केबिन में आईये”,मिस्टर देसाई ने कहा और वहा से चले गए
“तुम सब यहाँ क्या कर रहे हो , क्या यहाँ कोई तमाशा हो रहा है ? जाओ यहाँ से,,,,,,,,,!!!”,भरत ने थोड़ा ऊँचे स्वर में कहा तो सभी वहा से अपनी अपनी डेस्क की तरफ बढ़ गए।
भरत ने गले में पड़ी अपनी टाई को ठीक किया और देसाई सर के केबिन की तरफ बढ़ गया। केबिन में आकर भरत देसाई सर के सामने आ खड़ा हुआ। उसने देखा वे बहुत प्परेशान और गुस्से में थे लेकिन ये गुस्सा अफसोस से भरा था।

भरत को अपने सामने देखकर देसाई सर ने कहा,”आखिर ये लड़की चाहती क्या है ? मौर्या ग्रुप एंड कम्पनी के साथ इसने कम्पनी के रिलेशन पहले ही खराब कर दिए है ,आज मेहताज के साथ भी मीटिंग स्पोइल की और तो और ये दुसरो की निजी जिंदगी में भी दखल देने लगी है , वो पृथ्वी , वो एक सीधा साधा मेहनती लड़का है और शादीशुदा है फिर भी प्राची उस से रिश्ता रखना चाहती है,,,,,,,,,,,,आई कांट बिलिव दिस , और नीलेश , नीलेश अचानक काम छोड़कर चला गया जरूर इसमें भी कही न कही प्राची की ही गलती है

बस बहुत हो गया भरत मैं इस लड़की से तंग आ चुका हूँ , आखिर ये करना क्या चाहती है ? ऐसे ही चलता रहा तो एक दिन इस कम्पनी को ताला लग जाएगा,,,,,,,,,,,,,भरत”
“जी सर,,,,,,,,!!!”,भरत ने कहा
“ऑफिस से जुड़े प्राची के सभी लॉगिन केंसल करो ! कम्पनी में उसका जो रोल है उसे कल से तुम पूरा करोगे इन्फेक्ट प्राची की जगह सभी मीटिंग्स अब तुम अटेंड करोगे और कम्पनी के एम्पलॉयज को लेकर जो भी डिसीजन लेने है वो तुम लोगे , मैं इस कम्पनी की 25% जिम्मेदारियां तुम्हे सौंपता हूँ”,देसाई सर ने कहा

भरत ने सुना तो मन ही मन ख़ुशी से भर उठा लेकिन उस ख़ुशी को चेहरे पर आने नहीं दिया और कहा,”लेकिन सर ये सब तो प्राची मैडम करती है , अगर मैं ये करूँगा तो फिर वो क्या करेंगी ?”
“वो कल से घर में बैठेगी,,,,,,,,,,,,,एंड देट्स फाइनल”,देसाई सर ने कठोरता से कहा ये सुनकर भरत ने हामी में गर्दन हिलाई और मुस्कुरा उठा आखिर हारते हारते वह जीत के थोड़ा और करीब जो पहुंच चुका था।

उसी शाम , हिमांशु का घर पनवेल
होलिका दहन की सभी तैयारियां हो चुकी थी। सोसायटी पार्क में ही होलिका दहन होने वाला था जहा सभी घरवालों के साथ अवनि भी जाने वाली थी। बड़ी मम्मी और चाची किचन में काम में लगी थी। अवनि साक्षी के कमरे में थी , उसने देखा सब महंगी साड़ी और गहने पहनकर तैयार हो रही है लेकिन उसके पास तो ऐसा कुछ नहीं था। मुंबई आने के बाद से ही वह बस सलवार सूट पहन रही थी। यहाँ भी वह अपना एक अच्छी कढ़ाई वाला सूट लेकर आयी थी। साक्षी ने अवनि को देखा और कहा,”क्या हुआ ? तुम्हे तैयार नहीं होना,,,,,,,,,,,,कपडे बदल लो अभी थोड़ी देर में सब बाहर जायेंगे होलिका दहन के लिए”

“दरअसल वो मेरे पास सिर्फ सूट है , साड़ी नहीं है”,अवनि ने धीरे से कहा
“ओह्ह्ह्ह अच्छा ! तो क्या तुम अपने घर से कुछ भी नहीं लेकर आयी ,मेरा मतलब कपडे गहने अपना जरुरी सामान ?”,साक्षी ने हैरानी से पूछा  
अवनि ने धीरे से ना में गर्दन हिला दी पता नहीं इस वक्त क्यों वह बहुत ही शर्मिन्दा महसूस कर रही थी। साक्षी उसे कुछ कहती इस से पहले कमरे के दरवाजे पर खड़ी नीलम भुआ ने उसे अपने पास आने का इशारा किया।

साक्षी दरवाजे की तरफ बढ़ गयी तो नीलम भुआ उसका हाथ पकड़कर उसे बाहर ले आयी और एक साड़ी उसकी तरफ बढ़ाकर कहा,”लो ये उसे दे दो और कहो आज के फंक्शन में पहन ले , मुझे नहीं लगता उसके पास कोई ढंग की साड़ी होगी पहनने के लिए,,,,,,,,,,,,,!!!”
“भुआ जी ! आप ही दे दीजिये न उसे अच्छा भी लगेगा”,साक्षी ने कहा

“नहीं ! मैंने दिया तो वो बिल्कुल नहीं पहनेंगी ,, वैसे भी वो मुझे पसंद नहीं करती अगर मैंने अपने हाथ से उसे साड़ी दी तो वो इसे बिल्कुल नहीं पहनेगी ,, इसलिए तुम उसे कहो कि ये तुम उसके लिए लेकर आयी हो,,,,,,,,,,,,,ताकि वो इसे पहन ले और सोसायटी वालो के सामने हमे शर्मिंदा ना होना पड़े,,,,,,,,,,,,अब पकड़ो भी”,नीलम भुआ ने साड़ी साक्षी के हाथो में थमाकर कहा।  

साक्षी ने देखा कुछ देर पहले नीलम भुआ अवनि को ताने मार रही थी और अब उसके लिए परवाह जता रही थी ये देखकर वह मुस्कुराई और कहा,”भुआ जी ! आप बहुत अच्छी है ,मैं अभी ये साड़ी अवनि को दे देती हूँ और पहनने को कहती हूँ”
“ठीक है जाओ”,नीलम भुआ ने मुस्कुरा कर कहा ! साक्षी ख़ुशी ख़ुशी वहा से चली गयी।

नीलम भुआ अपने हाथो को बांधा और अपनी बाँयी भंव चढ़ाकर कहा,”अच्छी तो मैं हूँ साक्षी तभी तो हीरे और कंकर में फर्क करना जानती हूँ”
“अरे नीलम वहा क्यों खड़ी हो जाओ तैयार हो जाओ फिर सब साथ ही चलते है”,बड़ी मम्मी ने किचन से बाहर आते हुए कहा।

नीलम भुआ की दी साड़ी लेकर साक्षी कमरे में आयी और उसे अवनि की तरफ बढाकर कहा,”लो आज के फंक्शन में तुम ये पहन लो”
“ये साड़ी,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने पूछा
साक्षी झूठ बोलना नहीं चाहती थी लेकिन नीलम भुआ की बातें याद करके उसे बोलना पड़ा,”ये मेरी है , मैंने कुछ दिन पहले ही खरीदी थी लेकिन पहन नहीं पायी  पहन लो”
“लेकिन आपकी साड़ी मैं कैसे?”,अवनि ने झिझकते हुए कहा

“इसे मेरी तरफ से तोहफा समझ लो , अवनि तुम इसे पहनोगी तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी,,,,,,,,,!!!”,साक्षी ने अवनि की बाँह छूकर प्यार से कहा तो अवनि ने वह साड़ी ले ली। तैयार होकर सभी होलिका दहन के लिए सोसायटी के पार्क में चले आये। उस साड़ी में अवनि बहुत ही प्यारी लग रही थी उस पर शादी के बाद पहली बार उसने साड़ी पहनी थी। ना ज्यादा मेकअप किया था न ही ज्यादा गहने पहने थे फिर भी वह वहा मौजूद लोगो में चर्चा का विषय बनी हुई थी उस पर उसकी सादगी और उसके बात करने का ढंग सबको भा रहा था।

आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
शाम के 7 बज रहे थे और पिछले 5 मिनिट से अपने फ्लेट के दरवाजे के बाहर खड़ा पृथ्वी ख़ामोशी से उसे देख रहा था। उसकी अंदर जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी क्योकि हमेशा की तरह आज दरवाजा खोलने के लिए अवनि नहीं थी। वह बस ये सोचकर उदास हो रहा था कि अगर वह अंदर जाएगा तो अवनि उसे दिखाई नहीं देगी। काफी देर तक अपने ही ख्यालो से झुंझते हुए आख़िरकार पृथ्वी ने दरवाजा खोला और अंदर चला आया।

जो घर रोज रौशनी से भरा रहता था आज अँधेरे में डूबा था। अंदर आकर पृथ्वी ने लाइट जलाई और उदास आँखों से घर को देखा। हर जगह उसे अवनि की कमी खल रही थी।
पृथ्वी ने दरवाजा बंद किया अपना बैग टेबल पर रखा और शर्ट के ऊपर दो बटन खोलकर बाजु मोड़ते हुए किचन की तरफ चला आया। किचन में आकर पानी लेने के लिए जैसे ही वह फ्रीज खोलने लगा उसकी नजर फ्रीज पर लगी चिट पर पड़ी। पृथ्वी ने उसे उतारा और पढ़ने लगा

“मैं जानती हूँ ! ऑफिस से आकर तुम सबसे पहले यही आओगे , ठंडा पानी पीने इसलिए मैंने तुम्हारे लिए पानी की जगह कुछ और रखा है , फ्रीज खोलकर देखो”
पृथ्वी मुस्कुराया और फ्रीज खोला तो सामने एक बहुत ही सुन्दर से जार में कोल्ड कॉफी रखा हुआ था। पृथ्वी मुस्कुराया और उसे बाहर निकाल लिया जो कि काफी ठंडा था। पृथ्वी ने एक घूंठ भरा तो उसे गर्मी से थोड़ी राहत मिली। कॉफी पीते हए वह बाहर चला आया।

आज अवनि घर में थी नहीं इसलिए पृथ्वी जैसे चाहे वैसे घूम सकता था इसलिए उसने अपना शर्ट निकाला और सोफे पर डाल दिया। वह बस जींस में था और कॉफी पीते हुए पुरे घर में यहाँ वहा घूम रहा था।
कॉफी पीकर उसने ऑफिस का बैग उठाया , सोफे से शर्ट उठाया और कमरे में चला आया लेकिन यहाँ भी उसके लिए कुछ था। उसने देखा बिस्तर के कोने पर उसके लिए कपडे पहले से निकालकर रखे है और साथ मे एक चिट भी रखा है तो पृथ्वी बिस्तर पर आ बैठा उसने वो चिट उठाया और पढ़ने लगा

“जानती हूँ आज तुम घर में अकेले हो इसलिए अब तक तुम्हारा शर्ट निकल चुका होगा और सोफे पर यहाँ वहा पड़ा होगा और तुम घर में बिना शर्ट के चक्कर लगा चुके होंगे , इसलिए मिस्टर उपाध्याय जाईये और नहाकर कपड़े बदल लीजिये”

पृथ्वी ने पढ़ा और मुस्कुराने लगा , अवनि उसकी आदतों के बारे में कितना बारीकी से जानती थी। उसने टॉवल लिया और नहाने चला गया। नहाने के बाद पृथ्वी बाहर आया , कपडे बदले और शीशे के सामने चला आया। शीशे के सामने आकर पृथ्वी फिर हैरान था यहाँ भी शीशे पर चिट चिपकाई हुई थी। पृथ्वी ने उसे उतारा और पढ़ा तो उस पर लिखा था  
“मेरी बात मानने के लिए थैंक्यू , अब तुम्हे मेरी एक बात और माननी है और इसके लिए तुम्हे घर के मंदिर तक जाना होगा”

पृथ्वी सोच में पड़ गया आखिर अवनि उस से करवाना क्या चाहती है ? खैर उसने अपने बाल बनाये ,चेहरा साफ़ किया और कमरे से बाहर चला आया। मंदिर के नाम से पृथ्वी ने खुद ही अंदाजा लगा लिया कि शायद अवनि चाहती है उसके ना होने पर वो आज शाम की पूजा कर दे। पृथ्वी ने हाथ धोये और मंदिर के सामने आकर भगवान के सामने एक दीपक जला दिया। उसने हाथ जोड़कर मन ही मन प्रार्थना की और आँखे खोली तो नजर वहा रखी एक चिट पर पड़ी। पृथ्वी ने उसे उठाया और सोफे की तरफ चला आया। पृथ्वी ने उसे पढ़ना शुरू किया

“पृथ्वी ! शादी के बाद ये हमारा पहला त्यौहार है और हम एक दूसरे से दूर है लेकिन फिर भी मैं खुश हूँ क्या पता ये दूरिया तुम्हे फिर से तुम्हारे परिवार के करीब ले आये। आज की शाम हर कोई अपने अपने परिवार के साथ होगा इसलिए मैं नहीं चाहती कि तुम वहा अकेले रहो। तुम्हारे घर का जो भी रिवाज है मैं पुरे दिल से निभाऊंगी पर मैं चाहती हूँ आज की रात तुम भी अपने बेटे होने का फर्ज निभाओ,,,,,,,,,,,,,

घर जाओ पृथ्वी और उनके साथ त्यौहार मनाओ,,,,,,,,,उन्हें तुमसे शिकायत हो सकती है लेकिन नफरत नहीं,,,,,,,,,,अगर तुम्हारे घरवाले मुझे अपने घर बुला सकते है तो मुझे यकीन है वो तुम्हे भी घर आने देंगे , तुम मेरी ये बात मानोगे ना पृथ्वी ?”

पृथ्वी ने चिट पढ़ी और उसे पढ़ते हुए इस बार वह मुस्कुराया नहीं बल्कि उसकी आँखों में नमी थी। उसने चिट को मोड़कर जेब में रखा और धीरे से बड़बड़ाया,”पागल लड़की ! मुझसे दूर होकर भी मेरी परवाह कर रही है और कहती है मुझसे प्यार नहीं करती,,,,,,,,,,,,,,,ये प्यार ही तो है अवनि बस तुम्हे समझने में थोड़ा वक्त लगेगा,,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी खुद में बड़बड़ा रहा ही था कि तभी डोरबेल बजी। वह उठा और दरवाजा खोला तो देखा सामने नकुल खड़ा था। आज इतने दिनों बाद नकुल को देखकर पृथ्वी को हैरानी भी हुई और ख़ुशी भी उसने कहा,”कहा गायब  था तू इतने दिन से ? ना फोन ना मैसेज ?”

“अरे यार क्या बताऊ ? ऑफिस के जरूरी काम से एक हफ्ते के लिए पुणे गया था आज सुबह ही वापस आया,,,,,,,,,,,,तू बता भाभी कहा है ? कल तो उनके साथ जमकर होली खेलने वाला हूँ मैं,,,,,,,,!!”,नकुल ने अंदर आते हुए कहा
“मुझे पहले उसे कोई रंग नहीं लगाएगा”,पृथ्वी ने अंदर आते हुए कहा  
नकुल पलटा और मुस्कुराकर कहा,”मुन्ना ! तुम भूल गए शायद शादी के बाद लड़की अपनी पहली होली पति के साथ नहीं खेलती है,,,,,,,इसलिए कल भाभी को सबसे पहले रंग मैं लगाऊंगा,,,,,,,,,,,!!!”

पृथ्वी ने सुना तो नकुल को घूरने लगा। नकुल ने पानी का बोतल उठाया और पीते हुए कहा,”अच्छा वैसे भाभी तो यहाँ है नहीं तो तू अकेला यहाँ क्या करेगा ? चल मेरे घर चलते है होलिका दहन के बाद मस्त घूमने चलेंगे”
“नहीं मैं आई बाबा के घर जा रहा हूँ”,पृथ्वी ने कहा
नकुल ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”उन्होंने तुम्हे माफ़ कर दिया ?”
“नहीं ! लेकिन घर का बड़ा बेटा होने के नाते मेरी जिम्मेदारी बनती है मैं त्यौहार के दिन उनके साथ रहू,,,,,,,,,,,,चल आ चलते है”,पृथ्वी ने कहा

“तेरा ये फैसला बिल्कुल सही है , तुझे वहा जाना चाहिए। माँ-बाप चाहे हमे डांटे , मारे , गुस्सा करे रहेंगे वो हमारे अपने ही,,,,,,,,,,,!!!”,नकुल ने कहा तो पृथ्वी ने हामी में गर्दन हिला दी और फिर नकुल के साथ फ्लेट से बाहर निकल गया।  

रवि जी का घर ,पनवेल
लता की नजरे बार बार घर के दरवाजे की तरफ चली जाती जैसे उसे किसी का इंतजार हो। रवि जी ने देखा तो समझ गए और कहा,”तुम फोन करके उसे बुला क्यों नहीं लेती ? आखिर वो हमारा बेटा है और ये घर भी उसका अपना है। वैसे भी अवनि तो दादा के घर मे है तो आज रात वो अकेला ही होगा अपने फ्लेट में ,, त्यौहार के दिन बच्चे अपने घर से दूर रहे अच्छा लगता है क्या लता ? आज रात उसे यहाँ बुला लो , तुम फोन करके कहोगी तो वह जरूर आएगा”

लता ने सुना तो रवि जी की तरफ देखा और कहा,”मैं फोन करू उसे ! क्या उसका कोई फर्ज नहीं बनता ? क्या वो खुद से इस घर में नहीं आ सकता , मैं कौनसा उसे धक्के मारकर इस घर से बाहर निकाल दूंगी लेकिन वो , वो तो ऐसे मुँह मोड़कर बैठा है कि यहाँ आना ही नहीं चाहता,,,,,,,,,,,क्या उसे अपने घरवालों की याद नहीं आती ?”
“किसने कहा मुझे अपने घरवालों की याद नहीं आती ?”,सहसा ही पृथ्वी की आवाज लता और रवि जी के कानो मे पड़ी तो लता ने देखा घर के दरवाजे पर पृथ्वी खड़ा है।

लता की आँखों में नमी उभर आयी और दिल धड़कने लगा लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हुई कि वह उठकर पृथ्वी तक जा सके। पृथ्वी भी अंदर ना आकर वही चौखट पर बैठ गया और कहने लगा,”मुझे अपने घरवालों की याद आती है आई , इस घर में मैंने अपनी जिंदगी के 28 जिए है मैं इस घर को कैसे भूल सकता हूँ ? रोज आपके हाथ से बने खाने को याद करता हूँ ,, अवनि बहुत अच्छा खाना बनाती है लेकिन जो डांट खाने के साथ आपसे मिलती थी वो याद करता हूँ ,

बाबा की तरह अब मैं भी अकेले घर और नौकरी दोनों सम्हालता हूँ लेकिन जब बहुत थक जाता हूँ तब बाबा को याद करता हूँ,,,,,,,,,मेरी एक जिद ने सब कितना बदल दिया आई , इतना कि अब आप मुझ पर अपना हक तक नहीं समझती है लेकिन मैं समझता हूँ इसलिए आपके बिना बुलाया यहाँ चला आया ,, उसने मुझसे कहा कि त्यौहार पर अपने परिवार का साथ होना बहुत जरुरी है,,,,,,,,,,,,!!!”

पृथ्वी की आवाज में एक दर्द था जिसे महसूस करके लता की आँखों में ठहरे आँसू बह गए और वह सुबकते हुए अपने कमरे में चली गयी। रवि जी ने देखा पृथ्वी
 चौखट पर बैठा है तो कहा,”तुम वहा क्यों बैठ गए अंदर आओ ?”
“नहीं बाबा ! मैं अंदर उस दिन आऊंगा जिस दिन आई खुद अवनि का हाथ थामकर उसे इस घर में लेकर आयेगी”,पृथ्वी ने कहा और रवि जी ख़ामोशी से उसे देखने लगे।  

( प्राची को कम्पनी से निकालकर उसकी जगह भरत को देकर क्या सही कर रहे है मिस्टर देसाई ? अवनि की बातें मानकर क्या पृथ्वी फिर से हासिल कर पायेगा अपने घरवालों का प्यार ? पृथ्वी की बातें सुनकर क्या लता को हो रहा है अपनी गलती का अहसास ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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