Manmarjiyan Season 5 – 35

Manmarjiyan Season 5 – 35

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

रूपा मंगल फूफा और नवरतन दोनों के दिलो को अपने पैरों से कुचलकर अपने आशिक जानकीनाथ के साथ वहा से चली गयी। मंगल फूफा तो होश में ही नहीं थे पहली बार प्यार में उनका दिल टुटा था और अब उनको दीन-दुनिया की खबर नहीं थी। मिश्रा जी ने आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ से अपना सामान बांधने को कह दिया और लवली से कहा कि वह जाकर बिंदिया से बात करे ताकि मिश्रा जी जल्दी ही उसके और बिंदिया के रिश्ते के लिए मंगेश से मिल सके।

गुड्डू गोलू के साथ तो इस से भी बुरा हुआ , उन दोनों की मनमानियाँ और आये दिन होते नए नए कांड देखते हुए मिश्रा जी ने दोनों को एक दूसरे से दूर रहने को कह दिया। गुड्डू और गोलू चाहे जितना लड़े झगड़े एक दूसरे को मार पीट ले लेकिन रहना उनको फिर भी साथ ही होता था। मिश्रा जी के इस फैसले से गोलू बहुत दुखी था लेकिन गुड्डू कही न कही खुश था कि चलो कुछ दिन के लिए उसे गोलू के कारनामो से छुटकारा मिलेगा।

नवरतन गोलू से अगली सुबह आने आकर अपने पैसे लेने की धमकी देकर चला गया। गोलू बेचारा एक कांड से निकला नहीं कि दूसरे काण्ड में फिर फंस गया लेकिन इस बार उसे परवाह नहीं थी क्योकि नवरतन के दिए 25 हजार सही सलामत रखे थे जो उसने पिंकी को दिए थे। गोलू ने राहत की साँस ली और गुड्डू की तरफ पलटकर कहा,”अरे आप टेंशन नाही ल्यो गुड्डू भैया ! पइसा रखा है हमाये पास , आन दयो कल नवरतनवा को उठा के मुँह पे मारेंगे ओह्ह्ह के 25 हजार,,,,,,,,,,,!!!!”

“बहुत बढ़िया गोलू ! पहली बार तुमहू कोनो नए कांड मा नाही,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने इतना ही कहा कि गोलू ने उसका मुँह बंद करके कहा,”ना गुड्डू भैया ना , एक ठो शब्द नाही बोलना,,,,,,,,,,,,,,जब भी आप हमायी तारीफ मा कुछो बोलते है हमायी ऐसी लंका लगती है कि बुझाये नाही बुझती”
“तो तुम्हरे कहने का मतलब है हमायी जबान काली है ? हमहू कहेंगे कल तुम कल नवरतन को 25 हजार नाही दे पाओगे तो मतलब नाही दोगे,,,,,,,,,,,,,,,,का गोलू तुम भी ?”,गुड्डू ने बिगड़कर कहा

“ए गुड्डू भैया ! ए हमहु ना आपके आगे हाथ जोड़ते हैं हमे बक्स दयो , हमहू जे देवदास को लेकर घर जाते है आप भी अंदर जाईये,,,,,,,,,,,,,,और खबरदार जो आज के बाद हमसे मिलने की कोशिश भी की , आज से हमाओ नंबर ब्लेक लिस्ट मा डाल देओ”,गोलू ने हाथ जोड़कर पहले मिमियाते हुए कहा और फिर  एकदम से उबल पड़ा

गुड्डू ने देखा तो गोलू को एक थप्पड़ मारा और कहा,”अबे का दौरे पड़ते है का तुमको ? और जाओ नाही मिलेंगे तुमसे आज के बाद साला जब जब तुमसे मिलते है अपनी ही खाल छिलते है और सुनो बे ! तुम का हमायी गर्लफ्रेंड हो जो तुम्हरा नंबर ब्लेक लिस्ट मा डाल दे,,,,,,,,,,साला नंबर ही डिलीट कर देंगे तुम्हरा”

गोलू ने सुना तो घूरकर गुड्डू को देखा और फिर नीचे पड़े मंगल फूफा को उठाकर गुड्डू से बड़े प्यार से कहा,”गुड्डू भैया ! उह्ह्ह एक ठो सो का नोट मिलेगा का ? उह्ह्ह का है ना स्कूटी मा पेट्रोल डलवाना है”
गुड्डू ने घूरकर गोलू को देखा और अंदर जाते हुए कहा,”तुम ना सुधरे हो गोलू,,,,,,,,,,,,,साले भाग जाओ हिया से”

गोलू गुड्डू को देखता रहा और फिर जब गुड्डू वापस नहीं आया तो मंगल फूफा को लेकर दरवाजे की तरफ बढ़ गया ! मंगल फूफा बदहवास से बस रूपा के नाम की आहें भर रहे थे।
“अरे बस करो फूफा तुम्हायी रूपा अब तुम्हायी नाय रही , उह्ह्ह अपने आसिक के साथ चली गयी है”,गोलू ने मंगल फूफा को समझाते हुए कहा

“हमायी रूपा , हमायी रूपा ऐसी नाय थी गोलू”,मंगल फूफा ने रोते हुए कहा
“अरे तुम्हायी रूपा सुरु से ऐसी ही थी तुम्हायी आँखों पर प्यार नाम की पट्टी बंधी थी , अब रोना बंद करो और घर चलो हमाये साथ”,गोलू ने झुंझलाकर कहा
“रूपाआआआ”,मंगल फूफा ने कहा

गोलू ने जिस बाँह से मंगल फूफा को थामा था उसी हाथ से उनके गाल पर थप्पड़ मारा और चिढ़कर कहा,”का रूपा रूपा रूपा लगा रखो है,,,,,,,,,,,,,अरे कानपूर मा लड़कियों की कमी है का ?  साला एक जाएगी दूसरी आएगी , दूसरी जाएगी तीसरी आएगी”

“हमको हमायी रूपा ही चाही,,,,,,,,,,,,,,,,,रूपाअअअअअअअ “,मंगल फूफा ने फिर रूपा के नाम का राग अलापा
“साला सूअर को कित्ता भी लक्स साबुन से नहला दो लौटेगा तो उह्ह जाकर कीचड़ मा ही,,,,,,,,,,एक काम करो भाड़ मा जाओ तुम”,कहकर गोलू ने मंगल फूफा को छोड़ दिया और मंगल फूफा सड़क पर फ़ैल गए
गोलू ने अपनी स्कूटी को स्टार्ट किया और मंगल फूफा की तरफ देखकर कहा,”आखरी बार पूछ रहे है चलोगे कि मुंसिपाल्टी की गाडी भेजे तुम्हाये लिए ?”

मंगल फूफा ने देखा कि उनकी प्यारी रूपा उन्हें छोड़कर जा चुकी है , मिश्रा जी ने भी उन्हें घर से निकाल दिया है और अब बचा गोलू तो वही उनका एकमात्र सहारा है। मंगल फूफा उठकर बैठे , अपने आँसू पोछे और गोलू के पीछे आ बैठे। गोलू ने स्कूटी घर जाने वाले रास्ते की तरफ बढ़ा दी।

मिश्रा जी की बात का बुरा मानकर आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ गुस्से में जल्दी जल्दी अपना सामान पैक करने लगे जैसे ट्रेन नहीं मिली तो इसी सामान के साथ पैदल जौनपुर के लिए निकल जायेंगे।
“देख ली अपने भैया का पियार राजकुमारी ? कैसे सबके सामने हमे जे घर से जाने को कह दिया ,, अरे जे घर मा आना जाना तब तक ही था जब तक तुम्हायी अम्मा ज़िंदा थी अब तो हिया आकर अपनी छीछा लेदर भले करवाय लो,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,आदर्श फूफा ने गुस्से से उबलते हुए कहा

“अरे हमको तो बोला सो बोला बेचारे उह्ह्ह गोलुआ को भी कैसे सूत दिए रहय , अरे का हुई गवा जो उह्ह्ह बेचारा हमाये साथ बाट्सअप्प ग्रुप बनाय लिया तो , उलटा हमे हिया की अच्छी बुरी खबर ही देता था कौनसा कुछो गलत किया ?”,राजकुमारी भुआ ने उदास होकर कहा
आदर्श फूफा गोलू से एक तो ऐसे ही बहुत चिढ़ते थे ऊपर से राजकुमारी भुआ के मुँह से उसका नाम सुनकर और चिढ गए और गुस्से से कहा,”का गलत किये ? अरे उह्ह्ह आदमी नाही , आदमी के कपड़ो मा चलती फिरती मुसीबत है मुसीबत ,

काण्ड कबो गोलूआ के पास नाही आता बल्कि उह्ह्ह ससुरा गोलुआ नहा धो के बाल बना के खुद अपनी कमर मटकाते काण्ड के पास जाता है और बाद मा हिया हुआ भागता फिरता है। अरे का जरूरत थी ओह्ह्ह का तुम्हरे साथ ग्रुप बनाने की , हिया साला हमहू सुबह सुबह अख़बार पढ़ते हुए चाय के लिए मिन्नते करते रहते है और तुमहू उह्ह्ह गोलुआ के भेजे सुप्रभात मेसेज पर खीखीखीखी करती रहती हो,,,,,,,,,,,,,,अरे उह्ह्ह गुड मॉर्निंग का मसेज नाही भेजेगा तो का सुबह नाही होगी ?”

आदर्श फूफा की बाते सुनकर राजकुमारी भुआ के चेहरे पर गुस्से के भाव उभर आये और उन्होंने फूफा की कोलर को दोनों हाथो से पकड़ना चाहा लेकिन हाथ उनकी कोलर तक पहुंचे ना।
“एक मिनिट”,भुआ ने फूफा से रुकने को कहा और एक कुर्सी ले आयी , भुआ कुर्सी पर चढ़ी और आदर्श फूफा की कोलर पकड़ कर गुस्से से कहा,”खबरदार जो हमायी बूटी और हमाये चरित्र पर सक किया तो,,,,,,,,,,,,,अरे उह्ह्ह बेचारा गोलुआ , उह्ह्ह हमाये बिटवा की उम्र का है अब का हमहू ओह्ह्ह के साथ चक्कर चलाएंगे , नहीं समझ का लिए हो आप हमको कोमलिया के पिताजी ? हमहू केक्टसलेस है तो आप का है केक्टसमोर,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”

शगुन सुबह की चाय लेकर भुआ जी के कमरे में आयी लेकिन जब उसने भुआ और फूफा को इस हालात में देखा तो हैरान रह गयी और जब भुआ के मुँह से कैरेक्टरलेस की जगह केक्टस लेस सुना तो अंदर आते हुए कहा,”कैक्टसलेस नहीं भुआ जी कैरेक्टरलेस , केक्टस का मतलब तो नागफनी होता है”

“अरे शगुन बिटिया ! दिखाई नाही देता जे नागफनी की भांति ही तो लिपटी है हमायी गर्दन से,,,,,,,,,,,,,,,,,ए राजकुमारी ! अरे इह का कर रही हो ?”,आदर्श फूफा ने मिमियाकर कहा
शगुन ने ट्रे रखी और भुआ फूफा की तरफ आकर भुआ जी के हाथ से फूफा की कोलर छुड़ाकर उन दोनों को दूर करके कहा,”बस ! बहुत हो गया”

शगुन को गुस्से में देखकर भुआ जी और फूफाजी दूर दूर खड़े हो गए तो शगुन ने उसी गुस्से से कहा,”क्या हो गया है आप सबको ? अच्छे खासे घर को आप सबने सर्कस बना रखा है और भुआ जी आप , आप तो घर की बड़ी है ना , आपका फर्ज बनता है सबको समझाने का लेकिन आप तो खुद ही बच्ची बनी बैठी है और फूफा जी आप , आप इतने बड़े है , समझदार है लेकिन पापा जी को रोकने के बजाय और भड़काते है। इस घर के लोग दिनभर आपस में लड़ते झगड़ते रहते है , ना कोई किसी की सुनना चाहता है ना कोई किसी को समझना,,,,,,,,,,,बस सब अपनी मनमर्जी किये जा रहे है”

शगुन का गुस्सा देखकर फूफा ने तो अपना मुँह ही सिल लिया , राजकुमारी भुआ शगुन की तरफ आयी और उसकी पीठ सहलाते हुए कहा,”अरे नहीं नहीं बिटिया ! इत्ता गुस्सा नाही करते तुम्हरे होने वाले बच्चे की सेहत पर असर पडेगा,,,,,,और हम कहा लड़ रहे है ? हम तो तुम्हाये फूफा के कुर्ते का कोलर ठीक कर रहे थे ,, अब का करे हमाओ कद कम है ना तो जे वास्ते कुर्सी पर चढ़त रहे,,,,,,,तुमहू जो देखी उह्ह्ह सच थोड़े है,,,,,,,,,,,,,,,पगली ! जाओ तुमहू जाकर अपने कमरा मा आराम करो हमहू चाय पी लेते है , तुम्हाये फूफा को भी पिला देंगे , हैं बिटिया ! तुमहू जाओ”

“पक्का इसके बाद आप दोनों कोई झगड़ा नहीं करेंगे ?”,शगुन को भुआ की बातो पर विश्वास कम ही था
“अरे पक्का ! नहीं करेंगे तुमहू जाओ”,भुआ ने कहा तो शगुन वहा से चली गयी

लवली बिंदिया से बात करने वेदी के कमरे में आया। बिंदिया बिस्तर के किनारे बैठी सिसक रही थी और उसके पास बैठी वेदी उसे ना रोने के लिए कह रही थी।
“वेदी ! तुमहू ज़रा बाहिर जाओ हमे बिंदिया से कुछो बात करनी है”,लवली ने बिंदिया और वेदी की तरफ आकर कहा
“ठीक है भैया ! रूपा जब से गयी है इह रोये जा रही है , अब आप ही इन्हे समझाइये,,,,,,,,,,,!!!”,वेदी ने लवली से कहा और कमरे से बाहर चली गयी। जाते जाते वह कमरे का दरवाजा भी बंद कर गयी जिस से अंदर की बातें बाहर ना जाये।

वेदी के जाने के बाद लवली ने बिंदिया से कहा,”बिंदिया ! का हुआ , रो काहे रही हो ?”
बिंदिया उठी और लवली के सामने आकर , अपनी आँखों में मोटे मोटे आँसू भरकर कहा,”हमे माफ कर दो लवली , रूपा ऐसा कुछो करेगी हमहू नहीं जानते थे। हमे पता होता रूपा हिया मंगल फूफा के लिए नाही बल्कि किसी और के लिए आयी है तो हमहू ओह्ह्ह का साथ कबो नाही देते। हमायी वजह से मंगल फूफा का दिल टुटा , तुम्हाये पिताजी को सबके सामने इत्ता सर्मिन्दा होना पड़ा , हमहू तुम्हाये गुनहगार है लवली हमका माफ़ कर दयो,,,,,,,!!!”

लवली ने सुना तो बिंदिया के चेहरे को अपने हाथो में लिया और कहा,”बिंदिया , बिंदिया सांत हो जाओ , जे सब मा तुम्हायी कोनो गलती नाही है ! अरे उह्ह्ह रूपा मंगल को धोखा दी जे मा तुम्हरी का गलती , तुमको थोड़े ना पता था रूपा हिया काहे आयी है ? जे सब के लिए खुद को दोष देना बंद करो तुम,,,,,,,,,,,,,!!!”  

“हमे बहुते बुरा लग रहा है लवली , हमायी वजह से इह सब हो रहा है। रूपा हमायी सहेली थी सब हमे गलत समझेंगे”,बिंदिया ने रोते हुए कहा
लवली ने बिंदिया को वहा पड़ी कुर्सी पर बैठाया और खुद उसके सामने घुटनो के बल आ बैठा और उसके हाथ को अपने हाथ में लेकर समझाते हुए कहा,”देखो बिंदिया ! तुमहू जो सोच रही हो वैसा कुछो नाही है। अरे कोई तुमसे नाराज नहीं है , सबको पता है इह मा तुम्हायी कोनो गलती नाही है,,,,,,,,,,,,,,

अच्छा सुनो पिताजी ने खुद हमे हिया तुम्हाये पास भेजा है बात करने के लिए , पिताजी तुम्हाये पिताजी से मिलना चाहते है और इह सब मामला सुलटाना चाहते है। तुमहू रूपा मंगल फूफा और बाकि सब को भूल जाओ और हमाये बारे मा सोचो बिंदिया ! एक बार हमायी सादी हो जाए फिर हम दोनों हिया से हमेशा हमेशा के लिए चले जायेंगे,,,,,,,,,,,,,जे शहर , जे घर , जो लोगो के बीच हम नाही रह पाएंगे”
“सच कह रहे हो लवली ?”,बिंदिया ने आँखों में आँसू भरकर पूछा  

“हाँ सच कह रहे है”,लवली ने बिंदिया के हाथ को अपने दोनों हाथो में मजबूती से थामकर कहा। बिंदिया ने नम आँखों के साथ हामी में गर्दन हिला दी। लवली ने
 अपना सर बिंदिया की गोद में टिका दिया क्योकि अब तक वह भी ये सब देखकर थक चुका था और सच कहा जाये तो लवली को ऐसी जिंदगी की आदत बिल्कुल नहीं थी।

गुप्ता जी का घर , कानपूर
सुबह सुबह गुप्ता जी धोती कुर्ता पहने , हाथ में पानी का लोटा लिए घर के आँगन में लगे तुलसी के पौधे को पानी देने बाहर आये। तुलसी को पानी देते हुए उन्होंने घर ले दरवाजे की तरफ देखा और मन ही मन बड़बड़ाये,”इह ससुरा गोलू और मंगलू अभी तक आये काहे नाही ? लगता है रात मा मिश्रा कुछो जियादा ही खातिरदारी किये रहय दोनों की,,,,,,,,,,,,,अहा ! ससुरे है भी मार खाने लायक,,,,,,,,,ऊपर से जब से इह मंगलवा आया है तब से जे गोलुआ के भी कुछो जियादा ही पर निकल आये है,,,,,,,,,,,,,,,एक से बुरे दो”

“अरे का अब दिनभर तुलसी मैया के पास ही खड़े रहेंगे , अंदर आकर ज़रा उह्ह घी का डब्बा उतार दीजिये हमाओ हाथ नाही पहुंच रहो”,सीढ़ियों पर खड़ी गुप्ताइन की आवाज गुप्ता जी के कानो में पड़ी तो उनकी तंद्रा टूटी और वे तुलसी माता को प्रणाम कर गुप्ताइन की तरफ पलटकर बोले,”हाथ नाही पहुंच रहो तो जबान से ट्राय कर ल्यो , उह्ह तो बहुते बड़ी है,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

गुप्ताइन मुस्कुराई और कहा,”गोलू के पिताजी ! आज का नाश्ता का बाहिर खाने वाले है आप ?”
“घर मा होकर बाहिर काहे खाएंगे ?”,गुप्ता जी ने गुप्ताइन की तरफ आते हुए हैरानी से कहा
“का है कि हमहू तो ना देही है आज,,,,,,उह्ह्ह अपने नालायक बिटवा के साथ रहय के आप भी ओह के जइसन हो गए है , अब नास्ता भी ओह्ह्ह के साथ ही कीजियेगा ,, हमायी जबान को लंबा कह रहे है”,कहते हुए गुप्ताइन ने घर का  दरवाजा गुप्ता जी के मुँह पर बंद कर दिया जो की सीधा आकर गुप्ता जी की नाक पर लगा और गुप्ता जी मारे दर्द के चिल्लाये।

“जे आपके चक्कर मा अम्मा ने हमे काहे तोडा ?”,गुप्ता जी के पीछे खड़े गोलू ने कहा
गुप्ता जी अपनी नाक पकडे पीछे मुड़े , गोलू को देखते ही उनका गुस्सा और बढ़ गया और उन्होंने खींचकर गोलू को एक थप्पड़ मारकर कहा,”क्योकि हमाये जीवन का सबसे बड़ा अचीवमेंट तुमहि हो”
एक ही थप्पड़ में गोलू घूमते हुए मुँह के बल सामने से आती फुलवारी के पैरो में आ गिरा।

गोलू ने सर उठाकर फुलवारी को देखा और हाथ जोड़कर कहा,”पाय लागू चाची”
फुलवारी हैरान परेशान सी कभी नीचे गिरे गोलू को देखती तो कभी सामने खड़े गुप्ता जी को,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”

( क्या गुड्डू और गोलू ने कर लिए है सच में अपने रास्ते अलग ? क्या लवली और बिंदिया चले जायेंगे हमेशा हमेशा के लिए कानपूर छोड़कर ? क्या मंगल फूफा की जिंदगी में फिर से एंट्री लेगी फुलवारी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35

Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35Manmarjiyan Season 5 – 35

Continue With Manmarjiyan Season 5 – 36

Read Manmarjiyan Funny Story

Follow Me On https://www.instagram.com/sanjanakirodiwal/

संजना किरोड़ीवाल

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal
Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!