Pasandida Aurat – 108
Pasandida Aurat – 108

पनवेल , मुंबई
अपनी सोसायटी के फुटपाथ पर खड़े पृथ्वी ने कुछ ऐसा सुना कि उसके हाथ से फोन नीचे जा गिरा और बंद हो गया। उसका दिल तेजी से धड़क रहा था और आँखों के सामने अवनि के साथ बिताये पल चल रहे थे। उन पलों को याद करते हुए उसके चेहरे पर दर्द के भाव उभर आये , वह बोलना चाहता था , चिल्लाना चाहता था , रोना चाहता था लेकिन उसके पैर वही जम गए वह हिल भी नहीं पाया और अगले ही पल उसके दिल की धड़कने सामान्य से बहुत कम हो गयी , इतनी की वह ठीक से साँस भी नहीं ले पा रहा था।
इस वक्त पृथ्वी ऐसा महसूस कर रहा था जैसे किसी ने बहुत ही ऊँची पहाड़ी से उसे नीचे खाई में धक्का दे दिया और वह बस गिरता जा रहा हो।
वही पास ही खड़े नकुल ने जब देखा तो पृथ्वी के पास आया और कहा,”ए पृथ्वी ! क्या हुआ तुझे ? किसका फोन था और तू ऐसे क्यों खड़ा है ?”
नकुल की आवाज से पृथ्वी की तंद्रा टूटी और उसने बुझे स्वर में कहा,”अवनि का फोन था ?”
“अवनि का फोन लेकिन उसने इस वक्त तुम्हे फोन क्यों किया ? और तुम्हे कैसे पता फोन के उस तरफ अवनि थी ?”,नकुल ने परेशानी भरे स्वर में कहा क्योकि पिछले एक साल में उसने पृथ्वी को अवनि से बात करते या अवनि का फोन आते नहीं देखा था।
पृथ्वी ने नम आँखों से नकुल को देखा , पृथ्वी की आँखों में नमी देखकर नकुल के दिल में एक टीस उठी। आज कितने दिनों बाद वह पृथ्वी की आँखों में वही दर्द देख रहा था जो उसने उस रात देखा था जब उसने पृथ्वी से अवनि को भूल जाने को कहा था।
नकुल बेचैनी से पृथ्वी के बोलने का इंतजार करने लगा। पृथ्वी ने एक ठंडी आह भरी और कहा,”मर्द अपनी पसंदीदा औरत की आवाज कभी नहीं भूलता , पुरे 1 साल 2 महीने 27 दिन बाद दूसरी बार उसका फोन आया था और मैंने उसकी आवाज सुनते ही ये पहचान लिया कि फ़ोन के दूसरी तरफ “वो” थी और ये उसकी तरफ से आखरी फोन था”
“आखरी फोन था मतलब ?”,नकुल ने धड़कते दिल के साथ पूछा
“वो किसी और से शादी कर रही है”,पृथ्वी ने अपना दिल मजबूत करके कहा
नकुल ने जैसे ही सुना तो वह अवाक रह गया। जिस अवनि का पृथ्वी इतने साल से इंतजार कर रहा था वो अवनि किसी और से शादी करने जा रही थी। नकुल को समझ नहीं आ रहा था वह पृथ्वी से क्या कहे क्योकि उसके मुँह से निकला हर शब्द सिर्फ पृथ्वी के दर्द को बढ़ाने वाला था। नकुल के चेहरे पर उदासी झिलमिलाने लगी।
पृथ्वी की आँखों में भरे आँसू उसके गालों पर बह गए इस वक्त वह जिस तकलीफ से गुजर रहा था उसका अंदाजा नकुल नहीं लगा सकता था। पृथ्वी को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे किसी ने सैंकड़ो खंजर उसके सीने में एक साथ भौंक दिए हो। वह अंदर ही अंदर एक ऐसा दर्द महसूस कर रहा था जिसे देख पाना मुश्किल था। वह घुटनो के बल नीचे गिर पड़ा और अपना चेहरा अपने हाथो में छुपाकर जोर जोर से रोने लगा। उसके रोने में एक दर्द था , अवनि को खो देने की तकलीफ थी , वह बच्चो की तरह रोये जा रहा था।
उसे ऐसे रोते देखकर नकुल की आँखों में भी आँसू भर आये। वह एक बार फिर पृथ्वी का दिल टूटते देख रहा था और इस बार उसके लिए पृथ्वी को सम्हालना मुश्किल हो रहा था। नकुल उदास सा पृथ्वी को देखे जा रहा था तभी उसे पृथ्वी की कही बात याद आयी
“जिस दिन मैं तेरे सामने किसी लड़की के लिए रो दू तो समझना She is importent for me”
पृथ्वी की कही बात याद आते ही नकुल और उदास हो गया , उसे अहसास हुआ कि अवनि पृथ्वी के लिए बहुत मायने रखती है और अब जब वह किसी और से शादी करने जा रही है तो पृथ्वी का इस तरह से टूटना तय है। पृथ्वी को रोते देखकर नकुल उसके सामने बैठा और कहा,”पृथ्वी , पृथ्वी सम्हाल खुद को,,,,,,,,,जो हो रहा है अच्छा नहीं हो रहा यार अवनि को तेरे साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था,,,,,,,,,,!!!”
नकुल को अपने सामने देखकर पृथ्वी उसके गले आ लगा और रोते हुए कहा,”वो किसी और से शादी करने जा रही है भाई ! वो ऐसा कैसे कर सकती है ? वो किसी और से शादी कर लेगी , कोई और उसके साथ उसकी बगल में खड़ा होगा , कोई और उसकी मांग में सिंदूर भरेगा , कोई और उसका हाथ थामकर उसके साथ सात फेरे लेगा , कोई और उसे छुएगा,,,,,,,ये सब मैं कैसे बर्दास्त कर सकता हूँ यार , जब किसी और का नाम भी लेती थी तो कितना दुखता था मुझे अब तो वो किसी और के साथ पूरी जिंदगी बिताने जा रही है ये कैसे देख पाऊंगा यार ?
उसे पाने के लिए मैं को कर सकता था मैंने किया लेकिन वो मुझे नहीं मिली यार,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मैं उसके बिना नहीं रह पाऊंगा भाई,,!!”
पृथ्वी की बातें सुनकर नकुल ने उसे कसकर गले लगा लिया और कहा,”बस कर भाई वो तेरी किस्मत में नहीं थी , जाने दे उसे महादेव ने उसे तेरी किस्मत में नहीं लिखा शायद,,,,,,,,,,,पर तू दिल छोटा मत कर सब ठीक हो जाएगा”
महादेव का नाम सुनकर पृथ्वी का दुःख गुस्से में बदल गया और उसने नकुल को खुद से दूर छिटककर कहा,”महादेव ने ही तो नहीं सुना नकुल , वो सुनते तो क्या आज वो किसी और से शादी करती ,, महादेव ने ही तो नहीं सुना वरना क्या आज उसके दिल में मेरे लिए मोहब्बत नहीं होती , महादेव ने ही तो नहीं सुना तभी तो आज मैं इस तकलीफ में हूँ,,,,,,,,,,,अगर महादेव को उसे मेरी जिंदगी में शामिल ही नहीं करना था तो फिर क्यों मिलवाया उन्होंने मुझे उस से , क्यों मेरे दिल में उसके लिए मोहब्बत जगाई क्यों मुझे उसका दर्द महसूस करने पर मजबूर किया,,,,,,,,,,,,,,,झूठ कहती है वो कि महादेव सबकी सुनते है ,
नहीं सुनते महादेव किसी की वो बस लोगो से उनकी खुशिया छीनना जानते है,,,,,,,,महादेव ने चाहा तो , क्या चाहा महादेव ने ये कि वो किसी और से शादी कर ले,,,,,,,,,,,तो वो कर रही है और मैं कुछ नहीं कर सकता , कुछ नहीं कर सकता मैं,,,,,,,,,,,,कुछ नहीं कर सकता”
कहते कहते पृथ्वी एक बार फिर रोने लगा , वह समझ ही नहीं पा रहा था कि वह अपने अंदर भरे इस दर्द और गुस्से को ऐसे जाहिर करे ? रोने की वजह से उसका चेहरा लाल होने लगा , आँखे सूज गयी और होंठ काँप रहे थे
नकुल बस उदास सा पृथ्वी को देख रहा था उसमे इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह पृथ्वी को इस दुःख के लिए कोई झूठा सांत्वना दे , वह बस उसके दुःख पर दुखी और उदास हो सकता था क्योकि हर गुजरने वाले दिन के साथ उसने अवनि के लिए पृथ्वी का प्यार सिर्फ बढ़ते ही देखा था। पृथ्वी रोते रोते जब थक गया तो उसने अपना सर आसमान की ओर उठा लिया , कमर पर दोनों हाथो को रखा और गहरी सांसे लेने लगा।
अवनि के कहे आखरी शब्द अब भी उसके कानो में गूंज रहे थे और उसके साथ बिताया एक एक पल उसकी आँखों के सामने आ रहा था। पृथ्वी के दिल की धड़कने बहुत धीमे चल रही थी और वह बस एकटक आसमान में चमकते चाँद को देख रहा था।
पृथ्वी ने सर नीचे झुकाया और फिर पैदल ही वहा से आगे बढ़ गया। नकुल उसके पीछे आया और कहा,”पृथ्वी , पृथ्वी कहा जा रहा है तू ?”
“नकुल तू जा यहाँ से,,,,,,,,,,,,मुझे अकेला छोड़ दे”,पृथ्वी ने आगे बढ़ते हुए शांत स्वर में कहा
“नहीं इस वक्त मैं तुझे अकेला नहीं छोड़ सकता,,,,,,,,,,हालत देखी है अपनी , अभी तू ठीक नहीं है और ये बता तू जा कहा रहा है ?”,नकुल ने पृथ्वी के मना करने के बाद भी उसके साथ चलते हुए कहा
“नकुल मैंने कहा ना जा यहाँ से,,,,,,,,,,,!!”,पृथ्वी ने थोड़ा कठोरता से कहा
“मैं नहीं जाऊंगा , और तुझे इस हाल में छोड़कर तो बिल्कुल नहीं जाऊंगा , समझा तू”,नकुल ने भी थोड़ा गुस्से से कहा
पृथ्वी ने सुना तो चलते चलते नकुल की तरफ पलटा और गुस्से से कहा,”मैंने कहा जा यहाँ से,,,,,,,,,नहीं चाहिए मुझे किसी का साथ जा यहाँ से”
पृथ्वी को इतने गुस्से में देखकर नकुल ने अपने कदम पीछे ले लिए , इस वक्त पृथ्वी बहुत तकलीफ में था और उसकी ये तकलीफ अब गुस्से का रूप ले चुकी थी।
पृथ्वी जितना शांत था उसका गुस्सा उतना ही तेज था और ये बात नकुल अच्छे से जानता था इसलिए वह चुपचाप पीछे हटा और बुझे स्वर में कहा,”ठीक है नहीं आता तेरे पीछे , मैं घर पर पर तेरा इंतजार करूंगा,,,,,,,,,,,अपना ख्याल रखना”
पृथ्वी ने सुना और ख़ामोशी से नकुल को देखने लगा , नकुल पलटा और वहा से चला गया।
पृथ्वी पलटा और फिर आगे बढ़ गया। नकुल ने जब देखा तो वापस पृथ्वी के पीछे पीछे चलने लगा लेकिन इस बार छुपकर ताकि पृथ्वी उसे देख ना ले। पृथ्वी उसी शिव मंदिर आया जहा वह महादेव से हमेशा अवनि के लिए दुआ मांगने आया करता था। मंदिर आकर पृथ्वी महादेव की मूर्ति के सामने खड़ा हो गया और आँखों में आँसू लेकर गुस्से से उन्हें घूरने लगा। नकुल भी आकर मंदिर के खम्बे के पीछे आ छुपा , वह बस पृथ्वी पर नजर रख रहा था कि कही पृथ्वी कोई गलत कदम ना उठा ले।
पृथ्वी एकटक महादेव की मूर्ति को देखता रहा और गुस्से से कहा,”अब खुश है ना आप , यही चाहते थे ना आप तो खुश हो जाईये आप जो चाहते थे वो हो चुका ,, किसी और से शादी करने जा रही है वो , ये जानते हुए भी कि मैं उस से कितना प्यार करता हूँ , मुझे उसकी जरूरत है , मैं उसके बिना नहीं रह सकता फिर भी , फिर भी वो किसी और से शादी कर रही है क्योकि आपने उसे ऐसा करने को कहा , आपने उसकी किस्मत में मुझे ना लिखकर किसी और को लिख दिया। आ ज तक आपसे कुछ नहीं माँगा था ,
ना किसी के सामने हाथ फैलाये लेकिन आपके सामने हाथ फैलाकर उसका साथ मांगा था और आपने , आपने फिर भी उसे किसी और की किस्मत में लिख दिया क्योकि आपने कभी किसी से प्यार नहीं किया , आपने किसी का इंतजार नहीं किया , आपके सीने में दिल ही नहीं है , पत्थर है आप सिर्फ पत्थर लेकिन इस पत्थर को भी पूजा मैंने सिर्फ अवनि के लिए,,,,,,,,,,,,,,,,,फिर क्यों छीन लिया उसे मुझसे ? क्यों उसे मुझसे दूर कर दिया ? मैं इंसान हूँ मेरे हाथ में कुछ नहीं है लेकिन आप , आप तो भगवान् है ना फिर आपने क्यों नहीं बदल दी मेरी किस्मत ?
कुछ नहीं कर सकते आप , झूठ कहती है वो कि आप सबकी सुनते है , नहीं सुनते आप किसी की , नहीं है आप भगवान् और नहीं मानता मैं आपको,,,,,,,,,,,नहीं मानता”
कहते कहते पृथ्वी घुटनो के बल महादेव के सामने गिर पड़ा और एक बार फिर अपना चेहरा अपने हाथो में छुपाकर रोने लगा। पंडित जी घर जा चुके थे और इस वक्त मंदिर में बस पृथ्वी और नकुल ही मौजूद थे। नकुल पृथ्वी को ऐसे बिल्कुल नहीं देख पा रहा था लेकिन इस वक्त वह पृथ्वी का दर्द कम करने के लिए कुछ कर भी नहीं सकता था।
पृथ्वी ने शर्ट की बाजु से अपने आँसू पोछे और उठकर थके कदमो से मंदिर से बाहर चला आया। नकुल भी उसके पीछे पीछे चल पड़ा , चलते चलते पृथ्वी लड़खड़ाया लेकिन खुद को सम्हाल लिया। चलते चलते पृथ्वी की नजर सड़क के उस पार बैठे कुछ लड़को पर पड़ी जो अपना गिटार लिए कोई गाना गा रहे थे। पृथ्वी ने एक नजर उन्हें देखा और गुनगुनाते हुए आगे बढ़ गया
तेरी , मेरी , कहानी , है जैसे आँखों का पानी
एक दूसरे से खफा है , कैसी है ये जिंदगानी ?
तुझे भूलना मुमकिन ही नहीं
जो तुझको न चाहे मेरे सीने में वो दिल ही नहीं !
क्यों सताये , क्यों रुलाये
देखू जो तुझको , क्यों फेरे तू निगाहे
मैं हूँ तेरा , तू है मेरी
क्यों अलग है , ये तेरी मेरी राहें
तू दे दे जवाब,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!
मेरे इश्क़ का कर हिसाब,,,,,,,,,,,,,
मेरे इश्क़ का कर हिसाब
मेरे इश्क़ का कर हिसाब
मेरे इश्क़ का कर हिसाब !!
आँखों में तेरी , देखे है मैंने , कुछ सपने
माने ना माने , हम तो रहेंगे , तेरे अपने
जितना भी दूर , जाएगी तू , लौट के आना मेरे पास है
बेचैनी ये , दिल की तेरी , इश्क़ का ही तो अहसास है
क्यों है ये मुश्किल , क्यों है ये उलझन
बंध चूका है अपना , दो दिलों का बंधन
मैंने चुन लिया है , हमनवा तुमको
तू भी चुन ले मुझको , थाम ले ये दामन
कर दे पूरा मेरा ख्वाब
मेरे इश्क़ का कर हिसाब
मेरे इश्क़ का कर हिसाब
मेरे इश्क़ का कर हिसाब
मेरे इश्क़ का कर हिसाब !!
पृथ्वी अपनी बिल्डिंग के सामने चला आया लेकिन आज उसका न अपने घर जाने का मन था ना ही अपने फ्लेट वह बस सबसे दूर कही भाग जाना चाहता था इतना दूर जहा उसे अवनि की याद ना आये। पृथ्वी को बिल्डिंग के बाहर देखकर नकुल अपने घर चला गया जो कि बगल वाली सोसायटी में था।
घर आकर भी नकुल को पृथ्वी की चिंता हो रही थी। 2 घंटे बाद घर की डोरबेल बजी , नकुल की मम्मी दरवाजा खोलने जाने लगी तो नकुल ने कहा,”आई मैं खोलता हूँ”
नकुल दरवाजे की तरफ बढ़ गया और दरवाजा खोला तो सामने पृथ्वी खड़ा था। नम आँखे , उदास चेहरा , बिखरे बाल और सूखे होंठ ,, नकुल ने पृथ्वी को देखा तो पृथ्वी ने कहा,”नींद नहीं आ रही , आँखे बंद करता हूँ तो उसका चेहरा नजर आता है,,,,,,,,,,,!!”
“अंदर आ”,नकुल ने कहा और पृथ्वी के अंदर आने के बाद दरवाजा बंद कर दिया। नकुल पृथ्वी को लेकर अपने कमरे में चला आया , उसे वहा बैठने को कहकर वह खुद किचन की तरफ चला आया और दोनों के लिए चाय बनाने लगा। रात बहुत हो चुकी थी इसलिए नकुल के आई बाबा पहले ही सोने जा चुके थे।
नकुल ने चाय बनाई और लेकर अपने कमरे में चला आया। पृथ्वी बिस्तर पर बैठा एकटक सामने दिवार को देख रहा था उसकी आँखों में अभी भी आँसू थे। नकुल ने उसकी तरफ चाय का कप बढ़ाया और कहा,”लो पीओ”
पृथ्वी ने कप लिया और पीने लगा उसकी आँखों से आँसू बहने लगे नकुल उसका दर्द समझ रहा था लेकिन पृथ्वी से इस वक्त बात करके वह उसका दर्द और बढ़ाना नहीं चाहता था।
चाय पीने के बाद नकुल ने पृथ्वी को आकर सोने के लिए कहा , पृथ्वी ने अपना सर नकुल की गोद में रखा और सुबकने लगा , नकुल धीरे धीरे उसका सर सहलाने लगा और पृथ्वी को नींद आ गयी। नकुल ने उसका सर अपनी गोद से उठाया और तकिये पर रखकर उसे कम्बल ओढ़ा दी।
सुख विलास भवन , उदयपुर
पृथ्वी को अपनी शादी के बारे में बताने के बाद अवनि खुद भी फूट फूट कर रोने लगी। हां ये सच था कि अवनि पृथ्वी से प्यार करने लगी थी लेकिन वह चाहकर भी पृथ्वी को सच नहीं बता सकती थी। सिद्धार्थ से शादी का फैसला उसने पृथ्वी के लिए ही लिया ताकि पृथ्वी ये सुनकर उसे भूल जाए और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाये। जिस तकलीफ से पृथ्वी गुजर रहा था अवनि भी उसी आग में जल रही थी। उसने जान बूझकर पृथ्वी को खुद से दूर किया ताकि उसकी बदकिस्मती पृथ्वी के जीवन में ना आये।
फोन कट जाने के बाद अवनि रोते हुए घुटनो के बल फर्श पर गिर पड़ी और अपना सर बिस्तर से लगाकर सुबकने लगी। पृथ्वी को चुप करवाने के लिए नकुल था लेकिन अवनि के आँसू पोछने वाला तो कोई भी नहीं था। उसकी आँखों के सामने पृथ्वी के साथ बिताये पल आने लगे और उसका मन भारी होने लगा। वह फर्श पर बैठे बैठे ही सो गयी और उसका सर बिस्तर से लगा रहा , आँसुओ की धारिया गालों पर जम गयी और साथ ही जम गया उसके मन में पृथ्वी को खो देने का दर्द,,,,,,,,,,,,,,,,,जिसे अब ताउम्र उसे अपने साथ लेकर जीना था।
( क्या पृथ्वी देख पायेगा अवनि को किसी और के साथ या करेगा एक आखरी कोशिश ? क्या पृथ्वी के लिए नकुल करेगा अवनि से बात या रोक ले जायेगा पृथ्वी को हमेशा के लिए अवनि से दूर ? क्या पृथ्वी को खो देने के दर्द के साथ अवनि जी पायेगी या रह जाएगी एक जिन्दा लाश बनकर ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


I know ki sanjana ji is fan of SRK and iski ending pakka kuchh kuchh hota hai movie jese hi hogi … siddharth ko pkka realise hoga ki vo galat kr rha h aur vo pichhe htt jayega … bs ek request thi roj 2 part mil skte h kya please sanjana ji
In this story so many twist but next twist as like ranjhana I think 🤔
Pls next part mam
Next part plzz