Manmarjiyan Season 5 – 17

Manmarjiyan Season 5 – 17

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

गोलू की बात सुनकर मंगल फूफा गुस्से से आग बबूला हो गए और होते भी क्यों नहीं गोलू ने उनकी प्यारी रूपा के लिए इतनी गन्दी बात जो कही थी। गोलू ने जिस रूपा का नाम लिया वो एक कम्पनी का नाम था और मंगल फूफा अपनी रूपा समझ बैठे। मंगल फूफा को गुस्से में लाल देखकर दिवार से चिपके गोलू ने धीरे से कहा,”अरे का फूफा ! का कुछो गलत बोल दिए रहय का हमहू ?”

मंगल फूफा गोलू के पास आये और उसे अपने हाथ की चार उंगलिया दिखाकर कहा,”गलत ? अबे अश्लील हो तुमहू , हमे ना पतो थो गोलू तुम्हायी बुद्धि इत्ती भ्रष्ट है , अरे कैसे सक्ति कपूर जैसे आदमी के साथ घूम रहे थे हमहू”
“जे अपनी डेढ़ फुट की जबान को लगाम लगाओ फूफा , का कुछ भी बके जा रहे हो ? ऐसो तो का कर दिए हमहू जो तुमहू हमको इह सब उपाधियाँ दे रहे हो ?”,गोलू ने हाथ में पकड़ा लक्स साबुन साइड में फेंककर गुस्से से कहा
“का कह दिए ? अबे तुमको रूपा की च,,,,,,,,,,,,,छी छी हमको तो कहते हुए भी सरम आ रही है।

उह्ह्ह दरजी काफी नाही था जो अब तुमहू भी हमायी रूपा के पीछे पड़ गए हो”,मंगल फूफा ने भी बिफरकर कहा
गोलू ने सुना तो उसका माथा ठनका और उसने कहा,”अरे हम तुम्हायी रूपा की नाही अपनी रूपा अंडरवियर की बात कर रहे है”

गोलू ने इतना कहा ही था कि तभी उसकी रूपा की अंडरवियर उड़ते हुए आकर उसके मुँह पर गिरी जिसे कुछ ही दूर खड़े गुप्ता जी ने फेंका था और चिल्लाये,”अबे ओह्ह्ह गोबरपरसाद ! ले दे के दुइ तो जांगिया है तुम्हाये पास उह्ह्ह भी जब देखो तब हमाये कपड़ो के बीच पड़ा रहता है , अगली बार मिला ना तो स्कूटर का पोछा बना देंगे समझे”

गुप्ता जी चले गये तो गोलू ने मुँह से अपना अंडरवियर हटाया और दोनों हाथो से उसकी इलास्टिक खींचकर मंगल फूफा के सामने करके कहा,”इह देखो इह रूपा की बात कर रहे थे हमहू , देखो पीछे दुइ छेद भी है”
मंगल फूफा को समझ आया तो उन्होंने थोड़ा नरम होकर कहा,”अरे माफ़ करना गोलू वो हमहू जरा भावनाओ मा बह गए थे”

“का फूफा ! तुम्हायी भावनाओ के चक्कर मा अभी हम निपट जाते ,, चिल्लाये तो ऐसे जैसे कोनो किडनी निकाल लिए हो तुम्हरा,,,,,,,,!!!”,गोलू ने मुँह बनाकर कहा
“अरे ठीक है न गोलू ! वो रूपा के नाम पर बस थोड़ा इमोशनल हो जाते है”,मंगल फूफा ने खिंसियाते हुए कहा
“का इत्ता पियार करने लगे हो ओह्ह्ह से ?”,गोलू ने पूछा
मंगल फूफा ने गोलू को देखा और विश्वास से भरकर कहा,”अपनी जान से भी जियादा”

गोलू को मंगल फूफा का मामला थोड़ा गंभीर लगा तो उसने कहा,”ठीक है फूफा ! फिर तो रूपा से तुम्हायी सादी करवाय के रहेंगे , हमाये रूपा कच्छे की कसम”
“ए गोलू ! हमायी रूपा को अपने कच्छे से कम्पेयर नाही करो बताय दे रहे है”,मंगल ने फिर गुस्सा होकर कहा तो गोलू ने मंगल फूफा के कंधो पर अपनी बाँह रखी और उसे अपनी तरफ करके कहा,”अरे मजाक कर रहे है फूफा , का अब मजाक भी नाही कर सकते”

मंगल फूफा ने हामी में गर्दन हिलायी तो गोलू उनसे दूर हटा और बाथरूम के अंदर ना जाकर बाहर ही बैठकर नहाने लगा। जब साबुन लगाने की बारी आयी तो देखा साबुन तो है ही नहीं , मंगल फूफा वही बैठे अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे। अच्छा गोलू को किसी से अपना काम निकलवाना होता था तो वह बड़े प्यार से बात करता था। उसने मंगल फूफा से भी बड़े प्यार से कहा,”फूफा ! ओह्ह्ह मंगल फूफा तनिक हमायी लक्स तो देइ दयो”
“कहा रखे हो ?”,मंगल फूफा ने उठकर कहा

“यही कही पड़ी होगी का है कि गुस्से गुस्से मा फेंक दिए रहय , तुमहू ढूँढ के लाओ तब तक हमहू फेस वाश लगा लेते है”,कहकर गोलू ने सामने रखे बॉक्स पर हाथ मारा और फेशवाश की जगह पिंकी का शेम्पू का बोतल हाथ में आया। अब गोलू महाराज बोतल पर ध्यान दे तब ना उन्हें पता चले कि ये शैम्पू है या फेस वाश , उसने भरकर शेम्पू को अपनी हथेली पर लगाकर मुँह पर घिसने लगा।

मंगल फूफा गोलू का फेंका साबुन ढूंढने लगे , उन्हें साबुन मिला और वे लेकर जैसे ही पलटे उसी वक्त फुलवारी किसी काम से गुप्ता जी के घर में आयी और मंगल फूफा से टकरा गयी और लड़खड़ा कर गिर पड़ी। मंगल ने फुलवारी को उठाया और देखा उसकी साड़ी खराब हो गयी है तो अपने हाथो से मिट्टी झाड़ते हुए कहा,”अरे इह तो खराब हो गयी”

“रहने दीजिये हम कर लेंगे”,फुलवारी ने कहा
मंगल फूफा की किस्मत तब से खराब चल रही थी जब से उन्होंने गोलू का साथ पकड़ा था , जैसे ही उन्होंने फुलवारी की साड़ी को छुआ गुप्ता जी के घर के दरवाजे पर खड़े यादव जी चिल्लाये,”अबे मंगलू के बच्चे , साले आशिक की औलाद,,,,,,,,,,तुमहू फिर से हमायी फूल पर नजर डाले ब्लडीफूल”

मंगल ने देखा यादव उसे मारने आ रहा है तो उसने हाथ में पकड़ी साबुन फुलवारी को थमाई और वहा से भाग गया।
“तुमसे तो हमहू बाद मा बात करेंगे पहिले उह्ह्ह छछूंदर की बत्ती बनाय दे”,यादव जी ने फुलवारी के बगल से निकलते हुए कहा और मंगल के पीछे भाग गए  

फुलवारी ने हाथ में पकड़ा साबुन देखा लेकिन उसका करे क्या सोचकर वह जैसे ही वहा से जाने को हुई गोलू की आवाज उसके कानो में पड़ी,”अरे फूफा ! साबुन मिली का ?”
“लगता है इह साबुन गोलू बिटवा का है,,,,,,हम उसे दे देते है”,फुलवारी बड़बड़ाई और गोलू की तरफ बढ़ गयी। वह जैसे ही गोलू के सामने पहुंची गोलू की दोनों आँखे बंद क्योकि फेसवाश समझकर जिस शैम्पू को उसने अपने मुँह पर मला था वो अब उसकी आँखों में घुस गया।

फुलवारी गोलू से कुछ कहती इस से पहले गोलू बोल पड़ा,”ए फूफा ! जब इह साबुन ले ही आये हो तो ज़रा हमायी पीठ पर भी मल दयो , का है कि हमाओ हाथ हुआ तक नाही पहुंचे है,,,,,अरे खड़े खड़े सोच का रहे हो जल्दी करो। हिया साला हमायी आँखे नाही खुल रही है पता नाही कौनसा फेसवाश धरे रही पिंकिया , ए फूफा मल दयो यार”

बेचारी फुलवारी सोच में पड़ गयी और फिर आगे बढ़कर गोलू की पीठ पर साबुन लगाने लगी। गोलू को तो बड़ा मजा आ रहा था वह आँखे बंद किये कभी यहाँ तो कभी वहा साबुन लगाने को कहता।
“एक बात कहे ! तुम्हाये हाथो से नहा के मजा आ गवा , इत्ता अच्छा साबुन तो कबो पिंकिया भी नाही लगाई हमे”,गोलू ने अपनी बांहो पर लगे साबुन को मलते हुए कहा

अब जैसी बेचारे गोलू की किस्मत है , उसका ये कहना हुआ और उसी पल पिंकी का वहा आना हुआ और जैसे ही उसने फुलवारी को गोलू की पीठ पर साबुन मलते देखा गुस्से से आग बबूला हो उठी और रही सही कसर गोलू के शब्दों ने पुरी कर दी और पिंकी ने उसके सामने आकर गुस्से से कहा,”हाँ हाँ हमाये हाथ से साबुन लगवाने में काहे मजा आएगा तुमको गोलू , बाहिर रंगबाजी करने की आदत जो पड़ चुकी है”

पिंकी की आवाज सुनकर गोलू ने जल्दी से अपनी आँखों को मसला और देखा सामने पिंकी है , फिर उसने गर्दन घुमाकर देखा तो पीछे खड़ी फुलवारी पर नजर पड़ी जिसके हाथ में साबुन था और उसे देखकर गोलू जोर से चिल्लाया और उठ खड़ा हुआ। गनीमत थी कि उसने नीचे कच्छा पहना था। गोलू चिल्लाया तो फुलवारी चिल्लाई और ये चिल्लम चिल्ली सुनकर गुप्ता जी और गुप्ताइन भागकर बाहर आये।

बाथरूम के बाहर पिंकी गोलू और फुलवारी को देखकर दोनों हैरान और फिर गुप्ता जी ने उनकी तरफ आते हुए पिंकी से पूछा,”का बात है बिटिया ! तुमहू चिल्लाई काहे ? कोनो भूत देख लिया का ?”
“इह जीता जागता भूत भगवान् जो हमायी किस्मत मा लिख दिए है , हम का दूसरे भूतो को देखकर डरेंगे पापाजी ! हमे डराने के लिए तो इनके काण्ड ही काफी है,,,,,,,,,,,हाय ! हमने कबो सोचा नाही था गोलू तुमहू इत्ता गिर जाओगे”,पिंकी ने अपनी छाती पीटकर कहा

“का गिर गए हमहू ? कच्छा पहिने तो है”,गोलू ने कहा जो सर से लेकर पाँव तक झाग में नहाया हुआ था।
गुप्ता जी कुछ समझ पाते तब तक गुप्ताइन भी वहा चली आयी लेकिन फुलवारी को देखकर ठिठकी और कहा,”तुम हिया का कर रही हो ?”

“अरे माजी ! इह का बताई है हम बताते है ,, इह हिया खड़े होकर गोलू जी की पीठ पर साबुन मल रही थी,,,,,,,,,,,अरे अपने से छोटो बड़ो भी नाही देखी जोन मिला ओह्ह्ह पर डोरे डाल देहि,,,,,,,,,,,,पहिले पापाजी , फिर मंगल फूफा और हमाये गोलू इनके चक्कर मा पड़ गए माजी ! हमहू तो बर्बाद हुयी गए,,,,,,,,,,,का का दिन देखनो पड़ रहो है हमे जे घर मा,,,,,,,,,,,,,,,का मुँह दिखाई है हमहू अपने होव वाले बच्चे को,,,,,,,,,,!!!”,कहते हुए पिंकी ने साड़ी का पल्लू मुँह में खोंसा और रोते हुए अंदर चली गयी।

“अरे पिंकिया ! बिटिया सुनो,,,,,,,,,,,,!!!”,गुप्ताइन ने आवाज दी लेकिन पिंकी नहीं रुकी और रोते हुए अंदर चली गयी ये देखकर गुप्ता जी ने गुप्ताइन पर बिफरकर कहा,”सुनो नाही देखो ! देखो अपने सपूत के कारनामे ,, अरे दिन दहाड़े इह अधनंगा होकर फुलवारी से साबुन लगवाय रहा है,,,,,,,,,,,,,का बुद्धि घास चरने चली गयी है इह नालायक की ? बेचारी बहू पर का बीत रही होगी क्योकि जे पिरोगराम तो अपनी आँखों से देखी है”

“अरे का कारनामा किया हमने ? हमने थोड़े कहा था इनसे कि हमे साबुन लगाओ , अरे हमहू तो मंगल फूफा से कहे रहे इह बीच मा कहा से आ गयी हमे का पतो ? और कुछो नाही गुजरी है पिंकिया पे , अरे अपने पति पर रत्ती भर भरोसा नाही है ओह्ह्ह का बस जो देखा उह सच मान के छाती पीटना सुरु,,,,,,,अरे जब से सादी हुई है साला किसी लड़की को आँख उठाकर नाही देखे है,,,,,,,,,,,,,,,ए चाची ! चुप काहे कुछो बोलो कि हमाओ तलाक के बाद बोलोगी ?”,गुप्ता जी से कहते कहते गोलू ने फुलवारी पर बिफर कर कहा

”अरे हम का बोले ? हम कोनो काम से हिया आय रहे उह मंगल भैया हमे जे साबुन की टिक्की थमाकर चले गए इत्ते में तुमने आवाज मारी , तुमको बताने आये तो तुमने हमे बोलने का मौका ही नाही दिया और कहा यहाँ साबुन लगा दो यहाँ लगा दो,,,,,,,,,,,तो हमहू लगाय दिए”,फुलवारी ने मुँह बनाकर कहा
“काम के लिए तुमको हमेशा इह घर ही है का ? जब भी आती हो कुछो न कुछो कांड करके जाती हो”,गुप्ताइन ने कहा

“हम का किये हमहू तो बस साबुन लगाए थे”,फुलवारी ने कहा
“साबुन नाही ! तुमहू हमायी लंका लगाय दी हो,,,,,,,,,,,,पूरा कानपूर एक तरफ और उह्ह पिंकिया एक तरफ ,, ऐसी आग लगायेगी हमाये जीवन मा पता नहीं कहा कहा से धुँआ निकलेगा ? ए पिताजी ए हमका बचाय ल्यो”,गोलू ने गुप्ता जी के सीने से लगते हुए कहा

गोलू के साथ साथ उस पर लगा झाग भी गुप्ता जी के कुर्ते पर आ लगा तो गुप्ता जी ने बड़े प्यार से गोलू के गाल पर एक चाँटा मारा और उसकी गुद्दी पकडकर उसे साइड किया और कहा,”ऐसा है ना बेटा ! तुमहू फैलाये हो अब तुम्ही समेटो ,, मिया बीवी के मामले मा हमहू कुछो नाही बोले है”

“अरे तुम काहे बोलोगे गुप्ता ?”,यादव जी की आवाज सबके कानो में पड़ी। यादव जी मंगल फूफा की गुद्दी पकड़कर उन्हें सबके बीच लाये और गोलू की तरफ फेंककर गुस्से से कहा,”ए गुप्ता ! ए साला तुम और तुम्हरे खानदान के सारे मर्द का कसम खा लिये हो कि एक ही घर मा खाता खोलोगे ?”
गुप्ता जी ने सुना तो घूरकर गोलू को देखा पिंकी ने जो देखा अब उन्हें सच लग रहा था ये देखकर गोलू ने चिढ़कर कहा,”अरे हमायी अम्मा की उम्र की है इह , हम काहे ऐसी गन्दी नजर रखेंगे जे पर,,,,,,,,!!!”

“तो फिर काहे इह तुम्हायी पीठ पर साबुन मल रही थी और इह ससुरा चुटका इह का झोली मा भगवान् रसमलाई डाल दिए फिर भी इह ससुरा हमायी इमरती पर डोरे डाल रहा है”,यादव जी ने गुस्से से कहा
सीरियस सिटुअशन में बकैती करने की झलक आपको इसी कहानी में मिलेगी इसलिए जैसे ही यादव जी ने फुलवारी को इमरती कहा उन्होंने हाथ में पकड़ा साबुन नीचे फेंका और यादव जी के पास आकर शर्माते हुए कहा,”का आप भी ! तारीफ करने का एक ठो मौका नाही छोड़ते”

गुप्ताइन ने देखा यादव जी अपनी घरवाली की तारीफ कर रहे है तो उन्होंने गुप्ता जी को ताना मारकर कहा,”सीखिए कुछो इनसे”
“का सीखे रंगबाजी ? ए गुप्ताइन तुमहू ना अंदर जाओ और जाकर बहू को सम्हालो”,गुप्ता जी ने कहा तो गुप्ताइन मुँह बनाकर वहा से चली गयी।
गुप्ता जी ने यादव जी को देखा और कहा,”अब तुम्हे का अलग से कहे ?”

“हाँ हाँ जा रहे है और कान खोलकर सुन ल्यो अगली बार तुम तीनो में से किसी ने हमाये घर की तरफ आँख उठाकर भी देखा तो हमसे बुरा कोई नाही होगा”,यादव ने गुस्से से कहा
“ए हमहू तुम्हरे आगे हाथ जोड़ते है तुमहू अपना फूल पत्ती ल्यो और निकलो हिया से”,गुप्ता जी ने कहा
यादव जी ने फुलवारी को साथ लिया और वहा से चले गए। गुप्ता जी गोलू और मंगल फूफा की तरफ पलटे ,

मंगल फूफा को तो सुबह से पहले ही बहुत सुना चुके थे इसलिए उनका गुस्सा निकला गोलू पर और कहा,”तुमहू का कसम खा लिए हो हमाओ नाम मिट्टी मा मिलाने की ? साला एक कांड से तुम्हरा पैर नाही निकलता कि दूसरे कांड मा खुद को पूरा झोंक देते हो,,,,,,,,,का जरूरत थी उह्ह चांडाल की घरवाली से साबुन लगवाने की ? लक्स से नहाएंगे , तुमको न बेटा किसी दिन घासलेट से नहलायेंगे और फूंक देंगे,,,,,,,,,अब अपना हुलिया सुधारो और अंदर मरो , साला इत्ता बड़ा स्नानघर बनाये है लेकिन इनको मोहल्ला के बीच मा बैठकर नहाना है”

अपना गुस्सा गोलू पर निकालकर गुप्ता जी जाने के लिए तो गोलू उनका गला दबाने उनके पीछे आया लेकिन तभी उसका पैर पड़ा साबुन पर और गोलू महाराज मुँह के बल जमीन पर लेकिन गुप्ता जी के पलटने तक खुद को सम्हाल लिया और पुशअप्स करने लगा। ये देखकर गुप्ता जी ने अपना सर झटका और वहा से चले गए और बेचारा गोलू दर्द के मारे मुँह के बल आ गिरा और मुँह फाड़कर जो रोया , इतना तो पिंकी अपनी विदाई में भी ना रोई होगी।

( तो दोस्तों आज का ये भाग सिर्फ गोलू महाराज के नाम बाकी के कांड अगले भाग में पढ़ेंगे )

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संजना किरोड़ीवाल

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बाथरूम के बाहर पिंकी गोलू और फुलवारी को देखकर दोनों हैरान और फिर गुप्ता जी ने उनकी तरफ आते हुए पिंकी से पूछा,”का बात है बिटिया ! तुमहू चिल्लाई काहे ? कोनो भूत देख लिया का ?”
“इह जीता जागता भूत भगवान् जो हमायी किस्मत मा लिख दिए है , हम का दूसरे भूतो को देखकर डरेंगे पापाजी ! हमे डराने के लिए तो इनके काण्ड ही काफी है,,,,,,,,,,,हाय ! हमने कबो सोचा नाही था गोलू तुमहू इत्ता गिर जाओगे”,पिंकी ने अपनी छाती पीटकर कहा

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