Pasandida Aurat Season 2 – 5
Pasandida Aurat Season 2 – 5

पृथ्वी की बात सुनकर अवनि नम आँखों से एकटक उसे देखने लगी। अवनि के सामने खड़े पृथ्वी के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे वह बस प्यार से अवनि को देखे जा रहा था। हॉल में फैली ख़ामोशी को तोड़ते हुए पृथ्वी ने कहा,”मैडम जी ! मैं आपकी हर बात मानने को तैयार हूँ लेकिन ये बात नहीं कि मुझे आपको वापस राजस्थान छोड़ देना चाहिए। मैं जानता हूँ जो कुछ भी हुआ उस से आप बहुत हर्ट है लेकिन मुझ पर विश्वास रखिये मैं सब सही कर दूंगा। आई मुझसे ज्यादा दिन गुस्सा नहीं रह सकती और बाबा वो भी मुझे जल्दी ही माफ़ कर देंगे ,, आप उन सब को लेकर अपना दिल छोटा मत कीजिये मैडम जी,,,,,,,,,!!”
“लेकिन मेरी वजह से तुम उनसे दूर हो गए पृथ्वी,,,,,,,!!”,अवनि ने रोआँसा होकर कहा
पृथ्वी मुस्कुराया लेकिन उसकी मुस्कराहट में एक दर्द था जिसे अवनि साफ देख पा रही थी और उसने कहा,”मैं तो उनसे दूर बहुत पहले ही हो गया था मैडम जी , जब उन्होंने मुझे समझने से इंकार कर दिया और आपसे दूर रहने को कहा। वो कभी समझ ही नहीं पाए कि आप मेरे लिए क्या है ? उन्होंने समाज और अपनी ख़ुशी को पहले रखा और मैंने भी वही किया मैडम जी
मैंने भी अपनी ख़ुशी को अहमियत दी और इसलिए आज आप मेरे साथ है,,,,,,,मेरे प्यार जताने का तरिका गलत हो सकता है लेकिन मेरा प्यार नहीं,,,,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी को देखने लगी , वह जानती थी कि खुद को छोड़ने से लेकर वह पृथ्वी के सामने कितनी भी दलीले रखे पृथ्वी उसका साथ नहीं छोड़ेगा और ये जानकर कही ना कही अवनि के दिल में एक सुकून भी था। उसके सामने खड़ा उस से दो साल छोटा लड़का अब उसका पति था और अवनि को अपनी जिंदगी में अब इसी के साथ आगे बढ़ना था।
“आप खड़ी क्यों है बैठिये ना , मैं आपके लिए पानी लेकर आता हूँ”,कहकर पृथ्वी किचन की तरफ चला गया और अवनि सोफे पर आ बैठी। अवनि ने एक नजर हॉल को देखा , ये बिल्कुल वैसा ही था जैसा पृथ्वी ने एक रोज उसे विडिओ कॉल पर दिखाया था। सामान यहाँ वहा फैला हुआ , बालकनी में सामान अस्त व्यस्त सामान पड़ा , धूल मिटटी और पौधे समय पर पानी ना देने की वजह से सूख चुके थे। अवनि ख़ामोशी से सब देख रही थी कि कुछ देर बाद पृथ्वी पानी का गिलास हाथ में थामे अवनि के सामने चला आया और गिलास उसकी तरफ बढाकर कहा,”पानी,,,,,,,,!!”
“तुम इस घर को साफ क्यों नहीं रखते ?”,अवनि ने गिलास लेकर कहा
“अह्ह्ह्हह वो , मैं यहाँ ज्यादा नहीं रहना ना इसलिए , मैं बस सोने के लिए आता हूँ”,पृथ्वी ने हिचकिचाते हुए कहा और अगले ही पल उसकी नजर फर्श सोफे के पास पड़े पिज्जा के खाली डिब्बे पर पड़ी तो उसने अवनि से नजरे बचाकर उसे पैरों से ही टेबल के नीचे करने की कोशिश की लेकिन अवनि ने देख लिया और पृथ्वी झेंप गया। उसने झुककर जल्दी से डिब्बा उठाया और बालकनी में फेंक दिया जहा पहले से बहुत कचरा था। अवनि को समझ आ गया कि पृथ्वी इन सब कामो में बहुत आलसी है।
उसने पानी का गिलास अपने होंठो से लगाया और दो घूंठ पीकर टेबल पर रख दिया। पृथ्वी अवनि के साइड में पड़े दूसरे सोफे पर आ बैठा। अवनि ख़ामोशी से बालकनी की तरफ देख रही थी और पृथ्वी अवनि को , जैसे ही अवनि पृथ्वी की तरफ देखती पृथ्वी इधर उधर देखने लगता इस वक्त बेचारे की जो हालत थी वह तो बस वही जानता था।
जिस लड़की को पृथ्वी पसंद करता था , जिस से बेइंतहा मोहब्बत करता था आज वही लड़की उसकी पत्नी बनकर उसके सामने बैठी थी पर हाय रे पृथ्वी की किस्मत पति होकर भी वह अवनि पर अपना हक़ नहीं जाता सकता था।
पृथ्वी अवनि को हर्ट करना नहीं चाहता था ना ही कुछ ऐसा करना चाहता था जिस से अवनि का दिल दुखे या वह उदास हो बस सिर्फ इसलिए उसने अपने कदम पीछे ले लिए और अवनि को बस दूर बैठकर देखता रहा।
“तुम जब उदयपुर आये तो तुमने मुझे क्यों नहीं बताया पृथ्वी ? पापा तुमसे मिल चुके है ये बात तुमने मुझसे क्यों छुपाई ?”,अवनि ने दोनों के बीच फैली ख़ामोशी को तोड़ते हुए कहा
पृथ्वी ने एक नजर अवनि को देखा और फिर अपनी पलकें झुकाकर कहने लगा,”अगर मैं आपको बताता तो आपको लगता मैं आपको हासिल करने के लिए ये सब कर रहा हूँ लेकिन मैं उनसे सिर्फ इसलिए मिला ताकि आपको आपका परिवार वापस लौटा सकू। उस रोज जब आपने मुझसे कहा था कि आपको घर गए महीनो हो चुके है और आपके पापा ने आपसे मुँह मोड़ लिया है तब बहुत दुःख हुआ मुझे,,,,,,,,मैं कभी रोता नहीं हूँ मैडम जी पर जब जब मैंने आपको उदास देखा , दर्द में देखा तब तब अपनी आँखों को नम पाया है,,,,,,,,मैं बस आपको खुश देखना चाहता था मैडम जी”
“और मुझे खुश देखने के लिए तुमने मुझे सिद्धार्थ के पास जाने दिया,,,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने अवनि को देखा और कहा,”उस वक्त मुझ पर क्या गुजरी है ये बस मैं जानता हूँ मैडम जी , आपका वो आखरी बार फोन आना और ये कहना कि “मेरी शादी है” हाह ! मैं नहीं बता सकता उस वक्त मैं कैसा महसूस कर रहा था , जब दुल्हन के कपड़ो में आपको सिद्धार्थ के लिए सजते देखा तब मेरा दिल टूटकर बिखर चुका था ,
जब मैं आपको अपने हाथो से ये चूडिया पहना रहा था तब मेरी एक एक साँस मेरे सीने में किसी गर्म लावे सी बह रही थी और जब मैं आपको छोड़कर गया तो लगा जैसे किसी ने मेरे सीने से दिल ही निकाल लिया हो,,,,,,,,,,आसान है क्या अपनी पसंदीदा औरत को खुद से दूर जाते देखना ,, उसका दूर जाना जान जाने जैसा है मैडम जी और मैं ये सब महसूस करके आया हूँ,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो उसके दिल में एक टीस उठी , अपनी एक जिद के चलते अवनि ने पृथ्वी को कितनी तकलीफ दी थी इसका अहसास उसे अब हो रहा था। अवनि को उदास देखकर पृथ्वी ने अपनी आँखों के किनारे साफ किये और मुस्कुरा कर कहा,”पर मैंने कहा था ना मैडम जी एक दिन आप खुद मुझसे पूछेंगी “पृथ्वी मुझसे शादी करोगे ?” अह्ह्ह्ह और आपने मुझसे पूछा , मैं बता नहीं सकता उस वक्त मैं कितना खुश था,,,,,,,,Thankyou मैडम जी , आपका ये अहसान मैं जिंदगीभर नहीं भूलूंगा”
पृथ्वी को इमोशनल से एकदम नार्मल देखकर अवनि एकटक उसे देखने लगी और कहा,”मैंने तुम पर कोई अहसान नहीं किया है पृथ्वी , अहसान तो तुमने मुझ पर किया है। तुम मेरी जिंदगी में उस वक्त आये जब मैं अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही थी। तुमने मुझे ये अहसास दिलाया पृथ्वी कि मेरी अपनी पहचान है जिसे मुझे किसी के प्यार के लिए नहीं खोना चाहिए। तुमने हर बुरे हालात में मुझे हिम्मत दी और हर गुजरने वाले दिन के साथ मुझे मजबूत बनाया।
मैं अगर तुम्हारी उटपटांग बातो को साइड कर दू तो तुम एक बहुत अच्छे लड़के हो पृथ्वी , ऐसे लड़के जिसके साथ हर लड़की जिंदगी जीना चाहेगी,,,,मैंने तुम्हे बहुत हर्ट किया है , बहुत दिल दुखाया है तुम्हारा लेकिन तुमने फिर भी मेरी ख़ुशी के लिए वो सब किया जो कोई नहीं करता। जब सबने मेरा साथ छोड़ दिया तब तुमने सबके खिलाफ जाकर मेरा हाथ थामा , अहसान तो तुमने मुझ पर किया है पृथ्वी,,,,,,जिसे मैं हमेशा याद रखूंगी”
“मैडम जी,,,,,,,ये सब बोलकर मुझसे शर्मिंदा मत कीजिये और फिर वो मर्द ही क्या जो अपनी पंसदीदा औरत के लिए ये सब ना करे,,,,,,,,!”,पृथ्वी ने कहा तो अवनि एकटक उसे देखने लगी और पृथ्वी अवनि की आँखों में देखते हुए मन ही मन खुद से कहने लगा
“मैं आपके लिए सब करूंगा मैडम जी , जो घाव आपके मन पर लगे है उन्हें भरने के लिए हर कोशिश करूंगा , आपको पहले की तरह हँसने मुस्कुराने की वजह दूंगा , हर कदम पर आपके साथ चलूँगा इतना मजबूत बना दूंगा आपको कि आपको कभी किसी सहारे की जरूरत ना पड़े , इतनी मोहब्बत भर दूंगा आपके दिल में कि आप मुझसे दूर जा ही नहीं पाएंगी , जो ख़ुशी और प्यार आप डिजर्व करती है वो सब आपको मिलेगा और ये मेरा आपसे वादा है”
पृथ्वी को खोया देखकर अवनि ने कहा,”पृथ्वी ! तुम ठीक हो ?”
“हां हाँ मैं ठीक नहीं हूँ,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने जैसे नींद से जागकर कहा
“ठीक नहीं हो मतलब ?”,अवनि ने पूछा
पृथ्वी ने अवनि को देखा और फिर सामने देखते हुए कहा,”मुझे यकीन नहीं हो रहा आप मेरे सामने बैठी है और हमारी शादी हो चुकी है,,,,,,,,,आपको याद है जब मैं आपसे शादी की बात करता था आप कैसे चिढ जाया करती थी और कितनी सारी बाते सुना देती थी मुझे,,,,,,,!!!”
ये कहते हुए पृथ्वी कुछ ज्यादा ही मासूम लग रहा था इसलिए अवनि ने कहा,”इसी को किस्मत कहते है पृथ्वी , कल तक जो लड़की तुमसे दूर भागती थी आज वही लड़की तुम्हारे साथ शादी के बंधन में बंध चुकी है,,,,,,,,,महादेव ने तुम्हारी सुन ली”
अवनि के मुँह से महादेव का नाम सुनकर पृथ्वी को याद आया कि वह तो महादेव् से झगड़ा करके बैठा है , जिस रात अवनि ने पृथ्वी को अपनी शादी के बारे में बताया उस रात ही वह महादेव से कितना झगड़ कर आया था और उसके बाद कभी मंदिर गया ही नहीं।
उसने अवनि की तरफ देखा और कहा,”हाँ ! तुम्हारे महादेव ने मेरी सुन ली”
“पृथ्वी वो तुम्हारे भी महादेव है , क्या तुम्हे अब भी उन से शिकायत है ?”,अवनि ने पूछा
“शिकायत ? मैं तो उनसे फेस टू फेस फाइट करके आया हूँ लेकिन इनको कैसे बताऊ , बताया तो ये फिर गुस्सा हो जाएगी,,,,,,,,,,,,हाह ! अच्छा फसाया मुझे”,पृथ्वी ने मन ही मन खुद से कहा
“क्या तुम्हे अब भी उनसे शिकायत है पृथ्वी ?”,अवनि ने बेचैनी भरे स्वर में पूछा
“वो दरअसल मैंने उस दिन गुस्से में आकर उन्हें कुछ ज्यादा ही सुना दिया , मैंने उनसे कहा कि वो भगवान नहीं है पत्थर है,,,,,,,,,,,देखो मैंने ऐसा इसलिए कहा क्योकि उस वक्त उन्होंने मेरी बुरी तरह से बैंड बजा रखी थी”,पृथ्वी ने बच्चो की तरह मासूमियत भरे स्वर में कहा
अवनि ने सुना तो एकटक पृथ्वी को देखने लगी और कहा,”तुम कभी नहीं सुधरोगे ना पृथ्वी,,,,,,,मतलब अगर तुमने उनसे कुछ माँगा और उन्होंने तुम्हे नहीं दिया तो वो भगवान् नहीं है,,,,,,,,,पत्थर है,,,,,,कितना बेवकूफी भरा ख्याल है ना ये पृथ्वी,,,,,!!!”
“अरे मैं सुधर जाऊंगा मैडम जी , आप हो न मुझे सुधारने के लिए,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
“तो ठीक है कल सुबह तुम मंदिर जाओगे और उनसे माफ़ी माँगोगे”,अवनि ने कहा
“अह्ह्ह्ह ये मैं कहा फंस गया , मैंने सुधरने का कहा तो आपने मुझे अभी से सुधारना शुरू कर दिया,,,,,,,,पृथ्वी तू तो गया बेटा,,,,,,फोन पर तो तू बहाना भी बना सकता था अवनि तेरे सामने है अब कैसे मना करेगा ?”,पृथ्वी अपने नाख़ून चबाते हुए मन ही मन खुद से कहने लगा
“पृथ्वी ! तुम कल जाओगे न ?”,अवनि ने कहा
“कल , कल , कल तो मुझे बहुत काम है , ये घर देखो कितना गंदा है आपको इतने गंदे घर में कैसे रख सकता हूँ तो मैं कल इसे साफ करूंगा”,पृथ्वी ने बचने के लिए बहाना बनाया
“घर साफ करने में मैं तुम्हारी मदद कर दूंगी , तुम शाम में चले जाना”,अवनि ने कहा
“अह्ह्ह शाम में , अरे हाँ मैं बताना भूल गया ,, इस घर में सिर्फ उतना ही सामान है जितना मैं यूज़ करता था अब आप आ गयी है तो सब सामान की जरूरत पड़ेगी इसलिए शाम में मुझे मार्किट जाना होगा,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने फिर बहाना बनाया
“तो फिर परसो,,,,,,,,परसो चले जाना”,अवनि ने कहा
“परसो मेरी एक क्लाइंट के साथ मीटिंग है तो मुझे वहा जाना होगा,,,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा
पृथ्वी की बातें सुनकर अवनि समझ गयी कि पृथ्वी बहाने बना रहा है , हालाँकि पृथ्वी को मंदिर जाने में कोई ऐतराज नहीं था लेकिन आखरी बार जैसा गुस्सा वह महादेव पर करके आया था अब उसे उनके सामने जाने में शर्म आ रही थी।
अवनि पृथ्वी से आगे कुछ कहती इस से पहले डोरबेल बजी
“मैं देखता हूँ,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने उठते हुए कहा और दरवाजे की तरफ बढ़ गया। पृथ्वी ने दरवाजा खोला तो पाया सामने नकुल खड़ा है। नकुल हाथ में बैग थामे अंदर आया और कहा,”मैं तुम दोनों के लिए खाना लेने चला गया था , सोचा तुम्हारे फ्लेट में इस वक्त खाने का कुछ मिलेगा नहीं सो बाहर से ले आया,,,,,,,!!!”
“हम्म्म अच्छा किया वैसे भी मैंने सुबह से कुछ खाया नहीं है , मैं किचन से प्लेट लेकर आता हूँ”,कहकर पृथ्वी किचन की तरफ चला गया और नकुल अवनि की तरफ चला आया।
“कैसा लगा ये घर ?”,नकुल ने बैग से खाना निकालकर टेबल पर रखते हुए अवनि से पूछा
“अच्छा है,,,,,,,!!”,अवनि ने धीरे से कहा हालाँकि नकुल से कभी उसकी इतनी बातचीत नहीं हुई थी इसलिए वह थोड़ी चुप चुप थी। पृथ्वी प्लेटे ले आया ! उसने प्लेट में खाना परोसा और सबसे पहले अवनि की तरफ बढ़ा दिया। दूसरी प्लेट में खुद लेकर खाने लगा और नकुल ने अपनी प्लेट खुद लगा ली।
तीनो ने खाना खाया , हालाँकि अवनि के गले से खाना मुश्किल से ही नीचे उतरा उसे अपने घर और पापा की याद आ रही थी। नकुल और पृथ्वी अपनी ही कुछ बातें कर रहे थे। खाना खाने के बाद नकुल कुछ देर वहा रुका और फिर अवनि पृथ्वी से सुबह मिलने को कहकर वहा से चला गया
पृथ्वी जूठी प्लेट उठाने लगा तो अवनि ने उसे रोककर कहा,”ये सब मैं कर देती हूँ”
“अरे मैडम जी , आप रहने दीजिये अभी तो आपके हाथो की मेहँदी भी नहीं उतरी है”,पृथ्वी ने कहा
“ये बातें ससुराल वाले घर में अच्छी लगती है पृथ्वी फ्लेट में नही”,कहते हुए अवनि ने प्लेट उसके हाथो से ली और किचन की तरफ चली आयी। अवनि ने प्लेट साफ करके रखी और बाहर चली आयी। पृथ्वी अभी भी वही हॉल में खड़ा अवनि की कही बात के बारे में सोच रहा था।
“मुझे हाथ मुँह धोना है , वाशरूम कहा है ?”,अवनि ने कहा तो पृथ्वी की तंद्रा टूटी। वह पलटकर अवनि की तरफ आया और अपने कमरे की तरफ इशारा करके कहा,”अंदर है,,,,,,,!!”
अवनि पृथ्वी के बैडरूम में चली आयी क्योकि दूसरे कमरे को पृथ्वी ने सामान से भर रखा था और स्टोर रूम की तरह इस्तेमाल कर रहा था। अवनि अंदर चली गयी और कुछ देर बाद पृथ्वी को याद आया कि उसके कमरे का हाल तो हॉल से भी ज्यादा बुरा है।
वह जल्दी से अंदर आया और राहत की साँस ली , अवनि बाथरूम में थी। पृथ्वी ने जल्दी जल्दी बिस्तर पर पड़े अपने कपड़ो को उठाया और कबर्ड में ठूस दिया। बिस्तर की बेडशीट को सही किया , कम्बल को समेटकर रखा और तकिये को भी सीधा रखा हालाँकि कमरा अब भी बिखरा पड़ा था। पृथ्वी के क्रिकेट बेट स्टम्प ग्लव्स सब इधर उधर पड़े थे। पृथ्वी ने उन्हें भी उठाकर बिस्तर के नीचे खिसका दिया। कमरा पहले से थोड़ा बेहतर लग रहा था।
बाथरूम का दरवाजा खुला और अवनि बाहर आयी , पृथ्वी को कमरे में देखकर अवनि का दिल धड़कने लगा और उसके मन में ख्याल आया “क्या आज रात पृथ्वी भी उसके साथ इसी कमरे में सोने वाला है ?”
अवनि मुँह धोकर आयी थी और उसके चेहरे से पानी टपक रहा था। अवनि ने दुप्पटा नहीं लगाया हुआ था और जैसे ही पृथ्वी की नजर अवनि के चेहरे से होकर उसके सीने पर पड़ी तो वह जल्दी से पलट गया और बिस्तर पर पड़ा दुपट्टा उठाकर अवनि की तरफ बढ़ाकर कहा,”अह्ह्ह वो मैं बस अपना कुछ सामान लेने आया था”
अवनि ने दुपट्टा लिया और कंधो पर डालकर उसी दुप्पटे से अपना मुँह पोछने लगी। पृथ्वी धीरे से पलटा और कहा,”आप यहाँ सो जाईये मैं बाहर हॉल में सो जाता हूँ,,,,,,मैं नहीं चाहता मेरी वजह से आपको किसी भी तरह की कोई परेशानी हो,,,,,,,आप आराम से यहाँ सो जाईये,,,,,,!!”
कहते हुए पृथ्वी ने बिस्तर पर पड़ा दूसरा तकिया उठाया और अवनि को गुड नाईट कहकर कमरे से बाहर चला गया। जाते जाते उसने कमरे का दरवाजा भी बंद कर दिया जिस से अवनि बेझिझक उस कमरे में आराम कर सके। अवनि बिस्तर पर आ बैठी और अपनी बिखरी जिंदगी के बारे में सोचने लगी,,,,,,,,,,,,!!
( क्या अवनि के कहने पर पृथ्वी मंदिर जाकर मांगने वाला है महादेव से माफ़ी ? क्या पृथ्वी और अवनि का साथ देना नकुल को पड़ने वाला है भारी ? क्या यहाँ से आसान होगी पृथ्वी और अवनि की जिंदगी या बढ़ने वाली है मुश्किलें ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Prithvi kitna samjhta hai Avni ko…yeh baat fir se sabit ho gai…jab Prithvi ne bina Avni k bole sofe par sone ko bola…hai to yeh choti baat lakin Avni k liye bahot badi hai…Avni ki daleel Prithvi k pyar k samne kam pad gai hai… Avni ab samjhe Prithvi k pyar ko…aur khud ko dosh dena band kare