Pasandida Aurat Season 2 – 17
Pasandida Aurat Season 2 – 17

अवनि की गोद में सर रखकर पृथ्वी किसी मासूम बच्चे की तरह लेटा रहा। लता के बर्ताव से वह बहुत दुखी था , लता उसकी एक गलती को लेकिन इतना बड़ा फैसला करेगी पृथ्वी ने कभी सोचा नहीं था। अवनि नहीं जानती थी पृथ्वी को क्या हुआ है ? उसे बस इतना समझ आया कि पृथ्वी इस वक्त किसी दर्द में है और उसे किसी अपने की जरूरत है। अवनि धीरे धीरे उसका कन्धा थपथपाती रही और पृथ्वी सो गया। अवनि ने देखा कि पृथ्वी को नींद आ चुकी है तो उसने उसका कंधा थपथपाना बंद कर दिया।
उसकी नजर पृथ्वी के नाक पर पड़ी तो अवनि को अहसास हुआ कि पृथ्वी इतना दुःख में था कि रो रहा था। अवनि ने उसकी पलक से बहे आँसू को अपनी ऊँगली पर लिया और मन ही मन खुद से कहा,”तुम मुझसे कहते हो कि मैं अपने आँसू ना बहाऊ ये बहुत कीमती है लेकिन क्या कभी किसी ने तुम से कहा कि तुम्हारे आँसू भी उतने ही कीमती है,,,,,,,मैंने जब भी तुम्हे देखा है हँसते मुस्कुराते ही देखा है पृथ्वी , तुमने कभी अपना दुःख मेरे सामने जाहिर ही नहीं किया और देखो आज भी तुम किसी दर्द में हो और मैं नहीं जानती उसके पीछे की वजह क्या है ?
लेकिन मैं महादेव से प्रार्थना करुँगी वे तुम्हारा दुःख कम कर दे,,,,,,,तुम्हारे आँसू बहुत कीमती है पृथ्वी , हाह ! अब मैं इसे कहा रखू ?”
कहकर अवनि अपनी ऊँगली और ठहरे उस आँसू की बूँद को देखती रही और फिर सहसा ही उसे अपनी माँग में रखते हुए कहा,”इस से महफूज जगह शायद कोई और हो,,,,,,,,मैं कभी तुम्हारे आँसुओ की वजह नहीं बनना चाहूंगी पृथ्वी , थोड़ा वक्त लगेगा पर मैं वादा करती हूँ मैं तुम्हे एक अच्छी पत्नी बनकर दिखाउंगी ,
हर सुख दुःख में तुम्हारा साथ दूंगी और तुम्हे कभी अकेला पड़ने नहीं दूंगी,,,,,,,,,और जब तुम थक जाओगे तो मेरी गोद हमेशा तुम्हारे लिए रहेगी जहा तुम अपना सर रख सकते हो,,हाँ पृथ्वी ! इतना हक़ तो दे ही सकती हूँ मैं तुम्हे”
अवनि धीरे धीरे पृथ्वी का सर सहलाने लगी , नींद में पृथ्वी को अपने सर पर किसी का हाथ महसूस हुआ तो वह अवनि का हाथ अपने हाथ में थामकर फिर सो गया।
पृथ्वी सोता रहा और अवनि ने भी उसे नहीं उठाया वह वही सोफे पर बैठी रही। रात के 9 बज रहे थे , ना अवनि ने खाना बनाया था ना ही कुछ और काम कर पायी। सोते सोते पृथ्वी के कानों में लता की कही बात गुंजी और वह एकदम से चौंककर उठा। अवनि ने देखा पृथ्वी के चेहरे पर अभी भी उदासी के भाव थे और आँखों में एक बेचैनी , पृथ्वी ने देखा वह अवनि के करीब है तो उस से दूर हटकर कहा,”आई ऍम सॉरी,,,,,,,मैं शायद सो गया था”
“कोई बात नहीं तुम ठीक हो न ?”,अवनि ने प्यार से पूछा
“हाँ ! मैं मैं ठीक हूँ,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने कहा जबकि अवनि ने देखा वह चेहरे से बिल्कुल ठीक नहीं लग रहा था।
“मैं तुम्हारे लिए पानी लेकर आती हूँ”,कहकर अवनि उठी और किचन की तरफ चली गयी। पृथ्वी ने खुद को नॉर्मल किया , दो चार बार अपनी हथेलियों को आपसे में घिसकर चेहरे से लगाया। अवनि ने पानी का गिलास पृथ्वी की तरफ बढ़ा दिया। पृथ्वी ने पानी पीकर गिलास टेबल पर रखा तो अवनि ने कहा,”खाने में क्या बनाऊ ?”
“अह्ह्ह जो आप चाहो , मैं खा लूंगा”,पृथ्वी ने बुझे स्वर में कहा
अवनि कुछ देर खामोश रही और फिर एकदम से चहककर कहा,”लेकिन आज मेरा खाना बनाने का मूड नहीं है,,,,,वैसे तुम कितने बुरे हो ना पृथ्वी फोन पर मुझसे कहते थे मैडम जी आप जब मुंबई का पाव-भाजी खाएंगी ना सब भूल जाएगी,,,,,,,हाह ! सिर्फ बातें यहाँ आकर बस करेला और गंवार फली खा रही हूँ मैं”
मुंबई आने के बाद पृथ्वी ने पहली बार अवनि को ऐसे प्यारे नखरे करते देखा तो मुस्कुराया और कहा,”ठीक है आप तैयार हो जाईये , बाहर चलते है”
“सच में हम बाहर जा रहे है ?”,अवनि ने आँखों में चमक भरकर पूछा
पृथ्वी ने मुस्कुराते हुए हामी में गर्दन हिला दी। अवनि मुस्कुराई और तैयार होने चली गयी। पृथ्वी सोफे पर बैठा अभी भी लता और घरवालों के बारे में सोच रहा था कि अवनि अपने दोनों हाथो में अलग अलग सूट पकडे आयी और पृथ्वी को दिखाकर पूछा,”इनमे से कौनसा ?”
“वो पिंक वाला,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा तो अवनि ख़ुशी ख़ुशी वापस अंदर चली गयी। अवनि के जाने के बाद पृथ्वी उठा और वाशबेसिन के सामने आकर मुँह धोने लगा। मुँह धोकर पृथ्वी ने खुद को शीशे में देखा और मन ही मन खुद से कहने लगा,”क्या कर रहा है पृथ्वी ? अवनि के सामने ऐसे रहेगा तो उसे दो मिनिट नहीं लगेंगे ये जानने में कि तू किसी बात को लेकर परेशान है और फिर तुझे उसे सब बताना पडेगा। अगर उसे पता चला आज घर पर क्या हुआ तो वो एक बार फिर इन सबके लिए खुद को जिम्मेदार समझने लगेगी ,,
नहीं पृथ्वी तुझे फिर से अवनि को उस गिल्ट में नहीं जाने देना है कितनी मुश्किल से तो वह मुस्कुराने लगी है और आज तो वह कुछ ज्यादा ही खुश है ,, उसे अपनी परेशानी के बारे में बताकर उसकी ख़ुशी मत छीन यार,,,,,,,,अवनि अब तुम्हारी जिम्मेदारी है और तुम्हे ही अब सब सम्हालना है,,,,,,,,,मुस्कुरा और बाहर लेकर जा उसे,,,,,जो वादे तुमने उस से किये है उन्हें निभा और देखना वो कैसे मुस्कुराती है और मुझे यकीन है उसकी मुस्कुराहट देखकर तू अपना हर गम भूल जाएगा,,,,,,,,चल जा”
पृथ्वी ने एक गहरी साँस ली , एक बार फिर मुँह धोया और टॉवल से पोछकर अपने बालों को सही करने लगा।
कुछ ही देर में अवनि तैयार होकर आयी और दोनों फ्लेट से बाहर निकल गए। लिफ्ट में दोनों एक दूसरे से दूर खड़े थे। अवनि सामने देख रही थी और पृथ्वी अपने हाथो को बांधे , लिफ्ट की दिवार से पीठ लगाये बड़े प्यार से अवनि को देख रहा था। लिफ्ट का दरवाजा खुला दोनों बाहर आये। गार्ड ने अवनि और पृथ्वी को साथ देखा तो मुस्कुरा दिया। पृथ्वी ने पहले ही कैब बुक कर दी थी जो कि बिल्डिंग के बाहर उसका इंतजार कर रही थी।
पृथ्वी ने अवनि के लिए दरवाजा खोला और फिर खुद भी उसके बगल में आकर बैठ गया। रात के 10 बज रहे थे लेकिन पनवेल में इस वक्त गजब की रौनक थी। ज्यादातर लोग इसी वक्त बाहर निकलते थे। पृथ्वी अवनि को लेकर अपनी पसंदीदा जगह आया जहा वह हमेशा पावभाजी खाया करता था।
दुकानवाले ने पृथ्वी को देखा तो मुस्कुरा कर कहा,”कसा आहेस पृथ्वी ? तू खूप दिवसांनी आला आहेस ( कैसे हो पृथ्वी ? बड़े दिनों बाद आये )”
“नमस्कार काका ! मी थोडा व्यस्त होतो” ( नमस्ते काका ! थोड़ा व्यस्त था )”,पृथ्वी ने कहा
पृथ्वी और दुकानवाले अंकल की बातें अवनि को पूरी समझ नहीं आयी लेकिन उसने समझने की कोशिश की। अवनि को पृथ्वी के साथ देखकर काका ने पृथ्वी की तरफ झुककर धीरे से कहा,””हे कोण आहे? मी तुला यापूर्वी कधीही मुलीसोबत पाहिले नाही” ( ये कौन है , पहले तो कभी तुम्हे किसी लड़की के साथ नहीं देखा )
पृथ्वी ने मुस्कुरा कर एक नजर अवनि को देखा तो काका समझ गया और खुश होकर कहा,”तुम्हाला बायको आहे का ? ( तुम्हारी पत्नी है क्या ? )”
पृथ्वी ने हामी में सर हिलाया तो काका ने खुश होकर कहा,”तर आजची पावभाजी माझ्याकडून आहे , तू का उभा आहेस, बसा ( फिर तो आज की पावभाजी मेरी तरफ से,,,,,,,,तुम खड़े क्यों हो बैठो )
पृथ्वी अवनि की तरफ चला आया और उसके साथ एक बेंच पर आ बैठा। ये एक छोटी रोड साइड दुकान थी जिसके बाहर बैठने के लिए बेंच लगी थी और कुछ लोग तो खड़े खड़े भी खा रहे थे।
पृथ्वी एकदम से अवनि की तरफ पलटा और कहा,”अवनि ! आपको यहाँ अनकंफर्टेबल तो नहीं लग रहा ना ? मेरा मतलब ऐसे रोड साइड बैठकर खाना,,,,,,,क्या है न मैं काका को बचपन से जानता हूँ और हमेशा यही से खाता हूँ,,,,,,,इसलिए मैं आपको यहाँ,,,,,,,,,,!!!”
पृथ्वी अपनी बात पूरी करता इस से पहले अवनि ने कहा,”पृथ्वी ! बंद रेस्त्रो में बैठकर खाने से ज्यादा अच्छा है खुले आसमान के नीचे बैठकर खाना और अगर साथ बैठकर खाने वाला आपके लिए ख़ास हो तो फिर जगह नहीं देखी जाती”
अवनि की बात सुनकर पृथ्वी एकटक उसे देखने लगा और कहा,”मतलब मैं आपके लिए ख़ास हूँ ?”
“मैंने ऐसा नहीं कहा,,,,,,!!!”,अवनि ने इतरा कर दूसरी तरफ देखते हुए कहा
“झूठी,,,,,,,,!!!”,पृथ्वी ने धीरे से कहा और मुस्कुराया लेकिन साथ ही वह खुश था कि अवनि ने उसे इतनी अहमियत दी और उसके साथ इस जगह बैठकर खाने में भी सहज है।
कुछ ही देर में पावभाजी की प्लेटे आ गयी। अवनि और पृथ्वी दोनों खाने लगे। खाते हुए पृथ्वी बीच बीच में अवनि को देख लेता लेकिन अवनि का ध्यान सिर्फ खाने पर था। पृथ्वी को वो पल याद आ गया जब अवनि ने उसे पहली बार विडिओ कॉल किया था और खाना खा रही थी। उस दिन भी अवनि पृथ्वी के सामने खाते हुए उतना ही सहज थी जितना आज,,,,,,,,पृथ्वी को अपनी तरफ देखते पाकर अवनि ने उसकी तरफ देखा और अपनी भँवे उचकाई तो पृथ्वी ने मुस्कुराते हुए ना में गर्दन हिला दी। अवनि ने फिर अपना ध्यान खाने में लगा लिया।
पृथ्वी भी चुपचाप खाने लगा। कुछ ही देर बाद पृथ्वी को शरारत सूझी और उसने थोड़ी सी भाजी अपनी ऊँगली पर लेकर होंठ के किनारे लगा लिया और अवनि के सामने ऐसे दिखाने लगा जैसे उसे कुछ पता न हो और खाते खाते अनजाने में लग गया हो। अवनि ने ध्यान नहीं दिया तो पृथ्वी खीजते हुए मन ही मन खुद में बड़बड़ाया,”अरे यार ! ये मेरी तरफ देख क्यों नहीं रही ? हाह इतनी अच्छी कहानिया लिखती है लेकिन असल जिंदगी में रोमांस का R तक नहीं पता इस लड़की को,,,,,,,,,अरे अवनि देखो मुझे , तुम्हारी नजर जहा होनी चाहिए वहा क्यों नहीं है ?
मैंने तो सोचा था खाते खाते तुम मेरी तरफ देखोगी और फिर एकदम से तुम्हारी नजर मेरे होंठो पर जाएगी जहा कुछ लगा है , तुम पहले मुझे इशारे में बताओगी कि कुछ लगा है और मैं जान बूझकर यहाँ वहा हाथ लगाकर अनजान बनने का नाटक करूंगा फिर तुम अपनी नाजुक उंगलियों से उसे हटाओगी,,,,,,,,,अह्ह्ह्ह लेकिन ऐसा तो कुछ नहीं हो रहा,,,,,,,,,अरे देखो ना”
खुद में बड़बड़ाते हुए पृथ्वी के मुँह से “अरे देखो न” थोड़ा तेज आवाज में निकला और अवनि ने चौंककर पृथ्वी को देखा तो पृथ्वी ने झेंपते हुए कहा,”अह्ह्ह वो मैं मौसम की बात कर रहा था , मौसम अच्छा है ना”
अवनि ने चारो तरफ देखा और फिर आसमान में काले बादल देखकर कहा,”हाँ शायद बारिश होने वाली है”
“हाह ! इसे बारिश का ख्याल है लेकिन मेरे होंठो पर लगी,,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी हताश होकर फिर बड़बड़ाया लेकिन वह अपनी बात पूरी करता इस से पहले ही अवनि की नजर उसके होंठो के किनारे लगे खाने पर पड़ी तो अवनि ने ऊँगली से इशारा करके कहा,”कुछ लगा है शायद”
पृथ्वी मन ही मन खुश हुआ बस अपनी ख़ुशी को चेहरे पर आने नहीं दिया। उसने अनजान बनते हुए अपने चेहरे पर यहाँ वह छुआ लेकिन वहा नहीं जहा सच में कुछ लगा था। अवनि ने देखा तो टिस्सू पेपर उठाया और पृथ्वी की तरफ बढ़ाकर कहा,”लो इस से साफ़ कर लो”
बेचारा पृथ्वी उसका खूबसूरत ख्याल इसी के साथ हवा हो गया। पृथ्वी ने टिश्यू लिया और अपने होंठो पर लगे खाने को साफ किया। खा पीकर दोनों वहा से निकल गए। रात का वक्त , ठंडी हवाएं , प्यारा मौसम और उस पर अवनि का साथ , पृथ्वी तो चाहता था ये वक्त यही थम जाए। चलते चलते दोनों सड़क किनारे चले आये अपार्टमेंट यहाँ से 3 किलोमीटर दूर था। अवनि ने पैदल ही चलने को कहा तो पृथ्वी ने हामी भर दी।
अवनि सड़क की तरफ चल रही थी और पृथ्वी फुटपाथ की तरफ , पृथ्वी ने जब देखा कि अवनि सड़क की तरफ चल रही है तो खुद अवनि के बगल में चला आया और उसे फुटपाथ की तरफ चलने का इशारा किया।
“तुम शाम में कहा गए थे ?”,पृथ्वी के साथ चलते हुए अवनि ने पूछा
पृथ्वी ने सुना तो अवनि की तरफ देखने लगा , पृथ्वी अवनि से झूठ नहीं बोल सकता था और सच बताकर उसे परेशान करना नहीं चाहता था लेकिन फिर भी हिम्मत करके उसने कहा,”मैं अपने घर गया था अवनि आई बाबा से मिलने”
अवनि ने सुना तो मुस्कुराई और कहा,”तो वो तुमसे मिले ना ?”
पृथ्वी ने सुना तो हामी में गर्दन हिला दी और ये देखकर अवनि का चेहरा खिल उठा वह चलते चलते रुकी और पृथ्वी की तरफ पलटकर कहा,”महादेव का बहुत बहुत शुक्रिया पृथ्वी , कम से कम तुम्हारे घरवाले तुम से मिले तो सही ,, मैं जानती हु हमने जो किया वो करके उनका दिल दुखाया है और इस रिश्ते को समझने और स्वीकार करने में अभी उन्हें वक्त लगेगा। तुम्हारे आई बाबा कुछ दिन मुझसे नाराज रहे तो भी मुझे बुरा नहीं लगेगा बस वो तुम से नाराज ना रहे और तुम्हे माफ़ कर दे,,,,,,,,,,,
अगर उन्होंने तुम्हे फिर से अपना लिया तो मैं समझूंगी उन्होंने मुझे भी माफ़ कर दिया। माँ-बाप की नाराजगी कितनी तकलीफदेह होती है मैं बहुत अच्छे से जानती हूँ पृथ्वी,,,,मैं नहीं चाहती वो अहसास तुम्हारी जिंदगी में भी आये”
पृथ्वी ने सुना तो अंदर ही अंदर उसे बहुत दुःख हुआ लेकिन अवनि को वह सच नहीं बता सकता था इसलिए जबरदस्ती मुस्कुराया और कहा,”वैसे आपको पावभाजी कैसी लगी ?”
“अच्छी थी,,,,,,,,थैंक्यू”,अवनि ने कहा और पृथ्वी के साथ आगे बढ़ गयी
“इस से भी अच्छी पावभाजी मैं आपको बनाकर खिला सकता हूँ”,पृथ्वी ने अवनि के बगल में चलते हुए कहा
“हां ? सच में ? तुम्हे खाना बनाना आता है ?”,अवनि ने हैरानी से पूछा क्योकि बीते दो दिनों में उसने पृथ्वी को सिर्फ चाय बनाते देखा था।
“हाँ बिल्कुल आता है,,,,,,,,इस बार मैं आपको पावभाजी अपने हाथो से बनाकर खिलाऊंगा”,पृथ्वी ने कहा
“पक्का अपने हाथो से खिलाओगे ?”,अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखकर शरारत से पूछा
“हाँ पक्का,,,,,,,,,,,,,,,अपने हाथो से”,पृथ्वी ने अवनि की आँखों में देखकर कहा तो अवनि ख़ामोशी से उसकी आँखों में देखने लगी। अक्सर दोनों एक दूसरे की आँखों में ना जाने क्या ढूंढने कोशिश करते रहते थे।
गाडी के हॉर्न से अवनि चौंकी और पृथ्वी के थोड़ा करीब आ गयी तो पृथ्वी ने हाथ दिखाकर गाडी वाले से कहा,”
“तुम्ही आंधळे आहात का ? ? ( तुम अंधे हो क्या ? )”
गाड़ी वाला जा चुका था पृथ्वी ने अवनि की तरफ देखा और कहा,”आप ठीक है ?”
“हम्म्म्म”,अवनि ने पृथ्वी से दूर हटकर कहा
“यहाँ लोगो को गाड़ी चलाने का बिल्कुल सेन्स नहीं है , गाड़ी तो ऐसे चलाएंगे जैसे इनके बाप की रोड हो”,पृथ्वी भुनभुनाया तो अवनि ने कहा,”पृथ्वी ! ठीक हूँ मैं”
“हम्म्म ! आईये चलते है”,पृथ्वी ने कहा और अवनि को साथ लेकर आगे बढ़ गया।
दोनों सोसायटी में आये और अपने अपार्टमेंट की तरफ चल पड़े। चलते चलते सामने से नीलम भुआ आती दिखाई दी , वे शायद पृथ्वी के घर से ही वापस आ रही थी। अवनि और पृथ्वी को साथ देखकर नीलम भुआ उनके पास चली आयी। पृथ्वी और अवनि रूक गए तो नीलम भुआ उनके सामने आ खड़ी हो गयी। नीलम भुआ ने अपने हाथो को बांधा और होंठो पर तीखी मुस्कान सजाकर पृथ्वी को देखकर कहा,”क्यों पृथ्वी ? तुमने अपनी मैडम जी को बताया नहीं कि आज तुमने कितना बड़ा फैसला किया है ?”
अवनि ने सुना तो पृथ्वी की तरफ देखा और फिर नीलम की तरफ देखकर विश्वास भरे स्वर में कहा,”मुझे जानने की जरूरत नहीं है आंटी , मुझे यकीन है इन्होने जो भी फैसला किया होगा सोच समझकर किया होगा”
“क्या बात है बड़ा विश्वास है तुम्हे पृथ्वी पर”,नीलम भुआ ने अवनि को ताना मारकर कहा
अवनि ने एक नजर पृथ्वी को देखा और फिर उसी विश्वास के साथ कहा,”पृथ्वी माझा नवरा आहे आणि मी त्याच्यावर खूप प्रेम करते, मी त्याला कधीही सोडणार नाही”
नीलम भुआ ने जैसे ही अवनि के मुँह से ये सुना उनके चेहरे से मुस्कराहट गायब हो गयी और वे अवनि को घूरते हुए वहा से चली गयी। पृथ्वी ने सुना तो हैरानी से अवनि की तरफ देखा और कहा,”आपने ये क्यों कहा ? मैंने आपको गलत मराठी सिखाई थी”
अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”कभी कभी गलत बाते सही वक्त पर काम आ जाती है,,,,,,,,,और फिर मुझसे किसी ने कहा था “आपको अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट कम नहीं करनी चाहिए , सामने वाले को जवाब दीजिये बाकि मैं सम्हाल लूंगा” तो बस मैंने वही किया”
पृथ्वी ने सुना तो मुस्कुराने लगा और कहा,”क्या मैडम जी ? वैसे आपने जो भी कहा मुझे अच्छा लगा”
“लेकिन मुझे तुम से प्यार नहीं हुआ है हाँ,,,,,,,,,वो तो बस मैंने उनको जवाब देने के लिए बोला”,अवनि ने कहा
“हो जाएगा ,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी बहुत ही विश्वास के साथ धीरे से बड़बड़ाया
“कुछ कहा तुमने ?”,अवनि ने पूछा
पृथ्वी ने ना में गर्दन हिला दी और अवनि के साथ आगे बढ़ गया।
( क्या पृथ्वी के टूटे मन को अपने प्रेम से जोड़ पायेगी अवनि ? क्या पृथ्वी सीखा पायेगा अवनि को उसी की लिखी कहानियो वाला रोमांस ? क्या अवनि ढाल पायेगी नए माहौल में खुद को या रहेगी वही पुरानी अवनि ? जानने के लिए पढ़ते रहे “पसंदीदा औरत सीजन 2” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Jab aadmi dukhi hota hai na to wo uske sath hota hai jis se usse sukoon mile…jaise Prithvi ko Avni k sath milta hai… Avni bhi janti thi ki Prithvi preshan hai, isliye usne usko apni god m sula diya aur uske wo haq bhi diya ki jab bhi Prithvi preshan ya thka hua hoga, Avni usko ese hee apni god m sulayegi…thank God ki Prithvi ne Avni ko nhi btaya ki uske ghar walo ne rishta tod diya hai…aur ek time ko yeh Darr bhi laga ki kahin Neelam bua Avni ko na bta de ghar m Prithvi k sath kya hua hai…but Avni ne neelam bua ko marathi m bahot badhiya jawab diya.