Pasandida Aurat Season 2 – 48

Pasandida Aurat Season 2 – 48

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

सिद्धार्थ पर खीजकर सुरभि वहा से चली गयी। उसे भूख लगी थी लेकिन उसने अपना आर्डर किया खाना भी नहीं खाया। वह रेस्त्रो से बाहर चली आयी और कुछ दूर चलकर फुटपाथ पर पड़ी बेंच पर आ बैठी। सुरभि को खुद नहीं समझ आ रहा था कि आखिर उसके साथ क्या हो रहा है ? क्यों वह एकदम से इतनी चिड़चिड़ी हो गयी है और हर छोटी बात पर खीजने लगी है। सुरभि ने मायूस होकर अपना सर झुका लिया , अनिकेत का ख्याल आया और इसी के साथ उसकी आँखों में आँसू भर आये।

वह रोना नहीं चाहती थी इसलिए अपने दिल को मजबूत बना लिया और गहरी सांसे लेने लगी। जिस से प्यार किया उसने उसे नहीं समझा , एक दोस्त थी अवनि वह भी अब मुंबई में थी और सुरभि बार बार उसे परेशान करना नहीं चाहती थी , उदयपुर जाकर वह चीजे और बिगाड़ना नहीं चाहती थी और सिरोही वह रह नहीं पा रही थी।

रेस्त्रो के अंदर बैठा सिद्धार्थ सुरभि के जाने के बाद एकदम से उदास हो गया और मन ही मन खुद से कहा,”लगता है मैंने उसे कुछ ज्यादा ही पोक कर दिया,,,,,,,,आज वो काफी परेशान दिख रही थी , उसके साथ फिर कुछ हुआ है क्या ? कही उस गधे अनिकेत ने फिर से तो उसे,,,,,,,,,हाह ! मुझे उसे इतना नहीं बोलना चाहिए था यार,,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ ने अपने सामने रखी प्लेट को खिसकाया और वेटर को आवाज दी। वेटर सिद्धार्थ के पास चला आया तो उसने कहा,”बिल प्लीज”

वेटर चला गया , ईशा ने सुना तो कहा,”इतनी जल्दी बिल ? तुमने तो अभी ठीक से कुछ खाया भी नहीं है,,,,,,,!!”
“मेरा पेट भर गया और तुम ये सब खत्म करके , कैब बुक करके घर चली जाना”,सिद्धार्थ ने वेटर के हाथ में पकड़ी डायरी से बिल निकालकर देखते हुए कहा और पैसे डायरी में रख दिए। वेटर वहा से चला गया
“और हमारी डेट का क्या ?”ईशा ने हैरानी से पूछा

सिद्धार्थ ने टेबल पर रखा अपना फोन उठाया और ईशा की तरफ देखकर कहा,”तुम्हारे साथ बैठकर लग रहा है जैसे मैं डेट पर नहीं बल्कि तुम्हे खाना खिलाने लाया हूँ,,,,,,,,,,,,सो इंजॉय द फ़ूड , बाय”
ईशा ने सुना तो हैरानी से सिद्धार्थ को देखते ही रह गयी। सिद्धार्थ रेस्त्रो से बाहर जाने लगा , चलते चलते उसे कुछ ख्याल आया और वह वापस रिसेप्शन की तरफ चला आया उसने एक बर्गर और एक कोक आर्डर की और वही इंतजार करने लगा।

सिद्धार्थ अपना आर्डर लेकर बाहर आया और फुटपाथ की तरफ चला आया। जैसा कि उसे उम्मीद थी सुरभि वही बेंच पर बैठी थी। सिद्धार्थ धीरे से मुस्कुराया और फिर बेंच की तरफ चला आया। वह सुरभि से कुछ दूरी बनाकर बैठ गया। उसने बर्गर और कोक का बोतल बेंच पर रखा और धीरे से सुरभि की तरफ खिसका दिया। सुरभि को अपने आस पास किसी के होने का अहसास हुआ तो उसने सर उठाकर देखा। वह उदास और मायूस थी लेकिन सिद्धार्थ को देखते ही उसके चेहरे के भाव बदल गए और आँखों में गुस्सा तैरने लगा।

सिद्धार्थ ने देखा तो जल्दी से कोक की बोतल उठा ली। सुरभि ने उसे घुरा तो सिद्धार्थ ने कहा,”तुम्हारा कोई भरोसा नहीं है कब गुस्से में आकर ये बोतल तुम मेरे सर पर दे मारो”
“तुमने कभी देखा है कि प्लास्टिक की बोतल सर पर मारने से कोई मर गया हो ?”,सुरभि ने उसी गुस्से से कहा
“नहीं,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने कहा तो सुरभि सामने देखने लगी और कुछ देर बाद सिद्धार्थ को सुरभि की कही बात का मतलब समझ आया

उसने हाथ में उठाई बोतल धीरे से वापस सुरभि की तरफ खिसका दी और कहा,”आई ऍम सॉरी ! वो अंदर मैंने तुम्हे कुछ ज्यादा ही बोल दिया शायद,,,,,,,तुमने अपना आर्डर किया खाना भी नहीं खाया , तुम्हे भूख लगी होगी शायद तुम ये खा लो”
सुरभि ने सुना तो सिद्धार्थ की तरफ देखा और इस बार भी उसके चेहरे पर कठोर भाव थे जिन्हे देखकर सिद्धार्थ ने कहा,”तुम्हे नहीं खाना तो कोई बात नहीं मैं वापस ले,,,,,,,,,,,,,!!!”

सिद्धार्थ अपनी बात पूरी करता इस से पहले सुरभि ने बर्गर उठाया और खाने लगी। सिद्धार्थ ने देखा तो मुस्कुरा दी। उसने बोतल उठाई और ढक्कन खोलकर सुरभि की तरफ बढ़ा दी , सुरभि ने दूसरे हाथ में उसे पकड़ा और एक एक घूंठ पीते हुए बर्गर खाने लगी। सिद्धार्थ को अब ठीक लग रहा था वह आराम से बैठा  को खाते हुए देखने लगा। खाते हुए सुरभि कितनी मासूम और सहज लग रही थी। सिद्धार्थ को अपनी ओर देखते पाकर सुरभि ने बचा हुआ बर्गर उसकी और किया तो सिद्धार्थ ने ना में गर्दन हिला दी।

सुरभि बचे हुए बर्गर को एक बार फिर खाने लगी और खाते खाते एकदम से रोआँसा होकर कहा,”तुम इतने बुरे भी नहीं हो जितना मैं तुम्हे समझती थी,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
सिद्धार्थ ने सुना तो सुरभि की तरफ देखा सुरभि की रोनी सूरत देखकर सिद्धार्थ समझ गया आगे क्या होने वाला है इसलिए हताश होकर कहा,”नॉट अगेन प्लीज”

देसाई ग्रुप एंड कम्पनी , वाशी
“प्राची ! ये सब क्या है , मिस्टर मौर्या के साथ तुम इतनी बड़ी डील केंसल कैसे कर सकती हो ? इस से हमारी कम्पनी को कितना बड़ा नुकसान होगा इसका अंदाजा भी है तुम्हे ?”,अपने केबिन में बैठे मिस्टर देसाई ने गुस्से से कहा
“ओह्ह्ह कम ऑन डेड ! उस कम्पनी के एक मामूली से मैनेजर ने सबके सामने मेरी इंसल्ट की और आपको डील की पड़ी है”,प्राची ने भी गुस्से से कहा

अपनी बेटी के गुस्से के सामने मिस्टर देसाई थोड़ा नरम पड़े और कहा,”ओह्ह्ह प्राची ! तुम्हे पर्सनल और प्रोफेशनल बातों को इस तरह से मिक्स नहीं करना चाहिए , अभी तुम्हे बिजनेस के बारे में नहीं पता , अगर तुम्हे उनकी कोई बात बुरी भी लगी तो उसके लिए हम बाद में उनसे बात कर सकते थे तुमने सीधा डील केंसल कर दी”
“डेड ! आपके लिए मैं इम्पोर्टेन्ट हूँ या फिर ये डील ?”,प्राची ने गुस्से से उबलकर कहा

मिस्टर देसाई कुछ देर शांत रहे और फिर कहा,”ऑफकोर्स तुम ! अब तुमने ये डील केंसल कर ही दी है तो इट्स ओके , मैं मिस्टर मौर्या से मिलकर उन्हें ना बोल दूंगा लेकिन आइंदा से तुम किसी भी बिजनेस मीटिंग को अटेंड नहीं करोगी,,,,,,,,!!!”
“लेकिन डेड,,,,,,,,!!!”,प्राची ने हैरानी से कहा क्योकि इसके बाद तो वह फिर कभी पृथ्वी से मिल नहीं पायेगी

“मैं तुम्हारी बात मानने को तैयार हूँ इसलिए तुम्हे भी मेरी बात माननी चाहिए , आज से तुम सिर्फ ऑफिस में रहोगी जो भी मीटिंग अटेंड करनी है वो कम्पनी के मैनेजर मिस्टर “नीलेश” अटेंड करेंगे,,,,,,,!!!”,मिस्टर देसाई ने कहा
प्राची हताश होकर सोफे पर आ बैठी और कहा,”डेड ! ये सही नहीं है,,,,,,,,,ओह्ह्ह फाइन आप ये डील केंसल करना नहीं चाहते तो ठीक है लेकिन मौर्या ग्रुप के मैनेजर को मुझसे माफ़ी मांगनी होगी,,,,,,,,!!!”

मिस्टर देसाई धीरे से मुस्कुराये और प्राची की तरफ आकर कहा,”आज शाम हमारी कम्पनी की सक्सेस पार्टी है मैं उसमे जयदीप और उनके मैनेजर को भी इन्वाइट कर देता हूँ एंड मैं कोशिश करूंगा कि सब शार्ट हो जाये,,,,,,,,नीलेश नीचे गाड़ी में तुम्हारा इंतजार कर रहा है तुम्हे अब घर जाना चाहिए,,,,,,,,,शाम में मिलते है”
“थैंक्यू डेड ! आई लव यू”,प्राची ने मिस्टर देसाई को साइड हग करते हुए कहा और वहा से चली गयी।  
प्राची के जाने के बाद मिस्टर देसाई ने अपने PA से कहा,”मिस्टर भरत ! पता करो आखिर प्राची मौर्या ग्रुप में इतनी दिलचस्पी क्यों दिखा रही है ?”

“जी सर”,भरत ने कहा और वहा से चला गया।
मिस्टर देसाई अपनी कुर्सी पर आ बैठे और सिगरेट जला ली।

आनंद निलय अपार्टमेंट , पनवेल
पृथ्वी ने जब सुना की उसे “विक्रम कपूर” के साथ मीटिंग करनी है तो मुँह में भरी चाय फंवारे की तरह बाहर आ गिरी। जयदीप ने देखा तो उसे हैरानी हुई और उसने कहा,”क्या तुम ठीक हो ? ये विक्रम कपूर का नाम सुनकर तुम इतने हैरान क्यों हो , क्या तुम उन्हें जानते हो ?”
“जानता हूँ ! थोड़ी देर पहले ही उसने मुझसे मार खायी है”,पृथ्वी धीरे से बड़बड़ाया
“क्या कहा तुमने ?”,जयदीप ने पूछा जिसे ठीक से कुछ सुनाई नहीं दिया।

“अह्ह्ह्ह कुछ नहीं ! मैंने बस कहा कि मैं उनसे मिल लूंगा”,पृथ्वी ने थूक निगलते हुए कहा हालाँकि विक्रम से मिलना उसके लिए इतना आसान भी नहीं होने वाला था।
“गुड ! तो कल तुम ऑफिस आ रहे हो और प्लीज मेरी रिक्वेस्ट है तुम से अपनी पर्सनल लाइफ को अपनी प्रोफेशनल लाइफ से थोड़ा अलग रखो , मैं रोज रोज अपनी डील केंसल नहीं कर सकता,,,,,,,!!!”,जयदीप ने पृथ्वी से रिक्वेस्ट करके कहा

आई ऍम सॉरी ! मैंने आज कुछ ज्यादा ही कर दिया,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने नजरे झुकाकर कहा
“हाँ लेकिन अवनि के लिए तुम्हारा प्यार देखकर अच्छा लगा , हमेशा ऐसे ही उसका ख्याल रखना,,,,,,,,!!!”,जयदीप ने कहा
“मैं रखूंगा,,,,,,,,आप कुछ और लेंगे ?”,पृथ्वी ने पूछा , हमेशा जयदीप से चिढ़ने वाला पृथ्वी अब धीरे धीरे उसके साथ सहज होने लगा था।

अरे नहीं ! मुझे अब चलना चाहिए ऑफिस में क्लाइंट लंच के लिए मेरा इंतजार कर रहा है , मैं चलता हु”,जयदीप ने उठते हुए कहा
“हम्म्म,,,,,,,,,!!”,कहते हुए पृथ्वी जयदीप को छोड़ने दरवाजे तक चला आया। जयदीप के जाने के बाद पृथ्वी ने दरवाजा बंद किया और अंदर आकर गहरी साँस ली।
अवनि किसी काम से कमरे से बाहर आयी थी उसने पृथ्वी को हॉल में अकेले खड़े देखा तो उसके पास आकर कहा,”तुम्हारे बॉस चले गए ?”

“हाँ बस अभी निकले है,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
अवनि ने देखा पृथ्वी के चेहरे पर मायूसी छायी है तो उसने पूछा,”क्या हुआ पृथ्वी ? तुम थोड़े परेशान दिख रहे हो , उन्होंने तुम से कुछ कहा क्या ?”

पृथ्वी ने अवनि से हॉल में पड़े सोफे की तरफ चलकर बैठने का इशारा किया। अवनि सोफे पर आ बैठी और पृथ्वी भी सामने पड़े सोफे पर आ बैठा। उसने अवनि की तरफ देखा तो पाया कि अवनि उसे ही देख रही है। पृथ्वी ने अवनि को उस डील के बारे में बताया जो आज उसकी वजह से केंसल हो चुकी थी और जयदीप की कम्पनी को एक भारी नुकसान में डालने वाली थी।

अवनि ने सुना तो उसे भी बहुत बुरा लगा साथ ही उसे ये लगने लगा कि उसके लिए पृथ्वी मीटिंग छोड़कर आया और डील केंसल हुई , उसने मायूसी से कहा,”पृथ्वी ! क्या कोई और रास्ता नहीं है जिस से ये डील केंसल ना हो ?’
“एक रास्ता है अगर मैं जाकर मिस देसाई से माफ़ी मांग लू और उनसे ये डील केंसल ना करने की रिक्वेस्ट करू तो शायद कुछ हो सकता है”,पृथ्वी ने कहा

अवनि ने बोलने के लिए जैसे ही पृथ्वी की तरफ देखा पृथ्वी ने आगे कहा ,”लेकिन मैं ऐसा करूंगा नहीं,,,,,,,,,मैं उस से माफ़ी नहीं मांगूंगा,,,,,,,,हाह ! वो कितनी घमंडी है”
अवनि ने सुना तो प्यार से पृथ्वी को समझाते हुए कहा,”पृथ्वी ! एक माफ़ी मांगने से हम छोटे नहीं हो जाते है , जयदीप सर ने तुम्हारे लिए इतना कुछ किया है तुम्हे नहीं लगता तुम्हे भी उनके लिए थोड़ा सा सैक्रिफाइस करना चाहिए। अपने ईगो को साइड में रखकर मिस देसाई से माफ़ी माँग लेनी चाहिए। अगर तुम्हारे सॉरी बोलने से तुम्हारी कम्पनी का नुकसान होने से बचता है तो प्लीज जो अहेड”

“अरे लेकिन जयदीप सर खुद नहीं चाहते मैं उस नकचढ़ी प्राची को सॉरी बोलू”,पृथ्वी ने मुँह बनाकर कहा
“वो चाहे ना चाहे तुम्हे सॉरी बोलना चाहिए पृथ्वी,,,,,,देखो गलती तो तुम से हुई है ना और तुम्हारी गलती का नुकसान तुम्हारे बॉस क्यों उठाये ? पृथ्वी आई नो तुम जल्दी किसी से सॉरी नहीं कहते पर मेरे लिए सही,,,,,,प्लीज”,अवनि ने बड़े प्यार से कहा
अवनि इतने प्यार से कुछ कहे और पृथ्वी ना माने भला ऐसा कैसे हो सकता था ? उसने धीरे से हामी में गर्दन हिला दी तो अवनि मुस्कुरा उठी।

अवनि को मुस्कुराते देखकर पृथ्वी ने अपनी भँवे उचकाई तो अवनि ने कहा,”तुम बहुत अच्छे हो पृथ्वी,,,,,,मैं कुछ भी कहती हूँ और तुम मान लेते हो”
पृथ्वी ने सुना तो अवनि की तरफ देखा और कहा,”मेरी जिंदगी में तुम्हारे सिवा और कोई नहीं है अवनि और फिर तुम वो पहली इंसान हो जिसकी हर बात मानने का दिल करता है,,,,,,,,,मैं तुम्हे कभी ना नहीं कह सकता”
अवनि ने सुना तो प्यार से पृथ्वी की तरफ देखने लगी , कितना प्यार था उसकी आँखों में अवनि के लिए और बातों में कितना विश्वास।

“वैसे ये मिस देसाई से तुम्हे क्या प्रॉब्लम है ?”,अवनि ने कहा
“मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है मेरे लिए वो बस एक बिजनेस कस्टमर है”,पृथ्वी ने सहजता से कहा
“पृथ्वी ! तुम्हे इन लोगो के साथ थोड़ा नरमी से पेश आना चाहिए। एक दोस्त की तरह मिलना और बात करना चाहिए उनकी प्रॉब्लम को समझना चाहिए और जरूरत पड़े तो उन्हें और उनके काम को वेल्यू भी देना चाहिए”,अवनि ने कहा

पृथ्वी ने सुना तो वो पल उसकी आँखों के सामने आ गया जब ऑफिस में साथ बैठे हुए प्राची ने एकदम से अपना हाथ पृथ्वी की बाँह पर रख दिया था। पृथ्वी को खोया हुआ देखकर अवनि ने कहा,”पृथ्वी,,,,,,,!!!”
“अह्ह्ह्ह हाँ”,पृथ्वी चौंका
“क्या सोचने लगे ?”,अवनि ने धीरे से पूछा
पृथ्वी हल्का सा मुस्कुराया और कहा,”कुछ नहीं ! मैं तुम्हारे लिए खुद को बदल सकता हूँ अवनि बाकि पूरी दुनिया के लिए मेरा ‘पृथ्वी उपाध्याय’ बने रहना ही ठीक है”

“तुम्हे मेरे लिए भी बदलने की जरूरत नहीं है पृथ्वी,,,,,तुम जैसे भी हो बहुत अच्छे हो”,अवनि ने कहा
“हम्म्म्म ! अच्छा तो मैं हूँ”,पृथ्वी ने अंगड़ाई लेते हुए कहा
“मेरे ख्याल से तुम्हे थोड़ी देर के लिए सो जाना चाहिए , तुम्हारे दिमाग में जो ये बातें चल रही है थोड़ी देर के लिए शांत हो जाएगी उसके बाद,,,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने उठते हुए कहा

“उसके बाद ?”,पृथ्वी ने पूछा
“उसके बाद शाम में हम मंदिर जायेंगे”,अवनि ने मुस्कुराकर कहा और वहा से चली गयी
“अरे नहीं यार ! फिर से मंदिर,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने अपना मुँह सोफे के तकिये में छुपाते हुए कहा

 सुरभि के एक हाथ में बर्गर था और दूसरे हाथ में कोक की बोतल और आँखों में आँसू , मुँह में ब्रेड भरा था और उसने सिद्धार्थ को देखकर रोते हुए कहा,”तुम्हे नहीं पता मैं कितनी परेशान हु उउउउउउउउउ , वो अनिकेत वो इतना पत्थर दिल कैसे हो सकता है ? उसने मुझे ब्लॉक कर दिया , वो मेरा फोन तक नहीं उठाता है,,,,,,,,,,!!!
कहते कहते सुरभि एकदम से नॉर्मल हो गयी और बर्गर का एक टुकड़ा खाते हुए कहा,”कही हमारे प्यार को किसी की नजर तो नहीं लग गयी,,,,,,,,,,,!!!”

कहते हुए सुरभि ने सिद्धार्थ की तरफ देखा और उसे घूरते हुए कहा,”कही तुमने ही तो मुझे ये बददुदा नहीं दी कि मैं अनिकेत से दूर हो जाऊ जैसे मैंने भगवान से कहा था कि वो अवनि को तुम से दूर कर दे,,,,,,,,लेकिन तुम उसके लिए बिल्कुल सही नहीं थे इसलिए मैंने ऐसा बोला”
“अनिकेत भी तुम्हारे लिए सही नहीं है,,,,,,,,!!”,सिद्धार्थ ने बुझे स्वर में कहा
“तुम ये कैसे कह सकते हो ?”,सुरभि ने कहा

“अगर वो तुम्हारे लिए सही होता तो वो समझता कि एक नौकरी पाने के लिए तुमने कितनी मेहनत की है। तुम अच्छी लड़की हो , स्ट्रेट फॉरवर्ड हो। गलत सहना तो दूर गलत सुनना तक पसंद नहीं करती हो,,,,,,,,लेकिन वह एक डरपोक और सेल्फिश लड़का है बस इसलिए वह तुम्हारे लिए सही नहीं है,,,,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने सुरभि की तरफ देखकर सहजता से कहा
सुरभि ने सुना तो फिर रोनी सूरत बना ली और आँखों में आँसू लाकर रोते हुए कहा,”इतनी छोटी सी बात उस गधे को समझ क्यों नहीं आती,,,,,,,,,,अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह”

रोते रोते सुरभि की नाक भी बहने लगी ये देखकर सिद्धार्थ ने अपने जेब से रुमाल निकाला और सुरभि की ओर बढ़ा दिया। सुरभि ने रुमाल देखा तो और जोर से रोने लगी ये देखकर सिद्धार्थ ने कहा,”अब क्या हुआ ?”
सुरभि ने रोते हुए कहा,”अब तुम मेरे सामने इतने अच्छे क्यों बन रहे हो ?”
सिद्धार्थ ने सुना तो रुमाल सुरभि के हाथ में थमाया और उठते हुए कहा,”क्योकि मैं अच्छा हूँ”

( क्या सुरभि के लिए पिघल रहा है सिद्धार्थ का दिल और होने लगी है उसे सुरभि की परवाह ? क्या मिस्टर देसाई सम्हालेंगे इस डील को और पृथ्वी मांगेगा प्राची से माफ़ी ? क्या सच में बदल गया है सिद्धार्थ या सुरभि के साथ होने वाला है कोई बड़ा धोखा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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