Pasandida Aurat Season 2 – 60
Pasandida Aurat Season 2 – 60

पृथ्वी का शर्ट उसके हाथ में था और अवनि हैरानी से उसे देख रही थी आखिर पृथ्वी उस से क्या छुपाना चाहता था ? अवनि को अपनी ओर देखते पाकर पृथ्वी ने कहा,”अवनि ! मुझे तुम शाम में देख लेना , अभी के लिए प्लीज मुझे कुछ खाने के लिए दे दो”
पृथ्वी की आवाज से अवनि की तन्द्रा टूटी और उसने कहा,”हाँ , मैं अभी लायी”
अवनि कमरे से बाहर चली गयी तो पृथ्वी ने राहत की साँस ली और जल्दी से अपने हाथ में पकडे शर्ट को जल्दी जल्दी मोड़कर अपने ऑफिस बैग में डाल लिया जिस से ये शर्ट अवनि के हाथ में ना लगे।
वह अपना बैग लेकर बाहर आया तब तक अवनि उसके लिए गर्मागर्म सेंडविच लेकर आ चुकी थी। पृथ्वी ने एक पीस उठाया और खाते हुए जैसे ही घडी की तरफ देखा , उसने पाया कि वह आज लेट हो चुका है। उसने दूसरे हाथ से दुसरा पीस उठाया और दरवाजे की तरफ जाते हुए कहा,”मैं ये रास्ते में खा लूंगा’
“पृथ्वी आराम से,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा लेकिन पृथ्वी तब तक वहा से निकल चुका था।
सुरभि अवनि का फोन थामे अवनि की तरफ आयी और प्लेट से सेंडविच का एक पीस उठाकर खाते हुए कहा,”ओह्ह्ह वाओ सेंडविच ! क्या ये तुमने मेरे लिए बनाया है ?”
“तुम्हारे और पृथ्वी दोनों के लिए , उसे पसंद है”,अवनि ने दरवाजे की तरफ देखकर खोये हुए स्वर में कहा
अवनि को खोया देखकर सुरभि ने कहा,”क्या बात है अवनि शादी के बाद पृथ्वी की पसंद-नापसंद का ख्याल रखने लगी हो तुम,,,,,,,,,हहहहहह बेचारा ! वो तो ये सब देखकर ही खुश हो जाता होगा”
अवनि ने सुरभि की बात का कोई जवाब नहीं दिया उसके दिमाग में अभी भी पृथ्वी का शर्ट चल रहा था जिस पर लिपस्टिक का निशान था। अवनि को खामोश देखकर सुरभि ने उसकी बाँह छूकर कहा,”अवनि ! अवनि ! कहा खोयी हो ?”
अवनि की तंद्रा टूटी वह सुरभि की तरफ पलटी और एकदम से कहा,”सुरभि ! क्या पृथ्वी मुझे धोखा दे सकता है ? मेरा मतलब मेरे अलावा भी क्या वो किसी लड़की से,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“छी छी ये कैसी बातें कर रही हो अवनि और इतना वाहियात ख्याल तुम्हारे दिमाग में आया कैसे ? तुम पृथ्वी पर शक कर रही हो , उस पृथ्वी पर जिसके लिए दुनिया में एक ही लड़की खूबसूरत है और वो हो तुम,,,,,,,,,,,,अरे वो इतना शरीफ लड़का है अवनि दूसरी लड़की से रिश्ता रखना तो दूर वो उन्हें देखता तक नहीं है,,,!!”,सुरभि ने कहा
“तुम इतना यकीन के साथ कैसे कह सकती हो ?”,अवनि ने कहा
सुरभि मुस्कुराई और कहा,”अरे यार अवनि ! उसे जब मुझसे भी कुछ कहना होता है न तो मुझे छुएगा नहीं बल्कि या तो मेरी कुर्ती खींचेगा या फिर बाजु और तो और
और तो और उस रात जब मैं उस से एयरपोर्ट पर मिली थी तो मैं थोड़ा इमोशनल हो गयी थी और मैंने उसे हग कर लिया था , पता है तब उसने क्या कहा ? उसने कहा ‘बस करो सुरभि , मैं शादीशुदा हूँ’ ,, वो कही भी रहे , किसी के भी साथ रहे उसकी बातो में हमेशा तुम्हारा जिक्र होता है अवनि , दिनभर उसके होंठो पर सिर्फ तुम्हारा नाम होता है,,,,,,,,मुझे नहीं लगता इस जिंदगी में तुम्हे छोड़कर वह किसी और लड़की को देखेगा भी,,,,,,,,,,!!!”
सुरभि की बातें सुनकर अवनि को अपने ख्याल पर पछतावा हुआ लेकिन शर्ट का वो दाग अभी भी उसके दिमाग में घूम रहा था। अवनि एक बार फिर खो गयी और ये देखकर सुरभि ने कहा,”ओह्ह अवनि ! जब प्यार दिखावा बनकर तुम्हारे सामने था तब तुमने आँख बंद करके उस पर भरोसा किया और अब जब प्यार असल में तुम्हारे सामने है तब तुम अपनी आँखे बंद कर लेना चाहती हो,,,,,,,,,,,,,!!!”
“मैं कुछ समझी नहीं”,अवनि ने कहा
“मैं बस ये कह रही हूँ कि,,,,,,,,,पृथ्वी अच्छा लड़का है उसे लेकर अपने मन में शक पैदा करना बंद करो”,सुरभि ने थोड़ा कठोरता से कहा
“आई ऍम सॉरी ! शायद मैं ही कुछ ज्यादा सोच रही हूँ,,,,,,,,,तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए और सेंडविच ले आती हूँ”,अवनि ने कहा
“तुम बैठो मैं लेकर आती हूँ,,,,,,,,,,,मुझे तुम्हे अभी बहुत लेक्चर देने की जरूरत है अवनि,,,,,,,,!!!”,कहते हुए सुरभि ने हाथ में पकडे अवनि के फोन को टेबल पर रखा और खुद किचन की तरफ चली गयी।
अवनि ने अपने फोन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया वह तो बस सुरभि की कही बातों के बारे में सोचने लगी और सहसा ही उसे याद आये पृथ्वी के कहे शब्द “मैं कही भी रहू तुम्हारा ही रहूंगा” ये शब्द पृथ्वी ने बीती रात ही अवनि से कहे थे जब वह प्राची को घर छोड़ने गया था
अवनि ने अपना हाथ अपने ललाट से लगाया और धीरे से बुदबुदाई,”लगता है मैं कुछ ज्यादा ही सोच रही हूँ”
देसाई मेंशन्स
मिस्टर देसाई सुबह सुबह तैयार होकर नाश्ते की टेबल पर आ बैठे उन्होंने देखा प्राची वहा नहीं है तो उन्होंने नौकर से उन्हें बुलाकर लाने को कहा। कुछ देर बाद नाईट शॉर्ट्स और उस पर सेंडो पहने प्राची डायनिंग टेबल की तरफ चली आयी। उसने बिखरे बालों को समेटकर उनमे क्लेचर खोंस रखा था। आँखों के नीचे गहरे डार्क सर्कल बन चुके थे , नशे की वजह से उसका चेहरा बुझा और बेजान नजर आ रहा था और होंठ सूख चुके थे। मिस्टर देसाई एकटक प्राची को देखते रहे तो प्राची ने कहा,”गुड मॉर्निंग डेड”
“ये क्या हालत बना रखी है तुमने अपनी प्राची ? आने वाले कुछ सालो में तुम देसाई ग्रुप एंड कम्पनी की CEO बनने वाली हो , क्या ऐसे प्रेजेंट करोगी तुम मेरी कम्पनी को , ऐसे बढ़ाओगी मेरा बिजनेस आगे ?”,मिस्टर देसाई ने दबे स्वर में कहा लेकिन उनकी बातो से गुस्सा साफ झलक रहा था
“आई ऍम सॉरी डेड”,प्राची ने नजरे झुकाकर कहा
” सॉरी ? हालत देखो अपनी प्राची , तुम्हारी ये मनमानियां दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। कंट्रोल योरसेल्फ वरना मैं तुम्हारा ऑफिस आना भी बंद करवा दूंगा”,मिस्टर देसाई ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा
“नो डेड ! आप ऐसा नहीं कर सकते”,प्राची ने अपनी आँखो को बड़ा करके हैरानीभरे स्वर में कहा
“मैं ऐसा ही करूंगा , आई ऍम योर डेड और अगर तुम जिद्दी हो तो मैं तुमसे ज्यादा जिद्दी हूँ,,,,,,,,,,,,तुम्हारे प्यार के चलते मैं अपनी कम्पनी को बर्बाद होते नहीं देख सकता,,,,,,,,,,,ये लास्ट वार्निंग है प्राची , गो पार्लर एंड अपना हुलिया सुधारकर ऑफिस पहुंचो आज कपूर ग्रुप के साथ हमारी मीटिंग है और मैं तुम्हे उनसे मिलाने वाला हूँ”,मिस्टर देसाई ने कहा और अपना नाश्ता करने लगे
“डेड , डेड”,प्राची ने कहा लेकिन मिस्टर देसाई ने उसे ऐसे नजरअंदाज किया जैसे वह वहा है ही नहीं , प्राची गुस्से से उठी और वहा से चली गयी।
पृथ्वी जैसे तैसे करके स्टेशन पहुंचा , ट्रेन निकलने ही वाली थी कि उसने भागकर जैसे तैसे उसे पकड़ा और अंदर आया तो पता चला भीड़ आज रोजाना से भी ज्यादा थी। बैठने के लिए सीट मिलना तो मुश्किल ठीक से खड़े होने तक की जगह नहीं थी। पृथ्वी ने अपने लिए जगह बनायीं और दरवाजे के पास खड़े होकर सफर करने लगा। ऑफिस पहुँचते पहुंचते उसे देर हो चुकी थी।
मौर्या Pvt. Ltd. कम्पनी , नवी मुंबई
पृथ्वी जल्दी जल्दी अपने केबिन में आया और देखा कि उसकी टीम के सब लोग आ चुके है बस वही देर से आया है ये देखकर तान्या ने कहा,”सर आजकल आप रोज ही लेट हो जा रहे है”
“अरे तान्या ! इसमें पृथ्वी सर की गलती नहीं है , अब घर में इतनी प्यारी वाइफ हो तो सुबह सुबह किसका मन करेगा उन्हें अकेले छोड़कर आने का,,,,,,,,,,क्यों पृथ्वी ?”,अंकित ने पृथ्वी को छेड़ते हुए कहा
“अपना मुँह बंद करो और आज की मीटिंग की सभी फाइल्स निकालकर रखो मैं सर से मिलकर आता हूँ”,पृथ्वी ने कहा और अपना बैग टेबल पर रखकर वहा से चला गया।
पृथ्वी के जाने के बाद अंकित ने देखा आज पृथ्वी अपना टिफिन नहीं लाया है तो उसने बाकी सबकी तरफ देखा और कशिश ने कहा,”लगता है आज मैडम ने सर को टिफिन नहीं दिया , इसलिए सर का मूड ऑफ है”
“क्या पता आज मैडम खुद ही सर के लिए टिफिन लेकर ऑफिस आ जाये”,मनीष ने कहा
“हाउ रोमांटिक ! ऐसा तो सिर्फ फिल्मो में होता है , सच में सर कितने लकी है”,तान्या ने चहककर कहा
“तुम तीनो का काम छोड़कर बाकी सब चीजों में ध्यान है , पृथ्वी की लव स्टोरी छोडो और जो डेटा मैंने दिया है उसे रिअरेंज करके दो , और तुम मनीष ये एक फाइल लेकर लीगल डिपार्टमेंट में जाओ और उनसे कहो ये आज ही क्लियर चाहिए ताकि जयदीप सर कल क्लाइंट से मिल सके”,अंकित ने कहा तो तीनो अपने अपने काम में लग गए और अंकित भी अपने लेपटॉप की तरफ पलटकर पृथ्वी के लिए आज की फाइल्स तैयार करने लगा।
“क्या मैं अंदर आ सकता हूँ ?”,जयदीप के केबिन का दरवाजा खोलकर पृथ्वी ने कहा
“हाँ हाँ पृथ्वी आओ”,जयदीप ने कहा जो कि आँखों पर मोटे लेंस वाला चश्मा लगाये अपने लेपटॉप के कीबोर्ड पर उंगलिया चला रहा था। पृथ्वी अंदर आया तो जयदीप ने उसे बैठने का इशारा किया और खुद लेपटॉप में बिजी रहा। पृथ्वी ने कुर्सी खिसकाई और उस पर आ बैठा। कुछ देर बाद जयदीप ने लेपटॉप बंद करके साइड किया और कहा,”हाँ तो मिस्टर उपाध्याय , मंथ एंड आ गया है स्टाफ को सैलरी कब दे रहे है आप ?”
“मैं क्यों स्टाफ को सैलरी देने लगा ?”,पृथ्वी ने हैरानी से पूछा
“क्योकि इस कम्पनी के मालिक तो आप ही है फिर सैलरी भी आपको ही देनी पड़ेगी ना”,जयदीप ने शब्दों में चाशनी भरकर कहा
“ये क्या बकवास कर रहे है आप , मैं इस कम्पनी का मालिक नहीं हूँ”,पृथ्वी ने चिढ़कर कहा
“जब तुम्हे पता है तो फिर तुम टाइम से ऑफिस क्यों नहीं आते ?”,जयदीप ने थोड़ा तेज आवाज में कहा
“इसमें इतना चिल्लाकर पूछने की क्या जरूरत है आप आराम से भी पूछ सकते है”,पृथ्वी ने कहा
“जब तुम्हे पता है तो फिर तुम टाइम से ऑफिस क्यों नहीं आते ?”,जयदीप ने धीरे से बहुत ही शांत लहजे में पूछा
“मैं टाइम से ही आया था ट्रेन लेट थी”,पृथ्वी ने बहाना बनाया
“अगर तुम मुझसे कहते कि खाना नहीं बना था , मैं सुबह देर से उठा था या फिर मेरी वाइफ ने मुझे आने नहीं दिया तो मैं तुम्हारी बात मान भी लेता लेकिन ट्रेन लेट थी ,, मुंबई की लोकल ट्रेन लेट थी और मिस्टर पृथ्वी उपाध्याय अपने टाइम पर थे,,,,,,,,,,,,,,,व्हाट अ को-इंसीडेंस”,जयदीप ने पृथ्वी को ताना मारते हुए कहा
“हाँ तो ठीक है न हो जाता है कभी कभी , जल्दी आकर आपने और आपके बाकि स्टाफ ने क्या कर लिया ?”,पृथ्वी ने चिढ़कर कहा
“बहुत कुछ ! इन्फेक्ट आज की सारी मीटिंग्स की डिटेल्स मैं चेक कर चुका हूँ ,, तीन नए क्लाइंट है सो उनकी मीटिंग मैं खुद देखूंगा और एक मीटिंग वाशी में है वो तुम अटेंड करोगे”,जयदीप ने कहा
“हम्म्म ठीक है,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
जयदीप बात कर ही रहा था कि उसका फोन बजा और वह टेंशन में आ गया उसने पृथ्वी से चुप रहने का इशारा किया और फोन कान से लगाकर कहा,”हाय डार्लिंग ! तुम खामखा मुझ पर शक कर रही हो बाबू वो तुम्हारी ही लिपस्टिक का निशान है,,,,,,,,,,अरे मेरा यकीन करो ,, मैं कहा जाऊंगा मुँह मारने ? दिनभर ऑफिस में होता हूँ सुबह-शाम घर में तुम्हारे साथ होता हूँ , घर से ऑफिस के रास्ते में क्या ही कर लूंगा मैं,,,,,,,,,,रीना मेरी बात सुनो बेबी मैं सच,,,,,,,,,,,,अरे सुनो,,,,,,,,,,,,हद करती हो यार , तुम्हे अपने पति पर भरोसा नहीं है ,, मुझ जैसा शरीफ इंसान तुम्हे कही नहीं मिलेगा”,जयदीप ने कहा
पृथ्वी ने जैसे ही आखरी शब्द सुने वह अपने मुँह से हाथ लगाकर धीरे से हंसा तो ये देखकर जयदीप ने उसे आँखे दिखाई और फोन कान से लगाए बालकनी की तरफ चला गया। पृथ्वी चुपचाप सोफे पर आ बैठा और जयदीप के लौटने का इंतजार करने लगा।
अपनी पत्नी को समझा बुझाकर शांत करवाकर जयदीप पृथ्वी के पास आया और कहा,”ये औरतों को शक की बीमारी क्यों होती है ? यू आर लकी पृथ्वी जो अवनि तुम पर शक नहीं करती। जैसे रीना ने मेरे शर्ट पर लिपस्टिक का निशान देखा वैसे अगर अवनि देखती तो क्या हाल होता तुम्हारा,,,,,,,,,लेकिन अवनि बहुत समझदार है वो ऐसी छोटी छोटी बातो के लिए तुम पर शक नहीं करेगी,,,,,,,,,,,,,तुम बैठो मैं एक जरुरी कॉल करके आया”
जयदीप केबिन से बाहर चला गया लेकिन जाते जाते पृथ्वी को उलझा गया। पृथ्वी ने जयदीप के मुँह से जैसे ही शर्ट की बात सुनी उसे सुबह वाला किस्सा याद आ गया जब अवनि उसकी शर्ट को धोने के लिए वाशबेसिन में डालने वाली थी और पृथ्वी ने उसके हाथ से वो शर्ट छीन ली थी।
“क्या मेरे शर्ट लेने के बाद अवनि ये सोच रही होगी कि मैं उस से कुछ छुपा रहा हूँ ?”,पृथ्वी धीरे से बड़बड़ाया
“सोच रही क्या होगी ? सोच लिया”,पृथ्वी के दाँयी तरफ सोफे के हत्थे पर , अपनी एक टाँग पर दूसरी टाँग रखकर पसरे दिमाग ने कहा
“नहीं पृथ्वी अवनि तुम से प्यार करती है वो ऐसा कुछ नहीं सोचेगी”,बांयी तरफ सलाईयो पर ऊन लपेटते दिल ने कहा जो कि कुछ बुनने में बिजी था
“जहा प्यार होता है वही शक होता है,,,,,,,,,,,तेरे दिल को इतना भी कॉमन सेन्स नहीं है क्या ?”,दिमाग ने चिढ़कर कहा
“तुम तो कॉमन सेन्स की बात ही मत करो , जब इसे तुम्हारी सबसे ज्यादा जरूरत होती है तब तुम घास चरने चले जाते हो”,दिल ने भी तुनककर कहा
“उसी घास को फेंक कर मारूंगा तुम्हारे मुँह पर , अवनि तुम से प्यार करती है वो ऐसा नहीं सोचेगी ये ख्याल इसे तुमने दिया या मैंने दिया ?”,दिल हत्थे पर उठकर बैठा और गुस्से से कहा
“अच्छा तो जब ये अवनि से शर्ट छीन रहा था तब तुम क्या कर रहे थे , रोका क्यों नहीं इसे ?”,दिल ने अपनी सलाईयां और ऊन साइड में फेंककर कहा
पृथ्वी कभी दाँये तो कभी बाँये देखता और जैसे ही दिल ने ये बात कही पृथ्वी की नजरे दिमाग पर जा टिकी , वह भी जानना चाहता था आखिर दिमाग ने उसे रोका क्यों नहीं ?
“वो मैं , वो मेरा ध्यान,,,,,,,,,,,,!!!”,दिमाग दिल से नजरे चुराते हुए हिचकिचाया
“क्या वो , मैं , मेरा जवाब दो , बताओ आखिर तुमने क्यों नहीं रोका इसे ?”,दिल चिल्लाया
“क्योकि मेरा ध्यान अवनि के होंठो पर था”,दिमाग ने अपनी आँखों को मीचकर जोर से कहा
पृथ्वी और दिल ने सुना तो दोनों हैरानी से दिल को देखने लगे। शांति पाकर दिमाग ने धीरे से अपनी एक आँख खोली और कहा,”सुबह सुबह वो कितनी खूबसूरत लगती है तुम्हे क्या पता ? सिर्फ मैं ही जानता हूँ मैं कैसे उसके सामने खुद को कंट्रोल करता हूँ,,,,,,,,,,,और जब वो मेरे सामने होती है तो मैं सब भूल जाता हूँ”
“हाह ! मुझे तो पहले से ही पता था कि तुम एक नंबर के ठरकी हो”,दिल ने अपने दोनों हाथो को बांधकर कहा
“इसे प्यार कहते है”,दिमाग ने दिल को घूरकर गुस्से से कहा
बेचारा पृथ्वी बिना कुछ कहे बिना कुछ किये ठरकी बन चुका था वो भी अपने दिल और दिमाग की वजह से , दोनों की बकवास सुनकर पृथ्वी ने थोड़ा गुस्से से कहा,”तुम दोनों मुझे बताओगे मुझे आगे क्या करना है ?”
दिल और दिमाग ने पृथ्वी को गुस्से में देखा तो दोनों एक साइड आ गए और दिल बोला,”तुमने कुछ गलत नहीं किया , फिर तुम क्यों इतना सोच रहे हो ?”
“मैंने अवनि से शर्ट लिया क्योकि नहीं चाहता अवनि उसे धोये”,पृथ्वी ने कहा
“तो क्या तुम गन्दी शर्ट ऑफिस में पहनकर आने वाले हो ?”,दिमाग ने कहा
“अरे नहीं ! उस शर्ट पर अवनि के होंठो के निशान है , मैं नहीं चाहता शर्ट धुलने की वजह से वो निशान वहा से चला जाए , मैं उसे हमेशा सम्हालकर रखना चाहता हूँ”,पृथ्वी ने कहा
“अह्ह्ह्हह ! ये तो पूरा मजनू बन चुका है”,दिमाग ने मुँह बनाकर दिल के कंधे पर अपना ललाट रखकर कहा
“ओह्ह्ह्ह तो ऐसा है लेकिन अगर अवनि ने भी ये निशान देखा है तो फिर उसका शक करना जायज , तुम बिना उसे बताये उस से शर्ट ले लोगे तो उसे तो यही लगेगा ना तुम उस से कुछ छुपा रहे हो”,दिल ने कहा
“हाँ शायद ! मैंने गलती की क्या ?”,पृथ्वी ने मासूमियत भरे स्वर में पूछा
दिमाग पलटा और कहा,”गलती नहीं बहुत बड़ी गलती की है इसलिए जितनी जल्दी हो सके अवनि की गलतफहमी को दूर करो वरना अपने बॉस का हाल तो देख ही रहे हो तुम और तुम्हे तो लड़कियों को मनाना भी नहीं आता”,दिमाग ने पृथ्वी का मजाक उड़ाते हुए कहा
अब दिल हो चाहे दिमाग हो या फिर हो पृथ्वी का बॉस , कोई उसका मजाक उड़ाए ये भला उसे कहा बर्दास्त होना था वह जोर से चिल्लाया,”ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है”
पृथ्वी की एक आवाज से दिल और दिमाग दोनों हवा हो गए और केबिन का दरवाजा खोलकर अंदर आये जयदीप ने कहा,”मैंने क्या किया ?”
जयदीप को सामने देखकर पृथ्वी होश में आया और अपनी जगह से उठकर कहा,”अह्ह्ह्ह ! कुछ नहीं , आई ऍम सॉरी,,,,,,,,,,!!!”
“पृथ्वी आर यू ओके ?”,जयदीप ने पूछा
“नो सर ! मैं बिमार हूँ , बहुत ज्यादा बीमार हूँ”,बड़बड़ाते हुए पृथ्वी वहा से चला गया
जयदीप ने उसे जाते हुए देखा और कहा,”बीमार नहीं पृथ्वी इसे प्यार कहते है पृथ्वी,,,,,,,,,,,!!!!”
( सुरभि की बातों का अवनि पर पड़ेगा असर या गहरी होंगी शक की जड़े ? क्या मिस्टर देसाई सुधार पाएंगे प्राची को या हो जाएगी उनकी कम्पनी बर्बाद ? क्या सच में पृथ्वी हो चुका है बीमार या फिर ये सब है उसके ख्याली पुलाव ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल

