Manmarjiyan Season 5 – 25

Manmarjiyan Season 5 – 25

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

गुप्ता जी की बात सुनकर गोलू सर खुजाते हुए उनके कमरे से बाहर चला आया और बड़बड़ाते हुए आगे बढ़ा,”जे साला पिताजी को काहे लगता है कि रूपा मंगलू का काट के जाएगी ? ऐसो तो का देख लिए पिताजी रूपा मा ?”
अपनी ही बात से परेशान होकर गोलू पलटा और वापस गुप्ता जी के कमरे में चला आया। गुप्ता जी हाथ में पकड़ी अगरबत्ती जलाने जा ही रहे थे कि गोलू ने कहा,”पिताजी,,,,,,,,,,,,,!!!”

“का है ! पूजा करने दोगे के नाही ?”, गुप्ता जी ने झुंझलाकर गोलू की तरफ आते हुए कहा
“जे अगरबत्ती काहे पकडे हो हाथ मा ?”,गोलू असल बात भूलकर मुद्दे से भटक गया
“कहो तो जलाकर तुम्हाये मुँह मा लगा दे , कही से तो तुमहू महको”,गुप्ता जी ने मुँह बनाकर कहा तो गोलू को एकदम से रूपा की बात याद आयी और उसने बहुत ही गंभीर होकर कहा,”हमको इह बताओ , रूपा मंगल फूफा का काट के काहे जाएगी ?”

गुप्ता जी कुछ देर ख़ामोशी से गोलू को देखते रहे और फिर कहा,”बेटा बाप है तुम्हाये ! उड़ती चिड़िया के पर गिन लेते है,,,,,,,,,उह्ह्ह जोन रूपा के चक्कर मा तुम्हरा उह्ह्ह मंगलू फूफा “दीवाना” बने घूम रहे है , देखना उह्ह्ह रूपा ऐसा “चमत्कार” करि है ओह्ह के जीवन मा कि उह्ह्ह का “अंजाम” तुमहू खुद अपनी आँखों से देख लेना , क्योकि रूपा की “कभी हाँ कभी ना” अब ओह्ह्ह के दिल मा का है जे बात तो “राम जाने”

पर हमको पूरा पूरा डाउट है की तुम्हरे मंगलू दिलवाले की दुल्हनिया ले जायेगा उह्ह्ह नवरत्न और मंगलू का होगा “वन टू का फोर”  और उह्ह बन जायेगा “देवदास” फिर ओह्ह के साथ मिलकर गाते रहना “हम पे ये किसने हरा रंग डाला , ख़ुशी ने हमारी हमे मार डाला,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू को शाहरुख़ खान की फिल्मो के नाम गिनवाकर गुप्ता जी वहा से चले गए तो गोलू ने चिल्लाकर कहा,”अरे लेकिन आपने देखा का ?”

गुप्ता जी पलटे और कहा,”लगता है आज सुबह तुमहू रूपा की उह्ह्ह मुस्कान नाही देखे जो हम देखत रहे जब उह्ह्ह नवरतन की बांहो मा थी,,,,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू कुछ और पूछे इस से पहले गुप्ता जी ने अगरबत्ती जलाई और हनुमान चालीसा गानी शुरू कर दी और गोलू चाहकर भी उनसे आगे कुछ पूछ नहीं पाया।

सीढ़ियों पर खड़े मंगल फूफा गोलू का इंतजार कर रहे थे लेकिन गोलू आये ना इसलिए मंगल फूफा खुद ही अंदर चले आये और कहा,”बाट्स अप ब्रो ! कम फ़ास्ट,,,,,,,,,,,,वी लेट , रूपा बेटिंग बेटिंग,,,,,,,,,,,,,,!!!”
गोलू मंगल फूफा की गलत सुनकर हैरान नहीं हुआ बल्कि इंग्लिश सुनकर ज्यादा हैरान हुआ , जिस आदमी को ठीक से हिंदी लिखना पढ़ना नहीं आता वो टूटी फूटी इंग्लिश में बात कर रहा था। गोलू मंगल फूफा के सामने आया और कहा,”इह सब कहा से सीखे ?”

“अरे बहुते पहिले सीखे थे एक ठो अंग्रेज को पकडे थे ओह्ह्ह के साथ रहे कुछ दिन तो सीखा यह सब”,मंगल फूफा ने कहा  
“का फूफा ! चार शब्द सीखे उह्ह्ह भी इत्ते गलत”,गोलू ने कहा
“अरे हमे कौनसा मास्टर बनना था इह तो बस ऐसे ही चलते चलते सीख लिये पर देखो आज इह हमरे बहुते काम आने वाला है”,मंगल फूफा ने खुश होकर कहा
“कैसे ?”,गोलू ने मंगल फूफा से पूछा

“अरे रूपा को इंग्लिश मा प्रपोज करेंगे,,,,,,,,,,,,,देखना फट से मान जाएगी , अरे हमे ना बोल ही नाही पायेगी ,, हमायी इंग्लिश बाहिर और रूपा अंदर”,मंगल फूफा ने खुश होकर अपने दोनों हाथो में थू थू किया और कनपटी से लगाकर हाथो को स्टाइल से पीछे किया
“पहिले जे चार किलो का पेट अंदर कर ल्यो जो शर्ट के बीच से झांक रहा है ओह्ह्ह के बाद रूपा को अंदर करना,,,,,,,,,,,!!!!”,गोलू ने मंगल फूफा के पेट की तरफ इशारा करके कहा

मंगल फूफा ने एक गहरी साँस अंदर ली और साँस के साथ अपने पेट को भी
“और हिया खड़े होकर हमसे पंचायती काहे कर रहे हो ? चलो मिश्रा के घर पिरोगराम खत्म हो जाएगा”,गोलू ने मंगल फूफा को साथ लेकर आगे बढ़ते हुए कहा
“अरे खत्म कैसे होगा गोलू ? मिश्रा जी पिरोगराम खासकर तुम्हाये लिए ही तो रखे है,,,,,,,,,,,,!!”,साथ चलते मंगल फूफा ने कहा

गोलू ने सुना तो चलते चलते मुस्कुराया और कहा,”इह बात तो सच कही तुमहू फूफा,,,,,,,,,,,,पिरोगराम तो हमाये लिए ही रखा है , का है कि मिश्रा जी ऊपर से कित्ता भी गुस्सा दिखाए लेकिन अंदर से पियार बहुत करते है हमसे”
“हाँ गोलू ! आज तुम्हरे साथ साथ हमे भी थोड़ा पियार मिल जाहि है”,मंगल फूफा ने खुश होकर कहा
गोलू ने ख़ुशी ख़ुशी अपनी स्कूटी स्टार्ट की और मंगल फूफा उसके पीछे आ बैठे हालाँकि गोलू के कहने के बाद उन्होंने पेट अभी भी अंदर लिया हुआ था।

शर्मा जी का घर , कानपूर
“अरे आप कहा चले ?”,शर्माईन यानि पिंकी की मम्मी ने शर्मा जी से पूछा
“मिश्रा जी बुलाये है घर पर , पतो नाही का बात हो गयी,,,,,,,,,,,,हमहू जरा जाकर आते है”,शर्मा जी ने कहा
“उह्ह्ह काहे बुलाये है , आप लोग फिर से कोनो गड़बड़ किये है का ?”,शर्माईन ने पूछा
“तुमहू का हमको अपना उह्ह्ह महान दामाद गोलू समझ ली हो जो हमसे काण्ड की उम्मीद कर रही हो ?”,शर्मा जी ने भड़ककर कहा

“अरे हमाये गोलू जी कोनो काण्ड काहे करेंगे ?”,शर्माईन ने मुँह बनाकर कहा जिन्हे गोलू से कुछ ज्यादा ही प्यार था
चकिया में मधुमक्खी के काटने से शर्मा जी की एक आँख जो सूज गयी थी वो अभी भी कुछ कुछ सूजी हुई थी लेकिन इस आँख से उन्हें दिखाई बराबर दे रहा था। उन्होंने अपनी उसी आँख की तरफ इशारा करके कहा,”इह देख रही हो ना , इह तुम्हरे उह्ह्ह पियारे दामाद गोलुआ के कारन हुई है ! उह्ह्ह और गुड्डू हिया कानपूर मा कांड करते थे अब कानपूर से बाहिर भी करने लगे,,,,,,,,,,जे दोनों कबो ना सुधरे”

“अच्छा ! मतलब काण्ड सारे मिलकर करो और बिल फाड़ो बेचारे हमाये दामाद के नाम पर,,,,,,,,,,,मिश्रा जी के घर आप अकेले नाही जायेंगे हमहू भी आपके साथ चली है,,,,,,,,,,,आज पूछकर ही रहेंगे उनसे आखिर उनको गुड्डू गोलू जी से दिक्कत का है ?”,शर्माईन ने गुस्से से कहा
गोलू के लिए आज शर्माईन का प्यार देखकर शर्मा जी थोड़े हैरान हुए और कहा,”तुमहू नाही जा सकती”
“काहे नाही जा सकते ? हमहू भी जायेंगे,,,,,,,,,,,चलिए”,शर्माईन ने पल्लू सर पर लेकर कहा

ये शर्मा जी , गुप्ता जी और मिश्रा जी बाहर भले कितना ही शेर बने लेकिन अपनी घरवालियों के सामने इनकी एक नहीं चलती थी। मन मारकर शर्मा जी को भी हाँ कहना पड़ा और शर्माईन को साथ लेकर अपने स्कूटर से मिश्रा जी के घर की तरफ निकल पड़े जो कि अगली गली में ही था।

मिश्रा जी का घर , कानपूर
मिश्रा जी ने मिश्राइन को आश्वासन दिया कि वे खुद जाकर मंगेश से लवली और बिंदिया की शादी की बात करेंगे और जो रायता फैला है उसे समेटेंगे। शाम में मिश्रा जी हॉल में बैठे अपनी चाय का इंतजार कर रहे थे। मिश्राइन मिश्रा जी के लिए चाय-मठरी लेकर आयी और जैसे ही ट्रे मिश्रा जी के सामने किया , आदर्श फूफा ट्रे की तरफ लपके और चाय का कप उठाकर मिश्रा जी के बगल में पड़े सोफे पर बैठते हुए कहा,”सुबह से अब एक ठो कप चाय मिली है,,,,,,,,,,,,,,का है कि सर ना बहुते दुःख रहा था”

मिश्रा जी ने गुस्से से आदर्श फूफा को देखा तो मिश्राइन ने धीरे कहा,”मैं आपके लिए और मंगवा देती हूँ,,,,,,,,,,,!!!”
“ए वेदिया ! अपने पिताजी के लिए एक ठो कप चाय और ले आना बिटिया”,मिश्राइन ने ट्रे टेबल पर रखकर वेदी को आवाज दी।
“सरिता जी ! मंगवा ही रही है तो हमाये लिए भी एक ठो कप और मंगवा दीजिये”,आदर्श फूफा ने खिंसियाकर कहा
मिश्राइन ने वेदी को फिर आवाज लगाई और दो कप चाय लाने को कहकर खुद वहा से चली गयी। मिश्राइन के जाने के बाद मिश्रा जी पलटे और आदर्श फूफा से कहा,”का चाह मा नहाईयेगा आप जो दो कप चाहिए”

मिश्रा जी की बात सुनकर आदर्श फूफा ने सुररररररररर करके चाय की सुड़की ली और उन्हें ऐसे नजरअंदाज किया जैसे मिश्रा जी वहा मौजूद ही ना हो। मिश्रा जी अपनी जगह से उठे और जाते जाते चिढ़े हुए स्वर में कहा,”पतो नाही कब पीछो छूटे है जे दलिदर से,,,,,,,,,,,,,,,एक बार बस उह्ह्ह गोलुआ हाथ लग जाए , साला सारी मुसीबत की जड़ वही है”
आदर्श फूफा ने मिश्रा जी को भुनभुनाते देखा लेकिन मिश्रा जी ने क्या कहा ये नहीं समझ पाए , उन्होंने अपना सर झटका और सुररररर करके चाय पीने लगे।

रूपा को लेकर गुड्डू थोड़ा परेशान था। कुछ तो गड़बड़ थी रूपा में जो सिर्फ गुड्डू देख पा रहा था ! वेदी ने आदर्श फूफा को लाकर चाय दी और वहा से चली गयी। घूमते घामते गुड्डू आया और आदर्श फूफा के बगल में बैठकर कहा,”पता चला का गड़बड़ है ?”
“थोड़ा मीठा कम है बस,,,,,,,,,,,,!!!”,आदर्श फूफा ने वेदी की लायी चाय का घूंठ भरकर कहा

गुड्डू ने सुना तो आदर्श फूफा के हाथ से चाय का कप छीना और टेबल पर रखकर कहा,”अरे का मीठा कम है ? हम रूपा की बात कर रहे है , रूपा मा का गड़बड़ है इह पता चला”
“हमको तो पहिले दिन से ओह्ह मा गड़बड़ ही गड़बड़ नजर आय रही है लेकिन कोई हमायी बात सुने तब ना”,आदर्श फूफा ने चिढ़कर कहा  

 “अरे फूफा ! हमने कुछ देर पहिले रूपा को छुपकर किसी से बात करते देखा,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने दबे स्वर में कहा
“तुमहू सुने का बात कर रही थी उह्ह्ह ?”,आदर्श फूफा ने भी हैरानी भरे स्वर में कहा
“नाही हमाये सुनने से पहिले ही उह्ह्ह फोन काट दी,,,,,लेकिन लास्ट मा उह्ह कही की हमहू सिर्फ तुमसे प्यार करते है”,गुड्डू ने बहुत ही सस्पेंस में कहा

आदर्श फूफा ने सुना तो उनकी आँखे हैरानी से फैल गयी और उन्होंने कहा,”इह का मतलब रूपा मंगल या नवरतन में से किसी के साथ तो खिचड़ी पका रही है”

“और अगर उह्ह्ह खिड़की को मसाला देने वाले उह्ह्ह दोनों ही नाही हुए तो ?”,गुड्डू ने अपनी शंका जाहिर की
“अरे कैसे नाही होंगे ? उह्ह्ह दोनो ही है !  देखे नाही तुमहू चंदौली मा ढाबे पर बैठकर कैसे अपने हाथो से दाल रोटी खिलाई जा रही थी तुम्हाये मंगल फूफा को”, आदर्श फूफा ने मुँह बनाकर कहा
“हमाये नाही गोलू के फूफा है वो,,,,,,,,,,!!”,गुड्डू ने चिढ़कर कहा

“अरे किसी के भी हो काम तो सारे छिनरो वाले है ओह्ह्ह के,,,,,,,,,,,और फिर गुप्ता के घर मा रूपा का दिल आया उह्ह्ह नवरतन पे,,,,,,,,,,,,!!!”,आदर्श फूफा ने कहा
“अरे नाही आदर्श फूफा ! रूपा के दिल मा मंगल फूफा ही है , नवरतन के सामने तो पैर फिसल गवा था ओह्ह्ह का”,गुड्डू ने मासूमियत से कहा

“अरे काहे का पैर फिसल गवा ? हमहू खुद रूपा की आँखों मा प्यार देखत रहे,,,,,,,,,!!”,आदर्श फूफा ने कहा और ये बात पड़ी बगल से गुजरती भुआ के कानो में।  भुआ आदर्श फूफा की तरफ पलटी और गुड्डू के कंधे पर अपना हाथ मारकर कहा,”देखा गुड्डू ! सुने ना तुमहू अपने कानो से , हमका तो जे आदमी पर पहिले से सक था कि इह चकिया जाकर जरूर कुछो न कुछो गुल खिलाये है पर हमे का पतो थो इह उह्ह गुल का घर मा ही ले आएंगे”

भुआ के एक धक्के से ही गुड्डू दूसरी तरफ लुढ़क गया और आदर्श फूफा खा जाने वाली नजरो से भुआ को घूर रहे थे। भुआ ने जैसे ही अपनी बात खत्म की आदर्श फूफा ने गुस्से से अपने दाँत भींचकर कहा,”अरे बुद्धिहीन हो का ! का कुछ भी बोले जा रही हो ? हमहु मंगल की बात कर रहे है,,,,,,,,,,,!!”
“कौन मंगल पांडे ?”,भुआ ने अपना हाथ अपने मुँह से लगाकर हैरानी भरे स्वर में कहा

“अरे पांडे नाही उह्ह्ह गोलुआ का फूफा मंगल , मंगल , ओह्ह्ह की बात कर रहे है हमहू”,आदर्श फूफा ने गुस्से से अपने दाँत भींचकर कहा
“लेकिन गोलू की तो एक ही भुआ है और उह्ह्ह है हम और हमायी जिंदगी मा कोई मंगल अमंगल नाही है,,,,,,,,,,,,,,जो है सब आप ही है”,भुआ ने कहा
आदर्श फूफा ने बेचारगी से गुड्डू को देखा और आँखों ही आँखों में उस से रिक्वेस्ट की कि अब अपनी सुपर टेलेंटेड भुआ को वही समझाए।

गुड्डू ने भुआ को अपनी तरफ किया और कहा,”ए भुआ ! इह का जब देखो तब बाल की खाली निकालने लगती हो,,,,,,,,,,,,,अरे गोलू की कोई भुआ नाही है लेकिन ओह्ह्ह के घर मा मंगल फूफा है जो कि गोलू की अम्मा का रिश्तेदार है और उह्ह्ह रूपा को भी चकिया से वही लेकर आया है अपने साथ,,,,,,,,,,,,,,समझ आया कुछो”
भुआ थोड़ा सोच में पड़ गयी और फिर अपने हाथो को नचाकर कहा,”हाँ हाँ आ गवा समझ इत्ते भी पगलेट नाही है हमहू गुड्डू,,,,,,,,,,,,,,उह्ह्ह तो हमहू बस तुम्हरे फूफा को टेस्ट कर रहे थे”

“हम का चाट पपड़ी है जो टेस्ट कर रही हो,,,,,,,,,,,,,,,,जे तुम्हाये टेस्ट के चक्कर मा हमायी चाय बेस्ट हो गयी”,आदर्श फूफा ने खीजते हुए कहा
“अरे तो काहे खिज रहे है , अभी गरम करके ले आते है”,भुआ ने चाय का कप उठाया और वहा से चली गयी
भुआ के जाने के बाद गुड्डू एक बार फिर आदर्श फूफा के पास आया और कहा,”फूफा सुनो ! रूपा ने अभी जिस से बात की थी ना ओह्ह्ह का नंबर हमाये फोन की कॉलिंग लिस्ट मा है,,,,,,,,,,,,,,हमहू उह्ह्ह नंबर पर फोन करके बात करेंगे तो पता चल जायेगा इह रूपा किस से बात कर रही थी और किसे कह रही थी कि हम सिर्फ तुममें बात करते है”

आदर्श फूफा ने सुना तो मुस्कुराये और कहा,”जे पहली बार तुमहू कोनो अकल की बात कहे हो वरना उह्ह साले गोलुआ के साथ रहकर तो तुम्हायी बुद्धि पर पत्थर पड़ जाता है”
“ए फूफा ! हमको जो बोलना है बोलो गोलू के बारे में कुछो नाही,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,अरे फूफा ! रूपा के आसिक से बाद मा निपटेंगे पहिले गोलू को हिया आने से रोकते है वरना आज ओह्ह्ह की बत्ती बनने से कोई नहीं रोक पायेगा”,आदर्श फूफा को फटकार लगाते लगाते हुए गुड्डू को एकदम से गोलू की याद आयी और साथ ही याद आया मिश्रा जी और मिश्राइन का गुस्सा जो आज भरभरकर गोलू पर निकलने वाला था।

आदर्श फूफा के सामने से हटकर गुड्डू ने गोलू का नंबर डायल किया एक दो रिंग जाते ही फोन उठा और इधर से गुड्डू ने कहा,”हेलो गोलू ! कहा हो तुमहू ?”
“हेलो गुड्डू ! हम गोलू नाही पिंकी बोल रहे है। गोलू तो तुम्हाये घर ही गया है”,गोलू के फोन से पिंकी की आवाज आयी और गुड्डू समझ गया कि हमेशा की तरह गोलू फिर अपना फोन घर पर भूल आया है।

गुड्डू को शांत पाकर पिंकी ने कहा,”ए गुड्डू ! तुम और तुम्हाये पिताजी तो बहुते कंजूस निकले , घर मा पिरोगराम है और हमे बुलाया तक नाही बस अकेले गोलू और मंगल फूफा को बुला लिया ! जे तो कोई बात ना हुई गुड्डू”
“अरे कौनसा पिरोगराम ? तुमहू फोन रखो हमहू गोलू को घर आने से रोकते है वरना ऐसा पिरोगराम होगा पूरा मोहल्ला देखेगा”,गुड्डू ने पिंकी से कहा और फोन काट दिया।

“गोलू को हिया आने से रोकने के लिए बस अब एक ही रास्ता है , हमे खुद जाकर गोलू को हिया आने से रोकना होगा”,गुड्डू खुद में बड़बड़ाया और फोन जेब में रखकर बाहर चला आया। गुड्डू ने स्कूटी स्टार्ट की और घर से बाहर निकलकर बोला,”उह्ह्ह गोलू हमेशा पीछे वाली गली से होकर आता है ताकि पिंकी के बाप को किलसा सके , उधर से ही चलते है”
गुड्डू ने स्कूटी आगे बढ़ाई और पीछे वाली गली में ले ली।

मंगल फूफा को अपने पीछे बैठाये गोलू ने आज पहली बार स्कूटी आगे वाली गली से ली तो पीछे बैठे मंगल फूफा ने कहा,”अरे गोलू इधर से लंबा पडेगा , पीछे वाली गली से शॉर्टकट लो ना”
“का है फूफा ! पीछे वाली गली मा रहता है हमारा दुश्मन पिंकी का बाप और आज हमहू जा रहे है पिरोगराम मा इहलीये ओह्ह्ह की सकल देख के मूड नाही खराब करना हमको”,गोलू ने कहा

“अरे का गोलू ! ससुर है तुम्हाये यार ऐसा ना कहो”,मंगल फूफा ने कहा
गोलू ने स्कूटी रोकी और बड़े प्यार से मंगल फूफा से उतरने को कहा। मंगल फूफा उतरकर साइड हो गए तो गोलू ने मंगल फूफा को घुरा और कहा,”हमाये ससुर के साथ ही आ जाना अब,,,,,,,,,,,,,!!!”
मंगल फूफा कुछ कहते या गोलू को रोकते तब तक तो गोलू महाराज आगे बढ़ गए और बेचारे मंगल फूफा मायूस होकर वही खड़े रहे,,,,,,,,,,,,,,,,!!!

( क्या गुड्डू लगा पायेगा पता रूपा के राज का और आदर्श फूफा कर पाएंगे गुड्डू की मदद ?  क्या गुड्डू रोक पायेगा गोलू को और बचा पायेगा उसे स्वर्गवासी ?  अब कैसे पहुंचेंगे मंगल फूफा अकेले मिश्रा जी के घर ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल  

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