Pasandida Aurat Season 2 – 35
Pasandida Aurat Season 2 – 35

पृथ्वी की बात सुनकर अवनि ख़ामोशी से उसे देखने लगी तो पृथ्वी ने कहा,”आप जब ऐसे मुझे देखती है तो लगता है जैसे आप मेरी बात से सहमत है”
“ऐसा कुछ नहीं है मैं बस तुम्हे समझने की कोशिश कर रही हूँ”,अवनि ने पृथ्वी से नजरे हटाकर कहा
“मैडम जी ! जिस दिन आप मुझे समझ गयी न मेरे बिना एक पल भी नहीं रह पायेगी”,पृथ्वी ने मुस्कुरा कर कहा
“तुम्हे शर्म नहीं आती मुझसे फ्लर्ट कर रहे हो”,अवनि ने पृथ्वी को घूरकर कहा
“हाँ तो अपनी वाइफ से कर रहा हूँ दुसरो की वाइफ से थोड़ी किया है और ये फ्लर्ट नहीं है मैं बस आपके सामने अपनी फीलिंग्स शेयर कर रहा हूँ,,,,,!!”,पृथ्वी ने शब्दों को चबाकर कहा
अवनि ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और चुपचाप अपना नाश्ता करने लगी। नाश्ता करने के बाद पृथ्वी दवा और पानी का गिलास लेकर अवनि के सामने खड़ा था। उसके हाथ में दवा देखकर अवनि ने कहा,”तुम क्या मुझे फिर से सुलाना चाहते हो ?”
“ये दवा खाएंगी तो आप जल्दी ठीक हो जाएगी और फिर कल शाम के मैच में आपको मुझे चियर्स भी तो करना है ताकि मैं जीत के आउ”,पृथ्वी ने हथेली पर रखी दवा अवनि के सामने करके कहा
अवनि ने टेबलेट उठाया और मुँह में रखकर पानी पीते हुए कहा,”कल तुम्हारा मैच है ?”
“हाँ सोसायटी के ग्राउंड में एक मैच है तो सोचा क्यों ना उसे जीतकर आपको गलत साबित कर दू”,पृथ्वी ने इतराकर कहा
अवनि मुस्कुराई और कहा,”तुम कुछ ज्यादा ही ओवरकॉन्फिडेन्स नजर आ रहे हो , मैं कल तुम्हे चियर्स करने जरूर आउंगी”,अवनि ने कहा
“ओह्ह्ह्ह नहीं,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने एकदम से चौंककर कहा
“क्या नहीं , क्या तुम नहीं चाहते मैं कल आउ ?”,अवनि ने हैरानी से पूछा
“कल तो जयदीप सर और टीम डिनर पर आ रहे है और कल मैच भी है तो दोनों कैसे मैनेज होगा ? आपकी तबियत भी ठीक नहीं है , एक काम करता हूँ सर से कहता हूँ डिनर अगले वीकेंड का रखे,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा
“पृथ्वी ! मैं मैनेज कर लूंगी और प्लीज मैं बीमार हूँ ये कहना बंद करो,,,मैं अब बिल्कुल ठीक हूँ। तुमने उनसे डिनर का कहा है अब मना करेंगे तो अच्छा नहीं लगेगा,,,,,,,!!!”,अवनि ने कहा
“लेकिन आप परेशान हो जाएँगी”,पृथ्वी ने कहा
“बिल्कुल नहीं ! तुम हो न मेरी मदद करने के लिए , हम मिल के कर लेंगे,,,,!!”,अवनि ने मुस्कुरा कर कहा
“ठीक है,,,,,थैंक्यू”,पृथ्वी ने भी मुस्कुरा कर कहा
“अब ये थैंक्यू किसलिए ?”,अवनि ने दूसरी दवा खाते हुए कहा
“आप मेरे लिए इतना सब कर रही है इसलिए,,,,,,आप बहुत अच्छी है मैडम जी”,पृथ्वी ने कहा तो आज अवनि ने पृथ्वी की तरह एक्टिंग करते हुए अपना हाथ अपने सीने पर रखा और आँखे बंद कर पीछे गिरने का नाटक किया।
ये देखकर पृथ्वी मुस्कुरा उठा उसने अपना सर झटका और कहा,”आप थोड़ी नटखट भी है,,,,,,,,,अब आप आराम कीजिये मैं नीचे जाकर आता हूँ,,,,,, जल्दी आ जाऊंगा”
“हम्म्म ठीक है,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा और उठकर कमरे में चली गयी
पृथ्वी भी बाहर निकल गया।
सिरोही , राजस्थान
सुरभि ऑफिस चली आयी और अपने काम में बिजी हो गयी। दोपहर तक सब सही था लेकिन दोपहर के बाद अनिकेत के मैसेज और कॉल्स ने उसे फिर परेशान कर दिया। एक बार फिर सुरभि की अनिकेत से अच्छी खासी बहस हुई और उसका गुस्सा निकाला सुरभि ने ऑफिस में आये एक आदमी पर जिसने अंदर जाकर सुरभि की शिकायत कर दी और अब सुरभि सर झुकाये हाथ बांधे सीनियर अधिकारी के सामने खड़ी थी।
“ये सब क्या है सुरभि , क्या यहाँ आये लोगो से ऐसे बात की जाती है ? तुम्हे अगर कुछ नहीं समझ आता है तो उसे आगे भेज दो , किसी और को हेंडओवर कर दो लेकिन ऐसे सबके सामने उन पर चिल्लाना क्या ये सही है ?”,सीनियर ने कहा
“आई ऍम सॉरी सर लेकिन वो बार बार एक ही बात रिपीट कर रहे थे”,सुरभि ने कहा
“सुरभि ! हम लोग यहाँ किसलिए है ? ऐसे लोगो की मदद करने के लिए ही तो है न , वो बुजुर्ग है अगर वो किसी बात को रिपीट कर भी रहे है तो तुम्हे उन्हें प्यार चाहिए ना कि उन पर चिल्लाना चाहिए,,,,,,,,,,ये पहली बार है इसलिए मैं तुम्हे माफ़ कर रहा हूँ लेकिन आगे से ध्यान रखना,,,,,,,,,देखो अगर तुम किसी वजह से परेशान हो तो दो दिन की छुट्टी ले लो और आराम करो लेकिन ये सब बर्ताव यहाँ नहीं चलेगा,,,,,,,,,अंडरस्टेंड ?”,सीनियर ने कहा
“जी सर,,,,,,,,,!!”,सुरभि ने कहा
“ठीक है अभी तुम जा सकती हो”,सीनियर ने कहा तो सुरभि ने सर झुकाया और वहा से चली गयी
सीनियर के केबिन से बाहर आकर सुरभि को अहसास हुआ कि वह अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को आपस में मिक्स कर रही है। बाहर आकर उसकी नजर बेंच पर बैठे उसी बुजुर्ग पर पड़ी जिन पर वह कुछ देर पहले चिल्लाई थी। सुरभि उनकी तरफ आयी और बेंच पर उनके बगल में आ बैठी। आदमी ने उसे देखा और फिर सामने देखने लगा।
“मुझे माफ़ कर दीजिये ! मुझे आप पर इस तरह से चिल्लाना नहीं चाहिए दरअसल उस वक्त मैं थोड़ा परेशान थी , किसी और का गुस्सा आप पर उतार दिया,,,,,,,,मैं सच में बहुत शर्मिन्दा हूँ मुझे माफ़ कर दीजिये”,सुरभि ने उदासी भरे स्वर में कहा
आदमी ने सुना तो सुरभि की तरफ देखा और कहा,”कोई बात नहीं बेटा , इस उम्र में छोटी छोटी बात पर गुस्सा आना आम बात है। मैंने तुम्हे माफ़ किया क्या अब तुम मेरा काम कर दोगी ?”
जी आईये,,,,,,,,,!!!”,सुरभि ने मुस्कुरा कर कहा और बुजुर्ग को साथ लेकर अपनी टेबल की तरफ चली आयी। सुरभि ने आराम से उनकी बात सुनी और फिर उनका काम भी करके दिया। आदमी ख़ुशी ख़ुशी वहा से चला गया ये देखकर सुरभि को थोड़ी राहत मिली और उसका गुस्सा भी कुछ हद तक कम हो गया।
काम करते करते शाम हो चुकी थी और सुरभि के घर जाने का वक्त भी हो चुका था। उसने अपना सब सामान समेटा और बैग में रखकर ऑफिस से बाहर चली आयी। बाहर आकर सुरभि ने ऑटो रोकने की कोशिश की लेकिन उसके घर की तरफ कोई ऑटो वाला जाने को तैयार ही नहीं था। सुरभि ने कैब बुक करना चाहा लेकिन वो भी नहीं हुई। परेशान होकर वह पैदल ही चल पड़ी इस ख्याल के साथ कि आगे चौराहे से उसे बस मिल जाएगी। पैदल चलते हुए सुरभि के दिमाग में अनिकेत की कही बातें चल रही थी।
आज जिस तरह से अनिकेत उस पर चिल्लाया था , उस से बहस की थी वो सारी आवाजे सुरभि के कानो में गूंज रही थी। उसका मन भारी होने लगा। उसने अवनि को फोन करने का सोचा लेकिन वह इस वक्त पृथ्वी के साथ बिजी होगी सोचकर उसने फोन नहीं किया और चलती रही।
सुरभि चौराहे पर पहुंची और देखा बस अभी आयी नहीं है। दोपहर में खाना ना खाने की वजह से उसे जोरो की भूख लगी थी।
वही एक चाय की दुकान थी सुरभि दुकान के सामने चली आयी उसने एक चाय और बन मस्का देने को कहा। दिमाग में अभी भी अनिकेत ही चल रहा था। सुरभि जब उदयपुर में थी तब अनिकेत के साथ उसका रिश्ता कितना अच्छा था। ना कोई लड़ाई ना कोई झगड़ा , झगड़ा हो भी जाता था तो अनिकेत और वह एक दूसरे को समझा बुझाकर मना लिया करते थे लेकिन इस बार तो दोनों के बीच जैसे कोई युद्ध छिड़ा हुआ था। ये सब सोचते सोचते सुरभि का सर दुखने लगा।
उसने अपना ललाट सहलाते हुए सर झुकाया ही था कि तभी उसका फोन बजा। सुरभि ने बैग से फोन निकाला स्क्रीन पर अनिकेत का नाम देखकर सुरभि ने फोन उठाकर कान से लगाया तो दूसरी तरफ से अनिकेत ने कहा,”सुरभि मैं आखरी बार तुमसे पूछ रहा हु,,,,,,,आखिर तुम चाहती क्या हो ?”
“मैडम ! आपका चाय”,दुकानवाले ने कहा तो सुरभि फोन को कान और कंधे के बीच दबाये दूकान वाले की तरफ पलटी। उसने एक हाथ में चाय का गिलास उठाया और दूसरे हाथ में बन मस्का का प्लेट। उसी हालत में वह स्टेंडिंग टेबल की तरफ चली आयी।
अनिकेत लगातार कुछ न कुछ बोलता जा रहा था जिसका जवाब सुरभि ने नहीं दिया क्योकि पहले वह उस हालत में नहीं थी। उसने चाय का गिलास और बन मस्का का प्लेट टेबल पर रखा और वही खड़ी होकर अपने फोन को कंधे से हटाकर हाथ में लिया और कहा,”सुन बे बावली तरेड़,,,,,,,,मैं सुणी जा री हूँ इको मतलब ओह्ह कोनी कि थार मुँह म जो आव तू बक दे,,,,,,,,मन्न आ बता कि थार एक बार केबा स कोई बात समझ कोनी आव के ? म्हारो बाप मन पिसा लगार इह वास्ते कोनी पढाई कि म फेरा लेर थार लार लार घुमू,,,,,,,
थारा घर का कह दिया हर तू चप्पला पेर त्यार होगो,,,,,,,,,मह म्हारी नौकरी आज छोड़ू न काल छोड़ू थार जो जी म आव तू कर,,,,,,,,,,!!!”
“हाँ तो ठीक है फिर बाद में मुझसे मत कहना कि मैंने तुम्हे बीच रास्ते में छोड़ दिया”,दूसरी तरफ से अनिकेत ने गुस्से से कहा
“तू मन काई छोड़े म तन छोड़ री हूँ,,,,,,जा गेलो नाप हर आज क बाद ओजु मन फोन कर दियो ना तो महारु बुरी मत जाणजे”,सुरभि ने गुस्से से कहा
“थार स बुरो और मतलबी इंसान कोई है भी कोनी सुरभि , गुड बाय”,कहकर अनिकेत ने फोन काट दिया।
गुस्से से सुरभि का चेहरा लाल था और आँखे जल रही थी। दिल जोरो से धड़क रहा था। उसने चाय का गिलास उठाया और होंठो से लगा लिया। उसी बेंच पर एक गिलास चाय और रखी थी और साथ में बन मस्का भी,,,,,,,,,,,और ये कोई और नहीं बल्कि सिद्धार्थ था जो ऑफिस से लौटते हुए यहाँ चाय पीने के लिए रुक गया था लेकिन सुरभि को अचानक अपने सामने देखकर पहले तो चिढ़ा लेकिन जब सुरभि को गुस्से में और परेशान देखा तो उसकी चिढ दूर गयी और वह खामोशी से उसकी बाते सुनने लगा।
गुस्से गुस्से में सुरभि ने ध्यान नहीं दिया। उसने चाय पीते हुए सिद्धार्थ की प्लेट से बन उठाया और खाने लगी। सिद्धार्थ ने उसे नहीं रोका क्योकि वह देख पा रहा था कि सुरभि इस वक्त कुछ ज्यादा ही टेंशन में थी। दूसरी बार सुरभि ने सिद्धार्थ की प्लेट से बन उठाया उसकी नजर सिद्धार्थ पर पड़ी उसने देखा वह अपनी प्लेट के बजाय सिद्धार्थ की प्लेट से खा रही है तो हाथ में पकड़ा बन छोड़ दिया और कहा,”सॉरी,,,,,!!!”
सिद्धार्थ ने अपनी प्लेट भी सुरभि की तरफ खिसका दी और कहा,”इट्स ओके ! ये भी तुम ही खा लो , आई थिंक तुम्हे इसकी ज्यादा जरूरत है”
सुरभि को देखते ही चिढ़ने वाला सिद्धार्थ उस से इतने आराम से बात कर रहा है ये देखकर सुरभि हैरान थी लेकिन कहा कुछ नहीं क्योकि आज वह पहले ही काफी परेशान थी सिद्धार्थ से झगड़ने की हिम्मत उसमे नहीं थी।
सिद्धार्थ ने अपनी चाय का गिलास उठाया और पीने लगा। सुरभि ने बन उठाया और खाते हुए चाय पीने लगी। सिद्धार्थ ने सुरभि की तरफ देखा और डरते डरते कहा,”एक बात बताओ ! तुम्हे गुस्सा राजस्थानी में आता है क्या ?”
सुरभि ने सुना तो सिद्धार्थ की तरफ देखा , सिद्धार्थ अंदर ही अंदर तैयार था क्योकि कब सुरभि एकदम से फट पड़े कोई नहीं जानता था लेकिन आज ऐसा नहीं हुआ उसने कुछ देर ख़ामोशी से सिद्धार्थ को देखा और फिर एकदम से मुँह फाड़कर रोते हुए कहा,”अह्हह्ह्ह्ह तुम्हे क्या पता मेरी जिंदगी में कितनी प्रॉब्लम है”
सिद्धार्थ ने देखा तो बेचारा घबरा गया। सुरभि का रोना कैसे बंद करवाए जब उसे कुछ समझ नहीं आया तो उसने प्लेट में रखा बन उठाया और सुरभि के मुँह में ठूस दिया जिस सुरभि चुप हो गयी और सिद्धार्थ ने राहत की साँस लेकर कहा,”हाह ! सच में तुम कितनी अन्नोयिंग हो”
ब्रेड मुँह में रखे सुरभि ने सिद्धार्थ को देखा तो सिद्धार्थ पैसे देने दुकान की तरफ चला गया और फिर सुरभि के पास आकर कहा,”तुम्हारा बिल भी मैंने दे दिया है , इसे खत्म करके घर चली जाओ”
सिद्धार्थ इतना कहकर आगे बढ़ गया तो सुरभि ने कहा,”इसकी जरूरत नहीं थी,,,,,,,,,,एक चाय पिलाकर तुम मुझ पर अहसान जताना चाहते हो”
सिद्धार्थ पलटकर सुरभि के पास आया और कहा,”तो तुम क्या चाहती हो ?”
“दारु पिला सकते हो ?”,सुरभि ने रोआँसा होकर कहा
सिद्धार्थ ने सुना तो हैरानी से सुरभि को देखा और कहा,”सच में कमाल की लड़की हो तुम,,,,,,,!!!”
“पिला सकते हो या नहीं ?”,सुरभि ने गुस्से से थोड़ी तेज आवाज में कहा
“चलो,,,,,,!!!”,सिद्धार्थ ने कहा तो सुरभि ने बचा हुआ बन उठाया और सिद्धार्थ के साथ चल पड़ी,,,,,,,,,,,,,,,!!!
रात के खाने के बाद पृथ्वी अवनि को अपने साथ लेकर अपार्टमेंट के बाहर नीचे फुटपाथ पर घुमाने ले आया जिस से अवनि को भर की थोड़ी हवा खाने को मिले और उसका मन अच्छा हो जाये। फुटपाथ पर साथ साथ घूमते हुए दोनों अच्छे लग रहे थे। पृथ्वी के पास कहने के लिए बहुत कुछ था और अवनि के लिए इत्मीनान से सुनने के लिए वक्त ,, जितने प्यार से पृथ्वी अवनि की लिखी कहानिया पढता था उतने ही प्यार से अब अवनि उसकी बातें सुना करती थी।
कभी उसकी बातो पर मुस्कुराती , कभी हैरान होती तो कभी खामोश हो जाती। पृथ्वी भी अवनि के सामने दिल खोलकर बातें करता था उसे ना अवनि के जज करने का डर था ना ही उस से कुछ छुपाने की चाह , वह तो अवनि को अपने हर उस एक पल के बारे में बता देना चाहता था जो उसने अब तक जिया था।
इत्तेफाक से आज रवि जी भी लता को साथ लेकर टहलने निकले थे। सोसायटी एक थी बस अपार्टमेंट्स अलग थे लेकिन टहलते टहलते वे दोनों भी उसी फुटपाथ पर चले आये जिस पर पृथ्वी और अवनि चल रहे थे। पृथ्वी बातो में व्यस्त था लेकिन अवनि की नजर पीछे आते रवि जी और लता पर पड़ी तो वह मन ही मन परेशान हो गयी। उसे और पृथ्वी को साथ देखकर कही लता जी के मन में फिर से कड़वाहट ना आ जाये सोचकर अवनि ने कहा,”अह्ह्ह पृथ्वी ! उस तरफ क्या है ?”
“वो वहा मिठाई की दूकान है,,,,,,,,,वहा बहुत अच्छी जलेबी मिलती है”,पृथ्वी ने कहा
“जलेबी ? मुझे खानी है,,,,,,,चलो ना चलते है”,अवनि ने जानबूझकर कहा जिस से वह पृथ्वी को वहा से लेकर जा सके और उसका सामने लता से ना हो।
“ठीक है लेकिन आप यही रुकिए मैं लेकर आता हूँ , वहा इस वक्त बहुत भीड़ होगी आप परेशान हो जाएगी,,,,,,!!”,पृथ्वी ने अवनि को वही रुकने को कहा और खुद वहा से चला गया। अवनि वही धीरे धीरे चलने लगी !
कुछ देर बाद लता अवनि के बगल से निकली। अवनि को देखते ही ना जाने क्यों उनके चेहरे पर गुस्से और नफरत के भाव झिलमिलाने लगते थे। उन्होंने अवनि को एक नजर देखा और आगे बढ़ गयी। पीछे आते रवि जी ने जब अवनि को इस वक्त अकेले देखा तो उस से आगे निकलते हुए धीरे से कहा,”इतनी रात में तुम्हे अकेले नहीं घूमना चाहिए , पृथ्वी को साथ रखा करो”
“वो साथ ही आये है,,,,,,,वहा सामने गए है”,अवनि ने दूकान की तरफ इशारा करके कहा
रवि जी ने कुछ नहीं कहा और लता को आवाज देते हुए कहा,”लता ! ज़रा रुको मैं तुम्हारे लिए जलेबी लेकर आया,,,,,,,,इस वक्त गर्म मिलेगी”
रवि जी भी फुटपाथ से हटकर दूकान की तरफ जाते हुए कहा। रवि जी के कहने पर लता को रुकना पड़ा , अवनि भी उनसे कुछ दूर खड़ी होकर पृथ्वी का इंतजार करने लगी। अवनि लता से बात करना चाहती थी लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी। लता रवि जी का इंतजार कर ही रही थी कि तभी उन्हें हल्का सा चक्कर आया और जैसे ही वे लड़खड़ाई अवनि ने आकर उन्हें सम्हाल लिया और कहा,”आप ठीक तो है ?”
लता ने खुद को सम्हाला और अवनि का हाथ झटककर उसे खुद से दूर करके कहा,”दूर रहो मुझसे,,,समझी तुम”
लता के धक्के से अवनि सामने से आते पृथ्वी से टकराई , ये देखकर पृथ्वी को गुस्सा आया लेकिन अवनि ने फिर भी खुद को सम्हला और लता की तरफ जाकर कहा,”आप मुझसे इतनी नफरत क्यों करती है आंटी ? मैंने तो बस आपको,,,,,,,,,,”
“अवनि चलो यहाँ से,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने थोड़ा कठोर स्वर में कहा
“लेकिन पृथ्वी उन्हें,,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने पलटकर कहा तब तक रवि जी भी आ चुके थे
“अवनि मैंने कहा चलो यहाँ से,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने अपने गुस्से को दबाकर उतनी ही कठोरता से कहा
“पृथ्वी लेकिन इनकी तबियत,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहना चाहा लेकिन वह अपनी बात पूरी करती इस से पहले पृथ्वी ने गुस्से से थोड़ा तेज आवाज में कहा,”मैंने कहा ना चलो यहाँ,,,,,,,,एक बार में समझ नहीं आ रहा है , कोई रिश्ता नहीं है हमारा इनके साथ,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी को गुस्से में देखकर अवनि सहम गयी , उसकी आँखों में आँसू भर आये और हाथ काँपने लगे। आज पहले बार पृथ्वी उस पर चिल्लाया था वो भी इतने गुस्से से कि अवनि अगले ही पल बस रो देने वाली थी।
( पृथ्वी का क्रिकेट मैच और रात का डिनर क्या अवनि एक साथ कर पायेगी दोनों चीजे मैनेज ? अनिकेत की बातो से हर्ट होकर क्या सुरभि सच में पीने वाली है शराब और क्या सिद्धार्थ देने वाला है उसे कम्पनी ? पृथ्वी का गुस्से में यू चिल्लाना क्या ले आएगा उसके और अवनि के रिश्ते में दरार ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत सीजन 2” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Yeh Lata ji to Avni se pakke wali nafrat krti hai aur usse ese pesh aati hai jaise Avni koi insaan nhi balki wo ek dagabaaz ladki hai, jisne unke bate ko unse cheen liya hai…not fare Man…aur uss par bhi Prithvi ka Avni par ese chillana…bechari Avni abhi to thik hui thi, kahin fir se na bimar pad jaye…khar aaj to Ravi ji aur Lata ji dono ne dekh liya hoga ki unke Karan se Prithvi kitna badal gaya hai…pta nhi ab kal Avni dinner bana payengi ya nhi…o yeh Surbhi ki desi bhasha ne to kamaal kar diya… kaise hadkaya Aniket ko…lakin Aniket bhi usko ese treat kar rha hai jaise Surbhi uski daasi ho…khar mujhe esa kyu lag raha hai ki Siddharth k sath Surbhi ki jodi ban rhi hai.