Pasandida Aurat Season 2 – 32

Pasandida Aurat Season 2 – 32

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

अपनी चाय लेकर अवनि किचन से बाहर चली आयी। पृथ्वी तब तक अपनी चाय पीकर कप रख चुका था और बालकनी में खड़े होकर वह रखे गमलों और पोधो को देख रहा था। अवनि ने देखा तो पृथ्वी की तरफ चली आयी। अवनि को अपने सामने देखकर पृथ्वी ने कहा,”अब आपकी तबियत कैसी है ?”
“अभी ठीक लग रहा है”,अवनि ने कहा और अपनी चाय पीने लगी
“हम्म्म ! मैं खाना बाहर से आर्डर कर देता हूँ”,पृथ्वी ने कहा
“बाहर से क्यों ? मैं बना लुंगी”,अवनि ने कहा

“जी नहीं ! आपकी तबियत खराब है आपको आराम करना चाहिए , खाना बनाने के लिए पूरी जिंदगी पड़ी है आप आराम से बनाना”,पृथ्वी ने कहा
“कोण आजारी आहे ? पृथ्वी” ( किसकी तबियत ख़राब है पृथ्वी ? )”,बगल वाली बालकनी में खड़ी देशमुख आंटी ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो पलटा और कहा,”अवनि की , त्याला सकाळपासूनच खूप ताप आहे ( इन्हे सुबह से तेज बुखार है )”
“अह्ह्ह्ह ! काही चांगली बातमी आहे का ? ( कोई खुशखबरी है क्या ? )”,देशमुख आंटी ने मुस्कुराकर कहा

लेकिन अवनि को समझ नहीं आया वे क्या कह रही है ? पृथ्वी ने सुना तो पहले अवनि की तरफ देखा और फिर जल्दी से देशमुख आंटी की तरफ देखकर कहा,”नाही नाही, तुम्ही गैरसमज करत आहात, त्याला सर्दी झाली आहे ( नहीं नहीं आप गलत समझ रही है , इन्हे सर्दी हुई है )”
आंटी ने सुना तो मुस्कुरा कर अवनि को देखा और फिर पृथ्वी से कहा,”त्याची काळजी घ्या ( उसका ख्याल रखो )”
“जी,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा तो देशमुख आंटी अंदर चली गयी।

पृथ्वी ने राहत की साँस ली और जैसे ही पलटा अवनि उसके पीछे ही खड़ी थी , अवनि को देखकर पृथ्वी चौंका और पीछे हटा तो पृथ्वी ने कहा,”देशमुख आंटी मराठी में तुमसे क्या कह रही थी ?”
“अह्ह्ह्ह कुछ ख़ास नहीं ऐसे ही , तुम्हारा हाल चाल पूछ रही थी”,पृथ्वी ने कहा वह अवनि को असल बात बताने में शरमा रहा था
“हाल चाल पूछ रही थी तो फिर वो मुझे देखकर ऐसे मुस्कुराई क्यों ?”,अवनि ने पूछा

“अह्ह्ह्ह वो,,,,,,,,वो उन्हें लगा,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने अटककर कहा लेकिन अपनी बात पूरी नहीं कर पाया
“बताओ ना क्या कहा उन्होंने और क्या लगा उन्हें ?”,अवनि ने पृथ्वी के चेहरे की तरफ देखकर पूछा
पृथ्वी कुछ देर चुप रहा और फिर धीरे से कहा,”वो उन्हें लगा कोई खुशखबरी है,,,,,,,,,,,,!!!”
इतना कहकर पृथ्वी वहा से चला गया और अवनि उसकी कही बात के बारे में सोचने लगी , जब अवनि को आंटी की बात का मतलब समझ आया तो उसकी आँखे बड़ी हो गयी वह अंदर आयी और कहा,”पृथ्वी ! तुमने उनसे ऐसा क्यों कहा ?”

मैंने नहीं कहा , मैंने तो बस उन्हें बताया कि आपकी तबियत खराब है तो उन्होंने खुद से ही,,,,,,,,,,,सॉरी”,पृथ्वी ने अवनि से नजरे चुराकर धीरे से कहा
 अवनि ने सुना तो शरम उसका चेहरा भी लाल हो उठा उसने पृथ्वी से कुछ नहीं कहा और भला आंटी की भी इसमें क्या गलती , अवनि और पृथ्वी पति पत्नी थे ऐसी बातें होना तो नार्मल था। अवनि को चुप देखकर पृथ्वी ने कहा,”मैं नहाकर आता हूँ”

अवनि ने टेबल पर रखा चाय का खाली कप उठाया और किचन में चली गयी। पृथ्वी कमरे में चला आया , कबर्ड से कपडे निकाले और नहाने चला गया।
पृथ्वी ने अवनि को खाना बनाने के लिए मना किया था इसलिए अवनि हॉल में चली आयी और सोफे पर आ बैठी। उसने सुरभि को फोन किया लेकिन सुरभि ने फोन नहीं उठाया। अवनि ने अपना फोन टेबल पर रख दिया कुछ देर बाद अवनि का फोन बजा सुरभि का आया है सोचकर अवनि ने फोन उठाया और स्क्रीन पर अनजान नंबर देखकर उसके चेहरे से ख़ुशी गायब हो गयी। उसने कॉल अटेंड किया और कान से लगाकर कहा,”हेलो !”

“हेलो मिस अवनि मलिक ! मैं ********** प्रोडक्शन हॉउस से बात कर रही हूँ , आज आपकी मिस्टर ‘विक्रम कपूर’ के साथ मीटिंग थी। आप कब तक आ रही है  ?”,दूसरी तरफ से किसी लड़की की सधी हुई आवाज अवनि के कानों में पड़ी।
“हेलो ! दरअसल अहसानक मेरी तबियत खराब होने की वजह से मैं आज की मीटिंग में नहीं आ पाऊँगी। क्या आप इसे किसी और डेट पर शिफ्ट कर सकती है  ?”,अवनि ने सहजता से कहा

“मेम ! ‘विक्रम सर’ बहुत बिजी रहते है वो इतनी जल्दी किसी से मिलते नहीं है , लोग महीनो महीनो उनसे मिलने के लिए इंतजार करते है ,, आप लकी है जो सर ने आपको सामने से ऑफर किया। आज शाम अगर आप आ सकती है तो मैं आपको टाइम और लोकेशन सेंड कर देती हूँ”,लड़की ने घमंड से भरकर थोड़ा रूखे स्वर में कहा
“थैंक्यू ! लेकिन मैं आज शाम नहीं आ पाऊँगी,,,,,”,अवनि ने साफ साफ मना कर दिया

“लेट मी चेक,,,,,,,,!!”,लड़की ने अवनि से रुकने को कहा और फिर कुछ देर बाद बोली,”अवनि ! सर ने आपको एक मौका और दिया है अगर वीकेंड के बाद आप आ सके तो वो आपसे मिलकर आपके प्रोजेक्ट पर बात कर सकते है , अगर आप आती है तो बेटर वरना उसके बाद दोबारा आप उनके साथ काम नहीं कर पाएंगी,,,,,,,तो मैं वीकेंड के बाद आपकी मीटिंग फिक्स कर दू ?”
अवनि ने सुना और सोचा वीकेंड के बाद वह बिल्कुल फ्री है तो उसने हाँ कह दिया और फोन काट दिया। कुछ देर बाद उसे प्रोडक्शन हॉउस के नंबर से नेक्स्ट मीटिंग की लोकेशन और एड्रेस मिला।

पृथ्वी नहाकर आ चुका था उसने अवनि को फोन पर किसी से बात करते देखा तो तौलिये से अपने बालों को पोछते हुए बालकनी में चला आया। उसने तौलिया रेंक पर डाला और अवनि की तरफ आया तो अवनि ने अपना फोन टेबल पर रखकर कहा,”प्रोडक्शन हॉउस से फोन था , मैंने तुम्हे बताया था ना मुझे एक ऑफर मिला है उसी की मीटिंग को लेकर कॉल थी,,,,,,,,,,!!!”
“क्या कह रहे है वो लोग ?”,पृथ्वी ने कहा

“वीकेंड के बाद उनके ऑफिस जाकर उनसे मिलना होगा”,अवनि ने कहा
“ठीक है मैं साथ चलूँगा,,,,,,,,,,,,अगर आपको कोई ऐतराज ना हो तो”,पृथ्वी ने कहा
“पृथ्वी ! तुम चल सकते हो”,अवनि ने कहा
पृथ्वी सोफे पर आ बैठा और टेबल पर रखे अपने फोन को उठाकर कहा,”खाना आर्डर करे बहुत भूख लगी है,,,,,,,,,आप क्या खाएंगी ? वैसे आपको कुछ हल्का खाना चाहिए”

“नार्मल कुछ भी आर्डर करो मैं खा लुंगी,,,,,,,,!!”,अवनि ने अपना हाथ अपने ललाट से लगाकर कहा उसे सर में हल्का हल्का दर्द महसूस हो रहा था
पृथ्वी ने देखा तो कहा,”आप ठीक है ?”
“हाँ ! बस सर में थोड़ा दर्द है”,अवनि ने कहा

“हम्म्म्म,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा और अपना ध्यान फोन में लगा लिया। अवनि ने देखा तो उसे अजीब लगा कभी पृथ्वी उसके लिए इतनी परवाह जताता कि अवनि सम्हाल नहीं पाती और कभी ऐसे जैसे कुछ हुआ ना हो। अवनि ख़ामोशी से पृथ्वी को देखती रही तभी देशमुख आंटी ने आवाज लगाई,”ए पृथ्वी,,,,,,,!!!”
पृथ्वी ने उठना चाहा तो अवनि ने कहा,”मैं देखती हु”
अवनि उठी और बालकनी की तरफ चली आयी।

अपनी बालकनी में खड़ी देशमुख आंटी ने अवनि को देखकर हाथ में पकड़ा बर्तन उसकी तरफ बढ़ाया और कहा,”अच्छा हुआ तुम ही आ गयी ! पृथ्वी ने बताया तुम्हे बुखार है इसलिए मैंने ये तुम्हारे लिए ये सूप बनाया , तुम्हे अच्छा लगेगा,,,,,,,,!!!”
अवनि ने मुस्कुरा कर बर्तन लिया और कहा,”थैंक्यू आंटी ! लेकिन इसकी क्या जरूरत थी आप खामखा परेशान हुई,,,,,,,,!!”
“इसमें कैसी परेशानी ? पडोसी ही पडोसी के काम आता है,,,,,,,,बर्तन तुम बाद में लौटा देना”,आंटी ने अवनि का गाल छूकर कहा और वहा से चली गयी

अवनि मुस्कुराई और प्लेट से ढका बर्तन लेकर अंदर चली आयी। उसने उसे लाकर टेबल पर रखा और कहा,”देशमुख आंटी बहुत अच्छी है , उन्होंने मेरे लिए सूप बनाया है,,,,,,,!!”
पृथ्वी ने सुना तो हैरानी से अवनि की तरफ देखा और फिर बर्तन का ढक्कन हटाकर साइड रखा और सूप देखकर समझ गया कि ये अवनि के खाने लायक नहीं है। अवनि ने सूप देखा जिसमे सब्जियों के साथ छोटे छोटे टुकड़े भी थे। अवनि ऐसा सूप पहली बार देख रही थी। उसने सूप को सुंघा और पृथ्वी की तरफ देखा तो पृथ्वी ने कहा,”अवनि ये चिकन सूप है”

अवनि ने जैसे ही पृथ्वी के मुँह से चिकन का नाम सुना उसे उबकाई आयी और वह अपने मुँह पर हाथ रखकर वाशबेसिन की तरफ भागी। पृथ्वी ने प्लेट बर्तन पर रखी और उठकर अवनि की तरफ आया। अवनि की हालत खराब , उसे उबकाईया शुरू हो गयी साथ ही उसे बहुत अजीब लग रहा था कि कुछ देर पहले वह ख़ुशी ख़ुशी उस सूप की खुशबु ले रही थी और क्या होता अगर उसने खा लिया होता। यही सब सोचकर अवनि और ज्यादा परेशान हो रही थी।

वह पहले ही बीमार थी और अब उसकी तबियत और बिगड़ते देखकर पृथ्वी ने धीरे से उसका सर सहलाया और कहा,”सॉरी ! देशमुख आंटी को नहीं पता आप  वेजेटेरियन हो इसलिए उन्होंने गलती से आपको ये दे दिया,,,,,,,,आप ठीक हो ना ?”
“हम्म्म,,,,,,,,,,!!!”,अवनि ने वाशबेसिन के सामने से हटकर कहा
पृथ्वी ने देखा अवनि की आँखों में आँसू थे और चेहरा लाल हो चुका था। अवनि ने अपना मुँह पोछा और पृथ्वी से कहा,”प्लीज उसे यहाँ से हटाओ,,,,,,,,!!!”

अह्ह्ह हाँ हाँ , मैं हटाता हूँ आप परेशान मत होईये,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा और बर्तन वहा से हटाकर अवनि से दूर रख दिया।
अवनि सोफे पर आकर बैठी तो पृथ्वी ने कहा,”आप परेशान मत होईये मैं आंटी को उसे वापस कर दूंगा”
“नहीं ! तुम उसे फेंक देना प्लीज अगर वापस किया तो उन्हें अच्छा नहीं लगेगा,,,,,,,उन्होंने इतने प्यार से बनाया होगा,,,,,!!!”,अवनि ने बुझे स्वर में कहा
“ठीक है ! आपने सच में कभी ये सब नहीं खाया ?”,पृथ्वी ने अवनि के बगल वाले सोफे पर बैठते हुए कहा उसके हाथ में तेल का बोतल था

“नहीं,,,,,,,पता नहीं लोग ये सब क्यों खाते है ? दुनिया में खाने के लिए इतना सब है फिर ये बेजुबान जानवर ही क्यों ? हाह ! कोई इन्हे कैसे खा सकता है ?”,अवनि ने रोआँसा होकर कहा
पृथ्वी ने सुना तो उसकी आँखों के सामने वो सारे पल आ गए जब जब उसने ये सब खाया था और बहुत ख़ुशी के साथ खाया था। बेचारा पृथ्वी कहा वह चिकन मटन का दीवाना था और कहा अवनि इन सबके नाम से भी उलटी कर रही थी। पृथ्वी को खामोश देखकर अवनि ने कहा,”तुम भी तो ये सब खाते हो न पृथ्वी ?”

छोड़ दूंगा”,पृथ्वी ने धीरे से कहा
“मतलब ?”,अवनि ने कहा
“अभी देखी मैंने आपकी हालत , मैं इन सब के बिना रह सकता हूँ लेकिन आपको ऐसे परेशान नहीं देख सकता,,,,,,,इसलिए मैं छोड़ दूंगा , वैसा बना लूंगा खुद को जैसा आप चाहती है,,,,,,,,यहाँ बैठिये”,पृथ्वी ने सहजता से कहा और अवनि के लिए नीचे जगह बनाकर कहा

अवनि को समझ नहीं आया पृथ्वी क्या करना चाह रहा है लेकिन वह उसके ठीक सामने नीचे कालीन पर आ बैठी। सोफे पर बैठे पृथ्वी ने अपने हाथ पर थोड़ा सा तेल लिया और जैसे ही अवनि के बालों में लगाया अवनि समझ गयी पृथ्वी ने उसे यहाँ बैठने को क्यों कहा ? पृथ्वी धीरे धीरे अवनि का सर दबाने लगा और अवनि आँखे मूँदे कुछ देर पहले घटी घटना को भूलने की कोशिश करने लगी।

अवनि वह दूसरी औरत थी जिसके लिए पृथ्वी ये सब कर रहा था क्योकि आज से पहले उसने ये सब बस लता के लिए किया था। पृथ्वी ने अच्छे से अवनि का सर दबाया तो उसे थोड़ा आराम मिला और सर का दर्द भी कुछ कम हो गया लेकिन अवनि के लम्बे बाल आपस में उलझ गए। बेल बजी पृथ्वी हाथ धोकर खाना लेने दरवाजे की तरफ चला गया। अवनि ने अपने उलझे बालों को समेट लिया और वही बैठी रही। उसे अब पहले से काफी अच्छा लग रहा था।

पृथ्वी खाना लेकर आया , अवनि और उसने खाना खाया और उसके बाद अवनि दवा खाकर फिर सोने चली गयी। पृथ्वी हॉल में चला आया और अपना लेपटॉप ऑन किया तो अंकित का भेजे कुछ रिपोर्ट्स उसे मिले और वह उन पर काम करने लगा हालाँकि जयदीप ने उसे काम के लिए मना किया था लेकिन पृथ्वी अपने काम को बाकि सब चीजों से हमेशा साइड रखता था और यही वजह थी कि ऑफिस में सब उसे पसंद करते थे।
रिपोर्ट्स बनाते बनाते शाम हो गयी। पृथ्वी से सभी अंकित को भेजे और लेपटॉप बंद कर अवनि को देखने कमरे की तरफ चला आया।

पृथ्वी अंदर आया तो देखा अवनि सो रही है। पृथ्वी ने उसे नहीं उठाया और सोने दिया। वह किचन में चला आया और प्लेटफॉर्म से पानी की बोतल उठाकर पीते हुए बाहर आया। बाहर आकर पृथ्वी की नजर दरवाजे पर चली गयी और सहसा ही उसे वो पल याद आ गए जब रुषाली ने अवनि के साथ बदतमीजी की थी। पृथ्वी की आँखो में गुस्से के भाव तैरने लगे उसने बोतल साइड में रखा। टेबल की तरफ आया अवनि के लिए एक नोट लिखा और कमरे में चला आया। उसने नोट बिस्तर के बगल में पड़ी टेबल पर रखा और खड़े होकर अवनि को देखने लगा।

सोते हुए अवनि कितनी मासूम लग रही थी पृथ्वी ने अपने दाहिने हाथ की पाँचो उंगलियों को पहले अपने होंठो से छुआ और फिर उन्ही उंगलियों को धीरे से अवनि के ललाट से छू दिया। पृथ्वी ने कमरे की खिड़की के पर्दे बंद किये और वहा से निकल गया।

फ्लेट की एक चाबी पृथ्वी अंदर छोड़ी और दूसरे से दरवाजा लॉक कर वहा से निकल गया। पृथ्वी अपार्टमेंट से बाहर आया तो सामने से अपनी बाइक पर आता नकुल दिखा। पृथ्वी को देखकर नकुल रुक गया तो पृथ्वी ने कहा,”तुम्हारी बाइक चाहिए”
“ले लो पर तुम इतनी उलझन में जा कहा रहे हो ?”,नकुल ने बाइक से नीचे उतरते हुए कहा
पृथ्वी बाइक पर आ बैठा और कहा,”पीछे बैठो बताता हूँ”

पृथ्वी को थोड़ा गुस्से में देखकर नकुल चुपचाप उसके पीछे आ बैठा। पृथ्वी ने बाइक घुमाई और नकुल के साथ वहा से निकल गया।
आधे घंटे बाद बाइक एक रेस्त्रो के बाहर आकर रुकी। नकुल को अभी भी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि पृथ्वी यहाँ क्यों आया है और इतना गुस्से में क्यों है ?
पृथ्वी अंदर चला गया तो नकुल भी उसके पीछे पीछे अंदर चला आया। पृथ्वी उसी रेस्त्रो के लॉन एरिया में लगी टेबल के पास चला आया जहा रुषाली अपने कुछ दोस्तों के साथ बैठी खिलखिला रही थी।

पृथ्वी वहा आकर रुक गया , नकुल भी उसके पीछे आया और जब उनसे रुषाली को देखा तो सोच में पड़ गया कि आखिर पृथ्वी यहाँ क्यों आया है ?
रुषाली ने पृथ्वी को वहा देखा तो मुस्कुराते हुए उठकर उसके पास आयी और कहा,”मैं जानती थी पृथ्वी तुम यहाँ जरूर आओगे , आखिर तुम उस लड़की को छोड़कर मेरे पास चले ही आये”
पृथ्वी एकटक रुषाली को देखता रहा और अगले ही पल उसने खींचकर एक थप्पड़ रुषाली के गाल पर रसीद कर दिया। नकुल ने हैरानी से अपना हाथ अपने मुँह पर रख लिया और बाकि सबके मुँह भी खुले के खुले रह गए।

(  आखिर कब आएगा पृथ्वी की जिंदगी में खुशखबरी का पल ? क्या अवनि के लिए पृथ्वी छोड़ देगा चिकन और बन जायेगा उसके जैसा ? पृथ्वी के थप्पड़ के बाद क्या होगा रुषाली का अगला रिएक्शन ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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