Pasandida Aurat – 102
Pasandida Aurat – 102

अपने कमरे की बालकनी में खड़ी अवनि अवाक् सी सामने खड़े पृथ्वी को देखे जा रही थी। आसमान में चमकती रौशनी में उसे पृथ्वी का चेहरा साफ नजर आ रहा था और इसी के साथ उसका दिल इतनी जोर से धड़क रहा था जैसे अभी बाहर आ गिरेगा। अवनि कुछ बोल नहीं पायी उसकी आँखों में भरे आँसू गालों पर लुढ़क आये। आसमान में रौशनी कम हुई और अचानक से घर की सभी लाईटे जल उठी। अवनि ने देखा सामने कोई नहीं है। अवनि बदहवास सी इधर उधर देखने लगी लेकिन पृथ्वी उसे कही नजर नहीं आया।
उसका दिल अभी भी तेजी से धड़क रहा था और आँखों में आँसू हताश होकर अवनि ने अपने दोनों हाथो को बालकनी की रेलिंग पर रखा और सर झुकाकर खुद से कहा,”मुझे फिर वहम हुआ कि वो यहाँ था , ओह्ह्ह्ह पृथ्वी क्या मैं तुम्हे सच में याद नहीं हूँ ?”
“अवनि दी ! आप यहाँ क्या कर रही है ? सब आपको नीचे ढूंढ रहे है चलिए ना”,सलोनी ने आकर अवनि से कहा
अवनि ने अपने आँसू पोछे और होंठो पर जबरदस्ती झूठी मुस्कान लाकर पलटते हुए कहा,”कुछ नहीं बस ऐसे ही चली आयी , चलो चलते है”
अवनि सलोनी के साथ बालकनी से कमरे की तरफ आयी और दरवाजे की तरफ बढ़ गयी , जाते जाते उसने पलटकर देखा दरवाजे के पर्दो को देखकर ना जाने क्यों अवनि को लगा जैसे वहा कोई है और अगले ही पल इसे भी अवनि ने अपने मन का वहम समझ लिया और आगे बढ़ गयी।
सलोनी अवनि के साथ नीचे चली आयी। आते ही सभी अवनि से डांस की फरमाईश करने लगे अवनि ने सबको खूब मना किया लेकिन जैसे ही विश्वास जी ने कहा तो अवनि मना नहीं कर पायी। अवनि ने कंधे से लेकर दुपट्टे को कमर की तरफ से बांधा और सबके बीच चली आयी तभी दीपिका ने कहा,”एक मिनिट अवनि दीदी मैं आपका पसंदीदा गाना चलाती हूँ , आप उस पर डांस करना”
दीपिका ने गाना चलाया और जैसे ही अवनि ने सुना उसकी आँखों के सामने पृथ्वी का चेहरा आ गया। वह आँखों में बेचैनी और इंतजार लिए थिरकने लगी
“नंगे पैरो पे अंगारो चलती रही , चलती रही
लगता है के गैरो में मैं पलटी रही ,
ले चल वहा जो मुल्क तेरा है , जाहिल जमाना दुश्मन मेरा है
ओह्ह्ह रे पिया हाये , ओह्ह रे पिया“
अवनि सिर्फ इस गाने पर नाच नहीं रही थी बल्कि इस गाने के शब्दों से उसका वो दर्द झलक रहा था जो अवनि अब किसी के सामने जाहिर करना नहीं चाहती थी। ये गाना हमेशा से अवनि का पसंदीदा रहा लेकिन आज इस गाने पर थिरकते हुए ना जाने क्यों उसके चेहरे पर दर्द और आँखों में नमी थी। सभी बड़े प्यार से अवनि को नाचते देख रहे थे लेकिन किसी ने उसके चेहरे पर आये दर्द को देखने की कोशिश नहीं की।
सुरभि ने जब देखा तो उसके दिल में चुभन का अहसास हुआ क्योकि वह अवनि और पृथ्वी के रिश्ते के बारे में जानती थी और इस वक्त इतनी मजबूर थी कि अवनि को सच भी नहीं बता सकती थी लेकिन साथ ही सुरभि खुश भी थी वह नम आँखों के साथ मुस्कुराई क्योकि इस वक्त अवनि की आँखों में किसी के लिए बेइंतहा मोहब्बत जो देख रही थी।
वही अहसास जो कुछ महीनो पहले उसने पृथ्वी की आँखों में देखे थे। सुरभि नम आँखों के साथ मुस्कुराते हुए अवनि को देख रही थी और अवनि अपनी धुन में बस नाचे जा रही थी। जैसे ही अवनि रुकी उसने देखा सब ख़ामोशी से उसे देख रहे है। अवनि साइड में चली आयी और माहौल एक बार फिर हंसी ख़ुशी में ढल गया। मीनाक्षी चाची तो ख़ुशी से अवनि की बलाये लिए जा रही थी लेकिन अवनि को ना जाने क्यों अब सबके बीच घुटन महसूस हो रही थी। उसे अब ये सब नहीं चाहिए था सब के बीच होकर भी वह खुद को अकेला महसूस कर रही थी और ये सब उसे पृथ्वी के ख्याल के बाद महसूस हुआ।
पृथ्वी को लेकर अवनि की भावनाये मजबूत होने लगी थी और यही वजह थी कि अब अवनि अपने हर पल , हर ख़ुशी , हर दुःख में पृथ्वी को सबसे पहले याद करती। अवनि सबके बीच जबरदस्ती हसने मुस्कुराने की कोशिश कर रही थी। सुरभि से भला ये सब कहा छुप सकता था पृथ्वी के बाद एक सुरभि ही थी जो अवनि की आँखे देखकर उसके मन का हाल समझ जाती थी। सुरभि अवनि के पास आयी। उसकी कलाई पकड़कर उसे साइड ले आयी और अपने सामने करके कहा,”चलो एक गहरी साँस लो”
अवनि ने एक गहरी साँस ली और इसी के साथ उसकी आँखों में नमी फिर उभर आयी। उसने अपने आँसुओ को आँखों में रोकने की नाकाम कोशिश की ये देखकर सुरभि ने कहा,”बह जाने दो इन्हे”
अवनि ने सुरभि की तरफ देखा तो सुरभि और और प्यार से कहा,”अवनि ! बह जाने दो इन्हे ,, कभी कभी दर्द को रोककर रखने से बेहतर है हम उसे आँसुओ के जरिये बहा दे”
सुरभि की बात सुन अवनि ने अपनी आँखे मूँद ली और आँखों में भरे आँसू उसके गालों पर लुढ़क आये।
अवनि कुछ देर वैसे ही रही और पलट गयी , वह दो तीन बार सुबकी और फिर अपने आँसू पोछ कर सुरभि की तरफ पलटी तो सुरभि ने उसके दोनों हाथो को थामा और कहा,”मैं समझ सकती हूँ इस वक्त तुम्हे कैसा महसूस हो रहा है ? सबके बीच होकर भी तुम उस एक शख्स की कमी को महसूस कर रही हो,,,,,,,अवनि मैं तुम्हे नहीं कहूँगी कि तुम उस से बात करो या मिलो लेकिन ऐसे कब तक चलेगा,,,,,वो तुम्हे चाहता है और तुम्हारी शक्ल बता रही है कि तुम भी उसे चाहती हो ,
बहुत ज्यादा चाहती हो फिर तुमने खुद को क्यों रोक रखा है अवनि ? तुम्हे उसे हाँ बोल देना चाहिए,,,,,,,,,,तुम्हारी आँखे बता रही है कि तुम्हे भी उसका इंतजार है”
अवनि ख़ामोशी से सुरभि की बातें सुनती रही , अवनि जानती थी कि सुरभि का कहा एक एक शब्द सच है लेकिन अवनि अब भी इस सच को स्वीकार नहीं कर पा रही थी। एक डर उसके मन में अब भी था और फिर उस दिन के बाद से पृथ्वी ने अवनि से दोबारा मिलने या बात करने की कोशिश भी तो नहीं की।
अवनि कुछ कहती इस से पहले विश्वास जी वहा आये और अवनि से कहा,”अरे अवनि बेटा ! तुम यहाँ हो आओ तुम्हे कुछ लोगो से मिलवाना है”
अवनि सुरभि की बात का जवाब दिए बिना ही वहा से चली गयी।
पनवेल , मुंबई
“पृथ्वी कहा है , कही नजर नहीं आ रहा ?”,रवि जी ने लता से कहा
“मैंने भी पूजा के बाद से उसे देखा नहीं है , हो सकता है फ्लेट पर चला गया हो। अब उसे ये सब कहा अच्छा लगता है ? सच में उस लड़की की वजह से हमारा पृथ्वी बदल गया है”,लता ने कहा
“लता ! इन सब में उस लड़की की क्या गलती है ? पृथ्वी को उस से दूर हुए लगभग 6 महीने हो चुके है वो लड़की अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुकी होगी”,रवि जी ने कहा आज पहली बार उन्हें अवनि के लिए बुरा लगा
“हाँ वो तो अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गयी लेकिन हमारा पृथ्वी , हमारा पृथ्वी उसके पीछे पूरा बदल चुका है। अब वो पहले जैसा कहा रहा ? क्या वो जिंदगीभर ऐसे ही रहने वाला है ?”,लता ने उदासी भरे स्वर में कहा
“बाबा आईये ना रॉकेट जलाते है”,लक्षित ने आकर कहा
“लकी जाओ जाकर देखो तुम्हारे दादा अपने फ्लेट पर है या नहीं , अगर है तो उस से कहो मैंने बुलाया है”,रवि जी ने कहा
“अरे बाबा ! आप दादा को फोन कर लीजिये ना”,लक्षित ने कहा जिसका ध्यान इस वक्त अपनी रॉकेट जलाने में था
“उसका फोन बंद आ रहा है इसलिए कहा , जाओ जाकर देखो”,रवि जी ने कहा तो लक्षित चला गया।
कुछ देर बाद लक्षित वापस आया और कहा,”बाबा ! दादा का फ्लेट तो बंद है वो वहा नहीं है”
“वहा नहीं है तो कहा गया ?”,लता ने परेशानी भरे स्वर में कहा
“परेशान ना हो लता अपने दोस्त नकुल के साथ होगा”,रवि जी ने कहा तभी नकुल वहा आया और कहा,”ए लक्षित ! तूने पृथ्वी को कही देखा क्या ?”
नकुल की बात सुनकर लता और रवि जी ने हैरानी से एक दूसरे की तरफ देखा क्योकि पृथ्वी ना तो अपने फ्लेट पर था ना ही दोस्तों के साथ और ना ही वह सोसायटी में कही दिखाई दिया। रवि जी ने घडी में वक्त देखा रात के 12.30 बज रहे थे इस वक्त पृथ्वी कहा जा सकता था ? रवि जी ने एक बार फिर अपने फोन से पृथ्वी का नंबर डॉयल किया लेकिन फोन बंद आ रहा था। सभी पृथ्वी को ढूंढने लगे। लगभग आधे घंटे बाद पृथ्वी सोसायटी के गेट से पैदल ही अंदर आते हुए दिखाई दिया उसके हाथ में एक बड़ा प्लास्टिक बैग था। पृथ्वी सबकी तरफ आया और सबको साथ देखकर थोड़ा हैरान भी हुआ।
“तुम्हारा फोन क्यों बंद आ रहा है और अचानक कहा चले गए थे तुम ?”,रवि जी ने पूछा
“मेरे फोन की बैटरी खत्म हो गयी थी इसलिए बंद हो गया , मैं तो यही सोसायटी के बाहर गया था कुछ पटाख़े लाने”,पृथ्वी ने बिना किसी भाव के कहा
लता ने आगे बढ़कर पृथ्वी के चेहरे को अपने हाथो में लिया और कहा,”तुमने तो हम सबको डरा ही दिया था पृथ्वी”
“मैं ठीक हूँ आई”,पृथ्वी ने बुझे स्वर में कहा
“दादा मैं ये पटाखे जलाऊ ?”,लक्षित ने आँखों में चमक भरकर पूछा
“हम्म्म ये तुम्हारे लिए ही है”,पृथ्वी ने कहा और बैग लक्षित की तरफ बढ़ा दिया हालाँकि नकुल बस पृथ्वी के चेहरे के हाव भाव देखकर समझने की कोशिश कर रहा था आखिर पृथ्वी परेशान क्यों है ? सबके सामने नकुल पूछ नहीं सकता था इसलिए चुपचाप खड़ा रहा।
“पृथ्वी आओ मुझे तुमसे कुछ बात करनी है”,रवि जी ने पृथ्वी के कंधो पर अपनी बाँह रखकर उसे अपने साथ ले जाते हुए कहा
लता भी दूसरी तरफ चली गयी और नकुल लक्षित के साथ मिलकर पटाखे जलाने लगा। रवि जी जानना चाहते थे कि अवनि से दूर होने के बाद आखिर उसके मन में क्या चल रहा था लेकिन पृथ्वी इतनी आसानी से किसी को अपने दिल की बात बता दे ये भला कैसे हो सकता था ?
रवि ने सोसायटी के फुटपाथ पर पृथ्वी के साथ टहल रहे थे और बातो बातो में उस से जानने की कोशिश कर रहे थे लेकिन पृथ्वी ने अवनि को लेकर उनसे कोई बात नहीं की। आज दिवाली थी और रवि जी पृथ्वी से ज्यादा कुछ पूछकर उसे दुखी करना नहीं चाहते थे इसलिए इधर उधर की बाते करने लगे और फिर घर चले आये।
अगले दिन सभी घरवाले पृथ्वी के घर पर मिले , खूब बातें हंसी मजाक चला , खाना पीना हुआ और बातो बातो में निकली एक बार फिर पृथ्वी की शादी की बात और इस बार भी पृथ्वी ने शादी से साफ इंकार कर दिया। 7 महीने पहले उसने लता और घरवालों की बात मानी जरूर थी लेकिन घरवालों को नहीं पता था पृथ्वी ऐसी कोई जिद पकड़ लेगा कि किसी और से शादी ही नहीं करेगा। सबने उसे बहुत समझाया , कुछ ने प्यार से तो कुछ ने गुस्से से लेकिन पृथ्वी ने किसी से ज्यादा बात नहीं की बस ख़ामोशी से सब सुनता रहा।
दोपहर बाद सभी अपने अपने घर के लिए निकल गए पृथ्वी भी अपने फ्लेट जाने लगा तो लता ने कहा,”पृथ्वी ! क्या तुम्हे हम सबकी बातो से जरा भी फर्क नहीं पड़ता ?”
पृथ्वी ने सुना तो उसे पहली बार चुभन का अहसास हुआ , वह लता की तरफ पलटा और कहा,”आई ! क्या आप सबको मेरी तकलीफ से फर्क पड़ता है ? आपने जो कहा मैंने किया लेकिन शादी का फैसला अब मुझ पर छोड़ दीजिये,,,,,,,,,मैं आप सब की ख़ुशी के लिए किसी भी लड़की की जिंदगी बर्बाद नहीं कर सकता , मैंने अगर शादी कर भी ली तो बहुत ही खराब पति साबित होने वाला हूँ , इसलिए आप सब मुझे मेरे हाल पर छोड़ दीजिये”
पृथ्वी की बात सुनकर लता जी खामोश हो गयी। पृथ्वी वहा से चला गया हालाँकि लता से ऐसे बात करके पृथ्वी को अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन शादी नाम के इस टॉर्चर से वह अब परेशान हो चुका था। पृथ्वी जानता था घरवाले अवनि के लिए कभी हाँ नहीं कहेंगे और अवनि को छोड़कर किसी और लड़की से शादी पृथ्वी करना नहीं चाहता था। वह अवनि को अपने दिल और दिमाग में इस कदर बसा चुका था कि किसी और लड़की का ख्याल भी उसे मंजूर नहीं था। एक बार फिर अपने घरवालों का दिल दुखाकर और उनकी बात ना मानकर पृथ्वी अपने फ्लेट पर चला आया।
कुछ दिन गुजरे और अवनि अपने घरवालों के साथ वक्त बिताकर सुरभि के साथ वापस सिरोही चली आयी। अवनि ने अपने घरवालों को स्वीकार जरूर किया लेकिन अपने आत्मसम्मान को बनाये रखने के लिए अवनि ने उदयपुर ना रूककर सिरोही आना बेहतर समझा। अवनि अपने बैंक और सुरभि अपने पोस्ट ऑफिस में बिजी हो गयी। अवनि अब पहले से ज्यादा खुश रहने लगी थी। हर शाम उसकी विश्वास जी से फोन पर बातें होती और कभी कभार घरवालों से भी बात हो जाया करती थी।
देखते ही देखते एक महीना गुजर गया और इस पुरे महीने अवनि खुश रही , सुरभि भी अपने काम और अनिकेत में ऐसी बिजी हुई कि अवनि से पृथ्वी के बारे में कोई बात नहीं की। पृथ्वी अपने ऑफिस और काम में बिजी रहा , ये पूरा महीना जयदीप ने उसे खूब बिजी रखा , कभी मुंबई से बाहर मीटिंग तो कभी ऑफिस के नए प्रोजेक्ट और ये सब पृथ्वी के लिए एक तरह सही भी था। वह जितना ज्यादा बिजी रहेगा उतना ही कम उदास रहेगा लेकिन हर शाम घर लौटते हुए वह कुछ वक्त शिव मंदिर में जरूर बिताया करता था।
पृथ्वी अब थक चुका था , वह अवनि को घरवालों से मांग चुका था , महादेव से माँग चुका था बल्कि खुद अवनि से माँग चुका था पर उसे हर जगह से निराशा ही मिली। पृथ्वी अभी भी इंतजार में था कि एक रोज अवनि का फोन आएगा और उस दिन पृथ्वी सब छोड़कर उसके सामने जा खड़ा होगा। इसी उम्मीद में दिन गुजरते गए और ये साल भी गुजर गया।
एक शाम अवनि ख़ुशी ख़ुशी अपने बैंक से घर आ रही थी कि तभी उसका फोन बजा। अवनि ने अपना फोन निकालकर देखा स्क्रीन पर कौशल चाचा का नाम देखकर अवनि ने फोन उठाया और मुस्कुरा कर कहा,”जी चाचा जी कहिये”
“अवनि बेटा ! भाईसाहब,,,,,,,,,,,,!!”,कौशल चाचा ने इतना ही कहा कि अवनि के होंठो से मुस्कुराहट गायब हो गयी और चेहरे पर परेशानी के भाव झिलमिलाने लगे
किसी अनहोनी के डर से अवनि का दिल धड़कने लगा और उसने काँपते स्वर में कहा,”चाचाजी , क्या हुआ पापा को ? वो ठीक तो है ना ? आप चुप क्यों है , बताईये मुझे पापा कहा है ?”
“अवनि बेटा ! तुम जितना जल्दी हो सके उदयपुर आ जाओ”,कौशल चाचा ने गंभीर स्वर में कहा
अवनि ने सुना तो उसके पैर काँपने लगे वह स्थिर खड़ी रही और फोन कान से हटाकर हाथ नीचे कर लिया। उसकी आँखों में आँसू भर आये और दिल तेजी से धड़कने लगा।
सब कितना अच्छा चल रहा था और एकदम से अवनि को ये सब सुनने को मिला। उसने बगल से गुजरते ऑटो को रोका लेकिन ऑटो नहीं रुका। अवनि के माथे पर पसीने की बूंदे उभरने लगी , वह घबराहट ने कभी हाथ अपने मुँह पर रखती तो कभी सामने से गुजरते ऑटो को रोकने के लिए आगे करती लेकिन अवनि की किस्मत आज खराब थी कोई भी ऑटोवाला उस तरफ जाने को तैयार नहीं था जिस तरफ अवनि को जाना था। अवनि के कानों में कौशल चाचा की कही बात गूंजने लगी “अवनि बेटा ! तुम जितना जल्दी हो सके उदयपुर आ जाओ”
किसी अनहोनी के ख्याल से अवनि का दिल घबराने लगा वह पैदल ही घर जाने वाले रास्ते की तरफ बढ़ गयी। इस वक्त उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। बचपन में उसने अपनी माँ को खो दिया लेकिन अब वह अपने पापा को खोना नहीं चाहती थी। अवनि बदहवास सी सड़क पर चली जा रही थी , वह इतनी जल्दी में थी कि उसे सामने से आती गाड़ियों का होश भी नहीं था और चलते चलते वह एकदम से एक गाडी के सामने आ गयी।
अगर गाड़ी में बैठे ड्राइवर ने सही वक्त पर ब्रेक नहीं लगाया होता तो अवनि को बहुत जोर से टक्कर लगती। अचानक गाड़ी के सामने आ जाने से अवनि ने घबराकर अपने हाथो को अपने दोनों कानों पर रख लिया और अपनी आँखे मीच ली।
इत्तेफाक से वह गाड़ी किसी और की नहीं बल्कि सिद्धार्थ की थी। सिद्धार्थ ने गाड़ी के सामने खड़ी अवनि को देखा तो जल्दी से नीचे उतरा और अवनि के पास आकर कहा,”अवनि ! तुम ठीक तो हो , यहाँ ऐसे बीच रोड पर क्या कर रही हो ?”
सिद्धार्थ की आवाज सुनकर अवनि ने अपनी आंखे खोली तो देखा सामने हैरान परेशान सिद्धार्थ खड़ा है। अवनि को अगले ही पल अपने पापा का ख्याल आया और उसने रोआँसा होकर काँपती आवाज में कहा,”वो मेरे पापा , वो , चाचा जी ने कहा है मैं , उदयपुर”
अवनि की हालत देखकर सिद्धार्थ समझ गया कि कुछ ठीक नहीं है इसलिए वह अवनि को लेकर साइड में आया और गाड़ी में रखी पानी की बोतल निकालकर अवनि की तरफ बढाकर कहा,”रिलेक्स ! पानी पीओ”
अवनि ने पानी नहीं पिया और कहा,”क्या तुम मुझे मेरे घर छोड़ सकते हो प्लीज,,,,,,,,,यहाँ से कोई ऑटो उस तरफ नहीं जा रहा है ,, मुझे जल्द से जल्द उदयपुर पहुंचना है पापा , पापा ठीक नहीं है शायद”
सिद्धार्थ ने सुना तो हामी में सर हिला दिया , अवनि को इस हाल में देखकर आज पहली बार सिद्धार्थ को बुरा लग रहा था।
( क्या पृथ्वी को आएगा कभी अवनि का फोन या कायम रहेगा ये इंतजार यू ही उम्रभर ? क्या अवनि के लिए खत्म होगी कभी लता की नफरत या और बढ़ जाएगी ? क्या सिद्धार्थ करेगा अवनि की मदद और पहुचायेगा उसे उसके घर ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “पसंदीदा औरत” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Hey bhagwan yeh Vishwas ji ko kya ho gya hai… Avni k liye dukh ho rha hai… Mahadev Vishvas ji ko thik rakhna…ab yeh Siddarth Avni ko uske ghar chod kar aayega…aur kya pta Avni k ghar wale Siddarth se shadi na karwa de Avni ki emergency m…hey bhagwan kaise kaise vichar aa rhe hai dimag m… Sanjana ji plz Avni ki shadi abhi mat karwana filhaal kisi se
Next part ?
Next part pls
Plzz upload next part ??
Dii next part de doo