Pasandida Aurat Season 2 – 65
Pasandida Aurat Season 2 – 65

अवनि की दी घडी को बचाने के लिए पृथ्वी दूसरी मंजिल से सीधा नीचे पूल में कूद गया ये देखकर अवनि का दिल धड़क उठा और चेहरे पर परेशानी के भाव उभर आये। वह घबराई हुई सी भागकर सुरभि के पास आयी और कहा,”सुरभि ! जल्दी नीचे चलो”
“क्या हुआ अवनि तुम इतना घबराई हुई क्यों हो ?”,सुरभि ने उठते हुए कहा
“पृथ्वी नीचे कूद गया है”,अवनि ने कहा उसकी आवाज में डर और पृथ्वी के लिए परवाह साफ दिखाई दे रही थी।
“क्या ? वो पागल है क्या ?”,सुरभि हैरानी से चिल्लाई
“प्लीज जल्दी चलो”,कहते हुए अवनि ने सुरभि का हाथ पकड़ा और उसे लेकर नीचे चली आयी। ऊपर रूफ टॉप पर जमा सभी लोग रेलिंग के पास आकर नीचे पूल में गिरे पृथ्वी को देखने लगे तो वही नीचे मौजूद लोग भी पूल के पास चले आये और समझने की कोशिश करने लगे की हुआ क्या ?
अवनि सुरभि को लेकर जल्दी से पूल के पास आयी और भीड़ को साइड कर आगे आकर देखा अपने हाथ में घडी का वो बॉक्स थामे पृथ्वी पानी से बाहर आ रहा था। अवनि ने पृथ्वी को सही सलामत देखा तो अपना हाथ सीने पर रखा और राहत की साँस ली। पृथ्वी को सही सलामत देखकर मैनेजेर ने भीड़ को वहा से भेजने लगा। पृथ्वी पूरा भीग चुका था और इसी के साथ उसका फोन भी पानी में भीगने से बंद हो गया। वह अवनि के सामने आया और डिब्बा उसकी तरफ बढ़ाकर कहा,”तुम्हारा गिफ्ट”
अवनि को पृथ्वी की इस हरकत पर बहुत गुस्सा आया इसलिए उसने पृथ्वी को फटकार लगाकर कहा,”ये तुमने क्या किया पृथ्वी , एक घडी के लिए तुम दो मंजिल से नीचे कूद गए , तुम्हे चोट लग जाती कुछ हो जाता तो,,,,,,,,,,,हाह ! तुम में जरा भी अकल नहीं है। खुद को समझते क्या हो तुम हाँ ? ये असल जिंदगी है पृथ्वी कोई फिल्म नहीं जो तुम बिना सोचे समझे कुछ भी करने लगो। तुम्हे पता भी है कितना डर गयी थी,,,,,,,,,,,,,,!!!”
अवनि को गुस्से में देखकर सुरभि ने भी शांत रहना ही सही समझा और चुपचाप खड़ी रही तो वही पृथ्वी अवनि की डांट सुनकर भी मुस्कुरा रहा था। उसे मुस्कुराते देखकर अवनि और चिढ गयी और कहा,”मैं तुम्हे डांट रही हूँ और तुम हंस रहे हो,,,,,,,,,,ये सब करके क्या मिलता है तुम्हे हाँ ?”
“तुम डाँटते हुए भी कितनी प्यारी लगती हो अवनि,,,,,,,,!!!”पृथ्वी ने मुस्कुरा कर कहा तो अवनि उसे घूरने लगी।
अवनि को घूरते पाकर पृथ्वी ने खुद को नार्मल किया और सर झुकाकर खड़ा हो गया। अवनि ने देखा पृथ्वी पूरा भीग गया है तो उसने सुरभि की तरफ पर्स बढाकर कहा,”तुम जाकर बिल पे कर दो”
“अरे मैं करता हूँ ना”,पृथ्वी ने आगे बढ़ने की कोशिश की लेकिन अवनि को अपनी ओर देखते पाकर रुक गया तो अवनि ने कहा,”ऐसे जाओगे ? हालत देखो अपनी,,,,,,,!!!”
पृथ्वी वही रुक गया और इधर उधर देखने लगा तो अवनि ने सुरभि से जाने को कहा और खुद पृथ्वी का हाथ पकड़कर साइड में ले आयी। साइड में आकर अवनि ने अपने दुप्पटे से पृथ्वी का सर पोछते हुए कहा,”इतने बड़े हो गए हो लेकिन ज़रा भी अकल नहीं है , सीधा पानी में कूद गए तुम वो भी इतनी ऊपर से ,,
एक तो वैसे ही ठण्ड है और उस पर ठन्डे पानी में कूद गए तुम ,, बीमार होने का ज्यादा शौक है तुम्हे और क्या हो जाता अगर वो डिब्बा पानी में गिर जाता तो , एक मामूली सी घडी ही तो थी और आ जाती लेकिन तुम्हे अगर कुछ हो जाता तो,,,,,,,,,,,,,,सच में पृथ्वी कभी कभी तो हद करते हो तुम”
अवनि को अपनी परवाह करते देखकर पृथ्वी को बहुत अच्छा लग रहा था साथ ही वह मन ही मन बहुत खुश भी हो रहा था कि उसे अवनि जैसी पत्नी मिली है जो उसकी इतनी परवाह है।
“अरे तुम्हारा दुपट्टा ख़राब हो जाएगा”,पृथ्वी ने अवनि को भुनभुनाते देखकर कहा
“हाँ ! दुपट्टे के खराब होने की फ़िक्र है तुम्हे लेकिन खुद की,,,,,,,,,,,क्या होगा तुम्हारा पृथ्वी ?”,अवनि ने रोआँसा होकर कहा
“कुछ नहीं होगा मुझे , हम हमेशा साथ रहेंगे”,पृथ्वी ने कहा तो अवनि का हाथ रुक गया और वह नम आँखों से उसे देखने लगी। सिर्फ उसका दिल जानता था कि कुछ देर पहले उसे क्या महसूस हो रहा था।
अवनि पृथ्वी को और डांट पाती इस से पहले सुरभि बिल पे करके वहा चली आयी साथ ही उसके हाथ में तीन आइसक्रीम थे जो पृथ्वी ने खाने के बाद आर्डर किये थे।
सुरभि के हाथो में आइसक्रीम देख के पृथ्वी अवनि की डांट भूल गया और जैसे ही सुरभि की तरफ लपका अवनि ने उसे रोककर कहा,”अब कहा ?”
“वो आइसक्रीम”,पृथ्वी ने कहा
“बिल्कुल नहीं ! तुम ये नहीं खाओगे , अभी अभी तुम भीगकर आये हो और अब तुम्हे आइसक्रीम खानी है , क्या तुम बीमार पड़ना चाहते हो पृथ्वी ?”,अवनि ने कहा
“अरे लेकिन मैं ठीक हूँ , एटलीस्ट चख तो सकता हूँ न”,पृथ्वी ने बच्चो की तरह मचलकर कहा
“बिल्कुल नहीं,,,,,,,,घर चलकर कपडे बदलो”,अवनि ने पृथ्वी को डाँटते हुए कहा तो पृथ्वी मायूस होकर सुरभि को देखने लगा। सुरभि पृथ्वी का साथ देने के बजाय उलटा उसे चिढ़ा चिढ़ा कर आइसक्रीम खा रही थी
पृथ्वी ने उसे धीरे से कहा,”हाह ! कितनी मतलबी हो न तुम , अकेले अकेले सब खा जाओगी ये नहीं कि थोड़ा मुझे भी दे दो”
“अवनि ! पृथ्वी कह रहा है कि,,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने पृथ्वी के साथ चलते हुए आगे चलती अवनि से कहा
“क्या कह रहा है ?”,अवनि ने पलटकर कहा
“अह्ह्ह्हह कुछ नहीं , कुछ भी तो नहीं”,पृथ्वी ने झेंपते हुए कहा और अवनि के बगल में चला आया। सुरभि पृथ्वी की हालत पर मुस्कुरा उठी और आइसक्रीम खाते हुए दोनों के पीछे चलने लगी। तीनो रेस्त्रो से बाहर रोड पर चले आये सुरभि एक आइसक्रीम निपटा चुकी थी अब उसके पास दो बॉक्स और बचे थे। पृथ्वी ललचाई नजरो से उसे देख रहा था। पृथ्वी का फोन पानी में गिरने की वजह से बंद हो चुका था और साथ ही भीगने की वजह से उसे ठण्ड भी लग रही थी।
अवनि ने अपने फ़ोन से कैब बुक किया और जब उसकी नजर पृथ्वी पर पड़ी तो उसे कांपते देखकर अवनि को अच्छा नहीं लगा। इस वक्त उसके पास एक्स्ट्रा कपडे भी नहीं थे जो पृथ्वी के काम आ सके। अवनि ने इधर उधर देखा कुछ ही दूर उसे एक कॉफी शॉप नजर आयी।
“तुम दोनों यही रुको मैं अभी आयी”,कहकर अवनि वहा से चली गयी पृथ्वी ने भी उसे जाने दिया क्योकी उसकी नजर तो सुरभि के हाथो में पकडे आइसक्रीम के बॉक्स पर थी। जैसे ही अवनि गयी पृथ्वी सुरभि की तरफ चला आया लेकिन ये क्या सुरभि तो कही और ही खोयी थी।
दरअसल फुटपाथ के पास लगी बेच पर एक लड़का और लड़की बैठे थे और लड़का अपने हाथ में पकड़ा बर्गर लड़की को ऑफर कर रहा था।
उन्हें देखकर सुरभि को एकदम से वो शाम याद आ गयी जब सिद्धार्थ पर गुस्सा होकर सुरभि रेस्त्रो के बाहर बेंच पर आ बैठी थी और उसे मनाने के लिए सिद्धार्थ बर्गर लेकर आया था। सुरभि उस कपल को देखने में इतना खो गयी कि उसे ये अहसास ही नहीं हुआ कि उसके पास खड़ा पृथ्वी दोनों बॉक्स की आइसक्रीम खत्म कर चुका है।
पृथ्वी ने देखा अवनि आ रही है तो वह जल्दी से आकर अपनी जगह पर खड़ा हुआ और अपना मुँह साफ करके मासूम सी शक्ल बनाकर खड़ा हो गया। अवनि के हाथ में एक कॉफी मग था जिसमे गर्म कॉफी थी। अवनि ने उसे पृथ्वी की तरफ बढ़ाया और कहा,”इसे पी लो तुम्हे थोड़ी गर्माहट मिलेगी”
“थैंक्यू,,,!!!”,पृथ्वी ने मग लेकर कहा तभी सुरभि को होश आया और वह चिल्लाई,”मेरी आइसक्रीम किसने खाई ?”
“किसने खाई से तुम्हारा क्या मतलब है ? तुम इतनी बड़ी भुक्कड़ हो खुद ही खा ली होगी और अब ड्रामा कर रही हो,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कॉफी पीते हुए मुँह बनाकर कहा।
“अरे नहीं,,,,,,,,अभी तो ठीक अब नहीं है”,सुरभि ने असमझ की स्तिथि में कहा क्योकि कुछ देर पहले उसके दोनों बॉक्स आइसक्रीम से भरे थे और अब दोनों खाली थे
“इट्स ओके ! कल सुबह मैं तुम्हारे लिए और आर्डर कर दूंगी”,अवनि ने सुरभि के हाथ से खाली बॉक्स लेकर डस्टबिन में डालते हुए कहा
बेचारी सुरभि उसे समझ ही नहीं आया कि उसके साथ ये क्या हुआ ? उसने शकभरी नजरो से पृथ्वी को देखा तो पृथ्वी ने कॉफी पीते हुए उसे ऐसे इग्नोर किया जैसे वह उसे जानता ही ना हो।
कैब आ चुकी थी , तीनो कैब में आ बैठे और घर के लिए निकल गए। उसी रेस्त्रो के रूफ टॉप पर खड़ा विक्रम उन तीनो को जाते हुए देख रहा था। उसने आसमान की तरफ देखा और कहा,”आप भी कमाल करते हो , जो लड़की मुझे पहली नजर में भा गयी उसे बार बार मेरे सामने ले आते हो,,,,,,,,,,,,,लेकिन मोहब्बत के साथ ये दुश्मनी देनी जरुरी थी क्या ?”
पृथ्वी , अवनि और सुरभि घर पहुंचे। पृथ्वी कपडे बदलने चला गया उसने देखा उसका फोन पानी में गिरने की वजह से बंद हो चुका है। उसने अपना फ़ोन खोलकर साइड में रखा और बाथरूम में घुस गया। उसने एक गर्म पानी का शॉवर लिया और गर्म कपडे पहनकर बाहर चला आया। सुरभि भी कपडे बदल चुकी थी और अवनि किचन में थी , वह पृथ्वी के लिए कोई काढ़ा बना रही थी।
पृथ्वी हॉल में आया और सुरभि को चुप देखकर कहा,”क्या हुआ ! जुबान चार्ज पर लगाई है क्या ?”
सुरभि ने सोफे पर पड़ा कुशन उठाया और पृथ्वी की तरफ फेंककर कहा,”तुम बहुत बुरे हो , वो आइसक्रीम तुमने खायी थी”
पृथ्वी ने कुशन कैच किया और सुरभि से कुछ दूरी बनाकर उसके बगल में बैठकर कहा,”अरे तो क्या हो गया ? मैं कल तुम्हारे लिए और ले आऊंगा वैसे भी उस वक्त तुम किसी के ख्यालो में खोयी हुई थी”
सुरभि ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी की तरफ देखा , आखिर पृथ्वी को कैसे पता सोचकर सुरभि सामने देखने लगी। पृथ्वी ने उसकी टीशर्ट की बाजु का कोना पकड़ा और कहा,”बताओ बताओ ! आखिर तुम किस के ख्यालो में खोयी थी ?”
“अह्ह्ह्हह किसी के भी नहीं , तुम मुझसे ऐसी बाते क्यों कर रहे हो ?”,सुरभि ने अपनी टीशर्ट छुड़ाकर चिढ़ते हुए कहा
ओह्ह्ह्ह तुम चिढ रही हो इसका मतलब कोई तो है जिसके बारे में तुम सोच रही हो,,,,,,,,बताओ बताओ कौन है ? वैसे तुम चाहो तो उसे इम्प्रेस करने में मैं तुम्हारी हेल्प कर सकता हूँ , तुम चाहो तो मुझसे एडवाइस ले सकती हो”,पृथ्वी ने इतरा कर कहा
सुरभि ने पृथ्वी की तरफ देखा और मन ही मन कहा,”अगर मैंने तुम्हे बताया कि वो कौन है तो इम्प्रेस का तो पता नहीं तुम उसका खून जरूर कर दोगे,,,,,,,,,,,,,,,,,,ओह्ह्ह्ह ये मैं कहा फंस गयी”
सुरभि ने मन ही मन सोचते हुए रोने जैसे मुँह बनाया तो पृथ्वी ने कहा,”अरे अरे मैं तो मजाक कर रहा हूँ,,,,,,,,,,!!!”
सुरभि ने सुना तो खा जाने वाली नजरो से पृथ्वी को देखा , पृथ्वी ने वहा से उठने में ही अपनी भलाई समझी और बालकनी में चला आया। सुरभि भी उठकर कमरे
में चली गयी और अपना सामान पैक करने लगी क्योकि उसे सुबह की फ्लाइट से निकलना था।
अवनि ने पृथ्वी के लिए जो काढ़ा बनाया था उसे कप में छानकर हॉल में चली आयी। उसने देखा पृथ्वी बालकनी में खड़ा है तो वह उसकी तरफ आयी और कहा,”पृथ्वी ये लो इसे पी लो”
“ये क्या है ? दिखने में तो बहुत ही वाहियात लग रहा है”,पृथ्वी ने काढ़ा देखकर मुँह बनाते हुए कहा
“चुपचाप पीओ इसे”,अवनि ने कठोर स्वर में कहा
“जी मैडम जी”,पृथ्वी ने भी शब्दों पर जोर देकर कहा और एक साँस में काढ़ा पी लिया जिसे पीने के साथ ही पृथ्वी का बुरा सा मुँह भी बन गया और उसने कहा,”इस से अच्छा तो तुम मुझे जहर दे देती मैं ख़ुशी ख़ुशी खा लेता”
“तुम्हे देने के लिए जहर से भी अच्छी चीज है मेरे पास”,अवनि ने कहा
“अब क्या है ? देखो अवनि मैं अब और कुछ नहीं पीने वाला हूँ”, पृथ्वी ने घबराकर कहा
“मैं अभी आयी”,कहकर अवनि हॉल में आयी वहा पड़े अपने पर्स को उठाया और उसमे रखे डिब्बे को निकालकर पृथ्वी की तरफ चली आयी। पृथ्वी के सामने आकर अवनि ने कहा,”अपना हाथ आगे करो”
पृथ्वी ने अपना हाथ आगे किया तो अवनि ने डिब्बे में रखी घडी निकाली और पृथ्वी की कलाई पर बांधते हुए कहा,”मुझे उम्मीद है तुम्हे ये पसंद आएगी”
“ये बहुत अच्छी है”,पृथ्वी ने कहा
“तो फिर तुम इसे रोज पहनोगे न ?”,अवनि ने चमकती आँखों से पृथ्वी को देखकर कहा
“हाँ रोज ! अब इस घडी की सुईया मेरी धड़कनो के साथ ही रुकेगी”,पृथ्वी ने अवनि की आँखों में देखते हुए कहा
पृथ्वी के ये शब्द सुनकर अवनि के दिल में एक चुभन का अहसास हुआ और आँखों में दर्द उभर आया उसने तड़प कर अपनी उंगलिया पृथ्वी के होंठो पर रखी और ना में अपनी गर्दन हिला दी
पृथ्वी की जगह कोई और होता तो क्या पानी में कूदने की बेवकूफी करता ? क्या विक्रम की गन्दी नजर पड़ चुकी है अवनि पर ? घडी को लेकर पृथ्वी ने क्यों कहे ऐसे शब्द जिन्हे सुनकर अवनि तड़प उठी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


अवनि सुरभि को लेकर जल्दी से पूल के पास आयी और भीड़ को साइड कर आगे आकर देखा अपने हाथ में घडी का वो बॉक्स थामे पृथ्वी पानी से बाहर आ रहा था। अवनि ने पृथ्वी को सही सलामत देखा तो अपना हाथ सीने पर रखा और राहत की साँस ली। पृथ्वी को सही सलामत देखकर मैनेजेर ने भीड़ को वहा से भेजने लगा। पृथ्वी पूरा भीग चुका था और इसी के साथ उसका फोन भी पानी में भीगने से बंद हो गया। वह अवनि के सामने आया और डिब्बा उसकी तरफ बढ़ाकर कहा,”तुम्हारा गिफ्ट”
अवनि सुरभि को लेकर जल्दी से पूल के पास आयी और भीड़ को साइड कर आगे आकर देखा अपने हाथ में घडी का वो बॉक्स थामे पृथ्वी पानी से बाहर आ रहा था। अवनि ने पृथ्वी को सही सलामत देखा तो अपना हाथ सीने पर रखा और राहत की साँस ली। पृथ्वी को सही सलामत देखकर मैनेजेर ने भीड़ को वहा से भेजने लगा। पृथ्वी पूरा भीग चुका था और इसी के साथ उसका फोन भी पानी में भीगने से बंद हो गया। वह अवनि के सामने आया और डिब्बा उसकी तरफ बढ़ाकर कहा,”तुम्हारा गिफ्ट”
अवनि सुरभि को लेकर जल्दी से पूल के पास आयी और भीड़ को साइड कर आगे आकर देखा अपने हाथ में घडी का वो बॉक्स थामे पृथ्वी पानी से बाहर आ रहा था। अवनि ने पृथ्वी को सही सलामत देखा तो अपना हाथ सीने पर रखा और राहत की साँस ली। पृथ्वी को सही सलामत देखकर मैनेजेर ने भीड़ को वहा से भेजने लगा। पृथ्वी पूरा भीग चुका था और इसी के साथ उसका फोन भी पानी में भीगने से बंद हो गया। वह अवनि के सामने आया और डिब्बा उसकी तरफ बढ़ाकर कहा,”तुम्हारा गिफ्ट”
Bilkul Vikram ki gandi Nazar Avni pe pad chuki hai…aur mujhe to esa lagta hai ki Prachi aur vikram dono milkar Prithvi aur Avni ko alag krne ki koshish karenge…dekhte hai kya hota hai…but jo Surbhi aur Prithvi ko Jija-saali wali nok-jhok hoti hai, wo bahot badhiya lagti hai.
Yaar iss vikram ko avni hi pasand aai kyu yaar kyu pehle laga wo prachi ko pasand karne laga hai