Pasandida Aurat Season 2 – 71

Pasandida Aurat Season 2 – 71

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

शादी के बाद अवनि पहली बार पृथ्वी के घरवालों से मिल रही थी इस से पहले उसने सबको एक बार पहले बस शादी वाले दिन देखा था। अवनि ने देखा हॉल में एक बड़ी उम्र की महिला बैठी थी अवनि समझ गयी वे पृथ्वी की बड़ी मम्मी है इसलिए वह सर पर रखे दुपट्टे को सम्हालते हुए उनकी तरफ आयी और उनके पैर छुए लेकिन बड़ी मम्मी के मुँह से कोई आशीर्वाद नहीं निकला ना ही उन्होंने अपना हाथ अवनि के सर पर रखा। अवनि ने कुछ नहीं कहा बस ख़ामोशी से वहा से हट गयी।

उसने देखा सामने सोफे पर एक आदमी बैठा था जो कि पृथ्वी के चाचा थे। अवनि नजरे झुकाकर उनकी तरफ बढ़ी और जैसे ही उनके पैर छूने चाहे
उन्होंने अवनि को रोक दिया और कहा,”अरे बस बस बेटा , खुश रहो”
अवनि हल्का सा मुस्कुराई और फिर आकर चाची के पैर छुए उन्होंने नीलम की तरफ देखा जो कि उन्हें ही घूर रही थी इसलिए उन्होंने मुँह से कुछ नहीं कहा बस अपना हाथ अवनि के सर पर रख दिया।

चाची के बगल में ही साक्षी भाभी खड़ी थी अवनि ने उनके पैर छूने चाहे तो उन्होंने भी अवनि को रोक दिया क्योकि अवनि और साक्षी की उम्र में ज्यादा फर्क नहीं था। सबसे आखिर में अवनि अपना दिल मजबूत करके नीलम भुआ की तरफ आयी। नीलम भुआ से अवनि का सामना पहले भी बहुत बार हो चुका था और उसे याद था कि वो मुलाकातें बिल्कुल अच्छी नहीं थी फिर भी अपना धर्म निभाते हुए हुए अवनि जैसे ही उनके पैर छूने के लिए झुकी नीलम भुआ ने जान बूझकर किचन की तरफ जाते हुए कहा,”अरे गैस कब से चालू है , साक्षी ध्यान कहा रहता है तुम लोगो का ?”


अवनि का मन उदास हो गया वह समझ नहीं पा रही थी आखिर नीलम भुआ उस से इतनी नफरत क्यों करती है ?
अवनि एक तरफ खड़ी हो गयी क्योकि उसके लिए ये घर और इस घर में मौजूद लोग सब नए थे।
“खड़ी क्यों हो बैठो”,बड़ी मम्मी ने कहा
अवनि ने सुना तो पास ही पड़े मुड्ढे पर आ बैठी ये देखकर चाचा ने कहा,”अरे तुम वहा क्यों बैठ गयी ? यहाँ आराम से बैठो इन लोगो के मैं चलता हूँ”


कहकर चाचा चले गए वे नहीं चाहते थे घर की नयी बहू उनकी मौजूदगी में असहज हो। चाचा के जाने के बाद भी अवनि वही बैठी रही। चाची और साक्षी भी सोफे पर आ बैठी। अवनि ख़ामोशी से पलकें झुकाये बैठी थी , उसने देखा पृथ्वी के आई बाबा और लक्षित में से कोई भी यहाँ मौजूद नहीं था।
“कहा तक पढ़ी हो ?”,बड़ी मम्मी ने कठोर स्वर में पूछा


“जी , ग्रेजुएशन किया है उसके बाद बैंक में गोवेर्मेंट जॉब लग गयी तो आगे नहीं पढ़ पायी”,अवनि ने धीरे से कहा
“नौकरी छोड़कर यहाँ क्यों चली आयी , क्या तुम्हारे स्टेट मे शादी के लिए अच्छे लड़के नहीं थे ?”,बड़ी मम्मी ने उसी कठोरता से कहा
अवनि ने सुना अपनी पलकें उठाकर बड़ी मम्मी को देखा उसी आँखों में हलकी नमी थी जिसे सिर्फ साक्षी और चाची देख पा रही थी।


“अच्छे लड़के तो हर स्टेट में होते है भाभी लेकिन जहा नसीब जुड़ा हो हमे वही जाना पड़ता है,,,,,,,,,,अब देखो मेरा भी तो स्टेट अलग है और मैं यहाँ हूँ वैसे ही अवनि का नसीब यहाँ से जुड़ा था तो ये यहाँ चली आयी”,चाची ने अवनि की तरफ से जवाब दिया तो अवनि के दिल को थोड़ी तसल्ली मिली।
“तुम चुप करो गीता , अरे तुम्हारी और पंकज की शादी अम्मा ने तय की थी तुम अपने घर से भागकर नहीं आयी थी”,बड़ी मम्मी ने कहा तो चाची चुप हो गयी लेकिन उनकी ये बात सुनकर अवनि का दिल टूट गया। उसने कुछ नहीं कहा बस ख़ामोशी से इस बात को निगल गयी।


“क्या वहिनी ! ये भी कौनसा भागकर आयी है ,अरे अपना पृथ्वी खुद लेकर आया है इसे और फिर शादी भी तो की है”,नीलम भुआ ने आकर सोफे पर बैठते हुए कहा जबकि उनकी इस बात ने सिर्फ आग में घी डालने का काम किया ।  
“ऐसी शादी को समाज नहीं मानता और इतनी भी क्या जल्दी थी इन दोनों को शादी की ,, देर सवेर लता और रवि मान जाते तब धूमधाम से शादी करते , सब मेहमान ,जान पहचान के लोग आते , दोनों परिवार एक दूसरे से मिलते,,,,,,,,,,,,,,हिमांशु और साक्षी की शादी भी तो ऐसे ही हुई थी , उसने भी तो अपनी पसंद से ही की थी ना”,बड़ी मम्मी ने कहा


“अरे वहिनी दो परिवार तो तब मिलेंगे ना जब इसका कोई परिवार होगा”,नीलम भुआ ने अवनि की तरफ देखकर रूखे स्वर में कहा
अवनि ने सुना तो नीलम भुआ की तरफ देखा इस बार उसकी आँखों में नमी के साथ साथ गुस्से के भाव भी थे लेकिन वह फिर चुप रही क्योकि जिन लोगो के बीच वह बैठी थी वे सब पृथ्वी के परिवार का हिस्सा थे।

नीलम भुआ की बात सुनकर बड़ी मम्मी ने कहा,”क्या कहा नीलम , इसका कोई परिवार नहीं है ?”
“हाँ वहिनी ! माँ बचपन में गुजर गयी और बाप जवानी में , सुनने में आया दो चाचा है और उनका परिवार है तो बाप की मौत के बाद उन लोगो ने भी रिश्ता तोड़ दिया। वैसे देखा जाए तो हमारे पृथ्वी ने एक अनाथ लड़की से शादी की है जिसका न कोई घर है न कोई परिवार”,नीलम भुआ ने जान बुझकर अवनि को चोट पहुंचाने के लिए ये सब कहा


अवनि का दिल अंदर ही अंदर टूटकर बिखरा जा रहा था और जैसे ही उसने अपने लिए अनाथ शब्द सुना उसने नीलम भुआ की तरफ देखकर कहा,”मैं अनाथ नहीं हूँ भुआ जी ! अपने अगर नाराज हो जाये तो इसका मतलब ये नहीं है कि रिश्ते टूट गए,,,,,,,,,,,मेरा अपना घर भी है और परिवार भी , दोबारा ऐसी बात मत कहियेगा”
नीलम भुआ ने सुना तो उसके कलेजे पर साँप लोट गए। सबके बीच बैठकर आखरी अवनि उन्हें जवाब कैसे दे सकती है ?

उन्होंने एक नजर अवनि को देखा और कहा,”लो ! पृथ्वी की बायको तो अभी से उलटे सीधे जवाब देने लगी , पता नहीं बेचारी मेरी लता वहिनी का क्या होगा ?”
साक्षी को नीलम भुआ की बातें और अवनि का अपमान करना अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन वह मजबूर थी अगर कुछ कहती तो घरवाले उसे अवनि की तरफदारी  देखकर गलत समझ लेते। चाची को भी अवनि का उतरा हुआ चेहरा देखकर दुःख हुआ ,

नीलम भुआ और बड़ी मम्मी अपनी बातो से उसे और आहत ना करे इसलिए उन्होंने उठते हुए कहा,”अरे जीजी , भाभी अपने ये सवाल जवाब बाद में करना ,ये अभी अभी आयी है और हम लोगो ने इस से ना चाय-पानी पूछा न कोई नाश्ता ,, रुको मैं तुम्हारे लिए कुछ लेकर आती हूँ,,,,,,,,,,,!!!”
“तुम क्यों जाओगी गीता , नयी बहू आयी है तो इसे सबके लिए चाय बनाने दो , पता तो चले इसे कुछ बनाना आता भी है या नहीं”,बड़ी मम्मी ने कहा

“जी मैं बना लुंगी”,अवनि ने उठते हुए कहा
साक्षी ने देखा तो वह अवनि की तरफ आयी और कहा,”चलो मैं तुम्हारी मदद कर देती हूँ,,,,,,,,,,,,!!!”
साक्षी अवनि को वहा से लेकर चली गयी तो चाची ने कहा,”भाभी , जीजी आप दोनों उस से इस तरह से बात क्यों कर रही है ? वो पहली बार घर आयी है और आप दोनों उसे हर बात में नीचा दिखा रही है”

“हमने क्या नीचा दिखाया वहिनी , अब क्या सच भी ना बोले ?”,नीलम भुआ ने मुँह बनाकर कहा
“तुम चुप रहो गीता तुम्हे कुछ नहीं पता , बहुओ को कैसे कंट्रोल में रखा जाता है मुझे सब पता है,,,,,,,,,,!!!”,बड़ी मम्मी ने कहा तो बेचारी चाची अपना सा मुँह

लिए सोफे पर बैठ गयी लेकिन उन्हें अवनि के लिए सच में बुरा लग रहा था। इस घर में वह अकेली थी और बाकि सब उसके खिलाफ और चाची बाकि सबके खिलाफ जाकर अवनि का साथ भी नहीं दे पा रही थी।

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मिस्टर देसाई के ऑफिस से निकलकर पृथ्वी सीधा अपने ऑफिस आया और वाशरूम एरिया में चला आया। उसने चार पांच बार अच्छे से अपना मुँह धोया और फिर जेब से रुमाल निकालकर मुँह पोछने लगा। आज देसाई सर के ऑफिस में जो कुछ हुआ उस से पृथ्वी मन ही मन बहुत परेशान था। प्राची की बढ़ती बदतमीजी और मनमानियों से पृथ्वी तंग आ चुका था और आज इसलिए पहली बार उसने एक लड़की पर हाथ उठा दिया। पृथ्वी ने दो चार गहरी साँस ली और अपने केबिन में चला आया।

“पृथ्वी ! तुम्हारे घर से फोन आया था , तुम्हारा फोन बंद है क्या ?”,अंकित ने पूछा
“नहीं मेरा फ़ोन सर्विस पर दिया हुआ है कल पानी में गिर गया था”,कहते हुए पृथ्वी ने ऑफिस का सेलफोन उठाया और देखा हिमांशु भैया के नंबर से कॉल आया था। पृथ्वी ने हिमांशु का नंबर डॉयल किया।
“हेलो ! हाँ कौन ?”,हिमांशु भैया ने पूछा

“मैं पृथ्वी बोल रहा हूँ , आपने ऑफिस फोन किया था तब मैं बाहर था एक मीटिंग में”,पृथ्वी ने कहा
“अरे हाँ ! वो मैं अवनि को लेने घर आया था तब सोचा तुम्हे बता दू लेकिन तुम्हारा फोन बंद था इसलिए मुझे ऑफिस में करना पड़ा। अवनि को मैं घर ले आया हूँ वो बाहर है सबके साथ,,,,,,,,,,!!!”,हिमांशु ने कहा
“वहा सब ठीक है ना ?”,पृथ्वी ने धीरे से पूछा उसके शब्दों में घबराहट थी

“पृथ्वी ! तू क्यों टेंशन ले रहा है , यहाँ सब अपने है और अवनि के आने से सब खुश भी है,,,,,,,,,चिंता मत कर हम सब उसका ख्याल रखेंगे”,हिमांशु भैया ने ख़ुशी भरे स्वर में कहा
पृथ्वी ने सुना तो उसे राहत मिली और उसने कहा,”ठीक है मैं रखता हूँ”
“अवनि से बात करना चाहोगे ?”,हिमांशु ने कहा
“अह्ह्ह्ह अभी नहीं ! मैं बाद में उसे फोन कर लूंगा”,पृथ्वी ने बुझे स्वर में कहा , ना जाने क्यों उसकी अवनि से बात करने की हिम्मत नहीं हो रही थी।

“अच्छा ठीक है मैं रहता हूँ,,,,,,,बाय”,हिमांशु ने कहा और फोन काट दिया
“बाय,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने भी कहा और फोन साइड में रख दिया।
पृथ्वी अपनी कुर्सी पर आ बैठा उसके चेहरे पर उदासी और मायूसी के भाव थे ये देखकर अंकित ने कहा,”क्या हुआ तुम इतना उदास क्यों हो ?”
“कुछ नहीं,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने बुझे स्वर में कहा जबकि उसके दिमाग में देसाई सर के केबिन का वो सीन और अवनि चल रही थी।

“भाभी मायके चली गयी क्या ?”,अंकित ने मुस्कुरा कर कहा
अंकित के मुँह से ये सुनकर पृथ्वी ने एकदम से उसे देखा तो अंकित ने फिर कहा,”यही बात है ना इसलिए तुम इतना उदास हो ,, वैसे शादी के बाद वाइफ पहली बार अपने घर जाए तो उसे बिना अच्छा तो नहीं लगता,,,,,,,,,,,तुम्हारी हालत मैं समझ सकता हूँ,,,,,,,,,,,लेकिन सिर्फ भाभी मायके गयी है उनका बनाया टिफिन तो तुम्हारे पास है ना,,,,,,!!”

पृथ्वी ने सुना तो उसी नजर टेबल पर रखे अपने टिफिन पर गयी जो आज सुबह उसे अवनि से मिला था। पृथ्वी मुस्कुरा उठा और टिफिन लेकर टेबल की तरफ चला आया। मनीष , तान्या और कशिश तीनो आज खाना खाने केंटीन में गए थे और अंकित का आज उपवास था इसलिए पृथ्वी को अकेले ही खाना पड़ा। उसने टिफिन खोला तो पाया आज का पूरा खाना अवनि ने उसकी पसंद का बनाया है। वह मुस्कुराने लगा और जैसे ही सारे डिब्बे बाहर निकालकर रखे सबसे नीचे उसे एक चिट मिली।

पृथ्वी ने जल्दी से उसे निकाला और खोलकर पढ़ना चालू किया
“पृथ्वी ! मैं जानती हूँ ये कागज मिलने से पहले तक तुम उदासी में डूबे होंगे और मुझे पूरा यकीन है मेरे ही बारे में सोच रहे होंगे और ये कागज मिलने के बाद तुम्हारे चेहरे पर ख़ुशी और होंठो पर बच्चो सी मुस्कान होगी। शायद मैं सही हूँ तुम अभी मुस्कुरा रहे हो। आज मैंने सब तुम्हारी पसंद का बनाया है क्योंकि इसके बाद दो दिन तुम्हे बाहर खाना पड़ेगा या खुद से पकाना पड़ेगा। अब दो दिन मैं तुम्हारे साथ नहीं हूँ इसलिए मुझे ज्यादा मिस मत करना और अपना ख्याल रखना,,,,,,,,,,,,,,,,,तुम्हारी अवनि”

पृथ्वी ने उस चिट को एक बार पढ़ा , दो बार पढ़ा , ना जाने कितनी बार पढ़ा और जितनी बार पढ़ा उतनी बार मुस्कुराया। आखिर में उसने उसे अपने होंठो से छुआ और फिर शर्ट की जेब में रख लिया। उसने खाने को एक नजर देखा और जैसे ही खाने के लिए हाथ बढ़ाया अवनि के ख्याल ने उसे रोक लिया। वह उठा और ऑफिस के सेल को उठाकर उसमे अवनि का नंबर डॉयल किया।

साक्षी के साथ किचन में खड़ी अवनि चाय बना रही थी कि तभी उसका फोन बजा। अवनि ने स्क्रीन पर पृथ्वी के ऑफिस का नंबर देखा तो वह समझ गयी फोन पृथ्वी कर रहा है इसलिए उसने नहीं उठाया लेकिन नजरे स्क्रीन पर थी ये देखकर साक्षी ने कहा,”पृथ्वी का फोन है ?”
“हम्म्म,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने धीरे से कहा

“अरे तो फिर बात करो ना , जाओ चाय मैं सम्हाल लेती हूँ”,साक्षी ने मुस्कुरा कर कहा
अवनि ने फोन उठाया और वही किचन में थोड़ा साइड में खड़ी होकर फोन उठाया और कान से लगाकर कहा,”हेलो”
“थैंक गॉड तुमने फोन उठा लिया,,,,,,,,,,,,,मुझे तुम्हे वहा भेजना ही नहीं चाहिए था”,पृथ्वी ने एकदम से सीरियस होकर कहा

अवनि ने सुना तो उसका दिल धड़कने लगा , क्या पृथ्वी को ये आभास हो चुका कि अवनि यहाँ ठीक नहीं है उसने धीरे से कहा,”तुम ऐसा क्यों कह रहे हो ?”
“तो और क्या कहू ? तुम मेरे लिए मेरी पसंद का लंच बनाओगी और उसके साथ इतना प्यारा चिट लिखकर भेजोगी तो किसका दिल करेगा तुम्हे दूर भेजने का ?”,पृथ्वी ने बच्चो की तरह कुनमुनाते हुए कहा
अवनि ने सुना तो उसे तसल्ली मिली कि पृथ्वी को यहाँ के हालातो के बारे में नहीं पता है। उसने शांत स्वर में कहा,”सिर्फ दो दिन की बात है पृथ्वी”

“तुम्हारे लिए सिर्फ दो दिन है अवनि लेकिन मुझे तो अभी से दो साल जैसा महसूस हो रहा है,,,,,,एक काम करो तुम वापस आ जाओ , पता नहीं वहा तुम्हारा मन लग रहा होगा या नहीं”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने सुना तो उसकी आँखों में आँसू भर आये फिर भी उसने खुद को सम्हालकर कहा,”नहीं पृथ्वी ! यहाँ सब अच्छा है ,सब लोग भी बहुत अच्छे है,,,,,,,,,!!!”
अवनि की आवाज से पृथ्वी को महसूस हुआ जैसे वह उदास है इसलिए उसने कहा,”अवनि ! तुम्हारी आवाज को क्या हुआ , तुम उदास क्यों हो ?”

“नहीं मैं ठीक हूँ , वो आते ही मैंने फ्रीज से ठंडा पानी पी लिया न इसलिए गला खराब हो गया है”
“वाह बेटा ! बहुत बढ़िया , मतलब मैंने तुम्हे खुद से तुम्हे दूर क्या भेजा तुमने खुद को बीमार करना शुरू कर दिया ? अवनि वैसे बहुत लोग है वहा तुम्हारा ख्याल रखने के लिए फिर भी तुम्हे अपना ख्याल रहना चाहिए”,पृथ्वी ने प्यार से कहा

अवनि पृथ्वी से और झूठ बोलना नहीं चाहती थी इसलिए कहा,”अह्ह्ह पृथ्वी बाहर सब मुझे बुला रहे है मैं जाऊ ?”
“हाँ हाँ प्लीज,,,,,,,,,,मैं शाम में घर पहुंचकर फोन करता हूँ,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने भी हामी भरी और फोन काट दिया। उसने जैसे ही सामने देखा साक्षी ने कहा,”तुमने पृथ्वी से झूठ क्यों कहा अवनि ?”
“अगर मेरे झूठ कहने से उनके और उनके घरवालों के बीच की ये दूरिया खत्म होती है तो फिर मुझे ये मंजूर है”,अवनि ने कहा तो साक्षी प्यार से उसे देखने लगी  

(  क्या भुआ और बड़ी मम्मी जान बुझकर कर रही है अवनि को परेशान या ले रही है उसके सब्र की परीक्षा ? क्या चाची और साक्षी दे पायेगी अवनि का साथ या वो भी रहेगी खामोश ? क्या पृथ्वी जान पायेगा अपने घरवालों का सच ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 2” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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