Manmarjiyan Season 5 – 34
Manmarjiyan Season 5 – 34

आदर्श फुफा मुँह के बल मिश्रा जी सामने पड़े थे। गिरने की वजह से उनका होंठ सूजकर लटक गया। लवली ने भागकर उन्हें उठाया और सीढ़ियों पर बैठाते हुए पीछे खड़ी राजकुमारी भुआ से कहा,”भुआ ! पानी दीजिये”
“इनको चुल्लूभर पानी दयो और हमका दयो मुट्ठीभर जहर,,,,,,,,हमायी आँखों के सामने अभी भी जे इह रूपा रानी का गुणगान गाय रहे है,,,,,,,,,,,आज या तो हम मर जाही है या जे का मार देही है”,राजकुमारी भुआ ने कहा
“राजकुमारी ! इह का अनाप सनाप बक रही हो ? चुप रहो”,मिश्रा जी ने गुस्से से कहा और फिर आदर्श फूफा की तरफ देखकर बोले,”का आदर्श बाबू ! ठीक हो ?”
आदर्श बाबू ठीक हो तब ना कुछ बोले , गिरने से छाती में दर्द , होंठ सूजकर लटक गया , आँखों के आगे अभी भी चिड़िया कौंए उड़ रहे थे उन्होंने जैसे तैसे हाथ से इशारा करके गर्दन हिला दी।
गोलू तो मारे डर के काँप रहा था और गुड्डू के भी होश उड़े हुए थे,,,,,,,,,,क्यों ? क्योकि गुड्डू और गोलू के हिसाब से तो आदर्श फूफा कल रात को ही नर्क सिधार गए थे ,
अब तो उनके सामने बैठा आदमी या तो आदर्श फूफा का भूत था या फिर कोई बहरूपिया,,,,,,,,,,,,,,!
रूपा सबके सामने अपना फैसला सुना चुकी थी इसलिए अब वह कोई देरी नहीं चाहती थी , वह जानकीनाथ का हाथ थामे मिश्रा जी के सामने आयी और कहा,”चचा ! जे लोगन की नौटंकी इह जन्म मा खत्म ना होइ है , पर जे सब के लिए हमहू अपनी जिंदगी मा चरस न बोई है। हमको जानकी के साथ ही ब्याह करनो है और हमहू चकिया से कानपूर इह के वास्ते ही आये है,,,,,,,,,अब हमको इह के साथ जान की इजाजत दयो”
नीचे जमीन पर पड़े मंगल फूफा ने जब सुना कि रूपा चकिया से कानपूर जानकीनाथ के लिए आयी है तो वह उठा और अपने सीने पर हाथ रखकर रूपा की तरफ आते हुए बोला”,ए रूपा ! इह न कहो , अरे हमहू खुद तुम्हरी आँखों माँ हमरे लिए पियार देखे है रे। तुमहू हमाओ हाथ थामकर चकिया से हमाये लिए कानपूर आयी थी और कह रही हो इह सांड़ के लिए आयी हो,,,,,,,,,,,,,,ए रूपा ! अरे का कमी रह गयी थी हमाये पियार मा ?”
“हाइट की,,,,,,,,,,,!!!”,रूपा ने तुरंत कहा तो मंगल फूफा हैरानी से उसे देखने लगे और कहा,”बस खाली हमाओ कद देखी , हमाओ पियार नाही देखी , अरे हमहू कित्ता पियार किये रहे तुमसे ? कित्ते सपने सजाये रहे तुम्हरे साथ और तुमहू हमरे प्यार का इह सिला दी,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने रोते हुए कहा
“तो तुमको का लगा इह धोखेबाज से पियार करके मैडल मिली है तोह का ?”,सीढ़ियों पर बैठे आदर्श फूफा ने मंगल फूफा के जले पर नमक छिड़क कर कहा
गुड्डू से चिपके गोलू ने मंगल फूफा को रोते देखा तो उसे अच्छा नहीं लगा ! कोई जाने या ना जाने लेकिन गोलू जानता था कि रूपा के लिए मंगल फूफा का प्यार झूठा नहीं था। उसने उदास होकर गोलू से कहा,”यार गुड्डू भैया ! जे रूपा ने ना अच्छा नाही किया फूफा के साथ , आज पहली बार मंगलू पर दया आय रही है”
गुड्डू ने गोलू को आगे धकियाकर कहा,”हाँ तो वहा जाकर दिखाओ ना दया हिया का कर रहे हो ?”
“अरे गुड्डू भैया ! हम बस बताय रहे थे आप तो धक्का ही दे दिए,,,,,,,,,,,,,उह्ह रूपा के बगल मा खड़े सांड़ को देख रहे है ना आप,,,,,,,,,,,,,एक हाथ मार दिया ना हमे तो हमाओ पिंक कही और ऐश कही और दिखेगो,,,,,,,,,,,मंगल फूफा पर दया आ रही है लेकिन ओह्ह से जियादा खुद पर तरस , हम ना मरी है कुत्ते की मौत जे मंगलू के प्यार मा,,,,,,,,,,,,,,,!!!”,गोलू ने गुड्डू के बगल में आकर कहा
गुड्डू ने गोलू को घुरा और फिर सामने देखने लगा , आज गुड्डू ने फैसला कर लिया था कि वह किसी के मामले में कुछ नहीं बोलेगा बस चुपचाप तमाशा देखेगा।
रूपा पर मंगल फूफा के आँसुओ का कोई असर नहीं पड़ा उसने मिश्रा जी की तरफ देखा तो मिश्रा जी ने कहा,”अब जब तुमने अपना जीवनसाथी चुन ही लिया है तो तुमहू जहा मर्जी जा सकती हो हम तुमको नाही रोकेंगे लेकिन जे घर से निकलने के बाद तुम्हरा ध्यान रखने की जिम्मेदारी हमायी नाही होगी,,,,,,,,,,,,,!!”
“अरे आप काहे चिंता करते है चचा ? हमरा ध्यान रखने के लिए इह हमाये जानू है ना,,,,,,,,,,,,,!!!”,रूपा ने जानकीनाथ का हाथ थामकर मुस्कुरा कर कहा
मंगल फूफा के दिल पर तो जैसे सो सो खंजर ही चल गए लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी , अभी उनके प्यार की अग्नि परीक्षा बाकी थी इसलिए जैसे ही रूपा जानकीनाथ का हाथ पकड़कर आगे बढ़ी मंगल उसके सामने जमीन पर आ लेटे और अपनी छाती ठोककर कहा,”अगर तुमको जाना ही है तो फिर आज तुमको हमायी लास पे से होकर जाना पडेगा रूपा”
“का एक्टिंग कर रहा है इह छूटनका ?”,आदर्श फूफा ने मिश्रा जी की तरफ देखकर कहा
मिश्रा जी बेचारे क्या कहते ? रूपा की मर्जी के खिलाफ वे मंगल या नवरतन से उसकी शादी कैसे करवा देते इसलिए चुप रहे
बिंदिया ने ये सब देखा तो उसे बहुत दुःख हुआ साथ ही रूपा पर बहुत गुस्सा भी आया उसने लवली से कहा,”लवली ! रूपा को समझाओ ना इह सब ना करे , अरे मंगल फूफा ओह्ह्ह से कितना पियार करते है और उह्ह्ह ओह्ह्ह का दिल तोड़कर जाय रही है”
बिंदिया की बात सुनकर लवली ने रूपा की तरफ देखा और कहा,”रूपा ! इह का कर रही हो ? जब तुमको मंगल फूफा से सादी करनी ही नाही थी तो फिर ओह्ह की भावनाओ से खिलवाड़ काहे किया ? रूपा अभी भी मौका है , कुछो नाही बिगड़ा है मंगल फूफा को अपनाय ल्यो”
इधर सब रूपा को समझाने में लगे थे और उधर नवरतन बेंड वालो से उलझा हुआ था। उसे इतनी जोर की मार पड़ी थी कि कुछ देर के लिए उसकी आवाज ही चली गयी और बेंड वाले उसके इशारो को समझ नहीं पाए इसलिए हर इशारे पर कोई नयी धुन बजा देते और नवरतन और बिगड़ जाता।
सबको बोलते देखकर रूपा चिल्लाई,”बस , चुप हो जाओ सब”
रूपा के चिल्लाने से सब चुप हो गए , रूपा ने जानकीनाथ का हाथ छोड़ा और मंगल फूफा की तरफ बढ़ गयी। जैसे जैसे रूपा मंगल की तरफ बढ़ी मंगल के साथ साथ बाकि सबके दिलो में भी उम्मीद की एक किरण जगी जिसे रूपा ने अगले ही पल बुझा दिया और पलटकर जानकीनाथ से कहा,”आओ जानू ! हमे देर होय रही है”
जानकीनाथ मुस्कुराते हुए रूपा के पास आया , रूपा ने जानकीनाथ का हाथ थामा और अपना पैर मंगल फूफा की छाती पर रख के आगे बढ़ गयी। रूपा के बाद जानकीनाथ उस पर पैर रखता इस से पहले ही गुड्डू और गोलू ने मंगल फूफा की एक एक टाँग पकड़कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और मंगल फूफा बच गया !
रूपा आगे बढ़ गयी लेकिन आगे रास्ता रोका नवरतन ने और गुस्से से इशारो इशारो में रूपा से जानने की कोशिश की कि वह कहा जा रही है ? रूपा ने अफ़सोस के साथ जानकीनाथ को देखा तो जानकीनाथ ने पास ही खड़े बाजेवाले का बाजा छीना और उसे नवरतन के सर पर दे मारा। बाजे का खोल फट गया और नवरतन का सर खोल के बाहर आ गया। जानकीनाथ ने नवरतन को साइड किया और रूपा को वहा से लेकर चला गया।
नीचे जमीन पर उजड़े चमन की तरह बैठे मंगल फूफा ने रूपा को जानकीनाथ के साथ जाते देखा तो मुँह फाड़कर रोने लगा। रूपा की ये हरकत बिंदिया को अच्छी नहीं लगी , उदास होकर वह अंदर चली गयी। नवरतन घूमकर बैंडवालो के पास आया और उन्हें जाने का इशारा किया लेकिन जैसी ये कहानी है इसमें किसी को सीधी बात समझ आ जाये ऐसा मुमकिन ही नहीं था। रूपा को किसी और के साथ जाते देखकर बैंडवाले ये तो समझ गए कि नवरतन का कट चुका इसलिए सिटुअशन के हिसाब से धुन बजा दी
“ठुकरा के मेरा प्यार मेरा इंतकाम देखेगी,,,,,,,,,,ठुकरा के मेरा प्यार मेरा इंतकाम देखेगी”
नवरतन ने सुना तो इस बार उसे गुस्सा नहीं आया बल्कि वह वही जमीन पर बैठ गया , अपना हाथ अपने सर से लगा लिया और रूपा रूपा करके रोने लगा। बैंडवाले की धुन सुनकर तो मंगल फूफा का दर्द और बढ़ गया और वे और जोर से रोने लगे।
सुबह सुबह घर में ये रोना धोना सुनकर मिश्रा जी खिज गए और मंगल के पास आकर उसे समझाते हुए कहा,”चुप हो जाओ मंगलू”
मंगल फूफा भी अजीब किस्म के प्राणी कोई चुप होने को कहे तो और जोर से रोये , उन्होंने और जोर से राग अलापा,”हाय हमायी रूपा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!”
“अरे चुप हो जाओ मंगल , उह्ह वापस ना आहि है अब,,,,,,,,,,,,,,काहे सुबह सुबह हमाये घर मा मातम मनाय रहे हो ?”,मिश्रा जी ने अपने गुस्से को कंट्रोल करके दाँत पीसकर कहा
मंगल फूफा ने सर उठाकर मिश्रा जी को देखा और , और जोर से रोया तो मिश्रा जी गुस्से में मंगल की तरफ लपके और कहा,”अबे चुप हो जाओ साले,,,,,,,,,,,तुम्हायी अम्मा मर गयी है जो गंगा जमना बहाय रहे हो ?”
“औरत का चक्कर मिश्रा जी औरत का चक्कर”,आदर्श फूफा ने कहा
ग़नीमत था लवली ने बीच में आकर मिश्रा जी को रोक लिया वरना सुबह सुबह मंगल फूफा मिश्रा जी से कुटे जाते , आदर्श फूफा की बात सुनकर मिश्रा जी पलटे और गुस्से से कहा,”आप तो रहने ही दीजिये आदर्श बाबू ! रूपा मा गड़बड़ है इह बात जानते थे तो चकिया मा ही काहे नाही बताये रहए कम से कम इह चरस तो नाय काटनी पड़ती ?”
“एक तो हमायी रूपा हमे छोड़कर उह्ह दलिद्र के साथ चली गयी ऊपर से तुम लोग हमका रोने भी नाही देय रहे”,मंगल फूफा ने रोते हुए कहा तो मिश्रा जी ने पैर में पहनी चप्पल निकालकर मंगल की तरफ फेंकी और कहा,”हाँ तो बाहिर जाकर रो हमाये घर मा नाही”
मिश्रा जी की चप्पलो पर बचपन से ही सिर्फ गुड्डू और गोलू का ही नाम लिखा था इसलिए जैसे ही मिश्रा जी ने चप्पल फेंकी ,
गोलू महाराज मंगल फूफा को उठाने आये और चप्पल उनके मुँह पर और गोलू मिश्रा जी को देखकर गुस्से से चिल्लाया,”अब हमहू का किये ?”
“तो का तुम्हरे कुछो करने का इन्तजार करेंगे ? और जैसी तुम्हायी कुंडली है ना बेटा हमको मालूम दुइ चार कांड और दबे होंगे तुम्हाये बस बाहिर आने बाकि है”,मिश्रा जी ने अपने तख्ते पर बैठते हुए कहा
गोलू में इतनी हिम्मत कहा जो मिश्रा जी से कुछ कह सके इसलिए गुस्से से उन्हें घूरता रहा
मिश्रा जी के अलावा वहा आदर्श फूफा , राजकुमारी भुआ , लवली , गुड्डू , गोलू , मंगल फूफा , नवरतन और कुछ बेंड बाजे वाले बचे थे बाकि सब तो वहा से जा चुके थे। सुबह सुबह इतनी भसड़ देखकर मिश्रा जी का पारा भी गर्म हो गया और उन्होंने एक एक करके सबको लताड़ना शुरू किया !
सबसे पहले नंबर लिया आदर्श फूफा और राजकुमारी भुआ का और गुस्से से बोले,”सुनिए आदर्श बाबू और उनकी धर्मपत्नी जी , बहुत हो चुकी आप दोनों की मनमानी अब जौनपुर का टिकट कटाइये और अपना सामान उठाकर विदा लीजिये ! वेदिया की सादी मा अभी 4 महीना बाकि है , जब सादी का कार्ड छपी है तो सबसे पहिला कार्ड आपको भेजकर बुलाय लेंगे तब तक के लिए हमहू रिक्वेस्ट करते है हिया रहकर अब और चरस ना बोइये,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”
आदर्श फूफा ने सुना तो भड़क गए और उठकर राजकुमारी के बगल में आकर कहा,”अरे हम का भूखे नंगो के खानदान से है का जो दुइ ठो कप चाय और 4 रोटी के लिए हिया अपने ससुराल मा पड़े रहेंगे,,,,,,,,,,,,,अरे हमहू तो हिया आपको सबक सिखाने आये थे पर हम का सबक सिखाएंगे जइसन आपके इह लड़का लोग है इह काफी हैं आपकी जिंदगी मा चरस बोने के लिए,,,,,,,,,,और रही सही कसर आपका उह्ह्ह मुंहबोला बेटा गोलुआ पूरी कर देहि है,,,,,,,,,,,चलो राजकुमारी ! जे घर मा अब एक दिन और नाही रुके है हम,,,,,,,,,,,,!!!!”
आदर्श और राजकुमारी के जाने के बाद मिश्रा जी ने लवली से कहा,”लवली ! तुमहू जाकर बिंदिया से बात करो और ओह्ह के बाद ओह्ह के घरवालो से मिलने का इंतजाम करो , हमहू खुद मंगेश से मिलने चकिया जायेंगे”
“जी पिताजी”,लवली ने कहा और वहा से चला गया
लवली के जाने के बाद मिश्रा जी ने गुस्से से देखा गुड्डू और गोलू को , मिश्रा जी को गुस्से में देखकर गोलू गुड्डू से चिपक गया तो मिश्रा जी ने कहा,”दूर हटो दोनों एक दूसरे से,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू और गोलू तुरंत एक दूसरे से दुरी बनाकर खड़े हो गए मिश्रा जी कुछ देर दोनों को घूरते रहे और फिर कड़कदार स्वर में कहा,”जे सारी भसड़ की जड़ हो तुम दोनों , पहिले तुम दोनों छोटी मोटी गलतिया करते थे लेकिन अब , अब तो तुम लोग बड़े बड़े कांड करने लगे हो और जो सामने आ रहा है उसको लपेटे मा ले रहे हो ,,,,,,,,,,,, बस बहुत हो चुकी तुम लोगन की मनमर्जियाँ आज के बाद तुम दोनों हमे एक साथ दिखना नाही”
“ए चचा ! ए गुड्डू भैया के बिना हमहू कैसे रहेंगे ?”,गोलू ने रोते हुए कहा
“उह्ह्ह का तुम्हायी लुगाई है जो ओह्ह्ह के बिना रह नहीं पाओगे ? कान खोल लयो जब तक तुम दोनों साथ रही हो कोई न कोई काण्ड जरूर होइ है और हम ना बेटा तुम्हायी बोई चरस को काटते काटते थक चुके है इहलीये आज के बाद तुम दोनों को साथ देखा ना तो इह समझ लेना तुम्हाये टेंट हॉउस के टेंट को तुम्हायी ही तेहरवी मा लगा देंगे,,,,,,,,,,,समझे”,कहकर मिश्रा जी अपने तख्ते से उठे और अंदर चले गए। गोलू मुँह फाड़े मिश्रा जी को जाते हुए देखता रहा
नवरतन गोलू के पास आया और उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे अपनी तरफ करके कहा,”ए गोलू ! तुमहू हमसे कहे रहय कि रूपा की सादी हमसे होगी पर उह्ह्ह तो अपने जानू के साथ चली गयी , अब हमारा का होइ ?”
गोलू ने नवरतन को देखा और कहा,”अरे काहे टेंशन ले रहे हो चचा , तुम्हरी सादी भी हो जाएगी,,,,,,,,,,,,,!!!”
नवरतन ने जैसे ही शादी का नाम सुना अपने गले में फंसा बाजा निकालकर साइड में फेंका और गुस्से से कहा,”अरे भाड़ मा गयी सादी हमको अपना पइसा चाहि , कल सुबह आएंगे तुम्हाये घर , हमरा 25 तैयार रखना समझे”
नवरतन गुस्से से वहा से चला गया और साथ में अपने बेंड बाजे वालो को भी ले गया।
गोलू हक्का बक्का सा नवरतन को जाते देखता रहा , गुड्डू गोलू की रग रग से वाकिफ था इसलिए उसके पास आया और उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा,”गोलू ! पईसा रखा है ना तुम्हरे पास ?”
गोलू ने गुड्डू की तरफ देखा और ख़ामोशी से हामी में गर्दन हिला दी लेकिन ना जाने क्यों उसका दिल जोरो से धड़क रहा था ?
( क्या रूपा चली गयी है हमेशा के लिए या आएगी वापस इस कहानी में ? क्या गुड्डू और गोलू को सच में रहना पड़ेगा एक दूसरे से दूर ? क्या गोलू लौटा पायेगा नवरतन के 25 हजार या हो चुका है इन्हे लेकर भी कोई नया कांड ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 5” मेरे साथ )
Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34
Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34Manmarjiyan Season 5 – 34
Continue With Manmarjiyan Season 5 – 35
Follow Me On https://www.instagram.com/sanjanakirodiwal/
संजना किरोड़ीवाल

