Pasandida Aurat Season 2 – 73
Pasandida Aurat Season 2 – 73

पृथ्वी ने अवनि को अपने घरवालों के पास अकेले भेजा है ये सुनकर जयदीप के चेहरे पर परेशानी और मायूसी के भाव उभर आये। पृथ्वी जयदीप के सामने आया और कहा,”आप कहना क्या चाहते है ? मुझे अवनि को वहा क्यों नहीं भेजना चाहिए था ? वो सब मेरे घरवाले है अवनि को वहा कोई खतरा नहीं है”
ऐसा तुम्हे लगता है पृथ्वी ! क्या तुम भूल गए उस दिन कैसे सब अवनि और तुम्हारे खिलाफ खड़े थे और उसके बाद किसी ने तुम दोनों की खबर लेने की कोशिश तक नहीं की और आज उन्हें अचानक अपनी बहू की याद आ गयी। हो ना हो ये उन सबकी कोई चाल भी हो सकती है अवनि को तुम्हारी जिंदगी से निकालने की”
“ऐसी बात नहीं है सर ! अवनि होली के दिन अपने ससुराल में नहीं रह सकती इसलिए मुझे उसे वहा भेजना पड़ा”,पृथ्वी ने जयदीप को समझाते हुए कहा
“तो मैं क्या मर गया था ? मैंने अवनि ने अपनी छोटी बहन कहा है अगर वो होली पर अपने ससुराल में नहीं रह सकती तो वो अपने मायके अपने भाई के घर भी आ सकती थी लेकिन तुमने उसे उन लोगो के बीच भेज दिया जो उसे पसंद तक नहीं करते,,,,,,,,,,,,,तुम इतने बेवकूफ कैसे हो सकते हो पृथ्वी ?”,जयदीप ने कहा
पृथ्वी ने जयदीप की तरफ देखा और कहा,”ये दूसरी बार आपने मुझे बेवकूफ कहा है”
जयदीप ने सुना तो पृथ्वी को घूरकर देखा और कहा,”क्योकि तुम हो ! मैं सिर्फ कहने के लिए अवनि का भाई नहीं हूँ ,मैंने अगर उस से रिश्ता जोड़ा है तो मैं अपनी जिम्मेदारी निभाना भी जानता हूँ”
पृथ्वी कुछ देर खामोश रहा और फिर उदास होकर कहा,”उसे खुद से दूर भेजने का दिल तो मेरा भी नहीं था लेकिन वो वहा जाना चाहती थी। उसे लगता है इस से सब ठीक हो जाएगा ,मेरे घरवाले उसे और मुझे माफ़ करके फिर से अपना लेंगे बस सिर्फ इसलिए उसने वहा जाना ठीक समझा।
मैं चाहता तो जबरदस्ती उसे रोक सकता था और वो इतनी अच्छी है कि रुक भी जाती लेकिन ये करके मैं उसके चेहरे पर वो मलाल छोड़ना नहीं चाहता था कि उसने कोशिश नहीं की और मुझे पूरा यकीन है वो सबका दिल जीत लेगी”
जयदीप ने सुना तो थोड़ा शांत हुआ और कहा,”अब अगर अवनि की मर्जी थी तो फिर मैं कुछ नहीं कहूंगा”
“हहहहह ! क्या सच में ? अभी अभी कितना सुनाया है आपने मुझे , कभी कभी तो मुझे ये ऑफिस अपना ससुराल और आप सास लगते है,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने मुँह बनाकर कहा
“ओह्ह्ह ऐसा है क्या ? मैंने आज तुम्हे थोड़ा सा सुना दिया तो तुम मुँह बना रहे हो और तुम जो बात बात पर मुझसे बहस करते हो उसका क्या ?”,जयदीप ने चिढ़कर कहा
“मैं आपसे बहस क्यों करूंगा , आप क्या मेरी गर्लफ्रेंड हो ?”,पृथ्वी ने फिर मुंह बनाकर कहा
“तो क्या बहस सिर्फ गर्लफ्रेंड से की जाती है ?”,जयदीप ने कहा
“नहीं किसने कहा ? वाइफ से भी बहस की जा सकती है,,,,,,,,,,,वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दू कि आज लंच के बाद आपकी मिसेज ऑफिस आने वाली है और आज लंच के बाद मिस रिया के साथ आपकी मीटिंग भी है,,,,,,,,,तो आप मैनेज कर लेंगे ना”,पृथ्वी ने जयदीप की टाँग खींचते हुए कहा
जयदीप ने सुना तो टेंशन में आ गया क्योकि अगर रीना उसकी पत्नी ने उसे अपनी क्लाइंट रिया के साथ देखा तो उसकी शामत आ जाएगी। जयदीप पृथ्वी के पास आया और मिमियाते हुए कहा,”अह्ह्ह्हह पृथ्वी ! रिया के साथ आज की मीटिंग तुम अटेंड कर लो ना प्लीज,,,,,,,मैं रीना के साथ बाहर चला जाता हूँ”
“ये अचानक आपकी टोन कैसे चेंज हो गयी अभी तो बहुत चिल्ला रहे थे आप और क्या कह रहे थे मुझे,,,,,,,,,,हाँ ,बेवकूफ”,पृथ्वी ने अपनी भंव चढ़ाकर कहा
“मैं बेवकूफ हूँ ,गधा हूँ ,उल्लू का पट्ठा हूँ ,अरे मैं तुम्हे बेवकूफ थोड़े कहूंगा तुम तो बहुत समझदार लड़के हो,,,,,,पृथ्वी ! मेरे प्यारे बच्चे प्लीज इस बार थोड़ा सा मैनेज कर लो प्लीज,,,,,,,,,,,!!!”,जयदीप ने पृथ्वी से चिपक उसकी ठुड्डी पकड़कर कहा
“हाँ ठीक है और इतना चिपको मत यार मैं शादीशुदा हूँ”,पृथ्वी ने जयदीप से दूर हटकर कहा तो जयदीप चिढ गया और कहा,”शादीशुदा होकर भी फिर तुम मेरी शादीशुदा जिंदगी में तूफ़ान लाने की बाते क्यों करते हो ?”
“हा हा हा”,कहते हुए पृथ्वी ने जयदीप को लुक दिया तो जयदीप की टोन फिर बदल गयी और उसने कहा,”अरे मैं तो बस मजाक कर रहा था , तुमने खाना खाया ? अह्ह्ह्ह तुम थोड़े थके हुए भी लग रहे हो जाओ जाओ आराम करो”
पृथ्वी ने अफ़सोस में सर हिलाया और वहा से चला गया। जयदीप ने गले में पड़ी टाई को ढीला किया और सोफे पर बैठते हुए कहा,”हाह ! ये लड़का मुझे ब्लेकमैल करने का एक मौका नहीं छोड़ता पर जो भी है अच्छा है”
सिद्धार्थ का घर , सिरोही
सिद्धार्थ की गाड़ी घर के सामने आकर रुकी। सुरभि बेपरवाह होकर सो रही थी उसे पता भी नहीं था कि घर आ चुका है। सिद्धार्थ ने सुरभि की तरफ देखा और धीरे से बड़बड़ाया,”सो तो ऐसे रही है जैसे गाडी इसके उस बॉयफ्रेंड् की हो”
खुद में ही बड़बड़ाकर सिद्धार्थ ने सुरभि की बाँह थपथपाई और कहा,”ओह्ह हेलो ! उठो घर आ गया है,,,,,,,,,,,!!”
सुरभि कुनमुनाई और दूसरी तरफ मुँह घुमाकर कहा,”उम्मम्मम मुझे सोने दो”
“अरे उठो ! तुम अपने घर पर नहीं सो रही हो,,,,,,,,,,चलो उठो”,सिद्धार्थ ने थोड़ा तेज आवाज में कहा तो सुरभि घबराकर उठी ! उसने इधर उधर देखा और थोड़ी देर बाद उसे समझ आया कि वह सिद्धार्थ के साथ उसकी गाड़ी में है लेकिन क्यों है , ये बात सुरभि भूल गयी और कहा,”मैं यहाँ क्या कर रही हूँ , कही तुमने मुझे किडनैप तो नहीं कर लिया ? देखो मैं तुमसे डरती नहीं हु अगर तुमने कुछ भी किया तो मैं जोर से चिल्लाऊंगी। तुम तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे किडनैप करने की ? तुम तो शक्ल से ही किडनैपर लगते हो,,,,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ ने सुना तो अपना सर पीट लिया और सुरभि को ऊँगली दिखाकर गुस्से से कहा,”चुप ! बिल्कुल चुप ! तुम्हे क्या मैं किडनैपर दिखता हूँ ? दिमाग खराब नही है मेरा जो मैं तुम्हे किडनेप करूंगा। तुम यहाँ मेरी मदद करने आयी हो या मुझे फ़साने ?”
सुरभि ने सुना तो उसे याद आया कि वह यहाँ सिद्धार्थ के मम्मी पापा से मिलने आयी है ताकि उनकी गलतफहमी दूर कर सके।
वह झेंपते हुए मुस्कुराई और अपने दोनों हाथो को आपस में मिलाकर ख़ुशी भरे स्वर मे कहा,”हाह ! मुझे पता है मैं यहाँ क्यों आयी हूँ , मैं तो बस देख रही थी कि तुम्हे सब याद है या नहीं,,,,,,,हम लोग घर पहुंच गए ,चलो चलते है”
कहते हुए सुरभि ने सिद्धार्थ के जवाब का इंतजार भी नहीं किया और दरवाजा खोलकर बाहर निकल गयी। सिद्धार्थ ने एक गहरी साँस ली और खुद को शांत कर गाडी से बाहर आया। वह सुरभि की तरफ आया और कहा,”अंदर मम्मी पापा जितना पूछे बस उतना ही जवाब देना अपनी तरफ से कोई फालतू बकवास नहीं करना,,,,,,,,,,,,!!!”
सुरभि ने सुना तो अपनी आँखों को छोटा करके उसकी तरफ देखा और सिद्धार्थ की टोन एकदम से चेंज हो गयी और उसने कहा,”प्लीज ! आई रिक्वेस्ट यू”
“हम्म्म बेटर”,कहकर सुरभि आगे बढ़ गयी और सिद्धार्थ भी उसके पीछे चला आया।
सिद्धार्थ सुरभि को लेकर घर के अंदर आया हालाँकि उसका दिल धड़क रहा था क्योकि सिद्धार्थ को अपनी इमेज से बहुत प्यार था और किसी भी गलतफहमी के चलते वह अपनी इमेज को जगदीश जी और गिरिजा जी के सामने खराब होते देखना नहीं चाहता था।
घर के हॉल में जगदीश जी बैठे अख़बार पढ़ रहे थे और गिरिजा अंदर खाना बना रही थी।
सिद्धार्थ सुरभि को लेकर हॉल मे आया और धीरे से कहा,”पापा”
जगदीश जी ने सुना तो उन्होंने सिद्धार्थ की तरफ देखा। सुरभि को सिद्धार्थ के साथ देखकर उन्होंने हाथ में पकडे अख़बार को समेटकर साइड में रख दिया।
“पापा ये सुरभि ! उस शाम घर आयी थी और आप इस से मिलना चाहते थे”,सिद्धार्थ ने बहुत ही धीरे से शांत स्वर में कहा
सुरभि ने सुना तो हैरानी से सिद्धार्थ की तरफ देखा और मन ही मन कहा,”वाह बाप के सामने क्या एक्टिंग कर रहा है ये चिलगोजा , बाहर तो अकड़कर चलता है और यहाँ भीगी बिल्ली बना है”
जगदीश जी ने सुना तो सुरभि की तरफ देखने लगे और सुरभि अपने ही ख्यालो में खो में खोयी थी ये देखकर सिद्धार्थ ने अपना पैर सुरभि के पैर पर मारा और उसे अपने पापा की तरफ जाने का इशारा किया तो सुरभि लड़खड़ाते हुए उनके सामने जा खड़ी हुई और हाथ जोड़कर कहा,”नमस्ते अंकल”
गिरिजा ने हॉल से आती आवाजे सुनी तो वे भी किचन से बाहर चली आयी। सिद्धार्थ और सुरभि को साथ देखकर उनका दिल धड़कने लगा कही फिर से सिद्धार्थ इस लड़की को लेकर अपने पापा से बहस ना शुरू कर दे।
“नमस्ते,,,,,,,,,,,,सिद्धार्थ को अब से जानती हो तुम ?”,जगदीश जी ने कठोर स्वर में पूछा
“जब ये अंधा रेलवे स्टेशन पर मुझसे टकराया था,,,,,,,,,,,,,,अह्ह्ह्ह मेरा मतलब बस कुछ महीनो से अंकल”,सुरभि गड़बड़ करने वाली ही थी कि सम्हल गयी
“तो क्या तुम दोनों दोस्त हो ?”,जगदीश जी ने पूछा
“दोस्त ? इसे तो मैं अपना ड्राइवर तक न रखू कितना अजीब और बोरिंग है ये,,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि सिद्धार्थ को देखकर मन ही मन बड़बड़ाई और जगदीश जी को जवाब देना भूल गयी
“मैंने पूछा क्या तुम दोनों दोस्त हो ?”,जगदीश जी ने अपना सवाल फिर दोहराया तो सुरभि की तन्द्रा टूटी और उसने कहा,”अरे नहीं नहीं अंकल हम बस एक दूसरे को जानते है”
जगदीश जी ने सुना तो एक नजर सिद्धार्थ की तरफ देखा और फिर सुरभि की तरफ देखकर कहा,”एक लड़का जिसके बारे में तुम ज्यादा जानती नहीं , जो तुम्हारा दोस्त भी नहीं है और जिस से तुम सिर्फ एक दो बार मिली हो। उसके साथ देर रात तुम उसके घर कैसे आ सकती हो वो भी तब जब घर पर कोई नहीं हो। इसका मतलब समझती हो न तुम ?”
सुरभि ने सुना तो अपनी आँखों को बड़ा करके एक बार फिर सिद्धार्थ की तरफ देखा। वह जगदीश जी की तरफ पलटी और एक ठंडी आह भरकर कहा,”हाह ! लगता है आपको सब पता चल गया है। अब छुपाने से क्या फायदा अंकल ? ये तो ऐसी बाते है जो एक न एक दिन सामने आ ही जाती है,,,,,,,,,,,,!!!”
जगदीश जी ने सुना तो एकटक सुरभि को देखने लगे और गिरिजा भी किचन के दरवाजे से हटकर जगदीश जी के पास चली आयी।
सुरभि अपने हाथ बांधकर मासूम सा चेहरा बनाकर खड़ी हो गयी और उसे ऐसे देखकर सिद्धार्थ के हाथ पाँव फूलने लगे क्योकि इसके बाद सुरभि क्या गड़बड़ करने वाली थी ये सिद्धार्थ भी नहीं जानता था। वह मन ही मन भगवान् से प्रार्थना करने लगा कि सुरभि कुछ उलटा सीधा ना बोल दे वरना उसके लिए खुद को निर्दोष साबित करना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन हो जाएगा,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
शिवाय अपार्टमेंट , मुंबई
4th फ्लोर के फ्लेट नंबर 405 के सामने खड़ा भरत डोलबेल बजाए जा रहा था लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला। भरत ने एक बार फिर डोरबेल बजायी और इस बार दरवाजा खुला। सामने आँसुओ से भरा चेहरा लिए नीलेश खड़ा था। वह काफी उदास और परेशान दिखाई पड़ रहा था। भरत ने उसके सीने पर हाथ रखकर उसे अंदर धकेला और खुद भी अंदर आकर दरवाजा बंद कर दिया।
नीलेश रो रहा था और इस हालत में नहीं था कि भरत से वहा होने की वजह पूछ सके। वह कुछ पूछता इस से पहले भरत उसके पास आया और गुस्से से लेकिन धीमे स्वर में कहा,”नीलेश ! ये क्या हालत बना रखी है तुमने अपनी ? मैं कब से तुम्हे फोन कर रहा हूँ ना तुम मेरे फोन का जवाब दे रहे हो ना तुम ऑफिस आये आखिर तुम करना क्या चाहते हो ? तुम ऑफिस से प्राची के साथ निकले थे मेहताज की मिटिंग के लिए फिर ऑफिस ना आकर तुम यहाँ क्यों चले आये ? और ये सब क्या है तुम रो क्यों रहे हो ?”
“क्योकि मैं थक गया हूँ ! मैं थक गया हूँ ये सब करते करते,,,,,,,,,,,,!!”,नीलेश ने रोते हुए कहा और फिर भरत को वो सारी बाते बता दी जो आज मीटिंग के लिए जाते वक्त रास्ते में हुई थी। भरत ख़ामोशी से सब सुनता रहा और फिर कहा,”प्राची चाहे पृथ्वी के पीछे जाए चाहे किसी और के तुम्हारा काम है सिर्फ उस पर नजर रखना और मुझे इन्फॉर्मेशन देना,,,,,,,,,,,,,!!!”
“लेकिन मैं ये नहीं बर्दास्त कर सकता वो किसी और से प्यार करे”,नीलेश ने कहा
“व्हाट ? ये क्या कह रहे हो तुम ?”, भरत ने हैरानी से कहा
“हाँ मैं नहीं बर्दास्त कर सकता जब वो पृथ्वी के लिए प्यार दिखाती है , उसकी बाते करती है और मैं क्या कोई भी बर्दास्त नहीं करेगा। मैं उस से प्यार करता हूँ पापा ,,,,,,,,,,,,,,बहुत प्यार करता हूँ”,नीलेश ने रोआँसा होकर कहा
भरत ने जैसे ही सुना उसे माथा ठनका और उसने नीलेश के सामने आकर दाँत पीसते हुए कहा,”मैंने तुम्हे उस पर नजर रखने को कहा था उस से प्यार करने को नहीं,,,,,,,,,,,,,,मिस्टर देसाई बहुत जल्द अपनी कम्पनी का नया CEO चुनने वाले है और उस जगह मैं तुम्हे देखना चाहता हूँ ताकि उस पूरी कम्पनी को हासिल कर सकू और तुम उस प्राची के साथ ये प्यार का खेल खेलना चाहते हो”
“मैं सच में उस प्यार करता हूँ पापा और उसके साथ रहना चाहता हूँ बस इसलिए मैं अब तक वो सब कर रहा था जो आपने मुझसे कहा लेकिन आज उसने , आज उसने मेरी बहुत बेइज्जती की पापा ,उसने मुझे बीच रास्ते पर छोड़ दिया और मेरे मुँह पर पैसे फेंक दिए,,,,,,,,,,वो ऐसी नहीं थी पापा लेकिन जब से वो उस पृथ्वी से मिली है तब से वो बदल गयी है। उसे पृथ्वी के अलावा कोई नहीं दिखता ,उस पृथ्वी ने उसका दिमाग खराब कर दिया है”,नीलेश ने रोआँसा होकर कहा
“वो ऐसी ही है,,,,,,,,,!!!”,भरत ने चिल्लाकर कहा तो नीलेश सहम गया
भरत नीलेश के पास आया और उसकी आँखों में देखकर गुस्से से कहा,”वो ऐसी ही है बद्तमीज , घमंडी और जिद्दी ,, जो लड़की अपने बाप की नहीं सुनती तुम्हे लगता है वो तुम्हारी सुनेगी ,, कान खोलकर सुन लो नीलेश तुम्हारी शादी वही होगी जहा मैं चाहूंगा इसलिए अपने दिमाग से उस प्राची का ख्याल तो तुम निकाल ही दो,,,,,,,,मैं अपनी मंजिल के बहुत करीब हूँ और तुम्हारी वजह से मैं अपने सपने को बर्बाद होते नहीं देख सकता समझे तुम,,,,,,,,,,,,!!!”
नीलेश ने सुना तो खामोश हो गया उसके पास भरत से कहने के लिए अब कुछ नहीं बचा था। भरत ने खुद को शांत किया और कहा,”एक बार देसाई तुम्हे प्राची के लिए चुन ले और तुम्हे अपनी कम्पनी का CEO बना दे उसके बाद मैं उस प्राची और उस देसाई को लात मारकर उसी की कम्पनी से बाहर कर दूंगा”
नीलेश ने देखा ये कहते हुए भरत की आँखों में एक पक्का विश्वास था , वह निराश होकर वहा से चला गया।
( क्या पृथ्वी और जयदीप की ये बहस और नोक-झोंक ऐसे ही चलती रहेगी ? सिद्धार्थ के मम्मी पापा के सामने अब क्या गड़बड़ करने वाली है सुरभि ? देसाई ग्रुप एंड कम्पनी हासिल करने के लिए आखिर भरत ने क्यों अपने ही बेटे को बनाया मोहरा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


OMG…yeh to pta nhi tha ki Neelesh aur Bharat baap-bate hai…aur Mr. Desai ki company ko hasil k krne k liye yeh sara khel Bharat ka hai….lakin afsos Neelesh ne Bharat k armano pe pani fer diya hai…halaki ab bhi wo apne baap Bharat ki baat manane ka dikhawa karenga…lakin pyar Prachi se karenga… dekhna hai yeh dono baap-bate ki jodi kya krti hai…but yeh Surbhi zarur Siddharth ko band bajwayegi…dekhna hai ki inki love story kab suru hogi…