पाकीजा – एक नापाक जिंदगी 28

Pakizah – 28

pakizah - ak napak jindagi
pakizah – ak napak jindagi by Sanjana Kirodiwal

Pakizah – 28

पाकिजा की आंखो में आंसू देखकर सोनाली बिना कुछ कहे वहां से चली गयी l पाकिजा ने दरवाजा बंद किया और आकर बिस्तर पर लेट गयी l शिवेन का चेहरा उसकी आँखों मे घूमने लगा l
कुछ देर बाद नींद ने उसे अपने आगोश में ले लिया l

अगली सुबह पाकिजा उठी बाहर बारिश हो रही थी वह उठकर खिड़की के पास आई ओर खिड़की खोली बारिश की बूंदे आकर उसके चेहरे को भिगाने लगी l पाकिजा ने अपनी आंखें बंद कर ली एक बहुत ही खूबसूरत अहसास उसे होने ना


इश्क़ की पहली बारिश और उस पर शिवेन की यादें पाकिजा को एक ख़ूबसूरत अहसास करा रही थी l
तभी किसी ने आकर पाकिजा के कंधे पर हाथ रखा पाकिजा पलटी
“ओह्ह बाजी आप ?”
“पाकिजा बारिश में क्यों भीग रही हो बीमार हो जाओगी”,सोनाली ने उसे प्यार से डांटते हुए कहा l


“कितने दिनों बाद बारिश हुई है ना बाजी , मुझे बारिश ने भीगना बहुत पसंद है”,पाकिजा ने आंखों में खुशी भरते हुए कहा l
सोनाली – आ बैठ तुझसे कुछ बात करनी है l
पाकिजा आकर बिस्तर पर बैठ गयी सोनाली आकर उसके सामने बैठ गई ओर कहने लगी
“पाकिजा क्या हो गया है तुम्हे ? “


पाकिजा – मुझे क्या हुआ है बाजी ?
सोनाली – पाकिजा तुम बहुत बदली बदली सी लगने लगी हो l इस बदलाव की वजह क्या है ?
पाकिजा – बाजी ! ये बदलाव शिवेन जी की वजह से है
सोनाली – पाकिजा तुम जिस राह जा रही हो उसकी कोई मंजिल नही है
पाकिजा – मंजिल से खूबसूरत ये सफर हैं बाजी


सोनाली – ऐसे सफर में सिर्फ दर्द और तकलीफ के सिवा और कुछ नही है
पाकिजा – शिवेन जी के साथ हर दर्द और तकलीफ आसान लगती है
सोनाली – तुम क्या पागल हो गयी हो ?
पाकिजा – इश्क़ में पागल होना लाजमी ही है


सोनाली – तुम समझ नही रही हो पाकिजा ! ये कमरे सिर्फ हवस मिटाने के लिए बने है प्यार के सपने देखने के लिए नही
पाकिजा – ये हकीकत है बाजी कोई सपना नही
सोनाली – हकीकत से क्या तुम रूबरू नही हो ? क्या तुम नही जानती की एक वेश्या को प्यार करने का कोई हक नही हैं l


पाकिजा – क्यो बाजी ? क्या वैश्या के सीने में दिल नही होता ? क्या उन्हें सपने देखने का कोई हक नही होता ? क्या उन्हें मोहब्बत करने का कोई हक नही होता l
सोनाली – हा नही होता ! एक वेश्या की जिंदगी बन्द कमरों में बिस्तर पर सिर्फ रौंदी जा सकती है l एक वेश्या के सीने में धड़कने वाला दिल में सिर्फ भावनाएं हो सकती है किसी के लिए प्यार नही


पाकिजा – मुझे आपकी बाते समझ नही आती बाजी बस इतना जानती हूं कि जबसे वो मेरी जिंदगी में आये है जीने लगी हु , सपने देखने लगी हु , खुश रहने लगी हु , मुस्कुराने लगी हु l अब आप ही बताओ बाजी ये प्यार नही तो फिर क्या है l
सोनाली – इश्क़ कभी मुक्कमल नही होता पाकिजा l


पाकिजा – वो इश्क़ ही क्या बाजी जो पूरा हो जाये
सोनाली – ऐसी बहकी बहकी बातें मत करो पाकिजा शिवेन एक अच्छे घर का लड़का है जरा सोचो क्या वह तुम्हे ओर तुम्हारे प्यार को अपना पायेगा ? शिवेन गर अपना भी ले तो क्या उसके माँ बाप एक ऐसी बहू स्वीकार करेंगे जो एक वेश्या है ? नही पाकिजा कोई भी इंसान ऐसा कदम नही उठाएगा l कुछ पल का प्यार अलग बात है लेकिन उस प्यार के साथ जिंदगी बिताना बहुत बड़ी बात है l शिवेन तुमसे प्यार करता है ये सिर्फ तुम्हारा वहम है !


पाकिजा – अगर ये वहम है तो मैं सारी जिंदगी इस वहम के साथ गुजार लुंगी बाजी l मैं उनकी जिंदगी में कभी नही जाउंगी पर उन्हें अपनी जिंदगी से अपने दिल से दूर नही कर पाऊंगी l
पाकिजा की बात सुनकर सोनाली कुछ देर चुप रही और फिर कहा ,”पाकिजा मैं सिर्फ तुझे खुश देखना चाहती हु l मैं नही चाहती शिवेन तुम्हारे साथ वैसा कुछ करे जैसा मुरली ने किया l

पाकिजा इस दुनिया में आकर हमारा मर्दो पर भरोसा करना सूरज को दिया दिखाने जैसा है l
पाकिजा – बाजी ! आप परेशान मत होइए मेरी किस्मत में जो कुछ भी लिखा है वो होकर रहेगा पर अपने आने वाले कल के बारे में सोचकर मैं अपना आज गवाना नही चाहती l मेरे कल में भले शिवेन जी मेरे साथ ना हो पर मेरे आज में वो मेरे साथ है और ये पल मेरी जिंदगी के सबसे खूबसूरत पल है l इन पलो की यादें काफी है मेरा दर्द कम करने को !


सोनाली – ओर अगर शिवेन तुम्हे ना मिला तो ? तब क्या करोगी ?
पाकिजा की आंखों में आंसू आ गए उसने आंसुओ से भरी आँखों से सोनाली की तरफ देखकर कहा,”उन्हें तो हमने उसी दिन पा लिया था जिस दिन उन्होंने हमारा नाम उस डायरी में “मेरी पाकिजा” करके लिखा था l उन दो शब्दों में हम हमेशा हमेशा के लिए उनके हो गए l


सोनाली – मोहब्बत की रोशनी में तुम्हे कुछ दिखाई नही दे रहा है पाकीजा ! तुम इसकी चकाचोंध में खोयी हो इसके बाद आने वाले तूफान से नही
पाकिजा – कितने ही आये इश्क़ में उम्मीद को जलाने वाले l
ये इश्क़ नही मिटा , वो खुद मिट गए इसे मिटाने वाले !

सोनाली निशब्द हो गयी l उसने पाकिजा की आंखों में देखा जिनमे शिवेन के लिए ढेर सारा प्यार झलक रहा था l सोनाली वहां से उठकर चली गईं l
पाकिजा उठी और टेबल पर पड़ी डायरी उठाकर उसमे कुछ लिखा ओर कमरे से बाहर आ गयी बारिश अभी भी हो रही थी l पाकिजा आंगन में आकर बारिश के भीगने लगी l

उसके अंदर की खुशी उस वक्त उसके चेहरे से साफ झलक रही थी l कोठे की सारी लडकिया बालकनी में जमा होकर भीगती हुई पाकिजा को देखने लगी l

शाम का वक्त –

छींकों की वजह से पाकिजा का बुरा हाल था l
“मैंने कहा था ना इतना मत भिगो बीमार पड़ जाओगी पर तुमने मेरी नही सुनी”,सोनाली ने कमरे में आते हुए कहा l
सोनाली पाकिजा के पास आई उसने उसके माथे को छूकर देखा ओर कहा,”तुझे तो बुखार है l एक काम कर तू आराम कर मैं तेरे लिए खाना ओर दवाई लेकर आती हु “


पाकिजा आकर बिस्तर पर लेट गयी l
सोनाली उसके लिए खाना ले आयी और फिर अपने हाथ से उसे खाना खिलाया ओर आराम करने का कहकर वहां से चली गयी l

रात में शिवेन आया और जैसे ही पाकिजा के लिए अम्माजी को कीमत दी अम्माजी ने पैसे वापस लौटाते हुए कहा,”आज नही ! आज उसकी तबियत खराब है कल आना”
शिवेन ने जैसे ही पाकिजा के बीमार होने की बात सुनी परेशान हो गया और कहा,”प्लीज़ मुझे जाने दीजिए l मेरा उस से मिलना जरूरी है”


“बताया ना तुमको बीमार है वो , तुम सालो को बस अपने मजे से मतलब है लड़की की बीमारी नही दिखती”,अम्माजी ने शिवेन को घूरकर कहा
“मैं उस से दूर रहूंगा l बस एक बार उसे देख लू “,शिवेन ने रिक्वेस्ट करते हुए कहा l
अम्माजी ने शिवेन को पाकिजा के कमरे में जाने की इजाजत दे दी l शिवेन तेजी से पाकिजा के कमरे की तरफ बढ़ गया l


“अजीब लड़का है ना अम्माजी सिर्फ पाकिजा को देखने के लिए इतनी बड़ी कीमत चुका दी l “,पास खड़ी निलिमा ने कहा
“इसके जैसे लौंडो की वजह से ही तो अपना धंधा चलता है नीलिमा , चल जा ओर मेरे लिए पान ले आ”,कहते हुए अम्माजी वही तख्ते पर पसर गयी l
नीलिमा अंदर चली गयी

शिवेन तेजी से पकिजा के कमरे में आया जैसे ही कमरे में दाखिल हुआ उसका दिल धड़क उठा सामने बिस्तर पर पाकिजा आंखे मुंदे लेटी हुई थी l शिवेन उसके पास आया और सिरहाने बैठ गया उसने अपने हाथ से पाकिजा के माथे को छुआ l
पाकिजा का शरीर गर्म भट्टी की तरह तप रहा था l शिवेन ने देखा पाकिजा नींद में है उसने उसे जगाना ठीक नही समझा और कमरे मे इधर उधर देखने लगा l

खिड़की के पास पड़ा पानी का जग लेकर शिवेन वापस पाकिजा के पास आया उसने जेब से रुमाल निकाली और उसे पानी मे भिगोया ओर फिर समेट कर पाकिजा के माथे पर दी l उसने दोनो हाथ से पाकिजा के हाथ को थाम लिया और भगवान से उसके ठीक होने की दुआ करने लगा l
दवाईयों का असर था पाकिजा सोती रही l शिवेन रात भर जागता रहा और बार बार रूमाल को पानी मे भिगोकर पाकिजा के माथे पर रखता रहा l उसने एक पल के लिये भी पाकीज़ा को अकेला नही छोड़ा l

कमरे के सामने से गुजरती सोनाली की नजर जब शिवेन पर पड़ी तो वह रुककर उसे देखने लगी l परेशानी उसके चेहरे से साफ झलक रही थी l वह कभी पाकिजा के माथे को छूकर देखता तो कभी उसका हाथ थाम लेता l
सोनाली मुस्कुराई ओर आगे बढ़ गईं l

शिवेन को कब नींद आयी उसे याद नही वह वही बैठे बैठे दीवार से सर लगाकर सो गया l सुबह उसकी आंख खुली तो उसने पाकीजा को देखा पाकिजा सो रही थी शिवेन ने उसके माथे को छूकर देखा बुखार अब कम हो गया था l शिवेन थोड़ा सा नीचे झुका ओर पाकिजा का सर चुम लिया l शिवेन वहां से जाने लगा और टेबल के पास आकर रुक गया उसने डायरी उठायी ओर खोलकर देखा उसमे लिखा था

“क्या सच मे एक वैश्या का प्यार मुक्कमल नही होता”

वैश्या नाम पढ़कर पहले तो शिवेन को पाकीज़ा पर गुस्सा आया और फिर अगले ही पल उसने पेन उठाया और डायरी में कुछ लिखकर चला गया l

कुछ देर बाद पाकिजा उठी l सर पर हाथ लगाया तो शिवेन का रुमाल उसके हाथ लगा l पाकिजा हैरानी से उस रुमाल को देखने लगी और फिर सोचा,”इसका मतलब शिवेन जी कल रात यहां आए थे”
पाकिजा जल्दी से उठी और टेबल की तरफ आकर डायरी उठायी उसने बेसब्री से डायरी को खोला और जैसे ही उसमे लिखे शब्द पढ़े उसकी आंखो में आंसू भर आये l डायरी में लिखा था

“अगर मोहब्बत सच्ची हो और अपने महबूब पर यकीन हो तो हर रिश्ता मुक्कमल होता है !! अपने खुदा पर भरोसा रखो उसने बनाया है तो दोनों को मिलाएगा भी जरूर – मेरी पाकिजा !

पाकिजा ने उन लाइनों को चूम लिया और दर्दभरी आवाज में कहा ,”जब इतना प्यार है तो फिर मुझसे कहते क्यों नही आप ?

पर पाकिजा शायद अभी शिवेन की भावनाओ से अनजान थी l

दिन गुजरते गए ना शिवेन ने पाकिजा से अपने दिल की बात कही ना पाकिजा ने उसे अपना हाल सुनाया l हर शाम दोनो मिलते ओर दिनभर इस शाम का इंतजार करते l प्यार दोनो को था पर कहने से डरते थे l पाकिजा को डर था कि शिवेन उसे अपना पायेगा या नही ओर शिवेन को डर था कही प्यार के नाम से पाकिजा उसे गलत ना समझ ले l
भले दोनो ने एक दूसरे से अपने दिल की बात ना कही हो पर अंदर ही अंदर दोनो एक दूसरे को बेइंतहा चाहने लगे थे l

सोनाली को भी शिवेन अच्छा लगा जब उसने पकीजा को बताया तो वह खुशी से उछलने लगी l
एक शाम शिवेन रोज की तरह पकीजा के पास आया l उस से बाते की ओर फिर कुर्सी पर बैठकर उसे प्यार से सोते हुए देखने लगा l
टेबल पर रखी डायरी उठायी ओर यू ही खोलकर देखने लगा तभी उसकी नजर पाकिजा के लिखे शब्दो पर गयी

“वेश्याओ के घर नही होते – ऐसा अम्माजी कहती है”

शिवेन ने पढ़ा तो उसे बहुत दुःख हुआ और वह पाकिजा के मासूम से चेहरे की तरफ देखने लगा l उसने पेन उठाया और डायरी में कुछ लिखकर उसे वापस टेबल पर रख दिया l
अगली सुबह पाकिजा जब नींद से उठी तो शिवेन उसके सामने बैठा था l पाकिजा चोंककर उठ बैठि ओर अपनी आंखें मसलते हुए कहा ,”आप आज गए नही ?


“नही , मैं तुम्हे साथ लेकर जाऊंगा”,शिवेन ने सहज भाव से कहा l
“अपने साथ लेकिन कहा ?”,पाकिजा ने पूछा l
“अपने घर , उठो ओर तैयार होकर बाहर आजाओ मैं नीचे गाड़ी में तुम्हारा इंतजार कर रहा हु ओर हा अम्माजी से मैने परमिशन ले ली है”,शिवेन ने कहा ओर दरवाजे की तरफ बढ़ गया l
पाकिजा को अपनी आंखो ओर कानो पर विश्वास नही हुआ उसने अपने हाथ पर चिकोटी काटी ओर चिल्ला पड़ी l


वह जल्दी जल्दी तैयार होकर नीचे आयी और आकार शिवेन की गाड़ी में बैठ गयी शिवेन ने गाड़ी स्टार्ट की ओर सड़क पर दौड़ा दी l
रास्तेभर पाकिजा ओर शिवेन चुप रहे l गाड़ी कॉम्प्लेक्स के सामने आकर रुकी शिवेन ने पाकिजा से उतरने को कहा l गाड़ी को पार्किंग में लगाकर शिवेन पाकिजा के पास आया और उसे साथ लेकर अपने फ्लैट में आ गया l
शिवेन ने फ्लेट का दरवाजा खोला और पाकिजा को अंदर आने को कहा l

डरते डरते पाकिजा अंदर आ गयी शिवेन ने उसे बैठने को कहा और उसके लिए पानी ले आया l
“आप यहा रहते है ?”,पाकिजा ने पानी लेते हुए कहा
“हम्ममम्म हा”,शिवेन ने कहा और हाथ में पकड़ी बोतल से पानी पीने लगा
“पर यहां तो ओर कोई नही है , मतलब आपका परिवार ?”,पाकिजा ने शिवेन की तरफ़ देखते हुए पूछा l


शिवेन पानी पीते पीते रुक गया और कहा,”वो एक बहुत बडी कहानी है l फिर कभी बताऊंगा l फिलहाल मैं यहां अकेला ही रहता हूं मयंक ओर राघव कभी कभी आ जाते है l
शिवेन पाकिजा को बता ही रहा था कि तभी उसका फोन बजने लगा l
“ठीक है मैं अभी आता हूं”,कहकर शिवेन ने फोन काट दिया l


“सॉरी पाकिजा ! किसी जरूरी काम से बाहर जाना होगा मैं जल्दी ही लौट आऊंगा l तब तक तुम आराम से यहां रूको l कुछ खाने को चाहिए तो सामने किचन है वहा से ले लेना l”,शिवेन ने कहा l
“ठीक है आप जाईये”,पाकिजा ने सहज भाव से कहा
शिवेन ने पाकिजा को फ्लेट की चाबियां दी और जाने लगा l


जैसे ही दरवाजे के पास पहुंचा पाकिजा ने कहा,”सुनिए !!
“हा जल्दी आजाऊँगा”,शिवेन ने पलटकर मुस्कुराते हुए अदा के साथ कहा ओर चला गया
पाकिजा मुस्कुरा उठी और कहा,”आप मेरे दिल की बात इतनी आसानी से कैसे सुन लेते है l

दूसरी तरफ लिफ्ट में शिवेन पाकिजा के बारे में सोचते हुए कहने लगा,”क्योंकि हमारे दिल एक दुसरे से जुड़े है पाकिजा l

पाकिजा घूमकर घर देखने लगी l एक रूम , किचन बालकनी हाल से बना वह फ्लेट बहुत ही खूबसूरत था l पाकिजा किचन में आई उसने देखा तो सर चकरा गया l जूठे बर्तनों का ढेर लगा हुआ था l सामान भी सारा अस्त व्यस्त पड़ा था पाकिजा ने अपना दुपट्टा कमर पर बांधा ओर किचन की सफाई में जुट गई एक घंटे में उसने सारे बर्तन साफ कर दिए और किचन की सफाई भी कर दी l


अब पाकिजा बढ़ी शिवेन के कमरे की तरफ l कमरे का हाल किचन से भी बुरा था l पाकिजा ने सारा कमरा जचाया ओर जैसे ही कबर्ड खोला कपड़ो का ढेर उसपर आ गिरा
“उफ्फ ये लड़का भी ना’,झल्लाते हुए पाकिजा ने कहा और फिर सारे कपड़े तह करके कबर्ड में जमाने लगी l जो कपड़े गंदे थे उन्हें साइड में निकाला और फिर धोने लगी l ये सब करते हुए उसे समय का ध्यान ही नही रहा l तीन घंटे हो चुके थे शिवेन अभी तक नही आया l


पाकिजा बालकनी में लगे गमलों में पानी देने में बिजी हो गई l शिवेन वापस आ चुका था दरवाजा खोलकर वह अंदर आया उसके साथ राघव ओर मयंक भी थे जैसे ही तीनो अंदर आये मयंक ने कहा ,”शिवेन लगता है हम गलत फ्लेट में आ गए है’
“मुझे भी यही लगता है “,राघव ने सरसरी निगाह से देखते हुए कहा


“गाइज ये मेरा ही फ्लेट हैं , पर ये सब किया किसने ?’,शिवेन खुद हैरान था फ्लेट की कायापलट देखकर
“हमने ये सब हमने किया”,पाकिजा ने हॉल में आकर कहा l
“अरे आप सुबह सुबह यहां ? कैसी हो भा…….. मेरा मतलब भाई की दोस्त “,मयंक ने बात पलटते हुए कहा l
“हम आपके भी दोस्त है”,पाकिजा ने मुस्कुरा कर कहा l

शिवेन ओर राघव भी उन दोनों के पास आये l चारो वही खड़े बातें कर ही रहे थे कि तभी डोरबेल बजी
“मैं देखता हूं “,कहकर शिवेन दरवाजे की तरफ बढ़ गया l

जैसे ही शिवेन ने दरवाजा खोला सामने खड़े शख्स को देखकर चोंक गया उसका दिल धड़कने लगा और उसके मुंह से सिर्फ इतना ही निकला

“आप ?

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