Manmarjiyan Season 4 – 61
Manmarjiyan Season 4 – 61

गोलू बेहोश नीचे जमीन पर पड़ा था और गुड्डू उसके बगल में बैठा उसे जगाने की कोशिश कर रहा था। मंगल फूफा ने देखा तो कहा,”जे ना उठे है अब”
गुड्डू ने सुना तो गुस्से से मंगल फूफा को देखा और कहा,”का अंट संट बक रहे हो फूफा ?”
“अरे सच कह रहे है , हिया तक पहुंचते पहुंचते का का देखे रहे हम लोग और कचिया के चक्कर मा चकिया पहुंच गए उह्ह्ह भी मंगेश के ही घर मा,,,,,,,,,,,,,इह का कहते है “बैल तुम ना आओ हम ही आते है तुम्हाये सामने मार खाने” जे ना उठे है अब , अरे सदमा लग गवा है बेचारे को”,मंगल फूफा ने गुड्डू से कहा और गोलू के दूसरी तरफ उकडू आ बैठा और अपना हाथ अपनी कनपटी से लगा लिया।
एक तो गोलू होश में नहीं आ रहा था ऊपर से मंगल फूफा ऐसी मनहूस बातें कर रहे थे। गुड्डू ने मंगल फूफा को पीछे धक्का देकर कहा,”हिया बैठकर जे का मातम का मना रहे हो जाकर पानी लेकर आओ”
“हम लेकर आये ?”,मंगल फूफा ने उठकर कहा
“नहीं नहीं आप काहे जायेंगे मालिक हम चले जाते है , आप तो हिया बैठकर हमायी छाती पर मूंग दलिये,,,,,,,,,,,,,अबे जाकर पानी लेकर आओ”,गुड्डू ने पहले प्यार से और फिर चिल्लाकर कहा
मंगल फूफा पानी लेने चले गए और गुड्डू गोलू को होश में लाने की कोशिश करने लगा। अच्छा गोलू यहाँ बेहोश नहीं हुआ था बल्कि जान बुझकर आँखे बंद किये पड़ा था ताकि गुड्डू की मार से बच सके क्योकि चकिया को कचिया लिखने की गलती तो उसने ही की थी और उस पर गुड्डू ने जब बार बार उस से कहा कि लोकेशन के बारे में पता कर लो तो गोलू हर बार ओवरकॉन्फिडेंस में बात टाल देता। अब नतीजा ये हुआ कि मुसीबत गोलू के पास नहीं आयी थी बल्कि गोलू नाचते गाते पूरी बारात के साथ मुसीबत के पास आया था और वो मुसीबत था मंगेश,,,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू ने देखा गोलू नहीं लग रहा तो वह झुंझला उठा और गोलू के पैर पर एक लात मारकर कहा,”साला कहे थे हमहू तुमसे कि गोलू एक बार लोकेशन चेक कर ल्यो पर नाही तब तो तुम्हाये कान मा जूं तक नाही रेंगी,,,,,,,,,,!!”
गोलू होश में था और जैसे ही पैर पर गुड्डू की लात पड़ी दर्द के मारे उसने अपने दाँत भींच लिये लेकिन मजाल है गोलू होश में आ जाए। वह जिन्दा लाश की तरह वही पड़ा रहा। गुड्डू ने देखा मंगल फूफा भी पानी लेकर नहीं आये है तो गोलू के पास आया और उसे कंधो पर डालकर मनोज के घर की तरफ बढ़ गया।
शादी का घर था और पानी हर जगह मौजूद था लेकिन मंगल फूफा की रंगबाजी तो देखो रूपा के चक्कर में पानी लेने सीधा मंगेश के घर के अंदर चला आया। मंगल फूफा रूपा को ढूंढने लगा और चलते चलते टकराया सामने से आते लल्लन से जो कि अभी अभी मार खाकर आया था। लल्लन को अपने सामने देखकर मंगल फूफा के चेहरे आ रंग उड़ गया लेकिन पिछले कुछ वक्त से गोलू की संगत में था तो कहा,”अरे वाह ! का लड़की है ? बिल्कुल जैसे कोई आसमान की परी हो”
लल्लन ने पलटकर देखा लेकिन दो बड़े पेट वाले हलवाईयो के अलावा और कोई नहीं था। लल्लन वापस पलटा इतने में तो मंगल फूफा गायब। लल्लन ने अपना हाथ अपने सर से लगाया और बड़बड़ाया,”लगता है मार खाकर हमाओ दिमाग खराब हो गओ है , तभी ना हमे कभी उह्ह्ह साला गोलू तो कभी ओह्ह्ह का चार फुटिया फूफा नजर आ रहा है,,,,,,,,,मंगेशवा ने अगर हमे जे हालत मा देखा तो हमायी कित्ती बेइज्जती हो जाएगी। एक काम करते है गाँव जाते है फिर शाम मा बारात के साथ ही वापस आ जायेंगे,,,,,,,,,,,,हाँ जे सही रहेगा लेकिन जाने से पहिले अपना हुलिया सुधार ले”
लल्लन वहा से चला गया , मंगल फूफा पास ही छुपकर सब सुन रहे थे उन्होंने लल्लन के मुँह से किसी गाँव के बारे में सुना तो सोच में पड़ गया और बड़बड़ाया,”कही जे गाँव वही तो नहीं जहा से बिंदिया की बारात आने वाली है”
मंगल फूफा छुपकर लल्लन को जाते देख रहे थे कि तभी किसी ने उनका कंधा थपथपाया। मंगल फूफा ने पलटकर देखा तो उनका दिल धड़क उठा और मंगल फूफा गिरते गिरते बचे। उनका कंधा थपथपाने वाली कोई और नहीं बल्कि रूपा थी।
“हिया छुपकर का देख रहे हो ?”,रूपा ने कड़क स्वर में पूछा
“अह्ह्ह्हह ह्म्म्मम्म वो हम तो , हम तो पानी लेने आये थे”,मंगल फूफा ने हकलाते हुए कहा
“आईये हम देते है,,,,,,,,,,,,!!!”,रूपा ने अदा के साथ अपनी चोटी घुमाकर कहा जिस से चोटी पर लगे झुमके मंगल फूफा के मुँह पर आ लगे लेकिन मंगल फूफा को बुरा नहीं लगा , उलटा वे लार टपकाते हुए बिंदिया के पीछे चल पड़े।
बिंदिया रुकी और एक बाड़ा जग पानी का भरकर मंगल फूफा को थमाते हुए कहा,”ये लीजिये इतना काफी होगा कि और दे ?”
मंगल फूफा ने जग पकड़ा लेकिन जग के साथ ही उन्होंने रूपा के हाथो को भी अपनी उंगलियों से छू लिया
मंगल फूफा की छुअन पाकर रूपा को झुरझुरी सी हुई लेकिन उसने अपने हाथो को जग से नहीं हटाया और मंगल फूफा ने भी रूपा के हाथो से अपने हाथो को नहीं हटाया। दोनों एक दूसरे की आँखों में देखते हुए मुस्कुराते रहे। मंगल फूफा की आँखों में दिल चमक रहे थे और सीने का दिल बाहर आने को बेताब , वही इतने सालो तक शादी का इंतजार करने के बाद रूपा का दिल भी किसी को देखकर उछल कूद कर रहा था। मंगल फूफा रूपा को देखने में इतना खो चुके थे कि उन्हें पता ही नहीं चला कब मंगेश आकर उसके पास खड़ा हो गया ,
रूपा की नजर मंगेश पर पड़ी तो उसकी मुस्कान एकदम से गायब हो गयी और उसने अपने हाथ जग से हटाए और वहा से चली गयी लेकिन मंगल फूफा खोये हुए जग को दोनों हाथो से वैसे ही थामे रहे और खुली आँखों से रूपा के साथ प्रेम , शादी , वरमाला , मंडप और बच्चो के सपने देखते रहे।
मंगेश ने देखा मंगल न हिल रहा है ना पलकें झपका रहा है तो उसने मंगल फूफा का कन्धा पकड़कर उन्हें हिलाया तो मंगल फूफा होश में आये और देखा रूपा उनके सामने नहीं है उन्होंने मुस्कुराते हुए जैसे ही बगल में देखा मंगेश को देखकर रोने वाला मुँह बन गया।
मंगेश कुछ कहता इस से पहले मंगल फूफा ने जग का पानी मंगेश के मुँह पर उछाला और वहा से भाग गया। मंगेश मंगल फूफा की शक्ल भूल चुके थे इसलिए चिल्लाकर अपने आदमियों से कहा,”अबे कौन था जे ? पकड़ो साले को”
मंगेश के दो आदमी मंगल फूफा के पीछे भागे लेकिन मंगल फूफा कहा गायब हुए किसी को पता नहीं चला और आदमी दूसरी दिशा में चले गए।
हाथ में पानी का खाली जग थामे मंगल फूफा फिर घर के पीछे वाली गली से गुड्डू और गोलू की तरफ चल पड़े लेकिन आगे आकर उन्होंने देखा गोलू और गुड्डू तो वहा है ही नहीं अब तो मंगल फूफा और डर गए। उन्होने टेंट वाले लड़को में से एक से पूछा,”गुड्डू और गोलू कहा गए ?”
“अभी कुछ देर पहिले गुड्डू भैया गोलू भैया को अपने कंधे पर उठाये सीधे गए थे”,लड़के ने कहा और अपने काम में लग गया लेकिन मंगल फूफा को अब तक गोलू की हवा लग चुकी थी इसलिए हर सीधी बात का उल्टा मतलब पहले निकालते थे। लड़के की बात सुनकर उन्होंने अपना हाथ अपने सीने पर रखा और सीधी दिशा में आगे बढ़ते हुए बड़बड़ाये,”तो का गोलू अब नाही रहा ? अगर हमहू बख्त से पानी ले आते तो का पता उह्ह्ह बच जाते जे हमने का कर दिया। गुड्डू ओह्ह्ह का अपने कंधे पर लेकर गया है बेचारे की किस्मत तो देखो मरने के बाद चार कंधे भी नाही नसीब हुए ओह्ह्ह का,,,,,,,,,,ए गोलू तुम्हरे बिना हमरा का होगा रे”
कहते कहते मंगल फूफा की आँखों से गंगा जमना बहने लगी अभी कुछ ही दूर चले थे कि तभी पीछे से किसी की आवाज मंगल फूफा के कानों में पड़ी,”उह्ह रहा पकड़ो साले को”
मंगल फूफा ने सुना तो पलटकर देखा मंगेश के आदमी उनके पीछे ही आ रहे थे ये देखकर मंगल फूफा भागे ,, वे इतना तेज भागे की गुड्डू के पीछे जा पहुंचे
शोर शराबा सुनकर गुड्डू जैसे ही पलटा मंगल फूफा तो गुड्डू के हाथ से निकल गए लेकिन उनके पीछे भागते दोनों आदमी गुड्डू से टकराये और गोलू गुड्डू के हाथ से छूटकर फूस के ढेर में जा गिरा। गुड्डू ने ये अनचाही मुसीबत देखी तो दोनों आदमियों को दो चार घुसे मारकर वही गिरा दिया और इधर उधर देखा लेकिन गोलू कही नजर नहीं आया। मंगल फूफा पेड़ के पीछे छुपे थे वे निकलकर बाहर आये और कहा,”बहुत बढ़िया गुड्डू का मारे हो दोनों को”
“गोलू कहा है ?”गुड्डू ने घबराहट भरे स्वर में कहा
गोलू फुस के ढेर से निकलकर आया और गुड्डू का कंधा थपथपाया तो गुड्डू मारे डर के चिल्लाया और पीछे हटा तो मंगल फूफा गुड्डु के पास आये और दबे स्वर में कहा,”गुड्डू हमको तो लगता है गोलू मरने के बाद भूत बन गवा है,,,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू ने सुना तो मंगल फूफा को घुरा और कहा,”तुम्हाये बाप दादा भी देखे है दिन मा भूत और तुमसे किसने कहा गोलू मर गवा है ?”
“अरे तो फिर काहे गोलुआ को अपने कंधे पर बेताल की तरह उठाये घूम रहे थे ?”,मंगल फूफा ने चिढ़कर कहा
“आपको पानी लेने भेजा था जब नहीं आये तो इसे कही सेफ जगह लेकर जा रहे थे , कंधे पर उठाये थे अर्थी पर नाही जो मारा हुआ समझ लिए”,गुड्डू ने कहा
“अरे हमहू जिन्दा है यार गुड्डू भैया”,फूस से भरे गोलू ने खुद को झाड़कर कहा
गुड्डू ने देखा तो उसकी जान में जान आयी और वह गोलू के पास आकर बोला,”पर तुम तो बेहोश थे ना गोलू ?”
“अरे उह्ह्ह तो हम नाटक कर रहे थे”,गोलू ने झुंझलाकर कहा क्योकि फूस उसके कपड़ो में घुस गया था।
गुड्डू ने सुना तो एक थप्पड़ खींचकर गोलू को मारा और कहा,”साले तुम्हाये नाटक के चक्कर मा हिया हमायी जान हलक मा आ गयी थी”
गोलू ने सुना तो मुस्कुराया और गुड्डू से चिपकते हुए कहा,”इत्ता पियार करती हो हमसे गुड्डी”
गुड्डू ने गोलू को साइड में धकियाया और कहा,”कोई प्यार व्यार नहीं करते तुमसे और साले हमाओ नाम गुड्डू है गुड्डी काहे कह रहे हो हमे ?”
“गुड्डी न कहे तो और का कहे ? जे का है जे लहंगा जे चोली जे दुपट्टा , का बिंदिया भाभी की जगह आप मंडप मा बैठने का सोच रहे हो का ?”,गोलू ने कहा तो गुड्डू ने खुद को देखा और उसे समझ आया कि वह सुबह से इन्ही कपड़ो में घूम रहा है तो उसने हताश होकर कहा,”अरे का बताये यार गोलू साला हिया कित्ती भसड़ है,,,,,,,,,,,!!!”
“उह्ह भसड़ की जड़ भी हमहि है हम जानते है गुड्डू भैया”,गोलू ने जान बूझकर मासूम बनते हुए कहा जिस से गुड्डू उसके चकिया आने वाली बात भूल जाये और गोलू मार खाने से बच जाए
गुड्डू पहले से उलझा हुआ था इसलिए गोलू की बात पर ध्यान नहीं दिया और कहा,”वो सब हम तुमको समझाते है हमाये साथ आओ”
गुड्डू गोलू और मंगल फूफा को अपने साथ लेकर आगे बढ़ गया। मनोज के कमरे की खिड़की खुली थी गुड्डू ने पहले मंगल फूफा को अंदर भेजा फिर गोलू को और फिर इधर उधर देखकर खुद भी अंदर कूद गया और खिड़की बंद कर ली।
मिश्रा जी अपने साथ शर्मा जी , गुप्ता जी और आदर्श फूफा को लेकर चकिया के लिए निकल तो गए थे लेकिन वे ये भूल गए कि इस गाड़ी में बैठे तीनो लोगो की आपस में नहीं बनती। अभी कुछ ही दूर चले होंगे कि आदर्श फूफा ने गैस की वजह से गाड़ी का माहौल खराब कर दिया। आगे बैठे मिश्रा जी और शर्मा जी का मुँह तो बना ही बना लेकिन पीछे बैठे गुप्ता जी को इसका आभास ज्यादा हुआ तो उन्होंने कुर्ते से अपना नाक ढकते हुए कहा,”जे शुभ कार्यक्रम करने को जे ही बख्त मिला तुमको ?’
“जे सब कामो मा बख्त कौन देखता है ? जे तो हो जाती है अपने आप,,,,,,,,,,,,,नाक का सिकोड़ रहे हो जरा खिड़की खोल दयो बाहिर पास हो जाही है”,कहते हुए आदर्श फूफा ने फिर हवा छोड़ दी और इस बार तो टेढ़े होकर सीधा गुप्ता जी के मुँह पर जिस से गुप्ता जी चिढ गए और कहा,”ए यार मिश्रा , ए हमको आगे बैठाओ साला हिया जे के बगल मा बैठकर हमहू पास हो जाही है,,,,,,,,,,,,!!!”
मिश्रा जी ने सुना तो मन ही मन खुद को कोसने लगे की क्यों वो इन लोगो को साथ लेकर आये इस से अच्छा अकेले चले आते। मिश्रा जी को खामोश देखकर गुप्ता जी सीट पकड़कर उनकी तरफ झुके और कहा,”ए मिश्रा जी कही हमको पीछे बैठाकर जे चांडाल के हाथो मरवाने का पिरोगराम तो फिक्स नहीं न किये हो आप ?”
“हमायी मति मारी गयी थी जो हम तुम सबको अपने साथ लेकर आये”,आखिरकार मिश्रा जी का गुस्सा फूट पड़ा लेकिन वे आगे कुछ कहते इस से पहले आदर्श फूफा के कानो में पड़े गुप्ता जी के मधुर शब्द और उन्होंने कहा,”ए गुप्ता ! ए साला चांडाल किसको कह रहे हो तुमहू ?”
गुप्ता जी पीछे आ टिके और कहा,”तुम्हे कह रहे है और जैसी तुम्हायी शक्ल है और जैसी तुम्हायी हरकते है रामनगर का राजकुमार तो तुमको कोई कहने से रहा”
“सुन रहे हो मिश्रा जी ! चार लोगो के बीच घर के दामाद को कैसी ओछी बाते कही जा रही है ? अरे हम तो शुरू से जानते थे कि आप हमे अपने साथ काहे ले जाने लगे ,बेचारी हमायी फूल जैसे राजकुमारी भी कही रही कि मत जाओ लेकिन हम नाही माने और चले आये आपके साथ,,,,,,,,हमे का पता था हमायी छीछा लेदर करने के लिए जे दो भांड बुलाये हुए है आप” ,आदर्श फूफा ने कहा
मिश्रा जी ने गाडी साइड में रोक दी दी और पलटकर आदर्श फूफा से कहा,”अरे कैसी बात कर रहे है आप ? आपकी छीछा लेदर करने के लिए आपको इत्ता दूर काहे लेकर जायेंगे यार हमहु ?”
“अबे ए आदर्श्वा ! भांड किसको बोले बे तुम ? जे गुप्ता को जो कहना है कहो हमे कुछो नाही कहना समझे”,बहुत देर बाद शर्मा जी ने अपनी चुप्पी तोड़कर कहा
“काहे ? हमे काहे कहेंगे बे ? हम का सर्कस मा जोकर बनते है जो हमसे कहेंगे ,अपनी हद में रहो शर्मा”,गुप्ता जी अब शर्मा जी पर भड़क गए
“हद में ही है तभी आगे बैठे है”,शर्मा जी ने कहा
“तो आगे बैठकर का उखड लिए ? हम बताय रहे है हमाये मुँह ना लगो तुम समझे”,गुप्ता जी ने चिढ़कर कहा
“अरे कोनो बैलबुद्धि होगा जो तुम्हाये और तुम्हाये उह्ह्ह लफंडर बेटे के मुँह लगेगा। साला हमको समझ नहीं आता गुडडुआ ने पुरे जीवन मा एक ही दोस्त बनाया उह्ह इतना बकचोद,,,,,,,,,,,,,,!!”,फूफा ने बीच में कूदकर कहा
“हमहू तो खुद अपनी बिटिया देकर पछताय रहे है”,शर्मा जी ने निराशा भरे स्वर में कहा
“तो का बिटिया की अम्मा देने का सोचे थे ?”,गुप्ता जी ने कहा
“ए हमायी शर्माईन के बारे मा कुछो नाही कहना गुप्ता है,,,,,,,,,,,जबान खींच लेंगे तुम्हायी”,शर्मा जी चिल्लाये
बेचारे मिश्रा जी ख़ामोशी से तीनो को कुत्तो की तरह झगड़ते और एक दूसरे को ताने मारते देखते रहे और फिर धीरे से गाड़ी का दरवाजा खोला और नीचे उतरकर जोर से चिल्लाये।
( क्या रूपा बनेगी मंगल फूफा के जीवन मे मंगल करने वाली या यहाँ भी होगा उनका अमंगल ? क्या गुड्डू सम्हाल पायेगा चकिया में बिगड़ी स्तिथि ? क्या मिश्रा जी झेल पाएंगे इस तिकड़ी को या दिखाएंगे अपना गुस्से वाला रूप ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल

