Pasandida Aurat Season 2 – 25

Pasandida Aurat Season 2 – 25

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

उसकी आँखों के सामने वो पल आ गया जब बारिश में भीगते हुए उसने सिद्धार्थ का हाथ थामकर कहा था,”मेरा हमेशा से सपना था कि मैं अपने लाइफ पार्टनर के साथ उसका हाथ थामकर बारिश में भीगूँ” “तुम ना ये बेकार सपने देखना बंद करो , तुम्हारे ऐसे सपनो की वजह से दुसरो को प्रॉब्लम होती है”

वो पल याद आते ही अवनि के चेहरे पर उदासी के भाव तैर गए और आँखों में हलकी नमी तैर गयी।

उस दिन के बाद से ही अवनि को बारिश अच्छी नहीं लगती थी। पृथ्वी ने अवनि का उतरा चेहरा देखा तो कहा,”आप इसलिए उदास हो गयी क्योकि आपको बारिश पसंद नहीं है,,,,,,,,,है ना ?”

अवनि ने पृथ्वी को देखा और कहा,”कभी कभी हम किसी शहर , किसी मौसम , किसी गाने , किसी कविता , किसी जगह और किसी रंग को बस सिर्फ इसलिए पसंद नहीं करते क्योकि उनसे हमारी कुछ बुरी यादें जुडी होती है,,,,,,,,,,,,!!!”

पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराया और अवनि की तरफ कदम बढाकर कहा,”मैडम जी ! अगर अनजाने में किसी शहर , किसी मौसम , किसी कविता , किसी जगह और किसी रंग को लेकर बुरी यादें बन सकती है तो उनके साथ कुछ अच्छी यादे भी तो बनायीं जा सकती है ना,,,,,,,,,,,,!!!”
“मतलब ?”,अवनि ने बुझे स्वर में पूछा

“अगर आज बारिश हुई तो मैं वादा करता हूँ बारिश से जुड़ी आपकी सभी बुरी यादें मिटा दूंगा”,कहते हुए पृथ्वी ने अवनि के गाल पर गिरे उसकी पलक के बाल को उठाया और अवनि ने अपनी मुट्ठी आगे करने का इशारा किया। अवनि ने अपनी मुट्ठी पृथ्वी के सामने की तो पृथ्वी ने टुटा बाल अवनि की मुट्ठी पर रखा और कहा,”चलिए अब कुछ मांगिये और फिर फूंक मारकर इसे उड़ा दीजिये”

अवनि ने सुना तो एकटक पृथ्वी को देखने लगी। वह सोच में पड़ गयी आखिर पृथ्वी के पास उसकी हर बात का जवाब कैसे होता था वो भी इतना सरल और सधा हुआ बिना किसी लाग लपेट के,,,,,,,,,,,,,पृथ्वी ने अवनि से विश मांगने का इशारा किया और खाली कप लेकर वहा से चला गया। अवनि इन सब चीजों में विश्वास नहीं करती थी लेकिन ना जाने क्यों पृथ्वी के कहे शब्दों पर आज उसका विश्वास करने का दिल किया। उस ने जैसे ही विश माँगने के लिए आँखे बंद की पृथ्वी पलटा और कहा,”और हाँ ! अपनी विश में मुझे मत माँगना , मैं तो आपको पहले ही मिल चुका हूँ”

अवनि ने सुना तो बंद आँखों के साथ मुस्कुरा उठी। उसने मन ही मन कुछ माँगा और फिर फूँक मार दी पलक का बाल हवा में कही उड़ गया और अवनि भी अंदर चली आयी।  

पृथ्वी को ऑफिस जाना था इसलिए वह नहाने चला गया तब तक अवनि उसके लिए लंच बना चुकी थी साथ ही उसने पृथ्वी के लिए पराठा बनाया ताकि ऑफिस जाने से पहले वह थोड़ा कुछ खाकर जाए। अवनि ने प्लेट में पराठा रखा थोड़ी सुखी सब्जी रखी जिसे उसने लंच में भी रखा था और लेकर हॉल में आयी तो देखा पृथ्वी वहा नहीं था। अवनि प्लेट लेकर पृथ्वी को ढूंढते हुए कमरे में चली आयी उसने देखा पृथ्वी नहाकर ऑफिस जाने वाले कपडे पहन चुका था लेकिन आज फिर वह जल्दी में था।

“पृथ्वी ! जाने से पहले ये खा लेना , घर से बिना खाये नहीं जाते”,अवनि ने कहा
पृथ्वी ने सुना तो अपने बाल बनाते हुए अवनि की तरफ पलटा और कहा,”आप वहा रख दीजिये मैं खा लूंगा”
अवनि ने प्लेट टेबल पर रखा और कमरे से बाहर चली आयी। उसने पृथ्वी का टिफिन लाकर हॉल की टेबल पर रखा और किचन में आकर बाकी कामो में लग गयी।

पृथ्वी तैयार होकर बाहर आया तभी ऑफिस से फोन आया और पृथ्वी बात करते हुए किचन की तरफ आया और अवनि से ऑफिस जाने का इशारा करके वहा से चला गया। वह इतनी जल्दी में था कि टिफिन ले जाना ही भूल गया।

पृथ्वी के जाने के कुछ देर बाद अवनि किचन से बाहर आयी , जब उसकी नजर टेबल पर रखे टिफिन पर पड़ी तो वह टेबल की तरफ आयी और टिफिन  देखकर कहा,”पृथ्वी तो टिफिन यही भूल गया”
अवनि ने अंदाजा लगाया कि पृथ्वी ज्यादा दूर नहीं गया होगा इसलिए उसने टिफिन उठाया और फ्लेट से बाहर निकल गयी। अवनि लिफ्ट से नीचे आयी और टिफिन हाथो में थामे अपार्टमेंट से बाहर निकली।

पृथ्वी उसे सोसायटी के गेट की तरफ जाता दिखा। इतनी दूर तक अवनि की उस तक नहीं जाती इसलिए अवनि उसे रोकने उसके पीछे चली आयी। पृथ्वी के कुछ पास पहुंचकर अवनि ने उसे आवाज दी तो पृथ्वी पलटा और उसे तब और ज्यादा हैरानी हुई जब उसने अवनि को वहा देखा। पृथ्वी अवनि के पास आया तो अवनि ने टिफिन उसकी तरफ बढाकर कहा,”तुम टिफिन भूल गए थे”

“मैडम जी ! आप टिफिन के लिए इतना परेशान हुई , मुझे फोन कर दिया होता मैं वापस आ जाता”,पृथ्वी ने कहा
“अह्ह्ह्ह कोई बात नहीं , तुमने कल भी ठीक से खाना नहीं खाया था शायद इसलिए मैंने आज खाना थोड़ा ज्यादा रखा है”,अवनि ने हाँफते हुए कहा  
पृथ्वी ने सुना तो ख़ामोशी से अवनि को देखने लगा आखिर अवनि को कैसे पता कि उसे कल अवनि के हाथो से बना खाना खाने को नहीं मिला था ?

पृथ्वी ने जैसे ही अवनि से कुछ कहना चाहा उसकी नजर अवनि के चेहरे पर पड़ी जिस पर पसीने की कुछ बुँदे उभर आयी थी। पृथ्वी ने जेब से रुमाल निकाला और अवनि का के ललाट पर थपथपाया। दोनों इस वक्त सोसायटी के फुटपाथ पर खड़े थे और आस पास से गुजरते लोग उन्हें ही देख रहे थे। अवनि जहा सबको देखकर असहज हो रही थी वही पृथ्वी को कोई खास फर्क नहीं पड़ा कि उसे ये करते हुए कौन देख रहा है ?

“पृथ्वी ! क्या कर रहे हो ? सब देख रहे है”,अवनि ने धीरे से कहा तो पृथ्वी को अहसास हुआ कि वह सोसायटी के फुटपाथ पर खड़ा है। उसने अपना हाथ नीचे किया और कहा,”थैंक्यू”
“अब ये किसलिए ?”,अवनि ने पूछा
“बस थैंक्यू”,पृथ्वी ने अवनि की आँखों में देखते हुए प्यार से कहा
“तुम्हे अब जाना चाहिए वरना देर हो जाएगी”,अवनि ने धीरे से कहा

“अह्ह्ह हाँ ! मैं चलता हूँ , अपना ख्याल रखना मैं जल्दी आऊंगा”,कहकर पृथ्वी ने भारी मन के साथ अपना हाथ हिलाया और जाने के लिए आगे बढ़ गया। अवनि भी पलटकर जाने लगी और दोनों विपरीत दिशाओ में आगे बढ़ गए। चलते चलते पृथ्वी रुका और पलटकर कहा,”अवनि,,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी की आवाज सुनकर अवनि पलटी और कहा,”हाँ,,,,,,,,,,!!!”
“आज बारिश जरूर होगी”,पृथ्वी ने कहा तो अवनि खाली आँखों से उसे एकटक देखने लगी।

पृथ्वी पलटा और वहा से चला गया , अवनि भी अपार्टमेंट की तरफ बढ़ गयी। सामने से आती लता पर जब अवनि की नजर पड़ी तो अवनि रुक गयी। लता अवनि के सामने से गुजरते हुए रुकी तो अवनि ने कहा,”नमस्ते , कैसी है आप ?”
लता ने जलती आँखों से अवनि को देखा और कहा,”मेरे बेटे को तुम अपनी मीठी मीठी बातो में फंसा सकती हो लेकिन मुझ पर तुम्हारी इन बातो का कोई असर नहीं होने वाला समझी तुम,,,,,,,,जितनी जल्दी तुम मेरे बेटे की जिंदगी और इस शहर से चली जाओ तुम्हारे लिए उतना ही अच्छा होगा”

अवनि ने सुना तो उसका दिल टूट गया। लता के दिल में अवनि के लिए वही गुस्सा वही नफरत आज भी कायम थी। अवनि की आँखों में आँसू भर आये ये देखकर लता आगे बढ़ गयी। अवनि उन्हें जाते हुए देखती रही तभी रवि जी अवनि के बगल से गुजरे , उन्होंने लता के कहे शब्द सुने थे और जब उन्होंने अवनि की आँखों में आँसू देखे तो अवनि की तरफ ना देखकर सामने देखते हुए कहा,”वो इस वक्त अपने बेटे से दूर होने के गुस्से में है , उसकी कही किसी भी बात को दिल पर मत देना,,,,,,,,,वक्त के साथ सब ठीक हो जाएगा”

अवनि ने सुना तो उदास आँखों से रवि जी को देखने लगी , रवि जी ने एक नजर अवनि को देखा और आगे बढ़ गए। रवि जी के मन में अवनि को लेकर कोई गुस्सा या नफरत नहीं थी बल्कि वे तो पृथ्वी के फैसले से नाराज थे। उनकी बातों से साफ़ जाहिर हो रहा था कि घर में पृथ्वी के बाद वही थे जिन्हे अवनि की थोड़ी परवाह थी। अवनि ने अपनी आँखों के किनारे साफ़ किये और अपार्टमेंट के अंदर चली आयी।    

दिनभर अवनि पृथ्वी के फ्लेट को सवारने में लगी रही। उसका आर्डर किया कुछ सामान आ चुका था और कुछ बाकि था। अवनि ने एक बार फिर फ्लेट के हॉल का नजारा ही बदल दिया अब ये हॉल पहले से ज्यादा खूबसूरत और जिंदादिल लग रहा था। दोपहर बाद अवनि अपने कमरे में बैठकर अपने फोन में आये मेल्स चेक कर रही थी और जैसे ही एक मेल उसकी आँखों के सामने आया उसकी आँखे चमक उठी।

अवनि को मुंबई के एक प्रोडक्शन हॉउस से मेल आया जिसमे उसकी कहानी को लेकर एक मीटिंग का जिक्र किया गया था। अवनि ने जैसे ही उस मेल को पढ़ा ख़ुशी से उसका चेहरा खिल उठा। अवनि ने सभी डिटेल्स चेक की और अगले दिन की मीटिंग के लिए जवाब लिखकर भेज दिया। अवनि बहुत खुश थी और वह बस पृथ्वी के आने का इंतजार कर रही थी ताकि उसे इस बारे में बता सके।

ऑफिस में दिनभर काम में बिजी रहने के कारण पृथ्वी अवनि को ना मैसेज कर पाया ना ही कोई फोन , लंच टाइम में अवनि को फोन करने का सोचकर पृथ्वी आखिरी रिपोर्ट तैयार करने लगा। लंच टाइम में पृथ्वी सबके साथ आ बैठा और आज फिर सबकी नजरे पृथ्वी के टिफिन पर थी और तो और जयदीप भी आज फिर लंच के लिए पृथ्वी के केबिन में चला आया लेकिन आज पृथ्वी ने किसी पर गुस्सा नहीं किया ना ही किसी से चिढ़ा बल्कि उसने टिफिन लो अपने दोनों हाथो में थामा और अपनी तरफ खिसकाकर कहा,”ये अवनि ने मेरे लिए बनाया है आज मैं अपना खाना किसी से शेयर नहीं करने वाला तुम सब अपना अपना टिफिन खाओ”

“सर आपकी वाइफ इतनी स्वीट है , उनके साथ रहकर भी आपमें थोड़ा सा भी बदलाव नहीं हुआ”,कशिश ने मुँह बनाकर कहा
“तुम कब मिली पृथ्वी की वाइफ से ?”,जयदीप ने कुर्सी खिसकाकर पृथ्वी के बगल में बैठते हुए कहा
“कल रात सर अपनी मिसेज के साथ आइसक्रीम पार्लर आये थे , हम सब उनसे वही मिले थे वो सच में बहुत स्वीट है,,,,,,,,,,,,सर की तरफ खड़ूस नहीं है”,तान्या ने कहा और आखरी चंद शब्द धीरे से कहे जिन्हे पृथ्वी ने सुन लिया लेकिन कहा कुछ नहीं

“ओह्ह्ह लगता है रोमांस की शुरुआत हो चुकी है,,,,,,,,देर रात साथ में आइसक्रीम खाई जा रही है”,जयदीप ने पृथ्वी की तरफ झुककर धीरे से कहा
“हाह ! आपको शर्म नहीं आती अपनी बहन के लिए ये सब सोचते हुए,,,,,,!!”,पृथ्वी ने जयदीप की तरफ देखकर कहा
“वो मेरी बहन है पर तुम तो मेरे दोस्त हो न,,,,,,,,,,,,लाओ दिखाओ ज़रा आज तुम्हारे टिफिन में क्या है ?”,जयदीप ने कहते हुए टिफिन पृथ्वी के हाथो से लिया और खोलकर बाहर निकाला तो एक बार फिर खाने की खुशबु सबके नाक से होकर गुजरी।

पृथ्वी को टिफिन में रखे खाने से ज्यादा दिलचस्पी किसी और चीज में थी , उसने सब डिब्बे हटाकर देखे और अंत में एक मायूसी उसके चेहरे से टपकने लगी। आज अवनि ने उसके लिए कोई पेपर नहीं रखा था।
“क्या हुआ ? इतना अच्छा खाना देखकर भी तुम्हारा मुँह बन गया”,जयदीप ने कहा तो पृथ्वी ने अपना मूड ठीक किया और सबके साथ बैठकर खाना खाने लगा।

उसने अवनि का बना खाना किसी से शेयर ना करने की बात कही और फिर खुद ही सबके साथ मिल-बांटकर खाने लगा।
“सर अवनि मेम इतना अच्छा खाना बनाती है , मुझे भी उनसे सीखना है”,कशिश ने कहा
“तुम सीखकर क्या करोगी ?”,पृथ्वी से पहले अंकित ने कहा
 “अरे जैसे पृथ्वी सर की मैडम इनके लिए टिफिन बनाती है , मैं भी तो बनाउंगी ना अपने नवरे के लिए”,कशिश ने शर्माकर कहा

“क्या बात है ? ये होती है भारतीय लड़किया शादी से पहले ही अपने पति की इतनी परवाह”,मनीष ने कहा तो सब हसने लगे लेकिन पृथ्वी अवनि के बारे में सोचने लगा। आज सुबह कैसे अवनि उसके लिए नाश्ता लेकर आयी थी और उसे खाकर जाने को कहा ये अवनि की पृथ्वी के लिए परवाह ही तो थी। अवनि के बारे में सोचते हुए पृथ्वी मुस्कुराने लगा तो तान्या ने कशिश को कोहनी मारी और पृथ्वी की तरफ देखने का इशारा किया।

अवनि के ख्यालो में खोये , मुस्कुराते हुए पृथ्वी इस वक्त कितना प्यारा लग रहा था। जयदीप का ध्यान तो खाना खाने में था उसने जब पृथ्वी को खोये हुए देखा तो एक निवाला तोडा और पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया। पृथ्वी अवनि के ख्यालो में इतना खोया हुआ था कि उसे जयदीप का हाथ भी अवनि का हाथ लग रहा था उसने बड़े प्यार से जयदीप के हाथ से वो निवाला खा लिया और धीरे से कहा,”इस पल का मैं कब से इंतजार कर रहा था अवनि”
गनीमत था कि बाकि सब का ध्यान खाने पर था और जयदीप के अलावा किसी ने वह नहीं सुना।

पृथ्वी की बात सुनकर जयदीप का मन भारी हो गया उसे समझते देर नहीं लगी कि अवनि और पृथ्वी के बीच कुछ ठीक नहीं है।
“अच्छा पृथ्वी ! अवनि राजस्थान से है ना ?”,जयदीप ने कहा तो पृथ्वी की तन्द्रा टूटी और उसने कहा,”हाँ , वो राजस्थान से है”

“मैंने सुना राजस्थान में “दाल-बाटी-चूरमा” बनता है और ये वहा की सबसे फेमस डिश है”,जयदीप ने फिर कहा
पृथ्वी ने सुना तो उसे वो दिन याद आया जब वह सिरोही में पहली बार अवनि से मिला था और उसके साथ खाना खाया था। उसने जयदीप की तरफ देखा और कहा,”हाँ बिल्कुल फेमस है और बहुत टेस्टी भी होता है”
“हाँ लेकिन मुझे नहीं लगता अवनि ये सब बना लेती होगी,,,,,,,,पनीर वनीर बनाना ईजी है लेकिन दाल-बाटी-चूरमा उम्मम्मम मुझे नहीं लगता उसने कभी बनाया होगा”,जयदीप ने कहा

अवनि के खिलाफ कोई कुछ कहे और पृथ्वी चुपचाप सुन ले ऐसा भला कैसे हो सकता है ? उसने चिढ़कर कहा,”अवनि राजस्थान से है और वह बहुत अच्छा खान बनाती है , ये सब बनाना उसके बांये हाथ का खेल है”
“हाह ! मैं नहीं मानता , वो अपने नाजुक हाथो से ये सब बना ही नहीं पायेगी। दाल-बाटी-चूरमा बनाना हर किसी के बस की बात ही नहीं है,,,,,,,,!!”,जयदीप ने मुँह बनाकर कहा    
“वो बना सकती है”,पृथ्वी ने टेबल पर हाथ मारकर कहा

“ठीक है फिर अवनि से कहना इस संडे हम सब तुम्हारे यहाँ डिनर पर आ रहे है”,जयदीप ने उठते हुए कहा और वहा से चला गया।
संडे पृथ्वी के घर डिनर का सुनकर अंकित , मनीष , तान्या और कशिश भी खुश हो गए और जयदीप की हाँ में हाँ मिलाकर वहा से उठ खड़े हुए। पृथ्वी को ये समझने में थोड़ा वक्त लगा कि वह अपनी ही कही बात में फंस चूका है उसके पास हाँ कहने के अलावा अब कोई दुसरा रास्ता नहीं था।

( तो क्या आज मुंबई में होने वाली है बारिश और पृथ्वी करने वाला है बारिश को लेकर अवनि का ये डर दूर ? क्या रवि जी के मन में अवनि को लेकर है हमदर्दी या वो कर रहे है दिखावा ? क्या पृथ्वी के कहने पर अवनि बनाने वाली है सबके लिए डिनर में दाल बाटी चूरमा ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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