Pasandida Aurat – 81
Pasandida Aurat – 81

अवनि की कलाई मजबूती से थामे सिद्धार्थ उसे लेकर स्टेशन से बाहर आया और गाडी का दरवाजा खोलकर उसे अंदर धकेलकर दरवाजा बंद कर दिया और खुद ड्राइवर सीट पर आ बैठा , अवनि डर से काँप रही थी उसका चेहरा लाल था और आँखे आँसुओ से भरी थी। सिद्धार्थ ने गाड़ी स्टार्ट की और तेजी से वहा से निकल गया। जो लड़के उसके साथ आये थे वो भी वहा से चले गए। सुरभि अवनि पर गुस्सा होकर स्टेशन से बाहर चली आयी लेकिन बाद में उसे खुद ही बुरा लगने लगा तो वह अवनि को लेने अंदर चली आयी।
सुरभि ने देखा अवनि कही नहीं है लेकिन जैसे ही उसकी नजर लहूलुहान पृथ्वी पर पड़ी तो वह घबराकर उसके पास आयी और उसे सम्हाला। सुरभि ने देखा पृथ्वी बेहोश हो चुका है और उसे बहुत चोंटे आयी है। उसने कुछ लोगो से मदद मांगी और पृथ्वी को लेकर स्टेशन से बाहर आयी। सुरभि ने लोगो की मदद से पृथ्वी को ऑटो में बैठाया और खुद उसके बगल में आ बैठी। उसने ऑटो वाले से जल्दी हॉस्पिटल चलने को कहा। पृथ्वी बेहोश था अवनि का दुप्पटा उसके हाथ से लिपटा था , सुरभि उसे होश में लाने की कोशिश कर रही थी।
वह कभी उसके गाल थपथपाती , कभी उसकी हथेली को मसलती पर उसे कुछ फायदा नहीं दिखा। सुरभि बहुत ही मजबूत और बहादुर लड़की है जो हर स्तिथि में खुद को सम्हाल लेती है बस इसलिए उसने पृथ्वी को भी सम्हाल लिया और हॉस्पिटल आने का इंतजार करने लगी। पृथ्वी का बहुत खून बह चुका था उस पर सुरभि को साथ ही अवनि की चिंता भी हो रही थी। सुरभि ने अवनि को फोन लगाया उसका फोन बज रहा था लेकिन वह उठा नहीं रही थी और इस बात पर सुरभि और खीज गयी। उसने अपना फोन जेब में रखा और पृथ्वी को फिर से होश में लाने की कोशिश करने लगी।
ऑटो हॉस्पिटल के बाहर आकर रुका सुरभि ऑटोवाले की मदद से पृथ्वी को अंदर लेकर आयी। हॉस्पिटल के स्टाफ ने देखा तो तुरंत पृथ्वी को स्ट्रेक्चर पर लेटाया और इमर्जेन्सी वार्ड की तरफ बढ़ गए। उसका हाथ स्ट्रेक्चर से लटक रहा था और उसी के साथ लटक रहा था अवनि का दुपट्टा भी सुरभि ने अपना सर पकडे जैसे ही जाते हुए पृथ्वी को देखा उसकी नजर दुपट्टे पर पड़ी और एकदम से सुरभि को अवनि की याद आयी।
“ये तो अवनि का दुपट्टा है इसका मतलब कही अवनि के साथ तो कुछ,,,,,,,,!!”,बड़बड़ाते हुए सुरभि हॉस्पिटल से बाहर भागी और उसी ऑटोवाले को वापस स्टेशन चलने को कहा
“अभी जो पेशेंट आया है उसके साथ में कौन है ?”,डॉक्टर ने इमरजेंसी से बाहर आकर कहा
“सर एक लड़की उसे यहा लेकर आयी थी लेकिन वो जल्दी में वापस चली गयी”,रिसेप्शन पर खड़े लड़के ने कहा
“ठीक है ! जैसे ही वो वापस आये मुझे बताना”,डॉक्टर ने कहा और वापस अंदर चले गए।
पृथ्वी को कुछ गहरी चोंटे आयी थी , जिस पैर पर हॉकी मारी गयी थी उसमे फ्रेक्चर था , ललाट पर चोट लगने से 4 टाँके आये थे , चेहरे पर कुछ खरोंचे और , हाथ की कलाई में भी फ्रेक्चर था।
डॉक्टर ने उसका ट्रीटमेंट शुरू किया। पैर और हाथ की कलाई में प्लास्टर बंधा , ललाट पर टाँके लगने के बाद पट्टी , हाथ और चेहरे के जख्मो पर दवा लगायी गयी। हाथ में ड्रिप लगी थी और दूसरे हाथ की ऊँगली में मॉनिटर क्लिप हालाँकि वह अब ठीक था लेकिन बेहोश था। डॉक्टर ने होश में आने के बाद उसे रूम में शिफ्ट करने को कहा और वहा से चले गए।
सुरभि स्टेशन पहुंची और अवनि को ढूंढने लगी , सीढ़ियों से होकर वह ब्रिज से दूसरी तरफ जाने लगी तो वही कोने में पड़ा उसे अवनि का बैग दिखा सुरभि ने जल्दी से अवनि के बैग को उठाया तो देखा उसका फोन बैग में ही है लेकिन अवनि कही नजर नहीं आ रही। अब तो सुरभि को और टेंशन होने लगी। पृथ्वी का इस हालत में मिलना और अवनि का गायब होना उसके मन में एक डर पैदा कर रहा था। सुरभि अवनि का बैग सम्हाले स्टेशन से बाहर चली आयी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे ?
एक तरफ अवनि गायब थी तो दूसरी तरफ पृथ्वी हॉस्पिटल में था। पृथ्वी का ख्याल आते ही सुरभि की चिंता बढ़ गयी लेकिन अवनि को ढूंढना भी जरुरी था। सुरभि की नजर रेलवे पुलिस के ऑफिस पर पड़ी तो वह उनके पास आयी और अवनि के ना मिलने के बारे में उन्हें बताया तो उन्होंने सुरभि से पुलिस स्टेशन जाकर कंप्लेंट करने को कहा। सुरभि भी जानती थी कि 24 घण्टे से पहले पुलिस मिसिंग रिपोर्ट दर्ज नहीं करेगी अब उसके पास दो ही रास्ते थे या तो वह अवनि को खुद ढूंढे या फिर पृथ्वी के पास जाए,,,,,,,,,,,,,!!
सुरभि अपना सर पकड़कर वही फुटपाथ पर बैठ गयी , कुछ देर बाद उसका फोन बजा। सुरभि ने फोन देखा स्क्रीन पर अनिकेत का नाम देखकर सुरभि ने फोन उठाया और उसे अपनी परेशानी के बारे में बताया तो अनिकेत भी परेशान हो गया। अनिकेत उदयपुर में लेक्चरर था और सिरोही में उसकी पहचान के कई लोग थे इसलिए उसने सुरभि से पहले हॉस्पिटल जाने को कहा।
सुरभि उठी और हॉस्पिटल के लिए निकल गयी , रास्तेभर अनिकेत उसके साथ फोन पर रहा और उसे समझाता रहा हिम्मत देता रहा। अनिकेत ने अपनी पहचान के कुछ लोगो से बात करके अवनि का पता लगाने की कोशिश की , खुशकिस्मती से अनिकेत के दोस्त के जीजाजी रेलवे में अधिकारी निकल आये और उनसे कहकर अनिकेत ने कुछ घंटे पहले का CCTV फुटेज देने को कहा जिस से वे देख सके कि अवनि वहा थी या नहीं,,,,,,,,,,!!”
अनिकेत की वजह से सुरभि को थोड़ी तसल्ली मिली और वह हॉस्पिटल पहुंची। अनिकेत ने सुरभि से अपने सिरोही आने की बात कही और तब तक सुरभि को पृथ्वी का ध्यान रखने को कहकर फोन काट दिया। सुरभि रिसेप्शन पर आयी और पृथ्वी के बारे में पूछा तो स्टाफ ने बताया कि पृथ्वी को रूम में शिफ्ट कर दिया है। लड़के ने सुरभि से ट्रीटमेंट फाइल पर साइन करने को कहा।
सुरभि ने सभी जरुरी सिग्नेचर किये और जैसे ही जाने लगी लड़के ने कहा,”मैम ! ये पेशेंट का बैग और सेलफोन,,,,,,,,,,हमने उनके घरवालों को इन्फॉर्म कर दिया है उन्होंने कहा है उन्हें आने में थोड़ा वक्त लग जाएगा”
सुरभि ने सुना तो और परेशान हो गयी , पृथ्वी के घरवाले यहाँ आएंगे और पृथ्वी को इस हालत में देखकर कही वे लोग अवनि को गलत ना समझ ले। सुरभि ने फोन और बैग लिया और पृथ्वी से मिलने चली गयी।
हैरान परेशान सी सुरभि कमरे के बाहर आकर रुक गयी। उसकी कमरे में जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी। वह कमरे के बाहर पड़ी बेंच पर आ बैठी , उसकी आँखों के सामने कुछ देर पहले के पल चलने लगे जब वह पृथ्वी से मिली थी। पृथ्वी कितना खुश था और अवनि भी कही न कही पृथ्वी के साथ सहज थी और अचानक ऐसा कुछ हो जाएगा सुरभि ने नहीं सोचा था।
उसने अपने हाथो को बांधा और अपना ललाट उस पर टिका लिया , उसे अब बस अनिकेत का इंतजार था क्योकि सिर्फ वही था जो इन सब में सुरभि की मदद कर सकता था। अवनि के घरवालों को कुछ भी बताकर सुरभि चीजों को और उलझाना नहीं चाहती थी।
सिद्धार्थ अवनि को लेकर शहर से बाहर एक खाली जगह पर आया। रास्तेभर अवनि डरी सहमी आँखों में आँसू लिए बैठी रही। उसके हाथ काँप रहे थे और आँखों से आँसू बह रहे थे। आँखों के सामने लहूलुहान पृथ्वी आ रहा था। सिद्धार्थ ने गाड़ी रोकी , अपना सीट बेल्ट हटाया और दरवाजा खोलकर गाड़ी से नीचे उतर गया। वह गुस्से से अवनि की तरफ आया , दरवाजा खोला और उसकी बाँह पकड़कर उसे बाहर निकाला और सामने धकेलकर गाड़ी का दरवाजा जोर से बंद कर दिया। ये देखकर अवनि और ज्यादा डर गयी।
सिद्धार्थ का ये रूप अवनि पहले भी देख चुकी थी लेकिन आज सिद्धार्थ पहले से बद्दर और खौफनाक नजर आ रहा था।
सिद्धार्थ गुस्से से अवनि के सामने यहाँ से वहा चक्कर काटने लगा और फिर अपना हाथ जोर से गाडी के बोनट पर मारा और चिल्लाया,”क्यों किया तुमने मेरे साथ ऐसा ? मेरे होते हुए तुम किसी और के साथ कैसे जा सकती हो , जवाब दो मुझे अवनि”
सिद्धार्थ को इतने गुस्से में देखकर अवनि ने अपने कानों को दोनों हाथो से ढक लिया और सर झुकाकर रोने लगी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि इस वक्त वह क्या करे ? आस पास कोई नहीं था जिस से अवनि मदद माँगे , वह भागना भी चाहती तो नहीं भाग पाती ना ही वह सिद्धार्थ का सामना कर पाती क्योंकी इस वक्त सिद्धार्थ गुस्से में किसी जानवर से कम नजर नहीं आ रहा था।
अवनि को रोते देखकर सिद्धार्थ उसके पास आया , उसने गुस्से से अवनि की बाँहो को थामा और कहा,”मैं तुम से कुछ पूछ रहा हूँ अवनि , कब से चल रहा है ये सब हां ? कब से गुलछर्रे उड़ा रही हो तुम उसके साथ ? इसलिए तुम मेरा फोन नहीं उठाती थी , मेरे मैसेज का जवाब नहीं देती थी क्योकि तुम्हारी जरूरत पूरी करने वाला कोई और मिल गया है तुम्हे,,,,,,,,,!!!”
“ऐसा कुछ नहीं है सिद्धार्थ , उसने कुछ नहीं किया है , उसकी कोई गलती नहीं है,,,,,,,,,,,,मुझे जाने दो , मुझे जाने दो वो वह जख्मी है उसे कुछ हो जाएगा , प्लीज मुझे जाने दो,,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने रोते हुए कहा
“कुछ कैसे नहीं है अवनि ? मैंने खुद देखा है उसे तुम्हे झुमके पहनाते हुए,,,,,,,,,,,इतना काफी नहीं है , और क्या क्या हक़ दिए है तुमने उसे ? तुम तुम सोई हो उसके साथ ?”,सिद्धार्थ गुस्से में अपनी हदें भूल चुका था , उसके दिमाग की गंदगी अब शब्द बनकर मुँह से बाहर आ रही थी
“सिद्धार्थ,,,,,,,!!”, सिद्धार्थ के मुँह से ऐसी बात सुनकर अवनि ने गुस्से और तकलीफ भरे स्वर में कहा
“तो फिर तुम्हे उसके लिए इतनी तकलीफ क्यों हो रही है ? क्या लगता है वो तुम्हारा ? नया आशिक़ है तुम्हारा , सच्चा प्यार करने लगी हो उस से ? अवनि भूलो मत तुम सिर्फ मुझसे प्यार करती हो और सिर्फ मेरी हो मैं तुम्हे किसी और का होने नहीं दूंगा समझी तुम”,सिद्धार्थ ने गुस्से से कहा और ऐसा करते हुए उसके हाथो की पकड़ अवनि की नाजुक बाँहो पर और मजबूत हो गयी। दर्द से अवनि रो पड़ी और रोते हुए कहा,”प्लीज मुझे जाने दो सिद्धार्थ , प्लीज जाने दो मुझे”
सिद्धार्थ ने अवनि को छोड़ा और गुस्से से चिल्लाकर कहा,”अरे तुम्हे जाने दिया तभी तो तुमने मुझे धोखा दे दिया , मुझसे प्यार का नाटक किया , मेरे लिए परवाह दिखाई और जब कोई नया मिल गया तो तुम उसके साथ चली गयी। क्या नहीं किया मैंने तुम्हारे लिए अवनि ? हमेशा तुम्हे बेहतर देने की कोशिश की , हमेशा तुम्हारे साथ खड़ा रहा , हाँ मानता हूँ बीच में मैं तुम्हे वक्त नहीं दे पाया लेकिन इसका मतलब ये नहीं था अवनि कि मैं तुमसे प्यार नहीं करता था। अरे शादी करना चाहता था तुमसे , घर बसाना चाहता था तुम्हारे साथ ,
फॅमिली बनाना चाहता था लेकिन तुमने , तुमने मेरी एक छोटी सी गलती पर मुझसे दूरी बना ली और इतनी जल्दी तुम्हे किसी नए मर्द से प्यार भी हो गया। तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकती हो अवनि ? तुम्हे ज़रा भी शर्म नहीं आयी ये करते हुए और वो लड़का उसे तो मैं जान से मार दूंगा,,,,,,,,,उसकी हिम्मत कैसे हुई तुम्हारे करीब आने की ? तुम अभी मुझे जानती नहीं हो अवनि , तुमने सिर्फ मेरा प्यार देखा है मेरी केयर देखी है मेरा गुस्सा और जिद नहीं , जो मेरा है उसे मैं किसी भी कीमत पर हासिल करके रहता हूँ। तुम सिर्फ मेरी हो अवनि सिर्फ मेरी,,,,,,,,,!!”
सिद्धार्थ क्या कह रहा था अवनि को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था उसकी आँखों के सामने बस लहूलुहान पृथ्वी का मुस्कुराता चेहरा आ रहा था। जब अवनि रोते हुए सिद्धार्थ से उसे छोड़ देने को कह रही थी और लड़के उसे मार रहे थे लेकिन उस वक्त पृथ्वी के चेहरे पर मार का दर्द नहीं बल्कि मुस्कान थी। सिद्धार्थ ने देखा अवनि खामोश है तो वह उसके पास आया और उसकी बाँह पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचा जिस से सिद्धार्थ के नाख़ून अवनि की बाँह को नोच बैठे और एक साँस के साथ ही अवनि की आह निकली ,
सिद्धार्थ ने गुस्से से अवनि की आँखों में देखा और कहा,”आइंदा से अगर मैंने उस लड़के को तुम्हारे आस पास भी देखा तो जान से मार दूंगा उसे,,,,,,,,तुम्हारा आशिक़ है ना वो , बहुत प्यार करता है तुमसे तो कान खोलकर सुन लो अवनि बहुत जल्द शादी करूंगा मैं तुमसे वो भी उसके सामने और उस वक्त जो तकलीफ उसे होगी , तुम उसका अंदाजा भी नहीं लगा सकती , उसकी आँखों के सामने मैं तुम्हे अपना बनाऊंगा , जब जिंदगी भर तुम्हे ना पाने की आग में जलेगा तब मुझे राहत मिलेगी”
“मुझे जाने दो सिद्धार्थ , मुझे जाने दो प्लीज वो मर जाएगा”,अवनि ने रोते हुए कहा उसे अभी भी पृथ्वी की परवाह हो रही थी। अवनि को बार बार पृथ्वी की परवाह करते देखकर सिद्धार्थ ने गुस्से से पीछे हटकर कहा,”अरे मरता है तो मर जाए”
अवनि अब तक सिद्धार्थ की हर बात सुनती रही लेकिन जैसे ही उसके मुँह से उसने पृथ्वी के मर जाने की बात सुनी ना जाने कहा से उसमे इतनी हिम्मत आ गयी कि उसने गुस्से से सिद्धार्थ को देखा और खींचकर एक तमाचा उसके गाल पर रसीद कर दिया।
उस तमाचे की गूंज इतनी जोर की थी कि पलभर के लिए सिद्धार्थ भी हक्का बक्का रह गया। अवनि ने जलती आँखों से सिद्धार्थ को देखा और कहा,”एक शब्द और कहा ना तुमने तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा सिद्धार्थ,,,,,,,,,,!!”
“तुमने मुझ पर हाथ उठाया,,,,,,,,,,वो भी उस दो कौड़ी के लड़के के लिए,,,,तुम्हे तो मैं”,कहते हुए सिद्धार्थ जैसे ही अवनि की तरफ अवनि ने जोरदार धक्का उसे मारा और सिद्धार्थ नीचे जा गिरा। अवनि को हिम्मत से काम लेना था इसलिए उसने सिद्धार्थ की गाडी की चाबी निकाली और लेकर वह तुरंत वहा से मदद की उम्मीद में सड़क किनारे चली आयी।
अवनि ने पलटकर देखा सिद्धार्थ नीचे गिरा था उसके पैर में शायद मोच आ गयी थी इसलिए वह ठीक से खड़ा नहीं हो पा रहा था। घबराई हुई अवनि ने इधर उधर देखा , पसीने से लथपथ , चेहरा आँसुओ से भरा हुआ और उखड़ी सांसो के साथ अवनि बार बार मदद की आस में इधर उधर देख रही थी कि तभी उसे सामने से एक बाइक आती दिखाई अवनि ने उसे रोका और मदद मांगी तो लड़के ने अवनि की हालत देखकर उसे पीछे बैठने को कहा और वहा से निकल गया।
अवनि को घबराया देखकर लड़के ने उस से कुछ नहीं पूछा और घंटेभर बाद अवनि स्टेशन पहुंची , वह बाइक से उतरकर अंदर भागी और उस जगह आयी जहा सिद्धार्थ और उसके लड़को ने पृथ्वी को मारा था। अवनि वहा पहुंची तो देखा कि पृथ्वी वहा नहीं है , बदहवास हालत में अवनि ने इधर उधर देखा लेकिन पृथ्वी उसे कही नजर नहीं आया। अवनि को लेकर जो लड़का आया था वह भी उसके पीछे अंदर चला आया उसने अवनि को परेशान देखा तो उसके पास आए और उसे रोककर कहा,”सुनिए ! पहले आप शांत हो जाईये और ये पानी पीजिये”
पानी देखकर अवनि ने महसूस किया कि उसका गला सूखा है और होंठ भी सूख चुके है उसने दो घूंठ पानी पीया और घबराहटभरे स्वर में लड़के से कहा,”क्या मुझे आपका फोन मिल सकता है प्लीज ? मुझे एक जरुरी कॉल करना है”
“हाँ लीजिये”,लड़के ने अपना फोन निकालकर अवनि को दिया
अवनि ने काँपते हाथो से सुरभि का नंबर डॉयल किया , दो रिंग के बाद ही सुरभि ने फोन उठाया और कहा,”हेलो कौन ?”
सुरभि की आवाज सुनकर अवनि रोने लगी वह कुछ बोल ही नहीं पायी , सुरभि ने जब अनजान नंबर पर अवनि की आवाज सुनी तो घबराकर कहा,”हेलो अवनि ! अवनि तुम कहा हो ? हेलो हेलो अवनि , तुम तुम मुझे सुन रही हो न , मुझे बताओ तुम कहा”
लड़के ने देखा अवनि बस रोये जा रही है और कुछ बोल नहीं पा रही तो उसने अवनि के हाथ से फोन लिया और कहा,”अह्ह्ह हेलो ! हाय देखिये ये मैडम मेरे साथ है मुझे शहर के बाहर सड़क पर मिली थी , काफी घबराई हुई है और ठीक से बता भी नहीं पा रही है कि इनके साथ क्या हुआ है ? क्या आप यहाँ आ सकती है ?”
“ये दवाईया अर्जेन्ट में चाहिए , यहाँ नहीं मिलेगी बाहर मेडिकल से लेनी पड़ेगी”,नर्स ने पेपर सुरभि की तरफ बढाकर कहा तो सुरभि उलझन में पड़ गयी। वह पृथ्वी के लिए दवा लेकर आये या अवनि के पास जाए उसे कुछ समझ नहीं आया तभी उसके कानो में
लड़के की आवाज पड़ी,”हेलो ! आप सुन रही है ना ?”
“हेलो ! हाँ मैं सुन रही हूँ , आप प्लीज मेरी एक मदद करेंगे , क्या आप इन्हे लेकर सिटी हॉस्पिटल आ सकते है प्लीज , मैं वहा नहीं आ सकती प्लीज प्लीज प्लीज इतना कर दीजिये,,,,,,,,,,,,मैं आपका ये अहसान जिंदगीभर नहीं भूलूंगी”,सुरभि ने रिक्वेस्ट करते हुए कहा
“अह्ह्ह ठीक है आप परेशान मत होईये मैं इन्हे लेकर आता हूँ”,लड़के ने सुरभि की परेशानी समझते हुए कहा
“Thankyou , Thankyou so much,,,,,,,,!!”,सुरभि ने कहा और फोन काटकर पृथ्वी के लिए दवा लेने हॉस्पिटल से बाहर चली गयी।
लड़के ने अवनि को शांत करवाया और उसे लेकर हॉस्पिटल के लिए निकल गया। आधे घंटे बाद बाइक हॉस्पिटल के बाहर आकर रुकी , लड़का अवनि को लेकर अंदर आया। अवनि अपने आँसू पोछते हुए जल्दी जल्दी अंदर चली आयी और रिसेप्शन पर आकर पृथ्वी के बारे में पूछा तो लड़के ने उन्हें 1st फ्लोर पर रूम नंबर बता दिया। लड़का अवनि को छोड़ने ऊपर तक आया , कमरे के बाहर बैठी सुरभि ने जब अवनि को इस हालत में देखा तो घबराकर उसके पास आयी वह अवनि से कुछ पूछती इस से पहले अवनि सुरभि के गले आ लगी और रोने लगी।
अवनि को ऐसे रोते देखकर सुरभि की आँखों में भी आँसू भर आये। उसने अवनि को सम्हाला और उसे बेंच पर बैठाकर लड़के के पास आयी। लड़का बेचारा बस सारी स्तिथि समझने की कोशिश कर रहा था।
“थैंक्यू सो मच,,,,,,,,!!”,सुरभि ने लड़के के सामने आकर कहा
“its ok , i hope सब ठीक है , ये मैडम काफी घबराई हुई थी”,लड़के ने कहा
“हमारे एक फ्रेंड का एक्सीडेंट हो गया है उसने अचानक सुना तो घबरा गयी,,,,,,,,मदद के लिए थैंक्यू”,सुरभि ने झूठ बोल दिया ताकि किसी तरह की परेशानी ना हो।
“Be Strong मैं चलता हूँ , उनका ख्याल रखिये”,कहकर लड़का वहा से चला गया।
लड़के के जाने के बाद सुरभि अवनि के पास आयी तो अवनि उसे देखकर फिर रो पड़ी और इस बार सुरभि की आँखों से भी आँसू बह गए।
( क्या सिद्धार्थ लेगा अवनि से अपने थप्पड़ का बदला ? क्या यहाँ से मुश्किल होने वाली है पृथ्वी और अवनि की जिंदगी ? पृथ्वी को इस हाल में देखकर क्या होगा पृथ्वी के घरवालों का रिएक्शन ? जानने के लिए पढ़ते रहे “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Nice chapter
Yr yeh Siddharth kitna gira hua, neech, characterless aur avval darje ka badmash aadmi hai…jitni bhi galiyaan hai wo uske liye kam hai.. achcha hua jo waqt se phele hee nandini se iska peecha choott gaya…kitne gande tareeke se yeh baat kar rha hai Avni se ..kitni baat krne ki kya, thik se khade hone ki halat m nhi hai…aur badtameez aur badzuban aadmi ese jahilo ki tarah se Avni pe chilla rha hai…isne to Avni ko apni property maan liya hai.. tabhi to bol rha hai ki wo sirf uski hai…wo hee usse shadi karenga…aur Prithvi ko maar dega… himmat to dekho iss badtameez insaan ki .. achcha kiya jo Avni ne isko chatha mata aur dhakk dekar chal padi apne Prithvi k pass…kash yeh sab Avni ne phele kiya hota ..khar dee aaye durust aaye… Siddharth to ab Avni ko bhi nhi chodne wala hai… Prithvi aur Avni dono ki ek sath lanka lagane ki soch rha hai… thank god ki Surbhi wapas station aai aur Prithvi ko hospital m admit karwaya…but hospital walo ne Prithvi k ghar walo ko call kar diya hai…dekhte hai kya hota hai… Avni ko Prithvi ko iss halat m dekhne k baad or pagal ho jayegi ..aur khud ko Prithvi ka doshi maanegi…but Avni ki help krne wala kon ladka hai?
Avni ki help krne wala ladka kon hain?? Kahi woh prithvi ka bhai toh nhi hai ?
Next chapter pls upload kr dijiye