Manmarjiyan Season 5 – 14

Manmarjiyan Season 5 – 14

Manmarjiyan Season 5
Manmarjiyan Season 5 by Sanjana Kirodiwal

वेदी रूपा के लिए कपडे लेने आयी थी और भुआ रूपा के नाम पर फूफा से झगड़ पड़ी। वही बेचारे फूफा उलटा कुरता सीधा करने के चक्कर में अपने हाथ और अपना सर उसमे फंसा बैठे। रूपा के नाम पर फूफा को भड़कते देखकर भुआ अपनी साड़ी का पल्लू मुँह में दबाकर रो पड़ी। वेदी ने ये नजारा देखा तो चुपचाप वहा से निकलने में ही अपनी भलाई समझी।

मजे की बात ये थी कि गुप्ता जी ने झोला देकर गोलू को भेजा था सब्जी लेने लेकिन मंगल फूफा को रूपा के लिए रोते बिलखते देखकर वह सब्जी मंडी के बजाय सीधा चला आया मिश्रा जी के घर , मंगल फूफा को मिश्रा जी का डर इसलिए वे घर की सीढ़ियों के पास ही रुक गए और गोलू से कहा,”गोलू तुमहू अंदर जाओ और रूपा को लेकर आओ हम यही रूककर इंतजार करते है”
“काहे फूफा ? तुमहू अंदर नाही आओगे ?”,गोलू ने पूछा

“अरे नहीं हम नाही आएंगे अंदर मिश्रा जी है हमे देखकर भड़क जायेंगे , तुमहू रूपा को हिया लेकर आओ फिर हम उसे लेकर निकल जायेंगे”,मंगल फूफा ने कहा तो गोलू अपना सर खुजाने लगा और कहा,”का फूफा ! तुमहू तो हमको दलाल बनाय दिए बे ? पियार तुम्हरा और ओह्ह के लिए मिश्रा जी से मार खाये हम , इह ना होई है फूफा”

मंगल फूफा ने सुना तो मुँह लटकाकर कहा,”बस का गोलू ? यही थी तुम्हायी दोस्ती,,,,,,,,,,,,हमहू तो सोचे रहे जब हमायी और रूपा की सादी होगी तो ओह्ह के टेंट का काम तुमको देंगे लेकिन तुमहू तो ,, जान दयो गोलू वैसे भी हम तुम्हाये का लगते है जो तुमहू हमाये लिए जे सब करि हो,,,,,,,,,,इत्ते लोगन मा एक तुमहू हमको समझदार लगे , दिलदार लगे , बड़े दिलवाले मजबूत आदमी लगे पर तुमहू तो हमाओ दिल ही तोड़ दिए गोलू”

अब कोई गोलू महाराज की तारीफ करे और गोलू महाराज फैले नहीं ऐसा भला कैसे हो सकता है ? गोलू मंगल फूफा की चिकनी चुपड़ी बातो में आ गया और सीना तानकर अपने सीने पर हाथ मारकर कहा,”बस फूफा बस जे कहकर तुमहू हमाये अंदर के सोये हुए सेर को जगाय दिए हो , अब जे आशिक़ पागल दीवाना तुमको तुम्हरी रूपा से मिलाकर रहेगा,,,,,,,,,,तुमहू यही रुको हमहू अभी रूपा को लेकर आते है”

कहकर गोलू जैसे ही अंदर जाने लगा मंगल फूफा ने खिंसियकर कहा,”ए गोलू ! ज़रा आराम से का है कि थोड़ी नाजुक है ना हमायी रूपा , हर्ट न हो जाये”
गोलू पलटकर वापस मंगल फूफा के पास आया और कहा,”कुछो नाजुक नाही है , तबियत से अगर डम्बल मारे ना तो आप से जियादा मर्द लगी है”

“अरे यार तुम बाते ना बनाओ जाओ ना जल्दी लेकर आओ ओह्ह्ह का”,मंगल फूफा ने बेसब्री भरे स्वर में कहा
“का फूफा रूपा के बिना जी नाही लग रहो तोह पे,,,,,,,,अभी जाते है और लेकर आते है तुम्हायी रूपा को”,गोलू ने कहा और अंदर चला गया। मंगल वही सीढ़ियों के सामने चक्कर काटते हुए रूपा और गोलू का इन्तजार करने लगा।

गोलू अंदर आया लेकिन अम्मा के कमरे से आती रोने की आवाज ने उसका ध्यान अपनी तरफ खींचा और गोलू उस तरफ चला आया। गोलू ने देखा आदर्श फूफा कुर्ते में फंसे है ,  बाहर निकलने की कोशिश कर रहे है वही साड़ी का पल्लू मुँह में खोंसकर रो रही है। मामला क्या था ये तो गोलू को समझ नहीं आया लेकिन आदर्श फूफा को देखकर उसे कुछ देर पहले की अपनी मार याद आ गयी। वह पहले भुआ के पास आया और मुँह से साड़ी का पल्लू निकालते हुए कहा,”काहे रो रही हो ? का,,,,,,,,,,,,,,!!!”

मुँह से पल्लू निकालते ही भुआ जो रोई है गोलू ने जल्दी से पल्लू वापस भुआ के मुँह में ठूसा और कहा,”कित्ता भयानक रोती हो भुआ अबही हार्ट अटैक आ जाता हमको,,,,,,,,,,,,,का कसम खा ली हो नाजुक दिल वालो को रोकर मारोगी ?”
“ए गोलू हमसे बकैती नाही करो हमहू बहुते दुःख मा है”,राजकुमारी भुआ ने साड़ी के पल्लू से अपना नाक पोछते हुए कहा

आदर्श फूफा कुर्ते में ऐसे फ़से थे कि कुछ देख तो नहीं पा रहे थे लेकिन सुन जरूर रहे थे।
“अरे हमरे होते काहे को दुःख भुआ ?”,गोलू ने भुआ के कंधो पर अपनी बाँह रखकर कहा

आदर्श फूफा ये नहीं देख पाए लेकिन वे गोलू की रग रग से वाकिफ थे इसलिए चिल्लाये,”अबे हाथ नीचे रख , का तुम्हरे बाप का माल है ?”
गोलू ने भुआ के कंधो से हाथ हटाया और चिढ़कर आदर्श फूफा से कहा,”हमाये बाप ऐसो डिफेक्टिव माल नाही बनाते समझे”

“का गोलू ! तुमहू हमको डिफेक्टिव माल बोल रहे हो ?”,कहने के साथ ही भुआ फिर रो पड़ी और इस बार तो साड़ी का पल्लू भी मुँह में नहीं खोंसा। गोलू ने भुआ के मुँह पर हाथ रखकर कहा,”अरे चुप हो जाओ देवी ! हमहू तुमको नाही कहे जे फूफा को कहे है उह्ह है डिफेक्टिव माल जो तुम्हरे जैसी स्वीट थर्टी के गले पड़ गए,,,,,,,,चाहो तो फूफा की कसम लेइ ल्यो भुआ आज भी सज सवर कर बाहिर निकलोगी ना तो दुइ चार तो तुम्हरी ब्यूटी देखकर ही गिर जायेंगे”

गोलू के मुँह से तारीफ सुनकर भुआ रोना भूल गयी और खुश होकर कहा,”का गोलू तुम भी,,,,वैसे तुमहू हिया का कर रहे हो ? और जे शेरवानी काहे पहिने हो ?”
“गुडुआ के साथ फेरे लेने का पिलान जो था इहलिये पहने है”,कुर्ते में फंसे आदर्श फूफा ने कहा
“और आपका पिलान ? परायी औरतो से जो 150 थप्पड़ खाकर आये है उह्ह्ह बताये भुआ को ?”,गोलू ने बिदककर कहा तो आदर्श फूफा चुप हो गए

गोलू भुआ की तरफ पलटा और कहा,”और तुमको का हुआ , काहे साड़ी का पल्लू चबाय रही हो ?”
“का बताये बऊआ ? हमहू तो बर्बाद हो गए ,, इह उम्र मा तुम्हरे जे फूफा किसी रूपा के पीछे पगलाय घूम रहे है”,भुआ ने कहा
“का रूपा ? एक तितली के पीछे इत्ते भँवरे ? ऐसो तो का देखे रहे इह सब ओह्ह्ह मा ?”,गोलू खुद में बड़बड़ाया ये देखकर भुआ ने उसकी बाँह पर अपना हाथ मारा जो कि थोड़ा भारी ही था और कहा,”अरे हमसे बात करने के बजाय खुद से ही का बात किये जाय रहे हो तुमहू ?”

“भुआ तुमहू रुको हम दुइ मिनिट मा आते है”,गोलू ने कहा
“पक्का आओगे ना ?”,भुआ ने अपना नाक पोछते हुये कहा
“अरे हमहू कांग्रेस सरकार थोड़े है जो दोबारा नाही आएंगे , आएंगे आएंगे दुइ मिनिट दयो बस हमका”,गोलू ने कहा और अंदर जाने के बजाय वापस सीढ़ियों की तरफ चला आया जहा मंगल फूफा उसका इंतजार कर रहे थे

गोलू को देखते ही मंगल फूफा का चेहरा ख़ुशी से खिल उठा और अगले ही पल मुरझा भी गया क्योकि गोलू अकेला आया था रूपा उसके साथ नहीं आयी थी।
गोलू मंगल फूफा के पास आया और उनके कंधो पर हाथ रखकर उन्हें बाहर की तरफ ले जाते हुए कहा,”चलो फूफा ! हिया कुछो नाही बचा अब तुमहाओ पेकअप”

“का कह रहे हो गोलू ? अरे हमहू तुमको रूपा को लेने भेजे थे , रूपा कहा है ?”,मंगल फूफा ने पूछा
“रूपा अब ना मिली है तोह का,,,,,,,!!!”,गोलू ने कहा
“का मतलब ?”,मंगल फूफा ने धड़कते दिल के साथ कहा
“अरे मतलब इह की रूपा को भूल जाओ , तुम्हायी रूपा हिया नवा खाता खोल ली है,,,,,,,,,,उसका और मिश्रा के जीजा का मेटर चालू है। साला पहिले तुम , फिर उह्ह नवरतनवा और अब आदर्श फूफा”,गोलू ने कहा

मंगल फूफा थे कद में छोटे वे गोलू को सीढ़ियों की तरफ लेकर आये , गोलू से रुकने का इशारा किया और चार सीढ़ी चढ़कर गोलू के बराबर हुए और थप्पड़ गोलू के गाल पर मारकर कहा,”खबरदार ! जो हमायी रूपा के बारे मा ऐसी ओछी बात कही , अरे हमायी रूपा तो देवी है देवी”
सबसे थप्पड़ खाने वाला गोलू आज मंगल फूफा से भी थप्पड़ खा चुका था। वह मंगल फूफा को देखकर गुस्से से चिल्लाया,”अरे हम थोड़े कह रहे है , उह्ह राजकुमारी भुआ कह रही है जाकर पूछो उस से,,,,,,,,,,,,!!!!”

गोलू के मुँह से राजकुमारी का नाम सुनकर मंगल फूफा फिर चिढ गया और कहा,”अरे उह्ह्ह मोटकी भुआ का कहेगी ? ओह्ह का खाने और सोने के अलावा आता ही का है ? हमरी रूपा को टेस्ट इत्तो खराब भी नाही कि उह्ह चांडाल आदर्शवा के साथ चक्कर चलाये ,, उह्ह ही हमायी रूपा को फसाया होगा,,,,,,,,,चकिया से पीछे जो पड़ा था ओह्ह के,,,,,,,,,,,,!!!”

“ए तुम सब ना पहिले डिसाइड कर ल्यो रूपा किसको चाहिए ? हमहू साला बार बार थप्पड़ नाही खाएंगे तुम सब से,,,,,,,,,,,!!”,गोलू ने कहा
“डिसाइड हो चुका ! अंदर जाकर रूपा को बाहिर लेकर आओ , हम अभी अपने प्रेम का इजहार कर देंगे ओह्ह के बाद किसी ने उसकी तरफ आँख उठाकर देखा तो आँखे नोच लेंगे ओह्ह्ह की”,मंगल फूफा ने गोलू को अंदर धकियाकर कहा

गोलू फिर अंदर चला आया और मन ही मन सोचने लगा कि वह भी कहा फंस गया लेकिन चलते चलते वह फिर भुआ के पास आया क्योकि आदर्श फूफा की वजह से उसे थप्पड़ पड़ा था उसका बदला भी तो लेना था उसे , उसने भुआ को वहा से जाने का इशारा किया और आदर्श फूफा की तरफ बढ़ते हुए कहा,”का भुआ देवता जइसन पति पर शक करती है शर्म नाही आती , रुको पहिले फूफा को कुर्ते से बाहिर निकालते है ओह्ह्ह के बाद बात करना”

गोलू को अपने लिए अच्छा बोलते और मदद करते देखकर आदर्श फूफा का गुस्सा एक पल में गायब हो गया और उन्होंने कहा,”अरे गोलू ! हम तो तुमको तिकड़मबाज समझते रहे तुमहू तो अच्छे आदमी निकले”
“अच्छे तो हमहू है फूफा”,कहते हुए गोलू ने अपने दोनों हाथो को मिलाकर एक जोरदार मुक्का आदर्श फूफा की पीठ पर दे मारा और चिल्लाया,”अरे भुआ का कर रही हो , काहे बेचारे फूफा को मार रही हो ?”

आदर्श फूफा कुछ समझते इस से पहले गोलू ने एक घुसा उनकी कोल में दे मारा और फिर चिल्लाया,”अरे ना करो भुआ , छोड़ दयो काहे हाथ साफ़ कर रही हो  बेचारे फूफा पर,,,,,,,,,,,,,,!!!”
आदर्श फूफा को भी अब लगने लगा कि उसे मारने वाली राजकुमारी है तो वे चिल्लाये,”अरे राजकुमारी का कर रही हो ? हम काहे मार रही हो हम तुम्हाये पति है”

“भुआ नहीं नहीं नहीं लात नाही मारना फूफा को,,,,,,,,,,,,!!!”,कहकर गोलू ने फूफा की तशरीफ़ पर एक लात भी मार दी और बेचारे फूफा कुर्ते से तो आजाद नहीं हुए उलटा गोलू से मार खाकर नीचे आ गिरे। गोलू के मन को शांति मिली और वह अगले ही पल वहा से भाग गया। आदर्श फूफा जैसे तैसे कुर्ते को फाड़कर उस
से आजाद हुए और देखा ना तो वहा गोलू था ना ही राजकुमारी , वे चक्कर खाकर वही गिर पड़े।

गोलू अंदर आया मिश्रा जी नहाकर कपडे बदलकर हॉल में आये ही थे कि उनकी नजर गोलू पर पड़ी और उन्होंने कहा,”तुमहू हिया का कर रहे हो ? तुम्हाये पिताजी से कहकर आये थे तुमको शाम मा हिया भेजे और जे शेरवानी पहिन कर काहे घूम रहे हो,,,,,,,,,,अब का गुडडुआ के साथ फेरे लेकर ही मानोगे ?”
“अरे गुड्डू भैया के साथ फेरे ले हमायी जुत्ती इह बताईये रूपा कहा है ?”,गोलू ने कहा

“तुमको रूपा से का काम है बे ?”,मिश्रा जी ने गोलू के पास आकर कहा
“हमको नाही मंगल फूफा को है , उह्ह रूपा से अपने प्रेम का इजहार करेंगे , बुलाओ ओह्ह का बाहिर और हमाये हवाले कर दयो इह मामला हम सम्हाल लेंगे”,गोलू ने कहा
“पाजामे का नाड़ा तो तुमहू ठीक से बाँध नाही पाते और रूपा को सम्हालोगे”,मिश्रा जी ने गोलू की शेरवानी के बीच लटकते पाजामे के नाड़े की तरफ इशारा करके कहा तो गोलू ने जल्दी से उसे ठीक किया और कहा,”अरे जे तो ऐसे ही भागते भागते खुल गवा”

“सुनो हमायी बात ! रूपा को हिया हम लेकर नाही आये थे उह्ह खुद आयी है बिंदिया के पास,,,,,,,,,,,,,और तुमहू एक ठो बात बताओ हमका , तुम का उह्ह्ह मंगल के दलाल हो जो ओह्ह्ह का संदेसा लेकर हिया आये हो,,,,,,,,,जब तक इह फैसला नाही हो जाता कि रूपा किस से सादी करि है तब तक उह्ह यही रही है जे घर मा,,,,,,,,,,,,समझे ! अब भाग जाओ हिया से”,मिश्रा जी ने कठोर स्वर में कहा

पुरे कानपूर में एक मिश्रा जी ही तो थे जिनके सामने गोलू की बोलती बंद हो जाती थी या बेचारा मज़बूरी में कुछ बोल नहीं पाता था क्योकि मिश्रा जी गोलू और गुड्डू को बातों से कम लातों से ज्यादा समझाते थे। मिश्रा जी का फरमान सुनकर गोलू ने कहा,”तो मतलब रूपा हमाये साथ नाही जाएगी , तो हम ना समझे ?”

“अब का लिखकर दे तुमको ?”,मिश्रा जी ने गोलू को घूरकर कहा तो गोलू उलटे पाँव वापस चला गया लेकिन अगले ही पल वापस आया और मिश्रा जी से कहा,”अच्छा आप वो पिताजी से हमे साम मा भेजने को काहे कहे थे आप ?”
मिश्रा जी ने गोलू को देखा और बड़े प्यार से कहा,”उह्ह्ह का है आज शाम मा पिरोगराम रखे है घर मा और तुमहू ख़ास मेहमान हो इहलीये गुप्ता से कहे रहय कि तुमको शाम मा भेज दे ताकि दिन मा अच्छे से आराम कर लेओ तुम,,,,,,,,,,,,,,,,!!”

“ल्यो पिताजी हमसे ऐसो कुछो कहे ही नाही,,,,,,,,,,,लगता है उह्ह्ह अकेले हिया आना चाहते थे , दुष्ट पिताजी”,गोलू ने दबे स्वर में कहा तो मिश्रा जी ने उसे थप्पड़ दिखाया और गोलू ने तुरंत अपनी जबान सम्हाल ली और खुश होकर कहा,”अरे पिताजी ने नहीं बताया तो का हुआ ? आपने बता दिया ना हमहू साम मा बख्त से पहुंच जायेंगे”

“बहुत बढ़िया ! अब जाओ और हाँ साथ में उह्ह्ह मंगल फूफा को भी लेते आना शाम मा सोच रहे है थोड़ा जलपान उन्हें भी करवा दे”,मिश्रा जी ने अपनी भंव चढ़ाकर कहा लेकिन गोलू तो शाम के प्रोग्राम की धुन में खोया था उसने बस मिश्रा जी के शब्द सुने उन्हें हाव भाव पर ध्यान नहीं दिया और कहा,”अरे ले आएंगे ले आएंगे मिश्रा जी , आप कहो तो पुरे कानपूर को इकट्ठा कर दे हिया,,,,,,,,,,,,,,,,,!!!!”

“उह्ह्ह तो आज शाम मा चीखें सुनकर हो ही जाएगा”,मिश्रा जी ने कहा
“चींखे ?”,गोलू ने हैरानी से कहा
“अरे चीखें नाही , डीजे , अब इत्तो बड़ो पिरोगराम है डीजे तो बजना ही चाहिए ना गोलू”,मिश्रा जी ने अपनी बात सम्हालकर कहा

“बिल्कुल बजना चाहिए , हमहू अभी जाकर अपना कोट पेंट प्रेस करवाकर लाते है”,कहकर गोलू वहा से चला गया
गुड्डू बाहर आया ही था लेकिन वह गोलू से बात करता या रोकता इस से पहले गोलू वहा से जा चुका था। वह मिश्रा जी के पास आया और कहा,”जे गोलू इत्ता खुश काहे है पिताजी ?”
“जे गला फाड़कर रोने से पहले की ख़ुशी है”,मिश्रा जी ने कहा और वहा से चले गए।

आदर्श फूफा और रूपा को लेकर क्या हो पायेगी राजकुमारी भुआ की गलतफहमी दूर ? गोलू के साथ रूपा को ना देखकर क्या फिर से भड़केंगे मंगल फूफा ? आखिर क्या है मिश्रा जी का प्रोग्राम जिसमे डीजे की जगह चीखें गूंजेगी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ Season 5” मेरे साथ )

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संजना किरोड़ीवाल 

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