Pasandida Aurat Season 2 – 28

Pasandida Aurat Season 2 – 28

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

बारिश के पानी में भीगे पृथ्वी और अवनि पैदल ही घर के लिए निकल पड़े। पृथ्वी खामोश था और अवनि ने भी अपने होंठो को जैसे सिल लिया था। अवनि अभी भी बारिश की बूंदों की छुअन को महसूस कर रही थी और पृथ्वी की आँखों के सामने आ रहा था वो पल जब वह अवनि के करीब था। चलते चलते उसने एक नजर अवनि को देखा , बारिश में भीगने के बाद वह और भी खूबसूरत नजर आ रही थी , उसकी गीली पलकें धीरे से झपकती और उठती और ये पृथ्वी के लिए किसी जादू से कम नहीं था।

पृथ्वी ने अवनि से नजरे हटाई और उसके साथ चलते हुए मन ही मन खुद से कहने लगा,”हाह ! आज तो तुम बाल बाल बच गए पृथ्वी उपाध्याय , पर क्या लड़के हो तुम अवनि के सामने खुद को इतना भी नहीं रोक पाए,,,,,,,,,,,हाह ! आज अगर तुमने अपनी हद पार कर दी होती तो ये बारिश अवनि के लिए यादगार से ज्यादा बुरी याद में बदल जाती,,,,,,,,,,,लेकिन मैं क्या करू ?  

उस वक्त मुझे अवनि के अलावा कोई दिखाई ही नहीं दिया , वो कितनी सुंदर लग रही थी ,, ऑफकोर्स वो सुंदर है लेकिन उस वक्त उस पल उसे देखकर लगा जैसे वक्त रुक जाये और मैं बस उसे देखता रहू,,,,,,,,,अह्ह्ह्ह लगता है मुझे फिर से आपसे प्यार हो गया है”
कहते हुए पृथ्वी ने जैसे ही अवनि की तरफ देखा अवनि ने कहा,”तुमने कुछ कहा ?”
“आपने कुछ सुना क्या ?”,पृथ्वी ने घबराकर कहा
“नहीं , पर लगा जैसे तुम कुछ कहना चाहते हो”,अवनि ने कहा

“हाँ , नहीं , हाँ वो मैं कह रहा था ,, जल्दी घर चलते है आपको ठंड लग रही होगी न,,,,,,,,,,भीगने से कही आप बीमार ना पड़ जाये”,पृथ्वी ने हड़बड़ाकर कहा
“पृथ्वी ! हम घर पहुंच चुके है”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने देखा तो पाया कि वह अपार्टमेंट के ठीक सामने ही खड़ा है , खुद से बाते करते हुए उसे ये ध्यान ही नहीं रहा कि वह और अवनि सोसायटी में आ चुके है। पृथ्वी ने झेंपते हुए अवनि की तरफ देखा और मुस्कुरा दिया

“अरे पृथ्वी! तुम्ही दोघे कसे भिजलात ? आज मुंबईत पाऊस पडला नाह ( अरे पृथ्वी ! तुम दोनों भीग कैसे गए ? आज तो मुंबई में कोई बारिश नहीं हुई )”,पृथ्वी के सामने खड़े सोसायटी के गार्ड ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो ख़ामोशी से गार्ड की तरफ देखने लगा। गार्ड ने क्या कहा अवनि को कुछ समझ नहीं आया वह भी ख़ामोशी से उन्हें देखने लगी तो गार्ड ने कहा,”घरी जा आणि कपडे बदल, नाहीतर आजारी पडशील” ( जाओ घर जाकर कपडे बदलो वरना बीमार पड़ जाओगे )”

“हाँ ! आओ अवनि”,पृथ्वी ने कहा और अवनि को साथ लेकर चला गया
गार्ड ने पृथ्वी को जाते हुए देखा और धीरे से बड़बड़ाया,”पर आज तो बारिश हुई ही नहीं फिर ये दोनों भीगे कैसे ?”
फ्लेट के सामने आकर पृथ्वी ने दरवाजा खोला और अवनि के साथ अंदर चला आया
“आप अंदर जाकर कपडे बदल लीजिये वरना बीमार पड़ जाएगी”,पृथ्वी ने अवनि से कहा
अवनि कमरे में चली गयी , पृथ्वी ने भी हाथ में पकडे बैग सोफे पर रखे  

कमरे में अवनि थी इसलिए पृथ्वी वहा जा नहीं सकता था लेकिन गीले शर्ट की वजह से उसे अब ठण्ड लगने लगी थी। वह हॉल में खड़ा था उसने अपनी शर्ट निकाली और उसे झड़काने लगा। पृथ्वी की पीठ के उभार , मसल्स और उभरी हुई नसे साफ दिखाई दे रही थी। उसने बालकनी के पास रेंक में सुख रहा टॉवल लिया और अपना सर पोछने लगा। कमरे का दरवाजा खुला और अवनि बाहर आयी लेकिन जैसे ही उसने पृथ्वी को बिना शर्ट के देखा वह एकदम से पलट गयी और कहा,”तुम्हे ज़रा भी शर्म नहीं है,,,,,,,!!”

“मैंने क्या किया ?”,कहते हुए पृथ्वी अवनि की तरफ आया और जैसे उसने खुद को देखा चिल्लाया,”ओह्ह्ह्ह आई ऍम सो सॉरी , मैं मैं मैं पहनता हूँ”
पृथ्वी ने जल्दी से इधर उधर देखा उसी बालकनी के रेंक में उसका टीशर्ट भी सुख रहा था पृथ्वी ने जल्दी से उसे लिया और पहनकर अवनि की तरफ आकर कहा,”अब आप पलट सकती है”
अवनि पृथ्वी की तरफ पलटी और शिकायती लहजे में कहा,”पृथ्वी ! तुम घर में ऐसे शर्ट उतार कर क्यों घूम रहे थे ? इस घर में तुम्हारे साथ अब कोई और भी रहता है”

“सॉरी ! वो शर्ट गीला था और मुझे ठंड लग रही थी इसलिए मैंने,,,,,,,,,,लेकिन आपने कपडे क्यों नहीं बदले , क्या आप बीमार पड़ना चाहती है ?”,पृथ्वी ने हैरानी से कहा
“अह्ह्ह्ह वो दरअसल,,,,,,,मुझे तुम्हारी हेल्प चाहिए”,अवनि ने झिझकते हुए कहा
“हाँ कहिये ना”,पृथ्वी ने हाथ में पकड़ा टॉवल बहुत ही इत्मीनान से हवा में उछालकर सोफे पर फेंकते हुए कहा और जैसे ही पलटा तो पाया कि अवनि उसे ही देख रही है। अवनि को घूरते पाकर पृथ्वी समझ गया और झेंपते हुए कहा,”अह्ह्ह्ह ! मैं उसे उठा लेता हूँ”

पृथ्वी ने सोफे से गीला तौलिया उठाया और उसे बालकनी में रखे रेंक में सुखाकर वापस अवनि के पास आकर कहा,”अब बताईये आपको मेरी हेल्प चाहिए ?”
“वो एक्चुली बारिश की वजह से ये उलझ गयी है क्या तुम इसे खोल दोगे प्लीज”,अवनि ने पलटकर अपने सूट की डोरी की तरफ इशारा करके कहा।
पृथ्वी ने सुना तो उसका हाथ एक बार फिर उसके सीने पर बाँयी तरफ चला गया और उसने गहरी साँस ली

हालाँकि अवनि उसकी पत्नी है लेकिन उसके करीब जाना पृथ्वी के लिए जंग से कम नहीं था उस पर अवनि उसे ये सब कहने के लिए कह रही थी।
पृथ्वी को खामोश पाकर अवनि ने कहा,”तुम कर दोगे ना ?”
“आपके बाल”,पृथ्वी ने कहा क्योकि अवनि के बाल बीच में आ रहे थे और उस बेचारे में इतनी हिम्मत कहा कि वह अवनि के गीले बालों को अपने हाथो से साइड कर सके।

अवनि ने अपने बालों को भीगने की वजह से कुछ देर पहले ही चोटी से आजाद किया था और अब उसके लम्बे खूबसूरत बाल उसकी पीठ पर थे। अवनि ने अपने दाँये हाथ से बालों को एक तरफ करके आगे कर लिया। अब अवनि की पीठ पृथ्वी की आँखों के सामने थी लेकिन उसकी नजर थी अवनि की पीठ के काले तिल पर , पृथ्वी थोड़ा सा अवनि के करीब आया और अपने हाथ डोरी की तरफ बढ़ाये , ना जाने क्यों उसके हाथ काँप रहे थे।

चाहे वह अपने मन में अवनि के लिए कितनी ही प्यारी बातें कहे , चाहे अवनि से कितना ही फ्लर्ट करे लेकिन असल में जब वह अवनि के करीब आता और ऐसा कुछ करने की बारी आती तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगता। पृथ्वी ने ने डोरी खोलने के लिए जैसे ही हाथ बढ़ाये उसकी ठंडी उंगलियों ने अवनि की पीठ को छू लिया। एक सिहरन अवनि को हुई और उसने अपनी आँखे मूँद ली। पृथ्वी धीरे धीरे उसे खोलने की कोशिश करने लगा लेकिन बारिश में भीगने की वजह से वे कुछ ज्यादा ही उलझ गयी थी।

ऐसा करते हुए पृथ्वी की उंगलियों का बार बार अवनि की पीठ को छूना अवनि का दिल धड़का रहा था।
“जल्दी करो प्लीज”,अवनि ने ठंड से काँपते हुए कहा
पृथ्वी ने एक बार फिर कोशिश की और इस बार वे खुल गयी। पृथ्वी अवनि से पीछे हटा तो अवनि कमरे में चली गयी और दरवाजा बंद कर लिया। पृथ्वी अपने सीने पर हाथ लगाए पलटा और कहा,”हाह ! ये सब बहुत मुश्किल होने वाला है पृथ्वी , अपनी पसंदीदा औरत के करीब होना खुद को रोकना सच में कितना मुश्किल काम है,,,,,,,!!!”

पृथ्वी बालकनी में आया वहा से अपने कपडे लिए और हॉल के कॉमन वाशरूम की तरफ बढ़ गया। पृथ्वी कपडे बदलकर आया और किचन में चला आया। उसने पानी का बोतल लिया और मुँह से लगा लिया। पानी पीते हुए पृथ्वी किचन से बाहर आया तब तक अवनि कपडे बदल चुकी थी और कमरे का दरवाजा खुला था। कमरे में खड़ी अवनि अपने गीले बालो को पोछ रही थी। पृथ्वी दूर खड़े होकर प्यार से उसे देखने लगा। अवनि ने अपने बाल पोछे और समेटते हुए जैसे ही पृथ्वी की तरफ देखा पृथ्वी तो बेचारा पलकें झपकना ही भूल गया।

पानी की बोतल उसके हाथ में रह गयी और गले में रुका पानी भी उसने बहुत मुश्किल से निगला। मर्द की पसंदीदा औरत अगर अपने बालों को समेटते हुए उसे नजर भर देख ले तो मर्द का ये हाल होना तय है। पृथ्वी को एक ही जगह खड़े देखकर अवनि को अजीब लगा वह बाहर आयी और कहा,”तुम ऐसे क्यों खड़े हो ?”
“हाँ हाँ ! कुछ नहीं,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी की तंद्रा टूटी  

अवनि किचन की तरफ चली आयी। रात के 9 बज रहे थे और पृथ्वी को भूख लगी होगी सोचकर अवनि ने फ्रीज से कुछ सब्जिया निकाली और प्लेटफॉर्म पर रखी। पृथ्वी बोतल वापस रखने के बहाने किचन में आया और देखा अवनि खाना बनाने की तैयारी कर रही है तो उसने बोतल रखकर अवनि की तरफ आते हुए कहा,”हटिये ! आज का खाना मैं बनाता हूँ”
अवनि ने सुना तो हैरानी से पृथ्वी को देखा और कहा,”सच में ? तुम खाना बनाओगे तो मैं क्या करुँगी ?”

पृथ्वी ने सुना तो अवनि की तरफ देखा और शरमाते हुए कहा,”मैं ना हमेशा सोचता था जब मेरी शादी हो जाएगी तब मैं कभी कभी अपनी बायको के लिए खाना बना दिया करूंगा , जब मैं खाना बनाऊंगा तो वो यहाँ बैठकर मुझसे मीठी मीठी बाते करेंगी , कभी प्यार से मुझे देखेंगी और कभी,,,,,,,,,,,,अह्ह्ह्ह छोडो मुझे शर्म आ रही है”
अवनि ने पृथ्वी को देखा और कहा,”तुम इतने अजीब क्यों हो ?”

पृथ्वी ने कुछ नहीं कहा तो अवनि वहा से बाहर जाने लगी तभी पृथ्वी ने कहा,”मैडम जी ! यहाँ बैठकर भले ही आप मुझसे मीठी मीठी बातें मत कीजिये पर मैं खाना बनाऊ तब तक यहाँ बैठ तो सकती है ना,,,,,,,,,,,,प्लीज”
अवनि पलटी और प्लेटफॉर्म से पीठ लगाकर अपने हाथो को बांधकर खड़ी हो गयी ये देखकर पृथ्वी ने प्लेटफॉर्म पर अवनि के बैठने के लिए जगह बनाते हुए कहा,”अरे आप खड़ी क्यों है ? यहाँ बैठिये ना,,,,,,,और फिर आराम से मुझे खाना बनाते देखिये,,,,,,,,,,,,मैं बहुत अच्छा खाना बनाता हूँ , एक्चुली मैं बचपन से ही हस्बेंड मैटेरियल हूँ वो तो बस मेरे साथ रहने वाले कुछ लोगो को मेरी कदर नहीं है,,,,,,,,,,,!!!”

अवनि ने सुना तो हल्का सा हंसी और प्लेटफॉर्म पर आ बैठी। सिंपल कुर्ते पजामे में अवनि बहुत प्यारी लग रही थी। कंधो पर दुप्पटा , बाल बंधे हुए , ललाट पर छोटी काली बिंदी और सुर्ख होंठ और इन सबसे से भी प्यारी उसकी मुस्कान जो पृथ्वी की बाते सुनकर रह रह कर उसके होंठो पर चली आती।

पृथ्वी ने कुकर लिया और उसमे दाल , कुछ मसाले और पानी डालकर उबलने के लिए रख दिया। पृथ्वी दाल चावल बनाने वाला था , अवनि ने मदद करने की बात की तो पृथ्वी ने कहा,”मैडम जी ! मैं कर लूंगा”
“हाँ ! लेकिन मुझे भी तो कुछ करने दो ना पृथ्वी , मैं क्या सिर्फ यहाँ बैठकर तुम्हे देखती रहू ?”,अवनि ने कहा
“अगर आप यहाँ बैठकर ऐसे ही मुझे देखती रहे तो मैं जिंदगीभर आपके लिए खाना बनाने को तैयार हूँ मैडम जी,,,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने अवनि की आँखों में देखते हुए कहा और अवनि मुस्कुराई

पृथ्वी अवनि की आँखों में अपने लिए प्यार ढूंढ पाता इस से पहले कुकर की सीटी बजी और पृथ्वी डरकर चौंका ये देखकर अवनि जोर जोर से हसने लगी। हँसते हुए अवनि इतनी अच्छी लग रही थी कि पृथ्वी मुस्कुराते हुए उसे देखने लगा। अवनि ने हँसते हुए पृथ्वी को देखा तो पृथ्वी भी हंस पड़ा। एक बार दोनों हँसे तो फिर हँसते ही चले गए और इसके बाद पृथ्वी अवनि से बातें करते हुए खाना बनाने लगा। उसने चावल पकने के लिए कूकर में चढ़ाये , आलू की भुजिया बनायीं और सबसे आखिर में दाल में तड़का लगाया। पूरा किचन खाने की खुशबु से महकने लगा।

पृथ्वी ने चम्मच दाल में घुमाया और थोड़ी सी चम्मच में भरी और अवनि की तरफ आया ताकि उसे चखा सके लेकिन अवनि उसे खायेगी कैसे सोचकर उसने उसे अपनी हथेली पर थोड़ा सा रखा और अवनि से चखने का इशारा किया। अवनि ने चखा तो ख़ुशी से उसकी भँवे तन गयी और उसने पृथ्वी की तरफ देखकर कहा,”सुपर,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी मुस्कुराया तो अवनि ने प्लेटफॉर्म से नीचे उतरकर कहा,”मैं खाना लगा देती हूँ”

अवनि खाने के बर्तन लेकर बाहर चली गयी पृथ्वी की हथेली में थोड़ी सी दाल अभी भी बची थी जिसे अवनि ने चखा था और अगले ही पल उसने उसे अपने होंठो से लगा लिया आखिर शादी के बाद पहली बार उसे अवनि का जूठा खाने को जो मिल रहा था। एक प्यारी सी मुस्कान पृथ्वी के होंठो पर तैर गयी और वह हाथ धोने के लिए वाशबेसिन की तरफ चला आया।

पृथ्वी बाहर आया तब तक अवनि खाना लगा चुकी थी। पृथ्वी सोफे पर आ बैठा अवनि ने खाना प्लेट में परोसकर पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया। उसने अपनी प्लेट में खाना लिया और बगल वाले सोफे पर आ बैठी। अवनि चुपचाप अपना खाना खाने लगी और पृथ्वी ने उसे देखकर मन ही मन खुद से कहा,”कब आएगा वो दिन जब मैं और अवनि एक थाली से खाना खाएंगे,,,,,,,,,,,काश जल्दी आये क्योकि मैं इस जिंदगी का एक भी पल जाया नहीं करना चाहता , चाहता हूँ गुजरने वाले हर पल में अवनि का अहसास हो”

“खाना सच में बहुत अच्छा बना है पृथ्वी,,,,,,,,तुम खा क्यों नहीं रहे ?”,अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखकर कहा
“अगर आप मुझे एक निवाला अपने,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने इतना ही कहा कि अवनि का फोन बजा और अवनि को उठकर जाना पड़ा। फोन सुरभि का था अवनि ने उसे थोड़ी देर में फोन करने का कहा और वापस चली आयी।
“तुम कुछ कह रहे थे”,अवनि ने पूछा

“कुछ नहीं,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने मुस्कुरा कर कहा
अवनि मुस्कुराई और वापस अपना ध्यान खाने में लगा लिया। अपने दिल के बातें अवनि के सामने कहना पृथ्वी के लिए कितना मुश्किल था ये बस पृथ्वी ही जानता था।

खाना खाकर अवनि ने बर्तन धोये किचन साफ किया और सोने के लिए आज भी हॉल में चली आयी ये देखकर पृथ्वी को अच्छा नहीं लगा तो उसने कहा,”आप अपने कमरे में जाईये यहाँ मैं सो जाता हूँ”
“तुम यहाँ ठीक से नहीं सो पाते पृथ्वी देखा है मैंने , मेरे लिए खुद को परेशान करना बंद करो तुम”,अवनि ने कहा
“मैं कोई परेशान नहीं हो रहा मैडम जी ! आप मेरी जिम्मेदारी है और मुझे अपनी जिम्मेदारी निभाने दीजिये,,,,,,,,,,जाईये आप अपने कमरे में जाईये”,पृथ्वी ने सोफे पर बैठते हुए कहा

“पृथ्वी जिद मत करो , जाओ अंदर जाओ सो,,,,,,,,,,,अहहहहहहहछी”,अवनि अपने बात पूरी कर पाती इस से पहले ही उसने छींक दिया
“लगता है आपको सर्दी हो गयी है , अब तो मैं आपको यहाँ बिल्कुल नहीं सोने दूंगा,,,,,,जाईये अंदर जाईये”,पृथ्वी ने कहा

अवनि को महसूस हुआ कि ठण्ड के साथ ही उसे हल्का हल्का सर दर्द भी हो रहा है तो उसने पृथ्वी से बहस नहीं की और पृथ्वी से गुड नाईट कहकर कमरे की तरफ चली गयी।
पृथ्वी ने भी हॉल की लाइट्स बंद की और सोने चला गया। अवनि ने दरवाजा बंद किया बस लॉक करना भूल गयी और बिस्तर पर आ लेती ,, कुछ ही देर बाद उसे ठण्ड का अहसास हुआ तो उसने खुद को कंबल से ढक लिया और गहरी नींद में चली गयी।

अगली सुबह पृथ्वी उठा तो देखा कमरे का दरवाजा बंद है , रोज अवनि पृथ्वी से पहले उठ जाया करती थी लेकिन आज वह देर तक सो रही थी। पृथ्वी आँखे मसलते हुए उठा और कमरे की तरफ चला आया उसने दरवाजा खटखटाया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। पृथ्वी ने दरवाजा खोला और अंदर आया तो देखा अवनि सो रही है और गहरी नींद में है !

“अवनि , अवनि”,पृथ्वी ने आवाज दी लेकिन अवनि नहीं उठी। पृथ्वी अवनि की तरफ चला आया , उसने अवनि को जगाने के लिए जैसे ही उसका हाथ थपथपाया उसे महसूस हुआ अवनि का हाथ काफी गर्म है। पृथ्वी ने अवनि का हाथ छूकर देखा तो पाया वह सच में गर्म थी। पृथ्वी के चेहरे पर चिंता के भाव उभर आये। उसने अवनि का ललाट छूकर देखा , अवनि का ललाट गर्म भट्टी सा जल रहा था। पृथ्वी को समझ आया कि अवनि बीमार है और उसने चिंतित स्वर में कहा,”इन्हे तो बुखार है,,,,,,,,,,,,,,कल ये कल रात भीगने की वजह से तो नहीं,,,,,,,,,,,,,!!!”

( अगर मुंबई में बारिश नहीं हुई तो फिर पृथ्वी और अवनि भीगे कैसे ? आखिर कब तक रोक पायेगा पृथ्वी खुद को अवनि के सामने ? अवनि को बुखार में पाकर क्या करेगा पृथ्वी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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