Manmarjiyan Season 4 – 58

Manmarjiyan Season 4 – 58

Manmarjiyan Season 4
Manmarjiyan Season 4 by Sanjana Kirodiwal

आदर्श फूफा का फेंका गया लेटर लवली के हाथ लग गया जो चकिया से आया था। लवली ने जैसे ही उस मुड़े हुए कागज को खोलकर पढ़ना चाहा एकदम से आदर्श फूफा उसके पास आये और वह कागज उनके हाथ से छीन लिया। लवली ने देखा तो उसे बड़ी हैरानी हुई और उसने कहा,”जे का है फूफा कागज काहे छीने हमसे , वापस दीजिये”
आदर्श फूफा घबरा गए कही लवली ने उस कागज में लिखी बात पढ़ ली तो दिक्कत हो जाएगी सोचकर उन्होंने लवली की तरफ देखा और मुस्कुराये। लवली कुछ समझ पाता इस से पहले आदर्श फूफा ने कागज को मुँह मे रखा और खा गए।

लवली ने देखा तो बस देखता ही रह गया। आदर्श फूफा ने जैसे तैसे मुँह बनाकर कागज को निगल लिया और लवली की तरफ देखा तो लवली ने उखड़े स्वर में कहा,”का पिछले जन्म मा कोनो असुर थे का ?”
फूफा ने सुना चिढ़कर कहा,”हम असुर थे तो तुम का हुए तुम भी तो इसी खानदान से हो न,,,,,,,,,,!!!”
लवली को नहीं पता था बीती रात ही मिश्रा जी और आदर्श फूफा के बीच सुलह होकर दोस्ती हो चुकी है उसने चिढ़कर कहा,”आपसे तो मुँह लगना ही बेकार है”

इतना कहकर लवली वहा से चला गया और आदर्श फूफा ने ऊँचे स्वर में कहा,”हाँ तो एक ठो बात अपने भेजा मा  घुसाय ल्यो , आदर्श बाबू से बहस जिंदगी तहस नहस,,,,,,,,,,!!”
लवली ने तो आदर्श फूफा की बात नहीं सुनी लेकिन मिश्रा जी ने सुन ली और कहा,”ओह्ह्ह ! गुंडे महाराज हिया आवा जरा”
आदर्श फूफा ख़ुशी ख़ुशी उनके पास चले आये तो मिश्रा जी ने कहा,”भगवान् जब ऊपर बुद्धि बाँट रहे थे तब कहा थे आप ?”

“हमाये साथ फेरे ले रहे थे”,भुआ ने हाथ पकड़ी ट्रे से चाय का कप उठाकर पहले मिश्रा जी को दिया और फिर आदर्श फूफा को देकर बोली,”क्यों सही बोले ना हम ?”
“अरे तुमहू कबो गलत बोल सकती हो का ? लाओ चाय दो सुबह से दो घूंठ तक नसीब नाही हुए है”,आदर्श फूफा ने कप लेकर कहा
“काहे ! दिन मा भी पीना सुरु कर दिए आप ?”,मिश्रा जी ने फूफा को घूरकर पूछा
फूफा हँसते और झेंपकर कहा,”हे हे हे का मिश्रा जी आप भी , अरे हमहू चाय के घूंठ की बात कर रहे है भाई,,,,,,,,,,!!”

भुआ अंदर चली गयी उनके जाने के बाद मिश्रा जी ने कहा,”हमे एक ठो बात बताईये आदर्श बाबू आपके पेट मा कोनो बात पचती काहे नाही है ? नहीं मतलब उह्ह्ह गुप्ता और शर्मा को बताने की का जरूरत थी हम चकिया जा रहे है। उह्ह्ह का सर पर उठाकर लेकर जायेंगे हमे ?”
“अरे हमने सोचा दो से भले चार”,आदर्श फूफा ने चाय का घूंठ भरकर कहा
“चकिया से बहू को डोली मा लेकर आना है अर्थी पर नाही जो चार लोगो की जरूरत पड़ी है। कभी अपना मगज भी इस्तेमाल कर लिया करो वरना जंग लग जाना है एक दिन ओह्ह्ह मा”,मिश्रा जी ने फूफा को घुड़ककर कहा

“अरे उह्ह्ह रामनगर की पहाड़ी पर उह्ह दिन जो हुआ था उह्ह भूल गए का ? जियादा लोग रहे तो उह्ह्ह लल्लन से निपटने में आसानी होगी बस जे सोचकर हमहू शर्मा और गुप्ता को बुलाय लिए”,इस बार फूफा ने भड़ककर कहा
“रामनगर की पहाड़ी पर कपडे भी उतर गए थे जे का भूल गए ? हमाये आस पास के सब लोग एक से बढ़कर एक बकैत है। करने जायेंगे अच्छा होगा बुरा इहलीये हमहू चाहते थे कि अकेले जाए और मामला सुलटाये लेकिन नहीं आपको तो पूरी बारात इकट्ठा करने का सोक है,,,,,,,,,,,,

अब बजाइये बैठकर बाजा शर्मा और गुप्ता के नाम का,,,,,,,,,,,!!!”, मिश्रा जी ने आदर्श फूफा पर बिगड़कर कहा
“अरे काहे चिंता करते है आप ? हमने गुप्ता और शर्मा को समझा बुझाकर भेज तो दिया है”,आदर्श फूफा ने भी चिढ़कर कहा
“अच्छा ! आप कहेंगे और उह्ह दोनों समझ जायेंगे,,,,,,,,,,,,चौक तक पहुंचे नाही कि उह्ह्ह गोलू के बाप की बत्ती जलेगी और हो गवा मेटर,,,,,,,,,,,हमहू जाते है शोरूम से गाडी मंगवाते है”,मिश्रा जी ने उठते हुए कहा
“गाडी काहे ? बस से चलते है ना”,फूफा ने भी उनके साथ ही उठते हुए कहा

“उह्ह्ह दुइ राक्षस भी तो जायेंगे ना साथ मा ओह्ह्ह के बस खर्चा का आप देंगे ? आते है”,कहकर मिश्रा जी वहा से चले गए और आदर्श फूफा तख्ते पर आ बैठे। कुछ देर पहले खाये कागज से अब उनके पेट में गुड़गुड़ होने लगी थी इसलिए उठे और भागे बाथरूम की तरफ

शर्मा जी गुप्ता जी को अपनी स्कूटी के पीछे बैठाये चले जा रहे थे। ऐसे दोनों एक दूसरे को फूटी आँख नहीं सुहाते थे लेकिन मुसीबत के समय दोनों साथ होते थे। स्कूटी आकर चौराहे के बगल में रुकी लेकिन गुप्ता जी अपनी ही सोच में खोये हुए थे इसलिए स्कूटी से नीचे नहीं उतरे। शर्मा जी ने देखा गुप्ता जी अभी भी बैठे है तो उन्होंने गर्दन घुमाकर कहा,”अब का घर तक छोड़कर आये तुम्हे ?”
गुप्ता जी की तन्द्रा टूटी और उन्होंने शर्मा जी के कंधे पर हाथ रखकर बहुत ही सस्पेंस के साथ कहा,”यार शर्मा ! ये चकिया वही है ना जहा बृजेश रहता था ?”

“काहे ? अब तुमको चकिया काहे जाना है ? और हमायी स्कूटी मा इत्तो पेट्रोल नहीं कि तुम्हे चकिया छोड़ आये”,शर्मा जी ने चिढ़कर पूछा  
 गुप्ता जी ने सुना तो मुँह बनाकर कहा,”जब देखो तब गरीबी का रोना रोना शुरू कर दो,,,,,,,,,,,,जे साला गोलुआ भी का भूखे नंगे खानदान मा ब्याह किये रहय। अबे बैल बुद्धि चकिया हिया से है 200-300 किलोमीटर दूर हुआ तक तुम्हायी जे खटारा स्कूटी पहुंच पाहि है। हमहू साला कुछो और कह रहे है जे बीच मा पेट्रोल घुसाय रहे”
“बको का बकना है ?”,शर्मा जी ने उखड़े स्वर में कहा

“अरे यार ! हम जे कह रहे है कि मिश्रा जी को एकदम से चकिया जाने की का जरूरत पड़ गयी और कल रात उह्ह्ह चाण्डाल भी तो कह रहा था फोन पर कि मिश्रा जी के घर की बहू हुआ मंगेश के कब्जे मा है”,गुप्ता जी ने सोचते हुए कहा
“कौन चांडाल ?”,शर्मा जी ने पूछा
“अबे गुड्डू के फूफा , मिश्रा के घर मा उह्ह्ह एक ही तो है महान आत्मा जॉन दारु पीने के बाद सब उगल देत है। शर्मा ! हमको तो ना साला कोनो बहुते बड़ी  गड़बड़ लग रही है। एक काम करते है हम लोग भी मिश्रा के साथ चकिया चलते है और देखते  है का मेटर है”,गुप्ता जी ने कहा

“नाही नाही हम नाही जायेंगे और मिश्रा चाहे चकिया जाए चाहे लन्दन तुमहू काहे ओह्ह्ह के फटे मा टाँग अड़ाय रहे हो ?”,शर्मा जी ने कहा
“का है कि उह्ह्ह हमाये मित्र है और मित्र का फर्ज है मुसीबत मा अपने मित्र की मदद करना,,,,,,,,,,,,,ए यार शर्मा चलो ना यार का भाव खाय रहे हो ?”,गुप्ता जी ने कहा
“नाही नाही हम नाही जायेंगे हमे बहुते काम है”,शर्मा जी ने गुप्ता जी से पीछा छुड़ाने के लिए कहा
“अबे का काम है ? कौनसा घर बैठ के शर्माईन का बिलाउज पेटीकोट सिलना है , अबे चलो ना यार”,गुप्ता जी ने कहा

“ए गुप्ता बताय रहे है बिटिया की अम्मा को लेकर कोनो मजाक नाही समझे,,,,,,,,,,!!!”,शर्मा जी ने कहा
“हाँ हाँ ठीक है हमायी भी तो कुछो लगती है ना उह्ह अरे काहे करेंगे उनको लेकर मजाक , हमहू तो तुमसे रिवेस्ट कर रहे है चलो न”,गुप्ता जी ने प्यार से कहा
“अरे कहा चले भाई ? सुबह से ना चाय पीया है न कुछो खाया है ऊपर से उह्ह्ह गुड्डू का फूफा साला सबेरे सबेरे मिश्रा के घर मा ऐसे बुलाय रहा जैसे मिश्रा जी ही ना रहे हो”,शर्मा जे चिढ़कर कहा

“ल्यो इत्ती सी बात  , उह्ह रही मोहन की दूकान चलो चलकर चाय समोसा और जलेबी खिलाते है तुमको,,,,,,,,,,,,,,का यार शर्मा ! आज भी चाय नाश्ता ना मिलने पर बच्चो की तरह बिगड़ जाते हो,,,,,,,,,,,चलो आओ”,गुप्ता जी ने स्कूटर से नीचे उतरकर कहा
शर्मा जी चाय समोसे का नाम सुनकर मान गए और स्कूटी को साइड लगाकर कहा,”हाँ लेकिन चाय समोसे का पईसा हम नाही देंगे”  
गुप्ता जी ने शर्मा जी के सामने हाथ जोड़े और कहा,”अरे हम दे देंगे मालिक चलो तो सही”
शर्मा जी और गुप्ता जी साथ साथ चाय समोसा खाने निकल पड़े।

मंगेश का घर , चकिया
आज बिंदिया की शादी थी और घर में टेंट लग रहा था क्योकि व्हाट्सप्प लोकेशन देखकर रवि भले खुद चकिया ना पंहुचा हो लेकिन उसके लड़के टेंट के सामान के साथ वहा पहुंच चुके थे। देर रात पहुंचे थे इसलिए मंगेश के भाई बिरजू ने उन्हें टेंट सुबह लगाने को कहा। सभी लड़के घर के पीछे वाले हिस्से में उसी काम में लगे थे। लल्लन भी रात से यही थी , पास ही के गांव में उसके साले का घर था जहा से शाम में बारात आनी थी लेकिन लल्लन ठहरा मंगेश का दोस्त इसलिए यहाँ भी सब काम धाम देख रहा था।

वह टेंट वालो के पास खड़े होकर सब बंदोबस्त देख रहा था कि उसकी नजर घाघरा चुन्नी पहने घर के अंदर आते गुड्डू पर पड़ी। हालाँकि लल्लन को नहीं पता था घूँघट के पीछे गुड्डू है उसे तो रात में आये डांस ग्रुप वाली बिजली याद आयी जो रात में खूब ठुमके लगा रही थी और उसे देखकर लल्लन का दिल गदगद हुआ जा रहा था।

“सही से लगाना बे हमहू अभी आते है”,कहते हुए लल्लन अपने बालों में से हाथ घुमाते हुए गुड्डू की तरफ चला आया। गुड्डू जैसे ही घर के अंदर आया उसका सामना लल्लन से हुआ और एक पल को वह घबरा गया कि कही पकड़ा ना जाये लेकिन फिर हिम्मत करके आगे बढ़ा तो लल्लन उसके सामने आ गया , गुड्डू ने साइड से निकलने की कोशिश की तो लल्लन मुस्कुराते हुए फिर उसके सामने चला आया ये देखकर गुड्डू झुंझलाया और लड़की की आवाज में कहा,”का है ? का चाहते हो तुम ?”

“अरे चाहते तो बहुत कुछ है , कल रात का नाची हो तुमहू हमाये दिल मा अभी तक घुंघरू बज रहे है”,लल्लन ने खुश होकर कहा
गुड्डू ने सुना तो मुँह बनाया और कहा,”हमहू कल रात मा नाचे पर तुमहू काहे हमायी छाती पर नाच रहे हो ? चलो हटो हमाये सामने से”
कहकर गुड्डू फिर साइड से जाने लगा तो लल्लन उसके सामने आ गया और कहा,”हमाओ नाम लल्लन है हमहू होने वाले दूल्हे के फूफा है”

“तो जाकर भुआ को परेशान करो हमाये पीछे काहे पड़े हो ?”,गुड्डू ने खुद को शांत रखकर कहा
“अरे तुमहू खुद ही तो कल रात इशारा कर रही थी “कुण्डी मत खड़काओ राजा सीधा अंदर आओ राजा” अब राजा को देख के खुदही दरवाजा बंद कर ले रही हो जे तो बहुते गलत बात है न”,लल्लन ने कुनमुनाते हुए कहा

गुड्डू ने सुना तो समझ गया कि जरूर लल्लन को कोई गलतफहमी हुई है वह उसे कोई और समझ रहा है लेकिन उसे यहाँ से निकलना था और जल्द से जल्द बिंदिया से मिलना था इसलिए उसने जान बूझकर लल्लन के गाल पर ऊँगली घुमाकर कहा,”अरे तो दरवाजा बंद किया तो का हुआ तुमहू खिड़की से आ जाओ”
“का सच ?”,लल्लन ने ख़ुशी से उछलकर कहा
“हाँ सच ! हिया से चार घर छोड़कर पांचवे घर के पीछे वाले कमरे की खिड़की कल रात से तुम्हाये लिए खुली रखी है हमने,,,,,,,,,,!!!”,गुड्डू ने लल्लन को अपनी बातो में फंसाकर कहा

लल्लन ने सुना तो उसका दिल तो उछलने लगा और उसने कहा,”अरे लेकिन तुम अंदर कहा जा रही हो , तुम भी चलो तुम्हाये बिना खुली खिड़की का का फायदा ?”
“हमाओ कुछो सामान अंदर रह गओ हमहू वही लेने जा रहे है ! तुमहू खिड़की से चलो हमहू दरवाजे से आकर तुमको यही स्वर्ग दिखाते है”,गुड्डू ने कहा और मटकते हुए बिंदिया के कमरे की तरफ बढ़ गया।
लल्लन मारे ख़ुशी के घर से बाहर निकला और पांचवे मकान की तरफ बढ़ गया।  

गुड्डू ने बिंदिया के कमरे का दरवाजा खोला और अंदर आया और दरवाजा बंद कर दिया तो बिंदिया ने चौंककर कहा,”ए कौन हो तुमहू और दरवाजा काहे बंद किये ? अम्मम्म”
बिंदिया किसी को आवाज देने के लिए चिल्लाती इस से पहले ही गुड्डू ने आगे बढ़कर एक हाथ से उसका मुँह किया और दूसरे हाथ से अपना घूंघट हटाकर दबे स्वर में कहा,”अरे भाभी हम है गुड्डू”
गुड्डू को एक बार फिर अपने सामने देखते ही बिंदिया की आँखे बड़ी हो गयी और उसने गुड्डू से हाथ हटाने का इशारा किया।

“हमहू हाथ हटाए तो आप चिल्लायेंगी”,गुड्डू ने कहा
बिंदिया ने झुंझलाकर ना में गर्दन हिलायी तो गुड्डू ने अपना हाथ हटा लिया। बिंदिया गुस्से से गुड्डू को घूरने लगी और फिर धीमे स्वर में कहा,”हमने कल कहा था ना तुमसे कि हिया से चले जाओ फिर वापस काहे आये हो ?”
गुड्डू ने पहले दो तीन गहरी सांसे ली क्योकि बेचारा घूंघट में ठीक से साँस भी नहीं ले पाया था। बिंदिया ने देखा तो पास ही पड़े जग से गिलास में पानी डाला और गुड्डू की तरफ बढ़ा दिया। गुड्डू ने पानी पीया और गिलास बिंदिया की तरफ बढाकर कहा,”हम आपको लेने आये है भाभी”

“अब बहुत देर हो चुकी है गुड्डू,,,,,,,,,,,,!!!”,बिंदिया ने उदास होकर कहा
“अरे कुछो देर नाही हुई कौनसा आपके फेरे हो गए , माँग मा सिंदूर भर गवा या गले मा मंगलसूत्र डल गवा जो देर हो चुकी है। कुछो देर नाही हुई है लेकिन हाँ आप अगर हमायी बात ना सुनकर अपनी जिद पर अड़ी रही तो जरूर देर हो जाएगी फिर तो हम का लवली भैया भी कुछो ना कर पाहि है। बस एक बार ठंडे दिमाग से हमायी बात सुन ल्यो ओह्ह्ह के बाद आपको जो ठीक लगे उह्ह आप करना”,गुड्डू ने बिंदिया को समझाते हुए कहा

बिंदिया ने सुना तो गुड्डू की तरफ देखने लगी और पलंग पर बैठते हुए कहा,”कहो का कहना चाहते हो ?”
गुड्डू सामने पड़ी कुर्सी पर आ बैठा और बिंदिया को सब बता दिया। बिंदिया ने सुना तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ कि कैसे वह अब तक लवली को गलत समझ रही थी। बिंदिया के चेहरे से उदासी झिलमिलाने लगी और उसने रोआँसा होकर कहा,”तो अब हम का करे गुड्डू ?”
“आपको कुछो नाही करना है जो करेंगे हम करेंगे बस आप भागने के लिए तैयार रहना”

बिंदिया ने सुना तो हामी में गर्दन हिला दी। गुड्डू उठा और खिड़की से जाने लगा तो बिंदिया ने कहा,”खिड़की से काहे जा रहे हो गुड्डू दरवाजे से जाओ न ?”
गुड्डू ने बिंदिया की तरफ देखा और सर पर ओढ़े दुपट्टे से खुद को ढकते हुए कहा,”दरवाजे से नाही जा सकते भाभी ! का है कि हमायी जान के साथ साथ अब हमायी इज्जत को भी ख़तरा है”  
बिंदिया को कुछ समझ नहीं आया और गुड्डू खिड़की से कूदकर भाग गया।

( क्या लवली जान पायेगा उस लेटर में लिखी बात या रहेगा वो इस सारे झमेले से दूर ? क्या मिश्रा जी का शक सही है , गुप्ता जी और शर्मा भी जायेंगे उनके साथ चकिया ? क्या गुड्डू हो पायेगा सफल बिंदिया को घर से भगाने में ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )

Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58

Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58Manmarjiyan Season 4 – 58

Continue With Manmarjiyan Season 4 – 59

Read Manmarjiyan Funny Story

Follow Mer On https://www.instagram.com/sanjanakirodiwal/

संजना किरोड़ीवाल

Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal
Pasandida Aurat Season 2
Pasandida Aurat Season 2 by Sanjana Kirodiwal

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!