Manmarjiyan Season 4 – 47
Manmarjiyan Season 4 – 47

गोलू ने जैसे तैसे करके गुड्डू को मनाया और दुकानवाले से सिर्फ गाडी में बिखरा शीशा साफ करने को कहा। दुकानवाले ने लड़के को भेजा। लड़का गाड़ी के पास आया और पिछली सीट पर पड़े मंगल फूफा को देखकर चिल्लाया,”मालिक ! गाड़ी मा लास पड़ी है”
लाश का नाम सुनते ही गुड्डू और गोलू ने एक दूसरे की तरफ देखा और दोनों गाड़ी की तरफ भागे। दुकानवाला भी चला आया। गोलू ने आकर लड़के के सर पर एक चपत मारी और कहा,”अबे फूफा है हमाये , सो रहे है पीछे जे का लास बोल रहे हो तुमहू,,,,,,,,,,,,,,,मुक्का मार के नकसीर निकाल देंगे अभी यही पे,,,,,,,,!!!”
गोलू की बात से लड़का डर गया और चुपचाप अपना काम करने लगा।
“लेकिन तुम्हाये पिताजी की तो कोनो बहीन ही नाही है फिर जे फूफा कहा से आ गए ?”,दुकानवाले ने कहा जो गोलु से लेकर उसके पुरे खानदान तक को जानता था
“अरे हमायी अम्मा के फूफा है”,गोलू ने जल्दबाजी में कहा
“तुम्हायी अम्मा के ? देखने मा तो हमायी उम्र के लग रहे है और तुम्हायी अम्मा तो हमायी भी अम्मा लगती है फिर जे कैसे फूफा हुए बे ?”, दुकानवाले ने कहा
“अरे मतलब ! जे का सरनेम फूफा है , हमायी अम्मा के दूर के रिश्तेदार है कानपूर घूमने आये है,,,,,,,,,,,,,पूरी बात काहे नाही सुनते”,गोलू ने दाँत पीसते हुए कहा
“लेकिन जे तो सो रहे है फिर कैसे घूमेंगे कानपुर ?”,दुकानवाला तो जैसे गोलू के पीछे ही पड़ गया
गोलू ने अपना सर नोचा और खुद को शांत करके बहुत ही शांति से कहा,”दिन मा सोयेंगे तो रात मा अच्छे से घूम पाएंगे ना,,,,,,,,,,,,,इहलीये सो रहे है और तुमको का पंचायती है बे ,शीशा लगाने को कहे है उह्ह लगाओ कौन सो रहा है काहे सो रहा है क्यों जानना है तुमको का जनगणना मा बाबू लगे हो ?”
गोलू आराम से कहते कहते एकदम गुस्सा हो गया ये देखकर दुकानवाले ने कहा,”अरे अरे गोलू हमहू तो बस पूछ रहे थे , दिमाग गर्म लग रहो तुमहाओ कुछो ठंडा मँगवाय दे ?”
“हाँ दुई ठो कोका-कोला दुइ कचौड़ी सब्जी”,गोलू ने फिर शांत होकर कहा तो इस बार गुड्डू ने कहा,”गद्दा भी लगवाय दे तुम्हाये लिए ? अबे गाडी ठीक करवाओ और चलो हिया से,,,,,,,,,,,,,,जब देखो तब बस इह खाना है उह खाना है , लात घुसे खाके पेट नाही भरो तुमहाओ,,,,,,,,,,,,,,!!!”
गुड्डू की एक फटकार से ही गोलू सीधा हो गया ये देखकर गुड्डू दुकानवाले की तरफ पलटा और कहा,”और तुम ? तुम का जे से चाय पानी ठण्डा गर्म पूछ रहे हो बे ! तुम्हाये जीजा लगे है इह ?”
आदमी ने गुड्डू को गुस्से में देखा तो चुपचाप वहा से चला गया।
कुछ देर में गाड़ी साफ हो गयी। गुड्डू ने पैसे चुकाए और गाडी में आ बैठा। गोलू भी गुड्डू के बगल में आ बैठा और कहा,”बस गुड्डू भैया अब कोई टेंशन नहीं है ,अब आराम से,,,,,,,,,,,,,”
“चुप , बिल्कुल चुप , एक शब्द नाही बोलना साला जब भी मुँह खोलते हो कुछो मनहूसियत फ़ैल ही जाती है। चुपचाप बैठो और हमको गाड़ी चलाने दो”,गुड्डू ने गाडी स्टार्ट करके कहा
गोलू ने सुना तो सीट पर पसरा और अपना सर सीट से लगाकर आँख मूँद ली क्योकि अब इसी में उसकी भलाई थी। गुड्डू ने गाड़ी स्टार्ट की और मन ही मन भगवान् का नाम लेकर गाडी आगे बढ़ा दी। पिछली सीट पर मंगल फूफा बेहोश पड़े थे जिनकी खबर किसी को नहीं थी।
मिश्रा जी का घर ,कानपूर
भुआ और फूफा ने जो खाना खाया था उसमे लवली ने लूज मोशन की दवा मिला दी जिस से दोनों का पेट ऐसा खराब हुआ कि दोनों बार बार वाशरूम जा रहे थे और आँगन के पीछे बने वाशरूम का नजारा अभी भी वैसा ही था। फूफा इस बार ऐसा अंदर गए कि उनके इंतजार में भुआ बेचारी बाहर ही बैठ गयी और दिवार से पीठ लगाकर पसर गयी। कुछ देर बाद बेहाल फूफा बाहर आये पसीने से लथपथ ,बाल बिखरे ,हाल बेहाल और आकर भुआ के बगल में बैठते हुए कहा,”राजकुमारी ! लगता है जे तुम्हाये घरवाले तुमको और हमको तुम्हायी अम्मा के पास भेजकर ही दम लेंगे”
“हाँ कोमलिया के पिताजी ! उह्ह कल का आया लवली भी जे से मिला हुआ है,,,,,,,,,,,!!!”,भुआ ने दम भरते हुए कहा
“अरे लवली को काहे दोष दे रही हो , तब तो भर भर के पूड़ी हलवा तुम्ही ना खाय रही थी,,,,,,,,,,,,!!”,फूफा ने कहा
“पता नाही का मिलाये रहय खाने मा कि पेट खराब हुई गओ”,भुआ ने अपना पेट पकड़कर कहा
तभी लवली वहा से गुजरा और भुआ की बात जैसे ही उसके कानो में पड़ी उसने रूककर कहा,”ल्यो भलाई को तो जमानो ही ना रहो भुआ ,एक तो जिह घर मा आप दोनों को कोई पूछत नाही उह्ह्ह घर मा हमहू सबके खिलाफ जाकर आपके लिए खाना बनाय रहे और खिलाय रहे और आप हमे ही गलत कह रही है”
लवली की बात सुनकर भुआ जल्दी से उठी और उसके पास आकर कहा,”अरे नाही नाही बिटवा हमहू तो बस जे कह रहे कि खानो इत्तो अच्छो बनो रहो कि हमहू जियादा खाय लिए और के कारन हमाओ पेट शायद खराब हुई गओ,,,,,,,,,,,,,,ए बिटवा जरा मेडिकल स्टोर से जाकर हमरे लिए कोनो दवा लाय दयो”
“अभी लाते है”,कहकर लवली चला गया। फूफा उठकर भुआ के पास आया और कहा,”तुमहू खामखा लवली पर शक कर रही थी उह्ह तो कित्ता सीधा है तुमहू कही और तुरंत दवा लाने चला गवा,,,,,,,,,,कमाल करती हो राजकुमारी अरे भाई से नाही बना के रखी कम से भतीजे से तो बनाय के रखो”
“अरे हमे का पतो ,हम तो बस,,,,,,,,,,,!!!”,भुआ ने मायूस होकर कहा
“अच्छा छोडो इह सब और चलो जल्दी चलकर अपना हुलिया ठीक कर ले वरना उह्ह तुम्हरी भाभी ने देखा ना तो ओह् का ताने मारने का मौका मिल जाही है”,फुफा ने कहा और भुआ को साथ लेकर अम्मा के कमरे की तरफ चला गया जहा उनका सामान रखा था।
गुड्डू ने गोलू को एक फटकार क्या लगाई गोलू तो दो घंटे तक ऐसा सोया कि गुड्डू की आवाज पर ही उठा,”गोलू ! ए गोलू , अबे उठ जाओ का घर मा सोने को नाही मिलता”
गुड्डू की आवाज सुनकर गोलू अंगड़ाई लेते हुए उठा और इसी के साथ उसका हाथ जा लगा गुड्डू के मुँह पर तो गुड्डू ने झुंझलाकर कहा,”एक काम करो हमायी आँख ही फोड़ दयो ना”
“अरे सॉरी भैया ! उह्ह्ह देखे नाही हम,,,,,,,,,,,,वैसे गाड़ी काहे रोके है ?”,गोलू ने बाहर देखते हुए कहा
“सुबह से कुछो खाये नाही है सिवाय हवा के , दुइ घंटे से गाडी चलाय रहे है थक गए है उतरकर कुछो खा पी लेते है फिर चलते है”,गुड्डू ने सीट बेल्ट हटाकर कहा
खाने के नाम से ही गोलू के चेहरे पर रौनक और आँखों में चमक आ गयी। गुड्डू नीचे उतरा साथ ही गोलू भी उतर गया तो गुड्डू ने कहा,”ओह्ह्ह का भी बुलाय ल्यो”
गोलू ने गुड्डू के हाथ के इशारे की तरफ देखा तो पाया की एक मरियल कुत्ता गाडी के पहिये के पास खड़ा है गोलू ने समझा कुत्ते की हालत देखकर गुड्डू उसे बुला रहा है ताकि उसे भी कुछ खिला दे। वह गुड्डू के पास आया और एकदम से गुड्डू के गाल को चूमकर कहा,”कसम से गुड्डू भैया आप जैसा दिलदार आदमी कबो नाही देखे हम,,,,,,,,,,,,!!!”
“हाँ हाँ ठीक है जियादा चिपको नाही बुलाओ ओह्ह का फिर साथ चलते है”,गुड्डू ने कहा
“अब इसे कैसे बुलाये ? जे का नाम भी तो नाही पतो हमे,,,,,,,,,,,,,,,गोलू बड़बड़ाया और फिर इशारे करके कहा,”श्श्श्श श्श्श ए भाऊ भाऊ भाऊ श्श्श श्शश ए”
गुड्डू ने जब सुना तो गोलू के पास आया और उसके सर पर एक चपत लगाकर कहा,”अबे गोलू ! माना ओह्ह्ह की हरकत कुत्तो वाली है तो का अब ऐसे बुलाओगे उसे ?”
“कुत्तो वाली का साला कुत्ता ही है उह्ह्ह तो हा थोड़ा मरियल है पर है तो कुत्ता ही”,गोलू खुद में ही बड़बड़ाया
गुड्डू ने गोलू का कन्धा थपथपाया और कहा,”एक काम करो तुम उसको उठाकर लाओ और दोनों के लिए कुछो आर्डर करो हमहू ज़रा फारिग होकर आते है बहुते जोर की लगी है”
गुड्डू तो चला गया और गोलू ने गर्दन घुमाकर टायर की तरफ देखा तो पाया कुत्ता अभी भी वही पड़ा ऊंघ रहा है। गोलू ने उसकी एक टाँग पकड़कर उसे उठाया और टेबल के पास लाकर कुर्सी के पास बैठा दिया। गुड्डू अभी तक नहीं आया था इसलिए गोलू ने अपने लिए चाय टोस्ट और कुत्ते के लिए एक बिस्किट आर्डर कर दिया।
कुछ देर बाद ही लड़का गोलू के लिए चाय टोस्ट और कुत्ते के लिए बिस्किट रखकर चला गया। गोलू ने बिस्किट का डिब्बा उठाया और फाड़कर कुत्ते के सामने डालकर कहा,”साला का किस्मत पाए हो तुमहू डोगेश भाई साला तुम्हरे लिए भी ऑर्डर करके बिस्कुट मंगवाया जा रहा है,,,,,,,,,,,,गज्जब है गुड्डू भैया भी नहीं , खाओ खाओ”
कुत्ता धीरे धीरे बिस्कुट खाने लगा गोलू ने भी अपना टोस्ट उठाया और चाय में डुबोकर मजे से खाने लगा तब तक गुड्डू भी चला आया और देखा गोलू अकेला बैठा है तो कुर्सी खिसकाकर बैठते हुए कहा,”अबे उह्ह कहा है ?”
“जे है तो बिस्कुट खा रहे है”,गोलू ने टेबल के नीचे जमीन पर बैठे कुत्ते की तरफ इशारा करके कहा
“अबे हम इसकी नहीं मंगल फूफा की बात कर रहे है उह्ह्ह कहा है ?”,गुड्डू ने भड़ककर कहा
गोलू ने सुना तो हैरानी से गुड्डू की तरफ देखा और कहा,”तो मतलब आप इसे लाने को नाही कहे थे ?”
“काहे ? जे हमरा रिश्तेदार लगता है जो हम इसको लाने को कहेंगे ? अबे यार गोलू मतलब बुद्धि बची भी है कि नाही तुम मा ?”,गुड्डू ने झल्लाकर कहा
गोलू ने गुड्डू की बात का जवाब नहीं दिया बल्कि वह झुका और कुत्ते के सामने पड़े बचे बिस्कुट उठाकर कहा,”साला ! तभी मैं सोचु ये अभी तक भोंका काहे नाही,,,,,,,,,हिया बैठकर मंगल फूफा के नाम पर फ़ोकट का बिस्कुट खाय रहा है,,,,,,,,,,,,,,,,चल भाग यहाँ से”
कहते हुए गोलू ने बिस्कुट तो उठाये सो उठाये पैर से उसे साइड भी कर दिया और पहली बार कुत्ता गोलू पर भौंका , गोलू ने उसे घुरा तो इस बार कुत्ता अपनी पूरी जान लगाकर और जोर से भौंका , गोलू का तो हाथ ही उसके सीने पर चल गया जैसे कुत्ते ने उसे माँ बहन की जबरदस्त गाली दी हो।
अब कुत्ता गोलू पर भोंके और गोलू ना भोंके मेरा मतलब चुप रहे ऐसा भला कैसे हो सकता था उसे कुत्ते को मारने के लिए जब कुछ नहीं मिला तो उसने इधर उधर देखा तभी टेबल पर रखी चीनी मिटटी की प्लेट पर उसकी नजर पड़ी गोलू ने उसे उठाया और कुत्ते के पीछे फेंका लेकिन गोलू कुछ करे और गड़बड़ न हो ये भी तो मुमकिन नहीं है प्लेट जाकर लगी गाड़ी के पिछली सीट के शीशे पर जहा मंगल फूफा सो रहे थे और गाड़ी का काच भड़भड़ाकर गिर पड़ा
गुड्डू ने देखा तो बेचारे की जान हलक में अटक गयी और गोलू उठकर भागा , पीछे पीछे गुड्डू भी आया। गोलू ने देखा पिछली सीट का शीशा टूट चुका है और वो मरियल कुत्ता गायब है तो उसने बगल में खड़े गुड्डू की तरफ देखा और अगले ही पल एक गर्म जोरदार थप्पड़ उसके गाल पर आकर लगा और गुड्डू चिल्लाया,”अबे जे का किया ! जे शीशा भी गवा , साला अब का जवाब देंगे हम गाड़ी के मालिक को ?”
शीशा टूटने और शोर होने की वजह से मंगल फूफा को एकदम से होश आ गया। वे उठे और दूसरी तरफ का दरवाजा खोलकर बाहर आये तो देखा गुड्डू गुस्से में खड़ा है और गोलू गाल से हाथ लगाए खड़ा है। मंगल फूफा उन दोनों की तरफ आये और कहा,”अरे तुम दोनों अभी तक झगड़ा ही कर रहे हो , अरे चलो भाई चंदौली भी जाना है”
गुड्डू ने सुना तो मंगल फूफा की तरफ देखा मंगल फूफा को होश में आया देखकर गुड्डू को थोड़ी राहत तो मिली लेकिन जैसे ही गोलू को देखा उसका चेहरा फिर गुस्से से लाल हो गया और गोलू ने घबराकर अपना दूसरा हाथ भी गाल से लगा लिया और कहा,”सॉरी ! वो हमहू कुत्ते की तरफ फेंक रहे थे”
गुड्डू ने एक गहरी साँस ली और खुद को शांत किया तो गोलू को थोड़ी हिम्मत मिली और उसने गुड्डू के पास आकर कहा,”गुड्डू भैया ! टेंशन मत लो गाडी जब वापस करेंगे तब आगे वाले शीशे के साथ जे शीशा भी लगवाय लेंगे”
गुड्डू ने गोलू को घूरकर देखा तो गोलू ने कहा,”पईसा हमाये हिस्से से काट लेना”
“गुड्डू अब जे बेचारा कह रहा है तो मान जाओ ना,,,,,,,,,,,,,!!!”,मंगल फूफा ने गोलू की साइड लेकर कहा तो गुड्डू ने ना चाहते हुए रोआँसा होकर हाँ में गर्दन हिला दी और फिर तीनो टेबल की तरफ बढ़ गए। मंगल फूफा और गोलू तो सुबह से बहुत कुछ खाकर आये थे इसलिए उन्होंने तो अपने लिए चाय बिस्किट मंगवाया और गुड्डू ने अपने लिए पराठा,,,,,,,,,,,,,,तीनो आगे की प्लानिंग करते हुए नाश्ता करने लगे और इस बार गोलू बहुत ध्यान से गुड्डू की बात सुन रहा था।
मिश्रा जी का घर , कानपूर
भुआ के कहने पर लवली उनके और फूफा के लिए दवा ले आया। लवली ने देखा भुआ और फूफा अम्मा के कमरे में है तो वह सीधा वही चला आया और दवा भुआ की तरफ बढाकर कहा,”ल्यो भुआ ! जे एक एक गोली खाय ल्यो”
भुआ ने एक गोली निकालकर फूफा की हथेली पर रही और दूसरे अपने हाथ में लेकर खड़ी हो गयी।
“का रे लवली जे कौनसी गोली लेकर आये हो ! कही जे मा कुछो गड़बड़ तो नाही है ?”,फूफा ने गोली देखकर कहा जो कि दवा जैसी तो बिल्कुल नहीं लग रही थी और इसी बात ने फूफा के मन में शक पैदा कर दिया
“एक काम करो जे गोली हमका दयो , पिताजी ना सही कहते है तुमहू ना फूफा भरोसा करने लायक ही नाही हो। हिया हम सबके खिलाफ जाकर तुम्हरे लिए दवा लेकर आये और साला हमहि पे शक कर रहे हो,,,,,,,,,,,,,जे दवा हमका वापस दयो”,लवली ने नाराज होकर कहा
“अरे खा लीजिये ना , इह का हमसे झूठ बोलेगा,,,,,,,,,,!!”,भुआ ने कहा और अपनी गोली मुँह में रखकर गट गट पानी पी गयी। मरता क्या न करता बार बार वाशरूम में भागने से अच्छा था लवली की बात पर विश्वास करके दवा खा लेना। फूफा ने भी दवा खायी और पानी पी लिया ये देखकर लवली ने कहा,”थोड़ी देर मा आराम आ जायेगा हमहू अब चलते है”
लवली किस आराम की बात कर रहा था ये तो अब अगले भाग में ही पता चलेगा।
( गुड्डू गोलू की किस्मत ही खराब है या फिर ये सब है गोलू के कांडो का नतीजा ? खाना खिलाकर भुआ फूफा का पेट खराब करने के बाद अब लवली कौनसी दवा खिलाने वाला है उन्हें ? क्या चंदौली पहुंचते पहुंचते सही सलामत बच पायेगी गुड्डू की ये भाड़े की गाड़ी ? जानने के लिए पढ़ते रहिये “मनमर्जियाँ सीजन 4” मेरे साथ )
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संजना किरोड़ीवाल


Bichare guddu ki futi kishmat