Manmarjiyan Season 5 – 8
Manmarjiyan Season 5 – 8

रूपा इसकी है तो फिर हमसे सादी का वादा करके पैसा काहे लिया बे ?”,गोलू को कोलर पकड़कर नवरतन चिल्लाया
मिश्रा जी ने गोलू को डाँटा गुड्डू चुप रहा , गुप्ता जी ने चाँटे बरसाए गुड्डू चुप रहा , मंगल फूफा ने सुनाया तब भी गुड्डू चुप रहा लेकिन जब उसने देखा कि नवरतन गोलू की कोलर पकडकर खड़ा है तो आया और नवरतन को दूर करके कहा,”ए चचा ! थोड़ा कायदे मा भाई है हमरा और कित्ता पइसा ले लिया बे तुमसे जो आकर कोलर पकड़ रहे हो जे का ? बताओ अभी निकाल के तुम्हाये मुँह पर मारते है”
नवरत्न ने भंव चढ़ाकर गुड्डू की तरफ देखा और कहा,”तुम दोगे ?”
“हाँ हम देंगे ! अरे दोस्त है हमरा जे के लिए अपनी जान दे दे पइसा का चीज है , बताओ कितना है ?”
गोलू ने सुना तो आँखों में आँसू भरकर गुड्डू की तरफ देखने लगा , गुड्डू के रूप में उसे साक्षात् भगवान् जो नजर आ रहे थे।
“25 हजार रुपया , लाओ दो मारो हमाये मुँह पर अभी चले जायेंगे हिया से”,नवरत्न ने कहा
गुड्डू ने जैसे ही 25 हजार का नाम सुना उसका मुँह खुला का खुला रह गया। उसने नवरत्न के हाथो को थामा और वापस गोलू की कोलर पर रखकर कहा,”मारो साले को,,,,,,,,,,,,,,!!”
“अरे गुड्डू भैया,,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने मरे हुए स्वर में कहा
“भक्क”,गुड्डू ने कहा और मिश्रा जी के बगल में चला आया तो मिश्रा जी ने गुड्डू को ताना मारकर कहा,”जाओ और कर दयो दोस्त की मदद”
“सो सॉरी पिताजी,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने धीरे से कहा दूर खड़ा गोलू गुड को घूरने लगा जिस गुड्डू में कुछ देर पहले उसे भगवान् नजर आ रहा था अब उसी गुड्डू भैया में उसे शैतान भी नजर आ रहा था और सामने खड़े नवरत्न में यमराज,,,,,,,,,,,,,,!!”
घर का दरवाजा खुला और गुप्ताइन ने बाहर झाँककर कहा,”ए गोलू के पिताजी चाय बना है आप लोग पीजियेगा ?”
“हाँ आते है , चलिए मिश्रा जी,,,,,,,,,,,,जे ससुरे को नवरत्न देख लेगा”,कहकर गुप्ता जी मिश्रा जी के साथ अंदर जाने लगे। चलते चलते उन्होंने शर्मा जी को भी अपने साथ ले लिया और अंदर चले गए। चाय का नाम सुनकर आदर्श फूफा भी अंदर चले गए। यादव ने मंगल को छोड़ा तो मंगल भी अंदर भाग गया और मनोज भी अंदर चला गया। बचे यादव जी , गुड्डू , गोलू और नवरतन
“जे तुम्हारा दोस्त है ही एक नमबर का बंडलबाज जे ससुरे की तो आज तबियत से बत्ती बन जाए बस”,यादव जी ने गुड्डू के बगल में आकर कहा
अब गुड्डू नवरतन पर तो अपना जोर चला नहीं सका लेकिन यादव जी कौनसा उसके अपने थे। उसने यादव जी की धुलाई कर दी , जैसे तैसे यादव जी अपनी जान बचाकर भागे।
सबके जाने के बाद गोलू ने नवरत्न से कहा,”नवरतन चचा हमायी बात सुनो ! काहे इत्ता गरमा रहे हो यार हमहू सच कह रहे है रूपा तुमको ही मिली है”
“गोलूउउउउउउउ,,,,,,,,,,,,!!!!”,दरवाजे पर खड़े मंगल फूफा चिल्लाये जो सबसे बचाकर गोलू के लिए चाय लेकर आये थे लेकिन गोलू की बात जैसे ही उनके कानो में पड़ी तो वे चिल्ला उठे।
“कुत्ते , कमीने , सूअर , यादव की भैंसिया के गोबर , हमायी प्रेम कहानी के मुख्य बिलिन इह दरजी के साथ मिलकर तुमहू हमायी चद्दर उधेड़ रहे हो। अरे हमायी रूपा कोनो सामान है जो इह जल्लाद का मिली है। हमने तुमको अपना समझा और तुमहू साले हमाओ घर उजाड़ रहे हो,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा गोलू को गरियाते हुए उसकी तरफ आये तो गोलू ने मंगल फूफा की तरफ आँख मारकर दबे स्वर में कहा,”फूफा बात को समझो”
मंगल को गोलू के शब्द तो नहीं सुने बस उसका आँख मारना दिखा तो उन्होंने गुस्से से कहा,”आँख का मार रहे हो ? साला तुमहू अपनी जे आँखों से इह नाही देखे कि रूपा हमसे और हम रूपा से कित्ता पियार करते है ? तुमसे जे उम्मीद नाही किये थे गोलू आज से तुमहाओ हमाओ रिश्तो खत्म,,,,,,,,,,,,,,,,आज से तुम हमाये दुश्मन,,,,,,,,,,,,,!!!”
कहकर मंगल फूफा चाय का कप लेकर वापस जाने के लिए पलट गए तो गोलू ने कहा,”अरे फूफा ! चाय तो देते जाओ”
यहाँ तक आते आते और मंगल फूफा के डायलॉग सुनकर चाय लघभग ठंडी हो चुकी थी। उन्होंने पलटकर चाय गोलू के मुँह पर फेंकी और कहा,”ल्यो पी ल्यो”
मंगल फूफा वहा से चले गए और गोलू के चेहरे से चाय टपकने लगी। ये देखकर गुड्डू उसके पास आया और कहा,”ठीक है ना गोलू,,,,,,,,,,,!!”
“चीनी थोड़ी कम है , कित्ती बार कहे है अम्मा से चाय मा थोड़ी चीनी थोड़ी एक्स्ट्रा रखा करो पर नाही,,,,,,,,,,,,,,,साला जे वजह से ही पिताजी की जबान इत्ती कड़वी है”,गोलू ने मुँह बनाकर कहा
गुड्डू ने सुना तो अपना सर पीट लिया और कहा,”अबे गोलू ! हम तुमसे पूछ रहे है तुम ठीक हो न ?”
गोलू ने रोनी सी सूरत बनाकर सामने कोलर पकडे खड़े नवरत्न को देखकर कहा,”हम कहा ठीक है गुड्डू भैया ! देख नाही रहे हमाये सामने साक्षात् यमराज खड़े है,,,,,,,,,,,,,,इत्तो बड़ो तो हमहू काण्ड भी नाही किये जित्ती मार अब तक हमको पड़ चुकी है और एक जे मनहूस आदमी , इह का सादी की पड़ी है”
गुड्डू ने देखा सब अंदर है बाहर अब वह गोलू और नवरत्न है तो उसने नवरत्न को गोलू से दूर किया और अपनी तरफ करके कहा,”सुनो चचा ! अब तक हमहू चुप थे क्योकि हमाये पिताजी हिया खड़े थे पर अब ना पिताजी हिया है और ना ही हम चुप रहे है। एक तो गोलू जे उम्र मा तुम्हारी सादी करवा रहा है और तुमहू साला उसी को मार रहे हो। अरे तुमको रूपा पसंद है , मंगल कहता है उसको रूपा से पियार है पर रूपा ने तो अभी तक कुछ नहीं कहा ना,,पाहिले ओह्ह का मन की बात तो जान ल्यो कि उह्ह्ह का चाहती है ? लगे है तब से दोनों कुत्तो की तरह लड़ने,,
“हाँ तो पूछ ल्यो रूपा से कि उह्ह्ह हम से सादी करि है के उह्ह्ह हाल्फ टिकट से”,नवरत्न ने चिढ़कर कहा
“उह्ह्ह का हमायी भुआ की लड़की है जो जाकर पूछ ले ? अरे रुक जाओ मालिक थोड़ा टाइम दयो आराम से पूछेंगे ओह्ह से अभी घई घई मा पूछे और प्रेसर मा आकर उह्ह्ह मंगल फूफा का नाम ले बैठी तो तुमहू तो रह गए ना फिर से रंडवे”,गुड्डू ने कहा
“रंडवे नाही गुड्डू कंवारे”,नवरतन ने प्यार से कहा
“हाँ हाँ वही दोनों में कुछ खास फर्क नाही है,,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने कहा
“तो अब हम का करे ?”,नवरत्न ने हताश होकर कहा
गुड्डू ने कुछ सोचा और कहा,”एक काम करो अभी तुमहू घर जाओ , आराम करो और दो दिन के बाद मस्त नहा धो के नया सूट पहिन के घर आओ तब तक गोलू रूपा से बात कर लेगा”
“अरे गुड्डू भैया”,गोलू ने कहा लेकिन गुड्डू ने उसे कुछ कहने का मौका ही नहीं दिया तो नवरत्न ने कहा,”दो दिन बाद रूपा हमे ही मिलेगी न ?”
गुड्डू ने गोलू की तरफ देखा तो गोलू ने जल्दी जल्दी ना में गर्दन हिलायी लेकिन गुड्डू ने फिर भी नवरत्न से कहा,”अरे हाँ हाँ तुम्हे ही मिली है , तुमहू खुद को देखो और उह्ह्ह मंगल फूफा को देखो,,,,,,,,,,,,दोनों का आपस मा दूर दूर तक कोनो कम्पेरिजन नाही है,,,,,,,,,अरे कहा तुमहू सलमान खान कहा उह्ह्ह राजपाल यादव,,,,,,,,,हम लिख के देते है तुम्हायी जोड़ी रूपा के साथ टिप टॉप लगी है,,,,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू की बाते सुनकर नवरतन के मन के तार झनझना उठे और उसने खुश होकर कहा,”बस गुड्डू एक बार हमायी ओह्ह्ह से सादी हो जाए”
“हो जाएगी हो जाएगी,,,,,,,,,,तुमहू जाओ जाकर सादी की शेरवानी सिलो”,गुड्डू ने नवरत्न को बाहर जाने वाले रास्ते की तरफ धकियाकर कहा तो नवरतन ख़ुशी ख़ुशी वहा से चला गया। गुड्डू ने अपने सीने पर हाथ रखा एक गहरी साँस ली और जैसे ही पलटा हाथ में पीतल का लोटा लिए गोलू गुस्से से भरा खड़ा था।
गोलू के हाथ में लोटा देखकर गुड्डू घबरा गया वह कुछ बोलता उस से पहले गोलू बोल पड़ा,”पहिले सबके साथ मिलके बिना पाउडर हमायी धुलाई करवाई और अब उह्ह्ह नवरतन के साथ मिल के हमायी चिता सजा रहे हो,,,,,,,,,,,आज हम जान गए गुड्डू भैया हमायी जिंदगी की लंका लगाने में सबसे बड़ा हाथ आपका है,,,,,,,,,आज हम आपको छोड़ेंगे नाही”
“अबे लेकिन हमने का किया ? उलटा हमने तो ओह्ह्ह से तुम्हरी जान छुड़ाई है”,गुड्डू ने घबराकर कहा
“जान छुड़ाई है कि जान लेने की ठान लिए हो , दुइ दिन बाद उह्ह्ह आकर हमसे रूपा मांगेगा कहा से देंगे हम ओह्ह्ह का रूपा और उह्ह्ह्ह मंगल फूफा को पता चला तो ओह्ह् छत से कूद के मर जाएगा। पहिले ही रूपा के नाम पर अपना सीना पकडे बैठा है उह्ह्ह,,,,,,,,,,,,,,,इह बार बहुते अच्छा फसाये आप हमे गुड्डू भैया”,गोलू ने रोआँसा होकर कहा
गुड्डू डरते डरते गोलू के पास आया और कहा,”गोलू ! हमने उसको दो दिन का समय दिया है तब तक हम मिल के कुछ ना कुछ सोच लेंगे। नवरतन के लिए नयी लड़की का इंतजाम कर लेंगे और अगर लड़की नहीं भी मिली तो उसके 25 हजार उसको वापस लौटा देना”
गुड्डू की बात सुनकर गोलू को थोड़ी राहत मिली क्योकि गोलू ने नवरत्न के दिए पैसे चकिया जाने से पहले सम्हालकर रखे थे।
गोलू को अपनी बात पर सहमत होते देखकर गुड्डू ने कहा,”अब गुस्सा थूक दयो। कल हमने तुमसे जब पूछा था गोलू कोई कांड तो नहीं किये उह्ह्ह बख्त ही अगर हमे बता देते तो जे सब होता ही नहीं हमहू पहिले ही जाकर नवरतन को सम्हाल लेते”
“अरे गुड्डू भैया हमे का पता था जे नवरतन सुबह सुबह घर आ धमकेगा”,गोलू ने मुँह बनाकर कहा लोटा अभी भी उसके हाथ में था
“देखो गोलू ! पिताजी और सबके सामने तुम्हायी हमायी बहुते जियादा छीछालेदर हो चुकी है। इन सबकी नजरो मा हमे अपनी इज्जत वापस बनानी होगी। कुछ
दिन लिए हम तुम नाही मिलेंगे और कोई कांड नाही करेंगे”
गोलू ने सुना तो गुड्डू से चिपककर कहा,”गुड्डू भैया ! हम आपके बिना कैसे रह पाएंगे ?”
गुड्डू ने गोलू को दूर झटका और चिढ़कर कहा,”मर नाही रहे है , कुछ दिन शांत बैठने को कह रहे है तुमसे,,,,,,,,,,,,और कुछो काण्ड किये हो तो हमे बताय दयो ताकि पाहिले ही सम्हाल ले”
गुड्डू की बात सुनकर गोलू भी चिढ गया और हाथ में पकड़ा लोटा साइड में जोर से फेंककर गुड्डू से कहा,”आपको का लगता है गुड्डू भैया सारे काण्ड हम ही करते है”
गुड्डू ने गोलू की बात का कोई जवाब नहीं दिया और अंदर चला गया। अब गोलू की किस्मत इतनी बुरी इतनी बुरी इतनी बुरी कि उसने जो लोटा फेंका था वो जाकर लगा सामने लोहे के खम्बे पर और टप्पा खाकर गोलू की तरफ ही आया और लगा जोर से उसके सर पर,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!
गोलू पीठ के बल धरती पर आ गिरा और गोलू की बुरी किस्मत की अच्छाई तो देखो की उसी वक्त एम्बुलेंस घर के बाहर आकर रुकी जिसे कुछ देर पहले गुड्डू ने शर्मा जी के लिए बुलाया था।
एम्बुलेंस में से दो आदमी स्ट्रेक्चर लेकर उतरे और अंदर आये नीचे गिरे गोलू पर उनकी नजर पड़ी तो उनमे से एक ने गोलू से पूछा,”ए भैया ! अभी थोड़ी देर पहिले आये रहा। मरीज कहा है ?”
लोटे की मार से गोलू की आँखों के सामने तो ढेर सारी रंगीन चिड़िया उड़ रही थी लेकिन फिर भी गोलू को थोड़ा थोड़ा होश था उसने मरे हुए स्वर में कहा,”उसको तो होश आ गवा , एक काम करो हमे ही ले चलो”
इतना कहकर गोलू बेहोश हो गया और एम्बुलेंस वाले उसे ही उठाकर ले गए।
एम्बुलेंस की आवाज सुनकर सभी बाहर आये लेकिन बाहर ना गोलू था न एम्बुलेंस तो सब वापस अंदर चले गए।
अब थोड़ा चलते है चकिया की तरफ,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!
चकिया , चंदौली
शादी वाले दिन कानपूर वालो के भागने के बाद लल्लन और उसके आदमी भी भाग गए। लल्लन का साला लल्लन से नाराज होकर ऋतिक को बिन ब्याहे ही घर लेकर चला गया। मंगेश को होश नहीं था , एक तो अपने ही जिगरी दोस्त से उसे धोखा मिला उस पर बेटी भी घर से भाग गयी। सब मेहमानो और खानदान वालो में मंगेश की थू थू होने लगी। कुछ ने बिंदिया को गलत कहा तो कुछ ने कहा कि ऋतिक जैसे लड़के से शादी करने से तो अच्छा था बिंदिया भाग गयी। देर रात यही सब चलता रहा और फिर सब मेहमान और खानदान वाले एक एक करके वहा से चले गए।
शादी का मंडप , शादी का टेंट अभी भी लगा हुआ था। रातभर का जागा मंगेश शादी के मंडप में चला आया और गुस्से से भरी आँखों से फेरे की बुझी आग को देखने लगा। आग बुझ चुकी थी लेकिन राख के नीचे अभी भी थोड़ी चिंगारी थी ये देखकर मंगेश गुस्से से पानी से भरे मटको की तरफ आया और एक मटका लेकर मंडप में चला आया। उसने मटके का पानी राख पर उड़ेल दिया ये देखकर बिंदिया की अम्मा ने उसे रोका और कहा,”जे का कर रहे है आप ? छोड़िये इस”
मंगेश ने खाली मटका आँगन की तरफ फेंक दिया तो वह टूटकर यहाँ वह फ़ैल गया। मंगेश टूटकर वही घुटनो के बल गिर पड़ा और रोने लगा। उसे रोते देखकर बिंदिया की अम्मा का दिल पसीज गया वह भी उसके पास आ बैठी और कंधे पर हाथ रखकर कहा,”चिंता नाही करो बिंदिया के बापू सब ठीक हो जाही है,,,,,,,,,,,!!”
“कुछो ठीक नाही हुई है बिंदिया की अम्मा , कुछो ठीक नाही हुयी है। हमायी बिटिया हमाये मुँह पर कालिख पोतकर चली गयी। पुरे गाँव मा हमहू किसी को मुँह दिखाने लायक नाही रहे , इह से अच्छा तो हम ओह्ह्ह का जहर देकर मार दिए होते तो हमे आज जे दिन ना देखनो पडतो”,मंगेश ने रोते हुए कहा
लवली से प्रेम करके बिंदिया ने कुछ गलत नहीं किया लेकिन शादी के दिन वह लवली के साथ चली गयी ये उसने गलत किया और इसी बात ने मंगेश के मन को बहुत ठेस पहुंचाई
बिंदिया की अम्मा मंगेश को दिलासा देती रही कुछ देर बाद मंगेश गुस्से से उठा और आँगन में रखा फसल काटने का औजार उठाया और घर के दरवाजे की तरफ जाते हुए कहा,”इह सब उह्ह्ह मिश्रवा की वजह से हुआ है , हम उसे और उसके पुरे खानदान को खत्म कर देंगे”
बिंदिया की अम्मा मंगेश को रोकने के लिए भागी लेकिन तब तक वह वहा से जा चुका था।
( क्या गोलू और गुड्डू दो दिन बाद लौटा पाएंगे नवरतन को उसके रूपये ? क्या अभी भी गोलू का कोई कांड सामने आना बाकि है ? क्या मंगेश गुस्से में आकर उठाने वाला है कोई गलत कदम ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” हमाये साथ )
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Continue With Manmarjiyan Season 5 – 9
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संजना किरोड़ीवाल


“कुछो ठीक नाही हुई है बिंदिया की अम्मा , कुछो ठीक नाही हुयी है। हमायी बिटिया हमाये मुँह पर कालिख पोतकर चली गयी। पुरे गाँव मा हमहू किसी को मुँह दिखाने लायक नाही रहे , इह से अच्छा तो हम ओह्ह्ह का जहर देकर मार दिए होते तो हमे आज जे दिन ना देखनो पडतो”,मंगेश ने रोते हुए कहा
लवली से प्रेम करके बिंदिया ने कुछ गलत नहीं किया लेकिन शादी के दिन वह लवली के साथ चली गयी ये उसने गलत किया और इसी बात ने मंगेश के मन को बहुत ठेस पहुंचाई