Pasandida Aurat – 74

Pasandida Aurat – 74

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

सुरभि ने जब अवनि को पृथ्वी के आने के बारे में बताया तो अवनि परेशान हो गयी। वह पृथ्वी को अच्छा दोस्त मानती थी लेकिन ना जाने क्यों उस से मिलने से डरती थी। अवनि नहीं चाहती थी सिद्धार्थ की तरह फिर कोई और उसकी भावनाओ का मजाक बनाये या उसका दिल तोड़े। अवनि सुरभि को मारने के लिए पुरे घर में उसके पीछे दौड़ रही थी क्योकि सुरभि ने अवनि और पृथ्वी की चैट जो पढ़ ली। भागते भागते सुरभि थक गयी इसलिए बालकनी में आकर अपने दोनों हाथो को ऊपर उठाया और कहा,”टाइम प्लीज”

सुरभि रुक गयी और हाँफते हुए कहा,”ये तुमने ठीक नहीं किया सुरभि , मैं तुम से कुछ नहीं छुपाती इसका मतलब ये नहीं तुम उसे यहाँ आने के लिए बोल दो,,,,,,,उसने On The Way लिखा है मैं उसे वापस जाने के लिए भी नहीं कह सकती , तुमने मुझे अच्छा फंसाया है सुरभि”
“अवनि ! इतना मत सोचो , उसे आने दो ताकि तुम उस से मिलो और ये जान सको कि वो तुम्हारे लिए सही है या नहीं,,,,,,,,मिलोगी नहीं तो पता कैसे चलेगा ?”,सुरभि ने बालकनी की रेलिंग से अपनी पीठ लगाकर कहा

“मिलने के बाद भी कहा पता चलता है सुरभि सामने वाले के मन में क्या है ?”,अवनि ने उदास होकर कहा
“अवनि हर लड़का सिद्धार्थ नहीं होता , एक बार भरोसा करके तो देखो क्या पता तुम्हे उस से बेहतर मिल जाए”,सुरभि ने प्यार से कहा

“पर सुरभि,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहना चाहा तो सुरभि ने उसके होंठो को पकड़कर उसका मुँह बंद करके कहा,”बस अब इस बारे में तुम मुझसे कोई बहस नहीं करोगी,,,,,,अंदर चलकर तुम्हारे पहनने के लिए कपडे निकालते है”
“हहहह ?”,अवनि ने हैरानी से कहा क्योकि अब सुरभि क्या करने वाली थी इसका अंदाजा अवनि को नहीं था। सुरभि अवनि का हाथ पकड़कर बालकनी से हॉल और फिर हॉल से कमरे में चली आयी। उसने अवनि को बिस्तर पर बैठाया और खुद कबर्ड खोलकर उसमे कपडे देखने लगी।

“तुम क्या कर रही हो सुरभि ?”,अवनि ने पूछा
“मैं तुम्हारे लिए कपडे निकाल रही हूँ जो तुम्हे कल स्टेशन पहनकर जाने है , उम्मम्मम कुछ ऐसा जिसमे देखकर उसके होश ही उड़ जाए”,सुरभि ने बड़बड़ाते हुए कहा जो अवनि ठीक से सुन नहीं पायी और खामोश बैठकर सुरभि की नौटंकी देखने लगी। अवनि तो मन ही मन पृथ्वी के बारे में सोच रही थी कि जब वह उसके सामने आएगा तो उसका रिएक्शन क्या होगा ? वह पृथ्वी से क्या बात करेगी ?

सुरभि ने बहुत देखने के बाद फुल स्लीवस सफ़ेद रंग का अनारकली सूट निकाला। सूट की बाजू के किनारे पर ऊँन से बहुत ही सुन्दर डिजाइन बनाया हुआ था  
साथ ही पीले और सफ़ेद रंग का दुपट्टा था जो कि बहुत ही प्यारा था। सुरभि ने सूट अवनि के सामने करके कहा,”कल सुबह तुम ये पहनना , और इसके साथ ये वाले झुमके और साथ में काली बिंदी लगाना मत भूलना , ओह्ह्ह्ह वो तो तुम्हे देखकर मर ही जाएगा”

“ये सब करना जरुरी है ?”,अवनि ने सुरभि की तरफ देखकर पूछा
“बहुत जरुरी है , अब तुम किसी से मिलो तो लगना भी तो चाहिए कि तुम एक Writer हो , पर एक प्रॉब्लम है”,कहते कहते सुरभि एकदम से टेंशन में आ गयी
“अब क्या हुआ ?”,अवनि ने पूछा
“तुम्हे तो कल बैंक जाना होगा ना तो फिर तुम पृथ्वी को अपने 12 घंटे कैसे दे पाओगी ?”,सुरभि ने मायूस होकर कहा

“कल संडे है,,,,,,,,,!!”,अवनि ने बिना किसी भाव के कहा
“क्या ? कल संडे है। हाह ! मुझे तो याद ही नहीं रहा कल संडे है , अवनि अब तो तुम्हे मानना ही पडेगा कि महादेव भी चाहते है तुम पृथ्वी से मिलो और उसे अपना वक्त दो”,सुरभि ने ख़ुशी से उछलकर कहा
“अगर महादेव ऐसा चाहते है तो फिर महादेव ने हमे पहले क्यों नहीं मिलाया ?”,अवनि ने कहा
“हो सकता है महादेव ने मिलवाया हो और तुम दोनों का ध्यान ना गया हो”,सुरभि ने सूट उठाकर कुर्सी पर रखा और झुमके ड्रेसिंग टेबल पर  ,

सुरभि की बात सुनकर अवनि की आँखों के सामने अचानक से वो पल आ गया जब उसने अस्सी घाट की गंगा आरती में पृथ्वी को देखा था। वो पल याद आते ही अवनि का दिल धड़क उठा , सुरभि सही कह रही थी अवनि पृथ्वी से पहले मिल चुकी थी फिर चाहे वो मुलाकात 10 सेकेण्ड की ही क्यों ना हो ? सिद्धार्थ से भी अवनि बाद में मिली थी। अवनि मन ही मन खुद से कहने लगी,”ये कैसा अहसास है महादेव ? मैं पृथ्वी से पहले मिल चुकी हूँ वो भी आपकी नगरी में तो फिर सिद्धार्थ मेरी जिंदगी में क्यों आया ? क्या वो मेरे लिए कोई सबक था या फिर आपने उसे मेरी किस्मत में लिखा था,,,,,,,,!!!

अवनि को खोया हुआ देखकर सुरभि उसके पास आयी और उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा,”अच्छा अब इतना मत सोचो और सो जाओ तुम्हे सुबह जल्दी उठना है , वैसे भी रात बहुत हो गयी है वैसे पृथ्वी से मिलने की ख़ुशी में तुम्हारी नींद तो नहीं उडी हुई है ना ?”
सुरभि पृथ्वी के नाम पर अवनि को छेड़ने का एक मौका नहीं छोड़ रही थी। अवनि ने उसकी पीठ पर एक मुक्का मारा और कहा,”मुझसे ज्यादा तो तुम बेक़रार हो जाओ जाकर तुम ही मिल लो”

“अह्ह्ह्ह काश कोई मेरे लिए इतना पागल होता तो मैं जरूर चली जाती,,,,,,,,,,लेकिन वो सिर्फ तुम्हारे लिए पागल है अवनि और मुझे पूरा यकीन है ये लड़का एक दिन तुम्हारे लिए पूरी दुनिया से लड़ जाएगा”,सुरभि ने कहा
“अच्छा इतना भरोसा है तुम्हे उस पर,,,,,,,!”,अवनि ने सुरभि को ताना मार कर कहा
“उम्मम्मम पता नहीं पर मेरे दिल कह रहा है अवनि , कुछ तो बात है इस लड़के में,,,,,,,,कुछ ख़ास”,सुरभि ने खोये हुए स्वर में कहा

अवनि ने सुना तो सुरभि की तरफ देखते हुए मन ही मन,”हाँ तुमने सच कहा सुरभि कुछ तो बात है उसमे मेरे इतनी बार ना कहने के बाद भी वो मुझसे मिलने इतनी दूर चला आ रहा है। उसकी सबसे ख़ास बात ये है कि पृथ्वी वो जोड़ने की कोशिश कर रहा है जो उसने तोडा ही नहीं है और यही बात उसे सबसे अलग बनाती है”
सुरभि ने अवनि से सोने को कहा और खुद भी बिस्तर पर आकर लेट गयी। सुरभि तो कुछ ही देर में सो गयी लेकिन अवनि की आँखों से नींद गायब थी। कुछ घंटो बाद वह पृथ्वी से मिलने वाली थी और उस मुलाकात के बाद क्या होगा अवनि नहीं जानती थी।

इसी कश्मकश में अवनि जागती रही , जब मन बेचैनी से घिरने लगा तो वह चुपचाप उठी और स्टडी टेबल के पास चली आयी। उसने धीरे से कुर्सी खिसकाई और उस पर आ बैठी। अवनि ने टेबल पर रखा लेम्प चालू किया जिसकी मध्यम पीली रौशनी टेबल पर पड़ रही थी। अवनि ने टेबल की दराज खोलकर उसमे से एक खाली खत निकाला और पेन उठाकर उस पर कुछ लिखने लगी। ये खत अवनि पृथ्वी के लिए लिख रही थी और अवनि की तरफ से ये पृथ्वी को दूसरा खत था। अवनि ने उस खत में अपनी भावनाये लिखी और उसे मोड़कर लिफाफे में रख दिया।

लिफाफे पर अवनि ने आज की तारीख लिखी और उसे बंद कर दराज के कोने में पहले खत के साथ लिख दिया। अवनि ने महसूस किया खत लिखने के बाद वह काफी हल्का महसूस कर रही थी।  

जो खाली खत और लिफाफे अवनि ने अब तक अपने “पसंदीदा मर्द” के लिए सम्हाल कर रखे थे उन्हें वह अब पृथ्वी के लिए लिख रही थी जबकि पृथ्वी उसका पसंदीदा मर्द नहीं था फिर अवनि के वो खत पृथ्वी के हिस्से में आये। अवनि ने दराज बंद की और बिस्तर पर चली आयी। उसका मन अब शांत था और कुछ देर बाद उसकी आँख लग गयी।

उदयपुर , एयरपोर्ट
सुबह के 4 बजे फ्लाइट एयरपोर्ट पहुंची , पृथ्वी अपनी पीठ पर बैग टाँगे एयरपोर्ट से बाहर आया। उसने वही नए कपडे पहने थे जो वह बीती शाम ही खरीद कर लाया था और उन कपड़ो में वह बहुत ही मासूम और प्यारा लग रहा था। बिखरे बाल , क्लीनशेव चेहरा , सांवला रंग , उसकी आँखों में नींद नहीं बस अवनि से मिलने का इन्तजार था। पृथ्वी ने देखा एयरपोर्ट के बाहर बस कुछ रिक्शा और गाड़िया खड़ी थी और चारो तरफ सन्नाटा। इस शहर के बारे में वह कुछ नहीं जानता था लेकिन यहाँ आकर उसे लग रहा था जैसे इस शहर से उसका कोई रिश्ता है।

पृथ्वी ने कलाई पर बंधी घडी में समय देखा , एक घंटे बाद उसकी ट्रेन थी और उस रेलवे स्टेशन जाना था इसलिए पृथ्वी ने ऑटो वाले को जगाया और उसे स्टेशन चलने को कहा। ऑटोवाले ने उबासी ली , मुँह धोया और पृथ्वी ऑटो में आ बैठा। ऑटोवाला चल पड़ा। सुबह सुबह यहाँ हलकी ठंड थी , पृथ्वी की आँखों में चमक थी और ख़ुशी उसके चेहरे से झलक रही थी। उसे खुद पर हैरानी हो रही थी कि वह सिर्फ अवनि से मिलने के लिए इतना सब कर रहा था। उसमे ये हिम्मत कहा से आयी पृथ्वी खुद नहीं जानता था पर वो कर रहा था।

सुबह सुबह सड़के खाली होने की वजह से ऑटोवाला भी स्पीड में ऑटो चला रहा था। एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन 25 किलोमीटर दूर था और ऑटोवाले ने ये दूरी आधे घंटे में तय करके पृथ्वी को स्टेशन पहुंचा दिया। पृथ्वी अंदर आया उसने ट्रेन का टिकट पहले ही बुक करवा रखा था जो कि वेटिंग में था। पृथ्वी ने देखा स्टेशन पर कुछ लोग थे जो अपनी ट्रेन का इन्तजार करते हुए ऊंघ रहे थे। कुछ वही स्टेशन पर सो रहे थे। कुछ इक्का दुक्का लोग चाय की दूकान पर खड़े चाय पी रहे थे।

पृथ्वी को उबासी आ रही थी और थकान से उसकी आँखे भी बोझिल हो रही थी इसलिए उसने पहले अपना मुँह धोया और फिर टी-स्टॉल की तरफ चला आया। पृथ्वी जैसे ही दूकान के पास पहुंचा वह खड़ा आदमी अपनी चाय लेकर पलटा और उसके हाथ में पकड़ी चाय पृथ्वी की सफ़ेद टीशर्ट पर आ गिरी और कुछ आदमी के हाथ पर भी गिर गयी।

“अरे माफ़ करना बेटा वो मैंने आपको देखा नहीं , आपके कपडे गंदे हो गए”,आदमी ने कहा जो कि कोई और नहीं बल्कि विश्वास जी ही थे।
पृथ्वी जिसका ध्यान अपनी टीशर्ट पर ना होकर विश्वास जी के हाथ पर था उसने विश्वास जी को साइड किया और अपने हाथ में पकड़ी बोतल खोलकर उसका पानी उनके हाथ पर डालते हुए कहा,”मेरी टीशर्ट छोड़िये सर आपके हाथ पर भी चाय गिर गयी , चाय गर्म थी आपका हाथ जल गया होगा थोड़ा ठंडा पानी डालने से आपको आराम मिलेगा,,,,,,,,,,!!”

विश्वास जी ने हैरानी से पृथ्वी को देखा , अगर पृथ्वी की जगह कोई और होता तो अब तक उन से लड़-झगड़ पड़ता लेकिन पृथ्वी तो उलटा उनकी ही परवाह कर रहा था।

पृथ्वी ने विश्वास जी के हाथ पर गिरी चाय को धोया और फिर अपनी जेब से रूमाल निकालकर उनकी तरफ बढ़ाकर कहा,”लीजिये अपना हाथ पोछ लीजिये”
“थैंक्यू बेटा ! मैंने आप पर चाय गिरा दी और आप मेरी ही हेल्प कर रहे है”,विश्वास जी ने पृथ्वी का दिया रूमाल से लगाकर कहा

“गुस्सा करके भी क्या हो जायेगा अंकल ? एक टीशर्ट ही तो है धूल जाएगी या फिर नयी आ जाएगी”,पृथ्वी ने अपनी टीशर्ट पर गिरी चाय को देखकर कहा जो अपना दाग सफ़ेद टीशर्ट पर छोड़ चुकी थी।
“भैया आपकी चाय”,दुकानवाले ने कहा तो पृथ्वी चायवाले की तरफ आया और उनसे एक के बजाय दो चाय देने को कहा। दो कप चाय लेकर पृथ्वी विश्वास जी की तरफ आया और एक कप उनकी तरफ बढ़ा दिया।
“थैंक्यू बेटा ! आप कही जा रहे है या कही से आ रहे है ?”,विश्वास जी ने पृथ्वी के साथ चलकर बेंच की तरफ आते हुए कहा

“कही से आया हूँ और कही जाना भी है”,पृथ्वी ने कहा
“मतलब ?”,विश्वास जी ने पूछा
“मैं मुंबई से हूँ सर , एक दोस्त से मिलने सिरोही जाना था वहा के लिए डायरेक्ट फ्लाइट नहीं थी इसलिए मुंबई से उदयपुर फ्लाइट और अब उदयपुर से सिरोही बाय ट्रेन जाऊंगा”,पृथ्वी ने कहा तो विश्वास जी ने उसे बेंच पर बैठने का इशारा किया और खुद भी उसके बगल में आ बैठे
“दोस्त इतना ख़ास है कि आप इतनी रात में चले आये , रात के बजाय दिन में सफर आसान रहता”,विश्वास जी ने कहा

“दोस्त बहुत ज्यादा ख़ास है सर इसलिए चला आया , वैसे आप भी कही जा रहे है ?”,पृथ्वी ने चाय पीते हुए पूछा  
“नहीं मैं अपने किसी रिश्तेदार को लेने स्टेशन आया था , उनकी ट्रेन थोड़ी लेट है”,विश्वास जी ने कहा पृथ्वी उन से और बात कर पाता या कुछ पूछ पाता इस से पहले उसकी ट्रेन आ गयी। पृथ्वी उठा चाय का खाली कप डस्टबिन में डाला और विश्वास जी की तरफ हाथ बढाकर कहा,”अच्छा सर मैं चलता हूँ मेरी ट्रेन आ गयी है और भी अगली बार से जरा ध्यान से हर कोई आपसे अपनी सफ़ेद टीशर्ट पर चाय गिरवाना पसंद नहीं करेगा”

विश्वास जी ने सुना तो हँसे और पृथ्वी से हाथ मिलाकर कहा,”हाँ मैं ध्यान रखूंगा”
विश्वास जी से हाथ मिलाकर पृथ्वी को अच्छा लगा उनके हाथ की गर्माहट में अपनेपन का अहसास था। पृथ्वी ट्रेन में चढ़ा और विश्वास जी की तरफ हाथ हिलाकर अंदर चला गया। पृथ्वी नहीं जानता था विश्वास जी अवनि के पापा है हालाँकि उसने अवनि से उसके पापा के बारे में सुना जरूर था लेकिन कभी उन्हें देखा नहीं था।

अंदर आकर पृथ्वी खाली सीट पर बैठ गया। उसके सामने वाली सीट पर एक बुजुर्ग आदमी लेटा था। खिड़की के बाहर देखते हुए पृथ्वी सुबह होने का इंतजार करने लगा। जैसे जैसे वक्त बीत रहा था वैसे वैसे पृथ्वी की धड़कने बढ़ रही थी। रास्तेभर वह बस सोचता रहा कि अवनि से जब मिलेगा तो उस से क्या कहेगा ? कैसे रिएक्ट करेगा ? मुस्कुराहट उसके होंठो से जाने का नाम नहीं ले रही थी। पूरी रात पृथ्वी सोया नहीं था और सफर दो घंटे का था इसलिए उसने अपने हाथो को बांधा और सर पीछे सीट से लगाकर आँखे मूँद और कुछ देर बाद पृथ्वी को नींद आ गयी।

आज सुरभि अवनि से पहले उठ गयी और कुछ जल्दी ही उठ गयी। उसने अवनि को उठाते हुए कहा,”अवनि उठो ! तुम्हे पृथ्वी को पिक करने स्टेशन जाना है, उठो देर हो जाएगी”
पृथ्वी का नाम सुनकर अवनि एकदम से उठी और रात वाली उलझन उसके चेहरे पर फिर नजर आने लगी और उसने सुरभि से कहा,”जाना जरुरी है क्या ?”
“बहुत जरुरी है , अब उठो और नहाकर जल्दी से तैयार हो जाओ मैं तुम्हारे लिए चाय बना देती हूँ”,सुरभि ने उबासी लेकर कहा

अवनि ने देखा सुबह के साढ़े पाँच बज रहे थे। वह उठी , फ्रेश हुई और फिर नहाने चली गयी। अवनि नहाकर आयी तब तक सुरभि उसके और अपने लिए चाय बना चुकी थी। वह चाय लेकर कमरे में चली आयी। अवनि ने वही सफ़ेद सूट पहना था जो बीती रात सुरभि ने उसके लिए निकालकर रखा था। सुरभि ने उसे चाय दी और खुद अपनी चाय लेकर बिस्तर पर आ बैठी।
अवनि ने चाय पी और अपने बालों की चोटी गूंथने लगी लेकिन उलझन और घबराहट में वह उस से सही से बन नहीं रही थी ये देखकर सुरभि उठकर उसके पास आयी और कहा,”लाओ मैं करती हु”

अवनि ने अपने हाथो को नीचे कर लिया और सुरभि उसके लम्बे बालों की चोटी गूंथने लगी। अवनि का मन बेचैन था पहली बार वह किसी से इस तरह मिलने जा रही थी , वो भी ऐसे इंसान से जो अब तक अवनि से न जाने कितनी बार अपने प्यार का इजहार कर चुका था। सुरभि ने अवनि के बालों की चोटी बना दी तो अवनि पलटी। अवनि को खामोश और परेशान देखकर सुरभि ने कहा,”क्या हुआ तुम्हे ? देखो अगर तुम्हे पृथ्वी के साथ अच्छा न लगे या उसके साथ कुछ भी नेगेटिव लगे तो तुम उसी वक्त वापस चली आना”

“हम्म्म्म,,,,,,,,,,!!”,अवनि ने कहा , उसने कानों में छोटे झुमके पहने , आँखों में काजल लगाया , ललाट पर काली बिंदी लगाई और होंठो पर हलकी सी लिपस्टिक लगा ली

अवनि तैयार थी उसने अपना बैग लिया जिसमे अपना फोन , पर्स , कुछ जरुरी सामान रखा और घडी में वक्त देखा तो पाया साढ़े 6 बज रहे है। सुरभि अवनि को छोड़ने दरवाजे तक आयी और उसे भेजकर दरवाजा बंद किया और बिस्तर पर आ गिरी क्योकि उसे अब बहुत तेज नींद आ रही थी पर अगले ही पल उसे कुछ याद आया

वह जल्दी से उठकर मंदिर के सामने आयी और हाथ जोड़कर कहा,”महादेव ! मैंने बहुत विश्वास के साथ अवनि को पृथ्वी से मिलने भेजा है अब कुछ ऐसा चमत्कार करना कि अवनि को भी पृथ्वी के लिए वो महसूस होने लगे जो पृथ्वी उसके लिए महसूस करता है,,,,,!!!”
सुरभि ने महादेव से प्रार्थना की और एक बार फिर बिस्तर पर आ गिरी और इस बार उसे सच में नींद आ गयी।

सुबह के 7 बजे ट्रेन स्टेशन पहुंची ! पृथ्वी की आँख खुली वह उठा और अपना बैग लेकर दरवाजे की तरफ चल पड़ा। मुँह धोने के लिए वह शीशे की तरफ चला आया। मुँह धोकर जैसे ही शीशे में देखा नजर अपनी टीशर्ट पर लगे चाय के दाग पर पड़ी और पृथ्वी के मुँह से निकला,”शिट ! वो मुझे ऐसे देखेगी तो क्या सोचेगी ? ये दाग तो अब पानी से भी नहीं जाएगा और मेरे बैग में दूसरे कपडे भी नहीं है”

पृथ्वी सोच ही रहा था कि ट्रेन ने आगे बढ़ने का सिग्नल दिया और धीरे धीरे आगे बढ़ने लगी। पृथ्वी ट्रेन से नीचे उतर गया और अपनी टीशर्ट के दाग को देखते हुए आगे बढ़ गया चलते चलते उसने सामने देखा और उसके कदम रुक गए। सामने कुछ ही दूर अवनि खड़ी थी जो कि ट्रेन को जाते हुए देख रही थी। सफ़ेद रंग के अनारकली सूट में अवनि इस वक्त उसे दुनिया की सबसे खूसबूरत लड़की नजर आ रही थी और जैसे ही अवनि पृथ्वी की तरफ पलटी पृथ्वी का दिल जोरो से धड़कने लगा। पृथ्वी को आसपास सब धुंधला नजर आने लगा बस एक अवनि साफ दिखाई पड़ रही थी।

सादगी से भरा अवनि का मासूम चेहरा , खाली उदास आँखे , सीधी माँग निकालकर बने बाल , ललाट की वो काली बिंदी और गालों पर झूलते बालों की लटें , पृथ्वी एकटक अवनि को देखे जा रहा था। उसे ये सब सपने जैसा लग रहा था। वह अपनी टीशर्ट का दाग भी भूल गया। अवनि ने पृथ्वी को देखा और उसकी तरफ चली आयी। जैसे जैसे अवनि पृथ्वी के करीब आ रही थी पृथ्वी का दिल उतनी ही जोरो से धड़क रहा था। वह ठीक से साँस भी नहीं ले पा रहा था बस अवनि को देख रहा था। अवनि पृथ्वी के सामने आकर रुकी और अपना हाथ उसकी तरफ बढाकर कहा,”हाय”  

पृथ्वी ने भी अपना हाथ अवनि की तरफ बढ़ा दिया , अवनि ने देखा पृथ्वी का हाथ बुरी तरह से काँप रहा है। उसकी नजर पृथ्वी के गले की उभरी हुई हड्डी पर पड़ी तो अवनि ने महसूस किया कि पृथ्वी बहुत नर्वस है। वह थोड़ा सा आगे बढ़ी और ना चाहते हुए भी उसने अपना हाथ पृथ्वी के सीने पर रख दिया पृथ्वी के होंठो से एक आह निकली जो कि गहरे साँस के साथ थी। अवनि ने महसूस किया कि पृथ्वी का दिल बहुत तेज धड़क रहा था इतना तेज कि लगा जैसे बाहर आ गिरेगा।

अवनि ने पृथ्वी की तरफ देखा और कहा,”तुम्हारा दिल इतना तेज क्यों धड़क रहा है ?”
पृथ्वी के पास अवनि के इस सवाल का कोई जवाब नहीं था वह बस ख़ामोशी से अवनि को देखता रहा और कुछ बोल ही नहीं पाया,,,,,,,,,,,,!!!”

( क्या पृथ्वी जान पायेगा उस पर चाय गिराने वाला आदमी कोई और नहीं बल्कि अवनि के पापा थे ? क्या महादेव जगायेंगे अवनि के दिल में पृथ्वी के लिए अहसास ? क्या अवनि को देखने के बाद पृथ्वी का रिएक्शन इस से भी बेहतर हो सकता था ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal
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Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

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