Pasandida Aurat – 69

Pasandida Aurat – 69

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal

आनन्दा निलय अपार्टमेंट , मुंबई
अपने कमरे में खड़ा पृथ्वी हाथ में पकड़ी अवनि की पायल को एकटक देखे जा रहा था। इस वक्त उसका दिल इतना तेज धड़क रहा था जैसे बाहर आ गिरेगा , आँखों से ख़ुशी झलक रही थी और होंठो पर प्यारी सी मुस्कान थी। पृथ्वी को याद आया जब वह नकुल के साथ “काशी विश्वनाथ मंदिर” के आँगन में हाथ जोड़े खड़ा था तब उसके बगल से गुजरते हुए किसी ने उसके हाथो में फूल रखा था और जब पृथ्वी ने पलटकर देखा तो वह शख्स भीड़ में गायब हो गया और तब पृथ्वी को मिली थी ये चाँदी की पायल !

पृथ्वी को अहसास हुआ कि उसके हाथो में फूल रखने वाली कोई और नहीं बल्कि अवनि थी। इसका मतलब पृथ्वी के मुँह से निकली बात सच थी , अवनि को उसकी जिंदगी में महादेव ने खुद लिखा था। अवनि से उसका मिलना इत्तेफाक नहीं था। कुछ भी इत्तेफाक नहीं था , उसका गोआ के बजाय बनारस जाना , अस्सी घाट की आरती में अवनि को देखना , काशी विश्वनाथ मंदिर में अवनि का उसे फूल देना , इतनी भीड़ में अवनि की पायल का उसे मिलना , उसका अवनि की लिखी किताब पढ़ना ,

उसके बारे में जानना , उस से बात करना सब पहले से तय था। पृथ्वी ने उस पायल को अपने होंठो से छू लिया। अवनि से बात करने के बाद आज पहली बार उसकी आँखों में ख़ुशी के आँसू थे। पृथ्वी उस पायल को हाथ में लिए बिस्तर पर आ बैठा , वह अवनि को वापस फोन करना ही भूल गया। पृथ्वी मुस्कुराते हुए उस पायल को देख रहा था , अवनि को लेकर देखे गए सपने उसे अब सच नजर आ रहे थे। अब तो अवनि को लेकर उसकी भावनाये और मजबूत हो चुकी थी और पृथ्वी ने फैसला किया कि अब वह पीछे नहीं हटेगा।

उसने पायल को वापस उस गुलाबी कागज में रखा और दराज के कोने में रखकर अलमारी बंद कर दी। पृथ्वी बिस्तर की तरफ आया और अपना फोन उठाया तो देखा नकुल का मैसेज आया हुआ था
“तेरी बिल्डिंग के नीचे खड़ा हूँ , आकर डिब्बा ले ले”
पृथ्वी को याद आया कि आज दोपहर में उसने नकुल को डांट दिया था। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और वह उसे सॉरी बोलने अपने अपार्टमेंट से बाहर चला आया। अपार्टमेंट के सामने वाली फुटपाथ पर नकुल हाथ में डिब्बा थामे खड़ा था।

पृथ्वी नकुल के सामने आया और मुस्कुराया लेकिन नकुल ने कोई प्रतिक्रया नहीं दी और हाथ में पकड़ा डिब्बा पृथ्वी की तरफ बढ़ाते हुए कहा,”घर में आज गाजर का हलवा बना था इसलिए तेरे लिए ले आया”
पृथ्वी ने देखा गुस्सा होने के बाद भी नकुल उसके लिए हलवा लेकर आया है तो पृथ्वी ने आगे बढ़कर नकुल को गले लगाया और कहा,”सॉरी यार ! उस वक्त थोड़ा परेशान था इसलिए गुस्सा कर दिया तुझ पर,,,,,,,,,,,,!!”

“हाँ मैडम जी की वजह से मूड ऑफ होगा तेरा”,नकुल ने कहा
पृथ्वी नकुल से दूर हटा और हैरानी से कहा,”तुझे कैसे पता ?”
“और तो कौन हो सकता है तेरी जिंदगी में जो तेरा मूड ऑफ करने की जुर्रत रखे , ये जो तेरे अंदर बदलाव है वो राजस्थान वाली की वजह से ही है। अभी तो मैच खेलना छोड़ा है , आगे आगे देख क्या क्या छोड़ना पड़ता है,,,,,,,,,,!!”,नकुल ने पृथ्वी को ताना मारते हुए कहा

“कुछ नहीं छोड़ना पडेगा,,,,,,,,मैं हमेशा ऐसा ही रहूंगा समझा , चम्मच नहीं लाया तू , चल छोड़ हाथ से ही खा लेता हूँ”,नकुल के साथ चलते हुए पृथ्वी ने डिब्बा खोला और खुशबु लेते हुए कहा,”अह्हह्ह्ह्ह ! आंटी के हाथ से बना गाजर का हलवा मेरा फेवरेट है”
“अपने फ्लेट पर जाकर आराम से खा ना,,,,,,,,,,!!”,नकुल ने कहा लेकिन तब तक पृथ्वी दो निवाले खा चुका था और कहा,”चलता है , वैसे भी फ्लेट पर बात करने के लिए तू नहीं होगा न”

“वाह वाह वाह बेटा अब बड़ा प्यार आ रहा है तुझे , वो लड़की ने ना पूरी तरह बदल दिया है तुझे,,,,,,,!!”,नकुल ने कहा
“यार तू उस से इतना चिढ़ता क्यों है ? वो अच्छी लड़की है , इन्फेक्ट बहुत अच्छी लड़की है,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने कहा कहा
“मैं उस से नहीं चिढ़ता , मैं बस डरता हूँ तुझे लेकर ,, आज से पहले मैंने तुझे इतना खुश पहले कभी नहीं देखा है। डर लगता है कही उसकी वजह से तेरी जिंदगी में,,,,,,,,,,,,,,!!”,नकुल कहते कहते रुक गया

पृथ्वी ने चलते चलते रुका और नकुल की तरफ देखकर कहा,”तू यही कहना चाहता है ना कि अगर वो मुझे नहीं मिली तो मेरा क्या होगा ?”
“हम्म्म,,,,,,,,,,!!”,नकुल ने कहा
पृथ्वी मुस्कुराया और कहा,”मैंने फैसला कर लिया है कि मैं उस से शादी करने वाला हूँ,,,,,,,,उसे बहुत पहले ही मेरी किस्मत में लिखा जा चुका है , बस वो मुझे थोड़ी देर से मिली और अब मैं उसे कही जाने नहीं दूंगा”
कहकर पृथ्वी वही फुटपाथ के पास बने डिवाइडर पर आ बैठा और अपना हलवा खाने लगा। नकुल भी आकर उसके बगल में बैठा और कहा,”तो क्या अब तू उसके लिए 800 किलोमीटर दूर जायेगा ?”

“800 क्या उसके लिए अगर मुझे 8000 किलोमीटर दूर भी जाना पड़ा तो मैं जाऊंगा यार,,,,,,,,,,मर्द अपनी पसंदीदा औरत के लिए कुछ भी कर सकता है ये तो फिर भी 800 किलोमीटर का सफर है”,पृथ्वी ने अवनि के बारे में सोचकर मुस्कुराते हुए कहा

“पसंदीदा औरत ?”,नकुल ने हैरानी से कहा क्योकि ये नाम वह पहली बार सुन रहा था
पृथ्वी मुस्कुराया और सामने देखते हुए कहने लगा,”हाँ “पसंदीदा औरत” , जिसके लिए मर्द कुछ भी करने को तैयार हो जाए। वो जब बात करती है दिल करता है बस उसे सुनता रहू , गुस्से में आकर जब वाहियात कहती है तब भी उतनी ही प्यारी लगती है जितनी प्यार से मिस्टर उपाध्याय कहते हुए लगती है। हंसती है तो ऐसे लगता है जैसे दुनिया में इस से ज्यादा खूबसूरत कुछ भी नहीं है।

जब उसकी आँखों में आँसू देखता हूँ तो ऐसा लगता है जैसे किसी ने हजारों खंजर सीने में एक साथ भौंक दिए हो। खूबसूरत इतनी है कि मैं उसके सामने कुछ भी नहीं और सादगी इतनी की बिना श्रृंगार के भी उतनी ही खूबसूरत लगे। उसे उदास देखता हूँ तो दिल करता है संसार की हर ख़ुशी उसके कदमो में लाकर रख दू , कुछ ऐसा कर दू जिस से बस वो मुस्कुरा दे। वो बस एक बार हाँ कह दे तो मैं अभी सब छोड़ के उसके पास चला जाऊ पर जानता है इन सब में तकलीफ देह बात क्या है ?”

“क्या ?”,नकुल ने पूछा
“वो हाँ नहीं कहती यार , अब तक 46 बार उसके सामने अपनी फीलिंग्स शेयर कर चुका हूँ और वो हर बार ना कर देती है पर मैं जानता हूँ वो बस खुद को रोक रही है”,पृथ्वी ने उदास होकर कहा
“और कितनी बार पूछेगा भाई ? अब तक तो तुझे हार मान लेनी चाहिए थी”,नकुल ने कहा
“जब तक वो हाँ नहीं कहती पूछता रहूंगा शायद शादी वाले दिन भी वरमाला उसके गले में डालने से पहले भी कि “अवनि ! मुझसे शादी करोगी ?”,पृथ्वी ने कहा

नकुल ने सूना तो मुस्कुराने लगा था , आज से पहले उसने पृथ्वी को ऐसे कभी नहीं देखा था। रुषाली के साथ उसका 8 साल का रिश्ता था लेकिन पृथ्वी ने कभी रुषाली को लेकर भी उसके सामने ऐसी बातें नहीं की और एक लड़की जो कुछ महीने पहले उसकी जिंदगी में आयी थी पृथ्वी उसके साथ अपनी पूरी जिंदगी बिताने का फैसला कर चुका था। अब तक नकुल इसे पृथ्वी का आकर्षण समझ रहा था पर अब उसे समझ आया कि ये महज आकर्षण नहीं था।

“जिसकी इतनी तारीफ कर रहा है वो दिखती कैसी है ? दिखाना जरा”,नकुल ने कहा
पृथ्वी ने जेब से अपना फोन निकाला और अवनि की तस्वीर उसके सामने कर दी। नकुल ने देखा और कहा,”यार ये तो बहुत सुन्दर दिखती है”
“ए ! भाभी है तेरी,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने अपना फोन नकुल के हाथ से छीनकर कहा बेचारा नकुल ठीक से अवनि की तस्वीर देख भी नहीं पाया था।
“हाँ हाँ मैं कौनसा इसे अपनी गर्लफ्रेंड बना रहा हूँ , पर क्या ये तुझे पसंद करेगी ?”,नकुल ने पृथ्वी को छेड़ते हुए कहा

“क्यों क्या कमी है मुझमे ? अच्छा दिखता हूँ , अच्छी फिजिक है , अच्छी जॉब है , फॅमिली है”,पृथ्वी ने चिढ़कर कहा
“लेकिन यार वो राजस्थान से है”,नकुल ने कहा
“उसकी सबसे खूबसूरत बात ही ये है कि वो राजस्थान से है और इस से भी ज्यादा खूबसूरत बात ये है कि उसे “दाल-बाटी” बनाना आता है। खाने की थाली में जब घी में डूबी बाटी को तोड़ा जाता है फिर उस पर पंचमेल की दाल डालकर उसे हाथ की पाँचो उँगलियों से प्यार से मसलकर एक निवाला बनाया जाता है , मुझे बस उसके हाथ से वो एक निवाला खाना है”,पृथ्वी ने आँखों में चमक और होंठो पर प्यारी सी मुस्कान लाकर कहा

नकुल ने सुना तो मुस्कुरा उठा और कहा,”अगर ऐसा है तो फिर मैं बाप्पा से प्रार्थना करूंगा कि वो तेरी जिंदगी में जरूर आये”
“thankyou बस वो मिल जाये यार , पहली बार किसी के लिए ये सब कर रहा हूँ”,पृथ्वी ने कहा
“अगर ऐसा है तो फिर तुझे मंदिर जाकर भगवान को थैंक्यू बोलना चाहिए”,नकुल ने कहा
“हाह ! उन्हें  थैंक्यू क्यों बोलू ? वैसे भी जो मेरे नसीब में लिखा है उसे मैं भगवान् से क्यों मांगू ?”,पृथ्वी ने कहा

“बेटा कही ऐसा ना हो उन से ही मांगना पड़ जाए,,,,,,,,,,खैर रात बहुत हो चुकी है वहा चलकर पानी पी और फिर चलते है”,नकुल ने सामने वाटर कूलर की तरफ इशारा करके कहा
पृथ्वी उठा और नकुल के साथ वाटर कूलर की तरफ चला आया। उसने पानी पीया और खाली डिब्बा नकुल की तरफ बढाकर दोनों वहा से चले गए। नकुल अपने घर तो पृथ्वी अपने फ्लेट में चला आया। आज वह बहुत खुश था उसने अवनि को मैसेज करने का सोचा लेकिन रात बहुत हो गयी थी और अवनि सो गयी होगी सोचकर पृथ्वी भी सोने चला गया।

अगली सुबह अवनि तैयार होकर बैंक चली गयी। आज अवनि के चेहरे पर अलग ही ख़ुशी और चमक थी और ये दोनों थे सुरभि के आने की ख़ुशी में। सुरभि दोपहर की ट्रेन से आने वाली थी इसलिए अवनि ने अपने मैनेजर से कहकर दोपहर बाद की छुट्टी भी ले ली। लंच के बाद वह अपना काम खत्म कर ही रही थी कि उसे पृथ्वी का मैसेज मिला , अवनि ने कुछ देर पृथ्वी से बात की और फिर पृथ्वी ने लिखकर भेजा “घरवाले चाहते है मैं शादी कर लू”
– तो तुम्हे कर लेनी चाहिए

“आप हाँ कर दो मैं कल ही कर लूंगा”
– मेरी तरफ से ना है
“क्या ये ना कभी हाँ नहीं हो सकती ?”
– इस जिंदगी में तो कभी नहीं होगी
“आप इतनी कठोर क्यों है मैडम जी ?”
– मैं ऐसी ही हु

“पर आप कभी तो शादी करेंगी ना , मुझसे ना सही किसी न किसी से तो करेगी ना”
– हाँ घरवालों की ख़ुशी के लिए करनी ही पड़ेगी
“जब घरवालों की पसंद से करनी है तो मुझसे कर लीजिये”
– वो नहीं मानेंगे और उनसे पहले मैं नहीं मानूंगी
“उन्हें मैं मना लूंगा , मुझसे मिलने के बाद आपके घरवाले कभी ना कह ही नहीं सकते”
– इतना भरोसा है तुम्हे खुद पर

“मैंने अपनी जिंदगी में एक ही चीज सीखी है “Never Give Up” और इतनी जल्दी हार मानने वाला नहीं हूँ मैं”
– अच्छा तो फिर एक काम करो अभी 2025 चल रहा है अप्रैल 2027 तक मेरा इंतजार करो , जब मुझे लगेगा मुझे शादी करनी चाहिए तो मैं घरवालों को तुम्हारा बायोडाटा दे दूंगी , तब तक के लिए मुझे परेशान मत करो
“क्या यार मैडम जी 2027 में तो अभी ढाई बाकी है , मैंने तो सोचा था इस साल शादी करके आपको मुंबई ले आऊंगा , हम साथ साथ रहेंगे , घूमने जायेंगे , 2026 में हमारा एक प्यारा सा बच्चा होगा,,,,,अपना घर होगा और हम तीनो ख़ुशी ख़ुशी उसमे रहेंगे”

अवनि ने पृथ्वी का मैसेज पढ़ा तो उसे ना जाने क्यों बुरा लग गया , ये सपने सिद्धार्थ उसे पहले भी दिखा चुका था और अब पृथ्वी दिखाने की बात कर रहा था।  
– इनफ इज इनफ पृथ्वी ! तुम मेरे बारे में ये सब सोचना बंद करो , समझे तुम और क्या बच्चे हाँ,,,,,,,,,,,मजाक का मतलब ये नहीं है कि तुम कुछ भी बोल दो”
पृथ्वी ने बस जो दिल में आया वो लिखकर भेज दिया उसने इतना नहीं सोचा था कि अवनि इसे गलत ले लेगी।

उसने अनजाने में अवनि को हर्ट कर दिया और लिखकर भेजा “आई ऍम सॉरी ! मेरा वो मतलब नहीं था”
अवनि ने इसके बाद पृथ्वी को कोई जवाब नहीं दिया। पृथ्वी की भी अवनि को आगे मैसेज करने की हिम्मत नहीं हुई और उसने फोन साइड में रख दिया। उसे अब बुरा लग रहा था , उसे अवनि से ऐसी बात नहीं करनी चाहिए थी। जयदीप ने कुछ प्रोजेक्ट फाइल लेकर पृथ्वी को अपने केबिन में बुला लिया तो पृथ्वी को जाना पड़ा और फिर वह ऐसा बिजी हुआ कि लंच भी नहीं कर पाया।

सुरभि की ट्रेन आने का वक्त हो चुका था इसलिए अवनि ने अपना सामान बैग में रखा और बैंक से निकल गयी। अवनि रेलवे स्टेशन पहुंची। कुछ देर बाद ट्रेन आयी और सुरभि अपने बड़े से सूटकेस और पिट्ठू बैग के साथ ट्रेन से नीचे उतरी अवनि को देखकर उसका चेहरा ख़ुशी से खिल उठा और वह आकर उसके गले लग गयी। सुरभि को गले लगाकर अवनि को भी एक सुकून मिला और दोनों स्टेशन से बाहर चली आयी।

अवनि ने ऑटो बुक किया और दोनों सामान के साथ उसमे आ बैठी। ऑटो में बैठते ही सुरभि ने कहा,”अच्छा उस दिन तुम मुझे क्या बताने वाली थी ?”  
“तुम बिल्कुल नहीं बदली ना सुरभि ! पहले घर चलो , कुछ खा पी लो उसके बाद आराम से बैठकर बाते करेंगे ,, तुम आयी हो इसलिए मैंने आज बैंक से आधे दिन की छुट्टी ले ली”,अवनि ने कहा
“बहुत बहुत शुक्रिया आपका मैडम जी”,सुरभि ने मुस्कुरा कर कहा और उसके मुंह से मैडम जी सुनकर सहसा ही अवनि को पृथ्वी की याद आ गयी। अवनि को खोया हुआ देखकर सुरभि ने कहा,”क्या हुआ , कहा खो गयी ?”

“अह्ह्ह कही नहीं,,,,,,,,मैं बस खुश हूँ कि तुम आ गयी”,अवनि ने सुरभि के हाथ को अपने हाथो में थामकर कहा।
“और मैं खुश हूँ कि मेरे आने से तुम्हारे चेहरे पर ख़ुशी है.,,,,,,,अब देखना जिंदगी की सारी परेशानियों को हम यू चुटकी में हल कर लेंगे”,सुरभि ने कहा।

दोनों अवनि के फ्लेट पहुंची , सुरभि फ्रेश होने चली गयी और अवनि उसके लिए चाय नाश्ता बनाने लगी। सुरभि फ्रेश होकर आयी तब तक अवनि ने हॉल की टेबल पर उसके लिए चाय , बेसन चीला और ब्रेड बटर लाकर रख दिया था। ये देखकर सुरभि ने कहा,”अरे वाह अवनि ये सब तो दिखने में बहुत टेस्टी लग रहा है , मुझसे तो अब और इंतजार नहीं होता”

अवनि और सुरभि ने मिलकर चाय नाश्ता किया और सुरभि अवनि को अपनी जॉब और दूसरी चीजों के बारे में बताने लगी और बताते बताते वही सोफे पर सो गयी। अवनि ने भी उसे नहीं जगाया और अंदर से चद्दर लाकर उसे ओढ़ा दी। सुरभि सो रही थी इसलिए अपने दूसरे काम करने लगी लेकिन पृथ्वी की कही बातें बार बार उसके जहन में घूम रही थी।

4 बजे जाकर पृथ्वी को थोड़ा टाइम मिला तो उसने अपना लंच किया लेकिन देर से खाने की वजह से उसे खाना डायजेस्ट नहीं हुआ और उलटी हो गयी। पृथ्वी की तबियत खराब थी फिर भी वह काम कर रहा था। शाम में वह घर के लिए निकल गया। घर आकर फोन देखा तो अवनि का कोई मैसेज नहीं था और पृथ्वी समझ गया कि अवनि उस से बहुत नाराज है जबकि सुरभि के आने के बाद अवनि को इतना टाइम ही नहीं मिला कि वह अपना फ़ोन देखे या पृथ्वी से बात करे।

सुरभि सोती रही और अवनि ने सुरभि का सब सामान , कपडे , उसकी किताबे और मेकअप का सामान अपने कमरे में जमा दिया। अँधेरा होने पर उसकी आँख खुली और कुछ देर रिलेक्स करने के बाद वह अवनि की मदद करने किचन में चली आयी।

रात का खाना खाकर अवनि बैंक की कुछ फाइल्स लेकर हॉल में आ बैठी और सुरभि हेडफोन लगाकर उसके लेपटॉप पर कोई सीरीज देखने लगी। पृथ्वी से जब रहा नहीं गया तो थककर उसने सामने से अवनि को मैसेज कर ही दिया
“i am so sorry मैडम जी , मैं गधा हूँ मुझे आपसे ऐसे बात नहीं करनी चाहिए थी , पर मैं क्या करू मैं कितनी भी कोशिश करू आपके सामने कठोर नहीं बन पाता और जो दिल में होता है बोल देता हूँ। प्लीज मुझे माफ कर दीजिये , आप जो सजा देंगी मुझे मंजूर है बस ऐसे चुप मत रहिये”

अब चूँकि अवनि का लेपटॉप सुरभि के पास था तो मैसेज भी सुरभि के सामने आया और जैसे ही उसने पृथ्वी का प्रोफाइल देखा तो ख़ुशी से चिल्लाई,”मिल गया”
“क्या मिल गया ?”,अवनि ने हैरानी से कहा
सुरभि ने अपना हेडफोन गले में डाला और कहा,”हाह ! अह्ह्ह्ह वो मैंने सीरीज देख रही हूँ न तो पुलिस को एविडेंस मिल गया”

“तुम भी न , तुम सीरीज देखो मुझे अभी 1 घंटा और लगेगा”,अवनि ने मायूसी से कहा
“अरे अरे कोई बात नहीं तुम आराम से अपना काम करो मैं सीरीज देख रही हूँ”,कहकर अवनि ने हेडफोन कानो पर लगा लिया जिस से अवनि को शक ना हो। उसे तो सीरीज से ज्यादा अब पृथ्वी में इंट्रेस्ट था उसने लिखकर भेजा “हाँ अब गलती तो तुमसे हुई है , तो सजा भी मिलनी चाहिए”
“आप जो कहेगी मैं करने के लिए तैयार हूँ”,पृथ्वी ने लिखकर भेजा
सुरभि ने पृथ्वी का मैसेज देखा और एक बड़ी सी स्माइल उसके होंठो पर फ़ैल गयी।

( क्या भगवान को लेकर बदलेगा पृथ्वी का नजरिया ? क्या अवनि बताएगी सुरभि को पृथ्वी के बारे में ? क्या सुरभि करने वाली है पृथ्वी के साथ कुछ गड़बड़ ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” )

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संजना किरोड़ीवाल 

Pasandida Aurat
Pasandida Aurat by Sanjana Kirodiwal
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