Pasandida Aurat Season 2 – 36
Pasandida Aurat Season 2 – 36

पृथ्वी को गुस्से में देखकर अवनि सहम गयी। पृथ्वी अवनि के पास आया उसकी कलाई पकड़ी और उसे वहा से ले गया। पृथ्वी को गुस्से में देखकर अवनि की हिम्मत नहीं हुई कि पृथ्वी से कुछ पूछे वह चुपचाप उसके साथ चल पड़ी। रवि जी ने लता को सम्हाला और उसे वहा से लेकर चले गए। पृथ्वी अवनि को लेकर फ्लेट में आया और उसे अपने सामने करके उसकी कलाई छोड़ दी। पृथ्वी अवनि के ठीक सामने खड़ा था उसके चेहरे पर अब गुस्से के नहीं थे बल्कि अफ़सोस के भाव थे।
अवनि डरी सहमी सी बस उसे देख रही थी , उसके सामने हमेशा हसते मुस्कुराते रहने वाले पृथ्वी में इतना गुस्सा भी है ये अवनि ने पहली बार देखा था। पृथ्वी की अवनि से नजरे मिलाने की हिम्मत नहीं हो रही थी वह अपनी नजरे झुकाये खड़ा था। दोनों खामोश थे और हॉल में एक गहरी शांति फैली हुई थी।
कुछ देर बाद पृथ्वी अवनि के थोड़ा करीब आया और कहा,”मुझे थप्पड़ मारिये”
“हा,,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने चौंककर हैरानी से कहा
“मैडम जी ! थप्पड़ मारिये मुझे”,पृथ्वी ने फिर कहा
अवनि ने ना में गर्दन हिला दी तो पृथ्वी ने फिर अपनी बात दोहराई,”मैडम जी ! मैं कह रहा हूँ , थप्पड़ मारिये मुझे”
अवनि ने धीरे से पृथ्वी के गाल पर थप्पड़ मारा तो पृथ्वी ने कहा,”ऐसे नहीं ! जोर से नीचे जो गुस्सा मैंने आप पर दिखाया उसी गुस्से से मारिये”
अवनि ने सुना तो इस बार थोड़ा तेज थप्पड़ पृथ्वी को मारा लेकिन पृथ्वी के सिसका तक नहीं बल्कि उसने अपना दुसरा गाल भी अवनि के सामने किया और कहा,”एक और,,,,,,,!!!”
अवनि ने दूसरे गाल पर भी थप्पड़ मारा और उसकी आँखों से आँसू बहने को तैयार थे। पृथ्वी ने अपना गाल सहलाया क्योकि इस बार उसे दर्द हुआ लेकिन सिसका वह इस बार भी नहीं। उसने अवनि की तरफ देखा और कहा,”किसी को भी आप पर इस तरह से चिल्लाने का हक़ नहीं है मैडम जी , मुझे भी नहीं,,,,,,,,मैं गुस्से में आप पर चिल्ला दिया लेकिन अगली बार मैं ऐसा कुछ करू तो अकेले में नहीं बल्कि सबके सामने मुझे थप्पड़ मारना और ये अहसास दिलाना कि मैं गलत हूँ,,,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो नम आँखों से पृथ्वी को देखने लगी। अवनि समझ ही नहीं पा रही थी कि आखिर क्या था ये इंसान ? उसे वो पल याद आ गया जब एक शाम अनजाने में उसका हाथ सिद्धार्थ को लग गया था और सिद्धार्थ ने कितना तमाशा किया था , अवनि को कितना बेइज्जत किया था और आज यहाँ पृथ्वी अपनी गलती के लिए खुद उस से थप्पड़ खा रहा था। अवनि का दिल भर आया , उसकी आँखों में आँसू झिलमिलाने लगे लेकिन उसने जैसे तैसे करके अपने आँसुओ को अपनी आँखों में रोक लिया और पृथ्वी को देखती रही।
अवनि को खामोश पाकर पृथ्वी ने अवनि को वो सब बता दिया जो उस शाम लता और घरवालों ने उसके साथ किया था। अवनि ने सुना तो उसे बहुत दुःख हुआ और उसे अब समझ आया क्यों कुछ देर पहले पृथ्वी ने उसे लता के करीब जाने से रोका था। पृथ्वी के साथ रहकर भी अवनि उसकी भावनाये नहीं समझ पायी ये सोचकर अवनि का मन भारी होने लगा और गले में चुभन का अहसास हुआ। उसने कुछ नहीं सोचा वह आगे बढ़ी और पृथ्वी के सीने से लगकर रोते हुए कहा,”मुझे माफ़ कर दो पृथ्वी,,,,,,,,,,मैंने तुम पर हाथ उठाया , मेरी वजह से तुम्हे कितना कुछ सहना पड़ रहा है पृथ्वी,,,,,,,,मुझे माफ़ कर दो”
पृथ्वी ने सुना तो उसकी आँखों में आँसू भर आये उसके हाथ अभी भी अवनि से दूर थे , उसमे इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह अवनि को अपनी बाँहो में भर सके लेकिन अवनि को रोते देखकर उसने अपना हाथ उसके सर से लगाया और दुसरा उसकी पीठ से लगाकर कहा,”इसमें आपकी कोई गलती नहीं है मैडम जी,,,,,,,,,,आप दिल छोटा मत कीजिये,,,,,,,और आपने मुझ पर हाथ उठाया मुझे अच्छा लगा , आगे भी ऐसे ही थप्पड़ मारना जब मैं कोई गलती करू या आप पर चिल्लाऊं,,,,,,,,बस थोड़ा धीरे मारना,,,,,,!!!”
अवनि ने सुना तो अपना मुँह पृथ्वी के सीने में छुपाकर रोने लगी , उसे अब बहुत बुरा लग रहा था कि उसने पृथ्वी पर हाथ उठाया जबकि अवनि को सच बताकर पृथ्वी काफी हल्का महसूस कर रहा था। अवनि पृथ्वी से दूर हटी और सुबकने लगी। रोने की वजह से उसका चेहरा लाल हो चुका था। पृथ्वी ने अवनि को प्यार से देखा और मन ही मन खुद से कहा,”आपको ऐसे रोते हुए देखना मुझे इस संसार की सबसे दुखद घटना लगती है , कोई और जब रोता है तो मुझे फर्क नहीं पड़ता पर जब आपको रोते देखता हूँ तो दिल करता है संसार की सारी खुशिया आपके कदमो में लाकर रख दू,,,,,,,
अभी मेरा आप पर इतना हक़ नहीं बनता कि मैं आपके आँसू पोछ सकू,,,,,,,,,,,,क्यों मैडम जी ? आखिर क्यों आपने मुझे खुद से दूर रहने की बात कही , पता है इस वक्त मेरा क्या दिल कर रहा है ? आपके पास आउ , आपका चेहरा अपने हाथो में थामू और अपने होंठ आपके होंठो पर रख दू,,,,,,,,,,,ताकि कुछ देर के लिए आप सब भूल जाये लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता,,,,,,,ऐसा करके मैं आपकी भावनाओ को ठेस नहीं पहुंचा सकता,,,,,,,!!!”
अवनि ने अपने आँसू पोछे और वहा से कमरे की तरफ चली गयी। पृथ्वी वही हॉल में खड़ा उसे जाते देखता रहा।
कमरे में आकर अवनि बाथरूम में चली आयी। उसने मुँह धोया और बाहर चली आयी। रेंक में रखा तौलिया उठाया और अपना मुँह पोछकर बिस्तर पर आ बैठी। अवनि की आँखों के सामने अभी भी वही पल चल रहे थे। कमरे के दरवाजे पर खड़े पृथ्वी ने दरवाजा खटखटाया और कहा,”क्या मैं अंदर आ सकता हूँ ?”
पृथ्वी अंदर आया उसने साइड में पड़ी कुर्सी को अवनि के सामने रखा और उस पर आ बैठा ठीक अवनि के सामने , अवनि की आँखों में अब आँसू नहीं थे बस चेहरे पर उदासी थी और आँखे रोने की वजह से हलकी लाल।
पृथ्वी ने कुछ देर अवनि को ऐसे ही ख़ामोशी से देखा और फिर कहने लगा,”अवनि ! मैं जानता हूँ इस वक्त आपके दिमाग में बहुत कुछ चल रहा है लेकिन मैं कहूंगा कि आपको इस बारे में बिल्कुल सोचने की जरूरत नहीं है। जानता हूँ हालात हमारे विपरीत है लेकिन मैं फिर भी सब ठीक कर दूंगा बस मुझे थोड़ा वक्त दो,,,,,,,,मेरे लिए या मेरे परिवार के लिए अपने मन में कोई भी फ़िक्र रखने की जरूरत नहीं है आपको सबसे पहले खुद को मजबूत बनाना होगा , आई के सामने आप हर बार कमजोर नहीं पड़ सकती है,,,,,,,,,,,,
मैं जानता हूँ वो अभी भी हम दोनों से गुस्सा है और उनका गुस्सा होना जायज है , उनकी जगह अगर मैं भी होता तो शायद इतना ही बुरा मानता। अवनि ! मैं सब ठीक कर दूंगा , सब आपको अपनाएंगे , आपसे प्यार करेंगे , आपके साथ खुश भी रहेंगे बस थोड़ा वक्त लगेगा। अगर आप मेरे साथ खड़ी रही तो मैं सब कर लूंगा,,,,,,,,,बस मैं बार बार आपको ऐसे कमजोर पड़ते नहीं देख सकता , मैं सब देख सकता हूँ लेकिन आपकी आँखों में आँसू नहीं,,,,,,,,मैंने आप पर चिल्लाया उसके लिए भी मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ , आगे से मैं ध्यान रखूंगा कि ऐसा दोबारा ना हो,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी की बातें सुनकर अवनि का दिल भर आया और उसने कहा,”बस करो पृथ्वी , तुम पहले ही मेरे लिए इतना सब कर चुके हो ,, मेरे लिए खुद को अब और तकलीफ मत दो,,,,,,,,,!!”
पृथ्वी ने सुना तो धीरे से मुस्कुराया और कहा,”इसमें तकलीफ कैसी मैडम जी ? आप मेरी जिम्मेदारी है,,,,,,,,आपका ख्याल रखना मेरा फर्ज है और मैं अपने फर्ज से पीछे नहीं हट सकता फिर चाहे इसके लिए मुझे किसी के भी खिलाफ जाना पड़े,,,,,,,,,
लोगो के लिए शादी का मतलब क्या है मैं नहीं जानता लेकिन मेरे लिए शादी का मतलब है अपने हमसफ़र के साथ खड़े होना फिर चाहे वो गलत ही क्यों ना ?”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखने लगी , पृथ्वी की बातो में जहा विश्वास था तो आँखों में अवनि के लिए बेइंतहा मोहब्बत,,,,,,,,,,,,!!!
अवनि को खामोश देखकर पृथ्वी ने अपना गाल सहलाया और कहा,”बस आप मारे थप्पड़ का दर्द अभी भी हो रहा है मुझे”
“ज्यादा जोर से लगा ?”,अवनि ने पूछा
“हां ना”,पृथ्वी ने मासूमियत से कहा
“मुझे माफ़ कर दो पृथ्वी , तुम तुम चाहो तो मुझे वापस थप्पड़ मार सकते हो,,,,,,या मुझे सजा दे सकते हो”,अवनि ने कहा
“इस जिंदगी में तो मैं कभी आप पर हाथ नहीं उठा पाऊंगा मैडम जी , हाँ वैसे मैं कुछ माँगू तो क्या मुझे मिलेगा ?”,पृथ्वी ने कहा
“हम्म्म बताओ”,अवनि ने कहा
“सोच लीजिये फिर आप पीछे नहीं हट सकती,,,,,,,एक बार मैंने कुछ माँगा तो आपको मुझे वो देना पडेगा”,पृथ्वी ने अवनि की आँखों में देखते हुए शरारत से कहा और इस वक्त उसकी नजरे अवनि का दिल धड़काने के लिए काफी थी
“क्या चाहिए तुम्हे ?”,अवनि ने धड़कते दिल के साथ कहा
पृथ्वी अवनि की तरफ देखकर पहले शरमाया , फिर मुस्कुराया और फिर अपने होंठो को दबाकर प्यार भरी नजरो से अवनि को देखने लगा। पृथ्वी की ये हरकते अवनि के दिल में हलचल पैदा करने लगी आखिर पृथ्वी उस से ऐसा क्या मांगने वाला था ? पृथ्वी कुछ देर खामोश रहा , अपनी जगह से उठा और अवनि के थोड़ा करीब चला आया। अवनि की धड़कने जो तेज चल रही थी अब एकदम से धीमी पड़ गयी वह अपनी बड़ी बड़ी आँखों से एकटक पृथ्वी को देखने लगी।
पृथ्वी के और उसे होंठो के बीच बस कुछ इंच का फासला था और ये देखकर अवनि ने अपनी आँखे बंद कर ली इस ख्याल के साथ कि बारिश की रात अधूरी छोड़ी गयी भावना को शायद पृथ्वी आज पूरी करना चाहता है। उसका दिल धड़क रहा था और वह अपनी साँसे रोक के बैठी थी
“मुझे आपके हाथ से बनी एक कप चाय चाहिए,,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने धीरे से कहा और अवनि से पीछे हटकर कमरे से बाहर चला गया।
अवनि ने सुना तो अपनी आँखे खोली देखा पृथ्वी कमरे से बाहर जा रहा है। अवनि ने साँस ली और अपना हाथ अपने सीने पर रख लिया। पृथ्वी के यू करीब आने से वह कितना घबरा गयी थी लेकिन ये क्या पृथ्वी को उस से चाय चाहिए,,,,,,,,,,,अवनि कुछ देर खामोश बैठी रही और फिर मुस्कुराकर धीरे से कहा,”पागल,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी हॉल में आकर लेपटॉप पर कुछ काम करने लगा और अवनि उसके लिए चाय बनाने चली गयी।
सिरोही , राजस्थान
“बस भी करो और कितना पिओगी ?”,सिद्धार्थ ने सुरभि के हाथ से बियर की दूसरी बोतल छीनकर कहा
“तुम मेरा दुःख नहीं समझ सकते चिलगोजे,,,,,,मेरे दुःख के सामने ये बियर की बोतल कुछ भी नहीं है,,,,,,,,,,,,,अह्ह्ह्हह्हह मैं तुम्हे कैसे बताऊ मेरे साथ क्या हुआ है ? मैं कितने दुःख में हूँ और तुम मुझे पीने से रोक रहे हो,,,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने पहले आराम से कहा और फिर मुँह फाड़कर रोते हुए कहा
सिद्धार्थ का ये सब देखकर सर दर्द होने लगा था उसने बोतल वापस सुरभि के सामने रखी और कहा,”लो पी लो”
“अह्ह्ह थैंक्स ! वैसे तुम इतने बुरे भी नहीं हो,,,,,,,,,अह्ह्ह्ह लेकिन तुमने अवनि को बहुत परेशान किया है बस इसलिए मैं तुमसे चिढ़ती हूँ,,,,,,,!!!”,सुरभि ने नशे के उन्मांद में कहा
“हाँ जानता हूँ मैंने उसे बहुत हर्ट किया और इसके लिए मैं शर्मिंदा भी हूँ , बस अब वो खुश रहे क्योकि वो बहुत अच्छी लड़की है”,सिद्धार्थ ने अवनि के बारे में सोचकर कहा
चूँकि सुरभि नशे में थी इसलिए उसे सिद्धार्थ की आधी बात समझ आयी और आधी का उसने गलत अंदाजा लगाया और कहा,”ए तुम अब भी अवनि को पाने का ख्याब देख रहे हो , भूलो मत उसकी शादी हो चुकी है और पृथ्वी के साथ बहुत खुश है,,,,,,,,,अगर तुमने उन दोनों को अलग करने का सोचा तो मैं तुम्हारा खून कर दूंगी समझे,,,,,,!!!”
सिद्धार्थ ने देखा सुरभि ने अपने हाथ में कांटा उठाया हुआ है और वह बहुत ही गुस्से से सिद्धार्थ को देख रही है। सिद्धार्थ ने अपना सर पीट लिया , उसने सुरभि के हाथ से कांटा लेकर नीचे रखा और कहा,”मैं अगर ऐसा सोचता तो अवनि को पृथ्वी के पास नहीं जाने देता , मुझे समझ आ गया है कि अवनि को कभी मुझसे प्यार हुआ ही नहीं था,,,,,,,,,उसका मेरी जिंदगी से चले जाना ही सही था और तुम , तुम अपने दिमाग में ये फालतू के ख़याल लाना बंद करो समझी,,,,,,,,,,,!!!”
सुरभि ने सुना तो हैरानी से सिद्धार्थ को देखा और फिर नशे के उन्मांद में रोते हुए कहा,”तो क्या तुम मुझ पर चिल्ला रहे हो,,,,,,,,,,,,,अह्हह्ह्ह्ह तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हो ?”
सिद्धार्थ ने हताश होकर आसमान की तरफ देखा और फिर सुरभि की तरफ देखकर प्यार से कहा,”अरे यार ! मैं तुम्हे डांट नहीं रहा मैं बस ये कह रहा हूँ कि तुम ये सब सोचना बंद करो , मुझे अवनि नहीं चाहिए मैं उसे पृथ्वी के साथ देखकर खुश हूँ,,,,,,,,,,,!!!”
“ह्म्म्मम्म खुश तो तुम्हे होना ही चाहिए आखिर पृथ्वी है ही इतना अच्छा,,,,,,,,,,,,वो अवनि से बहुत प्यार करता है , इतना जितना दुनिया में कोई किसी से नहीं करता,,,,,,,She is so lucky,,,,,,,,,,,,,,,,,,फिर मैं क्यों इतनी अनलकी हूँ वो अनिकेत उसने मुझसे कहा मैं नौकरी और उसमे से किसी एक को चुन लू”,सुरभि ने पहले उन्मांद में कहा और फिर एकदम से रो पड़ी
“क्योकि वो एक नंबर का गधा है , अब उठो और चलो यहाँ से तुमने बहुत ज्यादा पी ली है,,,,,,चलो घर चलते है”,सिद्धार्थ ने उठते हुए कहा और बिल चुकाने काउंटर की तरफ चला गया।
सिद्धार्थ बिल चुकाकर वापस आया तब तक सुरभि बचा हुआ आखरी घूंठ भी पी चुकी थी। वह उठी और जैसे ही चलने के लिए आगे बढ़ी लड़खड़ाई , सिद्धार्थ ने आगे बढ़कर उसे सम्हाल लिया और लेकर गाड़ी की तरफ बढ़ गया। जैसे ही दोनों गाड़ी के पास पहुंचे सुरभि को उबकाई आयी और बहुत ज्यादा बियर पीने की वजह से उसे उलटी होने लगी। वह वही झुककर उलटी करने लगी। बेचारा सिद्धार्थ ना वह सुरभि को सम्हाल पा रहा था ना ही उसे अकेले छोड़कर जा पा रहा था।
सिद्धार्थ ने देखा सुरभि के खुले बाल बिखरे हुए है तो वह उसके पास आया उसके बालों को समेटकर हाथ में पकड़ा और कहा,”अब आराम से कर लो”
सुरभि जो खाया पीया था सब उलटी के जरिये बाहर आ गया और सिद्धार्थ उसके बालों को सम्हाले उसके साथ खड़ा था।
रवि जी लता को लेकर घर पहुंचे। लता सोफे पर आकर बैठ गयी रवि जी ने लक्षित से पानी का गिलास लेकर आने को कहा। लक्षित पानी लेकर आया और लता की तरफ बढ़ा दिया। लता ने पानी पीया , उनकी धकड़ने अभी भी तेज थी और आँखों के सामने पृथ्वी का गुस्से से चिल्लाना आ रहा था। जिस गुस्से से पृथ्वी अवनि का हाथ थामकर उसे वहा से लेकर गया वो पल लता की आँखों में किसी फिल्म की तरह घूम रहा था। रवि जी ने लता को खामोश देखा तो उसके बगल में आ बैठे और कहा,”तुम ठीक हो ना लता ?”
लता ने सुना तो रवि जी की तरफ पलटी और बेचैनी भरे स्वर में कहा,”वो लड़की , वो लड़की हमारे पृथ्वी के लिए ठीक नहीं है जी ,, मैंने अपने पृथ्वी को इतना गुस्से में कभी नहीं देखा,,,,,,,,,,वो उस लड़की पर कैसे चिल्लाया ?”
“पृथ्वी अवनि पर चिल्लाया तो फिर पृथ्वी गलत हुआ ना लता , इसमें अवनि की क्या गलती है ? जब वो उस पर चिल्लाया तो मेरा दिल किया खींचकर एक थप्पड़ उसके गाल पर रसीद करू पर जब उसने कहा कि हमारे साथ उसका कोई रिश्ता नहीं है तो मेरी कुछ बोलने की हिम्मत ही नहीं हुई,,,,,,,,,!!!”,रवि जी ने उदासी भरे स्वर में कहा
“ये सब भी उस लड़की की वजह से है , उसके लिए ही तो उसने हम से सब रिश्ते खत्म कर दिए,,,,,,,,,!!!”,लता ने गुस्से से लेकिन धीमे स्वर में कहा
“नहीं लता उस लड़की की इसमें कोई गलती नहीं है बल्कि पृथ्वी को अपने परिवार से सब रिश्ते खत्म करने के लिए तो तुमने उसे मजबूर किया ना,,,,तुम सब ने मिलकर उसे प्रॉपर्टी के पेपर भेजे और कहा कि अगर वह अपनी पत्नी को चुनता है तो उसे प्रॉपर्टी के साथ साथ अपने परिवार से सारे रिश्ते खत्म करने होंगे,,,,उसने वही किया जो तुम सब चाहते थे फिर इसमें वो लड़की कैसे गलत हो गयी ?”,रवि जी ने प्यार से लता को समझाते हुए कहा
लता ने सुना तो खामोश हो गयी , उन्हें अहसास हुआ कि ये सब के लिए कही न कही वे भी जिम्मेदार है। लता को खामोश देखकर रवि जी ने कहा,”गलती दोनों से हुई है लता लेकिन सबसे ज्यादा गलती तुम्हारे अपने बेटे की है इसलिए बार बार अवनि को जिम्मेदार ठहराना बंद करो , तुम जितना उस से नफरत करोगी उतना ही पृथ्वी से दूर होती चली जाओगी क्योकि पृथ्वी और अवनि अब अलग अलग नहीं है दोनों एक ही है,,,,,,,,,,,,अगर तुम उन्हें अपना नहीं सकती माफ़ नहीं कर सकती तो उनके लिए अपने दिल में नफरत पालना भी बंद करो,
तुम एक माँ हो लता और उस से पहले तुम एक औरत हो अगर औरत होकर तुम उस लड़की का दर्द नहीं समझ सकती तो कम से कम अपनी नफरत से उस दर्द को और मैं बढ़ाओ,,,,,,,,,,,,,,!!!”
लता ने सुना तो रवि जी की तरफ देखा और उदासी भरे स्वर में कहा,”तो क्या अब आप भी उस लड़की की तरफदारी कर रहे है ?”
“नहीं लता ! मैं अपनी पत्नी के साथ हूँ और मैं नहीं चाहता कि कोई भी औलाद अपनी “माँ” को अपने दुखो का कारण समझे,,,,,,,,,!!”,रवि जी ने कहा और उठकर वहा से चले गए लेकिन जाते जाते लता के जहन में अवनि को लेकर एक ख्याल डाल गए।
( क्या अवनि सम्हाल पायेगी पृथ्वी की मोहब्बत के साथ साथ उसके गुस्से को भी ? क्या धीरे धीरे बन रही है सुरभि और सिद्धार्थ के बिच केमेस्ट्री ? क्या लता पर होगा रवि जी की बातो का असर ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Well ab to kuch soche Lata ji…ki yaha par galat Avni nhi balki unka beta aur wo khud hai…jab Ravi ji ko baat samaj m aa gai to lata ji kyu nhi samjhti hai…bas hamesha Avni ko dosh dena…aur idhar Avni samaj nhi pa rhi hai Prithvi ko…kabhi itna gussa aur kabhi itni parwha…uff yeh ladka bhi samaj se pare hai Avni ki, but wo jaldi samjhegi Prithvi ko bhi aur uske pyar ko bhi…lakin yaha par to Surbhi aur Siddarth k beach kuch kichdi pak rhi hai…kahin Surbhi Aniket ko byyy aur Siddarth ko welcome to nhi karengi na apni life m