Pasandida Aurat Season 2 – 63

Pasandida Aurat Season 2 – 63

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी के कोट को हाथ में थामे प्राची उसके ख्यालो में खोयी हुई मुस्कुरा रही थी तभी नीलेश कोई फाइल लेकर अंदर आया और कहा,”मेम ! ये कपूर एंड ग्रुप की फाइल,,,,,,,,,,,!!!”
प्राची को खोया देखकर नीलेश बोलते बोलते रुक गया उसने देखा प्राची एक कोट हाथ में पकडे बस मुस्कुरा रही है। वह कुछ देर ख़ामोशी से प्राची को देखता रहा और फिर कहा,”मेम , मेम,,,,,,,,,,,,!!!”
नीलेश की आवाज से प्राची की तंद्रा टूटी , उसने हाथ में पकड़ा कोट साइड में कुर्सी पर रखा और नीलेश के पास आकर कहा,”तुम कब आये ?”

“जब आप उस कोट को छूकर मुस्कुरा रही थी , क्या उस कोट में कुछ ख़ास है ?”,नीलेश ने बुझे स्वर में कहा
“अह्ह्हम्मम्मम ! उस कोट में तो नहीं पर हाँ उसे पहनने वाला बहुत ख़ास है,,,,,,,,,वेल तुम कुछ कह रहे थे”,प्राची ने कहा
प्राची की बात सुनकर नीलेश का मन उदास हो गया लेकिन उसने अपने मन की उदासी अपने चेहरे पर नहीं आने दी और कहा,”जी मेम ! ये कपूर एंड
 ग्रुप्स की फाइल है सर ने कहा है आप एक बार इसे देख ले और फिर साईंन करके उनके केबिन में भिजवा दे,,,,,,,,,,,और”

नीलेश कहते कहते रुक गया तो प्राची ने कहा,”और ?”
“और सर ने कहा है कि कपूर ग्रुप्स के साथ अब से सभी मीटिंग्स आप अटेंड करेंगी”,नीलेश ने कहा
“अह्ह्ह्ह ठीक है,,,,,,,,,,,,,अच्छा नीलेश”,प्राची ने फाइल देखते हुए कहा
“जी मेम”,नीलेश ने कहा
“इस वीक मौर्या Pvt Ltd से मीटिंग के लिए कोई आने वाला था उसका क्या हुआ ?”,प्राची ने पूछा
“मेम ! वो मीटिंग कल सुबह 10 बजे है , आई थिंक मिस्टर अंकित और लीगल टीम से कोई आएगा,,,,!!!”,नीलेश ने कहा

“अंकित ? क्या मिस्टर मौर्या को इतनी भी समझ नहीं है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए किसी नए एम्प्लॉय को भेजना इस डील को नुकसान में डाल सकता है , उन्हें इन्फॉर्म करो किसी Intelligent और experienced बन्दे को भेजे,,,,,,!!”,प्राची ने कहा
“जी मेम,,,,,,,,,,,!!”,कहकर नीलेश वहा से निकल गया और प्राची मुस्कुराते हुए फिर पृथ्वी के कोट तक चली आयी।

प्राची के केबिन से निकलकर नीलेश बड़बड़ाते हुए आगे बढ़ गया ,”हाह ये प्राची को आखिर हो क्या गया है ?
एक शादीशुदा मर्द के पीछे इतनी पागल क्यों रही है वो ? कम ऑन प्राची पृथ्वी उपाध्याय तुम्हे घास तक नहीं डालता और तुम तुम दिन रात उसके सपने देखती रहती हो। मौर्या ग्रुप एंड कम्पनी के किसी भी एम्प्लॉय को उठाकर देख लो सब तुम्हारी कम्पनी के एम्प्लॉय से बेस्ट है , मिस्टर अंकित क्या कम इंटेलिजेंट है ,,

नहीं पर तुम्हे तो उस पृथ्वी को यहाँ देखना है,,,,,,,,,,कब प्राची आखिर कब समझ आएगा तुम्हे कि हर वो चीज जो तुम चाहती हो वो तुम्हे हासिल नहीं हो सकती,,,,,,,,,,,तुम्हारे आस पास तुम्हे चाहने वालो की कमी नहीं है लेकिन फिर भी तुम्हे नजर नहीं आता,,,,,,,,,!!!”
चलते चलते नीलेश सामने से आते मिस्टर भरत से टकरा गया और उन्होंने कहा,”देखकर नीलेश ! ध्यान कहा है तुम्हारा ?”
“अह्ह्ह वो पा,,,,,आई ऍम सॉरी सर मैं जल्दी में था इसलिए मैंने देखा नहीं , आई ऍम सॉरी”,कहकर नीलेश ने अपना सर झुकाया और भरत के साइड से निकल गया।

सीवुड्स ग्रैंड सेंट्रल मॉल , नवी मुंबई
खाना खाने के बाद अवनि सुरभि को साथ लेकर उसी मॉल के एक वाच सेक्शन में चली आयी। जैसा कि सुरभि ने कहा था वह पृथ्वी को एक तोहफा देना चाहती थी इसलिए उसने उसके लिए एक घडी खरीदी जो की बहुत ही प्यारी थी। अवनि ने पैसे दिए और फिर बाहर चली आयी। शॉपिंग करते करते शाम के 5 बज चुके थे। सुरभि ने कलाई पर बंधी घड़ी में समय देखा और कहा,”अरे यार अवनि ! ये पृथ्वी कहा रह गया ? उसने कहा था वह मूवी टाइम पर आ जाएगा लेकिन उसका तो कोई अता पता ही नहीं है,,,,,,,,,,शाम 6 बजे का शॉ है , उसे फोन करो ना”

“मैं फोन करू ?”,अवनि ने हैरानी भरे स्वर में ऐसे कहा जैसे पृथ्वी को नहीं बल्कि किसी अनजान आदमी को फोन करना हो
“अवनि ! बेटा ये मांग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र पृथ्वी के नाम का तुमने पहना है तो तुम ही उसे फोन करोगी ना,,,,,,,,,,मैं तो कर नहीं सकती,,,,,,,,,,,,,,अब ये मत कहना कितुम्हारे पास पृथ्वी का नंबर नहीं है”,सुरभि ने अवनि को आँखे दिखाकर कहा
“है ना नंबर है”,अवनि ने कहा

“हाँ तो फिर फोन करो उसे,,,,,,,और पूछो उस से कि वो कहा है ?”,सुरभि ने अवनि को आदेश दिया
 अवनि बैग से फोन निकाला और पृथ्वी का नंबर सर्च किया। जैसे ही पृथ्वी का नंबर सामने आया अवनि की आँखे हैरानी से बड़ी हो गयी पृथ्वी का नाम “मेरा पृथ्वी” करके सेव किया हुआ था। अवनि ने हैरानी से सुरभि को देखा तो सुरभि उसे मंद मंद मुस्कुराती नजर आयी और ये देखकर अवनि समझ गयी कि ये शरारत सुरभि की है तो उसने कहा,”ये तुमने किया ?”

“हाह ! मैं ये क्यों करुँगी ? जितना तुम्हारा पति तुम्हे लेकर ऑब्सेस्ड है उसी ने किया होगा , अब तुम तो उस पर अपना हक़ जताती नहीं हो इसलिए वह खुद से जताकर खुश हो गया होगा”,सुरभि ने इतराकर कहा
“तुम्हे नहीं लगता तुम कुछ ज्यादा ही अजीब हो गयी हो ?”,अवनि ने पृथ्वी का नंबर डॉयल करके कहा
“हाँ बिल्कुल ! अब जल्दी से उसे फोन करो और यहाँ बुलाओ”,सुरभि ने बच्चो की तरह मचलकर कहा
अवनि ने फोन कान से लगाया जैसे जैसे रिंग जा रही थी अवनि का दिल धड़कने लगा।

ऑफिस के मीटिंग रूम में 10 लोगो के सामने बैठा पृथ्वी किसी फाइल को लेकर डिस्कस कर रहा था। इस मीटिंग में पृथ्वी सीनियर था और बाकि सब जूनियर और आज पृथ्वी को मौका मिल गया सभी क्लास लगाने का जिसमे तान्या और कशिश भी शामिल थी। मनीष इस मीटिंग में नहीं था क्योकि ये मीटिंग किसी दूसरे प्रोजेक्ट को लेकर थी और मनीष का काम सिर्फ फाइल अरेंज और रीड करना होता था। पृथ्वी बहुत सीरियस होकर सबसे बात कर रहा था और उन्हें काम कैसे करना है ये समझा रहा था तभी उसका फोन बजा।

पृथ्वी ने फ़ोन उठाकर देखा स्क्रीन पर “मेरी अवनि” लिखा देखकर पृथ्वी हल्का सा मुस्कुराया। कुछ देर पहले उसके चेहरे पर कठोरता और गंभीरता थी और अब उसके चेहरे से एक मासूमियत साफ झलक रही थी। पृथ्वी ने फोन उठाकर कान से लगाया और धीरे से कहा,”हेलो”
पृथ्वी की आवाज सुनकर अवनि का दिल धड़का और उसने धीरे से कहा,”हेलो पृथ्वी”

“हम्म्म”,पृथ्वी ने कहा क्योकि बेचारा इस वक्त 9 लोगो के साथ बैठा था इसलिए ज्यादा बोल नहीं पा रहा था
“मैं और सुरभि सीवुडस मॉल आये है”,अवनि ने कहा
“हम्म्म,,,,,!!!”,पृथ्वी ने अपने होंठो को आपस में दबाकर कहा
“तुमने कहा था तुम हमारे साथ मूवी चलोगे”,अवनि ने पूछा
“हम्म्म”,पृथ्वी ने फिर कहा

“तो तुम आ रहे हो न ?”,अवनि ने पूछा
“हम्म्म हम्म्म्म”,पृथ्वी ने फिर वही हम में जवाब दिया
“ठीक है तो फिर मैं फोन रखती हूँ”,अवनि ने कहा
“हम्म्म्म”,पृथ्वी ने हताश होकर कहा क्योकि सबके सामने अवनि से ठीक से बात कर नहीं पा रहा था और उठकर बाहर भी नहीं जा सकता था।

“ठीक है तुम आ जाओ , मैं और सुरभि यहाँ तुम्हारा वेट कर रहे है,,,,,,,,,,बाय”,अवनि ने कहा और फोन काट दिया
“बाय,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी के मुँह से सहसा ही निकला और फोन कट गया।
पृथ्वी ने फोन साइड में रखा और देखा सभी उसे ही देख रहे है तो उसने कहा,”मुझे क्या देख रहे हो काम पर ध्यान दो”
सभी अपने अपने काम में लग गए और पृथ्वी बार बार अपना फोन उठाकर देखने लगा इस उम्मीद में कि शायद अवनि उसे मैसेज करे लेकिन अवनि का कोई मैसेज नहीं था।

“क्या कहा पृथ्वी ने ?”,अवनि के फोन रखने के बाद सुरभि ने पूछा
“उसने कहा ‘ह्म्म्मम्म'”,अवनि ने बुझे स्वर में कहा
“क्या क्या क्या , क्या कहा उसने ?”,सुरभि ने पूछा
“उसने कुछ नहीं कहा वो मेरी हर बात बस ‘हम्म्म’ में जवाब दे रहा था , सुरभि लगता है पृथ्वी मुझसे सच में नाराज है”,अवनि ने मायूस होकर कहा

“चिंता मत करो , जब वो तुम्हे देखेगा तो अपनी नाराजगी भूल जाएगा आओ चलते है”,सुरभि ने कहा और अवनि को अपने साथ लेकर लिफ्ट की तरफ बढ़ गयी।
दोनों मॉल के दूसरे माले पर बने मल्टीप्लेक्स में आयी और सुरभि टिकट्स लेने चली गयी। अवनि वेटिंग एरिया में आ बैठी और पृथ्वी के आने का इंतजार करने लगी।

10 मिनिट बाद पृथ्वी मीटिंग रूम से निकला और फोन की स्क्रीन पर समय देखा जो कि शाम के 5:15 दिखा रही थी। ऑफिस खत्म होने में अभी एक घंटा बाकि था और पृथ्वी को जल्दी निकलना था इसलिए वह सीधा जयदीप के केबिन में आया और कहा,”सर ! आज का लगभग काम हो चुका है , लास्ट मीटिंग भी  हो चुकी तो क्या अब मैं घर जा सकता हूँ ?”
जयदीप ने सुना तो हाथ पर बंधी घडी में समय देखा और कहा,”लेकिन पृथ्वी घर जाने में अभी एक घंटा बाकि है क्यों ना तब तक तुम ये कुछ नए प्रोजेक्ट्स पर एक नजर मार लो,,,,,,,,,,,,!!!”

पृथ्वी ने सुना और जयदीप की तरफ देखकर कहा,”सर इन्हे मैं कल सुबह आकर देख लूंगा , अभी मुझे किसी जरुरी काम से बाहर जाना है”
“पृथ्वी ! ऑफिस के काम से ज्यादा जरुरी काम क्या हो सकता है ? तुम कही नहीं जा रहे वैसे भी शाम को मैं पनवेल की तरफ जाऊंगा तो जाते हुए तुम्हे घर छोड़ दूंगा,,,,,,,,,,चलो अब आओ और ये प्रोजेक्ट्स देखो”,जयदीप ने बॉस होने के नाते कहा

“दरअसल आज मैंने अवनि और उसकी दोस्त को फिल्म दिखाने का वादा किया है , वे दोनों सीवूडस मॉल में मेरा इंतजार कर रही है,,,,,,काफी टाइम बाद मुझे अवनि के साथ अच्छा वक्त बिताने का मौका मिला है और आप चाहते है मैं आपके साथ बैठकर ये फाइल्स में अपना सर खपाऊ,,,,,,,,,,,,ठीक है रुक जाता हूँ मैं लेकिन कल अगर मैडम आपसे ये पूछे की आपके पर्स से रेस्त्रो के साथ साथ बार एंट्री के कपल पास मिले है तो मुझे मत कहना”,पृथ्वी ने पहले मासूमियत से कहा और बस में जयदीप को एक प्यारभरी धमकी दी।

अरे लेकिन वो मेरी दूर की कजिन है”,जयदीप ने घबराकर कहा
“ये बात सिर्फ आप जानते है,,,,,,,,,मैडम को तो नहीं पता न, बट डोंट वरी मैं उन्हें बता दूंगा”,पृथ्वी ने मुस्कुरा कर कहा
“ओके फाइन तुम जा सकते हो,,,,,,,,,हाह ! मैनेजर होकर अपने बॉस को ब्लेकमैल करते तुम्हे शर्म नहीं आती,,,,,,,,,,!!!”,जयदीप ने चिढ़कर कहा

“आती है लेकिन अपनी वाइफ के मामले में मैं थोड़ा सेल्फिश हो जाता हूँ,,,,,,,,,,,बाय कल मिलता हूँ”,पृथ्वी ने कहा और वहा से चला गया।
पृथ्वी के जाने के बाद जयदीप खुद पर ही झल्लाया,”अह्ह्ह्हह ये मेरी खाने के बिल पर्स में रखने की आदत कब जाएगी ?”

पृथ्वी अपने केबिन में आया जल्दी जल्दी अपना सब सामान बैग में रखा और फोन की स्क्रीन पर समय देखा 5:25 हो चुके थे। पृथ्वी के ऑफिस से मॉल 10 किलोमीटर की दूरी पर था लेकिन इस टाइम मुंबई में सबसे ज्यादा ट्रेफिक देखने को मिलता था।  पृथ्वी ने ऑटो पकड़ा और मॉल के लिए निकल गया। मॉल से 500 दूरी पर आकर रिक्शा जाम में फंस गया पृथ्वी ने 2 मिनिट इंतजार किया और फिर पैसे चुकाकर नीचे उतर गया। वह पैदल ही मॉल की तरफ चल पड़ा। चेहरे पर पसीने की बुँदे उभर आयी।

मूवी शुरू होने से 10 मिनिट पहले पृथ्वी अवनि के सामने था और हाफ रहा था लेकिन जैसे ही उसने अवनि को देखा वह अपनी सारी उलझन सारी थकान भूल गया और प्यारभरी नजरो से उसे देखने लगा। पृथ्वी को हफ्ते देखकर अवनि ने कहा,”तुम इतना हाफ क्यों रहे हो ?”
“वो मैं भागकर आया ना इसलिए,,,,,हाह”,पृथ्वी ने कहा

अवनि ने बैग से पानी का बोतल निकाला और ढक्कन खोलकर बोतल पृथ्वी की तरफ बढाकर कहा,”पानी पीओ”
पृथ्वी ने बोतल ली और पानी पीने लगा , पृथ्वी ने एक साँस में पानी की उस आधी बोतल को खत्म कर दिया ये देखकर अवनि को अहसास हुआ कि पृथ्वी को कितनी प्यास लगी थी।

पृथ्वी ने खाली बोतल अवनि की तरफ बढ़ा दी। अवनि ने देखा पृथ्वी के ललाट पर पसीने की बुँदे भी उभर आयी है और चेहरा काफी थका थका भी लग रहा है तो वह पृथ्वी के पास आयी और अपने दुपट्टे से उसका चेहरा पोछते हुए कहा,”तुम्हे अपना ज़रा भी ख्याल नहीं है पृथ्वी,,,,,,,,कितनी थकान है तुम्हारे चेहरे पर,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी तो बस अपनी पलकें झपकाना ही भूल गया जैसे , अवनि का उसके करीब आना और सबके सामने उसके लिए परवाह जताना उसके लिए किसी सपने से कम नहीं था।

सुरभि पॉपकॉर्न लेने गयी थी जैसे ही लेकर वापस पलटी उसकी नजर अवनि और पृथ्वी पर पड़ी। उसने दूसरे हाथ में पकड़ी मूवी टिकट्स को देखा और उन्हें हवा में उछालकर कहा,”हाह ! ये फिल्म देखकर क्या करुँगी ? असली फिल्म तो सामने चल रही है”

( क्या प्राची जाएगी पृथ्वी से मिलने उसके ऑफिस या उसे करेगी मजबूर अपने पास आने के लिए ? क्या पृथ्वी करेगा जयदीप को ब्लेकमैल करना बंद या फिर ऐसे ही चलेगी उसकी मनमानी ? क्या सच में मूवी से बेहतर था पृथ्वी और अवनि का वो मोमेंट ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
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Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

पृथ्वी के कोट को हाथ में थामे प्राची उसके ख्यालो में खोयी हुई मुस्कुरा रही थी तभी नीलेश कोई फाइल लेकर अंदर आया और कहा,”मेम ! ये कपूर एंड ग्रुप की फाइल,,,,,,,,,,,!!!”
प्राची को खोया देखकर नीलेश बोलते बोलते रुक गया उसने देखा प्राची एक कोट हाथ में पकडे बस मुस्कुरा रही है। वह कुछ देर ख़ामोशी से प्राची को देखता रहा और फिर कहा,”मेम , मेम,,,,,,,,,,,,!!!”
नीलेश की आवाज से प्राची की तंद्रा टूटी , उसने हाथ में पकड़ा कोट साइड में कुर्सी पर रखा और नीलेश के पास आकर कहा,”तुम कब आये ?”

पृथ्वी के कोट को हाथ में थामे प्राची उसके ख्यालो में खोयी हुई मुस्कुरा रही थी तभी नीलेश कोई फाइल लेकर अंदर आया और कहा,”मेम ! ये कपूर एंड ग्रुप की फाइल,,,,,,,,,,,!!!”
प्राची को खोया देखकर नीलेश बोलते बोलते रुक गया उसने देखा प्राची एक कोट हाथ में पकडे बस मुस्कुरा रही है। वह कुछ देर ख़ामोशी से प्राची को देखता रहा और फिर कहा,”मेम , मेम,,,,,,,,,,,,!!!”
नीलेश की आवाज से प्राची की तंद्रा टूटी , उसने हाथ में पकड़ा कोट साइड में कुर्सी पर रखा और नीलेश के पास आकर कहा,”तुम कब आये ?”

पृथ्वी के कोट को हाथ में थामे प्राची उसके ख्यालो में खोयी हुई मुस्कुरा रही थी तभी नीलेश कोई फाइल लेकर अंदर आया और कहा,”मेम ! ये कपूर एंड ग्रुप की फाइल,,,,,,,,,,,!!!”
प्राची को खोया देखकर नीलेश बोलते बोलते रुक गया उसने देखा प्राची एक कोट हाथ में पकडे बस मुस्कुरा रही है। वह कुछ देर ख़ामोशी से प्राची को देखता रहा और फिर कहा,”मेम , मेम,,,,,,,,,,,,!!!”
नीलेश की आवाज से प्राची की तंद्रा टूटी , उसने हाथ में पकड़ा कोट साइड में कुर्सी पर रखा और नीलेश के पास आकर कहा,”तुम कब आये ?”

पृथ्वी के कोट को हाथ में थामे प्राची उसके ख्यालो में खोयी हुई मुस्कुरा रही थी तभी नीलेश कोई फाइल लेकर अंदर आया और कहा,”मेम ! ये कपूर एंड ग्रुप की फाइल,,,,,,,,,,,!!!”
प्राची को खोया देखकर नीलेश बोलते बोलते रुक गया उसने देखा प्राची एक कोट हाथ में पकडे बस मुस्कुरा रही है। वह कुछ देर ख़ामोशी से प्राची को देखता रहा और फिर कहा,”मेम , मेम,,,,,,,,,,,,!!!”
नीलेश की आवाज से प्राची की तंद्रा टूटी , उसने हाथ में पकड़ा कोट साइड में कुर्सी पर रखा और नीलेश के पास आकर कहा,”तुम कब आये ?”

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